[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 February 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-I

1. ‘चौरी चौरा’ घटना की शताब्दी

 

सामान्य अध्ययनII

1. ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ एवं ‘न्यायिक संवीक्षा’ का मूल्यांकन

2. परिसीमन पैनल

3. प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना

4. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना

5. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर

 

सामान्य अध्ययनIII

1. ग्रीन बांड

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का 70 साल का शासनकाल

2. अरावली जैव विविधता पार्क

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

‘चौरी चौरा’ घटना की शताब्दी


(‘Chauri Chaura’ Centenary)

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री ने चौरी-चौरा कांड के सौ साल पूरे होने पर हमारे स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को श्रद्धांजलि दी।

‘चौरी चौरा’ कांड क्या है?

  • यह घटना ब्रिटिश भारत के अंतर्गत संयुक्त प्रांत (आधुनिक उत्तर प्रदेश) के गोरखपुर जिले के चौरी चौरा (Chauri Chaura) में घटित हुई थी।
  • इस घटना के दौरान, असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस के साथ भिड़ गया, जिस पर पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
  • इसकी जवाबी कार्रवाई में, प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया और उसमे आग लगा दी, जिसमें थाने में उपस्थित सभी कर्मियों की मौत हो गयी।
  • इसकी प्रतिक्रिया में, हिंसा के सख्त खिलाफ रहने वाले महात्मा गांधी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर स्थगित कर दिया।

पृष्ठभूमि:

  • 1 अगस्त 1920 को गांधी जी द्वारा सरकार के खिलाफ ‘असहयोग आंदोलन’ का आरंभ किया गया था।
  • इस आंदोलन में, स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग और विदेशी वस्तुओं- विशेष रूप से मशीन-निर्मित वस्त्रों, कानूनी, शैक्षणिक और प्रशासनिक संस्थानों का बहिष्कार करना, अर्थात “कुशासन करने वाले शासक का हर तरह से असहयोग करना’ शामिल था।

 

महात्मा गांधी और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया:

महात्मा गांधी ने पुलिसकर्मियों की हत्या किए जाने की निंदा की।

  • “वास्तविक सहानुभूति” प्रदर्शित करने और प्रायश्चित करने के लिए एक ‘चौरी चौरा सहायता कोष’ की स्थापना की गई थी।
  • गांधी ने ‘कांग्रेस कार्यसमिति’ को इस मामले में अपनी मर्जी की आगे झुकने पर विवश किया और 12 फरवरी, 1922 को ‘असहयोग आंदोलन’ को औपचारिक रूप से निलंबित कर दिया गया।

जवाहरलाल नेहरू और असहयोग आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अन्य नेता इस बात से हैरान थे कि, जब स्वतंत्रता आंदोलन में नागरिक प्रतिरोध की स्थिति मजबूत हो रही थी, और ऐसे में गांधीजी ने संघर्ष को रोक दिया था।

  • मोतीलाल नेहरू और चितरंजन दास जैसे नेताओं ने गांधी के फैसले पर अपनी निराशा व्यक्त की और ‘स्वराज पार्टी’ की स्थापना का फैसला किया।
  • असहयोग आंदोलन के निलंबन के परिणामस्वरूप हुए कई युवा भारतीय राष्ट्रवादियों का आंदोलन से मोहभंग हो गया और वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भारत में अहिंसा के माध्यम से औपनिवेशिक शासन को खत्म नहीं किया जा सकता।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘असहयोग आंदोलन’ के बारे में
  2. कारण और परिणाम
  3. रौलट एक्ट क्या है?
  4. चौरी चौरा कांड

मेंस लिंक:

चौरी चौरा की घटना के परिणामों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

 राष्ट्रीय सुरक्षा’ एवं न्यायिक संवीक्षा’ का मूल्यांकन


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों पर केंद्र सरकार को ‘न्यायिक संवीक्षा’ (Judicial Scrutiny) से छूट दिए जाने संबंधी विषय पर ‘विचार करने’ / ‘गौर करने’ का निर्णय लिया गया है।

संबंधित प्रकरण:

मीडिया वन टीवी चैनल मामले पर की जा रही सुनवाई के दौरान, अदालत के समक्ष एक सवाल आया है, कि, क्या ‘न्यायिक संवीक्षा’ / ‘न्यायिक जाँच’ को सीमित करने के लिए राज्य द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ (National Security) का इस्तेमाल एक आधार के रूप में किया जा सकता है?

