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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 November 2021

 

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययनI

1. शूरवीर नारी ‘ओंके ओबव्वा’

2. लियोनिड्स उल्का वृष्टि

 

सामान्य अध्ययनII

1. ‘संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS)

2. ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ के लिए जांच हेतु सामान्य सहमति

 

सामान्य अध्ययनIII

1. जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक

2. दिल्ली की यमुना में झाग बनने संबंधी कारण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारत द्वारा नेपाल सेना प्रमुख को जनरल का मानद पद

2. वैश्विक औषधि नीति सूचकांक

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

शूरवीर नारी ‘ओंके ओबव्वा’


संदर्भ:

कर्नाटक सरकार ने इस वर्ष से, हर साल 11 नवंबर को पूरे राज्य में ‘ओंके ओबव्वा जयंती’ (Onake Obavva Jayanti) मनाने का निर्णय लिया है।

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ओंके ओबव्वा’ कौन थी?

ओंके ओबव्वा (Onake Obavva), एक बहादुर योद्धा महिला थीं, जिसने 18वीं शताब्दी में ‘हैदर अली’ की सेना से, अकेले मूसल (कन्नड़ भाषा में ‘ओंके’) के साथ भारत के कर्नाटक राज्य के चित्रदुर्ग में लड़ाई लड़ी थी।

वह चित्रदुर्ग किले की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं। उस समय चित्रदुर्ग शहर पर मदकरी नायक का शासन था।

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उनकी विरासत और प्रासंगिकता:

  • ओबव्वा को कन्नड़ गौरव का प्रतीक माना जाता है और उन्हें कर्नाटक राज्य की अन्य महिला योद्धाओं के साथ सम्मानित किया जाता है।
  • कर्नाटक के लोगों द्वारा, विशेष रूप से चित्रदुर्ग क्षेत्र में ‘ओंके ओबव्वा’ के साहस और तेज सोच की प्रशंसा की जाती है। चित्रदुर्ग में एक स्टेडियम का नामकरण उनके नाम पर किया गया है।
  • ‘ओंके ओबव्वा’ से प्रेरित होकर, वर्ष 2018 में, चित्रदुर्ग पुलिस ने जिले में महिलाओं की सुरक्षा हेतु और उन्हें शिक्षित करने के लिए ‘ओबव्वा पदे’ (Obavva Pade) नामक महिला पुलिस कांस्टेबलों के एक दल का गठन किया था। बाद में इस दल को बैंगलोर में भी शुरू किया गया।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

कर्नाटक की ऐसी कई महिला योद्धा हुई हैं। इनमे से कुछ विशेष उल्लेखनीय महिलाओं में, ‘अब्बक्का रानी’ (तटीय कर्नाटक में उल्लाल की पहली तुलुव रानी, जिन्होंने पुर्तगालियों से लड़ाई की), ‘केलाडी चेन्नम्मा’ (केलाडी साम्राज्य की रानी, जो मुगल सम्राट औरंगजेब के खिलाफ लड़ने के लिए जानी जाती हैं), और ‘कित्तूर चेन्नम्मा’ (कित्तूर की रानी, जो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ 1824 का विद्रोह के लिए जानी जाती हैं) शामिल हैं। इनके बारे में संक्षेप में पढ़िए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान।

 लियोनिड्स उल्का वृष्टि


संदर्भ:

प्रतिवर्ष होने वाली एक आकाशीय परिघटना ‘लियोनिड्स उल्का वृष्टि’ (Leonids Meteor Shower) की शुरुआत हो चुकी है, और इस वर्ष यह उल्का वृष्टि 6 नवंबर से 30 नवंबर के मध्य सक्रिय रहेगी तथा 17 नवंबर को इसकी चरम अवस्था की संभावना व्यक्त की गई है। ।

‘लियोनिड्स उल्का वृष्टि’ क्या है?

इस उल्का वृष्टि के दौरान गिरने वाला मलबा ‘लियो’ तारामंडल / नक्षत्र (Leo Constellation) में स्थित 55P/टेम्पेल-टटल (55P/Tempel-Tuttle) नामक एक छोटे धूमकेतु से निकलता है।

  • इस धूमकेतु को सूर्य की परिक्रमा करने में 33 वर्ष का समय लगता है।
  • लियोनिड्स को एक प्रमुख उल्का वृष्टि माना जाता है जिसमें सबसे तीव्र गति वाली उल्काएँ होती हैं, जिनकी गति प्रायः 71 किमी प्रति सेकंड होती है।

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उल्का वृष्टि बनाम उल्का तूफान:

प्रति 33 वर्ष में एक ‘लियोनिड शावर’ / ‘लियोनिड उल्का वृष्टि’, ‘उल्कापिंड तूफान’ (Meteor Storm) में परिवर्तित हो जाती है, इस दौरान हर घंटे सैकड़ों से हजारों उल्काएं देखी जा सकती हैं।

  • उल्कापिंडों के तूफान में प्रति घंटे कम से कम 1,000 उल्काएं देखी जाती। वर्ष 1966 में, एक लियोनिड तूफान के दौरान 15 मिनट की अवधि के दौरान ‘प्रति मिनट हजारों उल्काएं’ पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गिरती हुई देखी गई थी।
  • इस प्रकार का आखिरी तूफान वर्ष 2002 में देखा गया था।

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‘उल्का वृष्टि’ क्या होती है?

  • उल्काएं, सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षाओं में गति करने के दौरान धूमकेतु से बाहर निकले हुए चट्टान और वर्फ के टुकड़े होती हैं।
  • जब पृथ्वी, धूमकेतु या क्षुद्रग्रह द्वारा छोड़े गए मलबे से होकर गुज़रती है, तो ‘उल्का वृष्टि’ (Meteor showers) की घटनाएँ देखी जाती है।

क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्का, उल्कापात तथा उल्कापिंड में अंतर:

  1. क्षुद्रग्रह (Asteroid): यह एक अपेक्षाकृत छोटा, निष्क्रिय, चट्टानी पिंड होता है जो सूर्य की परिक्रमा करता है।
  2. धूमकेतु (Comet): धूमकेतु जमी हुई गैस, पत्थर और धूल से निर्मित, सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिंड होते हैं। सूर्य के नजदीक पहुचने पर इनकी सतह वाष्पित होकर गैस और धूल भरे परिमंडल का निर्माण करती है, जिसे कोमा (Coma) कहा जाता है, जो कभी-कभी पुच्छल (पूंछ) की आकृति में विस्तारित हो जाती है
  3. उल्का (Meteoroid): यह आकार में धूमकेतु अथवा क्षुद्रग्रह से पिंड होते हैं, जो सूर्य की परिक्रमा करते है।
  4. उल्कापात (Meteor): जब कोई उल्का पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय वाष्पित हो जाती है, उस समय होने वाली इस प्रकाशीय घटना को उल्कापात कहा जाता है, जिसे ‘टूटता तारा’ भी कहते है।
  5. उल्कापिंड (Meteorite): यह वह उल्का होती है, जो पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय नष्ट होने से बच जाती है तथा पृथ्वी की सतह पर आकर टकराती है।

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि उल्का वृष्टि में दिखने वाला – इसी प्रकाश की वजह से उल्काओं को शूटिंग स्टार कहा जाता है – उल्कापिंड और पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद अणुओं के बीच घर्षण का परिणाम होता है? उल्कापिंड और वायुमंडल में मौजूद अणुओं के परस्पर घर्षण होने पर यह जलते हुई प्रतीत होती हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्षुद्रग्रह क्या होते है?
  2. धूमकेतु क्या होते है?
  3. कोमा क्या है?
  4. क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्का, उल्कापात और उल्कापिंड के बीच अंतर।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

‘संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS)


संदर्भ:

हाल ही में, आर्थिक सुधार का हवाला देते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MP Local Area Development Scheme – MPLADS) को बहाल कर दिया है।

  • हालांकि, योजना के इस नए संस्करण में सांसदों को वार्षिक रूप सर स्वीकृत ₹5 करोड़ की राशि के बजाय ₹2 करोड़ दिए जाएंगे।
  • विदित हो, कि MPLAD को अप्रैल 2020 में निलंबित कर दिया गया था, इस योजना के लिए निर्धारित राशि को भारत के समेकित कोष में शामिल कर दिया गया था।

पृष्ठभूमि:

सरकार द्वारा अप्रैल, 2020 में वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS) को स्थगित करने, तथा इन दो वर्षों के लिए MPLADS की राशि को लोगों की आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्त मंत्रालय के अधिकार में रखने का निर्णय लिया गया था।

इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान ₹5,012 करोड़ खर्च किए गए, जबकि वित्तीय वर्ष 2019-20 में योजना के तहत मात्र ₹2,491.45 करोड़ खर्च किए गए थे।

इस राशि का उपयोग:

सरकार के अनुसार, MPLAD योजना से बचाई गई धनराशि का उपयोग, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार हेतु धन-आवंटन में वृद्धि करने, प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निःशुल्क राशन प्रदान करने और लोगों के मुफ्त टीकाकरण के लिए किया गया है।

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संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS) के बारे में:

इस योजना की शुरुआत  दिसंबर, 1993 में की गयी थी।

  • इसका उद्देश्य संसद सदस्यों के लिए, स्थानीय जरूरतों के आधार पर सामुदायिक अवसंरचनाओं सहित मूलभूत सुविधाओं और स्थाई सामुदायिक परिसंपत्तियों का विनिर्माण करने के लिए विकासात्मक प्रकृति के कार्यों की सिफारिश करने हेतु, एक तंत्र प्रदान करना था।
  • MPLAD योजना, पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है।
  • इसके तहत प्रत्येक संसदीय क्षेत्र को वार्षिक रूप से 5 करोड़ रुपए की MPLADS निधि प्रदान की जाती है।

 

विशेष फोकस:

सांसदों के लिए, वार्षिक रूप से दी जाने वाली MPLADS निधि की न्यूनतम 15 प्रतिशत राशि अनुसूचित जाति की आबादी वाले क्षेत्रों में, तथा 7.5 प्रतिशत राशि अनुसूचित जनजाति की आबादी वाले क्षेत्रों में कराए जाने वाले कार्यों पर व्यय करना अनिवार्य है।

निधियां जारी करना:

इस योजना के तहत, सांसद निधि, सीधे जिला अधिकारियों को सहायता अनुदान (Grants– in-Aid) के रूप में जारी की जाती है।

  • योजना के तहत जारी की गयी निधि गैर-व्यपगत (Non-Lapsable) होती है।
  • यदि किसी विशेष वर्ष में निधि जारी नहीं जाती है तो इसे पात्रता के अनुसार, अगले वर्षो में कराए जाने वालों कार्यों में जोड़ दिया जाएगा। इस योजना के तहत सांसदों की भूमिका अनुसंशा करने की होती है।
  • इस योजना के तहत, सांसदों की भूमिका मात्र सिफ़ारिशी होती है।
  • जिला प्राधिकरण के लिए, कार्यों संबंधी पात्रता की जांच करने, निधि स्वीकृत करने और कार्यान्वयन हेतु एजेंसियों का चयन करने, कार्यों को प्राथमिकता देने, समग्र निष्पादन का निरीक्षण करने और योजना की जमीनी स्तर पर निगरानी करने का अधिकार होता है
  • जिला प्राधिकरण द्वारा, सम्बंधित जिले में कार्यान्वयित की जा रही कम से कम 10% परियोजनाओं का प्रति वर्ष निरीक्षण किया जाएगा।

कार्यों के लिए अनुसंशा:

  1. लोकसभा सदस्य अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में कराए जाने वाले कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।
  2. राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य, संबंधित राज्य में कहीं भी कराए जाने वाले कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।
  3. लोकसभा और राज्यसभा के नामित सदस्य, देश में कहीं भी कराए जाने वाले कार्यों का चयन व सिफारिश कर सकते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MPLAD योजना, ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ से किस प्रकार संबद्ध है?
  2. मनोनीत सांसद द्वारा कार्यों की सिफारिश किन क्षेत्रों में की जा सकती है?
  3. क्या योजना के तहत, एससी और एसटी कल्याण पर कोई विशेष ध्यान दिया जाता है?
  4. अनुदान और ऋण के बीच अंतर?
  5. कार्यान्वयन करने वाली एजेंसियां

मेंस लिंक:

क्या MPLADS द्वारा सार्वजनिक सेवाओं को प्रदान किए जाने वाले प्रावधानों में मौजूदा अंतराल को पाटने में सहायता की गयी है? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ के लिए जांच हेतु सामान्य सहमति


संदर्भ:

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (Central Bureau of Investigation- CBI) द्वारा पेश की गयी एक जानकारी पर चिंता व्यक्त की है, जिसमे बताया गया है कि, वर्ष 2018 से जांच हेतु मंजूरी देने के लिए सीबीआई द्वारा किए गए लगभग 150 अनुरोध आठ राज्य सरकारों के पास लंबित हैं। इन राज्यों ने ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ के लिए जांच हेतु सामान्य सहमति (General consent to CBI) वापस ले ली है।

पृष्ठभूमि:

शीर्ष अदालत ने पिछले महीने सीबीआई से जांच में आने वाली बाधाओं और अभियोजन पक्ष को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछताछ की थी। इसी के प्रत्युत्तर में सीबीआई ने यह हलफनामा दायर किया था।

‘सामान्य सहमति’ वापस ने वाले राज्य:

वर्तमान में, आठ राज्यों ने सीबीआई से सहमति वापस ले ली है: महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, केरल और मिजोरम। मिजोरम को छोड़कर सभी राज्यों में विपक्षी राजनीतिक दलों का शासन है।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया:

  • राज्य सरकारों के पास ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (सीबीआई) को राज्य के अंदर अपराधों की जांच करने से रोकने की कोई “पूर्ण” शक्ति नहीं है।
  • यहाँ तक कि, जांच करने संबंधी इस प्रमुख एजेंसी की स्वायत्तता में दखल देने का अधिकार केंद्र सरकार को भी नहीं है।
  • साथ ही, जिन मामलों में ऐसा पाया जाता है कि ‘राज्य पुलिस प्रभावी रूप से निष्पक्ष और निष्पक्ष जांच नहीं करेगी’, संवैधानिक अदालतों द्वारा सीबीआई को ऐसे मामलों को सौंपने के रास्ते में, राज्य द्वारा ‘सामान्य सहमति’ को वापस लेना, बाधक नहीं होगा।
  • इसके अलावा, सीबीआई को संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘संघ सूची’ में सूचीबद्ध किसी भी केंद्रीय विषय से संबंधित मामलों की जांच करने का अधिकार है।

सहमति की आवश्यकता:

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम’ (Delhi Special Police Establishment Act) के अंतर्गत कार्य करती है। अधिनियम के अनुसार- किसी राज्य में केंद्रीय जांच ब्यूरो के लिए किसी मामले की जांच करने हेतु, उस राज्य की सहमति अनिवार्य है।

‘सहमति’ दो प्रकार की होती है:

  1. केस-विशिष्ट सहमति (Case-specific consent)
  2. सामान्य या आम सहमति (General consent)

चूंकि, सीबीआई का अधिकार क्षेत्र केवल केंद्र सरकार के विभागों और कर्मचारियों तक सीमित होता है, हालांकि, यह किसी राज्य में राज्य सरकार के कर्मचारियों अथवा किसी हिंसक अपराध से जुड़े मामले की जांच उस राज्य द्वारा सहमति दिए जाने के पश्चात कर सकती है।

आम तौर पर, सीबीआई को राज्य में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की निर्बाध जांच करने में मदद करने हेतु संबधित राज्य द्वारा सामान्य सहमति (General consent) प्रदान की जाती है।

सहमति वापस लेने का तात्पर्य:

  • इसका सीधा सा अर्थ है कि जब तक राज्य सरकार द्वारा अनुमति नहीं दी जायेगी, सीबीआई अधिकारी, राज्य में प्रवेश करने पर पुलिस अधिकारी के रूप में प्राप्त शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे।
  • महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय का अर्थ है, कि पश्चिम बंगाल में दर्ज होने वाले प्रत्येक मामले की जांच के लिए सीबीआई को अब राज्य सरकार से सहमति लेनी होगी।

किस प्रावधान के तहत आम सहमति वापस ली जा सकती है?

दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत, राज्य सरकारें सीबीआई को दी जाने वाली ‘सामान्य सहमति’ वापस ले सकती हैं।

सामान्य सहमति की वापसी से सीबीआई की जांच पर प्रभाव:

  • राज्य सरकार द्वारा ‘सामान्य सहमति’ वापस लिए जाने से, पहले के मामलों में चल रही जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • इसके अलावा, देश के अन्य राज्यों में मामला दर्ज होने पर, जिन राज्यों में ‘आम सहमति’ जारी है, तथा मामले से संबंधित व्यक्ति यदि उस राज्य में, जहाँ आम सहमति वापस ले ली गई है, ठहरे हुए है, तो सीबीआई इन राज्यों में भी अपनी जांच कर सकती है।

 

कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला:

हाल ही में, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ‘सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे अवैध कोयला खनन और पशु तस्करी से संबंधित एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा, कि केंद्रीय एजेंसी को दूसरे राज्य में केंद्र सरकार के किसी कर्मचारी की जांच करने से नहीं रोका जा सकता है। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

  • विनय मिश्रा बनाम सीबीआई में, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस साल जुलाई में फैसला सुनाया कि भ्रष्टाचार के मामलों को पूरे देश में एक तरीके से देखा जाना चाहिए, और केंद्र सरकार के किसी कर्मचारी केवल इसलिए ‘विशेष’ नहीं समझा जा सकता है क्योंकि उसका कार्यालय उस राज्य में स्थित था, जिसने ‘सीबीआई से सामान्य सहमति’ वापस ले ली थी।
  • उच्च न्यायालय ने यह भी कहा, कि सहमति वापस लेना, केवल राज्य सरकार के कर्मचारी से संबंधित मामलों में लागू होगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

अनुच्छेद 131 के तहत कोई भी ‘वाद’- विशेष रूप से राज्यों के बीच या केंद्र और राज्य के बीच विवादों के संबंध में- सर्वोच्च न्यायालय में दायर किए जाते हैं। क्या आप ‘सर्वोच्च न्यायालय’ के मूल अधिकार क्षेत्र के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सीबीआई और इसकी स्थापना
  2. दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
  3. आम सहमति क्या होती है?
  4. राज्यों द्वारा आम सहमति वापस लेने के प्रभाव

मेंस लिंक:

क्या आम सहमति वापस लेने तात्पर्य यह हो सकता है कि सीबीआई अब किसी मामले की जांच नहीं कर सकती? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक


संदर्भ:

हाल ही में, ‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक’ (Climate Change Performance IndexCCPI) का 17वां संस्करण जारी किया गया है।

CCPI के बारे में:

‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक’ (CCPI) को वार्षिक रूप से, जर्मनवॉच (Germanwatch), न्यूक्लाइमेट इंस्टीट्यूट( New Climate Institute) और क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (Climate Action Network) द्वारा संकलित एवं प्रकाशित किया जाता है।

  • यह सूचकांक 60 देशों तथा यूरोपीय संघ की जलवायु शमन प्रगति को दर्शाता है।
  • इसका उद्देश्य, अंतरराष्ट्रीय जलवायु राजनीति में पारदर्शिता बढ़ाना है और इस सूचकांक के आधार पर जलवायु संरक्षण के प्रयासों और अलग-अलग देशों द्वारा की गई प्रगति की तुलना की जा सकती है।

कार्यप्रणाली:

‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक’ में विभिन्न देशों के प्रदर्शन का ‘चार श्रेणियों’ में आकलन किया जाता है:

  1. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (कुल अंकों का 40%)
  2. नवीकरणीय उर्जा (कुल अंकों का 20%)
  3. उर्जा उपयोग (कुल अंकों का 20%)
  4. जलवायु नीति (कुल अंकों का 20%)

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नवीनतम सूचकांक में विभिन्न देशों का प्रदर्शन:

  • सूचकांक में ‘समग्र रैंकिंग’ के तहत पहले तीन स्थानों को खाली रखा गया है, क्योंकि किसी भी देश ने सूचकांक की सभी श्रेणियों में इतना अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था कि समग्र उच्च रेटिंग प्राप्त कर सके।
  • ‘ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन’ श्रेणी में पहले तीन रैंकों को भी खाली रखा गया है। इस श्रेणी में स्वीडन, मिस्र, चिली और यूनाइटेड किंगडम शीर्ष 7 देशों में शामिल हैं।
  • इस श्रेणी में, स्वीडन जैसे स्कैंडिनेवियाई देशों को अक्षय ऊर्जा पर अपने “उत्कृष्ट” प्रयासों के कारण उच्च स्थान (चौथा) प्रदान किया गया है। ईरान और रूस, इस श्रेणी में सबसे निचले पायदान पर हैं।
  • कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका, कजाकिस्तान और सऊदी अरब सबसे निम्न प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल हैं।
  • सूचकांक में, चीन को ‘समग्र रूप से’ 37वें स्थान पर रखा गया है और उसकी समग्र रेटिंग “निम्न” है।

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भारत का प्रदर्शन:

  • ‘समग्र रैंकिंग’ (overall ranking) में भारत 22 के स्कोर के साथ 10वें नंबर पर है। भारत को समग्र रूप से ‘उच्च प्रदर्शनकर्ता’ की श्रेणी में रखा गया है, परंतु नवीकरणीय ऊर्जा के संबंध में इसे ‘मध्यम’ श्रेणी में रखा गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अपने प्रति व्यक्ति अपेक्षाकृत कम उत्सर्जन से लाभ हो रहा है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक’ (CCPI) के बारे में
  2. विशेषताएं
  3. मानदंड
  4. विभिन्न देशों का प्रदर्शन

मेंस लिंक:

जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भारत के लिए चिंताओं, सुधार के क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सरकार की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

दिल्ली की यमुना में झाग बनने संबंधी कारण


संदर्भ:

दिल्ली क्षेत्र में बहने वाली यमुना नदी में जहरीले झागों का बनना एक बार-बार होने वाली घटना हो चुकी है। हाल ही में, कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी के कुछ हिस्सों में झाग की एक परत तैरती देखी गई, जिसमें छठ पर्व के अवसर पर भक्त जहरीले झागों से भरे पानी में प्रार्थना करने के लिए खड़े थे।

झाग (Froth), प्रदूषित नदी की निशानी होते है।

यमुना नदी में झाग बनने संबंधी कारण:

  • शहर के सीवरेज नेटवर्क से नहीं जुड़े हुए क्षेत्रों से आने वाला ‘मैला’ (Sewage), और अनुपचारित या खराब तरीके से उपचारित अपशिष्टों को नदी में छोड़े जाना, इन जहरीले झागों के बनने का कारण हो सकता है।
  • घरेलू और औद्योगिक धुलाई में प्रयुक्त डिटर्जेंट में पाया जाने वाले आर्द्रक (Surfactants) और फॉस्फेट, सीवेज को उपचारित नहीं किए जाने की वजह से नदी में पहुँच जाते हैं।

