[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 9 February 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

1. शचींद्रनाथ सान्याल

 

सामान्य अध्ययनII

1. पीएम केयर्स

2. क्वाड

 

सामान्य अध्ययनIII

1. WTO में भारत की ‘पेटेंट छूट योजना’ और संबंधित मुद्दे

2. पर्वतमाला योजना

3. पावरथॉन-2022

4. ‘समुद्री हीट वेव’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. वायनाड वन्यजीव अभयारण्य

2. सोवा-रिग्पा

3. भारत बांग्लादेश रेलवे अनुबंध

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

शचींद्रनाथ सान्याल


(Sachindra Nath Sanyal)

संदर्भ:

इस साल 7 फरवरी को ‘शचींद्रनाथ सान्याल’ (1893 – 1942) की 80वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इनका जन्म 3 अप्रैल 1893, वाराणसी में हुआ था।

 

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका:

  • शचींद्रनाथ सान्याल ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध करने के उद्देश्य से ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HRA) की स्थापना की।
  • इन्होने वर्ष 1913 में पटना में ‘अनुशीलन समिति’ की एक शाखा की स्थापना की।
  • 1912 में दिल्ली षडयंत्र मामले में, सान्याल ने रासबिहारी बोस के साथ मिलकर तत्कालीन वायसराय लार्ड हार्डिंग पर हमला किया।
  • वह ‘ग़दर’ षडयंत्र योजनाओं में व्यापक रूप से शामिल रहे, और फरवरी 1915 में इसका पर्दाफाश होने के बाद वह भूमिगत हो गए। शचींद्रनाथ सान्याल, रास बिहारी बोस के करीबी सहयोगी थे।
  • नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जापान चले जाने के बाद, शचींद्रनाथ सान्याल को भारत के क्रांतिकारी आंदोलन का सबसे वरिष्ठ नेता माना जाता था।
  • वह, चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के गुरु थे।
  • सान्याल और महात्मा गांधी, 1920 और 1924 के बीच ‘यंग इंडिया’ में प्रकाशित एक प्रसिद्ध बहस में शामिल हुए। सान्याल ने गांधी के ‘क्रमिकवादी दृष्टिकोण’ (Gradualist Approach) के खिलाफ अपने तर्क प्रस्तुत किए।

सान्याल को काकोरी षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सेलुलर जेल में कैद किया गया था। यहाँ उन्होंने बंदी जीवन (ए लाइफ ऑफ कैप्टिविटी, 1922) नामक अपनी पुस्तक लिखी।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बंदी जीवन
  2. काकोरी षडयंत्र केस
  3. भगत सिंह
  4. चंद्रशेखर आजाद
  5. ग़दर पार्टी
  6. रास बिहारी बोस

मेंस लिंक:

काकोरी षडयंत्र केस पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

पीएम केयर्स फंड


संदर्भ:

नवीनतम निष्कर्षों के अनुसार, 27 मार्च, 2020 से 31 मार्च, 2021 के मध्य ‘पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES Fund) द्वारा एकत्र किए गए 10,990 करोड़ रुपए की राशि का 64 प्रतिशत मार्च के अंत तक अप्रयुक्त रहा।

‘पीएम केयर्स फंड’ के लिए ‘किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने और प्रभावितों को राहत प्रदान करने के प्रमुख उद्देश्य के साथ समर्पित कोष’ के रूप में पेश किया गया था। किंतु, अपने संचालन के पहले वर्ष ‘पीएम केयर्स’ द्वारा मात्र 3,976 करोड़ रुपये का व्यय किया गया।

पीएम केयर्स फंड और इसके कामकाज से संबंधित मुद्दे:

पीएम केयर्स फंड, अपनी घोषणा के बाद से ही संदेह के घेरे में रहा है, और  विपक्षी दलों द्वारा इस फंड के संचालन में पारदर्शिता की मांग की जाती रही है।

PM-CARES के बारे में:

‘आपातकालीन स्थिति में प्रधान मंत्री नागरिक सहायता एवं राहत कोष’ (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund : PM-CARES Fund) का गठन, कोविड-19  महामारी, और इसी प्रकार की अन्य आपात स्थितियों के दौरान, दान स्वीकार करने और राहत प्रदान करने के लिए किया गया था।

पीएम केयर्स फंड के बारे में:

PM CARES फंड की स्थापना 27 मार्च, 2020 को ‘पंजीकरण अधिनियम, 1908’ के तहत एक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में की गयी थी।

  • यह विदेशी अंशदान से से प्राप्त दान का लाभ उठा सकता है और इस निधि में दिया जाने वाला दान 100% कर-मुक्त होता है।
  • PM-CARES, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से भिन्न है।

फंड का प्रबंधन:

प्रधानमंत्री, PM CARES फंड के पदेन अध्यक्ष और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, भारत सरकार निधि के पदेन न्यासी होते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

आरटीआई के तहत ‘पब्लिक अथॉरिटी’ / ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ क्या है? इस बारे में जानने हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सार्वजनिक खाता क्या है?
  2. पीएम केयर फंड का प्रबंधन कौन करता है?
  3. आरटीआई अधिनियम के दायरे से किन संगठनों को छूट दी गई है?
  4. भारत की संचित निधि के बारे में
  5. ‘धर्मार्थ ट्रस्ट’ क्या है?
  6. एनडीआरएफ के बारे में

मेंस लिंक:

PM CARES फंड को आरटीआई अधिनियम के दायरे में क्यों लाया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

क्वाड समूह


संदर्भ:

चीन और रूस के मध्य संबंधों की बढ़ती घनिष्टता को देखते हुए, अमेरिका द्वारा अपने ‘क्वाड सहयोगियों’ (Quad partners) के साथ “सहयोग, अनुबंध, रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को बढ़ाने” हेतु योजना बनाई जा रही है।

अमेरिकी सहयोग योजना के केंद्रीय क्षेत्र:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों के प्रबंधन हेतु रचनात्मक और समग्र तरीके खोजते हुए, शासन के सभी स्तरों पर सहयोगी देशों के मध्य संबंधों को और मजबूत करना।
  • समूह के चारों सदस्य देशों में राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय अधिकारियों के मध्य अंतरराष्ट्रीय संबद्धता पर बेहतर समन्वय की सुविधा प्रदान करना।

आवश्यकता:

वर्तमान में, चीन और क्वाड समूह के सदस्यों के मध्य कई विषयों पर प्रतिस्पर्धा जारी है, ऐसे में जोखिम कम करने वाले तरीकों में, रचनात्मक रूप से संलग्न होने की विधियां खोजना काफी महत्वपूर्ण होगा।

‘क्वाड ग्रुपिंग’ (Quad grouping):

क्वाड (Quad), जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देशों का एक चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता संगठन है।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी हित साझा करते हैं।
  • इस समूह को अक्सर “एशियाई” या “मिनी” नाटो कहा जाता है, और इसे भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के सैन्य और आर्थिक दबदबे के जबाब के रूप में देखा जाता है।

क्वाड समूह की उत्पत्ति:

क्वाड समूह की उत्पत्ति के सूत्र, वर्ष 2004 में आयी सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए चारो देशों द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों में खोजे जा सकते हैं।

  • इसके बाद, इन चारो देशों के मध्य वर्ष 2007 में हुए आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पहली बार बैठक हुई।
  • इसका उद्देश्य, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, चारो देशों के मध्य समुद्री सहयोग बढ़ाना था।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्वाड समूह’ के प्रति चीन का दृष्टिकोण:

  1. यह एक सामान्य समझ है, कि क्वाड किसी भी देश के खिलाफ सैन्य रूप से मुकबला नहीं करेगा। फिर भी, चीन के रणनीतिक समुदाय द्वारा, इसे एक उभरता हुआ “एशियाई नाटो” ब्रांड बताया जाता है।
  2. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘क्वाड प्लस’ के बारे में सुना है? हाल ही में, क्वाड सदस्यों ने तथाकथित क्वाड प्लस के माध्यम से साझेदारी का विस्तार करने की इच्छा का भी संकेत भी दिया गया है, जिसमें दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम शामिल होंगे। इसके बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड – संरचना।
  2. यह पहली बार कब प्रस्तावित किया गया था?
  3. हिंद महासागर क्षेत्र में देश और महत्वपूर्ण द्वीप।
  4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भौगोलिक अवलोकन।
  5. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्र और जलडमरूमध्य।

मेंस लिंक:

शांति और सुरक्षा बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र के समुद्रीय कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए क्वाड की औपचारिक बहाली और पुन: सक्रिय की आवश्यकता है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

WTO में भारत की ‘पेटेंट छूट योजना’ और संबंधित मुद्दे


संदर्भ:

वर्ष 2020 में, विश्व व्यापार संगठन (WTO) वार्ता के दौरान, कोविड -19 से निपटने हेतु टीकों, चिकित्सीय-विधियों और निदानों पर, मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के स्वामित्व वाले ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ (Intellectual Property Rights – IPR) को “अस्थायी रूप से हटाए जाने” के लिए एक प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव को भारत और दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त रूप से तैयार किया था।

अब, भारत के समक्ष इस प्रस्ताव से बाहर होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

पृष्ठभूमि:

अक्टूबर 2020 में, भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा संयुक्त रूप से ‘विश्व व्यापार संगठन’ में एक प्रस्ताव को प्रायोजित किया गया था और इसे बाद में अद्यतन किया गया था, जिसमे कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों – चीन को उल्लेखनीय रूप से छोड़ते हुए- के प्रतिनिधित्व, तथा इसके दायरे में ‘सभी स्वास्थ्य उत्पादों और प्रौद्योगिकियों’ को लाने और इन पर कम से कम एक वर्ष के लिए ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ (IPR) से छूट दिए जाने, की मांग को शामिल किया गया।

संबंधित प्रकरण:

विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों का एक छोटा समूह, भारत और चीन के दवा निर्माताओं – विश्व स्तर पर दवाओं के दो प्रमुख आपूर्तिकर्ता- को ‘संभावित आईपीआर दायित्वों से छूट’ से बाहर करने के लिए “सुझावों पर चर्चा” कर रहा है।

  • ‘आईपीआर दायित्वों से छूट’ दिए जाने का प्रावधान, ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं’ (Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights-TRIPS) समझौते से निकला है, और सभी सदस्य इसका पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • इसके अलावा, पश्चिमी देशों के दवा निर्माता, छूट के किसी भी लाभ को केवल अफ्रीकी देशों के लिए “सीमित” करना चाहते हैं, और बड़ी उत्पादन क्षमता वाले भारतीय निर्माताओं के लिए, पश्चिमी प्रतिस्पर्धियों के बाजार को आसानी से कम करने का कोई मार्ग प्रशस्त नहीं करना चाहते हैं।

आईपीआर से छूट’ के विरोध का कारण एवं इसके खिलाफ तर्क:

  • बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) से छूट दिए जाने से, न तो टीकों के उत्पादन में वृद्धि होगी या न ही इनके वितरण में वृद्धि होगी और चूंकि ‘बौद्धिक संपदा’ (IP) कोई बाधा नहीं है, अतः ‘आईपीआर से छूट’ दिया जाना- कोविड-19 टीकों के – वायरस से लड़ने के लिए व्यावहारिक समाधान नहीं होगा।
  • ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ से छूट, आपूर्ति श्रृंखला में नकली टीकों के प्रवेश के लिए दरवाजे खोल सकती है, जिससे रोगी की सुरक्षा प्रभावित होगी।

समय की मांग:

वर्तमान में, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता ‘बौद्धिक संपदा’ (IP) बाधाओं सहित, आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करना होना चाहिए, ताकि मौजूदा महामारी के उपचार, रोकथाम और नियंत्रण के लिए आवश्यक टीकों, चिकित्सीय और निदान के निर्माण को बढ़ाया जा सके।

कोविड-19 वैक्सीन हेतु ‘बौद्धिक संपदा’ छूट का तात्पर्य:

‘बौद्धिक संपदा’ छूट (Intellectual Property Waiver- IP waiver), मध्य-आय वर्ग के देशों में बड़े स्तर पर, फाइजर, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका, नोवावैक्स, जॉनसन एंड जॉनसन और भारत बायोटेक द्वारा विकसित किये गए कोविड टीकों, आपातकालीन उपयोग अधिकार (emergency use authorisations- EUA) सहित, के उत्पादन करने का अवसर मिल सकता है।

वर्तमान में, इन टीकों का उत्पादन अधिकांशतः उच्च आय वाले देशों में केंद्रित है; तथा मध्यम आय वाले देशों में लाइसेंसिंग या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों के माध्यम से इन टीकों का उत्पादन किया जा रहा है।

‘पेटेंट अधिकार’ और ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ क्या होते हैं?

पेटेंट (patent), एक सशक्त बौद्धिक संपदा अधिकार होता है, तथा किसी देश की सरकार द्वारा आविष्कारक के लिए एक निश्चित तथा पूर्व-निर्दिष्ट समय के लिए दिए जाने वाला विशिष्ट एकाधिकार होता है। यह, किसी दूसरे के द्वारा आविष्कार की नकल करने से रोकने के लिए एक प्रवर्तनीय कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

पेटेंट के प्रकार:

पेटेंट, मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं: प्रक्रिया पेटेंट (Process Patents) अथवा उत्पाद पेटेंट (Product Patents)।

  1. उत्पाद पेटेंट (Product Patents), अंतिम उत्पाद के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, तथा इसके तहत, निर्दिष्ट अवधि के दौरान पेटेंट धारक के अलावा किसी अन्य के द्वारा ‘पेटेंट की गई वस्तु’ का उत्पादन करने पर रोक लगाई जा सकती है, भले ही दूसरे लोग किसी अलग प्रक्रिया का प्रयोग कर रहे हों।
  2. प्रक्रिया पेटेंट (Process Patents) के तहत, पेटेंट धारक के अलावा किसी भी व्यक्ति को, विनिर्माण प्रक्रिया में कुछ संशोधन करके पेटेंट उत्पाद का निर्माण करने की अनुमति होती है।

भारत में पेटेंट व्यवस्था:

भारत, 1970 के दशक से ‘उत्पाद पेटेंट’ के बजाय ‘प्रक्रिया पेटेंट’ प्रचलित है, जिसकी वजह से, भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का एक महत्वपूर्ण उत्पादक बन गया, और 1990 के दशक में सिप्ला जैसी कंपनियों के लिए अफ्रीका को एचआईवी-विरोधी दवाएं प्रदान करने की अनुमति दी जा सकी थी।

  • लेकिन TRIPS समझौते के अंतर्गत निर्धारित दायित्वों के कारण, भारत को वर्ष 2005 में पेटेंट अधिनियम में संशोधन करना पड़ा, और फार्मा, रसायन, और बायोटेक क्षेत्रों में ‘उत्पाद पेटेंट’ व्यवस्था लागू करनी पड़ी।

ट्रिप्स (TRIPS) समझौता क्या है?