  • हाल ही में, सरकार द्वारा ‘केरल उच्च न्यायालय’ में मलयालम समाचार चैनल ‘मीडिया वन’ की प्रसारण अनुमति रद्द करने के लिए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ कारणों का हवाला दिया गया था।
  • इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने ‘पेगासस जासूसी मामले’ में आदेश देते हुए कहा था, कि केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का भूत’ दिखाकर अदालतों से ‘फ्री पास’ दिए की उम्मीद नहीं कर सकती है।

इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियां:

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ‘न्यायिक समीक्षा’ का दायरा सीमित है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का भूत खड़ा होने पर ‘राज्य’ के लिए ‘फ्री पास’ मिल जाएगा।

राज्य को ‘फ्री पास दिए जाने के संभावित नुकसान:

हाल ही में, नागरिकों द्वारा उठाई गई प्रमुख चिंताओं में ‘राज्य को ‘फ्री पास’ दिए जाने का डरावना असर’ शामिल है। इस तरह की छूट दिए जाने से, ‘स्वतंत्र अभिव्यक्ति’ और खासकर मीडिया को राज्य की कड़ी कार्रवाईयों का सामना करना पड़ता है।

अनुराधा भसीन मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला:

‘अनुराधा भसीन मामला’ (Anuradha Bhasin case) जम्मू और कश्मीर में ‘अनुच्छेद 370’ को निरस्त करने की पृष्ठभूमि में ‘इंटरनेट पर लगायी गयी रोक’ से संबंधित है।

  • अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि, ‘वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के मूल अधिकार को प्रतिबंधित करने वाले ‘राज्य के किसी भी आदेश’ के पीछे स्पष्ट कारण होने चाहिए।
  • अदालतों के लिए इस बात से आश्वस्त होना चाहिए, कि राज्य ने जिम्मेदार तरीके से काम किया है और मनमाने तौर से नागरिकों के अधिकारों को नहीं छीना गया है।

अन्य संबंधित मामले:

‘भारत सरकार बनाम बंगाल क्रिकेट संघ’ और ‘श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ’ मामलों में, अदालत ने कहा है कि, इस बात में कोई शक नहीं है कि ‘वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ में जहाँ तक भी संभव हो, आबादी के हर वर्ग तक सूचना पहुँचाने का अधिकार शामिल है। सूचना के प्रसार का व्यापक दायरा या इसका अधिक प्रभाव, नागरिकों के इस अधिकार को प्रतिबंधित नहीं कर सकता है और न ही इस पर लगायी गयी रोक को सही ठहरा सकता है।

न्यायिक समीक्षा’ क्या है?

न्यायिक समीक्षा (Judicial review), न्यायपालिका को प्राप्त एक शक्ति है, जिसके अंतर्गत वह सरकार के विधायी तथा कार्यकारी अंगों द्वारा पारित किसी अधिनियम या आदेश से किसी प्रभावित व्यक्ति के चुनौती दिए जाने पर इन कानूनों/ आदेश की समीक्षा तथा इनकी संवैधानिकता पर निर्णय करती है।

भारत में ‘न्यायिक समीक्षा’ की स्थिति:

भारत में न्यायिक समीक्षा की शक्ति का स्रोत भारतीय संविधान है (संविधान के अनुच्छेद 13, 32, 136, 142 और 147)।

