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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 December 2021

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

1. अटल नवाचार संस्थान उपलब्धि रैंकिंग

2. क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी

3. ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक

 

सामान्य अध्ययन-III

1. तिआनगोंग अंतरिक्ष स्टेशन

2. क्वांटम उलझन

3. सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

अटल नवाचार संस्थान उपलब्धि रैंकिंग (ARIIA)


संदर्भ:

हाल ही में ‘अटल नवाचार उपलब्धि संस्थान रैंकिंग’ (Atal Ranking of Institutions on Innovation Achievements – ARIIA) 2021 जारी की गई हैं।

अटल नवाचार रैंकिंग 2021

‘अटल नवाचार रैंकिंग’ (ARIIA) 2021, के तहत प्रतिभागी संस्थानों को दो प्रमुख श्रेणियों – तकनीकी और गैर तकनीकी – में वर्गीकृत किया गया है। इसके अलावा, इस रैंकिंग को सात उप-श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

तकनीकी संस्थान:

शीर्ष तीन संस्थान: इस श्रेणी में ‘आईआईटी मद्रास’ ने लगातार तीसरी बार शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके बाद, सूची में आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली को क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रखा गया है।

गैर-तकनीकी संस्थान:

इस श्रेणी के अंतर्गत, शीर्ष केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय’ (IGNOU), दिल्ली और ‘भारतीय प्रबंधन संस्थान’ (IIM), कोझीकोड शामिल हैं।

 

रैंकिंग पद्धति:

‘अटल नवाचार उपलब्धि संस्थान रैंकिंग’ (ARIIA), प्रतिभागी संस्थानों का नौ मानदंडों के तहत मूल्यांकन करने के बाद तैयार की गई है:

  1. गतिविधि श्रृंखला के माध्यम से ‘नवोन्मेषी और उद्यमशील मानसिकता’ विकसित करना।
  2. शिक्षण एवं अध्ययन: उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) द्वारा शुरू किए गए ‘नवाचार एवं उद्यमिता’ (Innovation and Entrepreneurship – I & E) से संबंधित शैक्षणिक कार्यक्रम और ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ (IPR)।
  3. ‘उच्च शिक्षण संस्थानों’ में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु समर्पित बुनियादी ढांचा और सुविधाएं।
  4. ‘उच्च शिक्षण संस्थानों’ के सहयोग से नवाचारों/विचारों का सृजन और उसकी मान्यता।
  5. ‘उच्च शिक्षण संस्थानों’ के सहयोग से स्थापित उद्यम और उनकी मान्यता।
  6. एंजेल और VC फंड/निवेश को ‘उच्च शिक्षण संस्थानों’ में इनक्यूबेट किए गए नवाचार और स्टार्टअप के सहयोग हेतु उपलब्ध कराना, तथा ‘नवाचार एवं उद्यमिता’ (I & E) पहल के लिए सहयोग और सह-निर्माण को बढ़ावा देना।
  7. बौद्धिक संपदा (Intellectual Property – IP), उत्पादन और व्यावसायीकरण।
  8. आई एंड ई गतिविधियों को बढ़ावा देने और सहयोग पर वार्षिक बजट: ‘नवाचार एवं उद्यमिता’ (I & E) और ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ (IPR) हेतु सहयोगी गतिविधियों पर कुल व्यय, ऊष्मायन (Incubation) सेवाओं से स्टार्टअप और बौद्धिक संपदा (IP) के व्यावसायीकरण और नवाचारों से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों’ द्वारा अर्जित कुल राजस्व।
  9. शिक्षा मंत्रालय (MOE) की ‘आई एंड ई’ पहल में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों’ की भागीदारी।

ARIIA क्या है?

‘अटल नवाचार उपलब्धि संस्थान रैंकिंग’ (ARIIA) शिक्षा मंत्रालय (MOE) की एक पहल है।

  • इसका कार्यान्वयन AICTE और शिक्षा मंत्रालय के ‘नवाचार प्रकोष्ठ’ के द्वारा किया जाता है।
  • उद्देश्य: नवाचार से संबंधित संकेतकों के आधार पर देश में उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों को प्रणालीबद्ध रूप से रैंक प्रदान करना।

महत्व:

  • ARIIA रैंकिंग, भारतीय संस्थानों को उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने हेतु, अपनी मानसिकता का पुन: अभिमुखीकरण करने और पारितंत्र का निर्माण करने के लिए प्रेरित करेगी।
  • ARIIA में नवाचारों की मात्रा की अपेक्षा गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया जाता है और इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन नवाचारों के वास्तविक प्रभाव को मापने का प्रयास किया जाता है।
  • ARIIA रैंकिंग संस्थानों के लिए भविष्य के विकास के लिए उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और नवाचार के मामले में अग्रणी बनाने के लिए गति और दिशा भी निर्धारित करेगी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप डिजिटल दिशा (Digital Disha) कार्यक्रम के बारे में जानते हैं? इसे कब लॉन्च किया गया था? इसके उद्देश्य क्या थे?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अटल नवाचार रैंकिंग’ किसके द्वारा जारी की जाती है?
  2. रैंकिंग पैरामीटर
  3. श्रेणियाँ।
  4. विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले संस्थान।

मेंस लिंक:

‘अटल नवाचार उपलब्धि संस्थान रैंकिंग’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी


संदर्भ:

1 जनवरी, 2022 से ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी’ (Regional Comprehensive Economic Partnership- RCEP) संगठन प्रभावी हो जाएगा। इसके साथ ही, यह ‘व्यापार की मात्रा’ के मामले में विश्व का सबसे बड़ा ‘मुक्त व्यापार क्षेत्र’ समझौता बन जाएगा।

RCEP क्या है?

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP), विश्व का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता है, जिसमे चीन, जापान ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और आसियान (ASEAN) के दस देश, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई, लाओस, म्यांमार और फिलीपींस शामिल है। यह नवंबर 2020 में लागू हुआ था तथा इसमें भारत शामिल नहीं है।

RCEP के लक्ष्य और उद्देश्य:

  1. उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विश्व के शेष भागों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सहायता करने हेतु टैरिफ कम करना, तथा सेवा क्षेत्र में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना।
  2. कंपनियों के लिए समय और लागत की बचत करने हेतु ब्लॉक के सदस्य देशों में भिन्न-भिन्न औपचारिकताओं को पूरा किये बिना किसी उत्पाद के निर्यात करने की सुविधा प्रदान करना।
  3. इस समझौते में बौद्धिक संपदा संबंधी पहलुओं को शामिल किया गया है, किंतु इसमें पर्यावरण संरक्षण और श्रम अधिकारों को सम्मिलित नहीं किया गया है।

महत्व:

  • ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी’ (RCEP) के अंतर्गत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 30%,  अर्थात 2 ट्रिलियन डॉलर (23.17 ट्रिलियन यूरो) और दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी, अर्थात लगभग 2.2 बिलियन लोगों की आबादी कवर होगी।
  • RCEP के तहत, इस संगठन के भीतर लगभग 90% व्यापार शुल्क अंततः समाप्त हो जाएंगे।
  • RCEP के तहत, व्यापार, बौद्धिक संपदा, ई-कॉमर्स और प्रतिस्पर्धा से संबंधित सामान्य नियम भी निर्धारित किए जाएंगे।

Current Affairs

 

RCEP में भारत क्यों शामिल नहीं हुआ?

भारत, ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी’ (RCEP) से मुख्यतः चीन द्वारा उत्पादित सस्ते सामान के देश में प्रवेश करने संबंधी चिंताओं के कारण अलग हो गया था। चीन के साथ भारत का व्यापार असंतुलन पहले से काफी अधिक है। इसके अलावा, यह समझौता सेवाओं को पर्याप्त रूप से खुला रखने में विफल रहा था।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP)  में भारत की मौजूदगी की आवश्यकता:

  • बढ़ती हुई वैश्विक अस्थिरता के दौर में एक समावेशी संरचना का निर्माण करने हेतु क्षेत्र की सहायता करने में भारत को ‘एक महत्वपूर्ण भूमिका’ अदा करनी थी।
  • इस प्रकार के व्यापारिक समझौते, भारतीय कंपनियों को बड़े बाजारों में भी अपनी ताकत दिखाने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं।
  • इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता हुआ तनाव, क्षेत्र के लिए ‘गंभीर चिंता’ का विषय है, जोकि महामारी के कारण और भी सघन हो गया है।

Current Affairs

 

आगे की चुनौतियां:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका की अनुपस्थिति में, बीजिंग को इस क्षेत्र में ‘आर्थिक विकास’ के चालक के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
  • आर्थिक लाभों को मूर्त रूप लेने में लंबा समय लगेगा।
  • जहाँ बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाएं अधिकांश लाभ उठाएंगी, वहीं RCEP के तहत ASEAN में शामिल छोटे देशों को नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि इस व्यापार समझौते में इन देशों के प्रमुख उद्योगों को कवर नहीं किया गया है।
  • एशिया में सबसे कम विकसित देश – कंबोडिया, लाओस, म्यांमार – वर्तमान में ‘आसियान समूह’ के भीतर होने वाले व्यापार से लाभान्वित होते हैं। RCEP के मध्य व्यापार से इन देशों के व्यापार को चोट पहुँच सकती है।
  • RCEP समझौते के तहत, छोटे आसियान देशों को अपने ‘व्यापार वरीयता कार्यक्रमों’ से होने वाले कुछ लाभों को गंवाना पड़ सकता है। अभी तक ये देश, दक्षिण कोरिया और जापान सहित आसियान समूह के बाहर टैरिफ-मुक्त उत्पादों का निर्यात किया करते थे।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि वर्तमान में चीन का जापान के साथ कोई द्विपक्षीय समझौता नहीं है, और केवल दक्षिण कोरिया के साथ एक सीमित सौदा है। जबकि ये दोनों देश चीन के क्रमशः तीसरे और पांचवें सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RCEP – संरचना और उद्देश्य
  2. आसियान देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते
  3. आसियान देशों की भौगोलिक अवस्थिति
  4. RCEP के लक्ष्य और उद्देश्य

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

न्यू डेवलपमेंट बैंक


संदर्भ:

भारत ने छह साल पहले ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (New Development Bank- NDB) के चौथे नए सदस्य के रूप में मिस्र के प्रवेश का स्वागत किया है।

NDB द्वारा सितंबर में बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और उरुग्वे को नए सदस्यों के रूप में स्वीकार किया गया था।

महत्व:

न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (NDB) द्वारा अपनी सदस्यता का विस्तार किए जाने से, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक ‘प्रमुख विकास संस्थान’ के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होगी।

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के बारे में:

  • यह ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – BRICS) देशों द्वारा संचालित एक बहुपक्षीय विकास बैंक है।
  • वर्ष 2013 में, दक्षिण अफ्रीका के डरबन में आयोजित 5 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं द्वारा ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ की स्थापना करने के संबंध में सहमति व्यक्त की गई थी।
  • इसकी स्थापना वर्ष 2014 में, ब्राजील के फोर्टालेजा में आयोजित 6 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
  • इस बैंक की स्थापना का उद्देश्य, पांच उभरते हुए बाजारों में वित्तीय और विकास सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • इसका मुख्यालय: शंघाई, चीन में स्थित है।

वर्ष 2018 में, ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ को, संयुक्त राष्ट्र के साथ सक्रिय और लाभप्रद सहयोग हेतु एक मजबूत आधार स्थापित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किया गया।

मतदान:

विश्व बैंक, जिसमे पूंजी शेयर के आधार पर ‘वोट’ का निर्धारण होता है, के विपरीत ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ में प्रत्येक भागीदार देश को एक ‘वोट’ निर्धारित किया जाता है, तथा किसी भी देश के पास ‘वीटो पावर’ नहीं होती है।

भूमिकाएँ एवं कार्य:

‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’, वैश्विक वृद्धि और विकास हेतु बहुपक्षीय और क्षेत्रीय वित्तीय संस्थानों के मौजूदा प्रयासों में सहायता करने हेतु ब्रिक्स देशों, अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने का कार्य करता है।

BRICS

 

महत्व:

ब्रिक्स समूह में विश्व के पांच सबसे बड़े विकासशील देश शामिल हैं। यह समूह वैश्विक आबादी का 41%, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 24% और वैश्विक व्यापार का 16% प्रतिनिधित्व करता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) – सदस्य और मतदान शक्तियाँ।
  2. NDB द्वारा कहां निवेश किया जा सकता है?
  3. भारत में NDB द्वारा वित्त पोषित परियोजनाएं कौन सी हैं?
  4. फोर्टालेजा घोषणा किससे संबंधित है?
  5. NDB की स्थापना कब की गई थी?
  6. NDB बनाम World Bank बनाम AIIB

मेंस लिंक:

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

तिआनगोंग अंतरिक्ष स्टेशन


संदर्भ:

अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति बढ़ाते जा रहे चीन ने, हाल ही में संयुक्त राष्ट्र से दो कथित अंतरिक्ष घटनाओं का विवरण देते हुए शिकायत की है। इन घटनाओं का संबंध चीन के ‘तिआनगोंग अंतरिक्ष स्टेशन’ (Tiangong Space Station) और एलोन मस्क द्वारा स्थापित एयरोस्पेस फर्म ‘स्पेसएक्स’ के दो स्टारलिंक उपग्रहों (Starlink satellites) से है।

चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र में शिकायत करने का कारण:

संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन, दोनों देश ‘बाह्य अंतरिक्ष संधि’ (Outer Space Treaty) के पक्षकार हैं। इस संधि को औपचारिक रूप से ‘चंद्रमा और अन्य नक्षत्रीय पिंडों सहित बाहरी अंतरिक्ष में अन्वेषण एवं इसके उपयोग हेतु राष्ट्रों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों संबंधी समझौते” (Treaty on Principles Governing the Activities of States in the Exploration and Use of Outer Space, including the Moon and Other Celestial Bodies) के रूप में जाना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाई गई इस बहुपक्षीय संधि के तहत ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून’ संबंधी एक आधारभूत ढांचा प्रदान किया गया है।

संधि के प्रमुख प्रावधान और इस मामले में उनकी प्रासंगिकता:

  • ‘बाह्य अंतरिक्ष संधि’ के अनुच्छेद VI के अनुसार, सभी राष्ट्र, ‘अपने देश की अंतरिक्ष गतिविधियों’ के लिए जिम्मेदार होंगे चाहे वे सरकारी या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा किए गए हों। इसका मतलब है, कि एलोन मस्क द्वारा स्थापित यूएस-आधारित एयरोस्पेस फर्म स्पेसएक्स की गतिविधियों के लिए यू.एस. को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
  • अनुच्छेद VII में कहा गया है, कि राष्ट्र, अपने उपग्रहों आदि जैसे अंतरिक्ष पिंडों से होने वाले नुकसान के लिए उत्तरदायी होंगे।
  • संधि के अनुच्छेद V के तहत, बाहरी अंतरिक्ष में खोजी गई किसी भी घटना – जो अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन या स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है – के बारे में, सभी पक्षकारों को अन्य सदस्यों तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव को तत्काल सूचित करना आवश्यक है”।

‘संयुक्त राष्ट्र’ की अंतरिक्ष संबंधी मुद्दों पर भूमिका:

‘बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर तदर्थ समिति’ का कार्य करने हेतु ‘बाह्य अंतरिक्ष मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय’ (United Nations Office for Outer Space Affairs) का गठन किया गया था।

  • इस समिति की स्थापना वर्ष 1958 में पहले कृत्रिम उपग्रह, स्पुतनिक -1 के प्रक्षेपण के तुरंत बाद की गई थी।
  • यह समिति, बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण अन्वेषण और उपयोग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग हेतु एक मुख्य केंद्र बिंदु के रूप में कार्य कर रही है।

बाह्य अंतरिक्ष संधि:

  • ‘बाह्य अंतरिक्ष संधि’ (Outer Space Treaty), 10 अक्टूबर 1967 को लागू हुई थी।
  • इस संधि में सन्निहित सिद्धांतों में, बाहरी अंतरिक्ष में गतिविधियों के व्यवस्थित संचालन की सुविधा प्रदान की गयी है।

वर्तमान चिंताएं:

  • अंतरिक्ष को लेकर अतीत में भी कई संघर्ष हो चुके हैं और विभिन्न पक्षों द्वारा अंतरिक्ष में की जाने वाली गतिविधियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, भविष्य में और भी संघर्ष होने की संभावना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) और चीन का निर्माणाधीन अंतरिक्ष स्टेशन, ‘तिआनगोंग’ (Tiangong), पृथ्वी की निकली कक्षा (LEO) में स्थित है और अपना कार्य करते हैं। इसकी कक्षा में अधिकांश ‘अंतरिक्षीय मलबा’ (Space debris) पाया जाता है।
  • इसके अलावा, पृथ्वी की कक्षा में लगभग 30,000 उपग्रह और मलबे के अन्य टुकड़े भी मोजूद हैं जो लगभग 29,000 किमी / घंटा की गति तक हासिल कर सकते हैं, जिससे बाहरी अंतरिक्ष में अंतर्राष्ट्रीय दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

स्पेसएक्स का इंटरनेट उपग्रह नेटवर्क:

स्पेसएक्स (SpaceX) का इंटरनेट उपग्रह नेटवर्क, पृथ्वी की निकली कक्षा (LEO) में, पृथ्वी की सतह से लहभग 550 किमी ऊपर से संचालित हो रहा है। इस नेटवर्क में उपग्रहों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्पेसएक्स फर्म द्वारा अब तक लगभग 1,900 स्टारलिंक उपग्रहों को तैनात किया जा चुका है।

 

‘चीनी अंतरिक्ष स्टेशन’ के बारे में:

  • चीन का नया मल्टी-मॉड्यूल ‘तिआनगोंग’ (Tiangong) अंतरिक्ष स्टेशन कम से कम 10 वर्षों तक कार्य करने के तैयार हो चुका है।
  • यह अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की सतह से 340-450 किमी की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में कार्य करेगा।

चीनी अंतरिक्ष स्टेशन का महत्व:

  1. पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित चीनी अंतरिक्ष स्टेशन, चीन की आकशीय दृष्टि की भांति कार्य करेगा, और यह चीन के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, विश्व के बाकी हिस्सों का चौबीसों घंटे विहंगम दृश्य प्रदान करेगा।
  2. यह अंतरिक्ष स्टेशन, चीन को वर्ष 2030 तक एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

संबंधित चिंताएं:

  • चीन का अंतरिक्ष स्टेशन रोबोटिक-आर्म से लैस होगा जिस पर अमेरिका द्वारा इसके संभावित सैन्य अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाने पर चिंता जताई है।
  • चिंता की बात यह है कि इस तकनीक का “भविष्य में अन्य उपग्रहों से साथ मॉल-युद्ध करने में इस्तेमाल किया जा सकता है”।

अन्य अंतरिक्ष स्टेशन:

  • वर्तमान में, अंतरिक्षीय कक्षा में एकमात्र अंतरिक्ष स्टेशन, ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) कार्यरत है। आईएसएस, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा का अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रोजेक्ट है।
  • चीन द्वारा अब तक ‘तिआनगोंग-1’ और ‘तिआनगोंग-2’ नामक दो परीक्षण अंतरिक्ष स्टेशनों को अंतरिक्षीय कक्षा में भेजा जा चुका है।
  • भारत भी, वर्ष 2030 तक अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

Current Affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

मोलनिया कक्षा (Molniya orbit) क्या है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आईएसएस के बारे में
  2. आईएसएस में शामिल देश
  3. उद्देश्य
  4. पिछले अंतरिक्ष स्टेशन

मेंस लिंक:

अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

क्वांटम उलझन


(Quantum entanglement)

संदर्भ:

हाल के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इतिहास के पहले ‘क्वांटम रूप से उलझे हुए’ (Quantum Entangled) जानवर – ‘टार्डिग्रेड’ (Tardigrade) की पहचान की है, जोकि जमा हुआ है।

यह जमा हुआ (Frozen) टार्डिग्रेड, एक सूक्ष्म बहुकोशिकीय जीव है। इस जीव को ‘क्रिप्टोबायोसिस’ (Cryptobiosis) के रूप में ज्ञात जीवन की एक गुप्त अवस्था के माध्यम से अत्यधिक भौतिक-रासायनिक स्थितियों को सहन करने के लिए जाना जाता है।

Current Affairs

 

क्रिप्टोबायोसिस (Cryptobiosis):

  • इसे ‘प्रसुप्‍त जीविता’ / एनाबियोसिस (Anabiosis) के रूप में भी जाना जाता है। प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों जैसे कि शुष्कता (Desiccation), प्रशीतन (freezing) और ऑक्सीजन की कमी, आदि का सामना करने हेतु जीव, जीवन की एक ‘चयापचय स्थिति’ (Metabolic State) में प्रवेश कर जाता है, इसे ही ‘क्रिप्टोबायोसिस’ कहा जाता है।
  • क्रिप्टोबायोटिक (cryptobiotic) अवस्था में, सभी मापन योग्य चयापचय प्रक्रियाएं, जैसेकि प्रजनन, विकास और सुधार,आदि रुक जाती हैं।
  • जब पर्यावरण की स्थिति पुनः अनुकूल हो जाती है, तो जीव अपने जीवन की चयापचय अवस्था में वापस आ जाता है।

Current Affairs

 

अध्ययन के बारे में:

  • शोधकर्ताओं द्वारा यह उपलब्धि ‘एक बिट के क्वांटम समतुल्य ‘क्यूबिट’ (qubit) का निर्माण करने हेतु, इस जमे हुए टार्डिग्रेड्स को एक सुपरकंडक्टर सर्किट की दो कैपेसिटर प्लेटों के बीच रख कर हासिल की गयी थी।
  • इनके अनुसार, टार्डिग्रेड को छूने पर इसने ‘क्यूबिट’ की आवृत्ति को बदल दिया।
  • फिर शोधकर्ताओं ने इस सर्किट को दूसरे सुपरकंडक्टर सर्किट के करीब रखा। इस स्थिति में, टीम ने देखा कि ‘क्यूबिट’ और ‘टार्डिग्रेड्स’ दोनों की आवृत्ति में एकसाथ परिवर्तन हुए।

‘क्वांटम उलझन’ के बारे में:   

‘क्वांटम उलझन’ (Quantum Entanglement) एक भौतिक घटना है। यह घटना तब होती है जब कणों का युग्म या कणों का समूह इस तरह से उत्पन्न या मिलते हैं कि प्रत्येक कणों की क्वांटम अवस्था को स्वतंत्र रूप से दूसरों कण की अवस्था के रूप में वर्णित नहीं किया जा सकता है।

  • इस क्वांटम यांत्रिक घटना में, दो या दो से अधिक वस्तुओं की क्वांटम अवस्थाओं को एक-दूसरे के संदर्भ में वर्णित करना पड़ता है, भले ही अलग-अलग वस्तुओं को स्थानिक रूप से अलग किया जा सकता है।
  • इससे, किसी सिस्टम के दिखाई देने वाले भौतिक गुणों के बीच सहसंबंधों के बारे में पता चलता है।
  • अल्बर्ट आइंस्टीन ने इस विचार को ‘भूतिया कार्रवाई’ (Spooky Action) कहकर खारिज कर दिया था।

Current Affairs

 

महत्व:

क्वांटम उलझन, क्वांटम टेलीपोर्टेशन और सुपर-डेंस कोडिंग जैसी घटनाओं को संभव बनाने वाली क्वांटम यांत्रिकी की ख़ासियतों में से एक है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि टार्डिग्रेड्स को ‘पानी का भालू’ (वाटर बीअर) और ‘मोस पिग्स’ के रूप में भी जाना जाता है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम


संदर्भ:

नागालैंड ‘सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम’ (Armed Forces (Special Powers) Act) अर्थात AFSPA के तहत, अगले छह महीने तक ‘अशांत क्षेत्र’ (Disturbed Area) बना रहेगा क्योंकि राज्य की स्थिति “खतरनाक” बनी हुई है।

  • सरकार द्वारा इस निर्णय को, इस महीने की शुरुआत में, गलत पहचान के कारण 14 नागरिकों की हत्या के बाद, सशस्त्र बलों की विशेष शक्तियों को वापस लेने के लिए बढ़ती मांग के दौरान लिया गया है।
  • नागालैंड राज्य में वर्ष 1958 से विवादास्पद AFSPA लागू है।

पृष्ठभूमि:

केंद्र सरकार द्वारा, हाल ही में, राज्य से ‘सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम’ (Armed Forces (Special Powers) Act) अर्थात AFSPA को हटाए जाने की संभावना का अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है।

  • यह समिति 45 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।
  • इस समिति की सिफारिशों के आधार पर नागालैंड से “अशांत क्षेत्र” अधिसूचना और AFSPA को हटाए जाने पर निर्णय लिया जाएगा।

AFSPA का तात्पर्य:

साधारण शब्दों में, सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) के तहत सशस्त्र बलों के लिए ‘अशांत क्षेत्रों’ में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति प्राप्त होती है।

सशस्त्र बलों को प्राप्त शक्तियां:

  • इसके तहत सशस्त्र बलों को किसी क्षेत्र में पाँच या अधिक व्यक्तियों के जमावड़े को प्रतिबंधित करने अधिकार होता है, इसके अलावा, इन्हें किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन करने संबंधी शंका होने पर उचित चेतावनी देने के बाद बल प्रयोग करने अथवा गोली चलाने की भी शक्ति प्राप्त होती है।
  • यदि उचित संदेह होने पर, सेना किसी व्यक्ति को बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकती है; बिना वारंट के किसी भी परिसर में प्रवेश और जांच कर सकती है, तथा आग्नेयास्त्र रखने पर प्रतिबंध लगा सकती है।
  • गिरफ्तार किए गए या हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति को एक रिपोर्ट तथा गिरफ्तारी के कारणों से संबधित विवरण के साथ निकटतम पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को सौंपाजा सकता है।

अशांत क्षेत्र’ और इसे घोषित करने की शक्ति

  • अशांत क्षेत्र (disturbed area) को सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) की धारा 3 के तहत अधिसूचना द्वारा घोषित किया जाता है। विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषा या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच मतभेद या विवाद के कारण किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किया जा सकता है।
  • केंद्र सरकार, या राज्य के राज्यपाल या केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के पूरे या हिस्से को अशांत क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।

AFSPA अधिनियम की समीक्षा:

19 नवंबर, 2004 को केंद्र सरकार द्वारा उत्तर पूर्वी राज्यों में अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा करने के लिए न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति नियुक्त की गयी थी।

समिति ने अपनी रिपोर्ट वर्ष 2005 में प्रस्तुत की, जिसमें निम्नलिखित सिफारिशें शामिल थीं:

  1. AFSPA को निरस्त किया जाना चाहिए और विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (Unlawful Activities (Prevention) Act), 1967 में उचित प्रावधान सम्मिलित किये जाने चाहिए;
  2. सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों की शक्तियों को स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट करने के लिए विधिविरूद्ध क्रियाकलाप अधिनियम को संशोधित किया जाना चाहिए और
  3. सशस्त्र बलों को तैनात किए जाने वाले प्रत्येक जिले में शिकायत सेल स्थापित किए जाने चाहिए।

लोक व्यवस्था पर दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की 5 वीं रिपोर्ट में भी AFSPA को निरस्त करने की सिफारिश की गयी है।

नागा हत्याओं से AFSPA के खतरों की ओर संकेत:

सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA), सशस्त्र बलों को हत्या करने का लाइसेंस देता है। और जब सशस्त्र बल, स्थानीय पुलिस को शामिल किए बगैर, जैसा कि लंबे समय से चल रहा है, इस तरह के शर्मनाक ऑपरेशन करते हैं, तो यह संदेश देता है कि केंद्र को नागालैंड में शांति प्रक्रिया की कोई परवाह नहीं है।

AFSPA के उपयोग के लिए दिशानिर्देश:

‘नागा पीपुल्स मूवमेंट फॉर ह्यूमन राइट्स बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1997 के फैसले में AFSPA के उपयोग के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए गए है:

  • संविधान पीठ ने 1997 के फैसले में कहा है, कि AFSPA की धारा 4(a) के तहत घातक बल का उपयोग करने की शक्ति, केवल “कुछ परिस्थितियों” में ही प्रयुक्त की जानी चाहिए।
  • अदालत ने कहा कि “मृत्यु कारित करने की शक्ति, किसी अशांत क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव से संबंधित है और इसका निश्चित परिस्थितियों में ही प्रयोग किया जाना चाहिए”।
  • इन पूर्व-शर्तों में एक उच्च-स्तरीय प्राधिकरण द्वारा किसी क्षेत्र को “अशांत” करने की घोषणा शामिल है। संबंधित अधिकारी इस बात का निर्णय करेगा, कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर घातक बल प्रयोग करना “आवश्यक” है। लेकिन उसे घातक बल का प्रयोग करने से पहले “उचित चेतावनी” देनी होगी।
  • जिन व्यक्तियों के खिलाफ सशस्त्र बलों द्वारा कार्रवाई की जाने वाली हो, उनके द्वारा घोषित “अशांत क्षेत्र में कुछ समय के लिए लागू किसी भी कानून या व्यवस्था का उल्लंघन किया होन चाहिए”।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि पूर्वोत्तर में, असम, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों, और असम की सीमा से लगे राज्य के आठ पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में AFSPA लागू है?

स्रोत: द हिंदू।


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