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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 January 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-I

1. राष्ट्रीय युवा दिवस

 

सामान्य अध्ययन-II

1. क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी और भारत

2. भारत और ब्रिटेन के मध्य ‘मुक्त व्यापार क्षेत्र’ पर वार्ता का आरंभ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. गगनयान मिशन

2. हेट स्पीच

3. असम मेघालय सीमा विवाद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. इंदु मल्होत्रा ​​समिति

2. ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल

3. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

राष्ट्रीय युवा दिवस


संदर्भ:

12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है।

  • इस दिन को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1984 में हुई थी।
  • इसका मुख्य उद्देश्य, देश का भविष्य समझे जाने वाले युवाओं में तर्कसंगत सोच को प्रोत्साहित करना है।

Current Affairs

 

स्वामी विवेकानंद के बारे में:

  • वह वास्तविक रूप से एक तेजस्वी व्यक्‍ति थे, और इनके लिए पश्चिमी जगत को हिंदू धर्म से परिचित कराने का श्रेय दिया जाता है।
  • वह श्री रामकृष्ण परमहंस के एक उत्साही शिष्य और भारत में हिंदू धर्म का पुनरुद्धार करने में एक प्रमुख शक्ति थे।
  • उन्होंने औपनिवेशिक भारत में राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया, और उन्होंने वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में अपना सर्वाधिक प्रसिद्ध भाषण दिया था ।
  • वर्ष 1984 में भारत सरकार द्वारा स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस 12 जनवरी को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में घोषित किया गया था।

प्रारंभिक जीवन एवं योगदान:

  • 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानंद को उनके संन्यास-पूर्व जीवन में नरेंद्र नाथ दत्त के नाम से जाना जाता था।
  • उन्हें योग और वेदांत संबंधी हिंदू दर्शन को पश्चिम में प्रस्तुत करने के लिए जाना जाता है।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने विवेकानंद को “आधुनिक भारत का निर्माता” कहा था।
  • 1893 में, खेतड़ी राज्य के महाराजा अजीत सिंह के अनुरोध पर उन्होंने ‘विवेकानंद’ नाम धारण किया था।
  • उन्होंने, सबसे निर्धन और निकृष्ट लोगों तक उत्कृष्ट विचारों को पहुचाने के लिए, 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।
  • वर्ष 1899 में उन्होंने बेलूर मठ की स्थापना की, जो आगे चलकर उनका स्थायी निवास बन गया।
  • उन्होंने ‘नव-वेदांत’, पश्चिमी दृष्टिकोण से हिंदू धर्म की व्याख्या, का प्रचार किया, और वह भौतिक प्रगति के साथ-साथ आध्यात्मिकता के संयोजन में विश्वास करते थे।

उनके द्वारा रचित पुस्तकें:

‘राज योग’, ‘ज्ञान योग’, ‘कर्म योग’ उनके द्वारा लिखी गयी कुछ पुस्तकें हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि अब तक विश्व में छह अंतर्राष्ट्रीय आधुनिक धर्म संसद का आयोजन किया जा चुका है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व धर्म संसद, 1893 के बारे में
  2. मुख्य प्रतिभागी
  3. हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किसने किया?
  4. विश्व धर्म संसद परिषद का मुख्यालय
  5. अब तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आधुनिक धर्म संसद
  6. हिंदू धर्म में स्वामी विवेकानंद का योगदान
  7. रामकृष्ण मिशन के बारे में

मेंस लिंक:

स्वामी विवेकानंद, पश्चिम में ‘भारतीय ज्ञान के दूत’ किस प्रकार बन गए। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) संधि और भारत


संदर्भ:

हाल ही में, दक्षिण कोरिया ने ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी’ (Regional Comprehensive Economic PartnershipRCEP) में भारत की अनुपस्थिति पर खेद जताया है और नई दिल्ली के इस समझौते में फिर से शामिल होने की आशा व्यक्त की है।

RCEP का कार्यान्वयन:

‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी’ (RCEP) समझौता 1 जनवरी, 2022 से प्रभावी हो चुका है। इसके साथ ही, यह ‘व्यापार की मात्रा’ के मामले में विश्व का सबसे बड़ा ‘मुक्त व्यापार क्षेत्र’ समझौता बन गया है।

RCEP में भारत क्यों शामिल नहीं हुआ?

