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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 January 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

1. गैर सरकारी संगठनों के लिए FCRA पंजीकरण

2. सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन

 

सामान्य अध्ययन-III

1. घरेलू प्रणालीगत महत्वपूर्ण बैंक

2. ड्रोन का प्रयोग

3. विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) अधिनियम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका

2. सी ड्रैगन युद्धाभ्यास

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

गैर सरकारी संगठनों के लिए FCRA पंजीकरण


संदर्भ:

हाल ही में, गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जिन 6,000 गैर सरकारी संगठनों का FCRA पंजीकरण नवीनीकृत नहीं किया गया है, उनमें ‘तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम’ (TTD), रामकृष्ण मिशन और शिरडी के ‘श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट’ (SSST) भी शामिल हैं।

कृपया ध्यान दें:

किसी भी ‘गैर सरकारी संगठन’ (NGO) या ‘संस्था’ (Association) को विदेशी चंदा या अनुदान प्राप्त करने हेतु ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ (Foreign Contribution (Regulation) Act) पंजीकरण अर्थात ‘FCRA पंजीकरण’ कराना अनिवार्य होता है।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2020-21 में हजारों ‘गैर सरकारी संगठनों’ के FCRA पंजीकरण का नवीनीकरण किया जाना था। गृह मंत्रालय द्वारा 179 गैर सरकारी संगठनों के FCRA पंजीकरण को नवीनीकृत करने से इनकार कर दिया गया, जबकि 5,789 संस्थाओं ने 31 दिसंबर की समय सीमा से पहले, अपने पंजीकरण के नवीनीकरण हेतु आवेदन ही नहीं किया।

इस पूरी प्रक्रिया के बाद, देश में  सक्रिय FCRA -पंजीकृत गैर सरकारी संगठनों की संख्या 22,762 से घटकर 16,907 हो गई है।

FCRA के माध्यम से NGO के वित्तीयन पर नियंत्रण:

‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ (FCRA) के माध्यम से विदेशों से प्राप्त होने वाले अनुदान को नियमित नियंत्रित किया जाता है, तथा यह अधिनियम सुनिश्चित करता है, कि इस तरह के अनुदान से देश की आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

  • इस अधिनियम को पहली बार वर्ष 1976 में अधिनियमित किया गया था, इसके बाद वर्ष 2010 और फिर 2020 में इसे संशोधित किया जा चुका है।
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010) की धारा 5 में, केंद्र सरकार के लिए किसी संगठन को राजनीतिक प्रकृति के रूप में घोषित करने और विदेशी स्रोतों से प्राप्त होने वाले धन तक पहुंच को रोकने के लिए “अनियंत्रित और बेलगाम शक्तियां” दी गयी हैं।
  • FCRA का कार्यान्वयन गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

प्रयोज्यता:

  • ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ के प्रावधान, संपूर्ण भारतीय सीमा पर, देश से बाहर रहने वाले भारतीय नागरिकों तथा भारत में पंजीकृत या निगमित किंतु देश से बाहर कार्यरत कंपनियों अथवा उनकी शाखाओं पर लागू होते हैं।
  • इस अधिनियम के अधिकार-क्षेत्र में आने वाली संस्थाओं में, व्यक्ति, अविभाजित हिंदू परिवार, संस्था या पंजीकृत कंपनी आदि शामिल होती हैं।

अधिनियम के तहत ‘पूर्व संदर्भ श्रेणी’:

‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम’ के तहत ‘पूर्व संदर्भ श्रेणी’ (Prior Reference Category) का तात्पर्य है कि, किसी गैर सरकारी संगठन को दान करने के लिए, विदेशी दाता को गृह मंत्रालय से पूर्व अनुमति लेनी आवश्यक है।

वर्ष 2020 का नवीनतम संशोधन और संबद्ध आलोचनाएँ:

  • विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन, 2020 के तहत पंजीकृत गैर सरकारी संगठन (NGO) के लिए भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली शाखा में एक निर्दिष्ट FCRA खाता खोलना अनिवार्य किया गया था। गैर सरकारी संगठन (NGO) केवल इस निर्दिष्ट खाते में ही विदेशी अनुदान दान स्वीकार कर सकेंगे।
  • इस प्रावधान के खिलाफ, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि यह नियम ग्रामीण भारत में, और राजधानी से दूर काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों के लिए काफी भारी-भरकम और थकाऊ होगा।

FCRA के तहत ‘विदेशी अंशदान’:

एफसीआरए के तहत “विदेशी अंशदान” (Foreign contribution) में ‘किसी विदेशी स्रोत द्वारा – व्यक्तिगत उपयोग के लिए उपहार के रूप में दी जाने वाली वस्तुओं को छोड़कर – किए जाने वाले किसी भी वस्तु के दान, अंतरण अथवा हस्तांतरण’ को शामिल किया जाता है।

इसके अलावा, इस प्रकार से दान की जाने वस्तु का भारतीय बाजार में मूल्य, अनुदान के समय समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए जाने वाली कीमत या राशि से अधिक नहीं होना चाहिए।

अपवाद:

  • अधिनियम के दायरे में, किसी भी मुद्रा या प्रतिभूति को शामिल किया जा सकता है। हालांकि किसी भी व्यक्ति द्वारा भारत की सीमा में या इसके बाहर अपने व्यवसाय, कारोबार अथवा वाणिज्य की सामान्य गतिविधियों के तहत प्रदान की जाने वाली वस्तुओं या सेवाओं के बदले प्राप्त किसी भी धन-राशि को FCRA में शामिल नहीं किया गया है।
  • अधिनियम के तहत, अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा किए गए दान को “विदेशी अंशदान” नहीं माना जाता है, हालांकि विदेशी नागरिकता हासिल कर चुके भारतीय मूल के किसी व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले अनुदान को “विदेशी अंशदान” के रूप में माना जाता है।

विदेशी अनुदान ग्रहण करने हेतु कौन पात्र नहीं है?

  1. चुनावी उम्मीदवार
  2. किसी भी विधायिका (सांसद और विधायक) के सदस्य
  3. राजनीतिक दल या पदाधिकारी
  4. राजनीतिक प्रकृति का संगठन
  5. पंजीकृत समाचार पत्र के संवाददाता, स्तंभकार, कार्टूनिस्ट, संपादक, मालिक, प्रिंटर या प्रकाशक।
  6. न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी, तथा सरकार के स्वामित्व वाले किसी भी निगम अथवा किसी अन्य निकाय के कर्मचारी।
  7. किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऑडियो न्यूज, ऑडियो विजुअल न्यूज या करंट अफेयर्स प्रोग्राम के उत्पादन या प्रसारण में संलग्न एसोसिएशन अथवा कंपनी।
  8. केंद्र सरकार द्वारा विशेष रूप से निषिद्ध कोई अन्य व्यक्ति अथवा संगठन।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. FCRA के बारे में
  2. गैर सरकारी संगठनों का विदेशी वित्त पोषण के बारे में
  3. FCRA की प्रयोज्यता
  4. विदेशी अंशदान प्राप्त करने से प्रतिबंधित व्यक्ति तथा संस्थाएं
  5. FCRA संशोधन
  6. FCRA के तहत विदेशी अंशदान की परिभाषा
  7. पूर्व संदर्भ श्रेणी

मेंस लिंक:

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के प्रमुख प्रावधानों और ऐसे कानून की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन


संदर्भ:

तेल समृद्ध कजाखस्‍तान में गृहयुद्ध जैसे हालात हो गए हैं, जिसे देखते हुए ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (Collective Security Treaty Organization- CSTO) द्वारा कज़ाख़िस्तान (Kazakhstan) में बढ़ती अशांति को कम करने में मदद करने हेतु, हाल ही में, एक सैन्य-दल भेजा गया है। कज़ाख़िस्तान की पुलिस के अनुसार, सरकारी इमारतों पर हमला करने की कोशिश करने के दौरान दर्जनों लोग मारे गए हैं।

कज़ाख़िस्तान में हालिया घटनाक्रम:

लंबे समय से मध्य एशिया के पूर्व सोवियत गणराज्यों में सबसे स्थिर के रूप में देखा जाने वाला, ऊर्जा संसाधनों से समृद्ध कज़ाख़िस्तान, वर्तमान में, कई दशकों में पहली बार सबसे बड़े संकट का सामना कर रहा है। देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों के विरोध में कई दिनों से प्रदर्शन जारी थे, जिससे व्यापक अशांति फैल गई है।

‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के बारे में:

यह छह देशों का एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है, इसका गठन वर्ष 2002 में हुआ था।

  • इसकी उत्पत्ति का स्रोत, ‘सामूहिक सुरक्षा संधि’, 1992 (ताशकंद संधि) में खोजा जा सकता है।
  • इसका मुख्यालय, रूस की राजधानी मास्को में स्थित है।
  • CSTO का उद्देश्य, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सामूहिक आधार पर सदस्य देशों की साइबर सुरक्षा और स्थिरता सहित शांति, अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

संरचना:

  • वर्तमान में, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूसी संघ और ताजिकिस्तान ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के सदस्य हैं।
  • ‘अफगानिस्तान’ और ‘सर्बिया’ को CSTO में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

संगठन की सदस्यता के लिए शर्ते:

  1. ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ की सदस्यता का अर्थ है, कि सदस्य देश, NATO जैसे अन्य सैन्य गठबंधनों में शामिल नहीं हो सकते हैं और ऐसे गठबंधनों के साथ अपने संबंधों को सीमित करना अनिवार्य होगा।
  2. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि CSTO की सदस्यता के तहत कुछ प्रमुख सुरक्षा आश्वासनों प्रदान किए जाते है – जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण, सदस्य देशों पर किसी बाह्य देश के सैन्य आक्रमण को रोकना है।
  3. CSTO में, किसी एक सदस्य देश के खिलाफ हमले को सभी सदस्यों के खिलाफ आक्रामकण के रूप में माना जाता है।
  4. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रावधान, अभी व्यवहार में लागू है अथवा नहीं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

वर्ष 2020 में भारत, ‘फाइव आईज’ नामक राष्ट्रों के एक समूह में सातवें सदस्य के रूप में शामिल हो गया। यह समूह किससे संबंधित है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के बारे में
  2. संरचना
  3. उद्देश्य

मेंस लिंक:

‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के महत्व के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

घरेलू प्रणालीगत महत्वपूर्ण बैंक


(Domestic Systemically Important Banks: D-SIBs)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2021 की ‘प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण घरेलू बैंकों’ अर्थात ‘डी-एसआईबी’ (Domestic Systemically Important Banks : D-SIBs) की सूची जारी की गयी है।

रिजर्व बैंक द्वारा सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय स्टेट बैंक और निजी ऋणदाताओं ICICI बैंक और HDFC बैंक को ‘प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंकों’ के रूप में घोषित किया है। इन बैंकों को ‘विफल होने में पर्याप्त समय’ (Too Big to Fail -TBTF) लेने वाला माना जाता है।

‘डी-एसआईबी’ के बारे में:

‘प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण घरेलू बैंक’ (Domestic Systemically Important Banks) अर्थात ‘डी-एसआईबी’ (D-SIBs) प्रणाली वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के बाद अपनाया गया था। वर्ष 2008 में विभिन्न क्षेत्रों में ‘प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंकों’ के असफल होने की वजह से ‘वित्तीय मंदी’ और तीव्र हो गयी थी।

  • ‘डी-एसआईबी’ देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। संकट की स्थिति में, सरकार ऐसे बैंकों का सहयोग करती है और यदि ऐसा बैंक विफल हो जाता है, तो इससे देश की समग्र अर्थव्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
  • बैंकों के आकार, मिश्रता, प्रतिस्थापन क्षमता की कमी और बैंकों की परस्पर संबद्धता, राज्य की रिपोर्ट जैसे कारकों पर विचार करने के बाद आरबीआई द्वारा ‘प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण घरेलू बैंकों’ की सूची तैयार की जाती है।

डी-एसआईबी का निर्धारण:

वर्ष 2015 से, प्रतिवर्ष भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा D-SIB की सूची जारी की जाती है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए उनके महत्व के अनुसार इन बैंकों को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

डी-एसआईबी के रूप में सूचीबद्ध होने के लिए, किसी बैंक के पास ‘राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद’ के 2 प्रतिशत से अधिक कीमत की परिसंपत्तियां होनी आवश्यक होता है। इसके बाद बैंकों को उनके महत्व के स्तर पर पांच श्रेणियों / बकेट (Buckets) में वर्गीकृत किया जाता है।

इन बैंकों का विनियमन:

अपने आर्थिक और राष्ट्रीय महत्व के कारण, इन बैंकों को टियर- I इक्विटी के रूप में ‘जोखिम-भारित परिसंपत्तियों’ का एक बड़ा हिस्सा बनाए रखना आवश्यक होता है। स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) को चूंकि इसे डी-एसआईबी के ‘बकेट थ्री’ में रखा गया है, अतः इसे अतिरिक्त ‘सामान्य इक्विटी टियर 1’‘(Common Equity Tier 1 CET1) को अपनी ‘जोखिम-भारित परिसंपत्तियों’ (Risk-Weighted Assets) के 0.60 प्रतिशत पर बनाए रखना होगा।

आवश्यकता:

यदि ऐसा बैंक विफल हो जाता है, तो उसके द्वारा बैंकिंग प्रणाली और समग्र अर्थव्यवस्था को प्रदान की जाने वाली आवश्यक सेवाओं में महत्वपूर्ण व्यवधान होगा।

  • ‘टू-बिग-टू-फेल’ टैग यह भी इंगित करता है कि संकट की स्थिति में, सरकार द्वारा इन बैंकों की सहायता की जाएगी।
  • इस धारणा के कारण, इन बैंकों के लिए ‘वित्तीयन’ में कुछ लाभ मिलता है। इसका अर्थ यह भी है, कि प्रणालीगत जोखिमों और नैतिक जोखिम के मुद्दों के संबंध में, यह बैंक विशेष नीतिगत उपाय लागू कर सकते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि वित्तीय स्थिरता बोर्ड (FSB) द्वारा ‘बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति’ (BCBS) और राष्ट्रीय प्राधिकरणों के परामर्श से, वर्ष 2011 से वैश्विक प्रणालीगत महत्वपूर्ण बैंकों (जी-एसआईबी) अर्थात (Global Systemically Important Banks – G-SIBs) का निर्धारण किया जाता है?

 

मेंस लिंक:

किन कारकों के मद्देनजर ‘आरबीआई’ द्वारा भारत में कुछ बैंकों जैसे एसबीआई और आईसीआईसीआई को ‘प्रणालीगत महत्वपूर्ण बैंकों’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है? इस कदम के निहितार्थों की भी जांच कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

ड्रोन का उपयोग


संदर्भ:

नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) द्वारा केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों को विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन (Drone) का उपयोग किए जाने के संबंध में एक नोट भेजा गया है।

ड्रोन का प्रभावी ढंग से उपयोग किए जाने वाले क्षेत्र:

  • गृह मंत्रालय: निगरानी, ​​स्थितिजन्य विश्लेषण, अपराध नियंत्रण, वीवीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन आदि के लिए।
  • रक्षा मंत्रालय: युद्ध कार्यों हेतु, दूरदराज के इलाकों में संचार, ड्रोन-प्रत्युत्तर समाधान आदि हेतु।
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय: दवाओं की डिलीवरी, दूरस्थ या महामारी प्रभावित क्षेत्रों से नमूने एकत्र करने हेतु।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, और विद्युत मंत्रालय: परिसंपत्तियों एवं ट्रांसमिशन लाइनों की रियल टाइम निगरानी, चोरी की रोकथाम, दृश्यक निरीक्षण / रखरखाव, निर्माण योजना और प्रबंधन, आदि।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय: अवैध शिकार-रोधी कार्रवाई, वन और वन्य जीवन की निगरानी, प्रदूषण आंकलन, और साक्ष्य एकत्र करने हेतु।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय: अंशतः लागत और आवश्यक अनुमोदन हासिल करने के उपरांत घटनाओं / कार्यक्रमों और दुर्गम स्थानों की उच्च गुणवत्ता युक्त वीडियोग्राफी करने हेतु। इस निर्णय से, बिना शोर-शराबे के निम्न ऊंचाई से शूटिंग करने की सुविधा उपलब्ध होगी और धूल प्रदूषण तथा दुर्घटनाओं संबंधी जोखिम को रोका जा सकेगा।
  • अन्य क्षेत्र: आपदा प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया, निरीक्षण/रखरखाव कार्य और परियोजना निगरानी आदि।

महत्व:

ड्रोन प्रौद्योगिकी से राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि, कानून प्रवर्तन और मानचित्रण आदि सहित अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में जबरदस्त लाभ उठाया जा सकता है।

भारत में ड्रोन प्रबंधन:

  • 15 सितंबर को केंद्र सरकार द्वारा तीन वित्तीय वर्षों में 120 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करते हुए ‘ड्रोन’ और ‘ड्रोन घटकों’ के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked IncentivePLI) योजना को मंजूरी दी गयी थी।
  • 25 अगस्त को मंत्रालय द्वारा ‘ड्रोन नियम, 2021’ अधिसूचित किए गए। जिसके तहत भारत में ड्रोन संचालन के नियमन को आसान बनाते हुए, संचालन-अनुमति के लिए भरे जाने वाले फॉर्मों की संख्या को 25 से घटाकर 5 कर दी गयी और ऑपरेटर से वसूले जाने वाले 72 प्रकार के शुल्कों कम करके चार प्रकार का कर दिया गया।

ड्रोन प्रबंधन हेतु कड़े नियमों और विनियमन की आवश्यकता:

  • हाल ही में, जम्मू में वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में एक विस्फोट हुआ था। इसके लिए विस्फोटकों को गिराने में पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था।
  • पिछले दो वर्षों में, भारतीय क्षेत्र में हथियारों, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए पाकिस्तान स्थित संगठनों द्वारा नियमित रूप से ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में पाकिस्तान से लगी सीमा पर 167 ड्रोन देखे गए और वर्ष 2020 में 77 ड्रोन देखे गए।
  • हालिया वर्षों के दौरा ‘ड्रोन प्रौद्योगिकी’ के तेजी से प्रसार और वैश्विक बाजार इसका तीव्र विकास होने से, विश्व के सबसे सुरक्षित शहरों में भी ड्रोन हमले की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  • वर्तमान में ड्रोन, विशेष रूप से, उन संघर्ष क्षेत्रों में जहां ‘गैर-राज्य अभिकर्ता’ (Non State Actors – NSA) सक्रिय हैं और प्रौद्योगिकी तक आसान पहुंच रखते हैं, सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि विश्व में कुछ देशों के पास खुद के सशस्त्र बल नहीं हैं? इन देशों के बारे में जानने हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नए नियमों का अवलोकन
  2. नए नियम बनाम पुराने नियम
  3. छूट
  4. लाइसेंस की आवश्यकता

मेंस लिंक:

नए ड्रोन नियमों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

विशेष सुरक्षा दल अधिनियम


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान कथित तौर पर सुरक्षा में सेंध लगने के बाद केंद्र सरकार द्वारा पंजाब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ‘विशेष सुरक्षा दल अधिनियम’ (Special Protection Group ActSPG Act) के तहत कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है।

आगे की कार्रवाई:

केंद्र सरकार, दोषी अधिकारियों के खिलाफ SPG एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत जिम्मेदार अधिकारियों को दिल्ली बुलाया जा सकता है अथवा उनके खिलाफ केंद्रीय स्तर की जांच शुरू की जा सकती है।

प्रधान मंत्री की सुरक्षा के संबंध में एसपीजी एक्ट के प्रावधान:

  • प्रधान मंत्री की आवागमन के लिए प्रोटोकॉल ‘विशेष सुरक्षा दल’ (Special Protection Group SPG) द्वारा तय किए जाते हैं।
  • SPG अधिनियम की धारा 14 के तहत, प्रधान मंत्री के आवागमन के दौरान ‘विशेष सुरक्षा दल’ (SPG) को सभी प्रकार से सहायता प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

‘विशेष सुरक्षा दल’ (SPG) का गठन:

मार्च 1985 में गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद कैबिनेट सचिवालय के तहत प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री तथा उनके निकट परिजनों की सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य के लिए एक ‘विशेष सुरक्षा इकाई’ (Special Protection Unit) का गठन किया गया था।

  • इस ‘विशेष सुरक्षा इकाई’ का नाम बदलकर अप्रैल 1985 में ‘विशेष सुरक्षा दल’ (Special Protection Group SPG) कर दिया गया।
  • इसके बाद, संसद द्वारा ‘विशेष सुरक्षा दल’ (एसपीजी) अधिनियम’ (Special Protection Group (SPG) Act) पारित किया गया, जिसे जून 1988 में “भारत के प्रधान मंत्री एवं उनसे संबंधित विषयवस्तुओं के लिए निकटस्थ सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक संघीय सशस्त्र बल का गठन और उसके विनियमन का प्रावधान करने हेतु” अधिसूचित किया गया था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत में कई ‘विशेष बल इकाइयाँ’ (Special Forces units) कार्यरत हैं। आमतौर पर ये विशेष बल, भारतीय सशस्त्र सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना की कमान के तहत कार्य करते हैं। इनके बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

निम्नलिखित का संक्षिप्त विवरण:

  1. मार्कोस
  2. एसपीजी
  3. एनएसजी
  4. कोबरा
  5. घातक बल

मेंस लिंक:

भारतीय विशेष बल (SF) क्या हैं? इनके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका

  • हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका (Horn of Africa), अफ्रीका महाद्वीप का सबसे पूर्वी स्थलीय विस्तार है और इसमें जिबूती, इरिट्रिया, इथियोपिया और सोमालिया देश अवस्थित हैं। इन देशों की संस्कृतियां और इतिहास परस्पर एक-दूसरे से संबद्ध हैं।
  • यह अरब सागर और हिंद महासागर में सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तक आगे की ओर निकला हुआ है तथा अदन की खाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है।

चर्चा का कारण:

चीन द्वारा ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ में शीघ्र ही अपना दूत नियुक्त किया जाएगा।

Current Affairs

 

सी ड्रैगन युद्धाभ्यास

प्रशांत महासागर में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के छह देशों के मध्य आयोजित किए जा रहे एक बहु-पक्षीय पनडुब्बी रोधी संयुक्त नौसेना युद्धाभ्यास – ‘सी ड्रैगन युद्धाभ्यास’ (Sea Dragon Exercise)- में भाग ले रहा है।

  • प्रतिभागी: अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया की नौसेनाएँ।
  • ‘सी ड्रैगन’ (Sea Dragon) अमेरिकी नेतृत्व में किया जाने वाला एक बहु-राष्ट्रीय युद्धाभ्यास है, जिसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के जवाब में एक साथ संचालित की जाने वाले पनडुब्बी रोधी युद्ध रणनीति का अभ्यास और इस पर चर्चा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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