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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 January 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-I

1. बम चक्रवात

 

सामान्य अध्ययनII

1. संसद का बजट सत्र

2. केरल की सिल्वरलाइन परियोजना

3. भारत के साथ ‘गहरी दोस्ती’: इस्राइल के प्रधानमंत्री

 

सामान्य अध्ययनIII

1. बैड बैंक

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. होंडुरास की पहली महिला राष्ट्रपति

2. भारत सरकार के नए ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार’

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ

बम चक्रवात


(Bomb Cyclone)

संदर्भ:

अमेरिका के पूर्वी तट पर, मध्य अटलांटिक की ओर से आने वाले “बम चक्रवात” (Bomb Cyclone) अथवा नॉर’एस्टर (Nor’easter) से निपटने हेतु युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

Current Affairs

 

‘बम चक्रवात’ के बारे में:

‘बॉम्बोजेनेसिस’ (Bombogenesis) इस प्रकार के चक्रवातों के लिए एक तकनीकी शब्द है। इसे संक्षिप्त रूप से एवं बेहतर उपयोग के लिए, मीडिया / सोशल मीडिया पर प्रायः ‘बम साइक्लोन’  (Bomb Cyclone) कहा जाता है।”

  • यह एक मध्य अक्षांशीय चक्रवात है जो काफी कम समय में तेजी से प्रचंड हो जाता है।
  • इसके केंद्र में निम्न वायुदाब होता है, और इसमें ख़राब मौसम एवं बर्फीले तूफ़ान से लेकर तेज आंधी और भारी वर्षा तक मौसम से संबंधित कई रूप देखने को मिलते हैं।

उत्पत्ति:

आम तौर पर,  जब ‘चक्रवात के केंद्र में वायुमंडलीय दाब, 24 घंटों में कम से कम 24 मिलीबार तक गिर जाता है, जिससे इसकी प्रचंडता में तेजी से वृद्धि होने लगती है, तब इसे ‘बम चक्रवात’ कहा जाता है या इस तरह से बम चक्रवात की उत्पप्ति होती है। चक्रवात के केंद्र में वायुदाब जितना कम होगा, तूफान उतना ही प्रचंड होगा।

Currrent Affairs

 

यह हरिकेन से किस प्रकार भिन्न है?

‘बम चक्रवात’ मुख्यतः ‘उष्णकटिबंधीय हरिकेन चक्रवातों’ से भिन्न, एक तेजी से विकसित होने वाली चक्रवात प्रणाली के समान होता है।  ‘उष्णकटिबंधीय हरिकेन’ (Tropical Hurricane) की उत्पत्ति, मध्य अक्षांशों में उष्ण वाताग्र एवं शीत वाताग्र के मिलने से होती है, जबकि ‘बम चक्रवात’ के निर्माण के लिए ग्रीष्मकालीन के अंतिम दौर में सागरीय जल की अशांत अवस्था प्रेरक का कार्य करती है।

  • बम चक्रवातों में ठंडी हवा और वाताग्र पाए जाते हैं। ठंडी हवा ‘हरिकेन’ को तेजी से शांत कर देती है, जबकि बम चक्रवातों का यह एक मुख्य घटक होती है।
  • बम चक्रवातों का निर्माण सर्दियों के दौरान होता है। हरिकेन चक्रवातों की उत्पप्ति आरंभिक ग्रीष्मकाल से लेकर शीतकाल के शुरू होने के बीच होती है। जबकि बम चक्रवातों की उत्पप्ति शुरुआती शीतकाल से लेकर के ग्रीष्मकाल शुरू होने के बीच होती है।
  • बम चक्रवात, उच्च अक्षांशों पर निर्मित होते हैं। हरिकेन तूफानों का निर्माण उष्णकटिबंधीय जल में होता हैं, जबकि ‘बम चक्रवातों’ की उत्पत्ति उत्तर-पश्चिमी अटलांटिक, उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर और कभी-कभी भूमध्य सागर के ऊपर होती है।

Current Affairs

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि दो प्रसिद्ध मौसम विज्ञानी, फ्रेड सैंडर्स और जॉन ग्याकुम ने 1980 में एक अध्ययन के दौरान ‘बम साइक्लोन पैटर्न’ का नामकरण किया था?