भारत, ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी’ (RCEP) से मुख्यतः चीन द्वारा उत्पादित सस्ते सामान के देश में प्रवेश करने संबंधी चिंताओं के कारण अलग हो गया था। चीन के साथ भारत का व्यापार असंतुलन पहले से काफी अधिक है। इसके अलावा, यह समझौता ‘सेवाओं को पर्याप्त रूप से खुला रखने में विफल’ रहा था।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP)  में भारत की मौजूदगी की आवश्यकता:

  • बढ़ती हुई वैश्विक अस्थिरता के दौर में एक समावेशी संरचना का निर्माण करने हेतु क्षेत्र की सहायता करने में भारत को ‘एक महत्वपूर्ण भूमिका’ अदा करनी थी।
  • इस प्रकार के व्यापारिक समझौते, भारतीय कंपनियों को बड़े बाजारों में भी अपनी ताकत दिखाने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं।
  • इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता हुआ तनाव, क्षेत्र के लिए ‘गंभीर चिंता’ का विषय है, जोकि महामारी के कारण और भी गहन हो गया है।

RCEP क्या है?

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP), विश्व का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता है, जिसमे चीन, जापान ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और आसियान (ASEAN) के दस देश, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई, लाओस, म्यांमार और फिलीपींस शामिल है।

Current Affairs

 

RCEP के लक्ष्य और उद्देश्य:

  1. उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विश्व के शेष भागों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सहायता करने हेतु टैरिफ कम करना, तथा सेवा क्षेत्र में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना।
  2. कंपनियों के लिए समय और लागत की बचत करने हेतु ब्लॉक के सदस्य देशों में भिन्न-भिन्न औपचारिकताओं को पूरा किये बिना किसी उत्पाद के निर्यात करने की सुविधा प्रदान करना।
  3. इस समझौते में बौद्धिक संपदा संबंधी पहलुओं को शामिल किया गया है, किंतु इसमें पर्यावरण संरक्षण और श्रम अधिकारों को सम्मिलित नहीं किया गया है।

महत्व:

  • ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी’ (RCEP) के अंतर्गत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 30%,  अर्थात 2 ट्रिलियन डॉलर (23.17 ट्रिलियन यूरो) और दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी, अर्थात लगभग 2.2 बिलियन लोगों की आबादी कवर होगी।
  • RCEP के तहत, इस संगठन के भीतर लगभग 90% व्यापार शुल्क अंततः समाप्त हो जाएंगे।
  • RCEP के तहत, व्यापार, बौद्धिक संपदा, ई-कॉमर्स और प्रतिस्पर्धा से संबंधित सामान्य नियम भी निर्धारित किए जाएंगे।

Current Affairs

 