  1. न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग संविधान के भाग-तीन में प्रदत्त मूल अधिकारों की रक्षा करने और इन्हें प्रवर्तित करने के लिए किया जाता है।
  2. संविधान के अनुच्छेद 13 में संसद और राज्य विधानसभाओं को देश के नागरिकों को प्राप्त मूल-अधिकारों को समाप्त करने अथवा इनका हनन करने वाले क़ानून बनाना निषेध किया गया है ।
  3. अनुच्छेद 13 के तहत मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करने के प्रावधान किए गए हैं तथा इसके तहत किसी भी कानून को ‘मूल-अधिकारों के असंगत अथवा अल्पीकरण’ करने की सीमा तक अमान्य माना गया है।

Current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

राष्ट्र निर्माण में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका:

  • केशवानंद भारती मामले में, न्यायालय द्वारा पहली बार ‘संविधान संशोधन’ की समीक्षा करने संबंधी अपनी शक्ति की व्याख्या की गयी थी।
  • इस व्याख्या के माध्यम से ही ‘इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण’ मामले में 39वें संशोधन अधिनियम को रद्द कर दिया गया था।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘न्यायिक समीक्षा’ क्या है?
  2. न्यायिक समीक्षा का विकास
  3. अनुच्छेद 13, 21 और 32

मेंस लिंक:

भारतीय संदर्भ में न्यायिक समीक्षा के बारे चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

परिसीमन पैनल


संदर्भ:

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित ‘जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग’ (Jammu and Kashmir Delimitation Commission) ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • जम्मू-कश्मीर की कुल 90 विधानसभा सीटों में से, 28 नए विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है या उनका नाम बदल दिया गया है।
  • कुल 19 विधानसभा क्षेत्रों को समाप्त कर दिया गया है।
  • राज्य की सभी पांच लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।
  • जम्मू क्षेत्र में श्री माता वैष्णो देवी निर्वाचन क्षेत्र को सबसे छोटे के रूप में चिह्नित किया गया है। इस निर्वाचन क्षेत्र में मात्र 73,648 मतदाता हैं।

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया- घटनाक्रम:

  1. जम्मू-कश्मीर में पहली परिसीमन प्रक्रिया वर्ष 1951 में एक परिसीमन समिति द्वारा निष्पादित की गई थी, और इसके तहत, तत्कालीन राज्य को 25 विधानसभा क्षेत्रों में विभक्त किया गया था।
  2. इसके पश्चात, वर्ष 1981 में पहली बार एक पूर्ण परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन किया गया था और इस आयोग द्वारा वर्ष 1981 की जनगणना के आधार पर वर्ष 1995 में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की गेन थी। इसके बाद से, राज्य में कोई अब तक कोई परिसीमन नहीं हुआ है।
  3. वर्ष 2020 में जम्मू-कश्मीर के लिए, वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने के लिए, एक ‘परिसीमन आयोग’ का गठन किया गया। इस आयोग को संघ-शासित प्रदेश में सात अन्य सीटों को जोड़ने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों को आरक्षण देने का आदेश दिया गया।
  4. नए परिसीमन के पश्चात, जम्मू-कश्मीर में सीटों की कुल संख्या 83 से बढ़ाकर 90 कर दी जाएगी। ये सीटें ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ (PoK) के लिए आरक्षित 24 सीटों के अतिरिक्त होंगी और इन सीटों को विधानसभा में खाली रखा जाएगा।

Current Affairs

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की आवश्यकता:

‘परिसीमन अधिनियम,’ 2002 (Delimitation Act, 2002) और अन्य जम्मू-कश्मीर-विशिष्ट विधेयकों के साथ अगस्त 2019 में केंद्र सरकार द्वारा पारित ‘जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’, 2019 (Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019) के प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल 6 मार्च को, केंद्रशासित प्रदेश के लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने के लिए ‘जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग’ का गठन किया गया था।

परिसीमन’ क्या होता है?