क्या आप जानते हैं कि सभी ‘बम चक्रवात’, हरिकेन नहीं होते हैं? लेकिन कभी-कभी, बहुत तेज हवाओं, भारी वर्षा और केंद्र में एक स्पष्ट ‘आँख’ (EYE) जैसी विशेषताओं के कारण ‘हरिकेन चक्रवातों’ की तरह बन जाते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चक्रवात क्या है?
  2. चक्रवात, हरिकेन और टाइफून के मध्य अंतर।
  3. बम चक्रवात क्या है?

मेंस लिंक:

‘बम चक्रवात’ क्या होता है? यह किस प्रकार निर्मित होता है?

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

संसद का बजट सत्र


(Budget Session of Parliament)

संदर्भ:

संसद का बजट सत्र 2022 (Budget Session of Parliament, 2022) 31 जनवरी से शुरू हो गया है और यह 8 अप्रैल को समाप्त होगा।

सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों को संबोधित करेंगे।

आगे की कर्रवाई:

31 जनवरी को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दोनों सदन के समक्ष ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22’ को रखा जाएगा।

  • 1 फरवरी को प्रातः 11 बजे वित्त मंत्री लोकसभा एवं राज्यसभा में “वार्षिक वित्तीय विवरण” अर्थात “बजट” पेश करेंगी।
  • बजट सत्र के पहले दो दिनों के दौरान, संसद के दोनों सदनों में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं होगा।
  • बजट पेश करने के पश्चात्, सत्र के पहले भाग (2-11 फरवरी) के दौरान, विभिन्न कार्यों, जैसे प्रश्न, गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य, धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा, केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा आदि के लिए 40 घंटे का सामान्य समय निर्धारित होता है।

संसद सत्रों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

अनुच्छेद 85 के अनुसार, संसद के दो सत्रों के मध्य ‘छह महीने से अधिक’ का अंतराल नहीं होना चाहिए।

  • संविधान यह निर्दिष्ट नहीं करता है, कि संसद का सत्र कब या कितने दिनों के लिए होना चाहिए।
  • संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल छह महीने से अधिक नहीं हो सकता है। अर्थात, एक वर्ष में कम से कम दो बार संसद की बैठक होना अनिवार्य है।

भारत में बजट प्रक्रिया:

लोकसभा में बजट पेश करने और उसे पारित करने की प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 112-117, ‘लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों’ (Rules of Procedure and Conduct of Business in Lok Sabha) के नियम 204-221 और 331-E तथा लोकसभा अध्यक्ष के दिशा-निर्देश संख्या 19-B में निर्धारित है।

बजट प्रकिया छह चरणों में संपन्न होती है:

  1. बजट की प्रस्तुति;
  2. सामान्य चर्चा;
  3. विभागीय समितियों द्वारा जांच;
  4. अनुदान मांगों पर मतदान;
  5. विनियोग विधेयक का पारित होना;
  6. वित्त विधेयक का पारित होना।

बजट की प्रस्तुति:

भारत में राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित तिथि पर संसद में “वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) प्रस्तुत किया जाता है। बजट की प्रस्तुति के तत्काल बाद, ‘राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम’, 2003 के तहत निम्नलिखित तीन विवरण भी लोकसभा के पटल पर रखे जाते हैं:

  1. मध्यावधि राजकोषीय नीति वक्तव्य (The Medium-Term Fiscal Policy Statement);
  2. राजकोषीय नीति रणनीति वक्तव्य (The Fiscal Policy Strategy Statement); तथा
  3. मैक्रो इकोनॉमिक फ्रेमवर्क स्टेटमेंट (Macro-Economic Framework Statement)।

बजट और संबंधित पदों के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लेख को पढ़ें।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसद सत्र को आहूत करने की शक्ति किसे प्राप्त है?
  2. अनुच्छेद 85
  3. लोकसभ अध्यक्ष एवं राज्यसभा के सभापति की शक्तियों में अंतर।
  4. ‘अनिश्चित काल के लिए स्थगन’ क्या होता है?
  5. सदन का विघटन क्या है?
  6. राज्यसभा को भंग क्यों नहीं किया जा सकता?
  7. बजट क्या है?

मेंस लिंक:

संसद के दोनों सदनों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कौन से उपाय किए जाने चाहिए है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

केरल की सिल्वरलाइन परियोजना


(Kerala’s SilverLine Project)

संदर्भ:

पूरे केरल में सिल्वरलाइन के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली सरकार, परियोजना को लागू करने पर अड़ी हुई है।

संबंधित प्रकरण:

सिल्वरलाइन परियोजना (SilverLine project) की ‘वित्तीय व्यवहार्यता’ की “कमी” के साथ-साथ पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव को लेकर लोगों का बड़ा वर्ग इसका विरोध कर रहा है।

परियोजना को लेकर उठाए जाने वाले प्रश्नों में निम्नलिखित सवाल शामिल हैं:

  • कर्ज में डूबा राज्य इस परियोजना का वहन कैसे कर सकता है;
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु राज्य के लिए कितनी ‘पारिस्थितिक कीमत’ चुकानी होगी;
  • क्या सिल्वरलाइन के निर्माण की लागत को देखते हुए क्या यह ट्रेन सेवा सस्ती होगी;
  • और, विस्थापितों के पुनर्वास की क्या योजना है?

यद्यपि, सबसे बड़ी चिंता ‘परामर्श की कमी’ बताई जा रही है, कि सरकार ने इस संदर्भ में हितधारकों से यथोचित मशवरा नहीं किया है।

Current Affairs

 

सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट के बारे में:

यह केरल की प्रमुख ‘सेमी हाई-स्पीड’ रेलवे परियोजना (semi high-speed railway project) है, और इसका उद्देश्य राज्य के उत्तरी और दक्षिणी छोर के बीच यात्रा के समय को कम करना है।

  • यह परियोजना केरल के दक्षिण में स्थित तथा राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को, राज्य की उत्तरी सीमा पर स्थित ‘कासरगोड’ से जोड़ती है।
  • यह लाइन लगभग 45 किलोमीटर लंबी होगी, और राज्य के 11 जिलों से होकर गुजरेगी।
  • यह परियोजना केरल रेल विकास निगम लिमिटेड (KRDCL) द्वारा निष्पादित की जा रही है। KRDCL अथवा के- रेल (K-Rail), केरल सरकार और केंद्रीय रेल मंत्रालय के मध्य एक संयुक्त उद्यम है।

परियोजना के प्रमुख बिंदु:

  • इस परियोजना में ‘इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट’ (EMU) प्रकार की ट्रेनें प्रयुक्त की जायेंगी, जिनमें से प्रत्येक ट्रेन में अधिमानतः नौ डिब्बे होंगे और इनकी संख्या 12 तक बढाई जा सकती है।
  • नौ-डिब्बों की ट्रेन में, व्यावसायिक और सामान्य श्रेणी की सेटिंग में अधिकतम 675 यात्री बैठ सकते हैं।
  • ये ट्रेनें स्टैण्डर्ड गेज ट्रैक पर 220 किमी/घंटा की अधिकतम गति से दौड़ सकती हैं और चार घंटे से भी कम समय में किसी भी दिशा में यात्रा पूरी कर सकती हैं।
  • पूरे ट्रैक पर हर 500 मीटर पर ‘सर्विस रोड’ सहित अंडर-पैसेज बनाए जाएंगे।

सिल्वरलाइन परियोजना की आवश्यकता:

  • समय की बचत: मौजूदा नेटवर्क पर, कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक की दूरी तय करने में अभी 12 घंटे का समय लगता है। परियोजना पूरी हो जाने के बाद, यह दूरी 200 किमी / घंटा की रफ़्तार से चार घंटे से भी कम समय में तय की जा सकती है।
  • इलाके में बाधाएं: मौजूदा ट्रैक पर बहुत सारे वक्र और मोड़ होने के कारण अधिकांश ट्रेनें 45 किमी / घंटा की औसत गति से ही चल पाती हैं।
  • परिवहन-भार में कमी (De-trafficking): परियोजना के पूरा होने के पश्चात् इस मार्ग पर होने वाले यातायात का महत्वपूर्ण भार ‘सिल्वरलाइन रेल’ के द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे यात्रियों के लिए तीव्र गति से यात्रा करने की सुविधा मिलेगी और सड़कों पर भीड़भाड़ कम होगी तथा दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
  • यह परियोजना ‘ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन’ को कम करेगी, ‘रो-रो सेवाओं’ (Ro-Ro services) के विस्तार में मदद करेगी, रोजगार के अवसर पैदा करेगी, हवाई अड्डों और आईटी गलियारों को जोड़ेगी और मार्ग में आने वाले शहरों के तेजी से विकास को सक्षम करेगी।

परियोजना से जुड़े विवाद:

  • राजनीतिक बयानबाजी: सभी राजनीतिक दल परियोजना के खिलाफ अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे हैं।
  • बड़ी पूंजी की आवश्यकता: विरोधियों का तर्क है कि यह परियोजना एक “महा घोटाला” है और यह राज्य को और अधिक कर्ज में डुबो देगी।
  • परिवारों का विस्थापन: यह परियोजना आर्थिक रूप से अव्यावहारिक है और इससे 30,000 से अधिक परिवारों का विस्थापन होगा।
  • पारिस्थितिक क्षति: चूंकि, यह परियोजना कीमती आर्द्रभूमि, धान के खेतों और पहाड़ियों से होकर गुजरती है, अतः इससे पर्यावरण को बहुत नुकसान होगा।
  • बाढ़ का खतरा: परियोजना के अधिकांश भाग में सिल्वरलाइन के दोनों ओर तटबंधों का निर्माण किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक जल निकासी अवरुद्ध हो जायेगी और यह भारी बारिश के दौरान बाढ़ का कारण बनेगी।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. के-सिल्वर लाइन परियोजना के बारे में
  2. प्रमुख बिंदु
  3. मार्ग में आने वाले जिले
  4. कार्यान्वयन एजेंसी

मेंस लिंक:

सिल्वरलाइन परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

भारत के साथ ‘गहरी दोस्ती’: इस्राइल के प्रधानमंत्री


संदर्भ:

इजरायल और भारत, दोनों देशों के मध्य राजनयिक संबंधों के 30 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।

यद्यपि, भारत द्वारा इज़राइल को एक देश के रूप में मान्यता 17 सितंबर, 1950 को ही प्रदान कर दी गयी थी, लेकिन देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध 29 जनवरी, 1992 को स्थापित किए गए थे।

भारत-इजरायल संबंधों पर इजरायल के प्रधान मंत्री द्वारा की गई टिप्पणियां:

  • दोनों देशों में “गहरी दोस्ती” है।
  • दोनों देशों के मध्य सहयोग के “अनंत” अवसर मौजूद हैं।

इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भारत का रुख:

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व पर खुली बहस में, भारत ने फिलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी दृढ़ और अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है और एक ‘दो-राष्ट्र समाधान’ (Two-State Solution) पर बातचीत का समर्थन किया है।
  • इस बैठक में ‘दो-राष्ट्र समाधान’ को नष्ट होने से रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए सुरक्षा परिषद द्वारा संकल्प 2334 को पारित किया गया।

इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष (Israel- Palestine conflict)- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच भूमि के एक टुकड़े को लेकर यहूदियों और अरबों के बीच 100 वर्षों से भी अधिक समय से संघर्ष जारी है।
  • साल 1882 से 1948 के बीच दुनिया भर के यहूदी फिलिस्तीन में एकत्र हुए थे। इतिहास में, इस घटना को अलियाह (Aliyahs) के नाम से जाना जाता है।
  • फिर वर्ष 1917 में, प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्क साम्राज्य का पतन हो गया और फिलिस्तीन पर ब्रिटेन ने नियंत्रण कर लिया।
  • इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक यहूदी और बहुसंख्यक अरब निवास करते थे।
  • इस क्षेत्र पर ब्रिटेन का कब्ज़ा होने के बाद, फिलीस्तीन में यहूदियों को बसाने के उद्देश्य से बालफोर घोषणा (Balfour Declaration) जारी की गई। जबकि, उस समय फिलिस्तीन में बहुसंख्यक आबादी अरबों की थी।
  • यहूदियों ने इस ‘बालफोर घोषणा’ का समर्थन किया जबकि फिलिस्तीनियों ने इसे मानने से अस्वीकार कर दिया। कुछ समय पहले यूरोप में हुए होलोकॉस्ट (Holocaust) में लगभग 6 मिलियन यहूदी मारे जा चुके थे, और इस कारण से एक पृथक यहूदी राज्य की मांग तेजी पर चल रही थी।
  • यहूदियों ने फिलिस्तीन को अपना प्राकृतिक घर बताते हुए इस पर अपना दावा किया, और दूसरी और अरबों ने भी अपनी जमीन को नहीं छोड़ा और अपना दावा कायम रखा।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने यहूदियों का समर्थन किया।
  • 1947 में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा फिलिस्तीन को एक पृथक यहूदी देश और अरब देश में विभाजित करने के पक्ष में मतदान किया गया, जिसमें यरूशलेम एक अंतरराष्ट्रीय शहर बना दिया गया।
  • विभाजन की इस योजना को यहूदी नेताओं ने स्वीकार कर लिया किंतु अरब पक्ष ने इसे खारिज कर दिया और कभी मान्यता नहीं दी।

 

इज़राइल का निर्माण और विनाश’:

  • वर्ष 1948 में ब्रिटेन ने इस क्षेत्र से अपना नियंत्रण वापस ले लिया और यहूदियों ने इज़राइल के निर्माण की घोषणा कर दी। हालांकि, फिलीस्तीनियों ने इसका विरोध किया, किंतु यहूदी पीछे नहीं हटे और इसके परिणामस्वरूप दोनों के मध्य सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया।
  • इसी दौरान पड़ोसी अरब देशों ने भी इस क्षेत्र पर हमले किए, किंतु इजरायली सैनिकों ने इन्हें पराजित कर दिया। इस लड़ाई के बाद हजारों फिलिस्तीनियों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा। इस घटना के लिए ‘अल-नकबा’ (Al-Nakba), या “विनाश” कहा जाता है।
  • लड़ाई के समाप्त होने के बाद इस क्षेत्र के अधिकाँश भू-भाग को इज़राइल ने अपने नियंत्रण में ले लिया।
  • फिर, जॉर्डन का इज़राइल के साथ युद्ध हुआ जिसमे ‘वेस्ट बैंक’ कहे जाने वाले क्षेत्र पर जॉर्डन ने अपना कब्ज़ा कर लिया तथा गाजा पर मिस्र ने अपना अधिकार जमा लिया।
  • यरुशलम शहर, दो हिस्सों में विभाजित हो गया, इसके पूर्व भाग पर जॉर्डन का अधिकार है, जबकि पश्चिमी भाग पर इज़राइल का नियंत्रण है। अभी तक, किसी भी औपचारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए है और इस क्षेत्र में होने वाले तनाव के लिए प्रत्येक पक्ष एक-दूसरे को दोषी ठहराता रहता है, और इस क्षेत्र में लड़ाई होती रहती है।
  • वर्ष 1967 में, इजरायली सेना ने पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक, सीरिया की ‘गोलन हाइट्स’, गाजा और मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था।