आगे की चुनौतियां:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका की अनुपस्थिति में, बीजिंग को इस क्षेत्र में ‘आर्थिक विकास’ के चालक के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
  • आर्थिक लाभों को मूर्त रूप लेने में लंबा समय लगेगा।
  • जहाँ बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाएं अधिकांश लाभ उठाएंगी, वहीं RCEP के तहत ASEAN में शामिल छोटे देशों को नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि इस व्यापार समझौते में इन देशों के प्रमुख उद्योगों को कवर नहीं किया गया है।
  • एशिया में सबसे कम विकसित देश – कंबोडिया, लाओस, म्यांमार – वर्तमान में ‘आसियान समूह’ के भीतर होने वाले व्यापार से लाभान्वित होते हैं। RCEP के मध्य व्यापार से इन देशों के व्यापार को चोट पहुँच सकती है।
  • RCEP समझौते के तहत, छोटे आसियान देशों को अपने ‘व्यापार वरीयता कार्यक्रमों’ से होने वाले कुछ लाभों को गंवाना पड़ सकता है। अभी तक ये देश, दक्षिण कोरिया और जापान सहित आसियान समूह के बाहर टैरिफ-मुक्त उत्पादों का निर्यात किया करते थे।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि वर्तमान में चीन का जापान के साथ कोई द्विपक्षीय समझौता नहीं है, और केवल दक्षिण कोरिया के साथ एक सीमित सौदा है। जबकि ये दोनों देश चीन के क्रमशः तीसरे और पांचवें सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RCEP – संरचना और उद्देश्य
  2. आसियान देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते
  3. आसियान देशों की भौगोलिक अवस्थिति
  4. RCEP के लक्ष्य और उद्देश्य

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

भारत और ब्रिटेन के मध्य ‘मुक्त व्यापार क्षेत्र पर वार्ता का आरंभ


संदर्भ:

13 जनवरी, 2022 को यूनाइटेड किंगडम सरकार द्वारा भारत के साथ ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (Free Trade Agreement – FTA) पर वार्ता शुरू करने की घोषणा की गयी है।

इस निर्णय को ब्रिटिश व्यवसायों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में “सबसे आगे” खड़ा करने का “सुनहरा अवसर” बताया जा रहा है।

महत्व:

  • यह समझौता ब्रिटिश व्यवसायों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं के लिए भारी लाभ प्रदान करेगा।
  • इससे स्कॉच व्हिस्की, वित्तीय सेवाएं और अत्याधुनिक नवीकरणीय प्रौद्योगिकी आदि कुछ प्रमुख क्षेत्रों को सर्वाधिक लाभ मिलना तय है।

‘मुक्त व्यापार समझौता’ (FTA) क्या होता है?

यह आयात और निर्यात में आने वाली बाधाओं को कम करने के लिए दो या दो से अधिक देशों के मध्य एक समझौता होता है। ‘मुक्त व्यापार नीति’ के तहत, वस्तुओं और सेवाओं को, काफी कम अथवा बगैर किसी सरकारी शुल्क, कोटा, सब्सिडी या निषेध के अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार खरीदा और बेचा जा सकता है।

‘मुक्त व्यापार’ की अवधारणा ‘व्यापार संरक्षणवाद’ या ‘आर्थिक पृथकतावाद’ (Economic Isolationism) के विपरीत होती है।

विस्तार:

इस प्रकार के समझौतों में अन्य विषय-वस्तुओं के अलावा, सेवाओं, निवेश और आर्थिक सहयोग को भी शामिल किया जा सकता है।

  • आम तौर पर ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (FTA) में वस्तुओं (जैसे कृषि या औद्योगिक उत्पाद) या सेवा-व्यापार (जैसे बैंकिंग, निर्माण, व्यापार आदि) में व्यापार को शामिल किया जाता है।
  • FTA के तहत ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ (IPRs), निवेश, सरकारी खरीद और प्रतिस्पर्धा नीति आदि जैसे अन्य क्षेत्रों को भी शामिल किया जा सकता है।

Current Affairs

 

भारत के साथ व्यापार समझौते का ब्रिटेन के लिए महत्व:

वर्ष 2050 तक, भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जिसमें मध्यम वर्ग के खरीदारों की संख्या लगभग 250 मिलियन होगी।