‘बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलू’ (Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights- TRIPS) समझौते पर 1995 में विश्व व्यापार संगठन में समझौता वार्ता हुई थी। इस समझौते के तहत, सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों के लिए इस संबंध में घरेलू कानून बनाना अनिवार्य है।

  • TRIPS समझौता, बौद्धिक सुरक्षा संबंधी न्यूनतम मानकों की गारंटी प्रदान करता है। और इस तरह की कानूनी स्थिरता नवोन्मेषकों को कई देशों में अपनी बौद्धिक संपदा का मुद्रीकरण करने में सक्षम बनाती है।
  • 2001 में, विश्व व्यापार संगठन द्वारा ‘दोहा घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें स्पष्ट किया गया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में, सभी सरकारें अपने देश की कंपनियों को निर्माताओं के लिए अपने पेटेंट लाइसेंस देने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
  • इस प्रावधान को आमतौर पर “अनिवार्य लाइसेंसिंग” कहा जाता है, और इसे ‘ट्रिप्स समझौते’ शामिल किया गया था, और दोहा घोषणा में इसके उपयोग को स्पष्ट किया गया था।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. TRIPS क्या है?
  2. भारतीय पेटेंट अधिनियम, 2005।
  3. भारत में पेटेंट शासन।
  4. अनिवार्य लाइसेंसिंग क्या है?

मेंस लिंक:

अनिवार्य लाइसेंसिंग पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

पर्वतमाला योजना


(Parvatmala Scheme)

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए केंद्रीय बजट में पहाड़ी क्षेत्रों में संपर्क-सुविधा में सुधार हेतु सरकारी-निजी भागीदारी- के आधार पर राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम – “पर्वतमाला” (Parvatmala) परियोजना की घोषणा की गई थी।

योजना के बारे में:

  • यह परियोजना दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक सड़कों के स्थान पर एक पसंदीदा पारिस्थितिकी रूप से स्थायी विकल्प होगी।
  • इस परियोजना का उद्देश्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा, यात्रियों के लिए संपर्क और सुविधा में सुधार करना है।
  • इस परियोजना में भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों को भी शामिल किया जा सकता है, जहां पारंपरिक सामान्य परिवहन प्रणाली संभव नहीं है।

 

कार्यान्वयन:

यह परियोजना वर्तमान में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसे क्षेत्रों में शुरू की जा रही है।

 

नोडल मंत्रालय:

‘सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय’ (MORTH) के लिए, रोपवे और वैकल्पिक गतिशीलता समाधान प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ निर्माण, इस क्षेत्र में अनुसंधान और नीति के विकास की भी जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

रोपवे अवसंरचना के लाभ:

  • परिवहन का किफायती माध्यम: चूंकि रोपवे परियोजनाएं पहाड़ी इलाके में एक सीधी रेखा में बनाई जाती हैं, इस लिए इस परियोजना में भूमि अधिग्रहण की लागत भी कम आती है।
  • परिवहन का तेज़ माध्यम: परिवहन के हवाई माध्यम के कारण, रोपवे का सड़क मार्ग परियोजनाओं की तुलना में एक फायदा यह है कि रोपवे एक पहाड़ी इलाके में एक सीधी रेखा में बनाए जा सकते हैं।
  • पर्यावरण के अनुकूल: धूल का कम उत्सर्जन। सामग्री के कंटेनरों को इस तरह से डिजाइन किया जा सकता है ताकि पर्यावरण में किसी भी तरह की गंदगी फैलाने से बचा जा सके।
  • लास्ट माइल कनेक्टिविटी: 3 एस (एक तरह की केबल कार प्रणाली) या समकक्ष तकनीकों को अपनाने वाली रोपवे परियोजनाएं प्रति घंटे 6000-8000 यात्रियों को ले जा सकती हैं।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: इंफ्रास्ट्रक्चर- एनर्जी।

पॉवरथॉन-2022


(Powerthon-2022)

संदर्भ:

केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री द्वारा विद्युत् वितरण में जटिल समस्याओं को हल करने तथा गुणवत्ता एवं विश्वसनीय विद्युत् आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी संचालित समाधान खोजने के लिए ‘पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना’ (Revamped Distribution Sector Scheme -RDSS) के तहत एक ‘हैकथॉन प्रतियोगिता पावरथॉन-2022’ का शुभारंभ किया गया है।

 

हैकथॉन में पायलट परीक्षण के लिए 9 विषयों को शामिल किया] गया है:

  1. मांग/भार पूर्वानुमान
  2. एटी एंड सी (कुल तकनीकी और वाणिज्यिक) हानि में कमी
  3. ऊर्जा की चोरी का पता लगाना
  4. डीटी (वितरण ट्रांसफार्मर) विफलता का अनुमान
  5. संपत्ति निरीक्षण
  6. वनस्पति प्रबंधन
  7. उपभोक्ता के अनुभव में वृद्धि
  8. नवीकरणीय ऊर्जा का संयोजन
  9. बिजली खरीद का अनुकूलन

 

‘सभी DISCOMs के बेहतर संचालन और वित्तीय स्थिरता हेतु पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्रक योजना’ के बारे में:

(Revamped Distribution Sector Scheme for better operations & financial sustainability of all DISCOMs)

जुलाई 2021 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा एक ‘सुधार-आधारित और परिणाम-संबद्ध, पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्रक योजना’ (Revamped Distribution Sector Scheme: A Reforms based and Results linked Scheme) को स्वीकृति प्रदान की गयी है।

योजना के प्रमुख बिंदु:

  1. यह एक ‘सुधार-आधारित और परिणाम-संबद्ध’ योजना है।
  2. इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के DISCOMs के अलावा सभी DISCOMs / विद्युत विभागों की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना है।
  3. इस योजना के तहत, आपूर्ति बुनियादी ढांचे (Supply Infrastructure) को मजबूत करने के लिए DISCOMs को सशर्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  4. यह सहायता पूर्व-अर्हता मानदंडों को पूरा करने के साथ-साथ DISCOM द्वारा बुनियादी स्तर पर न्यूनतम मानकों को पूरा करने की उपलब्धि पर आधारित होगी।
  5. इस योजना के तहत, वितरण क्षेत्र में, बिजली फीडर से लेकर उपभोक्ता स्तर तक एक ‘अनिवार्य स्मार्ट मीटरिंग इकोसिस्टम’ शामिल किया गया है – जिसमें लगभग 250 मिलियन परिवार शामिल होंगे।
  6. यह योजना असंबद्ध फीडरों के लिए फीडर वर्गीकरण हेतु वित्त पोषण पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
  7. इस योजना में फीडरों के सौरकरण से सिंचाई के लिए दिन में सस्ती / निःशुल्क बिजली मिलेगी और किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

कार्यान्वयन:

‘एकीकृत विद्युत विकास योजना’ (Integrated Power Development Scheme), ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ (DDUGJY) और ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ जैसी मौजूदा विद्युत क्षेत्र सुधार योजनाओं को इस अम्ब्रेला कार्यक्रम में विलय कर दिया जाएगा।

  • योजना का कार्यान्वयन “सभी के लिए अनुकूल एक व्यवस्था” (one-size-fits-all) दृष्टिकोण के बजाय प्रत्येक राज्य के लिए तैयार की गई कार्य योजना पर आधारित होगा।
  • योजना के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए ‘ग्रामीण विद्युतीकरण निगम’ (REC) लिमिटेड और ‘पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन’ (PFC) को नोडल एजेंसियों के रूप में नामित किया गया है।

योजना के उद्देश्य:

  1. 2024-25तक अखिल भारतीय स्तर पर ‘कुल तकनीकी और वाणिज्यिक हानि’ (aggregate technical and commercial loss- AT&C loss) औसत को 12-15% तक कम करना।
  2. 2024-25 तक बिजली की लागत और आपूर्ति-कीमत अंतराल को घटाकर शून्य करना।
  3. आधुनिक DISCOMs के लिए संस्थागत क्षमताओं का विकास करना।
  4. वित्तीय रूप से टिकाऊ और परिचालन रूप से कुशल वितरण क्षेत्र के माध्यम से उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सामर्थ्य में सुधार करना।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. REC के बारे में।
  2. DDGJY के बारे में।
  3. IPDS के बारे में।
  4. पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना के प्रमुख बिंदु