वर्तमान परिदृश्य:

  • इज़राइल का अभी भी वेस्ट बैंक पर कब्जा है, हालांकि इसने गाजा पर अपना अधिकार छोड़ दिया है किंतु, संयुक्त राष्ट्र अभी भी भूमि के इस भाग को अधिकृत क्षेत्र का हिस्सा मानता है।
  • इज़राइल, पूरे यरुशलम को अपनी राजधानी होने का दावा करता है, जबकि फिलिस्तीनी, पूर्वी यरुशलम को भविष्य के फिलिस्तीनी राष्ट्र की राजधानी होने का दावा करते हैं। अमेरिका, पूरे यरुशलम शहर पर इज़राइल के दावे को मान्यता देने वाले गिने-चुने देशों में से एक है।
  • पूर्वी यरुशलम में अल-अस्का मस्जिद के संबंध में इज़राइल की कार्रवाइयों को लेकर हाल के महीने में तनाव बढ़ गया है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इजरायल-फिलिस्तीन विवाद क्या है?
  2. दोनों के बीच विवादित सीमाएं
  3. वेस्ट बैंक बस्ती विवाद
  4. इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र, इज़राइल, फिलिस्तीन द्वारा लिया गया स्टैंड
  5. इस मुद्दे से उत्पन्न चुनौतियाँ
  6. भारत का रुख

मेंस लिंक:

मध्य एशिया क्षेत्र पर इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद के प्रभाव तथा भारत के हितों पर इसके प्रभाव के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

बैड बैंक


(Bad Bank)

संदर्भ:

इस वर्ष (2021) के बजट में घोषित किए जाने वाले एक प्रमुख प्रस्ताव – घाटे में चल रही बैंकिंग प्रणाली में तनावग्रस्त संपत्तियों से निपटने के लिए एक ‘बैड बैंक’ (Bad Bank) की स्थापना – के लिए सभी नियामकों का अनुमोदन प्राप्त जो चुका है।

राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड’ (NARCL) क्या है?

ऋणदाताओं की तनावग्रस्त आस्तियों की जिम्मेवारी लेने हेतु प्रस्तावित बैड बैंक अर्थात ‘राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड’ (National Asset Reconstruction Company Ltd. – NARCL) की स्थापना की घोषणा 2021-22 के बजट में की गई थी।

  • घोषणा के अनुसार, 500 करोड़ और उससे अधिक के बुरे ऋणों को सँभालने हेतु एक बैड बैंक (Bad Bank) की सथापना की जाएगी, तथा इसमें एक ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (Asset Reconstruction Company- ARC) और एक ‘आस्ति प्रबंधन कंपनी’ (Asset Management Company- AMC) भी शामिल होगी जो बेकार संपत्तियों का प्रबंधन और वसूली करेगी।
  • यह नई इकाई सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र के बैंकों के सहयोग से स्थापित की जा रही है।

राज्य के अधीन बैंकों के अधिकाँश शेयर वाले, NARCL को ‘भारत ऋण समाधान कंपनी लिमिटेड’ (India Debt Resolution Company Ltd – IDRCL) द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी, जो कि निजी बैंकों के अधिकाँश शेयर वाली, एक ‘प्रिंसिपल-एजेंट’ के रूप में समाधान प्रक्रिया का एक भाग होगी।

NARCL, मौजूदा ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियों’ (ARCs) से किस प्रकार भिन्न होगी?

  1. चूंकि, यह विचार सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया है और इसका अधिकाँश स्वामित्व, राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों के पास रहने की संभावना है, अतः इस प्रस्तावित बैड बैंक का स्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र का होगा।
  2. वर्तमान में, ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियां’ आमतौर पर ऋणों पर भारी छूट चाहती हैं। चूंकि यह एक सरकारी पहल है, अतः प्रस्तावित बैड बैंक के साथ आकलन संबंधी मुद्दा नहीं होगा।
  3. सरकार समर्थित ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ के पास बड़े खातों को खरीदने के लिए पर्याप्त क्षमता होगी और इस प्रकार बैंकों के लिए इन बुरे खातों को अपने खाता-विवरण में रखने से मुक्त किया जाएगा।

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) क्या है?