  • यूनाइटेड किंगडम, इस विशाल नए बाजार को, खाद्य और पेय से लेकर सेवाओं और ऑटोमोटिव तक कई उद्योगों में प्रख्यात ब्रिटिश उत्पादकों और निर्माताओं के लिए खोलना चाहता है।
  • इस समझौते में, वर्ष 2035 तक द्विपक्षीय व्यापार को प्रति वर्ष 28 बिलियन ब्रिटिश पौंड तक बढ़ावा देने और पूरे यूनाइटेड किंगडम में 3 बिलियन ब्रिटिश पौंड तक का रोजगार सृजन की क्षमता है।
  • भारत के साथ इस व्यापार समझौते को ब्रिटेन की ‘BREXIT के बाद की रणनीति’ में एक “बड़ा कदम आगे” के रूप में भी आंका गया है। इस रणनीति के तहत, दुनिया की आधी आबादी और वैश्विक आर्थिक विकास का 50 प्रतिशत का योगदान करने वाले भारत-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार पर फिर से ध्यान केंद्रित करने पर महत्व दिया गया है।
  • मात्र शुल्क हटाने से यूनाइटेड किंगडम द्वारा भारत को किए जाने वाले निर्यात में 8 बिलियन ब्रिटिश पौंड तक की वृद्धि होगी। वर्तमान में स्कॉच व्हिस्की और कारों के आयात पर क्रमशः 150 प्रतिशत और 125 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाया जा रहा है।

Current Affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘अर्ली हार्वेस्ट एग्रीमेंट्स’ (Early harvest agreements) के बारे में जानते हैं? इस समझौतों के क्या लाभ होते हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

गगनयान मिशन


(Gaganyaan Mission)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में गगनयान कार्यक्रम के लिए क्रायोजेनिक इंजन का 720 सेकंड की अवधि के लिए का सफल परीक्षण किया।

  • इसरो के अनुसार, इंजन के प्रदर्शन का परीक्षण अपने उद्देश्यों को पूरा करता है और परीक्षण की पूरी अवधि के दौरान इंजन के पैरामीटर,लगाए गए अनुमानों के लगभग अनुरूप रहे।

महत्व:

लंबी अवधि का यह सफल परीक्षण, मानव सहित अंतरिक्ष कार्यक्रम-गगनयान के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर है। यह परीक्षण गगनयान के प्रक्षेपण यान में शामिल करने हेतु क्रायोजेनिक इंजन की विश्वसनीयता और मजबूती सुनिश्चित करता है।

‘गगनयान कार्यक्रम ‘की घोषणा कब की गई थी?

  • गगनयान कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2018 को अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान की थी।
  • पहले इसरो का लक्ष्य, भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ से पहले, 15 अगस्त, 2022 तक अपने पहले मानव-सहित अंतरिक्ष मिशन, गगनयान को लॉन्च करना था।

इस प्रक्षेपण के बाद, भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन शुरू करने वाला, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

उद्देश्य:

गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य, भारतीय प्रक्षेपण यान पर मानव को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की क्षमता प्रदर्शित करना है।

तैयारियां और प्रक्षेपण:

  1. गगनयान कार्यक्रम के एक भाग के रूप में चार भारतीय अंतरिक्ष यात्री-उम्मीदवार पहले ही रूस में सामान्य अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
  2. इस मिशन के लिए, इसरो के हैवी-लिफ्ट लॉन्चर ‘जी.एस.एल.वी. मार्क III’ (GSLV Mk III) को चिह्नित किया गया है।

भारत के लिए मानव-सहित अंतरिक्ष मिशन की प्रासंगिकता:

उद्योगों को प्रोत्साहन: अत्यधिक मांग वाले अंतरिक्ष अभियानों में भागीदारी के माध्यम से भारतीय उद्योग को बड़े अवसर प्राप्त होंगे। गगनयान मिशन में प्रयुक्त लगभग 60% उपकरणों को भारतीय निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित किया जाएगा।

रोजगार: इसरो प्रमुख के अनुसार, गगनयान मिशन 15,000 नए रोजगार के अवसर सृजित करेगा, उनमें से 13,000 रोजगार निजी उद्योग में होंगे। इसके अलावा, अंतरिक्ष संगठन के लिए 900 व्यक्तियों की अतिरिक्त श्रमशक्ति की आवश्यकता होगी।

प्रौद्योगिकी विकास: मानव सहित अंतरिक्ष उड़ानें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सबसे आगे हैं। मानव-सहित अंतरिक्ष उड़ानों से मिलने वाली चुनौतियां और इन मिशनों को स्वीकार करने से भारत को काफी लाभ होगा और भारत में तकनीकी विकास के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

अनुसंधान और विकास में प्रोत्साहन: इससे, अच्छे अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा मिलेगा। उचित उपकरणों सहित बड़ी संख्या में शोधकर्ताओं के शामिल होने से मानव सहित अंतरिक्ष उड़ानों (Human Space flights- HSF) से खगोल-जीव विज्ञान, संसाधन खनन, ग्रह रसायन विज्ञान, ग्रह कक्षीय अभिकलन और कई अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अनुसंधानों का विस्तार होगा।

प्रेरणा: मानव-सहित अंतरिक्ष उड़ान, राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य लोगों के साथ-साथ युवाओं को प्रेरणा प्रदान करेगी। यह, युवा पीढ़ी को उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी और उन्हें भविष्य के कार्यक्रमों में चुनौतीपूर्व भूमिका निभाने में सक्षम करेगी।

प्रतिष्ठा: भारत, मानव-सहित अंतरिक्ष मिशन शुरू करने वाला चौथा देश होगा। गगनयान न केवल देश में प्रतिष्ठा लाएगा, बल्कि अंतरिक्ष उद्योग में एक प्रमुख भागीदार के रूप में भारत की भूमिका भी स्थापित करेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप मीर स्पेस स्टेशन के बारे में जानते हैं? इसके बारे में जानकारी हेतु (संक्षेप में) पढ़ें

क्या आप जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत के ‘गगनयान मिशन’ में ‘कोकोस कीलिंग द्वीप’ (Cocos Keeling island) से निगरानी करने में सहयोग किया जाएगा। अंतरिक्ष और पृथ्वी पर स्थित स्टेशन के मध्य कुछ ‘ब्लाइंड स्पॉट’ होने के कारण कई बार सिग्नल नहीं पहुंचते हैं, अतः कोकोस कीलिंग द्वीप से डेटा रिले उपग्रह की निगरानी से इन मुद्दों के समाधान में मदद मिलेगी।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गगनयान के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. जीएसएलवी के बारे में

मेंस लिंक:

गगनयान मिशन भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

‘हेट स्पीच’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका


संदर्भ:

हाल ही में,  भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने “हरिद्वार धर्म संसद” के आयोजकों और वक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की है।

संबंधित प्रकरण:

19 से 21 दिसंबर, 2021 तक आयोजित होने वाली इस धर्म संसद में कई वक्ताओं द्वारा अपने-अपने भाषण दिए गए।

इन भाषणों में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा (“…1857 से भी अधिक भयानक युद्ध छेड़ना होगा” या “यदि आप उनकी [यानी, मुस्लिम] आबादी को खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें मार दें”) का खुला आह्वान तथा इनके आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार (“… यहां कोई मुस्लिम खरीदार नहीं है, इसलिए उस [मुस्लिम] विक्रेता को बाहर फेंक दें”) जैसी बाते कही गयी। इसके अलावा, इन भाषणों में, म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की जातीय सफाई की तुलना करते हुए लोगों को उकसाया गया।

अदालत में इसी तरह की अन्य याचिकाएं:

हाल के दिनों में नफरत भरे भाषणों (Hate Speeches) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं।

  1. एक याचिका में अदालत से ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए निर्देश जारी करने की मांग की गयी है। और,
  2. दूसरी याचिका में ‘हेट स्पीच’ के संबंध में विशेष प्रावधान बनाए जाने की मांग की गई है। इस याचिका में जोर देकर कहा गया है कि ‘हेट स्पीच’ और ‘अफवाह फैलाने’ से निपटने के लिए ‘भारतीय दंड संहिता’ के प्रावधान पर्याप्त नहीं है।

दोनों याचिकाएं ‘अमीश देवगन मामले’ में 2020 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है, जिसमे “‘द्वेषपूर्ण भाषण’ (Hate Speech)” को, एकता और बंधुत्व के खिलाफ और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार’ का एक अनिवार्य पहलू, ‘मानवीय गरिमा’ का उल्लंघन बताया गया था।

इन याचिकाओं से संबंधित प्रकरण:

याचिकाकर्ताओं ने, रैलियों और नफरत भरे भाषणों की एक श्रृंखला के माध्यम से मुसलमानों के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार को लक्षित करने वाली संगठित घटनाओं से चिंतित होकर शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की हैं।

याचिकाकर्ताओं ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘हेट स्पीच’ पर, और ‘भीड़ द्वारा हिंसा एवं लिंचिंग की घटनाओं’ पर वर्ष 2018 में जारी किए गए दिशानिर्देशों को लागू करने की मांग की है।

द्वेषपूर्ण भाषण’ (Hate Speech) क्या है?

‘द्वेषपूर्ण भाषण’ (हेट स्पीच), धार्मिक विश्वासों, यौन अभिविन्यास, लिंग आदि के आधार पर हाशिए पर स्थित व्यक्तियों के विशेष समूह के खिलाफ नफरत के लिए उकसाना है।

विधि आयोग द्वारा ‘हेट-स्पीच’ पर अपनी 267 वीं रिपोर्ट में कहा कि इस तरह के बयानों में व्यक्तियों और समाज को आतंकवाद, नरसंहार और जातीय हिंसा करने के लिए भड़काने की क्षमता होती है।

‘हेट स्पीच’ पर लगाम लगाने की आवश्यकता के कारण:

  1. आंतरिक सुरक्षा: वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे एक झूठे वीडियो के कारण फैले थे, इसके द्वारा जिसने सांप्रदायिक जुनून भडकाया गया था।
  2. ‘द्वेषपूर्ण भाषण’ उग्रवादी भावनाओं को भड़काते है।
  3. मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) ।
  4. झूठी ख़बरें तथा भ्रामक जानकारी: दिल्ली दंगे।

उपाय:

  1. फेसबुक, गूगल, ट्विटर और बाइटडांस सहित विश्व की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां, भारत में अपने प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों को रोकने के लिए एक उद्योग-व्यापी गठबंधन तैयार करने पर विचार कर रही हैं।
  2. भारत के निर्वाचन आयोग के लिए फर्जी खबरों को तैयार करने वालों पहचान करने के लिए तकनीकी कंपनियों के साथ गठजोड़ करना चाहिए।
  3. अंतिम उपयोगकर्ताओं को शिक्षित करना चाहिए।
  4. सरकार के लिए इंटरनेट मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के कारण होने वाले संभावित नुकसानों से गहन स्तर पर निपटने हेतु पर नीतिगत रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।
  5. जर्मनी में, यदि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफ़ॉर्म अनुचित सामग्री हटाने में निरंतर असफल रहती हैं तो उन पर € 50 मिलियन तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसी भांति भारत में भी जुर्माना लागू किया जा सकता है।

समय की मांग:

  • हेट स्पीच, हाशिए पर रहने वाले समूहों को समाज के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों से बाहर धकेलने की एक विवाद-जनक प्रक्रिया है, जो नफरत के प्रचार प्रसार और भेदभाव को बढ़ावा देती है। अपने सबसे खतरनाक रूप में, इसे व्यापक रूप से ‘जातीय-संहार’ का प्रणेता माना जाता है।
  • लोक अधिकारियों को ‘निगरानी के कर्तव्य की अवहेलना करने’ के लिए और अदालत के आदेशों का पालन न करने तथा सतर्कता समूहों’ (vigilante groups) को सांप्रदायिक विद्वेष भड़काने, देश के नागरिकों के खिलाफ नफरत फैलाने, और कानूनों को अपने हाथों में लेने से रोकने के लिए कार्रवाई नहीं करने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के बारे में
  2. अधिनियम की धारा 66A
  3. भारत के विधि आयोग के बारे में
  4. आईटी अधिनियम के तहत ‘हेट स्पीच’ का विनियमन

