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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 November 2021

 

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययनI

1. मध्य प्रदेश आदिवासी आउटरीच कार्यक्रम

 

सामान्य अध्ययन-II

1. संसद में व्यवधान

2. ओमिक्रॉन – एक नया वैरिएंट

3. नोरोवायरस

4. पांच महीने के बाद ईरान परमाणु वार्ता का पुनः आरंभ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भारत गौरव योजना

2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अदन की खाड़ी

2. पोषण ज्ञान

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

मध्य प्रदेश आदिवासी आउटरीच कार्यक्रम


संदर्भ:

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में बड़े पैमाने पर ‘आदिवासी पहुँच कार्यक्रम’ (Tribal Outreach Programme) शुरू किया गया है।

भील और गोंड राज्य की महत्वपूर्ण जनजातियां हैं।

आदिवासी / जनजातीय आउटरीच कार्यक्रम’ के तहत, राज्य द्वारा निम्नलिखित उपाय किए जा रहे हैं:

  1. अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्व-शासन सुनिश्चित करने हेतु ‘पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996’ (Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996) को लागू किया जाएगा।
  2. आदिवासियों के प्रमुख पेय ‘महुआ’ को वैध बनाना। इसकी ‘विरासत शराब’ (Heritage Liquor) के रूप में बिक्री की जाएगी।
  3. मुख्यमंत्री द्वारा आदिवासियों के खिलाफ दर्ज छोटे-मोटे मुकदमे भी वापस लिए जाने की घोषणा भी की गयी है, इनमे से अधिकांश मामले महुआ से बनाई जाने वाले शराब के उत्पादन और बिक्री से संबंधित हैं।
  4. सभी 89 आदिवासी प्रखंडों में सार्वजनिक वितरण के तहत वितरित खाद्यान्न की होम डिलीवरी किए जाने की भी घोषणा की गई है।
  5. छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम ‘शंकर शाह’ के नाम पर रखा जाएगा। सुमेर शाह के पुत्र शंकर शाह, गोंड शासन के तहत ‘गढ़ा साम्राज्य’ (Garha Kingdom) के अंतिम शासक थे।
  6. ‘तांत्या भील’ (Tantya Bhil) के नाम पर रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप के नाम परिवर्तित किए जाएंगे तथा खंडवा में उनके नाम पर एक स्मारक का निर्माण किया जाएगा।
  7. मंडला में एक मेडिकल कॉलेज का नाम राजा ‘हिरदे शाह लोधी’ के नाम पर रखा जाएगा। राजा ‘हिरदे शाह लोधी’ काशी से आकर मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बस गए थे। उनके पूर्वजों ने वर्तमान दमोह में अपना राज्य स्थापित किया था। उस समय यह क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन था।
  8. भोपाल के ‘हबीबगंज स्टेशन’ का नाम बदलकर गोंड रानी- रानी कमलापति रखा गया है।
  9. आदिवासी कला और संस्कृति में सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए राजा संग्राम शाह पुरस्कार शुरू किए जाने की घोषणा की गयी है। वह ‘गढ़ा साम्राज्य’ के 48वें गोंड शासक थे।

‘रानी कमलापति’ कौन थी?

  • ‘रानी कमलापति’ (Rani Kamlapati), 18वीं शताब्दी में ‘गोंड वंश’ के शासक ‘निज़ाम शाह’ की विधवा पत्नी थीं। भोपाल से 55 किमी दूर तत्कालीन गिन्नौरगढ़ रियासत पर इनका शासन था।
  • अपने पति की हत्या के बाद, ‘रानी कमलापति’ अपने शासनकाल के दौरान हमलावरों का बहादुरी से सामना करने के लिए जानी जाती हैं।
  • कमलापति “भोपाल की अंतिम हिंदू रानी” थीं। इन्होने अपने शासनकाल में जल प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए तथा कई पार्कों और मंदिरों की स्थापना की।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है। राज्य में 46 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियां हैं, जिनमें से तीन ‘विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह’ (Particularly Vulnerable Tribal Groups- PVTG) में शामिल हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

ऊपर वर्णित महत्वपूर्ण जनजातीय नेताओं और व्यक्तित्वों के बारे में संक्षेप में पढ़िए।

मेंस लिंक:

‘विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह’ (PVTG) कौन होते हैं? इनके लिए इस प्रकार से वर्गीकृत क्यों किया गया है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

संसद में व्यवधान


संदर्भ:

राज्यसभा में सदन के नेताओं ने ‘संसद में व्यवधान’ पर भारत के मुख्य न्यायाधीश की हालिया टिप्पणी पर चिंता व्यक्त की है।

सदन के नेताओं का कहना है, कि विधायिकाओं में कामकाज के मानदंडों का उल्लंघन होने पर ‘पीठासीन अधिकारियों’ द्वारा उचित कार्रवाई की जा सकती है, तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं को इस विषय पर प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

संबंधित प्रकरण:

हाल ही में, मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण ने ‘संसद में की जाने वाली बहस में हो रही कमी’ के बारे में असंतोष प्रकट किया था। उन्होंने कहा कि, यह ‘खेदजनक जनक स्थिति’ है, और सकरात्‍मक एवं गुणवत्तापूर्ण बहसों के नहीं होने पर कानूनों के कई पहलू अस्पष्ट रह जाते हैं, जिससे अदालत पर बोझ बढ़ जाता है।

इसके बाद:

इस प्रकार की टिप्पणियों को विधायिकाओं के कामकाज के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिनमे लगातार व्यवधान, अनियंत्रित व्यवहार और हिंसक कार्रवाईयां देखने को मिलती रहती हैं, और जिनका हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

इस प्रकार की टिप्पणियों का प्रत्युत्तर देने सबसे अच्छा तरीका यह है, कि विधायिकाओं की गरिमा और मर्यादा सुनिश्चित करके उनके उचित कामकाज को सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि इस तरह की टिप्पणियां विधायिकाओं के कामकाज के बारे में जनता के नजरिए को प्रभावित करती हैं।

प्रमुख चिंताएं:

हमारे विधायी कामकाज की नींव के रूप में ‘चर्चा’ की जगह ‘व्यवधान’ (Disruption) लेता जा रहा है।

  • पीआरएस (PRS Legislative Research) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 15वीं लोकसभा (2009-14) के दौरान संसदीय कार्यवाही में बार-बार व्यवधान होने के कारण, लोकसभा और राज्यसभा में निर्धारित समय का कुल क्रमशः 61 फीसदी और 66 फीसदी काम हुआ था।
  • पीआरएस की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, 16वीं लोकसभा (2014-19) के दौरान निर्धारित समय का 16% समय व्यवधानों के कारण ख़राब हो गया। हालाँकि यह 15वीं लोकसभा (37%) से बेहतर, किंतु 14वीं लोकसभा (13%) से भी बदतर स्थति रही।
  • 16वीं लोकसभा के दौरान, राज्य सभा में अपने निर्धारित समय का 36 प्रतिशत व्यवधानों के कारण ख़राब हुआ। 15वीं और 14वीं लोकसभा के दौरान, राज्य सभा में निर्धारित समय का क्रमश: 32% और 14% नष्ट हुआ था।

व्यवधानों के कारण:

  1. विवादित विषयों और सार्वजनिक महत्व के मामलों पर चर्चा।
  2. व्यवधान, सत्ता पक्ष के लिए जिम्मेदारी से बचने में सहायक साबित हो सकते हैं।
  3. गैर-सूचीबद्ध चर्चा के लिए समर्पित समय का अभाव।
  4. अनुशासनात्मक शक्तियों का दुर्लभ प्रयोग।
  5. दलगत राजनीति।

आवश्यकता:

  • संसद में अव्यवस्था को रोकने हेतु, सांसदों और विधायकों के लिए ‘आचार संहिता’ को सख्ती से लागू किए जाने की आवश्यकता है।
  • आचार संहिताओं का पालन न करने वाले और सदनों के कामकाज में बाधा डालने वाले सांसदों को, पीठासीन अधिकारी द्वारा निलंबित कर देना चाहिए।
  • वर्तमान सरकार के लिए, और अधिक लोकतांत्रिक होने और विपक्ष को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से रखने का अवसर देने की जरूरत है।
  • व्यवधानों और स्थगन पर बर्बाद हुए घंटों की संख्या को ध्यान में रखने तथा संसद के दोनों सदनों के दिन-प्रतिदिन के कामकाज की उत्पादकता की निगरानी करने हेतु एक “उत्पादकता मापक” (Productivity Meter) तैयार किया जाना चाहिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसद के सत्र
  2. संसद सत्र को आहूत करने की शक्ति किसे प्राप्त है?
  3. संसदीय सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष की भूमिकाएं और शक्तियां
  4. संयुक्त बैठक
  5. संविधान के अनुच्छेद 74 और 75

मेंस लिंक:

संसद के बार-बार बाधित होने से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डालिए। संसद के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के उपायों का सुझाव दीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

ओमिक्रॉन – एक नया वैरिएंट


संदर्भ:

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) द्वारा ‘वेरिएंट ऑफ कन्सर्न’ (Variant of Concern VoC) श्रेणी में रखे गए कोरोना वायरस के एक नए वैरिएंट B 1.1. 529 को ‘ओमिक्रॉन’ (Omicron) नाम दिया गया है।

  • इस वैरिएंट को दक्षिण अफ्रीका के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट किया गया था।
  • ‘ओमिक्रॉन’ वैरिएंट ने दुनिया भर में कोविड संक्रमण के दोबारा फैलने के संबंध में काफी चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर दी है।

नया वैरिएंट, मूल वायरस से कितना भिन्न है?

B1.1.529 वेरिएंट में, डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ‘गंभीर स्पाइक म्यूटेशन’ की संख्या 2 गुना से अधिक है। इस नए वेरिएंट में, स्पाइक प्रोटीन में अत्यधिक चिंताजनक 32 उत्परिवर्तन (Mutations) देखे गए हैं, जोकि डेल्टा वेरिएंट की तुलना में, विशेष चिंता का विषय है।

वर्तमान में WHO द्वारा कोरोना वायरस के एक पांच वैरिएंट्स को ‘वेरिएंट ऑफ कन्सर्न’ (VoC) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है:

  1. ‘ओमिक्रॉन’ (1.1.529), नवंबर 2021 में दक्षिणी अफ्रीका में देखा गया।
  2. डेल्टा (1.617.2), वर्ष 2020 के अंत में भारत में उभरा और दुनिया भर में फैल गया।
  3. गामा (1), वर्ष 2020 के अंत में ब्राजील में उभरा।
  4. बीटा (1.351), वर्ष 2020 की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका में उभरा।
  5. अल्फा (1.1.7), वर्ष 2020 के अंत में ब्रिटेन में उभरा।

‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ (Variants of InterestVoI)

वर्तमान में कोरोना वायरस के दो वैरिएंट्स को ‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ की श्रेणी में रखा गया है:

  1. म्यू (1.621), वर्ष 2021 की शुरुआत में कोलंबिया में उभरा।
  2. लैम्ब्डा (37), वर्ष 2020 के अंत में पेरू में उभरा।

वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ (VoI) एवं ‘वेरिएंट ऑफ कन्सर्न’ (VoC):

SARS-CoV-2 के ‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ (VoI) का तात्पर्य,

  • SARS-CoV-2 के वैरिएंट में होने वाले उन आनुवंशिक उत्परिवर्तनों से होता है, जो ‘संचारण क्षमता और बीमारी की गंभीरता को प्रभावित करने, या प्रतिरक्षा से बचाव करने के लिए जाने जाते है, या इसके लिए भविष्यवाणी की जाती है; तथा
  • किसी वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ के रूप में नामित करना इस तथ्य की स्वीकृति भी होती है, कि यह वैरिएंट कई देशों और जनसंख्या समूहों में महत्वपूर्ण सामुदायिक प्रसारण का कारण बन चुका है।

SARS-CoV-2 के ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ (VoC) का तात्पर्य,

SARS-CoV-2 के उस वैरिएंट्स से होता है, जो ‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ (VoI) की परिभाषा के मानदंडों को पूरा करता है, और जिसमे एक तुलनात्मक मूल्यांकन के माध्यम से, वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्त्व के स्तर पर निम्नलिखित में से एक या अधिक परिवर्तन देखे जाते हैं:

  1. COVID-19 वायरस संक्रामकता में वृद्धि, बीमारी का अधिक गंभीर होना (जैसे- अस्पताल में भर्ती या मृत्यु हो जाना),
  2. पिछले संक्रमण या टीकाकरण के दौरान उत्पन्न एंटीबॉडी में महत्त्वपूर्ण कमी,
  3. उपचार या टीके की प्रभावशीलता में कमी या नैदानिक उपचार की विफलता।

वायरस का रूपांतरण किस प्रकार और क्यों होता है?