‘परिसीमन’ (Delimitation) का शाब्दिक अर्थ, ‘विधायी निकाय वाले किसी राज्य में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारण प्रक्रिया’ होता है।

परिसीमन प्रक्रिया’ का निष्पादन:

  • परिसीमन प्रक्रिया, एक उच्च अधिकार प्राप्त आयोग द्वारा संपन्न की जाती है। इस आयोग को औपचारिक रूप से परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) या सीमा आयोग (Boundary Commission) कहा जाता है।
  • परिसीमन आयोग के आदेशों को ‘क़ानून के समान’ शक्तियां प्राप्त होती है, और इन्हें किसी भी अदालत के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती है।

आयोग की संरचना:

‘परिसीमन आयोग अधिनियम’, 2002 के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त परिसीमन आयोग में तीन सदस्य होते हैं: जिनमे अध्यक्ष के रूप में उच्चतम न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, तथा पदेन सदस्य के रूप में मुख्य निर्वाचन आयुक्त अथवा इनके द्वारा नामित निर्वाचन आयुक्त एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होते है।

संवैधानिक प्रावधान:

  1. संविधान के अनुच्छेद 82 के अंतर्गत, प्रत्येक जनगणना के पश्चात् भारत की संसद द्वारा एक ‘परिसीमन अधिनियम’ क़ानून बनाया जाता है।
  2. अनुच्छेद 170 के तहत, प्रत्येक जनगणना के बाद, परिसीमन अधिनियम के अनुसार राज्यों को भी क्षेत्रीय निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि अगस्त 2019 तक, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों का परिसीमन ‘जम्मू और कश्मीर संविधान’ और ‘जम्मू और कश्मीर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’, 1957 के अंतर्गत किया जाता था?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पूर्ववर्ती परिसीमन आयोग- शक्तियाँ और कार्य
  2. आयोग की संरचना
  3. आयोग का गठन किसके द्वारा किया जाता है?
  4. आयोग के अंतिम आदेशों में परिवर्तन की अनुमति?
  5. परिसीमन आयोग से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

मेंस लिंक:

निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किस प्रकार और क्यों किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना


(Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana)

संदर्भ:

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना’ (Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana – PMMVY) के तहत एकल माताओं और परित्यक्त माताओं को शामिल करने और उनके लिए सुविधा प्रदान करने के लिए, पतियों का आधार कार्ड माँगा जाना अनिवार्य नहीं है।

‘प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना’ के बारे में:

प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना (PMMVY) केंद्र सरकार की एक मातृत्व लाभ योजना है। इस योजना को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार देश के सभी जिलों में लागू किया गया है।

  • योजना के तहत, प्रत्यक्ष लाभ नकद हस्तांतरण का उद्देश्य गर्भवती माताओं के लिए बढ़ी हुई पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करना और साथ ही साथ काम-काजी महिलाओं के लिए गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद होने वाली मजदूरी के नुकसान की आंशिक भरपाई करना है।
  • इस योजना की घोषणा 31 दिसंबर, 2016 को की गई थी।

लाभार्थी:

  • केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों या सार्वजनिक उपक्रमों में नियमित रोज़गार में संलग्न एवं किसी भी कानून के तहत समान लाभ प्राप्त करने वाली महिलाओं को छोड़कर सभी गर्भवती महिलाएँ एवं स्तनपान कराने वाली माताएँ (Pregnant Women and Lactating Mothers- PW&LM) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिये पात्र हैं।
  • ऐसी सभी पात्र गर्भवती महिलाएँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ, जिन्होंने परिवार में पहली संतान के लिये 1 जनवरी, 2017 को या उसके बाद गर्भधारण किया हो।

योजना के अंतर्गत प्रदत्त लाभ:

लाभार्थी को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने पर, तीन किस्तों में 5,000 रुपए का नकद लाभ प्रदान किया जाता है:

  • गर्भधारण का शीघ्र पंजीकरण।
  • प्रसव-पूर्व जाँच।
  • बच्चे के जन्म का पंजीकरण, एवं परिवार के पहले जीवित बच्चे के टीकाकरण का पहला चक्र पूरा करना।