मेंस लिंक:

भारत में विद्युत क्षेत्र के सुधारों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘समुद्री हीट वेव’


(Marine Heatwave)

‘समुद्री उष्णीय लहर’ / ‘समुद्री हीट वेव’ (Marine Heatwave) को आमतौर पर, समुद्री सतह के अत्यधिक गर्म, उच्च तापमान के स्पष्ट क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जाता है। इस क्षेत्र में उच्च तापमान की स्थित कुछ दिनों से लेकर महीनों तक बनी रहती है।

जब समुद्र का तापमान, सामान्य से अधिक समय तक उच्च बना रहता है, तो ‘समुद्री हीटवेव’ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हाल के दशक में, सभी प्रमुख महासागरीय बेसिनों में ‘समुद्री हीट वेव’ (Marine Heatwave – MHW) देखी गयी हैं।

कारण:

  • ‘समुद्री उष्णीय लहरों’ का सबसे आम कारण ‘महासागरीय धाराएं’ होती हैं। महासागरीय धाराएं, उष्ण जल के क्षेत्र, वायु-समुद्री ताप प्रवाह क्षेत्रों का निर्माण करने में सक्षम होती हैं, तथा ये समुद्री सतह के निश्चित क्षेत्र को वातावरण के माध्यम से भी गर्म कर सकती हैं।
  • कमजोर हवाएं: आम तौर पर, सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से होकर गुजरता है और समुद्र की सतह को गर्म करता है। यदि वायु-प्रवाह मंद होता हैं, या सागरीय हवाएं कमजोर होती हैं तो उष्ण जल का समुद्री सतह के नीचे के ठंडे जल के साथ मिश्रण नहीं हो पाता है। और उष्ण जल सागरीय सतह के ऊपर ही रहता है तथा और अधिक गर्म होता रहता है जिससे समुद्री हीट वेव उत्पन्न हो जाती हैं।

‘समुद्री हीट वेव’ की आवृत्ति में वृद्धि का प्रभाव:

  • ‘समुद्री हीट वेव’ की तीव्रता एवं आवृत्ति में वृद्धि होने से पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना प्रभावित होती है। इस स्थिति में कुछ प्रजातियों के लिए पुष्टिकारक और कुछ प्रजातियों के लिए हानिकारक होती हैं।
  • ‘समुद्री उष्णीय लहरों’ की वजह से कुछ प्रजातियों को अपने वस् स्थान में परिवर्तन करना पड़ जाता है। जैसे कि दक्षिणपूर्वी ऑस्ट्रेलिया के तट पर पायी जाने वाली ‘काँटेदार समुद्री अर्चिन’ (spiny sea urchin), दक्षिण की ओर तस्मानिया सागर में फैल रही है, क्योंकि ‘समुद्री हीट वेव’ की वजह से दक्षिणपूर्वी ऑस्ट्रेलिया के तट पर इसका भोजन ‘सिवार’ (kelp) के क्षेत्र नष्ट होते जा रहे हैं।
  • ‘समुद्री हीट वेव’ की वजह से मत्स्य पालन और जलीय कृषि को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
  • ‘समुद्री उष्णीय लहरों’ एवं हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन के मध्य एक संबंध होता है।

हिंद महासागर में समुद्री हीटवेव:

  • एक अध्ययन के अनुसार, पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में प्रति दशक लगभग 5 घटनाओं की दर से समुद्री हीटवेव में सबसे बड़ी वृद्धि देखी गयी है, इसके बाद बंगाल की उत्तरी खाड़ी में प्रति दशक 0.5 घटनाओं को देखा गया है।
  • 1982 से 2018 तक, पश्चिमी हिंद महासागर में ‘समुद्री हीटवेव’ की कुल 66 घटनाएं हुईं, जबकि बंगाल की खाड़ी में इनकी संख्या 94 रही।

 

प्रभाव:

  • पश्चिमी हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में, ‘समुद्री उष्णीय लहरों’ की वजह से ‘भारतीय उपमहाद्वीप के मध्य क्षेत्र’ में शुष्कता की स्थिति और तीव्र हो जाती है।
  • तदनुरूप, बंगाल की उत्तरी खाड़ी में उत्पन्न होने वाली ‘समुद्री उष्णीय लहरों’ के प्रत्युत्तर में दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में वर्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘हीट वेव’ कब घोषित की जाती है?
  2. मानदंड?
  3. हीटवेव और सुपर हीटवेव के बीच अंतर?
  4. IMD क्या है?

