[इनसाइट्स सिक्योर MISSION – 2022] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 10 फरवरी 2022

 

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

MISSION – 2022: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन– I


 

विषय: भारतीय संस्कृति, जिसमें प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

1. भारत पर ईरान एवं मेसिडोनिया के आक्रमणों के अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक सांस्कृतिक प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 प्रश्न का स्तर: सरल

 सन्दर्भ: भारतीय कला एवं संस्कृति: नितिन सिंघानिया

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्राचीन भारत में ईरान एवं मेसिडोनिया के आक्रमणों का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

ईरानी आक्रमणों के दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक सांस्कृतिक प्रभावों पर चर्चा कीजिए।

मेसिडोनियाई आक्रमणों के दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक सांस्कृतिक प्रभावों के बारे में लिखिए।

निष्कर्ष:

आक्रमणों के प्रभाव का संक्षेप में वर्णन कीजिए एवं समझाइए कि इसने समकालीन राजनीतिक परिदृश्य को कैसे प्रभावित किया।

 

विषय: भारतीय संस्कृति, जिसमें प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

2. सामान्यतः जैन कला बड़े स्तर पर भारतीय बौद्ध एवं हिंदू कला की समकालीन शैली का अनुसरण करती है हालांकि मूर्ति विज्ञान एवं मंदिर के भवनों के विधि अभिन्यास विशिष्ट जैन आवश्यकताओं को दर्शाते हैं। परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

 प्रश्न का स्तर: कठिन

सन्दर्भ: भारतीय कला एवं संस्कृति: नितिन सिंघानिया

 निर्देशक शब्द:

 परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

जैन कला की उत्पत्ति के बारे में लिखते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिए।

 विषय वस्तु:

जैन कला एवं बौद्ध-हिंदू कला के मध्य शैली, प्रकृति, योजना, वास्तुकला आदि में समानता का उल्लेख कीजिए। अपने उत्तर की पुष्टि के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

समझाइए कि समानता के बावजूद प्रतिमा-विज्ञान में मूलभूत अंतर उपस्थित हैं, जो विशुद्ध रूप से जैन कला पर बल देते हैं। सिद्ध करने के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

जैन कला की समग्र प्रकृति का संक्षेप में वर्णन करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन– II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

3. विभिन्न प्रकार के विधेयकों के संबंध में राष्ट्रपति एवं राज्यपाल की वीटो शक्तियों की तुलना कीजिए। (250 शब्द)

 प्रश्न का स्तर: सरल

 सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 तुलना कीजिए दोनों प्रकारों का एक विस्तृत तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत कीजिए, उनकी समान और असमान दोनों प्रकार की विशेषताओं को दर्शाइए। अभ्यर्थी को चाहिए कि वह दोनों का विस्तृत मूल्यांकन प्रस्तुत करे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

अनुच्छेद 111 एवं 200 का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।

 विषय वस्तु:

संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के समक्ष उपलब्ध विभिन्न प्रकार की वीटो शक्तियों की तुलना कीजिए।

ये वीटो विभिन्न प्रकार के विधेयकों पर कैसे लागू होते हैं? उल्लेख कीजिए।

राज्यपाल द्वारा आरक्षित विधेयक के मामले में राष्ट्रपति की वीटो की प्रकृति पर विशेष बल दीजिए।

निष्कर्ष:

राष्ट्रपति एवं राज्यपाल की वीटो शक्तियों की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

4. वर्तमान चीन-अमेरिकी विवाद में, ऑस्ट्रेलिया एवं भारत को अपने इरादे को कार्रवाई में परिवर्तित करने एवं विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध असंख्य अवसरों को भुनाने की आवश्यकता है। परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

 प्रश्न का स्तर: मध्यम

सन्दर्भ: Indian Express

 निर्देशक शब्द:

 परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

अमेरिका एवं चीन के मध्य चल रहे संघर्ष एवं वैश्विक भू-राजनीति पर इसके प्रभाव, विशेष रूप से भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के बारे में संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिए।

 विषय वस्तु:

भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के समक्ष उपलब्ध प्रमुख अवसरों का उल्लेख कीजिए।

उपर्युक्त की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।

उन तरीकों का उल्लेख कीजिए, जिनसे देश द्विपक्षीय संबंधों में अपनी क्षमता का एहसास कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन– III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

5. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSE) का निजीकरण हमेशा रामबाण नहीं होता है एवं इसे सदैव रणनीतिक रूप से किया जाना चाहिए, साथ ही इससे होने वाली आय का उपयोग आगे की संपत्ति निर्माण के लिए एक उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

प्रश्न का स्तर: मध्यम

सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिए ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

निजीकरण को परिभाषित करते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिए एवं निजीकरण के हाल के उदाहरण प्रस्तुत दीजिए।

विषय वस्तु:

सरकार के द्वारा निजीकरण किए जाने के कारणों का उल्लेख कीजिए।

रणनीतिक रूप से निजीकरण की आवश्यकता एवं निजीकरण के लिए आगे बढ़ने से पहले जिन कारकों पर विचार किया जाना चाहिए, उनके बारे में लिखिए।

लोकलुभावन उपायों में संलग्न होने के स्थान पर अधिक संपत्ति के निर्माण में निवेश करने के लिए निजीकरण से प्राप्त आय के उद्देश्य उपयोग के बारे में चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

6. डेयरी विकास एवं पशुधन ग्रामीण लोगों, विशेष रूप से गरीब एवं भूमिहीन श्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का एक साधन हो सकता है। भारत में डेयरी विकास के लिए हाल ही में किए गए उपायों के आलोक में चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 प्रश्न का स्तर: मध्यम

 सन्दर्भ: Down to Earth

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारत में डेयरी एवं पशुधन क्षेत्र तथा इसमें लघु एवं भूमिहीन किसानों की भागीदारी के बारे में आंकड़े प्रस्तुत करते हुए उत्तर की शुरूआत कीजिए।

विषय वस्तु:  

गरीब एवं भूमिहीन मजदूरों के लिए डेयरी विकास के लाभों का उल्लेख कीजिए।

भारत में डेयरी एवं पशुधन को बढ़ावा देने के लिए की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख कीजिए।

निष्कर्ष:

भारत में डेयरी एवं पशुधन क्षेत्र की अधिकतम क्षमता प्राप्त करने के लिए आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन– IV


 

विषय: शासन व्यवस्था में ईमानदारीः लोक सेवा की अवधारणा; शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार।

 7. वे कौन से कारक हैं, जो भारत में कपटसंधिकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं? कपटसंधिकारी भ्रष्टाचार के दुष्चक्र को समाप्त करने के उपायों का सुझाव दीजिए। (150 शब्द)

 प्रश्न का स्तर: मध्यम

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

कपटसंधिकारी भ्रष्टाचार को परिभाषित करते हुए उत्तर की शुरूआत कीजिए।

 विषय वस्तु:  

कपटसंधिकारी भ्रष्टाचार में सहायता करने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए। इसके प्रभावों के बारे में लिखिए।

कपटसंधिकारी भ्रष्टाचार के दुष्चक्र को तोड़ने के लिए आवश्यक विभिन्न उपायों का सुझाव दीजिए।

उपर्युक्त को सिद्ध करने के लिए उदाहरण दीजिए।

निष्कर्ष:

उपर्युक्त को सारांशित करते हुए निष्कर्ष निकालिए।


Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates

Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos