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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 November 2021

 

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययनII

1. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना

2. ओपेक प्लस

3. शंघाई सहयोग संगठन

4. इंटरपोल

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ग्रीन बांड

2. ‘आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों’ के लिए मसौदा नियम

3. मनरेगा योजना हेतु अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपए का आवंटन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. इंग्लिश चैनल

2. निचली सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना


संदर्भ:

हाल ही में जारी किए गए ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ के पांचवें संस्करण के निष्कर्षों में, सर्वेक्षण किए गए 41% परिवारों में, पिछले संस्करण की तुलना में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है। इसे सितंबर 2018 में शुरू की गयी सरकार की प्रमुख योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana: AB-PMJAY)  के प्रभाव को बताता है।

PM-JAY की प्रमुख विशेषताएं:

  1. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित, विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा / आश्वासन योजना है।
  2. यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है।
  3. कवरेज: 10.74 करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं।
  4. इस योजना में सेवा-स्थल पर लाभार्थी के लिए कैशलेस स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को उपलब्ध कराया जाता है।
  5. AB-PMJAY योजना को पूरे देश में लागू करने और इसके कार्यान्वयन हेतु ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ (National Health Authority NHA) नोडल एजेंसी है।
  6. यह योजना, कुछ केंद्रीय क्षेत्रक घटकों के साथ एक केंद्र प्रायोजित योजना है।

योजना के अंतर्गत पात्रता:

  1. इस योजना के तहत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है।
  2. इस योजना के तहत पहले से मौजूद विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है।
  3. इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं।
  4. यह एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं।
  5. इस योजना में लगभग 1,393 प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं।
  6. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है।

नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार:

  • प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) कार्यक्रम जिन राज्यों में लागू किया गया, वहां स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में, योजना से अलग रहने वाले राज्यों की तुलना में, स्वास्थ्य बीमा का अधिक विस्तार, शिशु और बाल मृत्यु दर में कमी, परिवार नियोजन सेवाओं के उपयोग में सुधार और एचआईवी / एड्स के बारे में अधिक जागरूकता आदि का अनुभव किया गया।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में स्वास्थ्य बीमा वाले परिवारों के अनुपात में 54% की वृद्धि हुई, जबकि योजना से अलग रहने वाले राज्यों में 10% की गिरावट दर्ज की गयी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ को लागू करने की जिम्मेदारी भी ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ को दी गई है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आयुष्मान भारत के घटक
  2. PM JAY- मुख्य विशेषताएं
  3. पात्रता
  4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के बारे में
  5. सेहत (SEHAT) योजना

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के महत्व और क्षमताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘ओपेक प्लस’ के निर्णय का अर्थव्यवस्था-बहाली पर असर


संदर्भ:

विश्व के सबसे बड़े कच्चे तेल के आयातक देश ‘चीन’ द्वारा अपने तेल भंडार से कुछ मात्रा बाहर निकालने संबंधी संयुक्त राज्य अमेरिका के अनुरोध पर, अपने इरादे के बारे में कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नाहे की गयी है।

दूसरी ओर, ‘पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन’ (OPEC) और उसके सहयोगियों द्वारा, अमेरिका द्वारा उठाए गए इस कदम को देखते हुए भी, अपनी रणनीति में बदलाव लाने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है।

संबंधित प्रकरण:

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के प्रशासन द्वारा, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों को कम करने के प्रयास में, चीन, भारत और जापान सहित अन्य सर्वाधिक तेल खपत करने वाले देशों से, एक समन्वित प्रयास के तहत, सामरिक तेल के स्टॉक में से कुछ तेल को बाहर निकालने की योजना की घोषणा की गयी थी। अमेरिका में, पेट्रोल की कीमतों में पिछले वर्ष 60% से अधिक की वृद्धि हुई है, जोकि 2000 के बाद सबसे ज्यादा है।

वाशिंगटन के इस कदम से अनुमान लगाया जा रहा था, कि ‘पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन’ (OPEC) और उसके सहयोगियों – जिन्हें सामूहिक रूप से ‘ओपेक प्लस’ (OPEC+) के रूप में जाना जाता है – द्वारा हर महीने 4,00,000 बैरल प्रति दिन उत्पादन करने संबंधी अपने मौजूदा समझौते पर विराम लगाया जा सकता है, किंतु यह संगठन इस पर कोई विचार नहीं कर रहा है।

‘ओपेक प्लस’ क्या है?

  • ओपेक प्लस (OPEC+) कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देशों का एक गठबंधन है। यह गठबंधन वर्ष 2017 से तेल बाजारों में की जाने वाली आपूर्ति में सुधार कर रहा है।
  • ओपेक प्लस देशों में अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, रूस, दक्षिण सूडान और सूडान शामिल हैं।

OPEC_1

ओपेक (OPEC) क्या है?

ओपेक (OPECOrganization of the Petroleum Exporting Countries) ‘पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन’ है।

  • इसकी स्थापना, सितंबर, 1960 में आयोजित बगदाद सम्मेलन, इराक में पांच देशों, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर के साथ की गयी थी। ये पांचो देश ओपेक संगठन के संस्थापक सदस्य थे।
  • OPEC एक स्थायी, अंतर-सरकारी संगठन है।
  • इस संगठन का उद्देश्य अपने सदस्य देशों के मध्य पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना तथा उपभोक्ता राष्ट्रों के लिए पेट्रोलियम की सफल, आर्थिक और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु तेल बाज़ारों का स्थिरीकरण सुनिश्चित करना है।
  • इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना शहर में है।
  • पर्याप्त मात्रा में तेल निर्यात करने वाला, तथा संगठन के आदर्शों को साझा करने वाला कोई भी देश OPEC का सदस्य बन सकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. OPEC के संस्थापक सदस्य
  2. शीर्ष तेल उत्पादक
  3. भारत द्वारा कच्चे तेल का आयात
  4. कच्चे तेल के घटक और शोधन
  5. भारत में कच्चे तेल के भंडारण की सुविधा
  6. ओपेक सदस्यों का भौगोलिक अवस्थति
  7. ओपेक और गैर-ओपेक सदस्यों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल का प्रकार

मेंस लिंक:

ओपेक जैसे समूह विश्व भर में तेल की कीमतों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO)


संदर्भ:

हाल ही में आयोजित ‘शंघाई सहयोग संगठन परिषद’ के राष्ट्राध्यक्षों की 20 वीं बैठक में, भारत ने कहा कि परिषद् में द्विपक्षीय मुद्दों को उठाना ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) की भावना के प्रतिकूल है।

संबंधित प्रकरण:

चीन और पाकिस्तान, ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) में द्विपक्षीय मुद्दों को लाने की जानबूझकर कोशिश कर रहे थे। यह SCO चार्टर के सुस्थापित सिद्धांतों और मानदंडों का सरासर उल्लंघन है। इस तरह के कार्य, इस संगठन को परिभाषित करने वाली ‘आम सहमति और सहयोग की भावना’ के प्रतिकूल हैं और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

SCO के बारे में:

‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है।

  • SCO के गठन की घोषणा 15 जून 2001 को शंघाई (चीन) में की गई थी।
  • जून 2002 में, सेंट पीटर्सबर्ग SCO राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के दौरान ‘शंघाई सहयोग संगठन’ के चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए थे, और यह चार्टर 19 सितंबर 2003 को प्रभावी हुआ।
  • SCO का पूर्ववर्ती संगठन ‘शंघाई-5’ था, जिसमे ‘कज़ाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान’ पांच सदस्य थे।
  • SCO की आधिकारिक भाषाएँ, रूसी और चीनी हैं।

शंघाई सहयोग संगठन’ के संस्थापक राष्ट्र-

  1. कजाकिस्तान गणराज्य,
  2. पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना,
  3. किर्गिस्तान गणराज्य,
  4. रूसी संघ,
  5. ताजिकिस्तान गणराज्य,
  6. उज्बेकिस्तान गणराज्य।

पृष्ठभूमि:

SCO की स्थापना से पहले, वर्ष 2001 में कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान, ‘शंघाई फाइव’ समूह के सदस्य थे।

  • ‘शंघाई फाइव’ (1996) की उत्पत्ति, चार पूर्व सोवियत गणराज्यों और चीन के मध्य, सीमाओं पर स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आयोजित सीमा सीमांकन और विसैन्यीकरण वार्ता श्रृंखला से हुई थी।
  • वर्ष 2001 में ‘उज्बेकिस्तान’ के ‘शंघाई फाइव’ संगठन में शामिल होने के बाद इसका नाम बदलकर ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) कर दिया गया।
  • वर्ष 2017 में, भारत और पाकिस्तान को ‘शंघाई सहयोग संगठन’ की सदस्यता प्रदान की गयी।

current affairs

 

SCO के सदस्य देश:

वर्तमान में,  SCO में आठ सदस्य देश शामिल हैं।

  1. कजाकिस्तान
  2. चीन
  3. किर्गिस्तान
  4. रूस
  5. ताजिकिस्तान
  6. उज्बेकिस्तान
  7. भारत
  8. पाकिस्तान

SCO के उद्देश्य:

  • सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और पड़ोसियों को मजबूत करना।
  • राजनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के साथ-साथ शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और अन्य क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना।
  • क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने और सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करना।
  • एक लोकतांत्रिक, निष्पक्ष और तर्कसंगत, नई अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था की स्थापना की ओर बढ़ना।

भारत के लिए ‘शंघाई सहयोग संगठन’ का महत्व:

भारत के लिए ‘शंघाई सहयोग संगठन’ का महत्व, यूरेशियन राज्यों के साथ आर्थिक और भू-राजनीतिक संबंधों में निहित है।

  • ‘शंघाई सहयोग संगठन’, भारत की ‘मध्य एशिया संपर्क नीति’ (Connect Central Asia policy) को आगे बढ़ाने के लिए एक सशक्त मंच है। SCO के सदस्य देश, भारत के पड़ोसी क्षेत्रों की सीमाओं से सटे विशाल भूभाग में अवस्थित है, इन क्षेत्रों से भारत के आर्थिक और सामरिक, दोनों तरह के हित जुड़े हैं।
  • अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए ‘शंघाई सहयोग संगठन-अफगानिस्तान’ संपर्क समूह काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। ‘शंघाई सहयोग संगठन’ की सदस्यता भारत के लिए, कुछ अन्य संगठनों में, जिनका वह सदस्य है, एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करती है।
  • SCO, भारत के लिए अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ से संबंध सुधारने के लिए एकमात्र बहुपक्षीय मंच प्रदान करता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की ‘क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना’ (RATS) की कार्यकारी समिति के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शंघाई फाइव क्या है?
  2. SCO चार्टर कब हस्ताक्षरित किया गया और कब लागू हुआ?
  3. SCO संस्थापक सदस्य।
  4. भारत समूह में कब शामिल हुआ?
  5. SCO के पर्यवेक्षक और वार्ता सहयोगी।
  6. SCO के तहत स्थायी निकाय।
  7. SCO की आधिकारिक भाषाएं।

मेंस लिंक:

शंघाई सहयोग संगठन के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

इंटरपोल


संदर्भ:

हाल ही में, इंटरपोल (Interpol) द्वारा ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (Central Bureau of Investigation – CBI) के विशेष निदेशक ‘प्रवीण सिन्हा’ को अपनी कार्यकारी समिति में, एशिया के लिए एक प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है।

‘इंटरपोल कार्यकारी समिति’ के बारे में:

इंटरपोल की ‘कार्यकारी समिति’ (Executive Committee) में विभिन्न देशों के 13 सदस्य होते हैं; जिनमें  से एक इंटरपोल का अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और नौ प्रतिनिधि सदस्य होते हैं।

  • यह समिति, इंटरपोल महासभा (Interpol General Assembly) के निर्णयों के निष्पादन और इसके मुख्य सचिवालय के प्रशासन और कार्यों का पर्यवेक्षण करती है।
  • ‘कार्यकारी समिति’ की साल में तीन बार बैठकें होती है, जिनमे संगठनात्मक नीति और दिशा निर्धारित की जाती है।

‘इंटरपोल’ क्या है?

‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन’ (International Criminal Police OrganisationInterpol) अथवा ‘इंटरपोल’, 194 सदस्यीय अंतरसरकारी संगठन है।

  • इसका मुख्यालय फ्राँस के ‘लियोन’ (Lyon) शहर में है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1923 में ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस आयोग’ के रूप में की गई थी, और वर्ष 1956 से इसे ‘इंटरपोल’ कहा जाने लगा।
  • भारत वर्ष 1949 में इस संगठन में शामिल हुआ था और इसके सबसे पुराने सदस्यों में से एक है।

इंटरपोल के घोषित वैश्विक पुलिसिंग लक्ष्य:

आतंकवाद का मुकाबला करना, दुनिया भर में सीमाओं की अखंडता को बढ़ावा देना, कमजोर समुदायों की सुरक्षा करना, लोगों और व्यवसायों के लिए एक सुरक्षित साइबर स्पेस प्रदान करना, अवैध बाजारों पर अंकुश लगाना, पर्यावरण सुरक्षा का समर्थन करना और वैश्विक समेकता को बढ़ावा देना।

 

‘इंटरपोल महासभा’ क्या है?

  • ‘इंटरपोल महासभा’ (Interpol General Assembly), इंटरपोल का सर्वोच्च शासी निकाय है, और इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
  • यह कार्रवाईयों और नीतियों पर मतदान करने करने हेतु प्रतिवर्ष बैठक करती है। यह बैठक सत्र लगभग चार दिनों तक जारी रहता है।
  • ‘इंटरपोल महासभा’ में सभी सदस्य देशों के एक या अधिक प्रतिनिधि अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं; ये प्रतिनिधि आम तौर पर, अपने देशों के कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुख होते हैं।
  • ‘महासभा’ अपने शासी निकाय अर्थात ‘इंटरपोल कार्यकारी समिति’ के सदस्यों का चुनाव भी करती है। यह ‘कार्यकारी समिति’, “महासभा’ के सत्रों के बीच इंटरपोल के लिए मार्गदर्शन और दिशा प्रदान करती है”।

 

 इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि इंटरपोल (जो एक गैर-संयुक्त राष्ट्र निकाय है) की तरह, संयुक्त राष्ट्र पुलिस (UNPOL) नाम की एक संस्था भी है। इसी भांति एक अन्य संस्था ‘यूरोपोल’ (Europol) भी है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ कौन होते है?
  2. ‘इंटरपोल’ क्या है?
  3. इंटरपोल द्वारा जारी किये जाने वाले विभिन्न नोटिस
  4. इंटरपोल के अपराध कार्यक्रमों का अवलोकन

मेंस लिंक:

इंटरपोल के महत्व पर चर्चा कीजिए और इसमें किए जाने योग्य सुधारों का सुझाव दीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ग्रीन बांड


(Green bond)

संदर्भ:

देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ ने ‘इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज’ (India INX) और ‘लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज’ (LuxSE) पर एक साथ अपने 650 मिलियन डॉलर के ‘ग्रीन बॉन्ड’ (Green bond) को एक साथ सूचीबद्ध किया है।

यह दोहरा सूचीकरण, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) के अनुसार, इस वर्ष के ‘विश्व निवेशक सप्ताह’ की थीम, ‘संधारणीय वित्त’ (Sustainable Finance) के अनुरूप है।

‘ग्रीन बॉन्ड’ क्या है?

‘ग्रीन बॉन्ड’ (Green Bond), एक प्रकार का ‘निश्चित आय’ उपकरण है, जिसे विशेष रूप से जलवायु और पर्यावरण संबंधित परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए निर्धारित किया जाता है।

  • ये बांड, आम तौर पर किसी परिसंपत्ति से संबद्ध होते हैं, और जारीकर्ता इकाई की बैलेंस शीट द्वारा समर्थित होते हैं, इसलिए इन बांड्स को प्रायः जारीकर्ता के अन्य ऋण दायित्वों के समान ‘क्रेडिट रेटिंग’ दी जाती है।
  • निवेशकों को आकर्षित करने हेतु ‘ग्रीन बांड’ में निवेश करने पर प्रोत्साहन के रूप में ‘करों’ आदि से कुछ छूट के साथ भी जारी किया जाता सकता है।
  • विश्व बैंक, ‘हरित बांड’ / ग्रीन बांड’ जारी करने वाली एक प्रमुख संस्था है। इसके द्वारा वर्ष 2008 से अब तक 164 ‘ग्रीन बांड’ जारी किए गए हैं, जिनकी कीमत संयुक्त रूप से 14.4 बिलियन डॉलर है। ‘क्लाइमेट बॉन्ड इनिशिएटिव’ के अनुसार, वर्ष 2020 में, लगभग 270 बिलियन डॉलर कीमत के ग्रीन बॉन्ड जारी किए गए थे।

‘ग्रीन बॉन्ड’ की कार्य-प्रणाली:

ग्रीन बॉन्ड, किसी भी अन्य कॉरपोरेट बॉन्ड या सरकारी बॉन्ड की तरह ही काम करते हैं।

  • ऋणकर्ताओं द्वारा इन प्रतिभूतियों को, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली या प्रदूषण को कम करने जैसे ‘सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव’ डालने वाली परियोजनाओं के ‘वित्तपोषण’ को सुरक्षित करने के लिए जारी किया जाता है।
  • इन बांडों को खरीदने वाले निवेशक, इनके परिपक्व होने या अवधि पूरी होने पर, उचित लाभ अर्जित करने की उम्मीद कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, ग्रीन बॉन्ड में निवेश करने पर अक्सर ‘कर’ संबंधी लाभ भी प्राप्त होते हैं।

ग्रीन बॉन्ड बनाम ब्लू बॉन्ड:

‘ब्लू बॉन्ड’ (Blue Bonds), समुद्र और संबंधित पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा हेतु परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए जारी किए जाने वाले ‘संधारणीयता बांड’ होते हैं।

  • यह बांड, संवहनीय मत्स्य पालन, प्रवाल भित्तियों और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा, अथवा प्रदूषण और अम्लीकरण को कम करने वाली परियोजनाओं के लिए जारी किए जा सकते हैं।
  • सभी ब्लू बॉन्ड, ‘ग्रीन बॉन्ड’ होते हैं, लेकिन सभी ‘ग्रीन बॉन्ड’, ब्लू बॉन्ड नहीं होते हैं।

‘ग्रीन बांड बनाम जलवायु बांड’

“ग्रीन बॉन्ड्स” और “क्लाइमेट बॉन्ड्स” को कभी-कभी एक-दूसरे के पर्यायवाची की तरह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ‘क्लाइमेट बॉन्ड्स’ शब्द को कुछ अधिकारी, विशेष रूप से कार्बन उत्सर्जन को कम करने या जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने पर केंद्रित परियोजनाओं के लिए उपयोग करते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रीन बांड’ के बारे में
  2. कार्य-प्रणाली
  3. विशेषताएं
  4. ये ब्लू बांड से किस प्रकार भिन्न होते हैं।

मेंस लिंक:

ग्रीन बॉन्ड के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों’ के लिए मसौदा नियम


संदर्भ:

हाल ही में, ‘भारतीय खाद्य संरक्षा एवं सुरक्षा मानक प्राधिकरण’ (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) द्वारा ‘आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों’ (Genetically Modified foods – GM foods) के लिए मसौदा नियम जारी किए गए हैं।

मसौदे का अवलोकन:

  1. बगैर पूर्वानुमोदन के कोई भी ‘आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों’ (GMOs) से प्राप्त किसी भी खाद्य उत्पाद या खाद्य सामग्री का निर्माण या बिक्री नहीं कर सकता है।
  2. मसौदे में कुछ विशेष मानदंडों को निर्दिष्ट किया गया है, जिनका ‘प्रयोगशालाओं’ के लिए ‘जीएम खाद्य पदार्थों’ के परीक्षण हेतु, पालन करना अनिवार्य होगा।
  3. प्रस्तावित नियम “भोजन के रूप में अथवा प्रसंस्करण हेतु सीधे उपयोग के लिए अभिप्रेत, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) या आनुवंशिक रूप से तैयार किए गए जीवों (GEOs) या ‘जीवित संशोधित जीवों’ (LMOs) पर लागू होंगे।”
  4. विनियमों के दायरे में, GMO से प्राप्त खाद्य सामग्री या प्रसंस्करण का उपयोग करके तैयार किए गए सभी खाद्य उत्पाद शामिल होंगे, भले ही अंतिम उत्पाद में कोई भी जीएम सामग्री मौजूद न हो।
  5. शिशु खाद्य उत्पादों में, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) या आनुवंशिक रूप से तैयार किए गए जीवों (GEOs) का “एक घटक के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा”।
  6. मसौदे में, जीएमओ सामग्री की एक प्रतिशत या इससे अधिक मात्रा रखने वाले खाद्य उत्पादों के लिए ‘लेबलिंग मानदंडों’ (labelling norms) का भी प्रावधान किया गया है।

भारत में GMO विनियमन:

  • आयातित उपभोग्य सामग्रियों में GMO के स्तर को विनियमित करने का कार्य शुरू में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (Genetic Engineering Appraisal Committee- GEAC) द्वारा किया जाता था।
  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के लागू होने के बाद इसकी भूमिका को कम कर दिया गया तथा इसके स्थान पर FSSAI को आयातित सामग्रियों को मंज़ूरी प्रदान करने के लिये कहा गया।

‘आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव’ (ट्रांसजेनिक जीव) क्या हैं?

आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) में, जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके आनुवंशिक सामग्री (DNA) को परवर्तित किया जाता है या कृत्रिम रूप से किसी अन्य जीवाणु को प्रविष्ट कराया जाता है।

  • आनुवंशिक संशोधन प्रकिया में जीनों का उत्परिवर्तन, अंतर्वेशन या विलोपन शामिल होते है।
  • अंतर्वेशित किए जाने वाले जीन, आमतौर पर किसी अन्य जीवाणु से लिए जाते हैं (जैसे बीटी कपास (Bt Cotton) में, बेसिलस थुरिंगिनेसिस (Bacillus thuringiensis- Bt) जीवाणु से जीन को अंतर्वेशित किया जाता है)।
  • किसी प्रजाति में आनुवंशिक संशोधन, प्रजाति में प्राकृतिक रूप से अनुपस्थित, एक वांछनीय नई विशेषता को उत्प्रेरित करने के लिए किया जाता है।

जीएम तकनीकों का उपयोग:

  1. जैविक एवं चिकित्सीय अनुसंधान,
  2. फार्मास्यूटिकल दवाओं का उत्पादन,
  3. प्रायोगिक चिकित्सा (जैसे जीन थेरेपी),
  4. कृषि (जैसे स्वर्ण चावल, बीटी कपास आदि),
  5. आनुवंशिक रूप से संशोधित बैक्टीरिया से प्रोटीन इंसुलिन का उत्पादन करने हेतु,
  6. जीएम बैक्टीरिया आदि से जैव ईंधन का उत्पादन करने हेतु।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. GM फसलें क्या हैं?
  2. GMOs क्या हैं?
  3. GEAC के बारे में।
  4. जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना प्रोटोकॉल के बारे में।

स्रोत: डाउन टू अर्थ।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मनरेगा योजना हेतु अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपए का आवंटन


संदर्भ:

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) योजना के लिए केंद्रीय बजट में आवंटित राशि समाप्त हो जाने के बाद, वित्त मंत्रालय द्वारा ‘मनरेगा’ (MGNREGS) के लिए अंतरिम उपाय के रूप में ₹ 10,000 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि आवंटित की गयी है।

आवश्यकता:

सरकार के अपने वित्तीय विवरण (financial statement) के अनुसार, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) योजना के लिए राशि, चालू वित्त वर्ष के बीच में ही समाप्त हो गयी है, और योजना को इस संकट से निकालने के लिए ‘अनुपूरक बजटीय आवंटन’ अगला संसदीय सत्र शुरू होने से पहले नहीं किया जा सकता। अगला संसदीय सत्र शुरू होने में अभी कम से कम एक महीने का समय है।

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निहितार्थ:

  • इसका मतलब यह है, कि मौजूदा परिस्थिति में यदि राज्यों द्वारा योजना के लिए राशि जारी नहीं की जाती है, तो मनरेगा श्रमिकों के भुगतान और प्रयुक्त सामग्री की लागत में देरी होगी।
  • कार्यकर्ताओं का कहना है, कि केंद्र सरकार, आर्थिक संकट के समय मजदूरी भुगतान में देरी करके श्रमिकों को “जबरन श्रम” करने के हालात में धकेल रही है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) के बारे में:

  • मनरेगा (MGNREGA) को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में एक सामाजिक उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया था। जिसके अंतर्गत ‘काम करने के अधिकार’ (Right to Work) की गारंटी प्रदान की जाती है।
  • इस सामाजिक उपाय और श्रम कानून का मुख्य सिद्धांत यह है, कि स्थानीय सरकार को ग्रामीण भारत में न्यूनतम 100 दिनों का वैतनिक रोजगार प्रदान करना होगा ताकि ग्रामीण श्रमिकों के जीवन स्तर में वृद्धि की जा सके।

मनरेगा कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य:

  1. मनरेगा कार्यक्रम के तहत प्रत्येक परिवार के अकुशल श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों के लिये न्यूनतम 100 दिन का वैतनिक रोजगार।
  2. ग्रामीण निर्धनों की आजीविका के आधार को सशक्त करके सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करना।
  3. कुओं, तालाबों, सड़कों और नहरों जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थाई परिसंपत्ति का निर्माण करना।
  1. ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले शहरी प्रवासन को कम करना।
  2. अप्रशिक्षित ग्रामीण श्रम का उपयोग करके ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण करना।

मनरेगा योजना के तहत लाभ प्राप्त करने हेतु पात्रता मानदंड:

  1. मनरेगा योजना का लाभ लेने के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए।
  2. कार्य हेतु आवेदन करने के लिए व्यक्ति की आयु 18 वर्ष अथवा इससे अधिक होनी चाहिए।
  3. आवेदक के लिए किसी स्थानीय परिवार का हिस्सा होना चाहिए (अर्थात, आवेदन स्थानीय ग्राम पंचायत के माध्यम से किया जाना चाहिए)।
  4. आवेदक को स्वेच्छा से अकुशल श्रम के लिए तैयार होना चाहिए।

योजना का कार्यान्वयन:

  1. आवेदन जमा करने के 15 दिनों के भीतर या जिस दिन से काम की मांग होती है, उस दिन से आवेदक को वैतनिक रोजगार प्रदान किया जाएगा।
  2. रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में, आवेदन जमा करने के पंद्रह दिनों के भीतर या काम की मांग करने की तिथि से बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार होगा।
  3. मनरेगा के कार्यों का सामाजिक लेखा-परीक्षण (Social Audit) अनिवार्य है, जिससे कार्यक्रम में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  4. मजदूरी की मांग करने हेतु अपनी आवाज उठाने और शिकायतें दर्ज कराने के लिए ‘ग्राम सभा’ इसका प्रमुख मंच है।
  5. मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों को मंजूरी देने और उनकी प्राथमिकता तय करने का दायित्व ‘ग्राम सभा’ और ‘ग्राम पंचायत’ का होता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप वेतन-विभेद (WAGE RIFT) के बारे में जानते हैं? वेतन से संबंधित विषय के बारे में जानकारी हेतु पढ़िए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मनरेगा के तहत ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, राज्यों, राज्य खाद्य आयोग, केंद्र की भूमिकाएँ क्या हैं?
  2. जॉब कार्ड क्या हैं, इन्हें कौन जारी करता है?
  3. ‘राज्य रोजगार गारंटी कोष’ की स्थापना कौन करता है?
  4. वैतनिक रोजगार क्या होता है?
  5. सामाजिक लेखा परीक्षण (सोशल ऑडिट) किसके द्वारा किया जाता है?

मेंस लिंक:

मनरेगा की प्रमुख विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


इंग्लिश चैनल

‘इंग्लिश चैनल’ (English Channel), अटलांटिक महासागर का एक भाग है।

  • यह द्वीपीय ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा) को उत्तरी फ्रांस से अलग करता है, और उत्तरी सागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ता है।
  • इसकी लंबाई लगभग 350 मील है, और यह ‘डोवर जलडमरूमध्य’ में सर्वाधिक संकरा है।

 

निचली सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना

सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना (Subansiri Lower Hydroelectric Project – SLHEP), असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा के साथ बहने वाली ‘सुबनसिरी नदी’ पर एक निर्माणाधीन ‘गुरुत्व बांध’ (Gravity Dam) है।

  • सुबनसिरी नदी (स्वर्ण नदी) तिब्बत पठार से निकलती है तथा अरुणाचल प्रदेश में मिरी पहाड़ियों से होकर भारत में प्रवेश करती है।
  • यह ब्रह्मपुत्र नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
  • यह परियोजना राज्य द्वारा संचालित ‘राष्ट्रीय जल विद्युत निगम’ (NHPC) द्वारा विकसित की जा रही है।
  • परियोजना पूरी होने के बाद, यह भारत का अकेला सबसे बड़ा जलविद्युत संयंत्र होगा। इस परियोजना के 2023 में पूरा होने की उम्मीद है।

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