इसके अतिरिक्त, पात्र लाभार्थियों को जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत नकद प्रोत्साहन भी दिया जाता है। इस प्रकार एक महिला को औसतन 6,000 रुपए की राशि प्रदान की जाती है।

योजना में प्रस्तावित सुधार:

केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र ही ‘प्रधान मंत्री मातृ वंदन योजना’ (PMMVY) के तहत लाभों का विस्तार किए जाने की संभावना है।

  • वर्तमान में, योजना के तहत लाभार्थियों में गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए परिवार में पहले बच्चे के लिए गर्भधारण करने वाली महिलाओं को शामिल किया जाता है, इस प्रावधान को दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं को शामिल किया जाएगा, बशर्ते जन्म लेने वाला बच्चा लड़की हो।
  • जन्म-पूर्व लिंग चयन को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

Current Affairs

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रधान मंत्री मातृ वंदन योजना (PMMVY) क्या है?
  2. लाभ
  3. पात्रता

मेंस लिंक:

प्रधान मंत्री मातृ वंदन योजना’ (PMMVY) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा


(China Pakistan Economic Corridor)

संदर्भ:

चीन और पाकिस्तान के मध्य ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (China Pakistan Economic Corridor – CPEC) योजना के तहत ‘औद्योगिक सहयोग’ हेतु एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

  • औद्योगिक सहयोग समझौता (Industrial Cooperation Agreement), CPEC के “दूसरे चरण” का एक महत्वपूर्ण भाग है।
  • CPEC के पहले चरण में, मुख्य रूप से ऊर्जा परियोजनाओं एवं सड़क अवसंरचनाओं में चीनी निवेश किया जाना शामिल था।

CPEC के बारे में:

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), कई-अरब डॉलर की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) की प्रमुख परियोजना के तहत, पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लंबी एक वाणिज्यिक परियोजना हैl

  • यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य चीन द्वारा वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से दुनिया विश्व में बीजिंग के प्रभाव को बढ़ाना है।
  • इस लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन का निर्माण किया जाना शामिल है।
  • इस प्रस्तावित परियोजना को भारी-सब्सिडी वाले ऋणों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा। पाकिस्तान की सरकार के लिए यह ऋण चीनी बैंकिंग दिग्गजों, जैसे एक्जिम बैंक ऑफ चाइना, चीन डेवलपमेंट बैंक तथा चीन के औद्योगिक और वाणिज्यिक बैंक द्वारा प्रदान किया जाएगा।

Current Affairs

स्थानीय लोगों का विरोध:

‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (CPEC) परियोजना पर काम कर रहे चीनी सैनिकों और चीनी नागरिकों के साथ स्थानीय पाकिस्तानियों की नाखुशी की वजह से CPEC परियोजना को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। इससे, पाकिस्तान को मजबूर होकर इलाके में और सैनिक तैनात करने पड़े हैं।

स्थानीय लोग इस बात से नाराज हैं कि इन परियोजनाओं से उन्हें न केवल बाहर किया जा रहा है, बल्कि उनकी वर्तमान आजीविका भी खतरे में पड़ रही है।

भारत की चिंताएं:

  • यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान से होते हुए गुजरेगा।
  • CPEC ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अपनी आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित और संक्षिप्त करने के साथ-साथ हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की चीनी योजना पर आधारित है। अतः यह माना जाता है कि CPEC के परिणामस्वरूप हिंद महासागर में चीनी मौजूदगी भारत के प्रभाव पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी।
  • ग्वादर, बलूचिस्तान के अरब सागर तट पर स्थित है।  पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम का यह हिस्सा दशकों से अलगाववादी विद्रोह का शिकार है।  इस परियोजना के कारण भारत के आस पास के क्षेत्र में अशांति फैलने का डर बना रहेगा।
  • इसके अलावा, भारत के चीन और पाकिस्तान, दोनों के साथ रिश्तों में विश्वास में कमी (Trust Deficit) है, और दोनों के साथ संघर्ष का पुराना इतिहास है। नतीजतन, भले ही परियोजना के लिए व्यावहारिक रूप से दोबारा वार्ता शुरू करने के सुझाव दिए गए हों, लेकिन किसी ने चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के समीकरणों में बाधक प्रमुख कारकों को खारिज नहीं किया है।

