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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 1 November 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययनI

1. ‘गुरु नानक जयंती’ को ‘विश्व पदयात्री दिवस’ घोषित करने का प्रस्ताव

 

सामान्य अध्ययनII

1. डेंगू बुखार

2. G20 शिखर सम्मेलन

 

सामान्य अध्ययनIII

1. CEEW का ‘जलवायु भेद्यता सूचकांक’

2. नासा का परसिवरेंस रोवर

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. पंजाब में ‘सिंधु डॉल्फ़िन’ का संरक्षण

2. होर्मुज जलडमरूमध्य

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

गुरु नानक जयंती को ‘विश्व पदयात्री दिवस’ घोषित करने का प्रस्ताव


संदर्भ:

हाल ही में, पंजाब पुलिस ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की जयंती (गुरुपर्व) को ‘विश्व पदयात्री दिवस’  (World Pedestrian Day) के रूप में घोषित किए जाने का प्रस्ताव दिया है।

  • इस संबंध में शीघ्र ही ‘केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय’ को एक लिखित प्रस्ताव भेजा जा सकता है।
  • इस वर्ष 19 नवंबर को गुरु नानक की 552वीं जयंती मनायी जाएगी।

गुरु नानक देव को विश्व का सर्वाधिक सबसे स्मरणीय और श्रद्धेय पदयात्री क्यों माना जाता है?

15वीं और 16वीं शताब्दी के दौरान गुरु नानक देव ने काफी दूर दराज के स्थानों की यात्राएँ की थी। उस समय परिवहन के साधन काफी सीमित थे और लोग ज्यादातर नावों, जानवरों (घोड़े, खच्चर, ऊंट, बैलगाड़ी) से यात्रा करते थे, माना जाता है, कि गुरु नानक देव ने अपने शिष्य और साथी भाई मरदाना के साथ अपनी अधिकाँश यात्राएँ पैदल ही पूरी की थीं।

गुरु नानक देव द्वारा भ्रमण किए गए स्थान:

मक्का से हरिद्वार तक, सिलहट से कैलाश पर्वत तक, गुरु नानक ने अपनी यात्रा (जिसे ‘उदासी’ (Udaasis) भी कहा जाता है) के दौरान हिंदू, इस्लाम, बौद्ध और जैन धर्म से संबंधित सैकड़ों अंतरधार्मिक स्थलों का भ्रमण किया था।

  • उनके द्वारा भ्रमण किए गए कुछ स्थानों पर, उनके पधारने की स्मृति में गुरुद्वारों का निर्माण भी किया गया।
  • बाद के समय में, उनकी यात्रा को ‘जन्मसखियों’ नामक ग्रंथों में प्रलेखित किया गया।
  • गुरु नानक देव के यात्रा-स्थान, वर्तमान भौगोलिक विभाजनों के अनुसार नौ देशों – भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, चीन (तिब्बत), बांग्लादेश, सऊदी अरब, श्रीलंका और अफगानिस्तान – में फैले हुए हैं।

प्रस्ताव का महत्व:

  • पंजाब पुलिस का यह प्रस्ताव “चलने का अधिकार” (Right to walk) या पैदल चलने वालों के अधिकारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शायेगा।
  • अपने पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली ‘समुदाय’ को विकसित माना जाता है और इस प्रकार समुदाय ‘सतत विकास लक्ष्यों’ में अपना योगदान करता है।
  • इसके अलावा, अकेले पंजाब में, हर साल औसतन कम से कम एक हजार पैदल चलने वालों की मौत होती है। पंजाब पुलिस का यह कदम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

Guru Nanak (1469-1538 AD)

 

गुरु नानक के बारे में:

  • गुरु नानक का जन्म लाहौर के निकट स्थित तलवंडी नामक एक ग्राम में हुआ था।
  • गुरु नानक की सबसे प्रसिद्ध शिक्षा यह है, कि ईश्वर एक है, और बिना किसी कर्मकांड या पुजारियों की मदद से हर व्यक्ति ईश्वर तक पहुँच सकता है।
  • उनकी सर्वाधिक उग्र सुधारवादी सामाजिक शिक्षाओं में जाति व्यवस्था की निंदा की गयी है और सिखाया कि हर व्यक्ति एक समान है, चाहे वह किसी भी जाति या लिंग का हो।
  • उन्होंने ‘वाहेगुरु’ के रूप में ईश्वर की अवधारणा प्रस्तुत की- जिसके अनुसार ईश्वर एक ऐसी इकाई जो आकारहीन, कालातीत, सर्वव्यापी और अदृश्य है। सिख धर्म में ‘ईश्वर’ को ‘अकाल पुरख’ और ‘निरंकार’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • सिखों के सबसे पवित्र ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में गुरु नानक द्वारा रचित 974 काव्य भजन शामिल किए गए हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘करतारपुर साहिब कॉरिडोर’ के बारे में सुना है? इसका गुरु नानक से क्या संबंध है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

डेंगू बुखार


संदर्भ:

पंजाब में ‘डेंगू बुखार’ (Dengue fever) से पीड़ित मामलों की संख्या 16,129 तक पहुंच चुकी है। वर्ष 2016 के बाद, यह अब तक का सबसे अधिक संख्या है।

‘डेंगू बुखार’ फैलने का चरम समय:

‘डेंगू बुखार’ रोग का एक मौसमी पैटर्न होता है, अर्थात, यह पूरे साल भर एक समान तीव्रता से नहीं फैलता है, बल्कि इसका चरम समय मानसून के बाद आता है।

हर साल, जुलाई से नवंबर के बीच डेंगू के मामलों में तेजी देखी जाती है।

current affairs

 

राज्य में डेंगू फैलने का प्रमुख कारण:

राज्य में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने तथा वयस्क मच्छरों पर नियंत्रण करने हेतु ‘मकानों और अन्य स्थानों के भीतर छिडकाव करने तथा धूम्रीकरण (Fogging) करने जैसे उपाय पूरी तरह से अपर्याप्त हैं। डेंगू बुखार की जानकारी मिलने पर, संबंधित क्षेत्र में नियंत्रण के उपायों की अनदेखी की जाती है।

‘डेंगू’ के बारे में:

‘डेंगू वायरस (Dengue virus), मादा एडीज़ मच्छरों (Aedes mosquito) के काटने से फैलता है।

  • एडीज़ मच्छर केवल दिन के समय काटते है, और अधिकतम 400 मीटर की दूरी तक उड़ने में सक्षम होते हैं।
  • हालांकि मादा एडीज़ के काटने से आमतौर पर हल्की बीमारी ही होती है, लेकिन डेंगू का गंभीर संक्रमण कभी-कभी घातक साबित हो सकता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि हर साल 100-400 मिलियन डेंगू संक्रमण की वार्षिक घटनाएं होती हैं, इसकी वैश्विक घटनाओं में “हाल के दशकों में” नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि 16 डिग्री से कम तापमान पर डेंगू के मच्छर प्रजनन नहीं कर सकते हैं।

क्या आपने डेंगू बुखार की घटनाओं को काफी कम करने के लिए उपयोगी “वल्बाचिया पद्धति” (Wolbachia method) के बारे में सुना है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. डेंगू- कारण, लक्षण और प्रसार
  2. ‘वोल्बाचिया पद्धति’ किससे संबंधित है?
  3. हाल ही में इस पद्धति का परीक्षण कहाँ किया गया था?
  4. ‘वर्ल्ड मॉस्किटो प्रोग्राम’ (WMP) के बारे में

मेंस लिंक:

हाल ही में चर्चित “वल्बाचिया पद्धति” पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

G20 शिखर सम्मेलन


संदर्भ:

हाल ही में, वर्ष 2021 के G20 शिखर सम्मेलन का आयोजन इटली के राजधानी शहर ‘रोम’ में किया गया था।

शिखर सम्मेलन के उद्देश्य:

इस शिखर सम्मेलन के उद्देश्य, विश्व के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तीन-चौथाई से अधिक के लिए जिम्मेदार, 20 देशों का समूह (G20) द्वारा, गरीब देशों को बढ़ते तापमान के प्रभाव से निपटने में मदद करते हुए ‘उत्सर्जन’ में कटौती करने संबंधी तरीकों पर सामूहिक आधार और ठोस प्रतिबद्धताओं की तलाश करना था।

शिखर सम्मेलन के परिणाम:

  1. G20 समूह के नेताओं ने, ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने संबंधी प्रमुख ‘पेरिस समझौते में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की।
  2. शिखर सम्मेलन के आयोजक इटली और प्रचारकों की अपेक्षानुसार, इन नेताओं द्वारा उत्सर्जन कटौती के लिए वर्ष 2050 की स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने के बजाय “मध्य शताब्दी तक या उसके आसपास” तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य तक पहुंचने का वादा किया गया।
  3. G20 समूह के नेताओं ने वर्ष 2021 के अंत तक, विदेश स्थित नए धूलयुक्त कोयला संयंत्रों का वित्तपोषण रोकने पर सहमति भी व्यक्त की है।
  4. इनके द्वारा, जलवायु अनुकूलन लागतों को पूरा करने हेतु विकासशील देशों के लिए 100 बिलियन डॉलर जुटाने संबंधी अब तक की अधूरी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया गया है।
  5. इन नेताओं ने, “एक अधिक स्थिर और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय कर प्रणाली” बनाने के प्रयास के हिस्से के रूप में, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा न्यूनतम 15 प्रतिशत कर चुकाए जाने संबंधी एक समझौते पर मंजूरी दी।
  6. G20 समूह के नेताओं ने, ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ द्वारा शुरू किए गए विश्व के लिए “एक स्वास्थ्य उपागम” (One Health approach) के तहत अधिक टीकों की मान्यता देने और दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और अर्जेंटीना में स्थित ” mRNA केंद्रों” (mRNA Hubs) में वैक्सीन उत्पादन हेतु वित्त और प्रौद्योगिकी प्रदान करने का निर्णय लिया है।

G20 समूह के बारे में:

G20, विश्व की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है।

  • इस समूह इस समूह का विश्व की 85 प्रतिशत जीडीपी पर नियंत्रण है, तथा यह विश्व की दो-तिहाई जनसख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
  • G20 शिखर सम्मेलन को औपचारिक रूप से ‘वित्तीय बाजार तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था शिखर सम्मेलन’ के रूप में जाना जाता है।

G20 की उत्पत्ति:

वर्ष 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद, यह स्वीकार किया गया था कि उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली पर चर्चा के लिए भागीदारी को आवश्यकता है। वर्ष 1999 में, G7 के वित्त मंत्रियों द्वारा G20 वित्त मंत्रियों तथा केंद्रीय बैंक गवर्नरों की एक बैठक के लिए सहमत व्यक्त की गयी।

अध्यक्षता (Presidency):

G20 समूह का कोई स्थायी स्टाफ नहीं है और न ही इसका कोई मुख्यालय है। G20 समूह की अध्यक्षता क्रमिक रूप से सदस्य देशों द्वारा की जाती है।

  • अध्यक्ष देश, अगले शिखर सम्मेलन के आयोजन तथा आगामी वर्ष में होने वाली छोटी बैठकें के आयोजन के लिए जिम्मेवार होता है।
  • G20 समूह की बैठक में गैर-सदस्य देशों को मेहमान के रूप में आमंत्रित किया जा सकता हैं।
  • पूर्वी एशिया में वित्तीय संकट ने समूचे विश्व के कई देशों को प्रभावित करने के बाद G20 की पहली बैठक दिसंबर, 1999 में बर्लिन में हुई थी।

G20 के पूर्ण सदस्य:

अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ।

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बदलते समय में G20 समूह की प्रासंगिकता:

  • वैश्वीकरण में वृद्धि और विभिन्न मुद्दों की जटिलता के मद्देनजर, हाल के G20 शिखर सम्मेलनों में वृहत् अर्थव्यवस्थाओं और व्यापार पर ध्यान केंद्रित किए जाने के साथ-साथ, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक प्रभाव डालने वाले – विकास, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा, स्वास्थ्य, आतंकवाद विरोधी, प्रवासन और शरणार्थी जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • G20 समूह द्वारा, इन वैश्विक मुद्दों को हल करने की दिशा में अपने योगदान के माध्यम से एक समावेशी और संधारणीय विश्व बनाने का प्रयास किया जाता रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘शेरपा’ (Sherpas) के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. G20 बनाम G20 + बनाम G7 बनाम G8
  2. G20 के उद्देश्य तथा इसके उप-समूह
  3. सदस्य देशों के भौगोलिक स्थिति का अवलोकन

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि हाल ही में जी 20 शिखर सम्मेलन मात्र वार्ता हेतु मंच बन कर रह गए हैं? आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।1. G20 बनाम G20+ बनाम G7 बनाम G8।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

CEEW का ‘जलवायु भेद्यता सूचकांक’


संदर्भ:

हाल ही में, एक पर्यावरण थिंक टैंक ‘ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद्’ (Council on Energy, Environment and Water – CEEW) द्वारा अपनी तरह का पहला जिला-स्तरीय ‘जलवायु भेद्यता आकलन’, या ‘जलवायु भेद्यता सूचकांक’ (Climate Vulnerability Index CVI) तैयार किया गया है।

‘जलवायु भेद्यता आकलन’ के तहत, CEEW द्वारा  चक्रवात, बाढ़, गर्मी की लहरों, सूखे आदि जैसी चरम मौसम घटनाओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता का आकलन करने हेतु भारत के 640 जिलों का विश्लेषण किया है।

‘जलवायु भेद्यता सूचकांक’ के प्रमुख निष्कर्ष:

  • असम, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार राज्य, भारत में बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी चरम जलवायु घटनाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
  • 27 भारतीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ‘चरम जलवायु’ संबंधी घटनाओं की चपेट में हैं, तथा देश के 640 जिलों में से 463 जिले अत्यधिक बाढ़, सूखे एवं चक्रवातों जैसी चरम मौसम की घटनाओं के प्रति सुभेद्य हैं।
  • असम में धेमाजी एवं नागांव, तेलंगाना में खम्माम, ओडिशा में गजपति, आंध्र प्रदेश में विजयनगरम, महाराष्ट्र में सांगली एवं तमिलनाडु में चेन्नई, भारत के सबसे संवेदनशील जिले हैं।
  • 80 प्रतिशत से अधिक भारतीय जलवायु जोखिम के प्रति संवेदनशील जिलों में निवास करते हैं, अर्थात देश में 20 में से 17 व्यक्ति जलवायु जोखिमों के प्रति सुभेद्य हैं, जिनमें से प्रत्येक पांच भारतीय अत्यधिक सुभेद्य क्षेत्रों में निवास करते हैं।
  • भारत के पूर्वोत्तर के राज्य बाढ़ के प्रति अधिक संवेदनशील हैं, जबकि दक्षिण एवं मध्य राज्य अत्यधिक सूखे की चपेट में हैं।

जिलों का आकलन करने की विधि:

सूचकांक में, किसी राज्य या जिले की तैयारियों का आकलन करते समय कुछ संकेतकों को ध्यान में रखा गया है।

इसमें चक्रवात और बाढ़ के दौरन आश्रय-स्थलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और चरम मौसम की घटना से पहले, घटना के दौरान और बाद व्यक्तियों और पशुओं को सुरक्षित करने, भोजन का प्रबंध करने जैसी ‘मानक संचालन प्रक्रियाओं’ को अद्यतन करने सहित सरकारी तंत्र की उपलब्धता तथा प्रशासन द्वारा जीवन और आजीविका की क्षति को रोकने हेतु की जा रही कार्यवाही हेतु आपदा प्रबंधन योजनाओं, शमन रणनीतियों आदि को शामिल किया गया है।

सूचकांक की प्रासंगिकता:

यह जलवायु- अभेद्य समुदायों, अर्थव्यवस्थाओं और बुनियादी ढांचे के माध्यम से ‘अनुकूलन’ और ‘तन्यकता’ (resilience) में वृद्धि करने हेतु महत्वपूर्ण कमजोरियों को मापने तथा योजना रणनीतियों को तैयार करने में मदद करता है।

  • इस अध्ययन में ‘जलवायु चरम स्थिति’ को अलग-थलग करने के बजाय, बाढ़, चक्रवात और सूखा संबंधी जल-मौसमी आपदाओं के संयुक्त जोखिम और उसके प्रभाव को केंद्र में रखा गया है।
  • इस अध्ययन में, भूकंप जैसी अन्य प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में नहीं रखा गया है।

जलवायु भेद्यता सूचकांक में दिए गए सुझाव:

  • जिला स्तर पर महत्वपूर्ण कमजोरियों का मानचित्रण करने, तथा गर्मी और पानी की कमी, फसल हानि, वेक्टर-जनित जोखिमों, और जैव विविधता विनाश और चरम जलवायु घटनाओं की बेहतर पहचान, आकलन करने और योजना-निर्माण हेतु एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले ‘जलवायु जोखिम एटलस’ (Climate Risk Atlas CRA) विकसित की जानी चाहिए।
  • पर्यावरण को जोखिम मुक्त करने हेतु शुरू किए गए अभियानों के समन्वय हेतु एक केंद्रीकृत जलवायु-जोखिम आयोग की स्थापना की जाए।
  • विकास प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्वास, पुनर्स्थापन और पुन: एकीकरण पर केंद्रित ‘जलवायु-संवेदनशीलता’ को प्राथमिकता देते हुए ‘परिदृश्य बहाली’ का कार्य आरंभ किया जाए।
  • अनुकूलन क्षमता बढ़ाने हेतु अवसंरचना परियोजनाओं में ‘जलवायु जोखिम रूपरेखा’ को शामिल किया जाए।
  • एक प्रभावी जोखिम स्थांतरण तंत्र को जलवायु जोखिमों से एकीकृत करने हेतु नवीन CVI-आधारित वित्तपोषण उपकरणों को तैयार करके जलवायु जोखिम से संबंधित अनुकूलन वित्तपोषण उपलब्ध किया जाए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

 नासा का परसिवरेंस रोवर


संदर्भ:

नासा का परसिवरेंस मार्स रोवर (Perseverance Mars rover), हाल ही में अपने पहले “सौर संयोजन” ब्लैकआउट (Solar Conjunction blackout) से बाहर निकल आया है और मंगल ग्रह पर अपना कार्य पूरा करने में लग गया गया है।

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, पृथ्वी के दृष्टिकोण से, मंगल ग्रह के सूर्य के पीछे चले जाने पर, कार के आकार के परसिवरेंस मार्स रोवर और अन्य मंगल अंतरिक्ष यानों को लगभग दो सप्ताह तक अपना कार्य रोकना पड़ा था।

ग्रहों के इस संरेखण को ‘सौर संयोजन’ (Solar Conjunction) के रूप में जाना जाता है। इस परिघटना के दौरान, पृथ्वी से मंगल के लिए भेजे जाने वाले निर्देशों में गड़बड़ी होने की संभावना रहती है, इसलिए नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस दौरान कोई जोखिम नहीं लेती हैं।

‘परसिवरेंस रोवर’ के बारे में:

नासा के परसिवरेंस रोवर द्वारा मंगल ग्रह के ‘जेज़ेरो क्रेटर’ (Jezero Crater) का अन्वेषण किया जा रहा है, और साथ ही यह, ग्रह की सतह से चट्टानों का पहला नमूना एकत्र करने का प्रयास कर रहा है।

परसिवरेंस रोवर (Perseverance rover) को, जुलाई 2020 में ‘यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस V’ (Atlas V) से लॉन्च किया गया था।

मिशन का महत्व:

  1. परसिवरेंस रोवर में MOXIE अथवा मार्स ऑक्सीजन ISRU एक्सपेरिमेंट नामक एक विशेष उपकरण लगा है, जो मंगल ग्रह पर कार्बन-डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके पहली बार आणविक ऑक्सीजन का निर्माण करेगा। (ISRU- In Situ Resource Utilization, अर्थात स्व-स्थानिक संशाधनो का उपयोग)
  2. इस मिशन पर एक, ‘इंजेन्युटी’ (Ingenuity) नामक एक हेलीकॉप्टर भी भेजा गया है, यह मंगल ग्रह पर उड़ान भरने वाला पहला हेलीकॉप्टर होगा।
  3. यह मिशन, पृथ्वी पर परिष्कृत प्रयोगशालाओं में विश्लेषण करने हेतु, मंगल ग्रह से चट्टान के नमूनों को लाने का पहला नियोजित प्रयास है। इसका उद्देश्य मंगल ग्रह पर प्राचीन सूक्ष्मजीवीय जीवन के खगोलीय साक्ष्यों की खोज तथा वर्तमान या अतीत में जीवन-संकेतों की खोज करना है।

मिशन के कुछ प्रमुख उद्देश्य:

  • प्राचीन सूक्ष्मजीवीय जीवन के खगोलीय साक्ष्यों की खोज करना।
  • वापसी में पृथ्वी पर लाने के लिए चट्टानों तथा रेगोलिथ (Reglolith) के नमूने एकत्र करना है।
  • मंगल ग्रह पर एक प्रयोगात्मक हेलीकाप्टर उतारना।
  • मंगल ग्रह की जलवायु और भूविज्ञान का अध्ययन करना।
  • भविष्य के मंगल मिशनों के लिए प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करना।

मंगल ग्रह के बारे में हालिया रुचि का कारण:

  • मंगल ग्रह, पृथ्वी के काफी नजदीक (लगभग 200 मिलियन किमी दूर) पर स्थित है।
  • यह एक ऐसा ग्रह है, जिस पर मनुष्य, भ्रमण करने या अधिक समय तक रहने की इच्छा कर सकता है।
  • मंगल ग्रह पर अतीत में बहता हुए पानी और वातावरण होने के साक्ष्य मिले हैं; और संभवतः इस ग्रह पर कभी जीवन के लिए उपयुक्त स्थितियां भी मौजूद थी।
  • यह ग्रह, व्यावसायिक यात्रा के लिए भी उपयुक्त हो सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप मंगल ग्रह के वायुमंडल की संरचना, इतिहास, वातावरण, गुरुत्वाकर्षण के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगल मिशन
  2. पर्सविरन्स रोवर – उद्देश्य
  3. पर्सविरन्स रोवर पर उपकरण
  4. UAE के ‘होप’ मिशन तथा चीन के तियानवेन -1 अंतरिक्ष यान के बारे में
  5. पाथफाइंडर मिशन

मेंस लिंक:

परसिवरेंस रोवर’ मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


पंजाब में ‘सिंधु डॉल्फ़िन’ का संरक्षण

पंजाब की वन्यजीव संरक्षण शाखा द्वारा ‘सिंधु डॉल्फ़िन’ (Indus dolphins) और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है।

सिंधु डॉल्फिन के बारे में:

  • ‘सिंधु नदी डॉल्फ़िन’ के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा ‘लुप्तप्राय’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • सिंधु नदी डॉल्फ़िन को 2019 में पंजाब का ‘राज्य जलीय जानवर’ घोषित किया गया था।
  • ये डॉल्फ़िन प्रजाति मुख्यतः पाकिस्तान में पाई जाती है। वर्ष 2007 में, पंजाब के ‘हरिके वन्यजीव अभयारण्य’ और ‘निचली ब्यास नदी’ में सिंधु डॉल्फ़िन की बची-खुची लेकिन वर्धनक्षम आबादी देखी गयी थी।
  • सिंधु डॉल्फ़िन, कार्यात्मक रूप से अंधी होती हैं और मार्गनिर्देशन, संचार और शिकार (झींगा मछली, कैटफिश) करने के लिए प्रतिध्वनि (echolocation) पर निर्भर होती हैं।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और यह जलमार्ग, ईरान और ओमान को विभाजित करता है।

  • इस जलडमरूमध्य के उत्तरी तट पर ईरान, और दक्षिण में, संयुक्त अरब अमीरात तथा ओमान का एक विदेशी अंतःक्षेत्र ‘मुसंडम’ (Musandam) स्थित है।
  • सबसे संकीर्ण बिंदु पर ‘जलडमरूमध्य’ की चौड़ाई 21 मील (33 किमी) है, किंतु इससे गुजरने वाले जहाज-मार्ग (शिपिंग लेन) की चौड़ाई मात्र दो मील (तीन किमी) है।

current affairs

 


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