HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
मौलिक अधिकारों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- ये सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के विचार को बढ़ावा देते हैं।
- ये अनुल्लंघनीय और स्थायी हैं।
- इनमें से अधिकांश सीधे लागू करने योग्य हैं जबकि कुछ संसद और राज्य विधानसभाओं द्वारा निर्मित कानून द्वारा लागू किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
मौलिक अधिकार निरपेक्ष नहीं हैं, बल्कि युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन हैं। इसके अलावा, वे अनुल्लंघनीय नहीं हैं और संवैधानिक संशोधन अधिनियम के माध्यम से संसद द्वारा उन्हें निरस्त किया जा सकता है।
वे राजनीतिक लोकतंत्र के विचार को बढ़ावा देते हैं। वहीं DPSP सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के विचार को बढ़ावा देता है।
उनमें से ज्यादातर सीधे लागू करने योग्य (self-executory) हैं, जबकि कुछ को कानून के आधार पर लागू किया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि ऐसा कानून केवल संसद द्वारा ही बनाया जा सकता है न कि राज्य विधानसभाओं द्वारा ताकि पूरे देश में एकरूपता बनी रहे (अनुच्छेद 35)।
Incorrect
उत्तर: d)
मौलिक अधिकार निरपेक्ष नहीं हैं, बल्कि युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन हैं। इसके अलावा, वे अनुल्लंघनीय नहीं हैं और संवैधानिक संशोधन अधिनियम के माध्यम से संसद द्वारा उन्हें निरस्त किया जा सकता है।
वे राजनीतिक लोकतंत्र के विचार को बढ़ावा देते हैं। वहीं DPSP सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के विचार को बढ़ावा देता है।
उनमें से ज्यादातर सीधे लागू करने योग्य (self-executory) हैं, जबकि कुछ को कानून के आधार पर लागू किया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि ऐसा कानून केवल संसद द्वारा ही बनाया जा सकता है न कि राज्य विधानसभाओं द्वारा ताकि पूरे देश में एकरूपता बनी रहे (अनुच्छेद 35)।
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Question 2 of 5
2. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें
- मौलिक अधिकार नकारात्मक हैं क्योंकि वे राज्य को कुछ चीजें करने से रोकते हैं जबकि निदेशक तत्व सकारात्मक होते हैं क्योंकि वे राज्य को कुछ चीजें करने के लिए निर्देशित करते हैं।
- मौलिक अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए किसी कानून की आवश्यकता नहीं होती है जबकि निदेशक तत्वों के कार्यान्वयन के लिए कानून की आवश्यकता होती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
दोनों कथन सही हैं।
Incorrect
उत्तर: d)
दोनों कथन सही हैं।
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Question 3 of 5
3. Question
मौलिक अधिकारों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचारकीजिए।
- मौलिक अधिकार विधायिका के कार्यकारी और मनमाने कानूनों के शोषण के विरुद्ध सीमाओं के रूप में कार्य करते हैं।
- पीड़ित व्यक्ति इन्हें लागू करवाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
मौलिक अधिकार विधायिका के कार्यकारी और मनमाने कानूनों के शोषण के विरुद्ध सीमाओं के रूप में कार्य करते हैं। वे स्वभाव से न्यायसंगत हैं, अर्थात्, इनका उल्लंघन होने पर अदालतों द्वारा प्रवर्तनीय करवाया जा सकता है। पीड़ित व्यक्ति इन्हें लागू करवाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है, जो अधिकारों को लागू करवाने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण ( Certiorari) और अधिकार-प्रच्छा (Quo-Warranto) रिट जारी कर सकता है।
Incorrect
उत्तर: c)
मौलिक अधिकार विधायिका के कार्यकारी और मनमाने कानूनों के शोषण के विरुद्ध सीमाओं के रूप में कार्य करते हैं। वे स्वभाव से न्यायसंगत हैं, अर्थात्, इनका उल्लंघन होने पर अदालतों द्वारा प्रवर्तनीय करवाया जा सकता है। पीड़ित व्यक्ति इन्हें लागू करवाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है, जो अधिकारों को लागू करवाने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण ( Certiorari) और अधिकार-प्रच्छा (Quo-Warranto) रिट जारी कर सकता है।
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Question 4 of 5
4. Question
