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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 3 January 2022

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-I

1. जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ का मसौदा

2. चीन का सीमा कानून और भारत

3. हमास और गाजा पट्टी

4. त्रिंकोमाली तेल टैंक फार्म: भारत एवं श्रीलंका समझौता

 

सामान्य अध्ययन-III

1. रायथु बंधु

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. मालाबार नौसेना युद्धाभ्यास

2. केरल में दो पादप प्रजातियों की खोज

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ (National Population Register – NPR) को अद्यतन करने हेतु ‘जनगणना’ (CENSUS) के पहले चरण और जनगणना विवरण संग्रह प्रक्रिया को कम से कम सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

जनगणना हेतु अधिदेशी अनिवार्यताएं:

प्रशासनिक इकाइयों की अधिकार सीमा पर रोक: जनगणना प्रक्रिया के आरंभ होने से न्यूनतम तीन महीने पहले से, प्रशासनिक इकाइयों (जिलों, उप-जिलों, तहसीलों, तालुका, पुलिस स्टेशनों आदि की सीमाओं) की अधिकार सीमाओं को अनिवार्यतः फ्रीज करना / रोक लगाना आवश्यक होता है।

2021 की जनगणना हेतु प्रशासनिक इकाइयों (Administrative Units) की अधिकार-सीमा पर रोक लगाने हेतु, 1 जनवरी 2010 से, अर्थात वर्ष 2011 की जनगणना हेतु अधिकार-सीमाओं पर रोक लगाए जाने की तारीख से, आगामी जनगणना प्रक्रिया (वर्तमान में 30 जून, 2022 तक) हेतु अधिकार-सीमाओं पर रोक लगाए जाने की तारीख तक, होने वाले सभी परिवर्तनों पर विचार किया जाएगा।

जनगणना:

जनगणना (Census), देश में जनसंख्या के आकार, वितरण और सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जनसांख्यिकीय संबंधी जानकारी और अन्य विवरणों के बारे में जानकारी प्रदान करती है।

  • भारत में जनगणना, पहली बार वर्ष 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो के अधीन शुरू की गई थी। इसने समाज में उत्थान करने हेतु नई नीतियों, सरकारी कार्यक्रमों को तैयार करने में सहायता प्रदान की।
  • भारत में पहली संपूर्ण जनगणना वर्ष 1881 में हुई थी। तब से, प्रति दस वर्ष में एक बार, निर्विघ्न रूप से जनगणना की जाती है।

भारत में जनगणना कौन करता है?

भारत में दशकीय जनगणना के संचालन का दायित्व भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (Office of the Registrar General and Census Commissioner) सौंपा गया है।

जनगणना, निम्नलिखित विषयों पर जानकारी के सबसे विश्वसनीय स्रोतों में से एक है:

  1. जनसांख्यिकी
  2. आर्थिक गतिविधियां
  3. साक्षरता और शिक्षा
  4. आवास और घरेलू सुविधाएं
  5. शहरीकरण, प्रजनन और मृत्यु दर
  6. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
  7. भाषा

ऐतिहासिक महत्व:

  • ऋग्वेद’ से पता चलता है कि भारत में 800-600 ईसा पूर्व के दौरान किसी प्रकार की जनसंख्या गणना की गई थी।
  • तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कौटिल्य’ द्वारा लिखित अर्थशास्त्र में कराधान के लिए राज्य-नीति के एक उपाय के रूप में जनसंख्या के आंकड़ों का संग्रह करने का उल्लेख किया गया था।
  • मुगल बादशाह अकबर के शासन काल में लिखित ‘आईना-ए-अकबरी में जनसंख्या, उद्योग, धन और कई अन्य विशेषताओं से संबंधित विस्तृत आंकड़े शामिल किए गए थे।

current Affairs

 

‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ और ‘जनगणना’ में अंतर:

  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का उद्देश्य देश के प्रत्येक आम नागरिक की विस्तृत पहचान का डेटाबेस तैयार करना है, और भारत के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ के लिये ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।
  • यद्यपि, जनगणना (Census) के माध्यम से भी समान विवरण एकत्र किया जाता है, किंतु ‘जनगणना अधिनियम’, 1948 की धारा 15 के अनुसार, जनगणना में एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत स्तर की जानकारी गोपनीय होती है और “एकत्रित डेटा को केवल विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर जारी किया जाता है।”

‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ क्या है?

  • ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ (NPR), देश के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर होता है, जिसमे गांव स्तर तक स्थान आदि का विवरण दर्ज किया जाता है। “जन्म, मृत्यु और प्रवास के कारण होने वाले परिवर्तनों को शामिल करने के लिए” समय-समय पर इसे अद्यतन किया जाता है।
  • ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ के अगले चरण को वर्ष 2021 में किए जाने वाले ‘मकान-सूचीकरण’ और मकान-गणना के साथ अपडेट किया जाना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था।

सामान्य निवासी’ कौन है?

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘देश का सामान्य निवासी’ को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया गया है- वह व्यक्ति, जो कम-से-कम पिछले छह महीनों से किसी स्थानीय क्षेत्र में रहता है अथवा अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक के लिये किसी विशेष स्थान पर रहने का इरादा रखता है।

‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ की आलोचनाएं:

प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC) और लागू किए जाने वाले ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ (CAA) के साथ ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ (NPR) के संबधों को देखते हुए कई विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा शासित राज्यों द्वारा NPR की अद्यतन प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है।

वर्ष 2003 में बनाए गए नागरिकता नियमों के अनुसार, ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’, भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) के संकलन की दिशा में पहला कदम है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (Registrar General and Census Commissioner) द्वारा जून 2021 तक संकलित अनंतिम आंकड़ों के अनुसार:

  1. देश में जिलों की संख्या वर्ष 2011 में 640 थी, जोकि बढ़कर 736 हो गई है।
  2. उप-जिलों की संख्या 5,925 से बढ़कर 6,754 हो गयी है, ‘वैधानिक शहरों’ (Statutory Towns) की संख्या 4,041 से बढ़कर 4,657 तथा ‘जनगणना नगरों’ (Census Towns) की संख्या 3,892 से बढ़कर 5,050 हो गयी है।
  3. किंतु, देश में गावों की संख्या में, वर्ष 2011 (6,40,934 गाँव) से घटकर वर्ष 2021 में 6,39,083 हो गयी है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
  2. NPR डेटा के घटक
  3. सामान्य निवासी कौन है?
  4. NPR कौन तैयार करता है?
  5. कोई व्यक्ति भारतीय नागरिकता कैसे प्राप्त कर सकता है?
  6. क्या एक भारतीय नागरिक दोहरी नागरिकता रख सकता है?
  7. दीर्घकालीन वीजा क्या हैं?
  8. नागरिकता अधिनियम में नवीनतम संशोधन

मेंस लिंक:

जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता और महत्व की चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ का मसौदा


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा ‘हवाई खेलों के लिए राष्ट्रीय नीति’ (National Air Sports Policy) का मसौदा जारी किया गया है।

नीति के प्रमुख बिंदु:

‘द्वि-स्तरीय प्रशासनिक संरचना’ (Two-tier governance structure): ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ के तहत, देश में एयर स्पोर्ट्स के लिए ‘टू-टियर गवर्नेंस स्ट्रक्चर’ अर्थात ‘द्वि-स्तरीय प्रशासनिक संरचना’ का प्रस्ताव किया गया है। इसमें शीर्ष स्तर पर, ‘एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Air Sports Federation of India – ASFI) शासी निकाय होगा तथा प्रत्येक ‘एयर स्पोर्ट्स’ के लिए एक ‘एसोसिएशन’ होगी।

ASFI के बारे में: ‘एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (ASFI), ‘नागरिक उड्डयन मंत्रालय’ के अधीन एक स्वायत्त निकाय होगा, और यह ‘फ़ेडरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनेल’ (Fédération Aéronaautique Internationale – FAI) तथा हवाई खेलों से संबंधित अन्य वैश्विक प्लेटफार्मों में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। ‘फ़ेडरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनेल’ (FAI) का मुख्यालय स्विट्जरलैण्ड के लॉज़ेन में है।

ASFI के कार्य: ‘एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ द्वारा नियमन, प्रमाणन, प्रतियोगिताएं, पुरस्कार और दंड आदि समेत हवाई खेलों के विभिन्न पहलुओं को प्रशासित किया जाएगा।

प्रत्येक ‘एयर स्पोर्ट्स एसोसिएशन’ के नियम और कार्य: प्रत्येक ‘एयर स्पोर्ट्स’ के लिए गठित ‘एसोसिएशन’, संबंधित खेलों के लिए उपकरण, बुनियादी ढांचे, कर्मियों और प्रशिक्षण हेतु अपने सुरक्षा मानकों का निर्धारण तथा ‘गैर-अनुपालन’ के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। ‘एसोसिएशन’ के द्वारा अपने इन दायित्वों को पूरा नहीं करने पर ASFI द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ का विस्तार: इसमें एरोबेटिक्स, एरोमॉडलिंग, शौकिया तौर पर निर्मित और प्रायोगिक विमान, बैलूनिंग (Ballooning), ड्रोन, ग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग, पैराग्लाइडिंग, माइक्रोलाइटिंग, पैरामोटरिंग (Paramotoring), स्काईडाइविंग और विंटेज एयरक्राफ्ट जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है।

पंजीकरण: ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ (NASP) के तहत, सेवाओं और संबंधित उपकरणों को प्रदान करने वाली संस्थाओं को पंजीकरण करवाना आवश्यक किया गया है, साथ ही इनके लिए दंड संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं।

भारतीय हवाई क्षेत्र का विभाजन: ‘नागरिक उड्डयन महानिदेशालय’ के ‘डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म’ के अनुसार, भारतीय हवाई क्षेत्र को लाल, पीले और हरे क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। जिससे हवाई खेलों के प्रति उत्साही लोगों को मार्गदर्शन हेतु एक विश्वसनीय ‘मानचित्र’ आसानी से सुलभ हो सकेगा। ‘रेड जोन’ में ‘हवाई खेलों’ के संचालन हेतु केंद्र सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगा।

नियंत्रण क्षेत्र: अन्य मानव-सहित हवाई-जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु, देश में लोकप्रिय हवाई खेलों के आकर्षण क्षेत्रों, जैसे हिमाचल प्रदेश में बीर बिलिंग, सिक्किम में गंगटोक, महाराष्ट्र में हड़पसर और केरल में वागामोन (Vagamon) को हवाई खेलों के लिए “नियंत्रण क्षेत्र” (Control Zone) घोषित किया जा सकता है।

नीति का महत्व:

  • हवाई खेलों से संबंधित गतिविधियों से राजस्व अर्जित होने के अलावा, विशेष रूप से देश के पहाड़ी क्षेत्रों में, यात्रा, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और स्थानीय रोजगार में वृद्धि के मामले में काफी अधिक लाभ होगा।
  • देश भर में ‘एयर स्पोर्ट्स हब’ का निर्माण करने से, पूरे विश्व से ‘एयर स्पोर्ट्स पेशेवर’ और पर्यटक भारत आएंगे।

आवश्यकता:

एरोस्पोर्ट्स उद्योग द्वारा इस बात पर नाराजगी व्यक्त की जा रही थी, कि देश में विविध प्राकृतिक स्थानों और जबरदस्त क्षमता होने के बावजूद सरकार, द्वारा देश में एयरो स्पोर्ट्स को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

  • एरोस्पोर्ट, पर्यटन के विकास, रोजगार सृजन और विमानन गतिविधियों में रुचि के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा करते हैं।
  • एक विकासोन्मुख ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ (NASP), नवीनतम एरोस्पोर्ट्स प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे और सर्वोत्तम प्रथाओं में निवेश आकर्षित करने में सहायक हो सकती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि स्विट्जरलैंड के लुसाने / लॉज़ेन में स्थित ‘फेडेरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनेल’ (FAI), हवाई खेलों के लिए वैश्विक शासी निकाय है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ (NASP) के प्रमिख बिंदु
  2. ‘एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (ASFI), इसकी भूमिका और कार्यों के बारे में
  3. ‘फ़ेडरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनेल’ (FAI) के बारे में

मेंस लिंक:

‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ नीति की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन का सीमा कानून और भारत


संदर्भ:

नए साल से, चीन द्वारा स्थलीय सीमाओं से संबंधित एक नया कानून लागू किया गया है। मामले से संबंधित विशेषज्ञों और कुछ नागरिकों का विचार है, कि भारत को अपने सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में चिंता करनी चाहिए, तथा अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि चीन द्वारा इस नए कानून के बगैर भी आक्रामक कार्रवाईयां की जा रही है।

चीन के इस कानून के बारे में:

चीन के इस सीमा कानून का पूरा नाम “देश के सीमावर्ती क्षेत्रों का संरक्षण एवं दोहन” (Protection and Exploitation of the Country’s Land Border Areas) कानून है।

  • इस कानून के तहत, “चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को अटूट एवं अलंघनीय” घोषित किया गया है।
  • क़ानून के तहत, राज्य के लिए “क्षेत्रीय अखंडता और स्थलीय सीमाओं की रक्षा हेतु उपाय करना तथा और इसे कमजोर करने वाले किसी भी कार्रवाई से बचाव करना तथा प्रतिरोध करना” आवश्यक होगा।
  • इस कानून में, सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों के लिए गांवों का विकास करने को प्रोत्साहित किया गया है।
  • कानून में, राज्य को “समानता, आपसी विश्वास और मैत्रीपूर्ण परामर्श के सिद्धांतों का पालन करने, विवादों और लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों का समुचित समाधान करने, एवं वार्ता के माध्यम से पड़ोसी देशों के साथ स्थलीय सीमा संबंधी मामलों को हल करने, को कहा गया है।
  • इस कानून के तहत, सीमा बंद करने जैसे आपातकालीन उपाय करने हेतु ‘चार परिस्थितियों’ को निर्धारित किया गया है।

इस कानून को लागू किए जाने के पीछे तर्क:

चीन का यह कानून, अपनी स्थलीय सीमा की सुरक्षा पर बीजिंग की नई चिंताओं को दर्शाता है। इसमें बीजिंग के लिए ‘कुछ हद तक खुली हुई स्थलीय सीमा’ पर अधिक नियंत्रण रखने की अनिवार्यता को भी रेखांकित किया गया है।

  • यह कानून “मध्य एशिया की सीमा से लगे अपने भीतरी इलाकों की स्थिरता के बारे में बीजिंग की ढकी-छिपी चिंताओं को भी दर्शाता है”। अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी और तालिबान द्वारा सता पर काबिज होने के बाद “बीजिंग की चिंताएं बढ़ गयी हैं, कि अफगानिस्तान आतंकवाद और चरमपंथ का एक केंद्र बन सकता है और यह उसके शिंजियांग प्रांत में फैल सकता है”।
  • इस कानून को लागू करने में, संभवतः घरेलू राजनीति भी एक कारक रही होगी। इस वर्ष के अंत में होने वाली 20वीं पार्टी कांग्रेस में राष्ट्रपति ‘शी जिनपिंग’ को आगे रखने तथा उनके तीसरे कार्यकाल को सुरक्षित करने, को ध्यान में रखते हुए इस कानून को तैयार किया गया हो सकता है।

भारत के लिए चिंता का विषय:

हालांकि, यह कानून विशेष रूप से ‘भारत’ के लिए नहीं बनाया गया है, ,लेकिन इसका कुछ असर होना तय है।

  • चीन और भारत के मध्य 3,488 किलोमीटर लंबी एक एक विवादित सीमा है, जोकि चीन की 14 देशों के साथ 22,457 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमाओं में, मंगोलिया और रूस के साथ लगी हुए सर्वाधिक लंबी सीमाओं के बाद तीसरी सबसे लंबी सीमा है।
  • इस बात का संदेह बढ़ता जा रहा है, कि इस नए कानून के लागू करने के लिए ही चीन द्वारा पूर्वी लद्दाख में ‘गतिरोध’ पर आगे की वार्ता को रोका जा रहा था। इस विषय पर दोनों देशों के ‘कोर कमांडरों’ की आखिरी मुलाकात अक्टूबर में हुई थी।
  • नए कानून के तहत, चीन की अनुमति के बिना, सीमा के करीब स्थायी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर भी रोक लगाई गयी है। गतिरोध शुरू होने के बाद से, भारत और चीन, दोनों देशों के द्वारा इस क्षेत्र में नई सड़कों, पुलों और अन्य सुविधाओं का तेजी से निर्माण कराया जा रहा है; वस्तुतः, चीन द्वारा भारत के कामगारों पर पहले भी आपत्ति जताई जा रही थी।

भारत-चीन संबंधों पर इसका संभावित प्रभाव:

  • भारत-चीन संबंधों पर कोई भी प्रभाव, नए कानून के लागू होने अथवा नहीं होने की बजाय, बहुत कुछ चीन की कार्रवाइयों पर निर्भर करता है।
  • कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है, कि नया कानून चीन को मौजूदा गतिरोध सहित अन्य महत्वपूर्ण सीमा विवादों के समाधान हेतु अपनी एड़ी ज़माने पर विवश करेगा।
  • अन्य लोगों का मानना है, कि यह नया कानून केवल एक उपकरण है जिसका चीन सरकार अपनी इच्छानुसार उपयोग करेगी, क्योंकि इस कानून से पहले भी चीन की कार्रवाईयां आक्रामक रही है।

कुल मिलाकर, नया कानून “चीन द्वारा भारत और भूटान के साथ क्षेत्रीय सीमाओं को एकतरफा रूप से सीमांकित और निरुपित करने का नवीनतम प्रयास” है।

चिंताएं और चुनौतियां:

  • पूर्वी लद्दाख में जारी सीमा गतिरोध अभी भी अनसुलझा बना हुआ है।
  • अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावा व्यक्त करते हुए चीन द्वारा भारतीय राज्य में कई स्थानों का नाम बदला गया है।
  • दिल्ली स्थित चीनी दूतावास द्वारा, ‘निर्वासित तिब्बती संसद’ द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल होने वाले एक मंत्री सहित भारतीय सांसदों को पत्र लिखा गया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

हमास एवं गाजा पट्टी


संदर्भ:

हाल ही में, हमास शासित क्षेत्र से रॉकेट दागे जाने के एक दिन बाद, इजरायल की सेना ने ‘गाजा पट्टी’ में आतंकवादी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं।

संबंधित प्रकरण:

मिस्र एवं अन्य मध्यस्थों द्वारा इजरायल और हमास (Hamas) के मध्य करवाया गया ‘संघर्ष विराम’ अल्पकालिक साबित हुआ है। चरमपंथी ‘हमास’ समूह का कहना है, कि जब इस्लामिक आंदोलन द्वारा वर्ष 2007 में तटीय बस्तियों पर कब्जा कर लिया गया था, उस समय इसराइल ने मिस्र की मदद से ‘गाजा’ पर लगाई गई नाकेबंदी को कम करने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए थे।

‘हमास’ के बारे में:

  • हमास (Hamas) एक फिलिस्तीनी इस्लामिक राजनीतिक संगठन और आतंकवादी समूह है। इस संगठन की स्थापना वर्ष 1987 में हुई थी और तब से यह आत्मघाती बम विस्फोट और रॉकेट हमलों के माध्यम से इजरायल के विरुद्ध युद्ध छेड़े हुए है।
  • यह इजराइल की जगह एक फिलीस्तीनी राज्य की स्थापना करना चाहता है। हमास, फिलिस्तीनी प्रशासन से पृथक, स्वतंत्र रूप से गाजा पट्टी को नियंत्रित करता है।

समझौते की आवश्यकता:

गाजा पट्टी क्षेत्र पर वर्ष 2007 से इजरायल द्वारा कड़ी नाकाबंदी की जा रही है, जिसके चलते इस क्षेत्र में अधिकांश बुनियादी सामान अभी भी अत्यधिक प्रतिबंधित नियमों का सामना करने के बाद पहुँच पाता है।

मई में, इजरायल द्वारा किए गए एक हमले में लगभग 260 फिलिस्तीनी मारे गए और हजारों घायल हो गए और साथ ही गाजा में विनाश का एक बड़ा निशान शेष रह गया। फिलिस्तीनी विद्रोही समूहों द्वारा इस हमले के जबाव में इजरायली क्षेत्रों में रॉकेट दागे गए जिसमें लगभग 13 इजरायली मारे गए।

‘गाजा पट्टी’ की अवस्थिति:

गाजा पट्टी (Gaza Strip) पूर्णतयः कृत्रिम रूप से निर्मित एक ‘रचना’ / ‘सृजन’ है, जिसे इज़राइल के बनने के दौरान, 1948 में फिलिस्तीन की लगभग तीन-चौथाई विस्थापित, कुछ मामलों में निष्कासित, अरब आबादी को बसाने के लिए निर्मित किया गया था।

  • इस दौरान, अधिकांश शरणार्थी, पड़ोसी देशों, जैसकि जॉर्डन, सीरिया और लेबनान में बिखरे गए।
  • कुछ शरणार्थी आबादी ‘वेस्ट बैंक’ में बस गई, जिस पर 1948 के बाद जॉर्डन ने अपना अधिकार स्थापित कर लिया।
  • विस्थापित आबादी की बड़ी संख्या ‘गाजा पट्टी’ में जाकर बस गई, जोकि मिस्र और वर्तमान इजराइल के मध्य स्थित एक संकरी सी तटीय पट्टी है।
  • वर्तमान में, गाजा पट्टी की कुल आबादी में से लगभग 70% आबादी शरणार्थी हैं।

‘गाजा पट्टी’ पर नियंत्रण:

‘हमास’ (Hamas) ने वर्ष 2007 में गाजा पट्टी पर बलपूर्वक कब्जा कर लिया था। इसके तुरंत बाद, इज़राइल ने गाजा की सीमाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया और गाजा को एक दुश्मन इकाई घोषित कर दिया। गाजा को एक देश का दर्जा प्राप्त नहीं है।

‘हमास’ को इसके द्वारा आम नागरिकों पर किए गए हमलों के इतिहास को देखते हुए, इज़राइल तथा संयुक्त राज्य अमेरिका सहित अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा एक आतंकवादी संगठन के रूप में देखा जाता है।

 

वर्तमान परिदृश्य:

  • इज़राइल का अभी भी वेस्ट बैंक पर कब्जा है, हालांकि इसने गाजा पर अपना अधिकार छोड़ दिया है किंतु, संयुक्त राष्ट्र अभी भी भूमि के इस भाग को अधिकृत क्षेत्र का हिस्सा मानता है।
  • इज़राइल, पूरे यरुशलम को अपनी राजधानी होने का दावा करता है, जबकि फिलिस्तीनी, पूर्वी यरुशलम को भविष्य के फिलिस्तीनी राष्ट्र की राजधानी होने का दावा करते हैं।
  • अमेरिका, पूरे यरुशलम शहर पर इज़राइल के दावे को मान्यता देने वाले गिने-चुने देशों में से एक है।

वर्तमान घटनाक्रम:

  • पूर्वी यरुशलम, गाजा और वेस्ट बैंक में रहने वाले इज़राइल और फिलिस्तीनियों के बीच अक्सर तनाव में वृद्धि होती रहती है।
  • गाजा पर ‘हमास’ नामक एक फिलीस्तीनी उग्रवादी समूह का शासन है, जो कई बार इज़राइल से संघर्ष कर चुका है। ‘हमास’ को प्राप्त होने वाले हथियारों की आपूर्ति पर रोक लगाने हेतु इज़राइल और मिस्र ने गाजा की सीमाओं पर कड़ा नियंत्रण लगाया हुआ है।
  • गाजा और वेस्ट बैंक में फिलीस्तीनियों का कहना है, कि वे इज़राइल की कार्रवाइयों और प्रतिबंधों के कारण पीड़ित हैं। इज़राइल का कहना है कि वह केवल फिलिस्तीनी हिंसा से खुद को बचाने के लिए कार्रवाइयां कर रहा है।
  • अप्रैल 2021 के मध्य में रमजान के पवित्र मुस्लिम महीने की शुरुआत के बाद से पुलिस और फिलिस्तीनियों के बीच हुई झड़पों के साथ तनाव में वृद्धि हो गई है।
  • पूर्वी यरुशलम में कुछ फिलीस्तीनी परिवारों को बेदखल किए जाने की धमकी से भी आग और भड़की है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वेस्ट बैंक कहाँ है?
  2. गाजा पट्टी
  3. गोलन हाइट्स
  4. ‘हमास’ कौन हैं?
  5. ‘अल-नकबा’ क्या है?
  6. इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के बारे में

मेंस लिंक:

लंबे समय से जारी इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को समाप्त करने के उपाय सुझाएं।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

त्रिंकोमाली तेल टैंक फार्म: भारत एवं श्रीलंका समझौता


संदर्भ:

हाल ही में, श्रीलंका द्वारा ‘त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फार्म’ (Trincomalee Oil Tank farm) को संयुक्त रूप से विकसित करने हेतु, ‘इंडियन ऑयल’ की सहायक कंपनी ‘लंका आईओसी’ (Lanka IOC) को 49% हिस्सेदारी दिए जाने की घोषणा की गयी है। इस संयुक्त उपक्रम में 51% हिस्सेदारी ‘सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन’ की रहेगी।

एक ऐतिहासिक समझौता:

35 साल पुराना समझौता: यदि यह समझौते योजना के अनुसार लागू हो जाता है, तो भारत और श्रीलंका, आखिरकार एक ‘35 साल पुराना समझौते’ को कार्यान्वित करने की उपलब्धि हासिल कर लेंगे। 29 जुलाई 1987 को हस्ताक्षरित ‘भारत-श्रीलंका समझौते’ (Indo-Lanka Accord) के प्रावधानों में ‘त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फार्म’ को संयुक्त रूप से विकसित किए जाने का अनुबंध भी किया गया था। इस समझाते पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति जे. आर. जयवर्धने ने हस्ताक्षर किए थे।

त्रिंकोमाली का महत्व:

  • श्रीलंका के पूर्वी जिला ‘त्रिंकोमाली’ में स्थित ‘द्वितीय विश्वयुद्ध’ कालीन तेल टैंक परिसर में ‘तेल भंडारण सुविधा’ की क्षमता लगभग 1 मिलियन टन है, जोकि श्रीलंका में मांग से कहीं अधिक है।
  • हिंद महासागर में रणनीतिक अवस्थिति: त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फार्म ‘चाइना बे’ (China Bay) में स्थित है। इस ‘ऑयल टैंक फार्म’ पर ‘त्रिंकोमाली बंदरगाह’ द्वारा सेवाएं प्रदान की जाती है, जोकि एक गहरा प्राकृतिक बंदरगाह है।
  • सुगम्य पहुँच: 2010-2011 में, अधिकारियों द्वारा भारत के पूर्वी तट पर ‘इंडियन ऑयल भंडारण’ के विस्तार के रूप में, तथा छोटे जहाजों के लिए ईंधन भरने की सुविधा के रूप में इसे विकसित करने हेतु ‘टैंक फार्म’ का नवीनीकरण करने पर जोर दिया गया था। त्रिंकोमाली, चेन्नई का निकटतम बंदरगाह है।
  • चीन के साथ संतुलन बनाने हेतु: भारत के भू-रणनीतिक दृष्टिकोण से, चीन द्वारा समर्थित दक्षिणी ‘हंबनटोटा बंदरगाह’ के साथ संतुलन बनाने हेतु ‘त्रिंकोमाली बंदरगाह’ काफी महत्वपूर्ण है।

इसलिए, 850 एकड़ की इस ‘त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फार्म’ सुविधा में किसी तीसरे देश को प्रवेश करने से रोकना भारत के हित में है।

Current affairs

 

‘भारत-श्रीलंका समझौते’ के बारे में:

श्रीलंका में तमिल एवं सिंहली समुदायों के मध्य जारी ‘सिविल-वॉर’ को समाप्त करने के संदर्भ में वर्ष 1987 में ‘भारत-श्रीलंका समझौते’ (Indo-Lanka Accord) पर हस्ताक्षर किए गए थे।

  • इस समझौते को, इसके रचनाकार प्रधानमंत्री राजीव गांधी और राष्ट्रपति जे. आर. जयवर्धने के नाम पर लोकप्रिय रूप से “राजीव-जयवर्धने समझौते” के रूप में जाना जाता है।
  • इस समझौते के तहत, भारत और श्रीलंका के मध्य सभी तीन विवादास्पद मुद्दों- रणनीतिक हित, श्रीलंका में भारतीय मूल के लोग और श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यक अधिकार; को सामूहिक रूप से समाधान करने का प्रयास किया गया था।
  • इस समझौते के परिणामस्वरूप, श्रीलंका में शांति स्थापित करने हेतु ‘भारतीय शांति रक्षक बलों’ (Indian Peace Keeping Force – IPKF) को तैनात किया गया था।
  • इस समझौते के परिणामस्वरूप, श्रीलंका के संविधान में तेरहवां संशोधन और ‘प्रांतीय परिषद अधिनियम’ 1987 को अधिनियमित किया गया था।

इंस्टा जिज्ञासु:

श्रीलंका के संविधान का 19वां संशोधन क्या है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

रायथु बंधु योजना


(Rythu Bandhu)

संदर्भ:

तेलंगाना सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना’ ‘रायथु बंधु’ (Rythu Bandhu) के तहत वितरित कुल धनराशि, शीघ्र ही 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।

यह योजना वर्ष 2018 में शुरू की गई थी।

‘रायथु बंधु’ क्या है?

रायथु बंधु (Rythu Bandhu) योजना की शुरुआत तेलंगाना सरकार द्वारा की गयी है, यह किसानों के लिए निवेश सहायता योजना (Farmer’s Investment Support Scheme- FISS) है। यह किसानों को एक वर्ष में दो फसलों के उत्पादन हेतु निवेश करने के लिए सहायता प्रदान करने का कल्याणकारी कार्यक्रम है।

  • यह योजना का उद्देश्य राज्य के किसानों को उनके दिन-प्रतिदिन के कार्यों के लिए प्रोत्साहन देना है।
  • इस योजना के तहत, तेलंगाना राज्य के लगभग 33 लाख किसानों को साल में दो बार (फसल की बुवाई) प्रति एकड़ 4000 रुपये प्रदान किए जाते हैं।
  • इसके अंतर्गत, रबी और खरीफ, दोनों फसलों के लिए कृषि निवेश के रूप में कुल 8,000 रुपये की सहायता की जाती है।

उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण ऋणग्रस्तता के दुष्चक्र को तोड़ना है।

रायथु बंधु योजना के तहत लाभार्थी:

  1. योजना के तहत आवेदन करने और लाभ प्राप्त करने के लिए, किसान को तेलंगाना राज्य का निवासी होना चाहिए और उसके पास खेती के लिए अपनी जमीन होनी चाहिए।
  2. यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए लागू की गयी है; और, वाणिज्यिक किसानों को योजना से बाहर रखा गया है।
  3. इसके अलावा, किराए की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को भी इस योजना से बाहर रखा गया है।

वर्तमान में, तेलंगाना में 8 लाख से अधिक किसान ‘रायथु बंधु योजना’ का लाभ उठा रहे हैं।

योजना का महत्व:

  • राज्य सरकार द्वारा, खेती में प्रारंभिक निवेश की जरूरतों को पूरा करने तथा कर्ज के जाल में फसने से बचाने हेतु ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम’ से फसल सीजन की शुरुआत में ‘भूमि मालिक किसानों’ को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • इसके परिणामस्वरूप, किसानों में विश्वास पैदा होता है, उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है, और ग्रामीण ऋणग्रस्तता का चक्र टूटता है।

‘पीएम-किसान योजना’ से तुलना:

राज्य सरकार द्वारा अक्सर केंद्र सरकार की ‘प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि’ / पीएम-किसान (PM-KISAN) योजना को ‘रायथु बंधु योजना’ की “प्रतिलिपि” बताया जाता है। तेलंगाना सरकार द्वारा अपनी योजना को PM-KISAN से काफी बेहतर भी बताया जाता है।

प्रमुख अंतर:

‘रायथु बंधु’ योजना प्रत्येक एकड़ भूमि के लिए अनुमानित लागत व्यय पर आधारित है, और एक किसान के स्वामित्व में ‘कृषि भूमि एकड़’ की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है। जबकि, पीएम-किसान योजना के तहत, कृषि इकाइयों की बजाय केवल परिवार को सहायता प्रदान की जाती है।

आलोचना:

‘रायथु बंधु योजना’ की पिछली कई तिमाहियों से आलोचना की जा रही है, जिनमें मुख्यतः भूमिहीन या काश्तकार किसानों की दुर्दशा की अनदेखी करने का आरोप लगाया जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीएम किसान योजना- पात्रता
  2. ‘भावांतर भुगतान योजना’ के बारे में
  3. ‘रायथु बंधु योजना’ के बारे में
  4. ‘कालिया योजना’ के बारे में

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


मालाबार नौसेना युद्धाभ्यास

(Malabar Naval Exercise)

‘मालाबार नौसेना युद्धाभ्यास’, किसी भी अन्य देश के साथ सबसे भारत का सबसे जटिल नौसैनिक युद्धाभ्यास है।

  • मालाबार युद्धाभ्यास का आरंभ भारत और अमेरिका के मध्य वर्ष 1992 में एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुआ था। वर्ष 2015 में इस अभ्यास में जापान को सामिलित किया गया और इसके पश्चात यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया। इसके साथ ही इसका दायरा और जटिलता भी काफी बढ़ गई है।
  • इस युद्धाभ्यास के पच्चीस संस्करण अब तक आयोजित किए जा चुके हैं, इसका अंतिम संस्करण अगस्त और अक्टूबर 2021 में, दो चरणों में आयोजित किया गया था।

 

केरल में दो पादप प्रजातियों की खोज

हाल ही में, शोधकर्ताओं ने ‘तिरुवनंतपुरम’ और ‘वायनाड’ जिलों में फैले ‘जैव विविधता संपन्न पश्चिमी घाट क्षेत्रों’ से दो नई पादप प्रजातियों की खोज की है।

  • इन पादप प्रजातियों का नाम ‘फिम्ब्रिस्टिलिस सुनिली’ (Fimbristylis Sunilii) और ‘नेनोटिस प्रभुई’ (Neanotis Prabhuii) रखा गया है।
  • तिरुवनंतपुरम में ‘पोनमुडी पहाड़ियों’ के घास के मैदानों से एकत्रित, ‘फिम्ब्रिस्टाइलिस सुनिलि’ का नामकरण एक प्रख्यात ‘पादप वर्गाकरण विज्ञानी’ सी.एन. सुनील के नाम पर किया गया है। इसे IUCN रेड लिस्ट श्रेणियों के ‘अपर्याप्त विवरण’ (Data Deficient) श्रेणी में रखा गया है।
  • ‘नेनोटिस प्रभुई’ प्रजाति को ‘वायनाड’ के ‘चेम्बरा पीक’ घास के मैदानों में खोजा गया है। यह ‘रुबियासी (Rubiaceae) परिवार’ से संबंधित है और उच्च तुंगता वाले घास के मैदानों पर उगता है। इसे भी ‘अपर्याप्त विवरण’ श्रेणी में रखा गया है।

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