विषयसूची
सामान्य अध्ययन-II
1. भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड
2. फिनलैंड और स्वीडन की NATO सदस्यता
सामान्य अध्ययन-III
1. रूसी अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ को लेकर धमकी
2. डिजिटल ऋण और संबंधित मुद्दे
3. अनुसूचित जाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
1. इमनाती चक्रवात
2. आर्म्ड फोर्सेज प्रीपेरटरी स्कूल
3. ECGC लिमिटेड
4. ‘भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी’ अभियान
सामान्य अध्ययन-II
विषय: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड
(Bhakra Beas Management Board)
संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा ‘भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड’ (Bhakra Beas Management Board –BBMB) में सदस्यों की नियुक्ति संबंधी नियमों में संशोधन किया गया गया है। अब तक ‘भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड नियम’ 1974 के अनुसार- BBMB में विद्युत् सदस्य की नियुक्ति पंजाब से तथा सिंचाई सदस्य की नियुक्ति हरियाणा से की जाती थी। 2022 में किए गए संशोधनों के तहत, इन दोनों नियुक्तियों को केवल दो राज्यों से भरे जाने की अनिवार्य शर्त को हटा दिया गया है।
नवीनतम परिवर्तन:
- विद्युत् सदस्य और सिंचाई सदस्य के पदों पर अब तक क्रमशः पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों की नियुक्तियां की जाती थी।
- विद्युत मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए नियमों के तहत, इन पदों पर अन्य राज्यों के अधिकारी भी नियुक्त किए जाने के पात्र होंगे।
- संबंधित राज्यों द्वारा विद्युत मंत्रालय को भेजे गए इंजीनियरों के एक पैनल से चयन करने के बाद केंद्र सरकार द्वारा दो सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी।
आलोचनाएं:
- नियमों में किए गए परिवर्तनों से एक विवाद उत्पन्न हो गया है। हितधारकों का एक वर्ग दावे के साथ कहा रहा है, कि नए मानदंडों के लागू होने के बाद, BBMB में पंजाब के उम्मीदवारों का चयन होना मुश्किल हो जाएगा।
- बोर्ड के कुछ कर्मचारियों द्वारा यह भी कहा जा रहा है, कि चूंकि यह संगठन अर्थात BBMB उपरोक्त राज्यों में जल प्रबंधन से संबंधित है, इसलिए बोर्ड के पूर्णकालिक सदस्यों को इन राज्यों से ही लिया जाना चाहिए क्योंकि उन्हें स्थानीय मुद्दों और तकनीकी की बेहतर समझ होगी।
राज्यों के बीच बटवारा:
1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद, पंजाब और हरियाणा को BBMB से संबंधित विद्युत् परियोजनाओं में 58:42 के अनुपात में हिस्सा आवंटित किया गया था। बाद में राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ को भी इन परियोजनाओं में हिस्सा दिया गया।
‘भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड’ के बारे में:
1 नवंबर, 1966 को तत्कालीन पंजाब राज्य के पुनर्गठन के समय, ‘पंजाब पुनर्गठन अधिनियम’, 1966 की धारा 79 के तहत ‘भाखड़ा प्रबंधन बोर्ड’ (BMB) का गठन किया गया था।
- भाखड़ा नंगल परियोजना का प्रशासन, अनुरक्षण एवं परिचालन का दायित्व 1 अक्तूबर, 1967 से ‘भाखड़ा प्रबंधन बोर्ड’ सौंप दिया गया।