  1. वायरस के प्रकारों में एक या एक से अधिक उत्परिवर्तन (Mutations) होते हैं, जो इस नए रूपांतरित प्रकार को, माजूदा अन्य वायरस वेरिएंटस से अलग करते हैं।
  2. दरअसल, वायरस का लक्ष्य एक ऐसे चरण तक पहुंचना होता है जहां वह मनुष्यों के साथ रह सके, क्योंकि उसे जीवित रहने के लिए एक पोषक (Host) की जरूरत होती है।
  3. विषाणुजनित RNA में होने वाली त्रुटियों को उत्परिवर्तन कहा जाता है, और इस प्रकार उत्परिवर्तित वायरस को ‘वेरिएंट’ कहा जाता है। एक या कई उत्परिवर्तनों से निर्मित हुए ‘वेरिएंट’ परस्पर एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं।

current affairs

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोरोनावायरस के वेरिएंट
  2. वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (VoI) क्या है?
  3. वैरिएंट ऑफ कंसर्न (VoC) क्या है?
  4. ‘उत्परिवर्तन’ क्या होता है?

मेंस लिंक:

कोविड- 19 वायरस के उत्परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

नोरोवायरस


संदर्भ:

केरल में नोरोवायरस (Norovirus) संक्रमण के 13 मामलों का पता लग चुका है, इसे देखते हुए कर्नाटक सरकार द्वारा कोडागु और दक्षिण कन्नड़ के सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

 

‘नोरोवायरस’ के बारे मे:

‘नोरोवायरस’ (Norovirus), डायरिया फ़ैलाने वाले ‘रोटावायरस’ (Rotavirus) के समान एक संक्रामक बग है।

  • यह जठरांत्र संबंधी / गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (Gastrointestinal) बीमारी फ़ैलाने वाले विषाणुओं का एक समूह है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग (पेट और आंतों की सूजन) के प्रकोप से संबंधित सबसे आम रोगज़नक़ (Pathogen) है।
  • नोरोवायरस के कारण, पेट और आंतों की परत में सूजन, उल्टी और दस्त का आना आदि जैसी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से संबंधित समस्याएं पैदा होती हैं।

लक्षण:

नोरोवायरस के संक्रमण से पीड़ित होने वाले व्यक्ति में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जोकि  वायरस के संपर्क में आने के एक या दो दिन बाद दिखाई देते हैं। मरीजों को मिचली भी आती है और पेट दर्द, बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द होता है। गंभीर मामलों में, तरल पदार्थों के अधिक मात्रा में निकल जाने से शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है।

current affairs

 

प्रसार:

  • इस रोग का प्रकोप आमतौर पर क्रूज जहाजों, नर्सिंग होम, सामूहिक शयनकक्षों / डॉर्मिटरी और अन्य बंद स्थानों में फैलता है।
  • नोरोवायरस अत्यधिक संक्रामक होता है, और दूषित भोजन, पानी और संक्रमित सतहों को छूने से फ़ैल सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के मल और उल्टी से फैलता है। इस वायरस के भिन्न-भिन्न कई उपभेद होते है, अतः एक व्यक्ति कई बार संक्रमित हो सकता है।
  • नोरोवायरस, कई कीटाणुनाशकों के प्रति ‘प्रतिरोधी’ अर्थात कई कीटाणुनाशकों इसके लिए प्रभावहीन होते है, और यह 60 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहने में सक्षम है। इसलिए, केवल भोजन को भाप देने या पानी को क्लोरीनेट करने से यह वायरस नहीं मरता है। यह वायरस कई आम ‘हैंड सैनिटाइज़र’ से भी बच निकलता है।

उपचार:

यह बीमारी स्वतः सीमित होती है, अर्थात इस संक्रमण की वजह से रोगी को बहुत कष्ट होता है और उसके शरीर से बहुत कुछ निकल जाता है, किंतु आम तौर पर इसका असर केवल दो या तीन दिनों तक ही रहता है। बहुत छोटे, बहुत बूढ़े या कुपोषित व्यक्तियों को छोड़कर अधिकांश व्यक्ति, आराम लेने और शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने पर आसानी से ठीक हो जाते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नोरोवायरस के बारे में
  2. रोग
  3. प्रसार
  4. लक्षण
  5. कारण
  6. उपचार

मेंस लिंक:

नोरोवायरस पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

पांच महीने के बाद ईरान परमाणु वार्ता का पुनः आरंभ


संदर्भ:

2015 के ईरान परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए, शीघ्र की ‘वियना’ में ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (Joint Comprehensive Plan of Action – JCPOA) के रूप में प्रसिद्ध ‘अंतर्राष्ट्रीय वार्ता’ आयोजित की जाएगी।

इस वार्ता में, ईरान परमाणु समझौते (Iran Nuclear Deal) के शेष भागीदार – ईरान, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम- भाग लेंगे।

‘ईरान परमाणु समझौते’ के बारे में:

  • इसे ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (Joint Comprehensive Plan of Action – JCPOA) के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह समझौता अर्थात ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’, ईरान तथा P5 + 1+ EU (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जर्मनी, और यूरोपीय संघ) के मध्य वर्ष 2013 से 2015 से तक चली लंबी वार्ताओं का परिणाम था।
  • इस समझौते के तहत, तेहरान द्वारा, परमाणु हथियारों के सभी प्रमुख घटकों, अर्थात सेंट्रीफ्यूज, समृद्ध यूरेनियम और भारी पानी, के अपने भण्डार में महत्वपूर्ण कटौती करने पर सहमति व्यक्त की गई थी।

वर्तमान में चिंता का विषय:

  • राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा, वर्ष 2018 में, अमेरिका को समझौते से बाहर कर लिया गया था। इसके अलावा, उन्होंने ईरान पर प्रतिबंधों और अन्य सख्त कार्रवाइयों को लागू करके उस पर ‘अधिकतम दबाव’ डालने का विकल्प चुना था।
  • इसकी प्रतिक्रिया में ईरान ने यूरेनियम संवर्द्धन और अपकेन्द्रण यंत्रों (Centrifuges) का निर्माण तेज कर दिया, साथ ही इस बात पर जोर देता रहा कि, उसका परमाणु विकास कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है, और इसका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा।
  • फिर, जनवरी 2020 में, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी पर ड्रोन हमले के बाद, ईरान ने ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (JCPOA) की शर्तो का पालन नहीं करने की घोषणा कर दी।
  • JCPOA के भंग होने से ईरान, उत्तर कोरिया की भांति परमाणु अस्थिरता की ओर उन्मुख हो गया, जिससे इस क्षेत्र में और इसके बाहर भी महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस समझौते का भारत के लिए महत्व:

  • ईरान पर लगे प्रतिबंध हटने से, चाबहार बंदरगाह, बंदर अब्बास पोर्ट, और क्षेत्रीय संपर्को से जुडी अन्य परियोजनाओं में भारत के हितों को फिर से सजीव किया जा सकता है।
  • इससे भारत को, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में चीनी उपस्थिति को बेअसर करने में मदद मिलेगी।
  • अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों की बहाली से भारत को ईरान से सस्ते तेल की खरीद और ऊर्जा सुरक्षा में सहायता मिलेगी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘व्यापक परमाणु परीक्षण-प्रतिबंध संधि’ (CTBT) के बारे में सुना है? क्या भारत इस संधि का सदस्य है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. JCPOA क्या है? हस्ताक्षरकर्ता
  2. ईरान और उसके पड़ोसी।
  3. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  4. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA)  पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

भारत गौरव योजना


संदर्भ:

हाल ही में. भारतीय रेलवे द्वारा देश में व्यापक पर्यटन संभावनाओं का दोहन करने हेतु नई ‘भारत गौरव’ योजना (Bharat Gaurav scheme) की घोषणा की गयी है।

‘भारत गौरव योजना’ के बारे में:

इस योजना के तहत, निजी या राज्य के स्वामित्व वाले संचालकों द्वारा ‘रामायण एक्सप्रेस’ की तर्ज पर विषय आधारित ‘पर्यटक सर्किट ट्रेनें’ चलाई जा सकती हैं।

योजना के प्रमुख बिंदु:

  1. ‘सेवा प्रदाता’ के रूप में कोई व्यक्ति, कंपनी, समाज, ट्रस्ट, संयुक्त उद्यम या संघ, ट्रेन संचालन के लिए थीम/सर्किट निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
  2. ‘सेवा प्रदाताओं’ द्वारा पर्यटकों को रेल यात्रा, होटल आवास और दर्शनीय स्थलों की व्यवस्था, ऐतिहासिक/विरासत स्थलों की यात्रा, टूर गाइड आदि सहित, सर्व समावेशी पैकेज उपलब्ध कराए जाएंगे।
  3. ‘सेवा प्रदाता’ प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के आधार पर, इन पैकेजों की कीमत तय करने के लिए, पूरी तरह से स्वतंत्र होंगे।
  4. सेवा प्रदाताओं के लिए विषय आधारित कोचों के डिजाइन/ आंतरिक साज सज्जा के लिए स्वतंत्रता और ट्रेन के भीतर और बाहर दोनों जगह ब्रांडिंग और विज्ञापन के लिए अनुमति होगी।

इस प्रकार की योजना के लाभ:

इन ट्रेनों से भारत और दुनिया के लोगों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत व भव्य ऐतिहासिक स्थल दिखाने का विजन साकार करने में सहायता मिलेगी। इससे भारत की व्यापक पर्यटन संभावनाओं के दोहन में भी मदद मिलेगी।

इस संबंध में रेल मंत्रालय के हालिया निर्णय:

  1. 1 जुलाई, 2020 को रेल मंत्रालय द्वारा 109 युग्म मार्गों पर 151 ट्रेनों का संचालन निजी क्षेत्रों के हाथों में सौपने की घोषणा की गयी थी। यह भारतीय रेलवे द्वारा संचालित 2,800 एक्सप्रेस और मेल सेवाओं में का केवल 5% है।
  2. निजी ट्रेनों का परिचालन वर्ष 2023 में, और 12 क्लस्टर्स में अस्थायी रूप से शुरू होगा।
  3. निजी कंपनियों को उनकी पसंद के स्रोत से इंजन और ट्रेन खरीदने की छूट दी जाएगी।
  4. रेलवे ने मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर आधुनिक ट्रेनों के संचालन हेतु, ‘वेंडर क्षमताओं’ की जांच करने के लिए ‘अहर्ता प्रस्तावों’ के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन (first private train) के बारे में आप क्या जानते हैं? क्या यह आज भी चालू है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रेलवे और आम बजट का विलय कब किया गया था?
  2. भारत की पहली निजी ट्रेन
  3. बिबेक देबरॉय समिति किससे संबंधित है?
  4. ‘भारत गौरव योजना’ की मुख्य विशेषताएं
  5. पात्रता
  6. लाभ

मेंस लिंक:

‘भारत गौरव योजना’ की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण


संदर्भ:

‘राष्ट्रीय हरित अधिकरण’ (National Green TribunalNGT) के पूर्वी क्षेत्र की पीठ द्वारा ओडिशा के अंगुल जिले में ‘कुर्बदहली नल्ला’ (Kurbadahali Nalla), एक जल-वाहिका के प्राकृतिक मार्ग को परिवर्तित करने पर ‘जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड’ (JSPL) पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

संबधित प्रकरण:

‘राष्ट्रीय हरित अधिकरण’ (NGT) के समक्ष दायर की गयी एक शिकायत में कहा गया है, कि ‘जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड’ (JSPL) द्वारा राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत से अंगुल जिले में बहने वाली ‘नंदीरा नदी’ (Nandira River) को अनाधिकृत रूप से हड़प कर, इसे मिट्टी से पाट दिया गया है, जिससे नदी पूरी तरह से खत्म हो गई।

current affairs

 

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के बारे में:

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green TribunalNGT) की स्थापना 18 अक्तूबर, 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
  • इसकी स्थापना, पर्यावरण बचाव और वन संरक्षण और अन्य प्राकृतिक संसाधन सहित पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार केप्रवर्तन और इससे जुडे़ हुए मामलों का प्रभावी एवं त्वरित निपटान करने हेतु की गयी है।
  • अधिकरण की मुख्य पीठ नई दिल्ली में है, जबकि अन्य चार क्षेत्रीय पीठ भोपाल, पुणे, कोलकाता एवं चेन्नई में स्थित हैं।
  • यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, तथा यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होगा।
  • अधिकरण के लिए, आवेदनों और याचिकाओं को, उनके दायर किये जाने से 6 माह के भीतर, निपटान करने का अधिदेश दिया गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना के साथ ही, भारत ‘विशेष पर्यावरण न्यायाधिकरण’ स्थापित करने वाला विश्व में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बाद तीसरा देश तथा पहला विकासशील देश बन गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की संरचना:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण, में एक पूर्णकालिक अध्यक्ष और न्यूनतम 10 तथा अधिकतम 20 पूर्णकालिक न्यायिक एवं विशेषज्ञ सदस्य होते हैं।

अध्यक्ष: इस अधिकरण का प्रशासनिक प्रमुख होता है तथा वह न्यायिक सदस्य के रूप में भी कार्य करता है। अध्यक्ष पद पर नियुक्त किये जाने वाले व्यक्ति के लिए उच्च न्यायालय का सेवारत अथवा सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश होना आवश्यक है।

सदस्यों का चयन:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण के सदस्यों को एक चयन समिति (भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में) द्वारा चुना जाता है। यह समिति सभी आवेदनों की समीक्षा करती है और साक्षात्कार आयोजित करती है।

  1. न्यायिक सदस्यों के रूप में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का चयन किया जाता है।
  2. विशेषज्ञ सदस्यों के रूप में चयनित होने क लिए आवेदकों को, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव या उससे ऊपर के पद पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत नौकरशाह; राज्य सरकार के अधीन सेवारत प्रधान सचिव पद पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत नौकरशाह तथा पर्यावरणीय मामलों से निपटने का न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। अथवा विशेषज्ञ सदस्य सदस्यों के पास संबंधित क्षेत्र में डॉक्टरेट डिग्री होना चाहिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NGT के बारे में
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. प्रमुख निर्णय

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अदन की खाड़ी

(Gulf Of Aden)

  • अदन की खाड़ी, जिसे बरबेरा की खाड़ी के रूप में भी जाना जाता है, उत्तर में यमन, पूर्व में अरब सागर, पश्चिम में जिबूती और दक्षिण में गार्डाफुई चैनल, सोकोट्रा (यमन) और सोमालिया से घिरी हुई गहरे पानी की एक खाड़ी है।
  • उत्तर-पश्चिम में, यह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के माध्यम से लाल सागर से जुडती है। इसके पूर्व में अरब सागर है और पश्चिम में, यह जिबूती में तदजौरा की खाड़ी में मिल जाती है।

current affairs

 

पोषण ज्ञान

(Poshan Gyan)

यह स्वास्थ्य और पोषण की जानकारी पर आधारित पर एक ‘राष्ट्रीय डिजिटल भंडार’ है।

  • नीति आयोग द्वारा, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन तथा सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन केंद्र, अशोका यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी में, आज स्वास्थ्य और पोषण पर आधारित एक राष्ट्रीय डिजिटल कोष ‘पोषण ज्ञान की शुरुआत की गयी है।
  • ‘पोषण ज्ञान डिजिटल कोष’ को एक संसाधन के रूप में अवधारणाबद्ध किया गया, जिसे विभिन्न भाषाओं, स्वास्थ्य प्रकारों, लक्षित उपयोगकर्ताओं और स्रोतों में स्वास्थ्य एवं पोषण के 14 विषयगत क्षेत्रों पर संचार सामग्री की खोज के लिए सक्षम किया गया है।

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