साल के इस समय झाग बनने संबंधी कारण:

साल के इस समय नदी में जल की मात्रा कम होती है और नदी में जल का वेग भी कम होता है। इसलिए प्रदूषक सही तरीके से जल के साथ नहीं घुल पाते हैं। ओखला के पास बैराज में विक्षोभ होने के कारण फॉस्फेट से झाग उत्पन्न होते हैं।

यमुना इतनी प्रदूषित क्यों है?

  1. दिल्ली के ‘सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट’ नदी में छोड़े जा रहे प्रदूषकों के लिए सर्वाधिक बड़े योगदानकर्ता हैं।
  2. विभिन्न प्रकार के उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषक, भी एक प्रमुख मुद्दा है।
  3. दिल्ली में नदी के किनारे कृषि-गतिविधियाँ भी नदी के प्रदूषण में योगदान करती हैं।
  4. हरियाणा के खेतों से कृषि अपशिष्ट और कीटनाशकों का निर्वहन भी प्रदूषण में योगदान देता है।
  5. नदी में जल प्रवाह की मात्रा कम होने के कारण प्रदूषक जमा हो जाते हैं और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।

यमुना नदी के बारे में:

  • यमुना नदी, गंगा की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • इसकी उत्पत्ति उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बंदरपूँछ शिखर के पास यमुनोत्री नामक ग्लेशियर से निकलती है।
  • यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से प्रवाहित होने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी से मिलती है।
  • इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा और केन हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि अनुच्छेद 21 में ‘जीवन के अधिकार’ के व्यापक शीर्षक के तहत, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, और  प्रदूषण मुक्त जल का अधिकार से संबंधित प्रावधान किए गए हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यमुना नदी कितने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर बहती है?
  2. यमुना की सहायक नदियाँ
  3. पीने के पानी में अमोनिया की अधिकतम स्वीकार्य सीमा?
  4. सल्फेट का स्वीकार्य स्तर
  5. पानी की कठोरता की वांछनीय सीमा
  6. मल कोलिफॉर्म का वांछनीय स्तर

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारत द्वारा नेपाल सेना प्रमुख को जनरल का मानद पद

  • नेपाल सेना प्रमुख जनरल प्रभु राम शर्मा को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा भारतीय सेना के जनरल के मानद पद से सम्मानित किया गया है।
  • दोनों देशों द्वारा एक दूसरे के सेना प्रमुखों को जनरल की मानद रैंक प्रदान करने की परंपरा वर्ष 1950 से चली आ रही है।

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वैश्विक औषधि नीति सूचकांक

हाल ही में ‘हार्म रिडक्शन कंसोर्टियम’ द्वारा ‘वैश्विक औषधि नीति सूचकांक’ / ‘ग्लोबल ड्रग पॉलिसी इंडेक्स’ (Global Drug Policy Index) का पहला संस्करण जारी किया गया।

  • यह सूचकांक, औषधि नीति के पांच व्यापक आयामों में विस्तारित 75 संकेतकों से तैयार किया गया है। ये पांच आयाम है- आपराधिक न्याय, चरम प्रतिक्रियाएं, स्वास्थ्य और नुकसान में कमी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रित दवाओं तक पहुंच, और विकास।
  • इस सूचकांक में नॉर्वे, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया को ‘मानवीय और स्वास्थ्य-संचालित दवा नीतियों’ के संबंध में पांच अग्रणी देशों के रूप में स्थान दिया गया है।
  • सबसे निचली रैंक वाले पांच देश ब्राजील, युगांडा, इंडोनेशिया, केन्या और मैक्सिको हैं।
  • भारत को 30 देशों में 18वें स्थान पर रखा गया है ।

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