अनुच्छेद 32 के तहत गारंटीकृत संवैधानिक उपचार के अधिकार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि अनुच्छेद 32 संविधान के मूल ढांचे के अंतर्गत शामिल है।
- मौलिक अधिकार और अन्य वैधानिक अधिकार अनुच्छेद 32 के तहत लागू किए जा सकते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के मामले में अनन्य और मूल क्षेत्राधिकार दोनों प्राप्त हैं।
- अनुच्छेद 32 को एक कार्यकारी आदेश या एक कानून की संवैधानिकता का निर्धारण करने के लिए लागू नहीं किया जा सकता है जब तक कि यह सीधे किसी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
कथन 1 – सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि अनुच्छेद 32 संविधान के मूल ढांचे के अंतर्गत शामिल है। इसलिए, संविधान में संशोधन के माध्यम से इसे समाप्त या हटाया नहीं जा सकता है।
कथन 2 – संविधान द्वारा प्रदत्त केवल मौलिक अधिकारों को अनुच्छेद 32 के तहत लागू किया जा सकता है, न कि किसी अन्य अधिकार जैसे गैर-मौलिक संवैधानिक अधिकार, वैधानिक अधिकार, प्रथागत अधिकार आदि को।
कथन 3 – मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय को आरंभिक क्षेत्रधिकारिता प्राप्त है लेकिन अनन्य नहीं है। अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के साथ यह समवर्ती है।
कथन 4 – अनुच्छेद 32 को केवल एक कार्यकारी आदेश या एक कानून की संवैधानिकता को निर्धारित करने के लिए नहीं प्रवृत किया जा सकता है जब तक कि यह किसी भी मौलिक अधिकार का सीधे तौर पर उल्लंघन नहीं करता हो।
Incorrect
उत्तर: a)
कथन 1 – सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि अनुच्छेद 32 संविधान के मूल ढांचे के अंतर्गत शामिल है। इसलिए, संविधान में संशोधन के माध्यम से इसे समाप्त या हटाया नहीं जा सकता है।
कथन 2 – संविधान द्वारा प्रदत्त केवल मौलिक अधिकारों को अनुच्छेद 32 के तहत लागू किया जा सकता है, न कि किसी अन्य अधिकार जैसे गैर-मौलिक संवैधानिक अधिकार, वैधानिक अधिकार, प्रथागत अधिकार आदि को।
कथन 3 – मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय को आरंभिक क्षेत्रधिकारिता प्राप्त है लेकिन अनन्य नहीं है। अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के साथ यह समवर्ती है।
कथन 4 – अनुच्छेद 32 को केवल एक कार्यकारी आदेश या एक कानून की संवैधानिकता को निर्धारित करने के लिए नहीं प्रवृत किया जा सकता है जब तक कि यह किसी भी मौलिक अधिकार का सीधे तौर पर उल्लंघन नहीं करता हो।
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Question 5 of 5
5. Question
मूल अधिकारों के बारे में निम्नलिखित कथन पर विचार कीजिए।
- हमारे संविधान में मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका सहित विश्व के किसी भी अन्य देश के संविधान में समाहित अधिकारों से अधिक विस्तृत हैं।
- मूल अधिकारों के रूप में नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि ये भारत में सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था संसद द्वारा गारंटीकृत और संरक्षित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
संविधान के भाग III को भारत के मैग्ना कार्टा के रूप में जाना जाता है। इसमें ‘न्यायसंगत’ मूल अधिकारों की एक लंबी और व्यापक सूची शामिल है। वास्तव में, हमारे संविधान में मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका सहित विश्व के किसी भी अन्य देश के संविधान में समाहित अधिकारों से अधिक विस्तृत हैं।
मूल अधिकारों के रूप में नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि वे संविधान (जो कि देश का मूलभूत कानून है) द्वारा गारंटीकृत और संरक्षित हैं।
Incorrect
उत्तर: a)
संविधान के भाग III को भारत के मैग्ना कार्टा के रूप में जाना जाता है। इसमें ‘न्यायसंगत’ मूल अधिकारों की एक लंबी और व्यापक सूची शामिल है। वास्तव में, हमारे संविधान में मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका सहित विश्व के किसी भी अन्य देश के संविधान में समाहित अधिकारों से अधिक विस्तृत हैं।
मूल अधिकारों के रूप में नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि वे संविधान (जो कि देश का मूलभूत कानून है) द्वारा गारंटीकृत और संरक्षित हैं।
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