- ब्यास परियोजना का कार्य पूर्ण होने पर भारत सरकार द्वारा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 80 के अनुसार ‘ब्यास निर्माण बोर्ड’ (Beas Construction Board – BCB) को ‘भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड’ में स्थानांतरित कर दिया गया।
- जिसके अनुसार 15 मई 1976 से ‘भाखड़ा प्रबन्ध बोर्ड’ का नाम बदलकर ‘भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड’ (BBMB) कर दिया गया।
- तब से, ‘भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड’ राष्ट्र की सेवा में समर्पित है तथा भाखड़ा नंगल तथा ब्यास परियोजनाओं से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा चण्डीगढ़ को जल तथा विद्युत विनियम के निर्बाध वितरण के लिए प्रतिबद्व है ।
- यह एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।
कार्य:
- पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान राज्यों के लिए सतलुज, रावी तथा ब्यास से जल आपूर्ति का नियमन।
- भाखड़ा नंगल एवं ब्यास परियोजनाओं से उत्पादित विद्युत की आपूर्ति एवं नियमन।
- बीबीएमबी प्रणाली के भीतर तथा बाहर नई जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण।
भाखड़ा नांगल बांध का इतिहास:
- भाखड़ा-नंगल बांध, भारत की आजादी के बाद शुरू की गई सबसे आरंभिक नदी घाटी विकास योजनाओं में से एक है।
- इस परियोजना पर नवंबर 1944 में तत्कालीन पंजाब के राजस्व मंत्री सर छोटू राम तथा बिलासपुर के राजा ने हस्ताक्षर किए थे और 8 जनवरी, 1945 को इसे अंतिम रूप दिया गया था।
- इस बहुउद्देशीय बांध का निर्माण शुरू में पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर ‘सर लुइस डेन’ (Sir Louis Dane) द्वारा शुरू किया गया था।
- लेकिन, देश में तात्कालिक घटनाओं की वजह से निर्माण कार्य में देरी हुई और स्वतंत्रता के बाद, परियोजना को मुख्य वास्तुकार राय बहादुर कुंवर सेन गुप्ता के नेतृत्व में फिर से शुरू किया गया।
- भाखड़ा-नंगल बांध, 1963 में बनकर तैयार हुआ था, और इसे प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था।
बांध की विशेषताएं:
भाखड़ा-नंगल बांध, सतलुज नदी पर बना है।
- इस बाँध की ऊंचाई लगभग 26 मीटर है और यह टिहरी बांध (ऊंचाई लगभग 261 मीटर) के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध है। टिहरी बांध भी भारत में उत्तराखंड राज्य में स्थित है।
- भाखड़ा-नंगल बांध के ‘गोबिंद सागर जलाशय’ में 34 बिलियन क्यूबिक मीटर तक जल का भंडार करने की क्षमता है।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।
फिनलैंड और स्वीडन की NATO सदस्यता
संदर्भ:
रूस द्वारा ‘फिनलैंड’ और ‘स्वीडन’ को संभावित रूप से NATO की सदस्यता ग्रहण करने के “गंभीर सैन्य-राजनीतिक परिणाम” होने की चेतवानी दी गयी है, जिसे इन दोनों देशों ने खारिज कर दिया है।
हालांकि, रूस ने इसे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके कुछ सहयोगियों द्वारा फिनलैंड और स्वीडन को नाटो में “खींचने” का प्रयास बताते हुए चिंता व्यक्त की है और चेतावनी दी है कि अगर ये दोनों देश ‘नाटो गठबंधन’ में शामिल होते हैं तो मास्को को जवाबी कार्रवाई करने पर विवश होना पड़ेगा।
रूस क्या चाहता है?
