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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 December 2021

 

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययनI

1. महाराष्ट्र सरकार का शक्ति विधेयक

 

सामान्य अध्ययन-II

1. संसद में व्यवधान

2. ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ में भारत की स्थिति पर केंद्र सरकार की असहमति

3. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कृषि उत्पादों में वायदा कारोबार का निलंबन।

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. केरल की सिल्वर लाइन परियोजना

2. समाज सुधार अभियान

3. टाइफून राय

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

महाराष्ट्र सरकार का शक्ति विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार के ‘शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक’, 2020 (Shakti Criminal Laws (Maharashtra Amendment) Bill, 2020) पर गठित एक संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

समिति द्वारा रिपोर्ट में की गई प्रमुख सिफारिशें:

  1. बलात्कार के मामलों में मृत्युदंड
  2. शिकायत दर्ज होने की तारीख से, जांच पूरी करने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा
  3. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ-साथ इंटरनेट डेटा प्रदान करने वाली कंपनियों पर पुलिस जांच हेतु डेटा साझा करने का दायित्व।
  1. मूल विधेयक में झूठी शिकायतों के मामले में, या किसी व्यक्ति को जानबूझकर परेशान किए जाने के मामले में, ‘अग्रिम जमानत याचिका’ दायर करने का प्रावधान नहीं था। समिति द्वारा इस पर विचार करने की सिफारिश की गयी है।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा नया कानून बनाने का कारण:

राज्य में हिंसा संबंधी मामलों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में होने वाली वृद्धि पर रोक लगाने हेतु नया क़ानून लाया गया है।

विधेयक के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधान:

  1. विधेयक के मसौदे में, भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) और यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम में बदलाव करने का प्रस्ताव किया गया है।
  2. बलात्कार, यौन उत्पीड़न, एसिड हमले और बाल यौन शोषण से संबंधित मौजूदा कानूनों की धाराओं में परिवर्तन किया जाएगा।
  3. विधेयक में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा बलात्कार, नाबालिगों के यौन उत्पीड़न और एसिड हमले द्वारा गंभीर रूप से घायल करने संबंधी मामलों में मौत की सजा का प्रस्ताव किया गया है।
  4. जघन्य प्रकृति के अपराधों के लिए और जहाँ पर पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है, और परिस्थितियों द्वारा एक अनुकरणीय सजा की मांग किये जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।

सोशल मीडिया से संबंधित विशिष्ट प्रावधान:

  • प्रस्तावित विधेयक में सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार से निपटने के लिए एक अतिरिक्त कानून का प्रस्ताव किया गया है।
  • किसी महिला के लिए जानबूझकर ‘खतरे, धमकाने और भय का माहौल बनाने और उसकी गरिमा को ठेस पहुचाने वाले किसी कृत्य, लेख अथवा शब्दों का प्रयोग करना या घृणास्पद टिप्पणी करना भी अपराध की श्रेणी में शामिल करने और इसके लिए दो साल तक के कारावास और 1 लाख रुपये का जुर्माने का दंड दिए जाने हेतु ‘धारा 354E को जोड़ा गया है।
  • इसके तहत महिलाओं के ‘विकृत’ किये गए वीडियो (Morphed Videos) अपलोड करना या उनकी निजता का उल्लंघन करने वाले या सम्मान को ठेस पहुचाने वाले वीडियो या फोटो अपलोड करने की धमकी देना भी शामिल है।
  • पहले इस संबंध में एक महीने तक की साधारण कारावास या 5 लाख रुपये जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान था। अब समिति ने कारावास की अवधि तीन महीने और 25 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों का प्रावधान किए जाने की सिफारिश की है।

‘मिथ्या जानकारी’ और “अंतर्निहित सहमति” संबंधी प्रावधान:

विधेयक में किसी व्यक्ति को नितांत, अपमानित करने, धमकाने या जबरदस्ती बसूली करने, बदनाम या उत्पीड़न करने के उद्देश्य से की गयी ‘झूठी शिकायत’ अथवा तथाकथित अपराध करने के संबंध में गलत जानकारी प्रदान करने पर एक वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है।

इसके लिए समिति ने कम से कम तीन साल की कैद और तीन साल तक की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रस्ताव रखा है। इससे पहले, एक वर्ष तक के साधारण कारावास और जुर्माने का प्रावधान था, जोकि निर्दिष्ट भी नहीं था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि महाराष्ट्र का यह कानून, आंध्र प्रदेश के ‘दिशा अधिनियम’ की तर्ज पर तैयार किया गया है? ‘दिशा अधिनियम’ के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?

 

प्रीलिम्स और मेंस लिंक:

  1. ‘शक्ति अधिनियम’, 2020 के प्रमुख प्रावधान और महत्व।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

संसद में व्यवधान


(Disruptions in Parliament)

संदर्भ:

हाल ही में, संसद को फिर से अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया, इस तरह से संसद मे लगातार व्यवधान होते रहने पर लोकसभा और राज्यसभा के पीठासीन अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है।

इस संसदीय सत्र में दोनों सदनों का प्रदर्शन:

  1. राज्य सभा में इस सत्र की 18 बैठकों के दौरान, आवंटित समय का केवल 9% उपयोग किया गया है। कुल 95 घंटे छह मिनट के बैठक-काल में, राज्यसभा में केवल 45 घंटे सदन की कार्रवाई चली है।
  2. सदन ने इस सत्र में “अपनी क्षमता से काफी कम” प्रदर्शन किया है। जिस स्थिति के कारण सत्र की शुरुआत में, 12 राज्यसभा सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था, उससे संसद में संघर्ष-रेखाओं को पहले की तुलना में काफी गहरा कर दिया है।
  3. लोकसभा में, 18 घंटे 48 मिनट के व्यवधान के साथ 83 घंटे 20 मिनट का कामकाज हुआ।

संबंधित प्रकरण:

हाल ही में, मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण ने ‘संसद में की जाने वाली बहस में हो रही कमी’ के बारे में असंतोष प्रकट किया था। उन्होंने कहा कि, यह ‘खेदजनक जनक स्थिति’ है, और सकरात्‍मक एवं गुणवत्तापूर्ण बहसों के नहीं होने पर कानूनों के कई पहलू अस्पष्ट रह जाते हैं, जिससे अदालत पर बोझ बढ़ जाता है।

इसके बाद:

इस प्रकार की टिप्पणियों को विधायिकाओं के कामकाज के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिनमे लगातार व्यवधान, अनियंत्रित व्यवहार और हिंसक कार्रवाईयां देखने को मिलती रहती हैं, और जिनका हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

इस प्रकार की टिप्पणियों का प्रत्युत्तर देने सबसे अच्छा तरीका यह है, कि विधायिकाओं की गरिमा और मर्यादा सुनिश्चित करके उनके उचित कामकाज को सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि इस तरह की टिप्पणियां विधायिकाओं के कामकाज के बारे में जनता के नजरिए को प्रभावित करती हैं।

प्रमुख चिंताएं:

हमारे विधायी कामकाज की नींव के रूप में ‘चर्चा’ की जगह ‘व्यवधान’ (Disruption) लेता जा रहा है।

  • पीआरएस (PRS Legislative Research) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 15वीं लोकसभा (2009-14) के दौरान संसदीय कार्यवाही में बार-बार व्यवधान होने के कारण, लोकसभा और राज्यसभा में निर्धारित समय का कुल क्रमशः 61 फीसदी और 66 फीसदी काम हुआ था।
  • पीआरएस की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, 16वीं लोकसभा (2014-19) के दौरान निर्धारित समय का 16% समय व्यवधानों के कारण ख़राब हो गया। हालाँकि यह 15वीं लोकसभा (37%) से बेहतर, किंतु 14वीं लोकसभा (13%) से भी बदतर स्थति रही।
  • 16वीं लोकसभा के दौरान, राज्य सभा में अपने निर्धारित समय का 36 प्रतिशत व्यवधानों के कारण ख़राब हुआ। 15वीं और 14वीं लोकसभा के दौरान, राज्य सभा में निर्धारित समय का क्रमश: 32% और 14% नष्ट हुआ था।

व्यवधानों के कारण:

  1. विवादित विषयों और सार्वजनिक महत्व के मामलों पर चर्चा।
  2. व्यवधान, सत्ता पक्ष के लिए जिम्मेदारी से बचने में सहायक साबित हो सकते हैं।
  3. गैर-सूचीबद्ध चर्चा के लिए समर्पित समय का अभाव।
  4. अनुशासनात्मक शक्तियों का दुर्लभ प्रयोग।
  5. दलगत राजनीति।

आवश्यकता:

  • संसद में अव्यवस्था को रोकने हेतु, सांसदों और विधायकों के लिए ‘आचार संहिता’ को सख्ती से लागू किए जाने की आवश्यकता है।
  • आचार संहिताओं का पालन न करने वाले और सदनों के कामकाज में बाधा डालने वाले सांसदों को, पीठासीन अधिकारी द्वारा निलंबित कर देना चाहिए।
  • वर्तमान सरकार के लिए, और अधिक लोकतांत्रिक होने और विपक्ष को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से रखने का अवसर देने की जरूरत है।
  • व्यवधानों और स्थगन पर बर्बाद हुए घंटों की संख्या को ध्यान में रखने तथा संसद के दोनों सदनों के दिन-प्रतिदिन के कामकाज की उत्पादकता की निगरानी करने हेतु एक “उत्पादकता मापक” (Productivity Meter) तैयार किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष:

मुद्दों पर सहमति और असहमति का प्रदर्शन ‘बहस’ के माध्यम से किया जा सकता है, न कि ‘व्यवधान’ के माध्यम से। सदन का सुचारू संचालन सभी हितधारकों की जिम्मेदारी होती है और इसकी कार्यवाही सभी की सामूहिक इच्छा और सहमति के साथ चलनी चाहिए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘स्थगन’ और ‘अनिश्चित काल के लिए स्थगन’ बीच अंतर जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसद के सत्र
  2. संसद सत्र को आहूत करने की शक्ति किसे प्राप्त है?
  3. संसदीय सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष की भूमिकाएं और शक्तियां
  4. संयुक्त बैठक
  5. संविधान के अनुच्छेद 74 और 75

मेंस लिंक:

संसद के बार-बार बाधित होने से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डालिए। संसद के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के उपायों का सुझाव दीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

 ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ में भारत की स्थिति पर केंद्र सरकार की असहमति


संदर्भ:

मीडिया वॉचडॉग ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (Reporters Without Borders) द्वारा जारी किए गए ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ / ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ (World Press Freedom Index) में भारत को निचले स्थान से केंद्र सरकार ने असहमति व्यक्त की है।

संबंधित प्रकरण:

केंद्र सरकार ने कहा है, कि यह रिपोर्ट एक छोटे आकार के प्रतिदर्श पर आधारित है और इसमें “लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों” को बहुत कम या कोई महत्व नहीं दिया गया है।

सूचकांक में भारत की रैंकिंग और चिंता का कारण:

‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने मार्च में जारी एक बयान में कहा था,  कि जब प्रेस की स्वतंत्रता की बात आती है तो भारत का स्थान 180 देशों की सूची में 142 वां है।

  • इसके अलावा, भारत को पत्रकारिता के लिए “खराब” के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
  • इसके अनुसार, इस वर्ष दुनिया भर में मारे गए पत्रकारों के मामले में, भारत पांच सबसे खतरनाक देशों में शामिल है।
  • साथ ही, रिपोर्ट में सर्वेक्षण के लिए अपनाई गयी पद्धति पर ‘सवाल’ भी उठे हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गयी है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2021- प्रमुख बिंदु:

  • सूचकांक में ‘नॉर्वे’ लगातार पाँच वर्षों से शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
  • रिपोर्ट में 132 देशों को “बहुत खराब”, ” खराब” या “समस्याग्रस्त” के समूह में श्रेणीबद्ध किया गया है।
  • इस रिपोर्ट में कहा गया है, कि पत्रकारों को अभिगम्यता (access) प्रदान करने से वंचित करने और कोविद -19 प्रकोप के बारे में सरकार द्वारा प्रायोजित अधिप्रचार को बढ़ावा देने के लिए, महामारी का उपयोग किया गया है।

सूचकांक में भारत और पड़ोसी देशों का प्रदर्शन:

  1. 180 देशों की सूची में भारत 142 वें स्थान पर रहा है।
  2. भारत के लिए ब्राजील, मैक्सिको और रूस के साथ “खराब” श्रेणी में रखा गया है।
  3. रिपोर्ट में कहा गया है, भारत, ठीक से अपना काम करने की कोशिश करने वाले पत्रकारों के लिए विश्व के सबसे खतरनाक देशों में से एक है।
  4. वर्ष 2016 में, भारत 133 वें स्थान पर था, जोकि वर्ष 2020 में तेजी से लुढककर 142 वें स्थान पर पहुंच गया है।
  5. ‘सरकार की आलोचना करने का साहस करने वाले’ पत्रकारों के खिलाफ ‘सोशल मीडिया पर बेहद हिंसक नफरत फैलाने वाले अभियान’ चलाए जाने पर, भारत की कड़ी आलोचना की जाती है।
  6. सूचकांक में, दक्षिण एशिया में, नेपाल को 106, श्रीलंका को 127, म्यांमार को 140, पाकिस्तान को 145 और बांग्लादेश को 152 वें स्थान पर रखा गया है।
  7. चीन को 177 वां और अमेरिका को 44 वां स्थान प्राप्त हुआ है।

‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ के बारे में:

  • वर्ष 2002 से ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (Reporters Without Borders) द्वारा प्रतिवर्ष प्रकाशित किया जाने वाला, ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ 180 देशों में मीडिया की स्वतंत्रता के स्तर का आकलन करना है।
  • यह सूचकांक, मीडिया की स्वतंत्रता के निर्धारण के आधार पर तैयार किया जाता है, जिसमे मीडिया में बहुलवाद, मीडिया को प्राप्त आज़ादी, कानूनी तंत्र की गुणवत्ता तथा पत्रकारों की सुरक्षा आदि का आकलन किया जाता है।
  • सूचकांक में, प्रत्येक क्षेत्र में मीडिया स्वतंत्रता के उल्लंघन स्तर संबंधी संकेतक भी शामिल होते हैं।
  • यह सूचकांक, दुनिया भर के विशेषज्ञों द्वारा 20 भाषाओं में तैयार की गई एक प्रश्नावली के माध्यम से संकलित किया जाता है।
  • इस गुणात्मक विश्लेषण को आकलन-अवधि के दौरान पत्रकारों के खिलाफ हुई हिंसा तथा दुर्व्यवहार संबंधी मात्रात्मक आंकड़ो के साथ संयोजित किया जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ के बारे में।
  2. भारत और उसके पड़ोसी देशों का प्रदर्शन।
  3. सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देश।
  4. पिछले वर्षों के दौरान विभिन्न देशों का प्रदर्शन और उनकी तुलना।

मेंस लिंक:

भारत के संदर्भ में ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ के निष्कर्षों पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR)


(United Nations High Commissioner for Refugees)

संदर्भ:

हाल ही में, वोडाफोन द्वारा विश्व के पहले ‘शॉर्ट मेसेज सर्विस’ अर्थात एसएमएस (SMS) को एक गैर-प्रतिमोच्य टोकन (Non-Fungible TokenNFT) के रूप में नीलाम करने की घोषणा की गयी थी। कंपनी के अनुसार, अब एक बोली लगाने वाले ने ‘शॉर्ट मेसेज’ के पहले ‘संचार प्रोटोकॉल की प्रतिकृति’ के लिए 107,000 यूरो का भुगतान किया है। इस प्रतिकृति को ‘गैर-प्रतिमोच्य टोकन’ (NFT) के रूप में रखा जाएगा, अर्थात इसे किसी अन्य को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जाएगा।

वोडाफोन द्वारा इस राशि को, संघर्ष और उत्पीड़न के कारण मजबूरी में अपने घरों से पलायन करने वाले 82.4 मिलियन लोगों की सहायता करने हेतु ‘संयुक्त राष्ट्र’ की शरणार्थी एजेंसी ‘UNHCR’ को दान की जाएगी।

दुनिया का पहला एसएमएस:

विश्व का पहला एसएमएस (SMS) करीब तीन दशक पहले 3 दिसंबर 1992 को वोडाफोन नेटवर्क के जरिए भेजा गया था। यह एसएमएस वोडाफोन के कर्मचारी रिचर्ड जार्विस को मिला था, जिसमे 15 वर्णों के संदेश में “मेरी क्रिसमस” लिखा था।

गैर-प्रतिमोच्य टोकन (NFT) क्या है?