मेंस लिंक:

‘द्वेषपूर्ण भाषण’ (हेट स्पीच) क्या है? इस पर किस प्रकार अंकुश लगाया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

 असम-मेघालय सीमा विवाद


(Assam-Meghalaya border dispute)

संदर्भ:

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 21 जनवरी को मेघालय के 50वें राज्य स्थापना दिवस समारोह से पहले ‘असम-मेघालय सीमा’ के छह क्षेत्रों में विवाद को समाप्त करने के लिए अंतिम समझौते पर मुहर लगाने की संभावना व्यक्त की गयी है।

संबंधित विवाद:

असम और मेघालय के मध्य 885 किलोमीटर लंबी एक साझा सीमा है। मेघालय को ‘असम पुनर्गठन अधिनियम’, 1971 के तहत असम से अलग किया गया था। इस कानून को मेघालय ने चुनौती दी थी, जिससे यह विवाद उत्पन्न हुआ था।

अभी तक, दोनो राज्यों के बीच सीमा पर स्थित 12 जगहों पर विवाद है। इन विवादित जगहों में, ऊपरी ताराबाड़ी, गिजांग रिजर्व फॉरेस्‍ट, हाहिम एरिया, लंगपिह एरिया, बोरडवार एरिया, नोंगवाह-मावतामुर एरिया, पिलींग्‍काता-खानापारा, देशदेमोरिया, खांदुली, उ‍मकिखरयानी-पिसियार, ब्‍लॉक I और ब्‍लॉक II के अलावा रताछेरा क्षेत्र शामिल हैं।

लंगपिह एरिया

असम और मेघालय के बीच विवाद का एक प्रमुख बिंदु असम के कामरूप जिले की सीमा से लगे पश्चिम गारो हिल्स में लंगपीह (Langpih) जिला है।

  • लंगपीह, ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान कामरूप जिले का हिस्सा था, लेकिन आजादी के बाद, यह गारो हिल्स और मेघालय का हिस्सा बन गया।
  • असम, इसे असम में स्थित ‘मिकिर पहाड़ियों’ का हिस्सा मानता है। मेघालय ने ‘मिकिर हिल्स’ के ब्लॉक I और II पर सवाल उठाया है, जोकि अब असम के ‘कार्बी आंगलोंग क्षेत्र’ का हिस्सा है। मेघालय का कहना है कि ये क्षेत्र तत्कालीन ‘संयुक्त खासी और जयंतिया हिल्स जिलों’ के भाग थे।

विवाद को सुलझाने हेतु प्रयास:

इन विवादों को सुलझाने हेतु, असम और मेघालय दोनों राज्यों द्वारा ‘सीमा विवाद समाधान समितियों’ (Border Dispute Settlement Committees) का गठन किया गया है।

  • हाल ही में, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने सीमा विवादों को चरणबद्ध तरीके से हल करने के लिए ‘दो क्षेत्रीय समितियों’ का गठन करने का निर्णय लिया।
  • हाल ही में ‘हिमंत बिस्वा सरमा’ द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पांच पहलुओं पर विचार किया जाना है। इन पांच पहलुओं में ऐतिहासिक तथ्य, जातीयता, प्रशासनिक सुविधा, संबंधित लोगों की मनोदशा और भावनाएं तथा भूमि की समीपता शामिल हैं।

असम का अन्य राज्‍यों के साथ सीमा-विवाद:

  • पूर्वोत्तर भारत में अक्‍सर बॉर्डर पर कई मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति रहती है। असम का मेघालय, नागलैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के साथ सीमा विवाद है। अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के साथ असम के सीमा विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
  • मेघालय और मिजोरम के साथ असम के सीमा विवाद फिलहाल बातचीत के जरिए समाधान के चरण में हैं। हाल ही में मिजोरम के साथ असम के सीमा विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था, जिसके कारण केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


इंदु मल्होत्रा ​​समिति

  • सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन की जांच के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​के तहत एक जांच समिति नियुक्त की है।
  • यह समिति इस बात की जांच करेगी कि सुरक्षा उल्लंघन के लिए कौन जिम्मेदार है, तथा प्रधानमंत्री एवं अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों पर सुझाव देगी।

 

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council – BARC), विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और प्रसारण कंपनियों के संयुक्त स्वामित्व वाला एक औद्योगिक निकाय है। जिसका प्रतिनिधित्व द इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइज़र्स, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन और एडवरटाइजिंग एजेंसीज़ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा किया जाता है।

  • इसका गठन वर्ष 2010 में किया गया था।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 10 जनवरी, 2014 को भारत में टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों के लिए नीतिगत दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया गया और इन दिशानिर्देशों के तहत जुलाई 2015 में BARC को पंजीकृत किया गया।

चर्चा का कारण

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) द्वारा अपनी प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल को संशोधित किए जाने के पश्चात्, समाचार चैनलों के लिए ‘रेटिंग’ दिया जाना फिर से शुरू किया जाएगा। मुंबई पुलिस द्वारा एक निजी चैनल द्वारा रेटिंग से छेड़छाड़ करने के प्रयासों से जुड़े एक रैकेट का भंडाफोड़ करने के बाद रेटिंग को निलंबित कर दिया गया था।

 

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स

  • हाल ही में जारी सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट रिपोर्ट ‘हेनले पासपोर्ट सूचकांक 2022’ (Henley Passport Index 2022) में भारत को 83वां स्थान दिया गया है, जोकि जो पिछले साल के 90वें स्थान की तुलना में सात पायदान ऊपर है।
  • भारत को सूचकांक में रवांडा और युगांडा के बाद, मध्य अफ्रीका के साओ टोम और प्रिंसिपे के साथ संयुक्त स्थान प्रदान किया गया है।
  • भारत को अब ओमान और आर्मेनिया के नवीनतम परिवर्द्धन के साथ दुनिया भर में 60 गंतव्यों के लिये वीज़ा-मुक्त पहुँच उपलब्ध है। भारत ने वर्ष 2006 के बाद से इस सूची में 35 और गंतव्य स्थान जोड़े हैं।
  • इस सूचकांक में जापान और सिंगापुर शीर्ष स्थान पर हैं।
  • मालदीव का पासपोर्ट, दक्षिण एशिया (58वां) में सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट है जो इसे 88 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश को सक्षम बनाता है।
  • दक्षिण एशिया में बांग्लादेश (103वां), पाकिस्तान (108वें) और नेपाल (105वें) से आगे है।

‘हेनले पासपोर्ट इंडेक्स’ के बारे में:

‘हेनले पासपोर्ट इंडेक्स’ गंतव्यों की संख्या के अनुसार दुनिया के सभी पासपोर्टों को रैंकिंग तथा सूची जारी  है, जो यह बताता है कि किसी एक विशेष देश का पासपोर्ट धारक कितने देशों में बिना पूर्व वीज़ा के यात्रा कर सकता है।

  • इसे वर्ष 2005 में लॉन्च किया गया था।
  • यह रैंकिंग, इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है।
  • इस सूचकांक में 199 देशों के पासपोर्ट और 227 विभिन्न यात्रा गंतव्यों को शामिल किया गया है।
  • वीजा नीति में किए गए बदलाव के लागू होने पर इस डेटा को वास्तविक समय में अपडेट किया जाता है।

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