HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
जैन धर्म त्रिरत्न (तीन रत्न) के रूप में जाने जाने वाले तीन सिद्धांतों की वकालत करता है और बौद्ध धर्म चार आर्य सत्य और अठारह मार्ग का उपदेश देता है। दोनों धर्मों की शिक्षाओं के बीच क्या समानताएं है/हैं?
- यह मानना कि किसी भी वस्तु में आत्मा नहीं है और जीवन प्रतिरूप में यह निर्जीव है
- इस सिद्धांत को स्वीकार किया कि ईश्वर का अस्तित्व है और इसके कई रूप हैं
- सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को प्राप्त करने हेतु अहिंसा और संयम का अभ्यास करना
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: b)
सम्यक ज्ञान (महावीर के अनुसार) इस सिद्धांत की स्वीकृति है कि कोई ईश्वर नहीं है और यह कि दुनिया एक निर्माता के बिना विद्यमान रही है और सभी वस्तुओं में आत्मा
विद्यमान होती है।
बौद्ध धर्म ईश्वर और आत्मा पर किसी भी प्रकार की चर्चा को व्यर्थ मानता है। बुद्ध ने यह भी सिखाया कि आत्मा मौजूद नहीं है, इसलिए इस पर कोई चर्चा नहीं की जा सकती है।
सम्यक आचरण (जैन धर्म) पांच महाव्रत के पालन को संदर्भित करता है जैसे कि जीवन को नुकसान न पहुँचाना, झूठ नहीं बोलना, चोरी नहीं करना, संपत्ति अर्जित नहीं करना और अनैतिक जीवन व्यतीत नहीं करना।
बौद्ध धर्म भी अपने भिक्षुओं को संपत्ति प्राप्त करने से रोकता है (जो भिक्षुओं और ननों में अहंकार की भावना को उत्पन्न कर सकता है)।
केवल जैन धर्म अत्यधिक तपस्या की वकालत करता है, बौद्ध धर्म संयम का उपदेश देता है।
Incorrect
उत्तर: b)
सम्यक ज्ञान (महावीर के अनुसार) इस सिद्धांत की स्वीकृति है कि कोई ईश्वर नहीं है और यह कि दुनिया एक निर्माता के बिना विद्यमान रही है और सभी वस्तुओं में आत्मा
विद्यमान होती है।
बौद्ध धर्म ईश्वर और आत्मा पर किसी भी प्रकार की चर्चा को व्यर्थ मानता है। बुद्ध ने यह भी सिखाया कि आत्मा मौजूद नहीं है, इसलिए इस पर कोई चर्चा नहीं की जा सकती है।
सम्यक आचरण (जैन धर्म) पांच महाव्रत के पालन को संदर्भित करता है जैसे कि जीवन को नुकसान न पहुँचाना, झूठ नहीं बोलना, चोरी नहीं करना, संपत्ति अर्जित नहीं करना और अनैतिक जीवन व्यतीत नहीं करना।
बौद्ध धर्म भी अपने भिक्षुओं को संपत्ति प्राप्त करने से रोकता है (जो भिक्षुओं और ननों में अहंकार की भावना को उत्पन्न कर सकता है)।
केवल जैन धर्म अत्यधिक तपस्या की वकालत करता है, बौद्ध धर्म संयम का उपदेश देता है।
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Question 2 of 5
2. Question
गांधार शैली और मथुरा शैली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- गांधार शैली की उत्पत्ति इंडो-ग्रीक शासकों के दौरान हुई थी।
- मथुरा शैली में बुद्ध और शिव तथा विष्णु के साथ-साथ पार्वती और लक्ष्मी की छवियों को उकेरा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
गांधार शैली की उत्पत्ति इंडो-ग्रीक शासकों के शासनकाल के दौरान हुई थी, लेकिन कला की इस शैली के वास्तविक संरक्षक शक और कुषाण, विशेष रूप से कनिष्क थे। इसमें बुद्ध के जन्म, उनके त्याग और उनके उपदेश को दर्शाया गया है।
मथुरा शैली का विकास स्वदेशी रूप से हुआ था। मथुरा शैली में बुद्ध और शिव तथा विष्णु के साथ-साथ पार्वती और लक्ष्मी की छवियों को उकेरा गया है।
Incorrect
उत्तर: a)
गांधार शैली की उत्पत्ति इंडो-ग्रीक शासकों के शासनकाल के दौरान हुई थी, लेकिन कला की इस शैली के वास्तविक संरक्षक शक और कुषाण, विशेष रूप से कनिष्क थे। इसमें बुद्ध के जन्म, उनके त्याग और उनके उपदेश को दर्शाया गया है।
मथुरा शैली का विकास स्वदेशी रूप से हुआ था। मथुरा शैली में बुद्ध और शिव तथा विष्णु के साथ-साथ पार्वती और लक्ष्मी की छवियों को उकेरा गया है।
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Question 3 of 5
3. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- मंदिर परिसर को “विदर्भ के खजुराहो” के रूप में जाना जाता है।
- यह मंदिर मंदिर वास्तुकला की नागर शैली से संबंधित हैं।
- मंदिरों का संबंध शैव, वैष्णव और शक से है।
उपर्युक्त कथन संबंधित हैं
Correct
उत्तर: d)
“विदर्भ के खजुराहो” के रूप में प्रचलित मार्कंडेश्वर मंदिर परिसर महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली में वैनगंगा नदी के तट पर स्थित है।
यह मंदिर उत्तर भारत के मंदिरों के नागर समूह से संबंधित हैं।
शैलीगत आधार पर, इस्नका निर्माण 9-12वीं शताब्दी के बीच किया गया था।
मंदिर शैव, वैष्णव और शक आस्था से संबंधित हैं। अधिकांश मंदिरों का निर्माण एक सरल सतह पर किया गया है, जिसमें अर्धमंडप, मंडप, अंतराखंड गर्भगृह निर्मित है जो संपूर्ण मंदिर के घटक हैं।