‘गैर-प्रतिमोच्य टोकन’ (Non-Fungible TokenNFT) अपनी तरह का अनूठा डिजिटल संग्रहणीय होता है। इसका मतलब है, कि यह अद्वितीय होता है और इसे किसी अन्य वस्तु अथवा किसी अनुबंध के तहत बदला नहीं जा सकता। डिजिटल रूप से स्टोर किया जा सकने वाले किसी भी गाने, मूवी, आर्टवर्क, फोटोग्राफ, सोशल मीडिया पोस्ट, जीआईएफ आदि को इस ‘वर्चुअल टोकन’ के रूप में संरक्षित किया जा सकता है।

‘संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग’ (UNHCR) के बारे में:

  • संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (United Nations High Commissioner for Refugees- UNHCR), संयुक्त राष्ट्र की एक शरणार्थी संस्था और एक वैश्विक संगठन है, जो शरणार्थियों के जीवन बचाने, उसके अधिकारों की रक्षा करने और उनके लिये बेहतर भविष्य के निर्माण के प्रति समर्पित है।
  • इसे वर्ष 1950 में, उन लाखों यूरोपियों की मदद करने के लिए गठित किया गया था, जिनके घर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तबाह हो गए थे या उन्हें अपने घर छोड़कर पलायन करना पड़ा था।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

‘अवापसी नियम’ (Non-refoulement) या गैर-वापसी सिद्धांत क्या है? ‘नॉन-रेफौलमेंट’ अर्थात ‘शरणार्थियों को उनके मूल-देश में वापस भेजे जाने से मुक्ति’ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह सिद्धांत है, जिसके अनुसार, अपने ही देश में उत्पीड़न के कारण पलायन करने व्यक्ति को वापस लौटने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNHCR के बारे में
  2. ‘नॉन-रेफौलमेंट’ क्या है?
  3. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अभिसमय
  4. 1948 के मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा
  5. ‘अंतर्राष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार नियम’ 1966

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

कृषि उत्पादों में ‘वायदा कारोबार’ का निलंबन


संदर्भ:

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities & Exchange Board of India – SEBI) ने प्रमुख कृषि जिंसों जैसे धान (गैर-बासमती), गेहूं, चना, सरसों और इसके व्युत्पादों / डेरिवेटिव (Derivatives), सोया बीन और इसके व्युत्पादों, ताड़ का कच्चा तेल (crude palm oil) और मूंग का ‘व्युत्पाद अनुबंधों’ (derivative contracts) में व्यापार एक साल के लिए तत्काल निलंबित करने हेतु स्टॉक एक्सचेंजों को ‘कमोडिटी डेरिवेटिव सेगमेंट’ में निर्देश जारी किए हैं।

मुद्रास्फीति को बढ़ावा देने वाली इन आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए इन जिंसों के ‘व्युत्पाद अनुबंधों’ में व्यापार को निलंबित किया जा रहा है।

व्युत्पाद / डेरिवेटिव अनुबंध’ क्या होते हैं?

‘व्युत्पाद / डेरिवेटिव अनुबंध’ (Derivative Contracts) दो या दो से अधिक पार्टियों के बीच अनुबंध होते हैं, जिसमे ‘व्युत्पादों की कीमत’ (derivative value), आधारभूत / मौलिक परिसम्म्पत्तियों (इस मामले में कृषि वस्तुओं) पर आधारित होती है।

  • डेरिवेटिव की कीमत ‘आधारभूत परिसंपत्तियों’ की कीमत में उतार-चढ़ाव से तय की जाती है।
  • डेरिवेटिव्स का कारोबार, विनिमय (एक्सचेंज) या ‘ओवर द काउंटर’ (OTC) के माध्यम से किया जा सकता है।

यह प्रणाली किस प्रकार कार्य करती है, और ‘डेरिवेटिव ट्रेडिंग’ क्या होती है?

जब कारोबारियों द्वारा, किसी आधारभूत परिसंपत्ति को तत्काल खरीदने के बजाय, उस परिसंपत्ति की भविष्य में होने वाली कीमत का अनुमान लगाकर, अपने लाभ को अधिकतम करने के लिए ‘डेरिवेटिव अनुबंधों’ की खरीद या बिक्री की जाती है। इसे ही ‘डेरिवेटिव ट्रेडिंग’ कहा जाता है।

  • कारोबारी, मौजूदा स्थिति में होने वाले जोखिम को कम करने हेतु ‘प्रतिरक्षा’ / ‘हेजिंग’ (Hedging) के लिए भी ‘डेरिवेटिव’ का उपयोग करते हैं।
  • डेरिवेटिव के माध्यम से, कारोबारी कम समय में, किसी संपत्ति की गिरती कीमतों से भी लाभ कमा सकते हैं।
  • कारोबारी, किसी मौजूदा दीर्घाकालिक स्थित से बचाव के लिए भी डेरिवेटिव का उपयोग करते हैं।
  • इसका अंतिम उद्देश्य लाभ प्राप्त करना है, और इसे बाजार में ‘मूल्य अनुशासन’ लाने के लिए एक निवारक के रूप में देखा जाता है।

‘वायदा कारोबार’ का निलंबन का कारण:

  • कृषि उत्पादों में ‘वायदा कारोबार’ का निलंबन का उद्देश्य, मुद्रास्फीति को बढ़ावा देने वाली इन आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करना है। भारत, वनस्पति तेलों का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है, और इस तरीके से ‘खाद्य तेल आयातकों और व्यापारियों’ के लिए इन जिसों का व्यापार करना कठिन हो जाएगा, क्योंकि अधिकांश कारोबारी अपने जोखिम को कम करने के लिए भारतीय एक्सचेंजों का उपयोग करते हैं।
  • ऐसा माना जाता है, कि कीमतों को बढ़ाने में सट्टेबाजों की भूमिका होती है और मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने और चूंकि अर्थव्यवस्था अभी कोविड-19 प्रभाव से उबर रही है, अतः विकास को सहयोग देने के लिए इस कारोबार को हतोत्साहित करने की आवश्यकता है।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


केरल की सिल्वर लाइन परियोजना

केरल की सिल्वर लाइन परियोजना (Silver Line Project) के तहत, राज्य के दक्षिणी छोर पर स्थित राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को, उत्तरी छोर पर स्थित कासरगोड से जोड़ने के लिए एक सेमी हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।

  • सिल्वर लाइन की लंबाई 45 किलोमीटर होगी, और यह 11 स्टेशनों के माध्यम से 11 जिलों से होकर गुजरेगी।
  • परियोजना के पूरी होने पर, कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक 200 किमी / घंटा की गति से चलने वाली ट्रेनों में चार घंटे से भी कम समय में यात्रा की जा सकती है। मौजूदा भारतीय रेलवे नेटवर्क पर, वर्तमान ने इस दूरी को तय करने में 12 घंटे का समय लगता है।
  • केरल रेल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRDCL) द्वारा निष्पादित की जा रही परियोजना के लिए वर्ष 2025 की समय सीमा निर्धारित की गयी है।
  • KRDCL, या के-रेल (K-Rail), केरल सरकार और केंद्रीय रेल मंत्रालय का एक संयुक्त उद्यम है।

इसका विरोध किए जाने के कारण और अन्य बाधाएं:

इस परियोजना को लेकर कई चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। आलोचकों के अनुसार, इस परियोजना की भारी लागत से राज्य और अधिक कर्ज में चला जाएगा। यात्री सुरक्षा के बारे किए जा रहे दावों पर भी संदेह किया जा रहा है। सबसे अधिक, वर्ष 2018 में आयी बाढ़ की पृष्ठभूमि में, पर्यावरण संबंधी चिंताएं हैं, इस बाढ़ के दौरान लगभग पूरा राज्य जलमग्न हो गया था। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस परियोजना के किनारों / तटबंधो से राज्य दो भागों में बंट जाएगा, और पानी का मुक्त प्रवाह बाधित होगा।

Current Affairs

 समाज सुधार अभियान

  • हाल ही में, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक सुधारों के लिए अभियान ‘समाज सुधार अभियान’ शुरू किया है।
  • अभियान के हिस्से के रूप में, मुख्यमंत्री लोगों को शराबबंदी के लाभों और समाज पर दहेज प्रथा और बाल विवाह के बुरे प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे।

टाइफून राय

  • फिलीपींस के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में सुपर ‘टाइफून राय’ (Typhoon Rai) द्वारा तबाही जारी है, जिससे हजारों लोगों को व्यापक बाढ़ और विनाश की चेतावनी के बीच, शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • टाइफून राय को फिलीपींस में टाइफून ओडेट (Typhoon Odette ) कहा जाता है। यह वर्तमान में एक शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात (tropical cyclone) है, जिसने पलाऊ द्वीप के पास से गुजरने के बाद फिलीपींस को प्रभावित कर रहा है।
  • टाइफून राय, वर्ष 1954 के पामेला और वर्ष 2014 के राम्मसून (Rammasun) के बाद दक्षिण चीन सागर में आने वाला श्रेणी 5 का तीसरा सुपर टाइफून बन गया है।

 


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