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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 10 November 2021

 

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययनII

1. मध्याह्न भोजन योजना

2. स्माइल (SMILE) योजना

3. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा

4. अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन

 

सामान्य अध्ययनIII

1. एकीकृत थिएटर कमांड

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. युक्तधारा

2. इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत

3. डिएगो गार्सिया

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मध्याह्न भोजन योजना


संदर्भ:

बच्चों में कुपोषण और रक्त-अल्पता (एनीमिया) के “गंभीर” स्तर को चिह्नित करते हुए, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों से ‘मध्याह्न भोजन योजना’ (Mid-Day Meal Scheme), जिसे अब ‘पीएम पोषण’ (PM Poshan) के रूप में जाना जाता है, में ‘बाजरा’ (Millets) को शामिल करने की संभावना खोजने का आग्रह किया गया है।

आवश्यकता और महत्व:

बाजरा या ज्वार, बाजरा और रागी जैसे अन्य पोषक अनाजों में खनिजों और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन के साथ-साथ प्रोटीन और एंटीऑक्सिडेंट की भरपूर मात्रा होती है। इस वजह से मोटे अनाज बच्चों के पोषण-संबंधी परिणामों में सुधार के लिए एक आदर्श विकल्प बन जाते हैं।

‘मध्याह्न भोजन योजना’ के बारे में:

यह योजना, सरकारी विद्यालयों, सहायता प्राप्त स्कूलों तथा ‘समग्र शिक्षा’ के अंतर्गत सहायता प्राप्त मदरसों में सभी बच्चों के लिए एक समय भोजन दिए जाने को सुनिश्चित करती है।

  • इस योजना के अंतर्गत, आठवीं कक्षा तक के छात्रों को एक वर्ष में कम से कम 200 दिन पका हुआ पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है।
  • इस योजना का कार्यान्वयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा किया जाता है।
  • इस योजना को एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में 15 अगस्त, 1995 को पूरे देश में लागू किया गया था।
  • इसे प्राथमिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पोषण सहायता कार्यक्रम (National Programme of Nutritional Support to Primary Education: NP– NSPE) के रूप में शुरू किया गया था।
  • वर्ष 2004 में, इस कार्यक्रम को मिड डे मील योजना के रूप में फिर से शुरू किया गया था।

उद्देश्य:

भूख और कुपोषण को दूर करना, स्कूल में नामांकन और उपस्थिति बढ़ाना, विभिन्न जातियों के मध्य समाजीकरण में सुधार करना, जमीनी स्तर पर, विशेष रूप से महिलाओं को रोजगार प्रदान करना।

मध्याह्न भोजन योजना (MDMS) नियम 2015 के अनुसार:

  • बच्चों को केवल स्कूल में ही भोजन परोसा जाएगा।
  • खाद्यान्नों की अनुपलब्धता अथवा किसी अन्य कारणवश, विद्यालय में पढाई के किसी भी दिन यदि मध्याह्न भोजन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकार अगले महीने की 15 तारीख तक खाद्य सुरक्षा भत्ता का भुगतान करेगी।
  • निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत अधिदेशित स्कूल प्रबंधन समिति मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी।

पोषण संबंधी मानक:

  • मध्याह्न भोजन योजना (MDMS) दिशानिर्देशों के अनुसार, निम्न प्राथमिक स्तर के लिये प्रतिदिन न्यूनतम 450 कैलोरी ऊर्जा एवं 12 ग्राम प्रोटीन दिए जायेंगे, तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिये न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा एवं 20 ग्राम प्रोटीन दिए जाने का प्रावधान है।
  • MHRD के अनुसार, प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के भोजन में, 100 ग्राम खाद्यान्न, 20 ग्राम दालें, 50 ग्राम सब्जियां और 5 ग्राम तेल और वसा सम्मिलित की जायेगी।
  • उच्च-प्राथमिक स्कूलों के बच्चों के भोजन में, 150 ग्राम खाद्यान्न, 30 ग्राम दालें, 75 ग्राम सब्जियां और 5 ग्राम तेल और वसा को अनिवार्य किया गया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. MDMS योजना कब शुरू हुई?
  2. इसका नाम-परिवर्तन कब किया गया था?
  3. केंद्र प्रायोजित और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के बीच अंतर?
  4. MDMS किस प्रकार की योजना है?
  5. योजना के तहत वित्त पोषण
  6. पोषक मानदंड निर्धारित
  7. योजना के तहत कवरेज
  8. योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता देने की जिम्मेदारी

