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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 November 2021

 

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययनI

1. डेलाइट सेविंग टाइम

2. अटलांटिक चार्टर

3. दिल्ली मास्टर प्लान 2041: प्रमुख क्षेत्र और चुनौतियाँ

 

सामान्य अध्ययनII

1. मंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव

2. एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग

 

सामान्य अध्ययनIII

1. क्रिप्टोकरेंसी पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की चेतावनी

2. कॉर्ड ब्लड बैंकिंग

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. पक्के टाइगर रिजर्व

2. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान।

डेलाइट सेविंग टाइम


संदर्भ:

इस सप्ताह ‘दिवालोक बचत समय’ अर्थात ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ (Daylight saving time) चर्चा का विषय रहा। पिछले सप्ताहंत से, संयुक्त राज्य अमेरिका में ‘मानक समय’ (Standard Time) लागू हो गया है, जिससे लोगों को अपनी घड़ियों को एक घंटा पीछे करना पड़ा और इससे उन्हें नीद के लिए एक घंटे का और समय मिलेगा।

‘डेलाइट सेविंग टाइम’ क्या है?

दिवालोक बचत समय (डेलाइट सेविंग टाइम – Daylight Saving Time – DST) को ग्रीष्मसमय (Summer Time) भी कहा जाता है। DST, गर्मियों के महीनों के दौरान घड़ियों को ‘मानक समय’ (Standard Time) से एक घंटे आगे करने की प्रक्रिया है ताकि दिन की अवधि का बेहतर उपयोग किया जा सके।

  • इस प्रणाली का सुझाव पहली बार बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा 1784 में एक मनमौजी से निबंध में दिया गया था।
  • उत्तरी गोलार्ध में स्थित देशों में, दिन के उजाले का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से, मार्च के अंत में या अप्रैल में घड़ियों को आमतौर पर मानक समय से एक घंटे आगे सेट कर दिया जाता है, और सितंबर के अंत या अक्टूबर में घड़ियों को फिर से एक घंटा पीछे सेट कर दिया जाता है।

डेलाइट सेविंग टाइम (DST) उपयोग करने के उद्देश्य:

  • ऊर्जा दक्षता हासिल करना: ऊर्जा की अधिक खपत की वजह से होने वाले जलवायु परिवर्तन के कारण ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) पर अधिक ध्यान दिया जाना, ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ (DST) को प्रासंगिक बनाता है। इस प्रकार, DST पर्यावरण की दृष्टि से संधारणीय अवधारणा है।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त को घड़ियों में देरी से दिखाए जाने को सुनिश्चित करना – वस्तुतः दिन का लंबा समय सुनिश्चित करता है।
  • दिन-प्रतिदिन के सामान्य कार्यों को एक घंटे पहले पूरा करना।
  • डेलाइट सेविंग टाइम (DST), का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा बचत करना है।

संबंधित मुद्दे और चिंताएं:

  • कृषि संबंधी चिंताएं: किसानों द्वारा ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ (DST) का विरोध किया जाता है, इसका एक कारण यह है, कि ओस के वाष्पित होने के बाद अनाज की कटाई सबसे अच्छी होती है, इसलिए जब गर्मियों में खेतों में काम करने वाले श्रमिक जल्दी आते हैं और जल्दी चले जाते हैं, जिससे उनके श्रम का उचित उपयोग नहीं हो पाता है।
  • ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ की वजह से ‘डेयरी किसान’ भी चिंतित होते हैं, क्योंकि उनकी गायें दूध देने के समय के प्रति संवेदनशील होती हैं, इसलिए ग्राहकों को पहले दूध देने की बाध्यता से उनका सिस्टम बाधित हो जाता है।
  • कार्यस्थल पर लगने वाली चोटों में वृद्धि: पूरे अमेरिका में खनन-कार्यो के दौरान लगने वाली चोटों के एक अध्ययन में पाया गया है, कि सोमवार को ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ में बदलाव के बाद कार्यस्थल पर लगने वाली चोटों में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
  • श्रम और कार्य उत्पादकता पर असर: डीएसटी के एक सप्ताह बाद कार्यस्थल पर उत्पादकता में भारी कमी आती है। नींद में कमी के कारण लोग थके हुए और सुस्त होते हैं।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि भारत में ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ प्रणाली का उपयोग नहीं किया जाता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि भूमध्य रेखा के पास के देशों में ‘विभिन्न मौसमों’ के बीच दिन के घंटों में अधिक भिन्नता का अनुभव नहीं होता है।

क्या भारत में दो समय-क्षेत्र (टाइम-जोन) होने चाहिए?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ के बारे में।
  2. विशेषताएं।
  3. इस प्रणाली का उपयोग करने वाले देश।
  4. ‘भारतीय मानक समय’ क्या है?

मेंस लिंक:

‘डेलाइट सेविंग टाइम’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: विश्व के इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनःसीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव।

अटलांटिक चार्टर


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी वायु सेना के ब्रिगेडियर जनरल रॉबर्ट स्पाल्डिंग (Robert Spalding) द्वारा एक ‘डिजिटल अटलांटिक चार्टर पहल’ (Digital Atlantic Charter initiative) शुरू किए जाने की घोषणा की गयी है। यह पहल, विश्व के लोकतंत्रों की सुरक्षा पर केंद्रित एक सार्वजनिक-निजी प्रयास है।

पहल के बारे में:

यह पहल, अटलांटिक चार्टर (Atlantic Charter) की भावना में, तथा ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य हाल ही में हुए AUKUS त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन के पश्चात् शुरू की गयी है।

  • ‘डिजिटल अटलांटिक चार्टर पहल’ के तहत विश्व के हर क्षेत्र में अवस्थित, अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे देशों को सहयोग एवं समर्थन प्रदान किया जाएगा।
  • यह पहल, सरकारी एजेंसियों और वाणिज्यिक संस्थाओं को डिजिटल सत्तावाद का मुकाबला करने में सहयोग करने हेतु नीतिगत परामर्श, निवेश संवाहक और प्रौद्योगिकी विकास मंच प्रदान करती है।

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, अगस्त 1941 में ब्रिटिश प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल और अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणापत्र – जिसे ‘अटलांटिक चार्टर’ कहा जाता है-  से संबंधित दस्तावेजों का अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने निरीक्षण किया गया था।

दोनों नेताओं की ‘लोकतंत्र और खुले समाज के सिद्धांतों, मूल्यों और संस्थानों की रक्षा’ का संकल्प लेते हुए एक नए अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर करने की योजना है।

‘अटलांटिक चार्टर’ के बारे में:

अटलांटिक चार्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के दौरान जारी एक संयुक्त घोषणापत्र था, जिसमे युद्ध के पश्चात् विश्व के लिए एक दृष्टिकोण निर्धारित किया गया था।

  • इस घोषणापत्र को सर्वप्रथम 14 अगस्त 1941 को जारी किया गया था, बाद में इस पर 26 मित्र राष्ट्रों द्वारा जनवरी 1942 तक अपना समर्थन देने का वादा किया गया।
  • किसी राष्ट्र को अपनी सरकार चुनने का अधिकार, व्यापार प्रतिबंधों में ढील और युद्ध के पश्चात् निरस्त्रीकरण का अधिवचन, इसके प्रमुख बिंदुओं में शामिल थे
  • इस दस्तावेज़ को 1945 में गठित संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

अटलांटिक चार्टर में शामिल प्रमुख बिंदु:

  • अटलांटिक चार्टर में आठ सामूहिक सिद्धांत शामिल किए गए थे।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन द्वार विश्व-युद्ध से कोई भी क्षेत्रीय लाभ नहीं उठाने पर सहमति व्यक्त की गई, और उन्होंने संबंधित नागरिकों की इच्छा के विरुद्ध किए जाने वाले किसी भी क्षेत्रीय परिवर्तन का विरोध किया।
  • जिन राष्ट्रों पर युद्ध के दौरान दूसरे देशों के कब्ज़ा हो गया था, या उनकी सरकार गिर गई थी, उनके लिए, अपनी सरकार बनाने के लिए सहायता करना।
  • नागरिकों को अपनी खुद की सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप केलॉग-ब्रियाँ समझौता (Kellogg-Briand Pact) के बारे में जानते हैं?

आप, उपरोक्त संदर्भ का उपयोग, शांति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से संबंधित प्रश्नों के लिए भी कर सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षरकर्ता
  2. घटक
  3. द्वतीय विश्व युद्ध- कारण और परिणाम

मेंस लिंक:

अटलांटिक चार्टर के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

 दिल्ली मास्टर प्लान 2041: प्रमुख क्षेत्र और चुनौतियाँ


संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली विकास प्राधिकरण ने ‘दिल्ली के लिए मास्टर प्लान-2041’ (Master Plan for Delhi 2041) के मसौदे पर आपत्ति और सुझाव भेजने की अंतिम तिथि को 24 नवंबर तक बढ़ा दिया है।

  • इस मास्टर प्लान के मसौदे को, इसी वर्ष जून में सार्वजनिक किया गया था और आम नागरिकों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए थे।
  • आपत्ति और सुझाव की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, ‘भू-स्वामी एजेंसी’ (land-owning agency) के लिए योजना को अंतिम रूप देने और अधिसूचित करने में दो से तीन महीने का समय लगेगा।

सबसे पहले, यह मास्टर प्लान’ क्या होता है?

किसी भी शहर का मास्टर प्लान, शहर के योजनाकारों और इसकी जमीन पर स्वामित्व रखने वाली एजेंसीज के परिकल्पना दस्तावेज (Vision Document) की भांति होता है। यह भविष्य में शहर का विकास करने हेतु एक रूपरेखा होती है। इसमें, जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, आवास, परिवहन, सामुदायिक सुविधाओं और भूमि उपयोग को ध्यान में रखते हुए विश्लेषण, सिफारिशें और प्रस्ताव शामिल होते हैं।

‘दिल्ली मास्टर प्लान- 2041 क्या है?

  1. ‘दिल्ली मास्टर प्लान- 2041’ का उद्देश्य, दिल्ली को वर्ष 2041 तक एक संवहनीय, निवास योग्य और जीवंत बनाने हेतु तैयार करना है।
  2. आवास क्षेत्र: आवास क्षेत्र के लिए इस मसौदे में, बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी को ध्यान में रखते हुए, निजी क्षेत्र और सरकारी एजेंसियों अधिक निवेश करने के लिए आमंत्रित करके, किराए के आवासों को प्रोत्साहित करने की बात की गई है।
  3. उपयोगकर्ता भुगतान’ सिद्धांत (‘User pays’ principle): पार्किंग की समस्याओं को दूर करने के लिए, मसौदे में ‘उपयोगकर्ता भुगतान’ सिद्धांत का सुझाव दिया गया है, जिसका अर्थ है कि गैर-मोटर चालित वाहनों को छोड़कर, सभी निजी मोटर वाहनों के उपयोगकर्ताओं को अधिकृत पार्किंग सुविधाओं, स्थानों और सड़कों के लिए भुगतान करना होगा।
  4. इसका उद्देश्य, सार्वजनिक परिवहन को हरित ईंधन में परिवर्तित करना और आवागमन-उन्मुख विकास (Transit-Oriented Development TOD) के बहु-उपयोग मॉडल को अपनाते हुए, प्रमुख रणनीतियों के माध्यम से वाहनों के प्रदूषण को कम करना है।
  5. मसौदा में यमुना नदी के निकट ‘बफर जोन’ की स्पष्ट सीमा निर्धारित की गई है- शहर में प्रवाहित होने वाली नदी के किनारों पर, जहां भी संभव हो, 300 मीटर की चौड़ाई का ‘बफर जोन’ बनाया जाएगा।

महामारी के मद्देनजर प्रस्तावित बदलाव:

  • इसका उद्देश्य आपात स्थिति के दौरान, आश्रय स्थल, सामूहिक रसोई और संगरोध हेतु स्थान (Quarantine Space) उपलब्ध कराने हेतु सामूहिक सामुदायिक स्थलों को विकसित करना है।
  • रात्री-कालीन अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए, सांस्कृतिक उत्सवों, बसों में मनोरंजन, मेट्रो, खेल सुविधाओं और खुदरा स्टोरों पर केंद्रित योजनाओं को, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की नाइट लाइफ सर्किट योजना में शामिल किया गया है।
  • इसमें, यांत्रिक वातायन-व्यवस्था (mechanical ventilation systems) पर निर्भरता कम करने हेतु, विकेन्द्रीकृत कार्यक्षेत्रों, अनिवार्यतः खुले क्षेत्रों का निर्माण, बेहतर आवास योजनाएं और हरित-प्रमाणिक  विकास के माध्यम से, वायुवाहित महामारी (airborne epidemics) के प्रति संवेदनशीलता कम करने का भी प्रस्ताव किया गया है।

कार्यान्वयन में चुनौतियां:

  1. राजनीतिक दलों से टकराव
  2. संसाधनों और धन की कमी
  3. विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार
  4. राजनीतिक और नौकरशाही इच्छाशक्ति की कमी और एजेंसियों की अधिकता

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘न्यू अर्बन एजेंडा’ औपचारिक रूप से 20 अक्टूबर 2016 को आयोजित ‘हाउसिंग एंड सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ में राष्ट्रीय सरकारों द्वारा अपनाया गया था, जिसे आमतौर पर पर्यावास III  (Habitat III) के रूप में जाना जाता है। यह समझौता क्या है?

प्रीलिम्स लिंक और मेंस लिंक:

मास्टर प्लान के घटक और महत्व।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

मंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव


संदर्भ:

राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक (Chief Whip) जयराम रमेश द्वारा, पूर्व सांसद तरुण विजय की ‘राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण’ (National Monuments Authority – NMA) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति को लेकर संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी के खिलाफ एक ‘विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’ (Privilege Motion) पेश किया है। जयराम रमेश का कहना है, कि ‘तरुण विजय’ इस पद पर नियुक्त होने के लिए अर्ह नहीं है।

संबंधित प्रकरण:

प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (संशोधन और सत्यापन) अधिनियम, 2010 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains (Amendment and Validation) Act, 2010) के अनुसार, ‘राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण’ (NMA) के अध्यक्ष के रूप नियुक्त किए जाने वाले व्यक्ति के पास “पुरातत्व, देश और नगर नियोजन, वास्तुकला, विरासत, संरक्षण वास्तुकला या कानून के क्षेत्र में सिद्ध अनुभव और विशेषज्ञता होना अनिवार्य है।”

इसके बाद भी, सरकार द्वारा अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किए गए व्यक्ति की शैक्षिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि, मार्च 2010 में संसद द्वारा पारित कानून के तहत निर्धारित अहर्ताओं को पूरा नहीं करती है।

संसदीय विशेषाधिकार’ क्या होते हैं?

संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privileges), संसद सदस्यों को, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, प्राप्त कुछ अधिकार और उन्मुक्तियां होते हैं, ताकि वे “अपने कार्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन” कर सकें।

  1. संविधान के अनुच्छेद 105 में स्पष्ट रूप से दो विशेषाधिकारों का उल्लेख किया गया है। ये हैं: संसद में वाक्-स्वतंत्रता और इसकी कार्यवाही के प्रकाशन का अधिकार।
  2. संविधान में विनिर्दिष्ट विशेषाधिकारों के अतिरिक्त, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में सदन या उसकी समिति की बैठक के दौरान तथा इसके आरंभ होने से चालीस दिन पूर्व और इसकी समाप्ति के चालीस दिन पश्चात तक सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत सदस्यों की गिरफ्तारी और उन्हें निरुद्ध किए जाने से स्वतंत्रता का उपबंध किया गया है।

 

विशेषाधिकार हनन के खिलाफ प्रस्ताव:

  • सांसदों को प्राप्त किसी भी अधिकार और उन्मुक्ति की अवहेलना करने पर, इस अपराध को विशेषाधिकार हनन कहा जाता है, और यह संसद के कानून के तहत दंडनीय होता है।
  • किसी भी सदन के किसी भी सदस्य द्वारा विशेषाधिकार हनन के दोषी व्यक्ति के खिलाफ एक प्रस्ताव के रूप में एक सूचना प्रस्तुत की जा सकती है।

लोकसभा अध्यक्ष / राज्य सभा अध्यक्ष की भूमिका:

विशेषाधिकार प्रस्ताव की जांच के लिए, लोकसभा अध्यक्ष / राज्य सभा अध्यक्ष, पहला स्तर होता है।

  • लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा अध्यक्ष, विशेषाधिकार प्रस्ताव पर स्वयं निर्णय ले सकते हैं या इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के लिए संदर्भित कर सकते हैं।
  • यदि लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा अध्यक्ष, संगत नियमों के तहत प्रस्ताव पर सहमति देते हैं, तो संबंधित सदस्य को प्रस्ताव के संदर्भ में एक संक्षिप्त वक्तव्य देने का अवसर दिया जाता है।

प्रयोज्यता:

  • संविधान में, संसद के किसी सदन या उसकी किसी समिति की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने के हकदार सभी व्यक्तियों के लिए संसदीय विशेषाधिकार प्रदान किए गए है। इन सदस्यों में भारत के महान्यायवादी और केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं।
  • हालांकि, संसद का अभिन्न अंग होने बावजूद, राष्ट्रपति को संसदीय विशेषाधिकार प्राप्त नहीं होते हैं। राष्ट्रपति के लिए संविधान के अनुच्छेद 361 में विशेषाधिकारों का प्रावधान किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या ‘संसदीय विशेषाधिकारों’ को किसी कानून के तहत परिभाषित किया गया हैं? इस बारे में जानकारी हेतु पढ़िए

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संविधान के कौन से प्रावधान विधायिका के विशेषाधिकारों की रक्षा करते हैं?
  2. विधायिका के विशेषाधिकार के कथित उल्लंघन के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है?
  3. संसद और राज्य विधानमंडलों में विशेषाधिकार समितियों की संरचना और कार्य
  4. विधायिका के विशेषाधिकार हनन का दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के लिए क्या सजा है?
  5. क्या राज्य विधानसभाओं के विशेषाधिकार हनन से जुड़े मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकते हैं?

मेंस लिंक:

विधायिका के विशेषाधिकारों से आप क्या समझते हैं? भारत में समय-समय पर देखी जाने वाली विधायिका विशेषाधिकारों की समस्या पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग


संदर्भ:

इस वर्ष के ‘एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग’ (Asia-Pacific Economic Cooperation – APEC) मंच की मेजबानी ‘न्यूजीलैंड’ कर रहा है।

  • कोरोनावायरस के निरंतर प्रकोप और संबंधित यात्रा प्रतिबंधों की वजह से इस सम्मलेन को लगातार दूसरे वर्ष भी आभासी प्रारूप में आयोजित किया जा रहा है।
  • सम्मलेन में, हमेशा की तरह, ‘एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग’ (APEC) के 21 सदस्य ऐसे क्षेत्रों की तलाश करेंगे, जहां सदस्य लंबे समय से चल रहे विवादों को निपटाने की कोशिश करने के बजाय, व्यापार और आर्थिक विकास में बाधाओं को कम करने में सहयोग कर सकें।

एपेक (APEC):

एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC), वर्ष 1989 में स्थापित एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देशों के मध्य बढ़ती हुई परस्पर निर्भरता का लाभ उठाने के लिए एक क्षेत्रीय आर्थिक मंच है।

उद्देश्य: संतुलित, समावेशी, सतत, अभिनव और सुरक्षित विकास को बढ़ावा देकर और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण में तीव्रता लाकर क्षेत्र के लोगों को समृद्ध करना।

कार्य:

  1. APEC एशिया-प्रशांत के सभी निवासियों के लिए वृद्धिशील अर्थव्यवस्था में भागेदारी हेतु सहायता प्रदान करने का कार्य करता है।
  2. विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से APEC द्वारा ग्रामीण समुदायों को डिजिटल कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता हैं और स्थानीय महिलाओं को बाहरी देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करने में सहायता प्रदान की जाती है।
  3. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को पहचानते हुए, APEC सदस्यों द्वारा ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और वन एवं समुद्री संसाधनों के स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु पहलें की जाती हैं।
  4. यह मंच सदस्य देशों के लिए क्षेत्र की आर्थिक भलाई हेतु महत्वपूर्ण चुनौतियों से निपटने की अनुमति प्रदान करता है। इसमें आपदा रोधी अवसंरचना का निर्माण, महामारियों से निपटने हेतु योजना निर्माण और आतंकवाद की समस्या का समाधान करना सम्मिलित हैं।

एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) के सदस्य:

APEC में 21 राष्ट्र सम्मिलित हैं: ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई दारुस्सलाम, कनाडा, चिली, चीनी जनवादी गणराज्य, हांगकांग- चीन, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया गणराज्य, मलेशिया, मेक्सिको, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, फिलीपींस, रूसी संघ, सिंगापुर, चीनी-ताइपेई, थाईलैंड, संयुक्त राज्य अमरीका, वियतनाम।

महत्व:

कुल मिलाकर, APEC के सदस्य देशों की संयुक्त आबादी लगभग 3 बिलियन है, और यह समूह का विश्व के ‘सकल घरेलू उत्पाद’ में लगभग 60% का योगदान हैं। APEC समूह के देश प्रशांत महासागर परिवृत्त, चिली से रूस तक, थाईलैंड से ऑस्ट्रेलिया तक विस्तारित हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. APEC सदस्यों की भौगोलिक अवस्थिति
  2. क्षेत्रीय समूह, जिनमे भारत की सदस्यता नहीं है?

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

क्रिप्टोकरेंसी पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की चेतावनी


संदर्भ:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) शक्तिकांत दास ने डिजिटल मुद्रा के संभावित नुकसान पर निवेशकों को आगाह करते हुए क्रिप्टोकरेंसी को लेकर खतरे का संकेत दिया है।

व्यक्त की गई चिंताएं: वृहद आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के दृष्टिकोण से क्रिप्टोकरेंसी एक बहुत ही गंभीर चिंता का विषय है।

पृष्ठभूमि:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरबीआई के आदेश को पलटने के बाद, भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने का उन्माद एक उग्र दर से बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने भारत में क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से हटा दिया था।

भारतीय निवेशकों, विशेषकर खुदरा निवेशकों में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर उन्माद की स्थिति बनी हुई है।

 

अब तक सरकार की प्रतिक्रिया:

  • केंद्र सरकार द्वारा अभी तक क्रिप्टोकरेंसी पर कानून नहीं बनाया गया है, और सरकार इस उद्योग से संबंधित विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है, और  विभिन्न अधिकारियों और मंत्रियों से टिप्पणियों की मांग की गयी है।
  • कई बार चेतावनी दिए जाने के पश्चात्, सरकार द्वारा व्यापक जनहित में, भारत में क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार पर गंभीर सीमाएं निर्धारित की जा सकती है।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी की वर्तमान स्थिति:

  • क्रिप्टोकरेंसी मामले पर गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा, भारत में राज्य द्वारा जारी किसी भी आभासी मुद्राओं को छोड़कर, सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित किए जाने की सिफारिश की गयी है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी बाजार में कारोबार की जाने वाली क्रिप्टोकरेंसी पर चिंता जताई है और इस बारे में केंद्र के लिए अवगत कराया है।
  • मार्च 2020 में वापस, सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को आरबीआई द्वारा वर्ष 2018 में जारी सर्कुलर की उपेक्षा करते हुए क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित सेवाओं को बहाल करने की अनुमति दी थी। आरबीआई द्वारा क्रिप्टोकरेंसी को (“अनुरूपता” के आधार पर) प्रतिबंधित कर दिया था।

‘क्रिप्टोकरेंसी’ क्या हैं?

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrencies) एक प्रक्रार की डिजिटल करेंसी होती है, जो क्रिप्टोग्राफी के नियमों के आधार पर संचालित और बनाई जाती है। क्रिप्टोग्राफी का अर्थ को कोडिंग की भाषा को सुलझाने की कला है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम होता है, जिसमे ‘किसी वित्तीय संस्था के बगैर एक पार्टी द्वारा दूसरी पार्टी को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है ।

उदाहरण: बिटकॉइन, एथेरियम (Ethereum)आदि।

 

आरबीआई द्वारा क्रिप्टोकरेंसी का विरोध किए जाने के कारण:

  1. संप्रभु प्रत्याभूत (Sovereign guarantee): क्रिप्टोकरेंसी उपभोक्ताओं के लिए जोखिम उत्पन्न करती है। इनके पास कोई सॉवरेन गारंटी / संप्रभु प्रत्याभूत नहीं होता है और इसलिए ये वैध मुद्रा नहीं होती हैं।
  2. बाजार में उतार-चढ़ाव (Market volatility): इनकी प्रत्याशित प्रकृति भी इन्हें अत्यधिक अस्थिर बनाती है। उदाहरण के लिए, बिटकॉइन का मूल्य दिसंबर 2017 में 20,000 अमेरिकी डॉलर से गिरकर नवंबर 2018 में 3,800 अमेरिकी डॉलर हो गया।
  3. सुरक्षा जोखिम: यदि किसी प्रकार से उपयोगकर्ता की अपनी निजी कुंजी खो जाती है (पारंपरिक डिजिटल बैंकिंग खातों के विपरीत, इसे पासवर्ड रीसेट नहीं किया जा सकता है) तो उपयोगकर्ता अपनी क्रिप्टोकरेंसी तक पहुंच खो देता है।
  4. मैलवेयर संबंधी धमकी: कुछ मामलों में, इन निजी कुंजियों को तकनीकी सेवा प्रदाताओं (क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज या वॉलेट) द्वारा संग्रहीत किया जाता है, जो मैलवेयर या हैकिंग के प्रति संवेदनशील होते हैं।
  5. मनी लॉन्ड्रिंग।

एस सी गर्ग समिति की सिफारिशें (2019):

  1. किसी भी रूप में क्रिप्टोकरेंसी का खनन, स्वामित्व, लेन-देन या सौदा करने को प्रतिबंधित किया जाए।
  2. समिति के द्वारा, डिजिटल मुद्रा में विनिमय या व्यापार करने पर एक से 10 साल तक के कारावास का दंड की सिफारिश की गयी थी।
  3. समिति ने, सरकारी खजाने को हुए नुकसान या क्रिप्टोकरेंसी उपयोगकर्ता द्वारा अर्जित किए गए लाभ, जो भी अधिक हो, के तीन गुना तक मौद्रिक दंड का प्रस्ताव किया गया था।
  4. हालांकि, समिति ने सरकार से ‘भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा क्रिप्टोकरेंसी जारी करने की संभवना’ पर अपना दिमाग खुला रखने की सलाह भी दी गयी थी।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘IOTA उलझन’ (IOTA Tangle) के बारे में सुना है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी
  2. विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी
  3. ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

मेंस लिंक:

क्रिप्टोकरेंसी क्या हैं? इसके विनियमन की आवश्यकता कर चर्चा कीजिए।

स्रोत: लाइवमिंट।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

कॉर्ड ब्लड बैंकिंग


(Cord Blood Banking)

संदर्भ:

वर्ष 2016 में ‘कॉर्ड ब्लड बैंकिंग’ (Cord Blood Banking) सर्विसेज मार्केट का मूल्य 1,126 मिलियन डॉलर था, और इसके वर्ष 2017 से 2023 तक 13.8% ‘चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर’ (Compound annual growth rate – CAGR) दर्ज करते हुए 2023 तक 2,772 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए ‘गर्भनाल रक्त’ (Cord Blood) स्टेम कोशिकाओं के उपयोग के लाभों से संबंधित जागरूकता में वृद्धि होने की वजह से सरकारी पहलों में वृद्धि हुई है, जिससे गर्भनाल रक्त बैंकों की संख्या बढ़ी है। इससे गर्भनाल रक्त बैंकिंग सेवाओं (Cord Blood Banking Services) के बाजार विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

गर्भनाल रक्त (Cord Blood) क्या होता है?

गर्भनाल रक्त, जिसे संक्षेप में कॉर्ड ब्लड (Cord Blood) कहा जाता है, जन्म के पश्चात शिशु की गर्भनाल (Umbilical Cord) और अपरा (प्लेसेंटा- Placenta) में बचा हुआ रक्त होता है।

इसमें हेमटोपोइएटिक स्टेम सेल (Hematopoietic Stem Cells) नामक विशेष कोशिकाएं होती हैं जिनका उपयोग कुछ प्रकार के रोगों के उपचार के लिए किया जा सकता है।

‘कॉर्ड ब्लड बैंकिंग’ क्या है?

प्रसव के पश्चात शिशु की गर्भनाल और अपरा (Placenta) में बचे रक्त को भविष्य में चिकित्सकीय इस्तेमाल के लिए एकत्रित करने, क्रायोजेनिक रूप से प्रशीतित (freezing) करने और संग्रहीत करके रखने की प्रक्रिया को कॉर्ड ब्लड बैंकिंग कहा जाता है।

  • वैश्विक स्तर पर, हेमेटोलॉजिकल कैंसर और डिसऑर्डर में हेमटापोएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण हेतु स्रोत के रूप कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के उपयोग की सिफारिश की जाती है।
  • अन्य स्थितियों में, स्टेम कोशिकाओं के स्रोत के रूप में गर्भनाल रक्त के उपयोग की अभी तक अभिपुष्टि नहीं की गयी है।

कॉर्ड ब्लड’ का संभावित उपयोग:

गर्भनाल (Umbilical Cord) द्रव्य में स्टेम कोशिकाएं पायी जाती है।

  • ये स्टेम सेल, कैंसर, एनीमिया जैसे रक्त विकारों और शरीर की रक्षा प्रक्रिया को बाधित करने वाले कुछ प्रतिरक्षा प्रणाली विकारों का इलाज कर सकने में सक्षम होती हैं।
  • गर्भनाल द्रव्य को एकत्रित करना आसान होता है और इसमें अस्थि मज्जा की तुलना में 10 गुना अधिक स्टेम कोशिकाएं होती हैं।
  • कॉर्ड ब्लड की स्टेम कोशिकाएं द्वारा किसी संक्रामक रोग फैलने की संभावना काफी कम होती है।

‘स्टेम सेल बैंकिंग’ सम्बंधित चिंताएँ:

  • पिछले कुछ दशकों में ‘स्टेम सेल बैंकिंग’ की मार्केटिंग का बहुत तेजी से विकास हुआ है, जबकि फिलहाल यह अपने प्रायोगिक चरणों से गुजर रहा है। किंतु, कोशिकाओं को संरक्षित करने के नाम पर कंपनियां पेरेंट्स से अत्यधिक शुल्क वसुलती हैं।
  • यहाँ चिंता का विषय यह है कि, कंपनियां केवल इमोशनल मार्केटिग के जरिए भविष्य के चिकित्सीय उपयोग का वादा करते हुए कई वर्षों तक माता-पिता को कोशिकाओं को बैंक करने के लिए मनाती हैं।
  • चूंकि, कॉर्ड ब्लड का भविष्य में इस्तेमाल का अभी तक कोई भी वैज्ञानिक आधार स्थापित नहीं है, इसलिए यह नैतिक और सामाजिक रूप से दोनों से ही चिंता का विषय है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्टेम सेल क्या हैं?
  2. स्टेम सेल के प्रकार?
  3. उनके लाभ?
  4. स्टेम सेल थेरेपी क्या है?
  5. इस संबंध में विभिन्न परियोजनाएँ।

मेंस लिंक:

कॉर्ड ब्लड क्या होता है? माता-पिता, किस प्रकार स्टेम सेल बैंकिंग कंपनियों द्वारा भावनात्मक विपणन रणनीति का शिकार हो रहे हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


पक्के टाइगर रिजर्व

  • पक्के टाइगर रिजर्व को ‘पाखुई टाइगर रिजर्व’ (Pakhui Tiger Reserve) के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस टाइगर रिजर्व के लिए अपने ‘हॉर्नबिल नेस्ट एडॉप्शन प्रोग्राम’ (Hornbill Nest Adoption Programme) के लिए ‘संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण’ की श्रेणी में भारत जैव विविधता पुरस्कार 2016 प्रदान किया गया था।
  • पक्के टाइगर रिजर्व के पश्चिम और उत्तर में, भरेली या कामेंग नदी और पूर्व में पक्के नदी बहती है।
  • निकटवर्ती अभ्यारण्य: अरुणाचल प्रदेश में पापुम रिजर्व फॉरेस्ट, असम का नामेरी नेशनल पार्क, डोइमारा रिजर्व फॉरेस्ट और ईगलनेस्ट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी।
  • इस क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख बारहमासी नदियाँ नामेरी, खारी और ऊपरी डिकोराई हैं। कामेंग नदी के पश्चिम में सेसा आर्किड अभयारण्य स्थित है।
  • पक्के टाइगर रिजर्व, पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट के अंतर्गत आता है।

current affairs

 

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSS अधिनियम) के तहत स्थापित एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है।

  1. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार FSSAI का प्रशासनिक मंत्रालय है।
  2. किसी भी खाद्य संबंधित व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए, व्यवसाय-स्वामी के लिए FSSAI की अनुमति से एक प्रमाण पत्र और लाइसेंस हासिल करना आवश्यक होता है।

 


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