Incorrect
उत्तर: d)
“विदर्भ के खजुराहो” के रूप में प्रचलित मार्कंडेश्वर मंदिर परिसर महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली में वैनगंगा नदी के तट पर स्थित है।
यह मंदिर उत्तर भारत के मंदिरों के नागर समूह से संबंधित हैं।
शैलीगत आधार पर, इस्नका निर्माण 9-12वीं शताब्दी के बीच किया गया था।
मंदिर शैव, वैष्णव और शक आस्था से संबंधित हैं। अधिकांश मंदिरों का निर्माण एक सरल सतह पर किया गया है, जिसमें अर्धमंडप, मंडप, अंतराखंड गर्भगृह निर्मित है जो संपूर्ण मंदिर के घटक हैं।
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Question 4 of 5
4. Question
सूफीवाद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- सूफियों का मानना था कि मनुष्य को अलग तरीके से विश्व को देखने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है।
- सूफीवाद निर्गुण भक्ति की तुलना में सगुण भक्ति के अधिक निकट था
- ज़िक्र एक नाम या पवित्र सूत्र के जप को संदर्भित करता है
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
नाथपंथियों, सिद्धों और योगियों की तरह, सूफ़ियों का भी मानना था कि दुनिया को एक अलग तरीके से देखने के लिए मनुष्य को प्रशिक्षित किया जा सकता है। उन्होंने मास्टर या पीर के मार्गदर्शन में ज़िक्र (नाम या पवित्र सूत्र का जप), चिंतन, सामा (गायन), राक्स (नृत्य), कहावतो की चर्चा, श्वास नियंत्रण आदि का उपयोग करके प्रशिक्षण के विस्तृत तरीके विकसित किए।
सूफी मत, सगुण भक्ति की तुलना में निर्गुण भक्ति के अधिक निकट था।
Incorrect
उत्तर: c)
नाथपंथियों, सिद्धों और योगियों की तरह, सूफ़ियों का भी मानना था कि दुनिया को एक अलग तरीके से देखने के लिए मनुष्य को प्रशिक्षित किया जा सकता है। उन्होंने मास्टर या पीर के मार्गदर्शन में ज़िक्र (नाम या पवित्र सूत्र का जप), चिंतन, सामा (गायन), राक्स (नृत्य), कहावतो की चर्चा, श्वास नियंत्रण आदि का उपयोग करके प्रशिक्षण के विस्तृत तरीके विकसित किए।
सूफी मत, सगुण भक्ति की तुलना में निर्गुण भक्ति के अधिक निकट था।
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Question 5 of 5
5. Question
भारत के कला और पुरातात्विक इतिहास के संदर्भ में, अशोक के शासनकाल से निम्नलिखित में से कौन-से संबंध हैं?
- धौली में रॉक-कट हाथी
- बादामी गुफाएं
- लोमश ऋषि गुफाएँ
- उदयगिरी गुफाएँ
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: b)
लोमश ऋषि की गुफाएं: ये बिहार में जहानाबाद जिले के बरबार और नागार्जुन पहाड़ियों में स्थित है, इस रॉक-कट गुफा को एक शरण स्थल (मानव निर्मित) के रूप में बनाया गया था। इसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के अशोक के काल के दौरान बनाया गया था, जो कि आजीविका की पवित्र वास्तुकला का भाग थी।
धौली में रॉक-कट हाथी को अशोक के शासनकाल (272-231 ईसा पूर्व) के दौरान बनाया गया था। यह ओडिशा की सबसे पुरानी बौद्ध मूर्ति है।
उदयगिरि गुफाएं: यह एक हिंदू गुफा है और गुप्त शासनकाल के दौरान बनाई गई थी। इसमें प्रसिद्ध वराह मूर्तिकला मौजूद है।
बादामी गुफा मंदिर भारत के कर्नाटक के उत्तरी भाग में बगलकोट जिले में स्थित हिंदू और जैन गुफा मंदिरों का एक परिसर है। इन गुफाओं को भारतीय रॉक-कट वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है, विशेष रूप से बादामी चालुक्य वास्तुकला, जो 6वीं शताब्दी से संबंधित है।
Incorrect
उत्तर: b)
लोमश ऋषि की गुफाएं: ये बिहार में जहानाबाद जिले के बरबार और नागार्जुन पहाड़ियों में स्थित है, इस रॉक-कट गुफा को एक शरण स्थल (मानव निर्मित) के रूप में बनाया गया था। इसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के अशोक के काल के दौरान बनाया गया था, जो कि आजीविका की पवित्र वास्तुकला का भाग थी।
धौली में रॉक-कट हाथी को अशोक के शासनकाल (272-231 ईसा पूर्व) के दौरान बनाया गया था। यह ओडिशा की सबसे पुरानी बौद्ध मूर्ति है।
उदयगिरि गुफाएं: यह एक हिंदू गुफा है और गुप्त शासनकाल के दौरान बनाई गई थी। इसमें प्रसिद्ध वराह मूर्तिकला मौजूद है।
बादामी गुफा मंदिर भारत के कर्नाटक के उत्तरी भाग में बगलकोट जिले में स्थित हिंदू और जैन गुफा मंदिरों का एक परिसर है। इन गुफाओं को भारतीय रॉक-कट वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है, विशेष रूप से बादामी चालुक्य वास्तुकला, जो 6वीं शताब्दी से संबंधित है।
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