Current Affairs

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CPEC क्या है?
  2. BRI पहल क्या है?
  3. स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल्स पहल क्या है?
  4. गिलगित- बाल्टिस्तान कहां है?
  5. पाकिस्तान और ईरान में महत्वपूर्ण बंदरगाह।

मेंस लिंक:

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) ढांचे पर भारत की चिंताओं पर चर्चा कीजिए। सुझाव दें कि भारत को इस गठबंधन से उत्पन्न चुनौतियों से कैसे निपटना चाहिए?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर


(Pakistan Occupied Kashmir)

संदर्भ:

हाल ही में ‘पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर’ (Pakistan Occupied Kashmir – PoK) के निवासियों द्वारा 5 फरवरी को कश्मीर एकजुटता दिवस (Kashmir Solidarity Day) के रूप में मनाने के लिए पाकिस्तान की निंदा की है, और इसे “धोखाधड़ी दिवस” ​​के रूप में चिह्नित किया है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के बाग (Bagh), मोंग (Mong) और हजीरा (Hajira) जैसे क्षेत्रों में कई विरोध रैलियां आयोजित की गयी। यहाँ के लोगों ने कश्मीर पर दोहरे मानदंड अपनाने के लिए इस्लामाबाद को लताड़ा है, क्योकि इस क्षेत्र में इस्लामाबाद की तुलना में कोई उचित स्वास्थ्य और शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

पाक अधिकृत कश्मीर’ की वर्तमान स्थिति:

  • ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ (PoK) को पाकिस्तान में “आजाद जम्मू और कश्मीर” (संक्षेप में “AJK”) कहा जाता है।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1949 के हुए युद्धविराम के बाद ‘PoK’ अपने अस्तित्व में आया था।
  • इस क्षेत्र में, तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य के कुछ हिस्से शामिल हैं, जिन पर वर्ष 1949 में पाकिस्तानी सेना का कब्जा था।
  • ‘पीओके’ पर पाकिस्तान की संवैधानिक स्थिति यह है, कि यह देश का हिस्सा नहीं है, बल्कि कश्मीर का “विमुक्त” (liberated) हिस्सा है।

हालाँकि, पाकिस्तान संविधान के अनुच्छेद 257 में कहा गया है. कि “जब जम्मू और कश्मीर राज्य के लोग पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय लेंगे, तब पाकिस्तान और राज्य के बीच संबंध, उस राज्य के निवासियों की इच्छा के अनुसार निर्धारित किए जाएंगे।”

पाक अधिकृत कश्मीर’ की राजनीतिक संरचना और इसका प्रशासन:

पाकिस्तान के संविधान में देश के चार प्रांतों – पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को सूचीबद्ध किया गया है।

  1. सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए, ‘पीओके’ को पाकिस्तान सरकार द्वारा पूर्णतः शक्तिमान ‘कश्मीर परिषद’ के माध्यम से प्रशासित किया जाता है। कश्मीर परिषद्, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में 14 नामित सदस्यों का एक निकाय है।
  2. ‘पीओके’ की विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। विधायकों द्वारा इस क्षेत्र के लिए एक “प्रधान मंत्री” और “राष्ट्रपति” का चुनाव किया जाया है।
  3. प्रत्यक्षतः ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ (PoK) एक स्वायत्त, स्वशासी क्षेत्र है, किंतु वास्तविक रूप में, कश्मीर के सभी मामलों पर अंतिम निर्णय पाकिस्तानी सेना द्वारा लिए जाते है।

पीओके पर भारत का रुख:

  • ‘पीओके’ भारत का एक अभिन्न अंग है, यह तथ्य वर्ष 1947 से लगातार हमारी नीति का भाग रहा है।
  • भारत ने दुनिया को यह भी स्पष्ट कर दिया है, कि पीओके से जुड़ा कोई भी मामला भारत का आंतरिक मामला है।

कृपया ध्यान दें, कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) नव निर्मित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का हिस्सा है, और गिलगित-बाल्टिस्तान, भारत सरकार द्वारा जारी नवीनतम मानचित्रों में केंद्र शासित प्रदेश ‘लद्दाख’ का भाग है।

Current Affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ (PoK) में होने वाले चुनावों में शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीओके की अवस्थिति
  2. इससे होकर बहने वाली नदियाँ
  3. इसके निकटवर्ती देश / राज्य
  4. विलय के दस्तावेज

मेंस लिंक:

‘पाक अधिकृत कश्मीर’ (PoK) भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

ग्रीन बांड


(Green Bonds)

संदर्भ:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में सरकार द्वारा हरित बुनियादी ढांचे के लिए संसाधन जुटाने हेतु सॉवरेन ‘ग्रीन बांड’ (sovereign Green Bonds) जारी किए जाने का प्रस्ताव किया है।

  • ‘ग्रीन बांड’ से होने वाली आय को, अर्थव्यवस्था की कार्बन-गहनता कम करने में सहायक सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं में लगाया जाएगा।
  • अब, सरकार ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि ‘रुपये-मूल्यवर्ग के यह कागजात’ (ग्रीन बांड) ‘हरित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं’ की आवश्यकता के अनुरूप एक लंबे समय के लिए जारी किए जायेगे।

‘ग्रीन बॉन्ड’ क्या है?

‘ग्रीन बॉन्ड’ (Green Bond), एक प्रकार का ‘निश्चित आय’ उपकरण है, जिसे विशेष रूप से जलवायु और पर्यावरण संबंधित परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए निर्धारित किया जाता है।

  • ये बांड, आम तौर पर किसी परिसंपत्ति से संबद्ध होते हैं, और जारीकर्ता इकाई की बैलेंस शीट द्वारा समर्थित होते हैं, इसलिए इन बांड्स को प्रायः जारीकर्ता के अन्य ऋण दायित्वों के समान ‘क्रेडिट रेटिंग’ दी जाती है।
  • निवेशकों को आकर्षित करने हेतु ‘ग्रीन बांड’ में निवेश करने पर प्रोत्साहन के रूप में ‘करों’ आदि से कुछ छूट के साथ भी जारी किया जाता सकता है।
  • विश्व बैंक, ‘हरित बांड’ / ग्रीन बांड’ जारी करने वाली एक प्रमुख संस्था है। इसके द्वारा वर्ष 2008 से अब तक 164 ‘ग्रीन बांड’ जारी किए गए हैं, जिनकी कीमत संयुक्त रूप से 4 बिलियन डॉलर है। ‘क्लाइमेट बॉन्ड इनिशिएटिव’ के अनुसार, वर्ष 2020 में, लगभग 270 बिलियन डॉलर कीमत के ग्रीन बॉन्ड जारी किए गए थे।

‘ग्रीन बॉन्ड’ की कार्य-प्रणाली:

ग्रीन बॉन्ड, किसी भी अन्य कॉरपोरेट बॉन्ड या सरकारी बॉन्ड की तरह ही काम करते हैं।

  • ऋणकर्ताओं द्वारा इन प्रतिभूतियों को, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली या प्रदूषण को कम करने जैसे ‘सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव’ डालने वाली परियोजनाओं के ‘वित्तपोषण’ को सुरक्षित करने के लिए जारी किया जाता है।
  • इन बांडों को खरीदने वाले निवेशक, इनके परिपक्व होने या अवधि पूरी होने पर, उचित लाभ अर्जित करने की उम्मीद कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, ग्रीन बॉन्ड में निवेश करने पर अक्सर ‘कर’ संबंधी लाभ भी प्राप्त होते हैं।