व्लादिमीर पुतिन द्वार पूर्वी यूक्रेन में अपना छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) शुरू करने और क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद से, रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही है।
- प्रत्युत्तर में, NATO ने रूसी आक्रमण के प्रति संवेदनशील देशों में सहायता के लिए अपनी सेनाएं भेजी गयी हैं।
- दिसंबर में, मास्को ने दो दस्तावेजों- अमेरिका के साथ एक प्रस्तावित संधि, और नाटो के साथ एक समझौता – में अपनी सुरक्षा मांगों को सबके सामने रखा।
- मुख्य रूप से, रूस अब NATO द्वारा पूर्व की ओर अपने विस्तार पर रोक लगाने, यूक्रेन और अन्य पूर्व सोवियत देशों को सदस्यता देने से मना करने तथा मध्य एवं पूर्वी यूरोप में अपनी सैन्य तैनाती को हटाने की गारंटी चाहता है।
NATO के साथ रूस के विवाद का स्रोत:
- रूसी नेता लंबे समय से, खासकर 1990 के दशक के अंत में (चेक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड) और 2000 के दशक की शुरुआत में (बुल्गारिया, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया) पूर्ववर्ती वारसॉ संधि राष्ट्रों तथा पूर्व सोवियत गणराज्यों के लिए के लिए नाटो गठबंधन द्वारा अपने दरवाजे खोलने के बाद, NATO के पूर्व की ओर विस्तार को लेकर सतर्क रहते हैं।
- 2000 के दशक के अंत में NATO द्वारा भविष्य में जॉर्जिया और यूक्रेन को अपने गठबंधन में शामिल करने के अपने इरादे की घोषणा के बाद से रूसी नेताओं का यह भय और बढ़ गया।
वर्तमान में रूस की NATO और संयुक्त राज्य अमेरिका से मांग:
रूस द्वारा दो समझौते ड्राफ्ट प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमे क्रमशः संयुक्त राज्य अमेरिका और नाटो से स्पष्ट, कानूनी रूप से बाध्यकारी सुरक्षा गारंटी की मांग की गयी है:
- इन ड्राफ्ट्स में NATO को पूर्व की ओर किए जा रहे विस्तार को समाप्त करने तथा विशेष रूप से, यूक्रेन जैसे पूर्ववर्ती सोवियत संघ के देशों को भविष्य में सदस्यता देने से इंकार करने की मांग की गयी है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका को पूर्ववर्ती सोवियत संघ के देशों के साथ सैन्य सहयोग करने अथवा इन देशों में अपना बेस बनाने से रोकने की मांग भी की गयी है।
- इन दस्तावेजों में दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को उनकी राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर के क्षेत्रों में सैन्य परिसंपत्तियां तैनात करने से रोकने का उल्लेख किया गया है, इस प्रकार की तैनाती को “किसी दूसरे पक्ष द्वारा अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जा सकता है”।
इंस्टा जिज्ञासु:
फिनलैंड और रूस के मध्य 1,340 किलोमीटर (830 मील) की स्थलीय सीमा है, जोकि किसी भी यूरोपीय संघ के सदस्य देश और रूस में मध्य साझा की जाने वाली सबसे लंबी सीमा है।
प्रीलिम्स लिंक:
- NATO के बारे में
- फिनलैंड
- रूस और उसकी सीमा
- अमेरिका और नाटो
स्रोत: द हिंदू।
सामान्य अध्ययन-III
विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
रूसी अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ को लेकर धमकी
संदर्भ:
वर्तमान में जारी युद्ध के बीच, रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने धमकी देते हुए कहा है, रूस, अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के प्रत्युत्तर में ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) को अंतरिक्ष में गिरने से रोकने में अपनी भूमिका को समाप्त कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप आईएसएस अंतरिक्ष से नीचे गिर जाएगा।
अंतरिक्ष स्टेशन को इस प्रकार की कार्यवाहियों से किस प्रकार बचाया जाता है?
अंतरिक्ष स्टेशन, ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अंतर सरकारी समझौते’ (International Space Station Intergovernmental Agreement) द्वारा शासित होता है।
- इस समझौते पर ‘अंतरिक्ष स्टेशन परियोजना’ में शामिल पंद्रह राष्ट्रों की सरकारों द्वारा 29 जनवरी 1998 को हस्ताक्षर किए गए थे।
- समझौते में, स्थायी रूप से आबाद ‘नागरिक अंतरिक्ष स्टेशन’ के विस्तृत डिजाइन, विकास, संचालन और उपयोग हेतु वास्तविक साझेदारी के आधार पर शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए एक दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय सहकारी फ्रेमवर्क स्थापित किया गया है।
‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ पर अधिकार:
अंतर-सरकारी समझौता में, अंतरिक्ष स्टेशन के भागीदार राष्ट्रों को बाहरी अंतरिक्ष में अपने ‘राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र’ का विस्तार करने का अधिकार दिया गया है, और इनके द्वारा प्रदान किए गए तत्वों (जैसे प्रयोगशालाएं) को भागीदार देशों के क्षेत्रों में समाहित कर दिया जाता है।
- समझौते का मूल नियम यह है, कि ‘प्रत्येक भागीदार देश अपने द्वारा पंजीकृत तत्वों (Elements) पर अधिकार क्षेत्र और नियंत्रण बनाए रखेगा, और अंतरिक्ष स्टेशन में या तत्वों पर तैनात अपने देश के नागरिक कर्मियों पर नियंत्रण रखेगा’ (अंतर सरकारी समझौते का अनुच्छेद 5)।
- इसका अर्थ है, कि अंतरिक्ष स्टेशन के अधिकारी / मालिक – संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूरोप के भागीदार देश, जापान और कनाडा – अपने द्वारा प्रदान किए जाने वाले संबंधित तत्वों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं।
कुछ गलत होने पर उत्तरदायित्व:
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कानूनी फ्रेमवर्क के तहत अंतरिक्ष गतिविधियों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून संधियों, जैसे कि ‘देयता अभिसमय’ (Liability Convention –1972) में निर्धारित ‘मूल दायित्व नियमों’ को मान्यता प्रदान की गयी है।
- अंतर सरकारी समझौते में, ‘क्रॉस वेवर ऑफ़ लायबिलिटी’ (Cross-Waiver of Liability) का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत पांचो भागीदारों अथवा उनकी संबंधित संस्थाओं (ठेकेदार, उप-ठेकेदार, उपयोगकर्ता, ग्राहक) में से किसी को भी, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की गतिविधियों का परिणामस्वरूप होने वाले नुकसान के लिए, किसी अन्य भागीदार (या उससे संबंधित संस्थाओं) के खिलाफ दावा करने पर रोक लगायी गयी है (अंतर सरकारी समझौते का अनुच्छेद 16)।
- अंतरिक्ष स्टेशन के प्रत्येक भागीदार को, अपने स्वयं के ठेकेदारों और उप-ठेकेदारों के साथ अनुबंधों में इस दायित्व को लागू करना आवश्यक होता है।
इस संबंध में अन्य अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून संधियाँ एवं सिद्धांत:
‘बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी समिति’ (Committee on the Peaceful Uses of Outer Space), अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून को विकसित करने हेतु एक प्रमुख मंच है।
समिति द्वारा अंतरिक्ष से संबंधित गतिविधियों पर ‘पांच अंतरराष्ट्रीय संधियों और सिद्धांतों’ के पांच सेट निर्धारित किए गए हैं। इनमे शामिल है:
- “बाह्य अंतरिक्ष संधि” (Outer Space Treaty)
- “बचाव समझौता” (Rescue Agreement)
- “देयता अभिसमय” (Liability Convention)
- “पंजीकरण अभिसमय “( Registration Convention)
- “चंद्रमा समझौता” (Moon Agreement)
पांच घोषणाएं और कानूनी सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
- “कानूनी सिद्धांतों की घोषणा” (Declaration of Legal Principles)
- “प्रसारण सिद्धांत” (Broadcasting Principles)
- “रिमोट सेंसिंग सिद्धांत” (Remote Sensing Principles)
- “परमाणु ऊर्जा स्रोत” सिद्धांत (‘Nuclear Power Sources’ Principles)
- “लाभ घोषणा”( Benefits Declaration)
अन्य अंतरिक्ष स्टेशन:
- वर्तमान में, अंतरिक्षीय कक्षा में एकमात्र अंतरिक्ष स्टेशन, ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) कार्यरत है। आईएसएस, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा का अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रोजेक्ट है।
- चीन द्वारा अब तक ‘तिआनगोंग-1’ और ‘तिआनगोंग-2’ नामक दो परीक्षण अंतरिक्ष स्टेशनों को अंतरिक्षीय कक्षा में भेजा जा चुका है।
महत्व:
- ‘अंतरिक्ष स्टेशन’, विशेष रूप से जैविक प्रयोगों के लिए सार्थक वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने हेतु आवश्यक होते हैं।
- ‘अंतरिक्ष स्टेशन’, अन्य अंतरिक्ष वाहनों पर उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों की तुलना में अधिक संख्या में और लंबे समय तक वैज्ञानिक अध्ययन के लिए प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करते हैं।
- चालक दल का प्रत्येक सदस्य, अंतरिक्ष स्टेशन पर हफ्तों या महीनों तक रहता है, लेकिन उसके अंतरिक्ष में निवास की अवधि प्रायः एक वर्ष से अधिक नहीं होती है।
- अंतरिक्ष स्टेशनों का उपयोग, मानव शरीर पर लंबी अवधि की अंतरिक्ष उड़ान के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए भी किया जाता है।
इंस्टा जिज्ञासु:
मोलनिया कक्षा (Molniya orbit) क्या है?
