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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 January 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-I

1. ऑनलाइन यौन उत्पीड़न संबंधी जांच के केंद्र में ‘गिट हब’

 

सामान्य अध्ययन-II

1. बांध सुरक्षा अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती

2. मुल्लापेरियार बांध मुद्दा

3. उपभोक्ता संरक्षण नियम

 

सामान्य अध्ययन-III

1. एयरटेल पेमेंट्स बैंक को अनुसूचित बैंक का दर्जा

2. मल्टी एजेंसी सेंटर

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. रियोवायरस

2. NEAT 3.0

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

ऑनलाइन यौन उत्पीड़न संबंधी जांच के केंद्र में ‘गिट हब’


संदर्भ:

‘गिट हब’ (GitHub) विश्व का सबसे बड़ा एक ओपन-सोर्स ‘डेवलपर कम्युनिटी प्लेटफॉर्म’ (Developer Community Platform) है। इस प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ता अपने प्रोजेक्ट्स और कोड, अन्य डेवलपर्स को दिखाने, संपादित करने और उसमे सुधार करने के लिए अपलोड करते हैं।

  • हाल ही में, इस प्लेटफ़ॉर्म पर भारत में मुस्लिम महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने हेतु एक ‘बुल्ली बाई’ (Bulli Bai) नामक एक आपत्तिजनक ‘ऐप’ (App) को बनाने और साझा करने के लिए इस्तेमाल लिया गया था, इसके बाद से ‘गिट हब’ चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।
  • ‘बुल्ली बाई’ ऐप में मुस्लिम महिलाओं के सोशल मीडिया हैंडल से चुराई गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया और “उपयोगकर्ताओं” को उनकी बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया गया था।

इस प्रकरण की जांच:

GitHub द्वारा विवादित ऐप बनाने वाले उपयोगकर्ता को ब्लॉक कर दिया गया है, और साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं की निगरानी के लिए भारत की नोडल एजेंसी ‘भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम’ (Indian Computer Emergency Response Team – CERT-In) को इस मामले की जांच करने हेतु “एक उच्च स्तरीय समिति” बनाने के लिए कहा गया है।

कुछ लक्षित महिलाओं की शिकायत पर दिल्ली और मुंबई पुलिस द्वारा उक्त प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

क्या इस तरह की घटना पहली बार हुई है?

नहीं।

  • जून 2021 में, मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न करने के लिए, इसी तरह के नाम वाले एक अन्य ऐप (App) का इस्तेमाल किया गया था। ‘सुल्ली बाई’ (Sulli Bai) नामक उस ऐप को भी ‘गिट हब’ पर होस्ट किया गया था।
  • इस प्रकरण में भी दिल्ली और नोएडा में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ी। दिल्ली पुलिस ने ‘गिट हब’ पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।

संबंधित चिंताएं:

हाल ही में, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 के पहले आठ महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की शिकायतों में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 46% की वृद्धि हुई है।

संवैधानिक संरक्षोपाय:

मौलिक अधिकार:

संविधान द्वारा प्रदत्त ‘मौलिक अधिकारों’ (Fundamental Rights) में, सभी भारतीयों को ‘समानता का अधिकार’ (अनुच्छेद 14), ‘लैंगिक आधार पर राज्य द्वारा भेदभाव से प्रतिषेध (अनुच्छेद 15(1)) और महिलाओं के पक्ष में राज्य द्वारा किए जाने वाले विशेष प्रावधानों’ (अनुच्छेद 15(3) ) की गारंटी दी गयी है।

मौलिक कर्तव्य:

संविधान में उल्लखित ‘मौलिक कर्तव्यों’ (Fundamental Duties) के तहत, स्त्रियों के सम्मान एवं गरिमा के विरुद्ध अपमानजनक प्रथाओं को प्रतिबंधित करने (अनुच्छेद 51 (A)) का प्रावधान किया गया है।

वैधानिक ढाँचा:

  1. भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code – IPC) में महिलाओं के शील का अपमान करने वाले और उनकी निजता में दखल देने वाले अश्लील एवं मानहानिकारक भाषण भाषा को अपराध घोषित किया गया है।
  2. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम’ 2000 के अंतर्गत, अश्लील भाषा या व्यक्तव्यों का प्रयोग करने पर दंडित करने का प्रावधान किया गया है।
  3. स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम (The Indecent Representation of Women (Prohibition) Act), 1986 के तहत, महिलाओं को अश्लील रूप से व्यक्त करने वाली किसी भी मुद्रित सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगाए जाने का प्रावधान है।
  4. बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम – पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences Act – POCSO) में किसी बच्चे के यौन उत्पीड़न तथा अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चों के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है।

शी-बॉक्स:

  • केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा, संगठित हो या असंगठित, निजी या सार्वजनिक क्षेत्र में किसी भी पद पर काम करने वाली हर महिला को कार्यस्थल पर होने वाले यौन शोषण से संबंधित शिकायतों को दर्ज़ करने के लिये, एकल खिड़की उपलब्ध कराए जाने के प्रयास के रूप में ‘यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स’ (Sexual Harassment electronic–Box – SHe-Box) नामक एक ऑनलाइन शिकायत प्रणाली का आरंभ किया गया है।
  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली कोई भी महिला इस पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। एक बार ‘शी-बॉक्स’ में शिकायत दर्ज़ होते ही, उसे सीधे संबंधित मंत्रालय/विभाग/पी.एस.यू./स्वायत निकाय आदि की आई.सी.सी. के पास भेज दिया जाएगा, जिसे शिकायत की जाँच करने का अधिकार प्राप्त होगा|

आवश्यक उपाय:

  • ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ को, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के मामले में POCSO अधिनियम के तहत मानले को दर्ज करने संबंधी आवश्यकताओं के के लिए ‘राष्ट्रीय पोर्टल’ के रूप में नामित किया जाना चाहिए।
  • बाल यौन शोषण सामग्री का प्रदर्शन करने वाली सभी वेबसाइटों/मध्यस्थों को ब्लॉक और/या प्रतिबंधित करने हेतु, केंद्र सरकार को अपने निर्दिष्ट अधिकरण के माध्यम से सक्षम होना चाहिए।
  • प्रत्येक इंटरनेट उपयोगकर्ता के व्यवहार का विश्लेषण करने में सक्षम उपकरण विकसित किए जा सकते हैं। इससे उपयोगकर्ता को साइबर बुलिंग के जाल में फसने से रोकने में मदद मिल सकती है।
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ के वितरकों का पता लगाने के लिए ‘एंड टू एंड एन्क्रिप्शन’ को तोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।
  • नागरिकों को अश्लील सामग्री संबंधी रिपोर्ट करने में सक्षम बनाने हेतु वर्ष 2018 में एक ‘साइबर अपराध पोर्टल’ शुरू किया गया था। साइबर अपराध के मामलों की रिपोर्टिंग और जांच के लिए प्रत्येक राज्य में साइबर पुलिस स्टेशन और साइबर अपराध प्रकोष्ठ भी स्थापित किए गए हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘स्पॉटलाइट इनिशिएटिव’ (Spotlight Initiative) के बारे में जानते हैं? यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा (Violence Against Women and Girls – VAWG) के सभी रूपों को खत्म करने पर केंद्रित इस नई  वैश्विक बहु-वर्षीय पहल की शुरुआत की है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्पॉटलाइट इनिशिएटिव
  2. साइबर अपराध पोर्टल
  3. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
  4. शी-बॉक्स
  5. 2000 का सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम
  6. विशाखा दिशानिर्देश

मेंस लिंक:

महिलाओं के ऑनलाइन उत्पीड़न को रोकने के तरीकों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

बांध सुरक्षा अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती


संदर्भ:

हाल ही में, डीएमके पार्टी के एक लोकसभा सदस्य द्वारा ‘बांध सुरक्षा अधिनियम’, 2021 (Dam Safety Act, 2021) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया है। संसद सदस्य ने उक्त क़ानून को संघवाद के खिलाफ और केंद्र सरकार की विधायी शक्ति से परे बताते हुए इसे चुनौती दी है।

विदित हो कि, हाल ही में ‘बांध सुरक्षा विधेयक’ राज्यसभा में पारित किया गया था।

विधेयक से संबंधित चिंताएं:

  • इस विधेयक में बांधो की ‘परिचालन सुरक्षा’ की तुलना में ‘संरचनात्मक सुरक्षा’ पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया है।
  • बांधों से प्रभावित लोगों को अपर्याप्त मुआवजा दिया जाता है।
  • विधेयक में हितधारकों की सटीक परिभाषा दिए जाने के साथ-साथ एक ‘स्वतंत्र नियामक’ का प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है।

‘संघवाद की भावना’ के खिलाफ कानून:

कई राज्यों का कहना है कि यह क़ानून, राज्यों के अपने बांधों के प्रबंधन के संबंध में इनकी संप्रभुता का अतिक्रमण करता है, और संविधान में निहित संघवाद के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। ये राज्य इसे सुरक्षा-संबंधी चिंताओं की आड़ में केंद्रीय सत्ता को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखते हैं।

संविधान के अंतर्गत, ‘बांध’ पूरी तरह से राज्य सरकारों के विधायी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। पहली अनुसूची (संघ सूची) की प्रविष्टि 56 के तहत केंद्र सरकार की शक्ति, केवल अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के संबंध तक विस्तारित है।

इस विधेयक को केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने के कारण:

हालांकि यह विषय संसद के दायरे में नहीं आता है, फिर भी केंद्र सरकार ने इस विधेयक को पेश करने का फैसला मुख्य रूप से इसलिए किया है, क्योंकि ‘बांध-सुरक्षा’ देश में चिंता का विषय है। और, इस संबंध में कोई कानूनी और संस्थागत सुरक्षा उपाय उपलब्ध नहीं हैं।

‘बांध सुरक्षा विधेयक, 2019 के प्रमुख बिंदु:

  1. ‘बांध सुरक्षा विधेयक’ देश के सभी बड़े बांधों की निगरानी, निरीक्षण, परिचालन और रखरखाव संबंधी पर्याप्त सुविधा प्रदान करेगा, ताकि बांध के फेल होने की स्थिति में होने वाली आपदा को रोका जा सके।
  2. बांधों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों की दिशा में यह विधेयक केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर एक संस्थागत तंत्र की व्यवस्था प्रदान करेगा।
  3. विधेयक के प्रावधान के अनुसार, एकसमान बांध सुरक्षा नीतियां, प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं को विकसित करने में मदद करने के लिए ‘बांध सुरक्षा पर एक राष्ट्रीय समिति’ (NCDS) का गठन किया जाएगा।
  4. यह विधेयक बांध सुरक्षा नीतियां और मानकों के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक नियामक संस्था के तौर पर ‘राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण’ (NDSA) स्थापित करने की सुविधा भी प्रदान करता है।
  5. इस विधेयक में राज्यों के स्तर पर ‘बांध सुरक्षा पर राज्य समिति’ (SCDS) का गठन करने और राज्य बांध सुरक्षा संगठन स्थापित करने की व्यवस्था की गई है।

महत्व:

  • बांध सुरक्षा विधेयक, भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान बांध सुरक्षा प्रक्रियाओं को अपनाने में मदद करेगा, जो बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और ऐसे बांधों से होने वाले लाभों की सुरक्षा हो सकेगी। इससे मानव जीवन, पशुधन और संपत्ति की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।
  • विधेयक में, बांधों के नियमित निरीक्षण, आपातकालीन कार्य योजना, व्यापक बांध सुरक्षा समीक्षा, बांध सुरक्षा के लिए पर्याप्त मरम्मत और रखरखाव निधि, उपकरण और सुरक्षा नियमावली सहित बांध सुरक्षा से संबंधित सभी मुद्दों पर प्रावधान किए गए हैं।
  • विधेयक में ‘बांध सुरक्षा’ की जिम्मेदारी बांध के मालिक पर निर्धारित की गयी है, और कुछ कृत्यों के करने पर तथा किसी लापरवाही के लिए दंडात्मक प्रावधानों का प्रावधान भी किया गया है।

आवश्यकता:

  • पिछले पचास वर्षों में, भारत में बांधों और संबंधित बुनियादी ढांचे में काफी निवेश किया गया है, और वर्तमान में भारत, बड़े बांधों की संख्या में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। मौजूदा समय में, देश में 5254 बड़े बांध कार्यशील हैं और 447 अन्य बड़े बांध निर्माणाधीन हैं।
  • इसके अलावा, देश में हजारों मध्यम और छोटे बांध मौजूद हैं।
  • जहां बांधों ने भारत में तेजी से और सतत कृषि विकास और विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, वहीं बांध सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक समान कानून और प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
  • केंद्रीय जल आयोग द्वारा ‘राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति’ (NCDS), केंद्रीय बांध सुरक्षा संगठन (CDSO) और राज्य बांध सुरक्षा संगठन (SDSO) के माध्यम से इस दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इन संगठनों के पास कोई वैधानिक शक्ति नहीं है, और ये केवल सलाहकार प्रकृति के हैं।
  • भारत में लगभग 75 प्रतिशत बड़े बांध 25 वर्ष से अधिक पुराने हैं और लगभग 164 बांध 100 वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं, ऐसे में यह चिंता का विषय है।
  • ख़राब रखरखाव वाले, असुरक्षित बांध मानव जीवन, वनस्पतियों और जीवों, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों और पर्यावरण के लिए खतरा हो सकते हैं।
  • अतीत में, भारत में 42 बांध विफल हो चुके हैं।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

मुल्लापेरियार बांध विवाद


(Mullaperiyar Dam Issue)

संदर्भ:

हाल ही में, तमिलनाडु सरकार को एक नया बांध बनाने के साथ-साथ वैगई बांध की भंडारण क्षमता को बढ़ाने या वैकल्पिक बांध के निर्माण तक मुल्लापेरियार बांध (Mullaperiyar Dam) को मजबूत करने के लिए इस तरह के कदम उठाने के लिए उचित निर्देश देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया गया है।

आवश्यकता:

याचिकाकर्ताओं का कहना है, कि यह निर्णय मुल्लापेरियार बांध के टूटने तथा इडुक्की बांध को खोल देने जैसी अकल्पनीय घटनाओं की स्थिति होने पर जीवन-संकट के संबंध में लाखों लोगों का डर दूर करने के लिए आवश्यक है। इस तरह की घटना होने पर इडुक्की, त्रिशूर, एर्नाकुलम, कोट्टायम और अलाप्पुझा, पांच जिलों में 35-40 लाख नागरिकों की जान जा सकती है तथा कोचीन शहर का पूरी तरह से सफाया हो सकता है।

Current Affairs

 

वर्तमान विवाद:

कृपया ध्यान दें, बाँध के ढाँचे की स्थिरता को लेकर केरल व तमिलनाडु, दोनों राज्यों में तकरार रहती है। केरल एक नया बांध बनाए जाने की मांग कर रहा है और तमिलनाडु का कहना है, कि नए बाँध की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा, केरल द्वारा ढाँचे की स्थिरता का हवाला देते हुए बांध में जल-स्तर बढ़ाने का विरोध किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश:

हाल ही में, केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुल्लापेरियार बांध’ (Mullaperiyar dam) में अधिकतम जल स्तर बनाए रखने संबंधी विषय पर ‘पर्यवेक्षी समिति’ (Supervisory Committee) को तत्काल और ठोस निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में, मुल्लापेरियार बांध से संबंधित सभी मामलों का निरीक्षण करने हेतु एक स्थायी ‘पर्यवेक्षी समिति’ का गठन किया था। यह बांध तमिलनाडु और केरल के बीच टकराव का एक कारण है।

Current Affairs

 

जलाशय में अधिकतम जल स्तर संबंधी विवाद:

केरल का कहना है कि, बाँध में ‘जल स्तर’ 139 फीट से ऊपर नहीं जाना चाहिए। जब वर्ष 2018 में राज्य बाढ़ की चपेट में था, उस समय 24 अगस्त, 2018 को अदालत ने भी अधिकतम जल-स्तर 139 फीट रखे जाने का आदेश दिया था। इसकी वजह यह है, कि यदि बाँध के जल स्तर में इससे अधिक की वृद्धि की जाती है, तो इससे 50 लाख लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

हालांकि, तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पिछले फैसलों का हवाला देते हुए, केरल के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2006 और 2014 में दिए गए फैसलों में अधिकतम जल स्तर 142 फीट तय किया गया था।

मुल्लापेरियार बांध– महत्वपूर्ण तथ्य:

यद्यपि, मुल्लापेरियार बांध केरल में स्थित है, किंतु, वर्ष 1886 में त्रावणकोर के महाराजा तथा भारत के राज्य सचिव के मध्य, पेरियार सिंचाई कार्यों के लिए 999 वर्षों के लिए पट्टा अनुबंधपत्र (lease indenture), जिसे ‘पेरियार लेक लीज एग्रीमेंट’ भी कहा जाता है, पर हस्ताक्षर करने के बाद से इसका परिचालन तमिलनाडु द्वारा किया जाता है।

  • इसका निर्माण वर्ष 1887 और 1895 के मध्य किया गया था, इस बाँध से अरब सागर की बहने वाली नदी की धारा को मोड़कर बंगाल की खाड़ी की ओर प्रवाहित किया गया था, इसका उद्देश्य मद्रास प्रेसीडेंसी में मदुरई शुष्क वर्षा क्षेत्र को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराना था।
  • यह बांध केरल के इडुक्की ज़िले में मुल्लायार और पेरियार नदियों के संगम पर स्थित है।

तमिलनाडु का पक्ष:

तमिलनाडु का कहना है कि, बाँध को बांध को मजबूत करने के उपाय किए जा चुके हैं, किंतु केरल सरकार जलाशय के जल स्तर को बढ़ाने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न कर रही है, जिससे मदुरै के किसानों को नुकसान हो रहा है।

केरल का पक्ष:

केरल,  बाँध के प्रवाह की दिशा में स्थिति इडुक्की के भूकंप-प्रवण जिले के निवासियों द्वारा तबाही की आशंकाओं को लेकर चिंतित है।

वैज्ञानिकों का कहना है, कि इस क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर छह माप से ऊपर भूकंप आने पर, तीन मिलियन से अधिक लोगों का जीवन गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।

Current Affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

‘रुल कर्व’ क्या होता है?

‘रुल कर्व’ (rule curve), किसी बांध के जलाशय में उतार-चढ़ाव के स्तर को तय करता है। बांध के गेट खोलने का कार्यक्रम ‘रुल कर्व’ पर आधारित होता है। यह किसी बांध के ‘मुख्य सुरक्षा’ तंत्र का हिस्सा होता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मुल्लायार और पेरियार नदियो की अवस्थिति
  2. मुल्लापेरियार बांध की अवस्थिति?
  3. बांध का प्रबंधन कौन करता है?
  4. पेरियार लेक लीज एग्रीमेंट, 1886 के बारे में।
  5. अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (IRWD अधिनियम) के बारे में।

मेंस लिंक:

मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा तमिलनाडु और केरल के बीच विवाद का कारण क्यों बन गया है, परीक्षण कीजिए। क्या केंद्र सरकार इस मुद्दे को हल करने में मदद कर सकती है? परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

उपभोक्ता संरक्षण नियम, 2021


संदर्भ:

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) के प्रावधानों के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में, ‘उपभोक्ता संरक्षण (जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग के क्षेत्राधिकार) नियम’, 2021 (Consumer Protection (Jurisdiction of the District Commission, the State Commission and the National Commission) Rules, 2021) अधिसूचित किए गए हैं।

नए नियमों के तहत, उपभोक्ताओं की शिकायतें दर्ज करने हेतु ‘आर्थिक क्षेत्राधिकारों’ को संशोधित किया गया है।

नए नियमों का अवलोकन:

  • खाद्य और सार्वजनिक वितरण, जिला आयोगों को ₹ 50 लाख तक की कीमतों में भुगतान की गई वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित शिकायतों पर विचार करने का अधिकार होगा।
  • राज्य आयोग, ₹50 लाख- ₹दो करोड़ कीमतों तक की वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित शिकायतों पर विचार कर सकते हैं।
  • जिला आयोगों के पास, 50 लाख रुपये तक के मूल्य की वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित शिकायतों पर विचार करने का अधिकार होगा।
  • राज्य आयोगों के पास, 50 लाख रुपये से अधिक, किंतु, दो करोड़ रुपये से कम मूल्य की वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित शिकायतों पर विचार करने का अधिकार होगा।
  • राष्ट्रीय आयोग के पास, दो करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित शिकायतों पर विचार करने का अधिकार होगा।

उपभोक्ता अधिकारक संरक्षण हेतु तंत्र:

वर्तमान में, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता विवाद निवारण हेतु एक त्रि-स्तरीय अर्ध-न्यायिक तंत्र – जैसे जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग – का प्रावधान किया गया है।

  • इस अधिनियम में, प्रत्येक स्तर के उपभोक्ता आयोग के आर्थिक क्षेत्राधिकार को भी निर्धारित किया गया है।
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत, उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से शिकायत दर्ज करने का विकल्प प्रदान किया गया है। उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करने में सुविधा के लिए केंद्र सरकार द्वारा ‘ई-दाखिल पोर्टल’ (E-Daakhil Portal) की स्थापना की गयी है।
  • उपभोक्ता विवादों को निपटाने हेतु एक तेज़ और सौहार्दपूर्ण तरीका उपलब्ध कराने हेतु, अधिनियम में दोनों पक्षों की सहमति से उपभोक्ता विवादों को ‘मध्यस्थता’ के माध्यम से हल करने को भी शामिल किया गया है।

शिकायतों के निस्तारण की समयावधि:

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार, “हर शिकायत का यथाशीघ्र निपटारा किया जाएगा और जिन मामलों में वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है, उन्हें विरोधी पक्ष द्वारा नोटिस प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर तथा जिन मामलों में वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता है वहां 5 महीने के भीतर शिकायत का फैसला करने का प्रयास किया जाएगा।”

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के बारे में
  2. उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020- नियम
  3. स्वार्थचालित कीमत (Predatory Pricing) निर्धारण क्या है?

मेंस लिंक:

नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (CPA) तीन दशक से अधिक पुराने पहले के कानून को प्रतिस्थापित करते हुए लागू किया जा चुका है। दोनों अधिनियमों के बीच मूलभूत अंतर क्या हैं और क्या नया कानून उपभोक्ता की अपेक्षाओं को पूर्ववर्ती क़ानून की तुलना में बेहतर तरीके से पूरा करेगा? स्पष्ट कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

एयरटेल पेमेंट्स बैंक को अनुसूचित बैंक का दर्जा


हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा ‘एयरटेल पेमेंट्स बैंक लिमिटेड’ को ‘भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम’, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल करने की घोषणा की गयी है।

निहितार्थ:

अनुसूचित बैंक (Scheduled Bank) का दर्जा मिलने के पश्चात, ‘एयरटेल पेमेंट्स बैंक’ सरकार द्वारा जारी अनुरोध प्रस्तावों (Requests for Proposals – RFP) और प्राथमिक नीलामियों में भाग ले सकता है, और केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों के कारोबार में शामिल हो सकता है।

‘अनुसूचित बैंक’ कौन से होते है?

  • भारत में ‘भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम’, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल बैंकों को ‘अनुसूचित बैंक’ / शेड्यूल बैंक (Scheduled Banks) के रूप में जाना जाता है।
  • प्रत्येक अनुसूचित बैंक को दो प्रकार की मूल सुविधाएं प्राप्त होती हैं: यह आरबीआई से बैंक दर पर ऋण लेने हेतु पात्र हो जाता है; और, इसे स्वतः ही समाशोधन गृह (Clearing House) की सदस्यता मिल जाती है।

‘एयरटेल पेमेंट्स बैंक’ के बारे में:

  • एयरटेल पेमेंट्स बैंक देश का तेजी से बढ़ता डिजिटल बैंक है। इसके यूजर्स की संख्या 11.5 करोड़ है।
  • यह एयरटेल थैंक्स ऐप और 500,000 से अधिक निकटस्थ बैंकिंग बिंदुओं के खुदरा नेटवर्क के माध्यम से डिजिटल समाधानों का एक सेट प्रदान करता है।
  • सितंबर 2021 को समाप्त होने वाली तिमाही में यह बैंक मुनाफे की स्थिति में आ गया था।

 

भुगतान बैंक (Payments Banks)

भुगतान बैंकों की स्थापना, ‘मामूली बचत खाते और प्रवासी श्रमिक कार्यबलों, निम्न आय वाले परिवारों, छोटे उद्यमों, अन्य असंगठित क्षेत्र की संस्थाओं और अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए भुगतान/प्रेषण सेवाओं को प्रदान करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।’

  • भुगतान बैंक, एक निश्चित सीमा तक ही जमा स्वीकार कर सकते हैं। वर्तमान में, जमा राशि स्वीकार करने की अधिकतम सीमा प्रति व्यक्ति 200,000 रुपये है, लेकिन भविष्य में इसे बढ़ाया जा सकता है।
  • ये बैंक, ऋण या क्रेडिट कार्ड प्रदान नहीं कर सकते हैं। तथापि, इस प्रकार के बैंक ‘चालू’ और ‘बचत’ दोनों खातों को संभाल सकते हैं।
  • भुगतान बैंक, एटीएम और डेबिट कार्ड के साथ-साथ ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग सुविधा प्रदान कर सकते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भुगतान बैंकों के बारे में
  2. लघु वित्त बैंकों के बारे में
  3. लघु वित्त बैंक बनाम सार्वजनिक बैंक
  4. ऑन-टैप लाइसेंसिंग
  5. अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

मल्टी एजेंसी सेंटर


संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा राज्यों से ‘मल्टी एजेंसी सेंटर’ अर्थात ‘मैक’ (Multi Agency Centre – MAC) के माध्यम से अधिक खुफिया जानकारी साझा करने के लिए कहा गया है।

आवश्यकता:

  • राज्य प्रायः इस प्लेटफ़ॉर्म पर जानकारी साझा करने से हिचकते रहते हैं।
  • इसमें, महत्वपूर्ण जानकारी को सही समय पर साझा करने में कई कमियां हैं।
  • इस व्यवस्था को जिला स्तर तक जोड़ने के लिए एक दशक से भी अधिक समय से योजनाएं चल रही हैं।

MAC के बारे में:

मैक (MAC), इंटेलिजेंस ब्यूरो के तहत एक सामान्य आतंकवाद-रोधी ग्रिड है, जिसे कारगिल युद्ध के बाद वर्ष 2001 में शुरू किया गया था।

  • रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW), सशस्त्र बल और राज्य पुलिस सहित 28 संगठन ‘मल्टी एजेंसी सेंटर’ (MAC) का हिस्सा हैं।
  • विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा MAC मैक पर रीयल-टाइम इंटेलिजेंस इनपुट साझा किए जाते हैं।
  • अब खुफिया जानकारी साझा करने के लिए नोडल निकाय के रूप में 24/7 कार्य करते हुए, MAC केंद्र और राज्य, दोनों में कई एजेंसियों, विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय करता है।

नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID):

नेटग्रिड (NATGRID) की परिकल्पना वर्ष 2009 में की गयी थी, इसका उद्देश्य सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लिए एक ‘सुरक्षित मंच’ पर आव्रजन संबधी प्रविष्टियों अर्थात प्रवासियों के आने व जाने संबंधित सूचनाओं, किसी संदिग्ध का टेलीफ़ोन विवरण तथा बैंकिंग संबंधी जानकारी प्राप्त करने हेतु ‘वन-स्टॉप केंद्र’ का निर्माण करना था।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


रियोवायरस

हाल ही में, आंध्र प्रदेश में जंगली केकड़ों (स्काइला सेराटा- Scylla serrata) की सामूहिक मृत्यु का कारण ‘मड क्रैब रियोवायरस (Mud Crab Reovirus – MCRV) निर्धारित किया गया है।

  • मड क्रैब रियोवायरस “रेओविरिडे” (Reoviridae) परिवार से संबंधित है। यह जंगली केकड़ों की सामूहिक मृत्यु के लिए जिम्मेदार है।
  • यह वायरस मुख्य रूप से हेपेटोपैनक्रियास (hepatopancreas), आंत और गलफड़ों के संयोजी ऊतक को प्रभावित करता है।
  • इसे स्लीपिंग डिजीज के नाम से भी जाना जाता है।

 

NEAT 3.0

हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा ‘प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधन’-(NEAT) 3.0 का शुभारंभ किया गया।

  • शिक्षा मंत्रालय द्वारा NEAT को सरकार (इसकी कार्यान्वयन एजेंसी AICTE के माध्यम से) और भारत भर में शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के रूप में घोषित किया गया है।
  • प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधन (National Educational Alliance for Technology – NEAT) शिक्षा क्षेत्र में सर्वोत्तम विकसित तकनीकी समाधानों का उपयोग करने के लिए शिक्षार्थियों की सुविधा के लिए एक मंच पर युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए एक पहल है।
  • इसमें, बेहतर सीखने के परिणामों और आला क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए व्यक्तिगत और अनुकूलित सीखने के अनुभव के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाता है।

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