मेंस लिंक:

गीष्म लहरों के कारण पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का परीक्षण कीजिए तथा भारत को इससे कैसे निपटना चाहिए?

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


वायनाड वन्यजीव अभयारण्य

  • वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (Wayanad Wildlife Sanctuary), नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व (5,520 वर्ग किमी) का एक भाग है, और दक्षिण भारत के ‘हाथी अभ्यारण्य’ संख्या 7 का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • यह केरल का एकमात्र अभयारण्य है जहाँ चार सींग वाले मृग देखे जाने की जानकारी मिली है।
  • अभयारण्य में मिस्र के गिद्ध, हिमालयी ग्रिफॉन और सिनेरियस गिद्धों की उपस्थिति की भी सूचना मिली है। किसी समय केरल में हर जगह पायी जाने वाले गिद्धों की दो प्रजातियां, लाल सिर वाले और सफेद पीठ वाले गिद्ध, अब वायनाड पठार तक ही सीमित हैं।
  • ‘नागरहोल-बांदीपुर-मुदुमलाई-वायनाड’ वन परिसर, देश के सबसे महत्वपूर्ण बाघ आवासों में से एक है।
  • वन्यजीव प्रभाग के वन, काबिनी नदी प्रणाली की सहायक नदियों के लिए प्रमुख जलग्रहण क्षेत्र हैं।

चर्चा का कारण:

कर्नाटक और तमिलनाडु में निकटवर्ती वन्यजीव अभयारण्यों से वन्य जीवों का मौसमी प्रवास, केरल के वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (WWS) में शुरू हो गया है।

 

सोवा-रिग्पा

(Sowa -Rigpa)

  • यह भारत के हिमालयी क्षेत्र में प्रचलित एक पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है।
  • इसकी उत्पत्ति तिब्बत में हुई और भारत, नेपाल, भूटान, मंगोलिया और रूस जैसे देशों में लोकप्रिय रूप से प्रचलित है।
  • सोवा-रिग्पा के अधिकांश सिद्धांत और व्यवहार “आयुर्वेद” के समान है।
  • तिब्बत के ‘युथोग योंटेन गोंपो’ (Yuthog Yonten Gonpo) को ‘सोवा रिग्पा’ का जनक माना जाता है।

सोवा-रिग्पा के मूल सिद्धांत को निम्नलिखित पांच बिंदुओं के संदर्भ में समझा जा सकता है:

  1. बीमारी की स्थिति में शरीर को उपचार के केंद्र के रूप में
  2. एंटीडोट यानी इलाज
  3. एंटीडोट के माध्यम से उपचार की विधि
  4. रोग को ठीक करने वाली औषधि
  5. मटेरिया मेडिका, फार्मेसी और फार्माकोलॉजी

 

भारत बांग्लादेश रेलवे अनुबंध

(India Bangladesh Railway Contract)

  • भारत सरकार के लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत बंगलादेश में बोगुरा से सिराजगंज तक नयी सीधी रेल लाइन का निर्माण किया जायेगा।
  • परियोजना के तहत, बांग्लादेश रेलवे द्वारा भारत से 420 ब्रॉड गेज वैगन खरीदे जाएंगे।
  • यह परियोजना, ‘रोलिंग स्टॉक ऑपरेशन इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट’ के तहत बांग्लादेश सरकार और एशियाई विकास बैंक (ADB) के संयुक्त वित्त पोषण से कार्यान्वित की जा रही है।

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