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) के बारे में
- आईएसएस में शामिल देश
- उद्देश्य
- पिछले अंतरिक्ष स्टेशन
मेंस लिंक:
अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक टिप्पणी लिखिए।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।
डिजिटल ऋण एवं संबंधित मुद्दे
(Digital lending and issues associated)
संदर्भ:
पिछले हफ्ते, रिजर्व बैंक द्वारा ‘पीसी फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’, नई दिल्ली को जारी किए गए ‘पंजीकरण प्रमाणपत्र’ (Certificate of Registration – CoR) को रद्द कर दिया गया। यह फर्म मुख्यतः ‘कैशबीन’ (CASHBEAN) नामक ऐप के माध्यम से मोबाइल ऐप-आधारित ऋण-संचालन कार्यों में लगी हुई थी।
‘पीसी फाइनेंशियल’ का लाइसेंस रद्द किए जाने का कारण:
- आरबीआई के अनुसार, आउटसोर्सिंग और ‘अपने ग्राहक को जानों’ (Knowing Your Customer) संबंधी मानदंडों पर आरबीआई के निर्देशों का घोर उल्लंघन जैसी पर्यवेक्षी चिंताओं के कारण कंपनी के ‘पंजीकरण प्रमाणपत्र’ (CoR) को रद्द कर दिया गया है।
- इस कंपनी को ‘उचित प्रक्रिया संहिता’ का उल्लंघन करते हुए अपने ऋणकर्ताओं से ब्याज की अत्यधिक दरों और अन्य शुल्कों को अपारदर्शी तरीके से वसूल करने, तथा ऋणकर्ताओं से वसूली करने के लिए आरबीआई और केंद्रीय जांच ब्यूरो के ‘प्रतीकों’ (Logos) का अनधिकृत उपयोग करने में लिप्त पाया गया था।
वर्तमान चिंताएं:
- नवंबर 2021 में जारी ‘डिजिटल ऋण’ के विनियमन हेतु गठित भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यकारी समूह (Reserve Bank of India Working Group (WG) on digital lending) के निष्कर्षों के अनुसार, वर्तमान में 80 एप्लिकेशन स्टोर में भारतीय एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं के लिए उधार देने वाले 1100 ऐप्स उपलब्ध हैं, जिनमे से 600 ऐप्स अवैध हैं।
- और जैसे-जैसे उधार देने वाले ऐप्स की संख्या बढ़ती जाती है, अवैध ऐप्स की संख्या भी बढ़ जाती है, क्योंकि एक ऋण-प्रदाता ऐप डाउनलोड करने वाला उपयोगकर्ता यह नहीं पहचान सकता है कि वह ऐप वैध है या नहीं।
- इसके अलावा कई नकलची ऐप्स और वेबसाइटों के इंटरनेट पर पनपने की भी संभावना है।
- इस प्रकार की अवैध ऐप्स, उपयोगकर्ता की निजी पहचान योग्य जानकारी (Personally Identifiable Information), वित्तीय डेटा और अन्य संवेदनशील विवरण एकत्र कर सकती है, जिसका उपयोग उपयोगकर्ता के खातों से छेड़छाड़ करने, फ़िशिंग हमलों और ‘पहचान चोरी’ (Identity Theft) को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है।
आरबीआई पैनल की सिफारिशें:
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऋण देने सहित ‘डिजिटल ऋण’ के विनियमन हेतु गठित भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यकारी समूह (Reserve Bank of India Working Group (WG) on digital lending) द्वारा नवम्बर 2021 अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की गयी थी।
प्रमुख सिफारिशें:
- इस प्रकार के ऋणों की निगरानी के लिए एक अलग कानून बनाया जाना चाहिए।
- डिजिटल ऋण प्रदान करने वाली एप्लीकेशंस (Digital Lending Apps) जांच के लिए एक नोडल एजेंसी की जाए।
- डिजिटल ऋण पारितंत्र में में प्रतिभागियों के लिए एक ‘स्व-नियामक संगठन’ स्थापित किया जाना चाहिए।
- कुछ आधारभूत प्रौद्योगिकी मानकों का विकास, एवं डिजिटल ऋण समाधान को प्रस्तुत करने के लिए पूर्व शर्त के रूप में उन मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
- ऋणों का संवितरण सीधे उधारकर्ताओं के बैंक खातों में किया जाना चाहिए और ऋणों का संवितरण एवं सर्विसिंग केवल डिजिटल ऋणदाताओं के बैंक खातों के माध्यम से की जानी चाहिए।
- सत्यापन योग्य ऑडिट ट्रेल्स के साथ उधारकर्ताओं की पूर्व और स्पष्ट सहमति के साथ डेटा संग्रह किया जाए और सभी डेटा भारत में स्थित सर्वरों में संग्रहीत किया जाना चाहिए।
डिजिटल ऋण के लाभ:
- डिजिटल उधार में, वित्तीय उत्पादों और सेवाओं तक अधिक निष्पक्ष, कुशल और समावेशी पहुँच बनाने की क्षमता है।
- फिनटेक के नेतृत्व में यह नवाचार, कुछ साल पहले गौण सहायक भूमिका से आगे बढ़कर, अब वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के डिजाइन, मूल्य निर्धारण और वितरण के लिए मूल भूमिका निभा रहा है।
समय की मांग:
नियामक संस्थाओं द्वारा, डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, गोपनीयता और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, इस नवाचार का समर्थन करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण का पालन करने की आवश्यकता है।
डिजिटल ऋण देने वाले ऐप्स से संबंधित मुद्दे
- ये ऋणकर्ताओं को शीघ्र और परेशानी मुक्त तरीके से ऋण देने का वादा करते हैं।
- लेकिन, बाद में ऋणकर्ताओं से ब्याज की अत्याधिक दरों और छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क की मांग की जाती है।
- इस तरह के प्लेटफॉर्म ऋणों की बसूली के लिए अमान्य और कठोर विधियाँ अपनाते हैं।
- ये ऋणकर्ताओं के मोबाइल फोन डेटा का उपयोग करने संबंधी समझौतों का दुरुपयोग करते हैं।
स्रोत: द हिंदू।
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
अनुसूचित जाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम
(The Scheduled Tribes and Other Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights)
संदर्भ:
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, राज्य द्वारा ‘वन अधिकार अधिनियम’ (FRA), 2006 की धारा 3 (1) के तहत दायर 164 दावों और धारा 3 (2) के तहत दर्ज 1,811 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
वन अधिकार अधिनियम (FRA) के बारे में:
‘अनुसूचित जाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006’ (The Scheduled Tribes and Other Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006), जिसे ‘वन अधिकार अधिनियम’ (Forest Rights Acts – FRA) भी कहा जाता है, वर्ष 2006 में पारित किया गया था। यह अधिनियम पारंपरिक वन वासी समुदायों के अधिकारों को कानूनी मान्यता प्रदान करता है।
अधिनियम के तहत अधिकार:
- स्वामित्व अधिकार – वनवासियों अथवा आदिवासियों द्वारा 13 दिसंबर 2005 तक कृषि की जाने वाली भूमि पर, जो कि 4 हेक्टेयर से अधिक नहीं होनी चाहिए, उक्त तारीख तक वास्तव में कृषि करने वाले संबंधित परिवार को स्वामित्व अधिकार प्रदान किए जाएंगे। अर्थात, कोई अन्य नयी भूमि प्रदान नहीं की जाएगी।
- अधिकारों का उपयोग- वनवासियों अथवा आदिवासियों के लिए, लघु वन उपज (स्वामित्व सहित), चारागाह क्षेत्र, तथा पशुचारक मार्ग संबंधी अधिकार उपलब्ध होंगे।
- राहत और विकास अधिकार – वनवासियों अथवा आदिवासियों के लिए अवैध निकासी या बलपूर्वक विस्थापन के मामले में पुनर्वास का अधिकार तथा वन संरक्षण हेतु प्रतिबंधों के अधीन बुनियादी सुविधाओं का अधिकार प्राप्त होगा।
- वन प्रबंधन अधिकार – जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करने संबधी अधिकार होंगे।
पात्रता मापदंड:
वन अधिकार अधिनियम (FRA) की धारा 2(c) के अनुसार, वनवासी अनुसूचित जनजाति (Forest Dwelling Scheduled Tribe – FDST) के रूप में अर्हता प्राप्त करने और FRA के तहत अधिकारों की मान्यता हेतु पात्र होने के लिए, आवेदक द्वारा निम्नलिखित तीन शर्तों को पूरा किया जाना आवश्यक है।
व्यक्ति अथवा समुदाय:
- अधिकार का दावा किये जाने वाले क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति का सदस्य होना चाहिए;
- 13-12-2005 से पहले मूल रूप से वन अथवा वन भूमि का निवासी होना चाहिए;
- आजीविका हेतु वास्तविक रूप से वन अथवा वन भूमि पर निर्भर होना चाहिए।
तथा, अन्य पारंपरिक वनवासियों (Other Traditional Forest Dweller – OTFD) के रूप में अर्हता प्राप्त करने और FRA के तहत अधिकारों की मान्यता हेतु पात्र होने के लिए, निम्नलिखित दो शर्तों को पूरा करना आवश्यक है:
व्यक्ति अथवा समुदाय:
- जो 13 दिसम्बर, 2005 से पूर्व कम से कम तीन पीढि़यों (75 वर्ष) तक मूल रूप से वन या वन भूमि में निवास करता हो।
- आजीविका हेतु वास्तविक रूप से वन अथवा वन भूमि पर निर्भर हो।
अधिकारों को मान्यता देने संबंधी प्रक्रिया:
- प्रक्रिया के आरंभ में, ग्राम सभा द्वारा एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा, जिसमे यह सिफारिश की जाएगी कि, किस व्यक्ति को किस संसाधन पर अधिकार को मान्यता दी जानी चाहिए।
- इसके बाद, प्रस्ताव का उप-मंडल (या तालुका) के स्तर पर और फिर जिला स्तर पर, अनुवीक्षण और अनुमोदन किया जाता है।
अनुवीक्षण समिति (Screening Committee) में तीन सरकारी अधिकारी (वन, राजस्व और आदिवासी कल्याण विभाग) और संबंधित स्तर पर स्थानीय निकाय के तीन निर्वाचित सदस्य होते हैं। ये समितियां अपील पर सुनवाई भी करती हैं।
इंस्टा जिज्ञासु:
क्या आप वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत परिभाषित ‘संकटपूर्ण वन्यजीव आवासों’ के बारे में जानते हैं जिन्हें किया गया है?
प्रीलिम्स लिंक:
- पांचवी अनुसूची के तहत क्षेत्रों को सम्मिलित करने अथवा बहिष्कृत करने की शक्ति
- अनुसूचित क्षेत्र क्या होते हैं?
- वन अधिकार अधिनियम- प्रमुख प्रावधान
- इस अधिनियम के तहत अधिकार
- पात्रता मानदंड
- इन अधिकारों को मान्यता देने में ग्राम सभा की भूमिका
- ‘संकटपूर्ण वन्यजीव वास स्थल’ क्या होते हैं?
स्रोत: द हिंदू।
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
इमनाती चक्रवात
(Cyclone Emnati)
- इमनाती चक्रवात (Cyclone Emnati) ने वर्तमान में ‘मेडागास्कर’ पर कहर बरपा रखा है।
- इमनाती, इस वर्ष चरम मौसम की पांचवीं घटना है। इसके अलावा एक महीने में मेडागास्कर में आने वाला चौथा उष्णकटिबंधीय तूफान है। मेडागास्कर में इसके पहले आने वाले उष्णकटिबंधीय तूफानों के नाम अना, बत्सिराई तथा डुमाको थे।
आर्म्ड फोर्सेज प्रीपेरटरी स्कूल
‘आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी स्कूल’, दिल्ली सरकार द्वारा अपने 2021 के ‘देशभक्ति बजट’ में घोषित परियोजनाओं का एक भाग है।
- उद्देश्य: छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और अन्य सेवाओं में प्रवेश के लिए तैयार करने में मदद करना।
- यह दिल्ली सरकार द्वारा स्थापित पहला ‘पूर्ण आवासीय विद्यालय’ होगा।
- पात्रता: इस स्कूल में नौवीं से बारहवीं कक्षा तक की पढाई होगी और प्रत्येक कक्षा में 100 छात्रों के लिए प्रवेश लिया जाएगा। इनमें से प्रत्येक कक्षा में 60 लड़के और 40 लड़कियां होंगी।
- स्कूल में एक ‘अकादमिक विंग’ और एक ‘सेवा प्रारंभिक विंग’ (Service Preparatory Wing) होगा।
- ‘सर्विस प्रिपरेटरी विंग’ का उद्देश्य “चिह्नित क्षमता को पोषित करना और चिह्नित किए गए अंतराल/कार्य क्षेत्रों में सुधार करना” और छात्रों में “अधिकारी जैसे गुणों” को विकसित करना है।
ECGC लिमिटेड
हाल ही में, ECGC लिमिटेड द्वारा रूस को प्रतिबंधित कवर श्रेणी (आरसीसी-I) में डाल दिया गया है, इससे पहले रूस ‘ओपन कवर’ श्रेणी में शामिल था। ‘ओपन कवर’ श्रेणी, पॉलिसीधारकों को अधिक उदार आधार पर कवर प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
ईसीजीसी लिमिटेड के बारे में:
निर्यात ऋण गारंटी निगम’ लिमिटेड (Export Credit Guarantee Corporation of India Ltd- ECGC), एक सरकारी स्वामित्व वाली निर्यात ऋण प्रदाता कंपनी है।
- यह भारतीय निर्यातकों को ‘निर्यात ऋण बीमा सहायता’ प्रदान करती है।
- यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के स्वामित्व में कार्य करती है।
- यह मुंबई में स्थित है।
- इसकी स्थापना 1957 में हुई थी।
‘भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी’ अभियान
शिक्षा मंत्रालय द्वारा, सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करने, बहुभाषावाद को बढ़ावा देने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रसार करने के लिए ‘भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी’ (Bhasha Certificate Selfie) अभियान का शुभारंभ किया गया है।
- ‘भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी’ की इस पहल का उद्देश्य शिक्षा मंत्रालय और ‘माईगव इंडिया’ (MyGov India) द्वारा विकसित भाषा संगम मोबाइल ऐप को बढ़ावा देना है।
- इस ऐप का उपयोग करके 22 अधिसूचित भारतीय भाषाओं में दैनिक उपयोग के 100 से अधिक वाक्य सीख सकते हैं।
- ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के तत्वावधान में शुरू किए गए इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग भारतीय भाषाओं में बुनियादी संवाद कौशल हासिल कर सकें।
- इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए 75 लाख लोगों द्वारा बुनियादी संवाद कौशल हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
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