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (Asset Reconstruction Companies- ARC), ऐसे विशेष वित्तीय संस्थान होते है जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (Non-Performing Assets- NPAs) खरीदते हैं, ताकि वे अपनी बैलेंसशीट को साफ कर सकें।

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ अथवा ‘एआरसी’ (ARC), आरबीआई के अंतर्गत पंजीकृत होती हैं।

कानूनी आधार:

‘वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्रचना एवं प्रतिभूति हित प्रवर्तन’ (Securitization and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest -SARFAESI) अधिनियम 2002, भारत में ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियों’ ( ARCs) का गठन करने हेतु वैधानिक आधार प्रदान करता है।

ARCs के लिये पूंजी आवश्यकताएँ:

  • SARFAESI अधिनियम में, वर्ष 2016 में किये गए संशोधनों के अनुसार, किसी ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) के पास न्यूनतम 2 करोड़ रुपए की स्वामित्व निधि होनी चाहिये।
  • रिज़र्व बैंक द्वारा वर्ष 2017 में इस राशि को बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए कर गिया गया था। ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ के लिए अपनी जोखिम भारित आस्तियों / परिसंपत्तियों के 15% का पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखना आवश्यक है।

आवश्यकता:

बैंकिंग प्रणाली में तनावग्रस्त कुल राशि 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी। तनावग्रस्त आस्तियों और सीमित पूंजी के बोझ तले दबे बैंकों के लिए ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPAs)  को मैनेज करना मुश्किल होगा। सरकार भी केवल सीमित पूंजी ही प्रदान कर सकती है। अतः ऐसी स्थिति में बैड बैंक मॉडल, सरकार और बैंकों दोनों की मदद करेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2020 में दिए गए एक निर्णय के अनुसार, बैंकिंग से संबंधित गतिविधियों में शामिल सहकारी बैंक ‘बैंकिंग कंपनी’ के अंतर्गत आते हैं और संसद के पास SARFAESI अधिनियम के तहत ऋण की वसूली के लिए प्रक्रिया निर्धारित करने की विधायी क्षमता है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘एआरसी’ क्या हैं?
  2. ‘SARFAESI अधिनियम’ क्या है?
  3. ‘सुदर्शन सेन समिति’ किससे संबंधित है?
  4. NARCL के बारे में।

मेंस लिंक:

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


होंडुरास की पहली महिला राष्ट्रपति

हाल ही में वामपंथी विचारधारा की ‘शियोमारा कास्त्रो’ (Xiomara Castro) ने होंडुरास की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की है।

  • होंडुरास (Honduras) एक मध्य अमेरिकी देश है।
  • अवस्थिति: होंडुरास पश्चिम में ग्वाटेमाला, दक्षिण-पश्चिम में अल सल्वाडोर, दक्षिण-पूर्व में निकारागुआ, दक्षिण में प्रशांत महासागर से फोंसेका की खाड़ी में और उत्तर में कैरेबियन सागर का प्रवेश द्वार -होंडुरास की खाड़ी से घिरा हुआ है।

Current Affairs

 

भारत सरकार के नए ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार’

हाल ही में, भारत सरकार ने ‘अनंत नागेश्वरन’ को नया ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार’ (Chief Economic Advisor – CEA) नियुक्त किया है।

  • वह प्रधान मंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य रह चुके हैं।
  • ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार’ (CEA) भारत के वित्त मंत्री को रिपोर्ट करता है।
  • ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार’ का पद भारत सरकार के सचिव के समकक्ष होता है।
  • सीईए आर्थिक मामलों के विभाग का प्रमुख होता है तथा वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है।

Current Affairs


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