ग्रीन बॉन्ड बनाम ब्लू बॉन्ड:

‘ब्लू बॉन्ड’ (Blue Bonds), समुद्र और संबंधित पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा हेतु परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए जारी किए जाने वाले ‘संधारणीयता बांड’ होते हैं।

  • यह बांड, संवहनीय मत्स्य पालन, प्रवाल भित्तियों और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा, अथवा प्रदूषण और अम्लीकरण को कम करने वाली परियोजनाओं के लिए जारी किए जा सकते हैं।
  • सभी ब्लू बॉन्ड, ‘ग्रीन बॉन्ड’ होते हैं, लेकिन सभी ‘ग्रीन बॉन्ड’, ब्लू बॉन्ड नहीं होते हैं।

‘ग्रीन बांड बनाम जलवायु बांड’

“ग्रीन बॉन्ड्स” और “क्लाइमेट बॉन्ड्स” को कभी-कभी एक-दूसरे के पर्यायवाची की तरह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ‘क्लाइमेट बॉन्ड्स’ शब्द को कुछ अधिकारी, विशेष रूप से कार्बन उत्सर्जन को कम करने या जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने पर केंद्रित परियोजनाओं के लिए उपयोग करते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रीन बांड’ के बारे में
  2. कार्य-प्रणाली
  3. विशेषताएं
  4. ये ब्लू बांड से किस प्रकार भिन्न होते हैं।

मेंस लिंक:

ग्रीन बॉन्ड के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का 70 साल का शासनकाल

  • महारानी एलिजाबेथ द्वितीय 70 वर्षों तक शासन करने वाली इतिहास की पहली ब्रिटिश शासक बन गई हैं।
  • वह 6 फरवरी 1952 को ब्रिटेन की रानी बनीं थी।

Current Affairs

 

अरावली जैव विविधता पार्क

‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’ पर, अर्थात 2 फरवरी को, गुरुग्राम के ‘अरावली जैव विविधता पार्क’ (Aravalli Biodiversity Park) को पहला ‘अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपाय स्थल’ (Other Effective Area-based Conservation Measure- OECM site) / ओईसीएम साइट के रूप में घोषित किया गया था।

  • OECM टैग, ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ’ (International Union for Conservation of Nature – IUCN) द्वारा प्रदान किया जाता है। IUCN के अनुसार- OECM स्थल, अभिसमय के तहत संरक्षित नहीं होते हैं, किंतु जैव विविधता से समृद्ध होते हैं।
  • OECM क्षेत्रों को वर्ष 2018 में आयोजित ‘जैव विविधता सम्मेलन’ में परिभाषित किया गया था।
  • ओईसीएम टैग प्राप्त क्षेत्र के लिए, किसी प्रकार की कानूनी, वित्तीय या प्रबंधन संबंधी बाध्यता नहीं होती, लेकिन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर ‘जैव विविधता हॉटस्पॉट’ के रूप में नामित किया जाता है।
  • ‘अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपाय’ (OECM), संरक्षित क्षेत्रों के बाहर जैव विविधता का यथा-स्थानिक (in-situ) संरक्षण हासिल करने वाले क्षेत्रों के लिए दिया जाने वाला ‘संरक्षण पदनाम’ होता है।

अरावली जैव विविधता पार्क’:

अर्ध-शुष्क वनस्पति का 390 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें लगभग 300 देशी पौधे, 101,000 पेड़, 43,000 झाड़ियाँ और पक्षियों की कई प्रजातियाँ पायी जाती हैं।

दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक ‘अरावली’ को ‘दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ का ‘हरा फेफड़ा’ – इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण जल पुनर्भरण क्षेत्र- माना जाता है। यह क्षेत्र, तेंदुए, सांभर, लोमड़ी, और सियार आदि जीवों से समृद्ध है।


Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates

Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos