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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 December 2021

 

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययनI

1. ‘दुर्गा पूजा’ यूनेस्को की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ सूची में शामिल

2. सालार मसूद एवं राजा सुहलदेव के बीच युद्ध

 

सामान्य अध्ययन-II

1. बिहार के लिए विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा

2. भुगतान बैंको एवं लघु वित्त बैंकों को ‘सरकारी एजेंसी कारोबार’ करने की अनुमति

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ के लिए संशोधित त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई फ्रेमवर्क

2. पार्कर सोलर प्रोब

3. ‘जलवायु परिवर्तन’ को ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ में ले जाने संबंधी प्रस्ताव का विरोध

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. राजा चैत सिंह

2. रानी भबानी

3. SGTF टेस्ट किट

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

दुर्गा पूजा यूनेस्को की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ सूची में शामिल


संदर्भ:

‘अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा हेतु अंतर-सरकारी समिति’ द्वारा ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage of Humanity) की प्रतिनिधि सूची में ‘कोलकाता में होने वाली दुर्गा पूजा’ को शामिल किया गया है।

अब तक कुल मिलाकर, भारत के 14 ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तत्वों’ (Intangible Cultural Heritage elements) को यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया जा चुका है।

 

निहितार्थ:

यूनेस्को की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ सूची में शामिल किए जाने से, दुर्गा पूजा मनाने वाले स्थानीय समुदायों, सभी पारंपरिक शिल्पकारों, डिजाइनरों, कलाकारों, और बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने वालों के साथ-साथ ‘दुर्गा पूजा’ के सर्व समावेशी उत्सव में भाग लेने वाले पर्यटकों और आगंतुकों को प्रोत्साहन मिलेगा।

‘दुर्गा पूजा’ के बारे में:

‘दुर्गा पूजा’ (Durga Puja) एक पांच दिवसीय त्योहार है, जो नौ-दिवसीय नवरात्रि उत्सव की पांचवीं रात से शुरू होकर, दसवें दिन अर्थात दशमी को समाप्त होता है। इस अवधि में, लोग सामूहिक रूप से ब्रह्मांड की नारी-ऊर्जा मानी जाने वाले, शक्ति-स्वरूपा देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और उनका आह्वान करते हैं।

  • यद्यपि इस उत्सव की शुरुआत ‘पश्चिम बंगाल’ में हुई है, किंतु यह त्योहार भारत और विश्व के कई अन्य हिस्सों में भी मनाया जाता है।
  • कई लोग इसे त्योहार से ज्यादा ‘भावना’ के रूप में देखते हैं।
  • ‘दुर्गा पूजा’ धर्म और संस्कृति का एक उत्कृष्ट संगम है।

Current Affairs

 

अमूर्त सांस्कृतिक विरासतके बारे में:

यूनेस्को (UNESCO) के अनुसार, ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage) में परंपराओं अथवा हमारे पूर्वजों से विरासत में मिली जीती-जागती अभिव्यक्तियों, जैसेकि मौखिक परंपराएं, प्रदर्शन कला, सामाजिक प्रथाएं, अनुष्ठान, त्यौहार एवं उत्सव, प्रकृति और ब्रह्मांड से संबंधित प्रथाएं अथवा ज्ञान और पारंपरिक शिल्प संबंधी कौशल को सम्मिलित किया जाता है।

  • यूनेस्को द्वारा विश्व में महत्वपूर्ण ‘अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों / विरासतों’ की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके महत्व के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची’ का गठन किया गया है।
  • यह सूची वर्ष 2008 में, ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सुरक्षा अभिसमय, 2003 (2003 Convention for the Safeguarding of the Intangible Cultural Heritage) के प्रभावी होने पर निर्मित की गयी थी।

वर्ष 2010 तक इस कार्यक्रम के अंतर्गत दो सूचियों को संकलन किया जाता रहा है:

  1. मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की लंबी, प्रतिनिधि सूची में सांस्कृतिक “प्रथाएं और अभिव्यक्तियां शामिल की जाती हैं, [जो] इस विरासत की विविधता को प्रदर्शित करने और इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करती हैं।”
  2. तत्काल सुरक्षा की आवश्यकता वाली ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों’ की छोटी सूची, में उन सांस्कृतिक तत्वों को सम्मिलित किया जाता है, जिन्हें संबंधित समुदाय और देश, प्रचलित रखने / जीवित रखने के लिए तत्काल उपाय किए जाने की आवश्यकता समझते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची’ (National List of Intangible Cultural Heritage) के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यूनेस्को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की प्रतिनिधि सूची में शामिल भारत के ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तत्व’
  2. यूनेस्को के बारे में
  3. मूर्त और अमूर्त धरोहरों के बीच अंतर
  4. पात्रता मानदंड
  5. यूनेस्को “अमूर्त सांस्कृतिक विरासत” के अंतर्गत सूचियाँ

मेंस लिंक:

यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

सालार मसूद एवं राजा सुहलदेव के बीच युद्ध


संदर्भ:

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सालार मसूद और राजा सुहलदेव के बीच लड़ाई का जिक्र किया था।

‘सालार मसूद’ कौन था?

  • सालार मसूद (Salar Masud) को ‘गाजी मियां’ के नाम से भी जाना जाता है, और वह 12वीं शताब्दी में एक योद्धा के रूप में प्रसिद्ध था।
  • वह 11वीं शताब्दी के तुर्क आक्रमणकारी महमूद गजनी का भतीजा था।
  • उत्तर प्रदेश के बहराइच में उसका मकबरा है, जहाँ बड़ी संख्या में मुसलमानों के साथ-साथ हिंदू भी तीर्थयात्रा और दर्शन करने आते हैं।
  • सालार मसूद, काठियावाड़ में सोमनाथ पर आक्रमण करने सहित, महमूद गजनी के सभी अभियानों में साथ रहा। कहा जाता है, कि ‘मसूद’ ने ही अपने चाचा ‘गजनी’ को सोमनाथ की प्रसिद्ध मूर्ति ध्वस्त करने के लिए राजी किया था। इस कार्य को फारसी कविताओं में बार-बार एक महान उपलब्धि के रूप में महिमामंडित किया जाता है।
  • ‘गाजी मियां’ के बारे में जानकारी का सबसे व्यापक स्रोत ‘मिरात-ए-मसूद’ (Mirat-e-Masaud) है। यह चिश्ती परंपरा के सूफी संत अब्दुर रहमान चिश्ती द्वारा रचित 17वीं शताब्दी की फारसी में संचरित्र रचना (Hagiography) है।
  • कहा जाता है, कि मुगल बादशाह अकबर ने गाजी मियां की दरगाह के रख-रखाव के लिए 1571 ई. में भूमि दान में दी थी।

सालार मसूद और राजा सुहलदेव:

सालार मसूद और राजा सुहलदेव के बीच युद्ध, इतिहास और मिथक दोनों का मिश्रण है।

  • अभिलेखों के अनुसार, बहराइच में, 1034 ई. में एक युद्ध के दौरान मसूद और सुहलदेव नाम के एक स्थानीय राजा का आमना-सामना हुआ था।
  • युद्ध के दौरान, मसूद एक तीर से घायल हो गया और दम तोड़ दिया।
  • चूंकि, वह एक योद्धा के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए मारा गया, इसलिए उसे शहीद का दर्जा ‘गाजी मियां’ की उपाधि दी गयी।

राजा सुहलदेव:

‘सुहेलदेव’ (Suhaldev), श्रावस्ती (वर्तमान उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश में) के एक प्रसिद्ध राजा थे। माना जाता है कि ‘सुहेलदेव’ (Suhaldev), ‘भर समुदाय’ (Bhar community) के राजा के सबसे बड़े पुत्र थे। ‘भर समुदाय’ से ही, इस क्षेत्र के एक दलित जाति समूह ‘पासी समुदाय’ का उदय हुआ।

इस क्षेत्र के प्रचलित इतिहास में इनके लिए सुहलदेव, साकारदेव, सहरदेव और सुहिलदेव सहित कई नामों से जाना जाता है। यद्यपि, समकालीन मुद्रण परंपरा में इन्हें राजा सुहलदेव के रूप में जाना जाता है।

current affairs

 

इन शख्सियतों को लेकर विवाद:

  • गाजी मियां की पूजा करने वाले कुछ लोग ‘सुहलदेव’ को एक स्थानीय जनजाति के राजा के रूप में देखते हैं। इनमे से अधिकाँश लोग मुस्लिम है, और ये लोग ‘राजा सुहलदेव’ को अपने ऊपर शासन करने वाला एक अत्याचारी और उत्पीड़क राजा मानते हैं।
  • हालाँकि, ‘राजा सुहलदेव’ को एक वीर योद्धा भी माना जाता है, और उन्हें हिंदूओं (या, भारतीय-धर्म और संस्कृति) को नष्ट करने की कोशिश करने वाले विदेशी आक्रमणकारी (गाज़ी मियां) के खिलाफ युद्ध करने वाले, एक उद्धारकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

आज ‘महाराजा सुहालदेव’ की स्मृति में उत्सव मनाया जाता है।

  • फरवरी 2016 में, तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सुहलदेव को एक राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मानित किया और बहराइच में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया।
  • भारतीय रेलवे द्वारा गाजीपुर से ‘सुहलदेव एक्सप्रेस’ की शुरुआत की गयी है।
  • वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में सुहलदेव की एक प्रतिमा स्थापित करने संबंधी एक योजना की घोषणा की गयी थी।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राजा सुहेलदेव
  2. मुहम्मद गजनी
  3. भर समुदाय
  4. पारसी
  5. गाजी मियां

मेंस लिंक:

राजा सुहेलदेव कौन थे? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

बिहार के लिए विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा


संदर्भ:

नीतीश कुमार ने बिहार के लिए ‘विशेष श्रेणी राज्य’ (Special Category State – SCS) का दर्जा दिए जाने की अपनी करीब 15 साल पुरानी मांग एक बार फिर से उठाई है। नीतीश कुमार, वर्ष 2007 से बिहार के लिए ‘विशेष श्रेणी राज्य’ की मांग कर रहे हैं।

अन्य राज्यों की तुलना में बिहार का विकास:

  • नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट में, विकास दर और मानव विकास सूचकांकों के मामले में बिहार को सबसे निचले राज्यों की श्रेणी में रखा गया है।
  • बिहार की वार्षिक प्रति व्यक्ति आय 50,735 रुपये है, जोकि राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय आंकड़े, अर्थात 1,34,432 रुपये से काफी कम है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 91 प्रतिशत आबादी – देश में सबसे ज्यादा – गरीबी रेखा से नीचे रहती है।
  • स्कूल छोड़ने, बच्चों के कुपोषण, मातृ स्वास्थ्य और शिशु मृत्यु दर के मामले में भी बिहार का प्रदर्शन काफी खराब रहा है।

Current Affairs

 

‘विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा क्या है?

संविधान में किसी राज्य को ‘विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा’ (Special Category Status – SCS) देने से संबंधित कोई प्रावधान नहीं है; केंद्र सरकार द्वारा अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिकूल परिस्थितियों वाले राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

  • यह दर्जा, भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का सामना कर रहे राज्यों के विकास में सहायता हेतु केंद्र सरकार द्वारा किया गया एक वर्गीकरण है।
  • यह वर्गीकरण वर्ष 1969 में पांचवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।

यह वर्गीकरण गाडगिल फार्मूले पर आधारित था, जिसमें विशेष श्रेणी के राज्य के दर्जे के लिये निम्नलिखित मानदंड निर्धारित किये गए थे:

  1. पहाड़ी क्षेत्र;
  2. कम जनसंख्या घनत्व और/या जनजातीय जनसंख्या का बड़ा हिस्सा;
  3. पड़ोसी देशों के साथ सीमाओं की सामरिक स्थिति;
  4. आर्थिक और बुनियादी अवसंरचना का पिछड़ापन; तथा
  5. राज्य वित्त की अव्यवहार्य प्रकृति।

‘विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा प्राप्त करने के लिए कुछ प्रमुख दिशानिर्देश:

  1. राज्य, खराब बुनियादी ढांचे के साथ आर्थिक रूप से पिछड़ा होना चाहिए।
  2. राज्यों को पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण इलाकों में स्थित होना चाहिए।
  3. राज्यों का जनसंख्या घनत्व कम और जनजातीय आबादी अधिक होनी चाहिए।
  4. राज्य, रणनीतिक रूप से पड़ोसी देशों की सीमाओं के समीप स्थित होना चाहिए।

‘विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा कौन प्रदान करता है?

  • पहले, ‘राष्ट्रीय विकास परिषद’ द्वारा ‘योजना सहायता के लिये’ विशेष श्रेणी का दर्जा उन राज्यों को प्रदान किया गया था, जिन्हें विशेष रूप से ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।
  • अब, ऐसे राज्यों को केंद्र द्वारा ‘विशेष श्रेणी राज्य’ का दर्जा दिया जाता है।

लाभ:

करों से छूट और अन्य लाभों के अलावा, ‘विशेष श्रेणी दर्जा’ वाले राज्य के लिये केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर कुल व्यय का 90% केंद्रीय अनुदान के रूप में भुगतान किया जाता है, तथा शेष 10% भी शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण के रूप में दिया जाता है।

संबंधित चिंताएं:

किसी भी नए राज्य को ‘विशेष दर्जा’ देने पर विचार करने से, अन्य राज्यों की मांगें बढ़ेंगी और परिणामस्वरूप, इससे मिलने वाले लाभों में और कमी आएगी। राज्यों के लिए ‘विशेष दर्जा’ की मांग करना आर्थिक रूप से भी फायदेमंद नहीं है क्योंकि वर्तमान व्यवस्था के तहत इसके लाभ काफी कम हैं। इसलिए, विशेष समस्याओं का सामना कर रहे राज्यों के लिए ‘विशेष पैकेज की मांग करना’ बेहतर होगा।

वर्तमान परिदृश्य:

14वें वित्त आयोग द्वारा पूर्वोत्तर और तीन पहाड़ी राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों के लिए ‘विशेष श्रेणी का दर्जा’ खत्म कर दिया गया है।

  • इसके स्थान पर, आयोग ने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य के ‘संसाधन अंतर’ को ‘कर हस्तांतरण’ के माध्यम से भरा जाए, और केंद्र सरकार से कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी को 32% से बढ़ाकर 42% करने का आग्रह किया, जिसे वर्ष 2015 से लागू किया गया है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा
  2. 14वां वित्त आयोग
  3. वित्त आयोग
  4. गाडगिल फॉर्मूला

मेंस लिंक:

राज्यों को विशेष श्रेणी का दर्जा दिए जाने से संबंधित मुद्दों की चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

भुगतान बैंको एवं लघु वित्त बैंकों को ‘सरकारी एजेंसी कारोबार’ करने की अनुमति


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा भुगतान बैंकों (Payments Banks) तथा लघु वित्त बैंकों (Small Finance Banks) को ‘सरकारी एजेंसी कारोबार / बिजनेस’ (Govt agency business) करने की अनुमति दी गयी है।

इसके लिए यह शर्त रखी गयी है, कि संबंधित बैंक ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (Prompt Corrective Action – PCA) फ्रेमवर्क या अधिस्थगन के अंतर्गत नहीं होनी चाहिए।

‘एजेंसी बैंक’ को मान्यता देने की शक्ति:

किसी विशेष ‘सरकारी एजेंसी कारोबार’ के लिए ‘एजेंसी बैंक’ (अनुसूचित निजी क्षेत्र के एजेंसी बैंक सहित) को मान्यता देने का विकल्प, पूरी तरह से केंद्र सरकार के संबंधित विभागों / राज्य सरकारों के पास है।

निहितार्थ:

  • इस व्यवस्था के बाद, बैंक अब सरकार और अन्य बड़े निगमों द्वारा जारी अनुरोध प्रस्तावों (Request for Proposals), प्राथमिक नीलामी, निश्चित दर और परिवर्तनीय रेपो दर, और रिवर्स रेपो, तथा ‘सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility – MSF) में भाग ले सकते हैं।
  • साथ ही, बैंक अब सरकार द्वारा संचालित वित्तीय समावेशन योजनाओं में भागीदार के लिए भी पात्र होंगे।

 

‘लघु वित्त बैंक’ के बारे में:

‘लघु वित्त बैंक’ (Small Finance Bank – SFBs), देश में अल्प बैंकिग सुविधाओं और बैंक रहित क्षेत्रों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाले वित्तीय संस्थान होते हैं।

  • ‘लघु वित्त बैंक’ (SFBs) ‘कंपनी अधिनियम,’ 2013 के तहत एक ‘पब्लिक लिमिटेड कंपनी’ के रूप में पंजीकृत होते हैं।
  • ये बैंक, अन्य वाणिज्यिक बैंकों की तरह, सभी बुनियादी बैंकिंग गतिविधियों, जैसेकि ऋण देने और जमा स्वीकार करने, में संलग्न हो सकते हैं।
  • वित्तीय समावेशन पर गठित ‘नचिकेत मोर समिति’ द्वारा इनकी ‘लघु वित्त बैंकों’ की स्थापना के लिए सुझाव दिया गया था।
  • ‘लघु वित्त बैंक’ बड़ी राशि के ऋण नहीं दे सकते। इसके अलावा, ये हाई-टेक उत्पादों में सहायक कंपनियों की स्थापना नहीं कर सकते और न ही व्यापार कर सकते हैं।

भुगतान बैंक (Payments Banks)

भुगतान बैंकों की स्थापना, ‘मामूली बचत खाते और प्रवासी श्रमिक कार्यबलों, निम्न आय वाले परिवारों, छोटे उद्यमों, अन्य असंगठित क्षेत्र की संस्थाओं और अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए भुगतान/प्रेषण सेवाओं को प्रदान करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।’

  • भुगतान बैंक, एक निश्चित सीमा तक ही जमा स्वीकार कर सकते हैं। वर्तमान में, जमा राशि स्वीकार करने की अधिकतम सीमा प्रति व्यक्ति 200,000 रुपये है, लेकिन भविष्य में इसे बढ़ाया जा सकता है।
  • ये बैंक, ऋण या क्रेडिट कार्ड प्रदान नहीं कर सकते हैं। तथापि, इस प्रकार के बैंक ‘चालू’ और ‘बचत’ दोनों खातों को संभाल सकते हैं।
  • भुगतान बैंक, एटीएम और डेबिट कार्ड के साथ-साथ ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग सुविधा प्रदान कर सकते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भुगतान बैंकों के बारे में
  2. लघु वित्त बैंकों के बारे में
  3. लघु वित्त बैंक बनाम सार्वजनिक बैंक
  4. ऑन-टैप लाइसेंसिंग
  5. अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

 ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ के लिए संशोधित त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई फ्रेमवर्क


(Prompt Corrective Action Framework for NBFCs)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ (NBFC) के लिए ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (Prompt Corrective Action – PCA) फ्रेमवर्क जारी किया है।

NBFC के लिए PCA फ्रेमवर्क, उनकी वित्तीय स्थिति के आधार पर 31 मार्च को या उसके बाद 1 अक्टूबर, 2022 से प्रभावी होगा।

‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (पीसीए) फ्रेमवर्क के बारे में:

‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (Prompt Corrective Action – PCA) एक फ्रेमवर्क है, जिसके जरिये आरबीआई कमजोर वित्तीय संकेतकों वाले बैंकों पर की नजर रखता है।

इसका उद्देश्य, उचित समय पर पर्यवेक्षी हस्तक्षेप को सक्षम बनाना है। यह पर्यवेक्षित संस्था से समय पर उपचारात्मक उपायों को शुरू और लागू करने की अपेक्षा रखता है, ताकि उसकी वित्तीय स्थिति बहाल की जा सके। पीसीए फ्रेमवर्क का उद्देश्य प्रभावी बाजार अनुशासन के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य करना भी है।

प्रयोज्यता:

  • पीसीए फ्रेमवर्क, सभी जमा स्वीकार करने वाली ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ (NBFCs), निवेश और क्रेडिट कंपनियों, कोर निवेश कंपनियों, अवसंरचना ऋण निधि, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियों और ‘सूक्ष्म वित्त संस्थानों’ सहित मध्य, ऊपरी और शीर्ष स्तर पर ‘जमा स्वीकार नही करने वाली सभी NBFCs पर लागू होगा।
  • हालांकि, पीसीए फ्रेमवर्क में, सरकारी स्वामित्व वाली इकाईयों, प्राथमिक डीलरों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से धन राशि स्वीकार नहीं करने वाली ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ को को शामिल नहीं किया गया है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ के लिए पीसीए फ्रेमवर्क लागू किए जाने हेतु संकेतक:

  • पीसीए फ्रेमवर्क के तहत, केंद्रीय बैंक तीन संकेतकों की निगरानी करेगा – पूंजी एवं जोखिम भारित संपत्ति अनुपात (capital to risk-weighted assets ratio – CRAR), टीयर I अनुपात और ‘गैर-निष्पादित निवेश’ (NPIs) सहित शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NNPAs)।
  • कोर निवेश कंपनियों (CICs) के मामले में, आरबीआई गैर-निष्पादित निवेश’ सहित समायोजित निवल मूल्य/कुल जोखिम-भारित संपत्ति, लाभांश अनुपात और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NNPAs) की निगरानी करेगा।

उपर्युक्त संकेतकों के तहत, तीन जोखिम सीमाओं में से किसी एक का उल्लंघन पाए जाने पर पीसीए फ्रेमवर्क लागू किया जा सकता है।

आवश्यकता:

‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ के लिए पीसीए फ्रेमवर्क चार बड़ी वित्त फर्मों – IL&FS, DHFL, SREI और रिलायंस कैपिटल – के द्वारा वित्तीय क्षेत्र में कड़ी निगरानी के बावजूद पिछले तीन वर्षों में सावधि जमा और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से सार्वजनिक धन एकत्र किए जाने, के बाद लाया गया है। इन कंपनियों पर निवेशकों का सामूहिक रूप से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।

पीसीए फ्रेमवर्क लागू होने पर NBFC की स्थिति:

  • जोखिम सीमा के आधार पर, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा NBFC के लिए अनिवार्य सुधारात्मक कार्रवाइयां, जैसेकि लाभांश वितरण/लाभ के प्रेषण पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं तथा प्रमोटरों/शेयरधारकों के लिए अपनी इक्विटी समाप्त करने तथा लाभांश को कम करने के लिए निर्देश दिए जा सकते हैं।
  • आरबीआई द्वारा समूह कंपनियों (केवल CICs के लिए) की ओर से गारंटी जारी करने या अन्य आकस्मिक देनदारियों को लेने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  • इसके अलावा, केंद्रीय बैंक द्वारा शाखा विस्तार करने पर प्रतिबंध, बोर्ड-अनुमोदित सीमाओं के भीतर तकनीकी उन्नयन के अलावा अन्य पूंजीगत व्यय पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं तथा परिवर्तनीय परिचालन लागत को सीमित/सीधे कम किया जा सकता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि आरबीआई द्वारा वर्ष 2002 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए एक पीसीए फ्रेमवर्क जारी किया गया था?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (PCA) के बारे में
  2. कोर निवेश कंपनियों के बारे में
  3. एनबीएफसी क्या हैं?
  4. आरबीआई और उसकी शक्तियों के बारे में
  5. सीआरएआर क्या है?

मेंस लिंक:

‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ के लिए के लिए पीसीए फ्रेमवर्क की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

पार्कर सोलर प्रोब


संदर्भ:

नासा (NASA) द्वारा प्रक्षेपित, ‘पार्कर सोलर प्रोब’ (Parker Solar Probe) सूर्य के बाहरी वातावरण- ‘कोरोना’ (CORONA) से होकर उड़ान भरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया है।

हाल ही में, अंतरिक्ष यान ने कोरोना से होकर उड़ान भरी और उसके चुंबकीय क्षेत्र और कणों के नमूने एकत्र किए।

महत्व:

यह उपलब्धि वैज्ञानिकों को सूर्य और हमारे सौर मंडल पर इसके प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने में मदद करेगी।

Current affairs

 

मिशन के बारे में:

2018 में प्रक्षेपित किया गया, ‘पार्कर सोलर प्रोब’ सूर्य के वायुमंडल से होकर यात्रा करेगा। इससे पहले कोई अन्य अंतरिक्ष यान, अत्याधिक उष्मा और विकिरण स्थितियों का सामना करते हुए सूर्य की सतह के इतने नजदीक से नहीं गुजरा है। इस प्रकार, अंततः ‘पार्कर सोलर प्रोब’ मानव समुदाय के लिए किसी तारे का सबसे नज़दीकी विवरण प्रदान करेगा।

पार्कर सोलर प्रोब की यात्रा:

  • सूर्य के वातावरण के रहस्यों को उजागर करने के क्रम में, पार्कर सोलर प्रोब लगभग सात वर्षों में सात परिभ्रमणों के दौरान शुक्र के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करेगा तथा धीरे-धीरे अपनी कक्षा को सूर्य के नजदीक स्थापित करेगा।
  • पार्कर सोलर प्रोब अंतरिक्ष यान, सूर्य की सतह से 9 मिलियन मील की दूरी पर और बुध ग्रह की कक्षा के भीतर से से होकर सूर्य के वायुमंडल से गुजरेगा।

मिशन का लक्ष्य:

पार्कर सोलर प्रोब के तीन विस्तृत वैज्ञानिक उद्देश्य हैं:

  1. सौर कोरोना और सौर हवा को गर्म करने और गति प्रदान करने वाली ऊर्जा के प्रवाह का पता लगाना।
  2. सौर हवा के स्रोतों पर प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र की संरचना और गतिशीलता का निर्धारण करना।
  3. ऊर्जा कणों को गति प्रदान करने और इनका परिवहन करने वाली प्रणाली का अन्वेषण करना।

कोरोना’ के अध्ययन का कारण:

कोरोना का तापमान, सूर्य की सतह से बहुत अधिक है। कोरोना, सौर प्रणाली में आवेशित कणों के निरंतर प्रवाह अर्थात सौर हवाओं को जन्म देता है। ये अप्रत्याशित सौर हवाएं हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र में गड़बड़ी का कारण बनती हैं और पृथ्वी पर संचार तकनीक को नष्ट करने में सक्षम होती हैं। नासा को उम्मीद है कि इन निष्कर्षों से वैज्ञानिकों के लिए पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण में होने वाले बदलाव का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

सूर्य की सतह के संबंध में चुंबकीय पुन: संयोजन (Magnetic Reconnection) क्या है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पार्कर सोलर प्रोब के बारे में
  2. सोलर फ्लेयर्स क्या हैं?
  3. सूर्य का कोरोना
  4. पृथ्वी बनाम शुक्र
  5. रेडियो तरंगें

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सोलर फ्लेयर्स पृथ्वी के पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘जलवायु परिवर्तन’ को ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ में ले जाने संबंधी प्रस्ताव का विरोध


संदर्भ:

हाल ही में, भारत और रूस द्वारा एक प्रस्ताव को अवरुद्ध कर दिया गया, जिसमे ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ (United Nations Security Council – UNSC) को जलवायु संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अधिकार दिए जाने का प्रावधान किया गया था।

संबंधित प्रकरण:

  • आयरलैंड और नाइजर द्वारा प्रस्तुत मसौदा प्रस्ताव में ‘जलवायु परिवर्तन’ और ‘अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभावों’ पर चर्चा के लिए ‘सुरक्षा परिषद’ में एक औपचारिक जगह बनाने की मांग की गई थी।
  • प्रस्ताव में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव से, संघर्षों को रोकने के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले जोखिमों के समाधान हेतु समय-समय पर रिपोर्ट दिए जाने को भी कहा गया था।

भारत ने क्या कहा?

जब जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय की बात आती है तो भारत किसी से पीछे नहीं रहता है। लेकिन ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ (UNSC) किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने की जगह नहीं है। वास्तव में, इस तरह का प्रयास, उपयुक्त मंच पर जिम्मेदारी से बचने, तथा जिन विषयों पर ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ की ओर जिम्मेदारी होती है, उन पर कोई फैसला लेने की अनिच्छा से दुनिया का ध्यान हटाने की इच्छा से प्रेरित प्रतीत होता है।

प्रस्ताव से संबंधित चिंताएं:

  • जलवायु परिवर्तन को अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में पेश करना, सुरक्षा परिषद का ध्यान परिषद के एजेंडे पर देशों में जारी संघर्ष के वास्तविक, गंभीर कारणों से हटा देता है।
  • जलवायु परिवर्तन को सुरक्षित करना, उन देशों के लिए काफी हद तक सुविधाजनक होगा जो सक्रिय रूप से संघर्षों को पैदा करने में मदद कर रहे है, अथवा सुरक्षा परिषद को इसके कार्यों में विचलन लाने के लिए सैन्य गतिविधियों को अंजाम दे रहे है या विकासशील देशों को आवश्यक सहायता प्रदान नहीं करना चाहते हैं।
  • प्रस्ताव के हिस्से के रूप में की जाने वाली कार्रवाई के तहत, संभावित रूप से जीवाश्म समृद्ध देशों पर प्रतिबंध लगाने से लेकर, जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले घरेलू संघर्षों में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य हस्तक्षेप तक किया जा सकते हैं।

आगे क्या?

जलवायु परिवर्तन से संबंधित सभी मामलों पर चर्चा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के पास पहले से ही एक विशेष एजेंसी, ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ (United Nations Framework Convention on Climate Change- UNFCCC) है।

  • UNFCCC में 190 से अधिक देश शामिल है, और ये प्रतिवर्ष कई बार बैठक करते हैं। इसके तहत, हाल ही में, साल की अंतिम बैठक का ग्लासगो में आयोजन किया गया था। दो सप्ताह तक काहली इस बैठक में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक दृष्टिकोण पर विमर्श किया गया।
  • इसी प्रक्रिया के अंतर्गत, ‘पेरिस समझौते’ और इसके पूर्ववर्ती ‘क्योटो प्रोटोकॉल’ का जन्म हुआ था। ये समझौते जलवायु परिवर्तन संकट का जवाब देने के लिए डिज़ाइन किए गए अंतरराष्ट्रीय उपकरण है।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


राजा चैत सिंह

संदर्भ: मोदी द्वारा अपने काशी भाषण में उद्धृत।

  • 18वीं शताब्दी के अंत तक, बनारस ने अवध के नवाब से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी।
  • 1771 में, महाराजा चैत सिंह (Chait Singh) ने ब्रिटिश अधिकारियों की मदद से बनारस का सिंहासन हासिल कर लिया था।
  • दो साल बाद, महाराजा ने अपना अधिकार-क्षेत्र हेस्टिंग्स के नियंत्रण में ईस्ट इंडिया कंपनी को स्थानांतरित कर दिया।
  • जब हैदर अली के खिलाफ मैसूर युद्ध लड़ने के लिए संसाधनों की आवश्यकता का सामना करना पड़ा, तो हेस्टिंग्स ने महाराजा चैत सिंह पर अतिरिक्त राजस्व भुगतान करने और 1778 और 1779 में सैनिकों की आपूर्ति करने के लिए दबाव डाला।
  • अंग्रेजों की मांग को पूरा करने में विफल रहने पर, हेस्टिंग्स ने चैत सिंह पर हमला कर दिया।
  • इस लड़ाई में हेस्टिंग्स के कई सैनिक मारे गए और, जब कोई अन्य विकल्प नहीं बचा तो गवर्नर-जनरल को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

प्रचलित कहानी यह है कि हेस्टिंग्स हाथी पर सवार होकर बनारस के नजदीक स्थित ‘चुनार के किले’ की ओर रात में जल्दबाजी में निकल गया। माना जाता है कि इस घटना ने बनारस में लोकप्रिय कहावत को जन्म दिया: “घोड़े पर हौदा, हाथी पर जीन, काशी से भागा वॉरेन हेस्टिंग्स”।

Current Affairs

 

रानी भबानी

अपने भाषण में, मोदी ने शहर के विकास में बंगाल की ‘रानी भबानी’ (Rani Bhabani) की भूमिका पर प्रकाश डाला।

भबानी का विवाह राजशाही (वर्तमान बांग्लादेश) में नटोर एस्टेट के जमींदार राजा ‘रामकांत रे’ से हुआ था। 1748 में अपने पति की मृत्यु के बाद, जमींदारी भबानी के हाथों में चली गई। देश में उस समय बहुत कम महिला जमींदार हुआ करती थी।

योगदान:

रानी भबानी को उनके परोपकारी प्रयासों के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

  • राजशाही जिले में उन्होंने कई स्कूलों का निर्माण करवाया और कई जरूरतमंदो को कई छात्रवृत्तियां प्रदान की।
  • उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में 350 से अधिक मंदिरों और सरायों का निर्माण किया, और सड़क-मार्गों और पानी की टंकियों में भारी निवेश किया।
  • वाराणसी में दुर्गा कुंड मंदिर का निर्माण करवाया।
  • 1755 में उन्होंने मुर्शिदाबाद के बरोनगर में एक दर्जन मंदिरों के परिसर का निर्माण किया।

SGTF टेस्ट किट

औपचारिक रूप से ‘एस-जीन टारगेट फेलियर (S-gene Target FailureSGTF) परीक्षण’ कहे जाने वाले इस प्रॉक्सी परीक्षण का उपयोग ‘ओमीक्रोन’ (Omicron) वैरिएंट का शीघ्र पता लगाने के लिए किया जा सकता है।

  • इस परीक्षण में, ‘एस-जीन’ की अनुपस्थिति का पता चलता है, जोकि ‘कोविड संक्रमित रोगी’ में ‘ओमीक्रोन वैरिएंट’ की उपस्थिति का संकेतक होता है।
  • S जीन, ओमीक्रोन वैरिएंट’ नहीं पाया जाता है। वेरिएंट में पहले ही कई म्यूटेशन हो चुके हैं। इस नए ‘वैरिएंट’ में S जीन गायब हो चुका है।

 


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