मेंस लिंक:

मध्याह्न भोजन योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

स्माइल (SMILE) योजना


संदर्भ:

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा हाशिए पर पड़े व्यक्तियों की सहायता हेतु “स्माइल- आजीविका और उद्यम के लिये सीमांत व्यक्तियों हेतु समर्थन” नामक एक योजना तैयार की गयी है।

योजना के बारे में:

“SMILE का अर्थ है “आजीविका और उद्यम के लिये हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों हेतु सहायता” (SMILE- Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise)।

  • योजना के तहत मुख्य ध्यान पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाओं का प्रावधान, परामर्श, बुनियादी दस्तावेज, शिक्षा, कौशल विकास, आर्थिक संबंध आदि पर केंद्रित किया गया है।
  • इसमें केंद्रीय क्षेत्र की ‘भिखारियों के व्यापक पुनर्वास के लिये योजना’ (Comprehensive Rehabilitation of persons engaged in the act of Begging) नामक एक उपयोजना को भी शामिल किया गया है।
  • योजना को राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों/स्थानीय शहरी निकायों, स्वैच्छिक संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों (Community Based Organizations – CBOs), संस्थानों और अन्य के सहयोग से लागू किया जाएगा।

भारत में भिक्षावृत्ति की स्थिति:

  1. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में भिखारियों की कुल संख्या 4,13,670 (2,21,673 पुरुष और 1,91,997 महिला) है और पिछली जनगणना के बाद से इस संख्या में वृद्धि हुई है।
  2. इस सूची में, पश्चिम बंगाल शीर्ष स्थान पर है, उसके बाद क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश और बिहार का स्थान आता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, लक्षद्वीप में भिखारियों की संख्या मुश्किल से मात्र दो है।
  3. केंद्रशासित प्रदेशों में, भिखारियों की सर्वाधिक संख्या (2,187) नई दिल्ली में थी, इसके चंडीगढ़ में इनकी संख्या 121 थी।
  4. पूर्वोत्तर राज्यों में, असम 22,116 भिखारियों के साथ सूची में सबसे ऊपर है, जबकि मिज़ोरम 53 भिखारियों के साथ निचले स्थान पर है।

इंस्टा जिज्ञासु:

निराश्रित व्यक्ति (संरक्षण, देखभाल और पुनर्वास) मॉडल विधेयक, 2016 (Persons in Destitution (Protection, Care and Rehabilitation) Model Bill, 2016) के बारे में जानकारी हेतु पढ़िए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगरी एक्ट, 1959 के प्रमुख प्रावधान
  2. अनुच्छेद 19(1)(ए) के बारे में
  3. राज्य के नीति निदेशक तत्व संबंधित प्रमुख तथ्य
  4. अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार

मेंस लिंक:

भिक्षावृत्ति को गैर-अपराध घोषित क्यों किया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 अफगानिस्तान में ‘संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन’ (UNAMA)


संदर्भ:

हाल ही में, ‘अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन’ (UN Assistance Mission in Afghanistan – UNAMA) के द्वारा महिला कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक की गयी और उनके साहस की सराहना करते हुए मिशन ने दृढ़तापूर्वक पूर्वक कहा कि संयुक्त राष्ट्र, अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा रहेगा।

 

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन’ (UNAMA) क्या है?

UNAMA की स्थापना 28 मार्च 2002 को ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ के प्रस्ताव 1401 द्वारा की गई थी।

  • यह मूल रूप से, देश में स्थायी शांति और विकास की नींव रखने हेतु अफगानिस्तान और उसके नागरिकों की सहायता के लिए स्थापित किया गया था।
  • इसका मूल कार्य ‘बॉन समझौते’ (दिसंबर 2001) के कार्यान्वयन में सहयोग करना था।
  • अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन’ की प्रतिवर्ष समीक्षा की जाती है और देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय के साथ इसके अधिदेश को परिवर्तित कर दिया जाता है।
  • UNAMA एक एकीकृत मिशन है। अर्थात, यह एक विशेष राजनीतिक मिशन है, जिसमे संयुक्त राष्ट्र की सभी एजेंसियां, फंड और कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्तर पर परिभाषित प्राथमिकताओं के अनुसार अफगानिस्तान की बेहतर सहायता के लिए बहुआयामी और एकीकृत तरीके से कार्य करते हैं।

‘बॉन समझौता’ क्या है?

‘बॉन समझौता’ (Bonn Agreement) एक बंद दरवाजे के भीतर हुई समझौता वार्ता थी; जिसमे भागीदारों को सबसे अलग कर दिया गया था और समझौता वार्ता के दौरान उनके बाहरी संपर्क सीमित कर दिए गए थे, तथा समझौते पर हस्ताक्षर होने के तक कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गयी थी।

  • इस वार्ता में अफगानिस्तान के मौजूदा सांकेतिक राष्ट्राध्यक्ष (रब्बानी) को दरकिनार कर दिया गया और उन्होंने इसमें भाग नहीं लिया, तथा तालिबान को ‘बॉन वार्ता’ से पूरी तरह से बाहर रखा गया था।
  • संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय अभिकर्ताओं ने वार्ता को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी, और बॉन समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पूर्ण समर्थन दिया गया था।

 

बॉन समझौते के द्वारा एक महत्वाकांक्षी तीन-वर्षीय राजनीतिक और प्रशासनिक रोडमैप निर्धारित किया गया, जिसके अनुसरण में,

  • जून 2002 में आयोजित आपातकालीन ‘लोया जिरगा’ (विशाल सभापरिषद) द्वारा संक्रमणकालीन प्रशासन स्थापित किया गया,
  • वर्ष  2004 की शुरुआत में एक नए संविधान को अंगीकार किया गया, और
  • वर्ष 2004 और 2005 में राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव कराए गए।

 

‘संयुक्त राष्ट्र के विशेष राजनीतिक मिशन’ क्या होते हैं?

‘विशेष राजनीतिक मिशन’ (Special Political Mission) में, ‘नरसंहार निवारण पर विशेष सलाहकार कार्यालय’ (Office of the Special Adviser on the Prevention of Genocide) जैसी ‘राजनीतिक और शांति निर्माणक मामलों के विभाग’ (Department of Political and Peacebuilding Affairs DPPA) द्वारा प्रबंधित या निर्देशित संस्थाओं को छोड़कर संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय अभिकर्ता भाग लेते हैं।

इंस्टा जिज्ञासु:

‘शरिया कानून’ क्या है? इसके तहत फैसले किस प्रकार किए जाते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNAMA के बारे में
  2. संयुक्त राष्ट्र के विशेष मिशन क्या हैं?
  3. बॉन समझौता क्या है?

मेंस लिंक:

अफगान संकट पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा


संदर्भ:

स्थानीय पाकिस्तानियों की ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (China-Pakistan Economic Corridor – CPEC) परियोजना पर काम कर रहे चीनी सैनिकों और चीनी नागरिकों से नाखुशी की वजह से CPEC परियोजना को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। इससे, पाकिस्तान को मजबूर होकर इलाके में और सैनिक तैनात करने पड़े हैं।

‘भाशा बांध’ (Bhasha Dam) क्षेत्र में काम कर रहे चीनी इंजीनियरों और अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी सेना ने 34 विशेष सुरक्षा डिवीजन की 340 इन्फैंट्री ब्रिगेड को तैनात किया है। पाकिस्तान को सीपीईसी की सुरक्षा के लिए एक अन्य सुरक्षा डिवीजन बनानी पडी है।

CPEC के बारे में:

  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), कई-अरब डॉलर की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) की प्रमुख परियोजना के तहत, पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लंबी एक वाणिज्यिक परियोजना हैl
  • यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य चीन द्वारा वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से दुनिया विश्व में बीजिंग के प्रभाव को बढ़ाना है।
  • इस लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन का निर्माण किया जाना शामिल है।
  • इस प्रस्तावित परियोजना को भारी-सब्सिडी वाले ऋणों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा। पाकिस्तान की सरकार के लिए यह ऋण चीनी बैंकिंग दिग्गजों, जैसे एक्जिम बैंक ऑफ चाइना, चीन डेवलपमेंट बैंक तथा चीन के औद्योगिक और वाणिज्यिक बैंक द्वारा प्रदान किया जाएगा।

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भारत की चिंताएं:

  • यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान से होते हुए गुजरेगा।
  • यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर भारतीय संप्रुभता के लिए नुकसानदेय साबित होगी l
  • CPEC, ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अपनी आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित और छोटा करने के साथ-साथ हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने संबंधी चीनी योजना पर आधारित है। अतः यह माना जाता है कि CPEC के परिणामस्वरूप हिंद महासागर में चीनी मौजूदगी भारत के प्रभाव पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी।
  • यातायात और ऊर्जा की मिली-जुली इस परियोजना के तहत समुद्र में बंदरगाह को विकसित किए जाएंगे, जिससे भारतीय हिंद महासागर तक चीन की पहुंच का रास्ता खुलेगाl ग्वादर, बलूचिस्तान के अरब सागर तट पर स्थित हैl  पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम का यह हिस्सा दशकों से अलगाववादी विद्रोह का शिकार हैl

current affairs

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CPEC क्या है?
  2. BRI पहल क्या है?
  3. गिलगित- बाल्टिस्तान कहां है?
  4. पाकिस्तान और ईरान में महत्वपूर्ण बंदरगाह।

मेंस लिंक:

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) ढांचे पर भारत की चिंताओं पर चर्चा कीजिए। सुझाव दें कि भारत को इस गठबंधन से उत्पन्न चुनौतियों से कैसे निपटना चाहिए?

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

एकीकृत थिएटर कमांड


(Integrated theatre commands)

संदर्भ:

अगले युद्धों को एक समेकित तरीके से लड़ने के लिए ‘थिएटर कमांड’ के निर्माण की दिशा में एक नए सिरे से जोर देते हुए, रक्षा मंत्रालय के अधीन सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) ने, तीनों सैन्य सेवाओं से नए विन्यासों (New Formations) की संरचनाओं पर अध्ययन करने और अगले साल अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है।

पृष्ठभूमि:

  • वर्तमान में भारत के पास, तीनों सशस्त्र बलों के 17 कमांड कार्यरत हैं, जिनमें थल सेना और वायु सेना, प्रत्येक के अधीन सात कमांड हैं और नौसेना के अधीन तीन कमांड हैं।
  • भारत के पास ‘सामरिक सैन्य-बल कमान’ (Strategic Forces Command – SFC) के अलावा, ‘अंडमान और निकोबार कमान’- एक त्रि-सेवा कमान भी है। यह कमान देश के परमाणु भंडार की निगरानी करती है।

‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’ क्या हैं?

‘एकीकृत थिएटर कमांड्स’ (Integrated Theatre Commands- ITC) के तहत रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों के लिए, एक कमांडर के अधीन, तीनों सेनाओं की एकीकृत कमांड की परिकल्पना की गयी है।

  • इस तरह के सैन्य बल के कमांडर को, थल सेना, भारतीय वायु सेना और नौसेना के सभी संसाधनों का अपने विवेकानुसार निर्बाध प्रभावकारिता के साथ उपयोग करने की शक्ति होगी।
  • एकीकृत थिएटर कमांडर, किसी एक सेवा के प्रति जवाबदेह नहीं होगा।

 

भारत में ‘थिएटर कमांड’ की आवश्यकता:

  • थिएटर कमांड, बेहतर योजना बनाने और सैन्य प्रतिक्रिया में सहायक होगी और इससे सैन्य-व्यय में भी कमी आएगी।
  • चूंकि, क्योंकि सभी थिएटरों को पर्याप्त सैन्य उपकरणों एवं प्रणालियों से लैस करना होगा, अतः निकट भविष्य में, सैन्य-व्यय में वृद्धि होने की संभवना है। किंतु, सभी अधिग्रहणों को एक ‘थिएटर कमांड’ में एकीकृत किया जाएगा, इसलिए दीर्घावधि में यह लागत प्रभावी साबित होंगे।
  • ‘थिएटर कमांड’, भविष्य के होने वाले किसी युद्ध में लड़ने हेतु एक ‘एकीकृत दृष्टिकोण’ प्रदान करेगे।

इस संबंध में प्रस्ताव:

वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद, इस पर विचार-विमर्श के दौरान, युद्ध लड़ने हेतु एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस की गई थी।

  • ‘नरेश चंद्र समिति’ सहित ‘कारगिल समीक्षा समिति’ और तत्कालीन ‘मंत्रियों के समूह’ द्वारा ‘उच्च स्तर पर रक्षा प्रबंधन में संरचनात्मक परिवर्तन की जरूरत बताई गयी।
  • शेकेतकर समिति (Shekatkar Committee) द्वारा भी आंतरिक और बाह्य खतरों से निपटने के लिये तीन एकीकृत थिएटर कमांड- चीन सीमा के लिए- उत्तरी कमांड, पाकिस्तान सीमा के लिए- पश्चिमी कमांड, और समुद्री कार्रवाहियों के लिए- दक्षिणी कमांड गठित करने के संदर्भ में सिफारिश की गई थी।
  • शेकेतकर समिति ने ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ (CDS) का पड़ सृजित करने की भी सिफ़ारिश की थी।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘परमाणु कमान प्राधिकरण’ (Nuclear Command Authority) के बारे में जानते हैं? इस प्राधिकरण का प्रमुख कौन होता है और इसके कार्य क्या हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


युक्तधारा

युक्तधारा (Yuktdhara), मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं को सुगम बनाने के लिए एक ‘भू-स्थानिक योजना’ (Geospatial Planning Portal) पोर्टल है। यह इसरो के जियोपोर्टल ‘भुवन’ के तहत कार्य करेगा।

  • भुवन “युक्तधारा” पोर्टल को ‘ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय’ द्वारा लांच किया गया है।
  • यह प्लेटफॉर्म विभिन्न राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों यानी मनरेगा, एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम, पर ड्रॉप मोर क्रॉप और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना आदि के अंतर्गत बनाई गई परिसंपत्तियों (जियोटैग) के भंडार के रूप में कार्य करेगा।

 

इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत

आईएस-के या ‘इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत’ (Islamic State Khorasan Province – IS-K) ‘इस्लामिक स्टेट’ समूह का क्षेत्रीय सहयोगी संगठन है।

  • यह अफगानिस्तान में मौजूद सभी जिहादी आतंकवादी समूहों में सबसे चरम और हिंसक संगठन है।
  • आईएस-के की स्थापना जनवरी 2015 में की गई थी, जब इराक और सीरिया में ‘इस्लामिक स्टेट’ (आईएस) की शक्ति के चरम पर थी। बाद में, इसकी स्व-घोषित खलीफात को अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा पराजित और नष्ट कर दिया गया था।
  • “खुरासान” आधुनिक अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में विस्तारित एक ऐतिहासिक क्षेत्र है। शुरुआत में आईएस-के समूह का विस्तार पाकिस्तान में भी था, किंतु मई 2019 में ‘इस्लामिक स्टेट’ का पाकिस्तान में एक अलग समूह बन गया।

 

डिएगो गार्सिया

डिएगो गार्सिया (Diego Garcia), यूनाइटेड किंगडम के एक विदेशी क्षेत्र के रूप में ‘ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र’ का एक द्वीप है।

  • यह चागोस द्वीपसमूह के 60 छोटे द्वीपों में सबसे बड़ा है।
  • पुर्तगाली इस द्वीप की खोज करने वाले पहले यूरोपीय थे और फिर 1790 के दशक में इस द्वीप को फ्रांसीसियों द्वारा बसाया गया और नेपोलियन काल में हुए युद्धों के बाद इसे ब्रिटिश शासन में मिला दिया गया।
  • वर्ष 1965 में, ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस से अलग कर दिया, और डिएगो गार्सिया पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक संयुक्त सैन्य अड्डा स्थापित किया।
  • ब्रिटेन का कहना है, कि यह द्वीपसमूह लंदन की संपत्ति है और हाल ही में, ब्रिटेन द्वारा वर्ष 2036 तक डिएगो गार्सिया का उपयोग करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक पट्टा समझौते का नवीनीकरण किया गया है।

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