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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 25 October 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-III

1. भारतीय नौसेना के ‘सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र’ में ‘संपर्क अधिकारी’

2. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा

 

सामान्य अध्ययन-III

1. 23 अक्टूबर- अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस

2. नशीली दवाओं के सेवन पर नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष

3. असम में घोषित विदेशियों के लिए डिटेंशन सेंटर

4. मॉरीशस का FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने का भारत के लिए महत्व

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. एम्बरग्रीस

2. गोरिया

3. एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

भारतीय नौसेना के ‘सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र’ में ‘संपर्क अधिकारी’


संदर्भ:

हाल ही में, नीदरलैंड ने ‘समुद्री प्रक्षेत्र जागरूकता’ और ‘सूचना साझा’ करने के लिए भारतीय नौसेना के ‘सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र’ (Information Fusion Centre for Indian Ocean Region: IFC-IOR) में एक ‘संपर्क अधिकारी’ (Liaison Officer- LO) तैनात करने की इच्छा व्यक्त की है।

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IFC-IOR के बारे में:

  • भारतीय नौसेना के ‘सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र’ (Information Fusion Centre for Indian Ocean Region: IFC-IOR) को वर्ष 2018 में समुद्री मुद्दों पर हिंद महासागर क्षेत्र में अवस्थित देशों के साथ समन्वय और समुद्री आंकड़ों के क्षेत्रीय भंडार के रूप में कार्य करने हेतु स्थापित किया गया था।
  • वर्तमान में, IFC-IOR , विश्व भर में 21 भागीदार देशों और 22 बहु-राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ संबंध स्थापित कर चुका है।
  • यह, भारत में हरियाणा राज्य के गुरुग्राम में स्थित है।

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संपर्क अधिकारी’ की भूमिका एवं कार्य:

  • संपर्क अधिकारी (Liaison Officer- LO), पूर्णकालिक रूप से ‘सूचना संलयन केंद्र’ पर तैनात रहेगा, और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में ‘समुद्री डोमेन जागरूकता’ (MDA) बढ़ाने हेतु सीधे भारतीय सशस्त्र बलों और सहयोगी देशों के सहकर्मी संपर्क अधिकारियों के साथ कार्य करेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप यू.के. कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (U.K. Carrier Strike Group – CSG) के बारे में जानते हैं?

 

इंस्टालिंक्स:

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IFC- IOR क्या है?
  2. क्षेत्रीय समुद्री सूचना संलयन केंद्र (RMIFC) क्या है?
  3. EMASOH की स्थापना किसने की?
  4. फारस की खाड़ी तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की अवस्थिति

मेंस लिंक:

हिंद महासागर आयोग में पर्यवेक्षक की स्थिति भारत को अपने रणनीतिक उद्देश्यों को सुरक्षित करने में किस प्रकार सहायक होगी? चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा


संदर्भ:

हाल ही में, ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (China-Pakistan Economic Corridor – CPEC) प्राधिकरण के प्रमुख ने कई-अरब डॉलर की ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ परियोजना को ‘पाकिस्तान की आर्थिक जीवन रेखा’ बताते हुए अमेरिका पर इसको नुकसान पहुचाने का आरोप लगाया है।

पृष्ठभूमि:

पाकिस्तान, चीन के द्वारा अन्य देशों में किए जा रहे विकास हेतु वित्तपोषण पाने वाला सातवां सबसे बड़ा देश है। ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ के भाग के रूप में चीन द्वारा पाकिस्तान में 27.3 अरब डॉलर की 71 परियोजनाओं को वित्त-पोषित किया जा रहा है।

CPEC के बारे में:

  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), कई-अरब डॉलर की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) की प्रमुख परियोजना के तहत, पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लंबी एक वाणिज्यिक परियोजना हैl
  • यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य चीन द्वारा वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से दुनिया विश्व में बीजिंग के प्रभाव को बढ़ाना है।
  • इस लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन का निर्माण किया जाना शामिल है।
  • इस प्रस्तावित परियोजना को भारी-सब्सिडी वाले ऋणों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा। पाकिस्तान की सरकार के लिए यह ऋण चीनी बैंकिंग दिग्गजों, जैसे एक्जिम बैंक ऑफ चाइना, चीन डेवलपमेंट बैंक तथा चीन के औद्योगिक और वाणिज्यिक बैंक द्वारा प्रदान किया जाएगा।

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भारत की चिंताएं:

  • यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान से होते हुए गुजरेगा।
  • यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर भारतीय संप्रुभता के लिए नुकसानदेय साबित होगी l
  • CPEC, ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अपनी आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित और छोटा करने के साथ-साथ हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने संबंधी चीनी योजना पर आधारित है। अतः यह माना जाता है कि CPEC के परिणामस्वरूप हिंद महासागर में चीनी मौजूदगी भारत के प्रभाव पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी।
  • यातायात और ऊर्जा की मिली-जुली इस परियोजना के तहत समुद्र में बंदरगाह को विकसित किए जाएंगे, जिससे भारतीय हिंद महासागर तक चीन की पहुंच का रास्ता खुलेगाl ग्वादर, बलूचिस्तान के अरब सागर तट पर स्थित हैl पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम का यह हिस्सा दशकों से अलगाववादी विद्रोह का शिकार हैl

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. CPEC क्या है?
  2. BRI पहल क्या है?
  3. गिलगित- बाल्टिस्तान कहां है?
  4. पाकिस्तान और ईरान में महत्वपूर्ण बंदरगाह।

मेंस लिंक:

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) ढांचे पर भारत की चिंताओं पर चर्चा कीजिए। सुझाव दें कि भारत को इस गठबंधन से उत्पन्न चुनौतियों से कैसे निपटना चाहिए?

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

23 अक्टूबर- अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस


संदर्भ:

हर साल, 23 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ’ (International Snow Leopard Day) दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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पृष्ठभूमि:

वर्ष 2013 में 23 अक्टूबर को 12 देशों द्वारा ‘हिम तेंदुओं के संरक्षण’ पर ‘बिश्केक घोषणा’ (Bishkek Declaration) को अपनाया गया था, और इसी तारीख को प्रतिवर्ष ‘अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस’ के रूप में मनाए जाने के निर्णय लिया गया।

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हिम तेंदुआ (Snow Leopard) के बारे में:

  • वैज्ञानिक नाम: पैंथेरा अनकिया (Panthera uncia)
  • पर्यावास: हिम तेंदुए उत्तरी और मध्य एशिया के ऊँचे पहाड़ों (हिमालय क्षेत्र सहित) में पाए जाते हैं।
  • कुल संख्या: वन्य क्षेत्रों में हिम तेंदुओं की संख्या मात्र 3,920 से 6,390 तक बची है।
  • हिम तेंदुआ रेंज: हिम तेंदुओं के पर्यावास सीमा बारह देशों में फैली हुई है- अफगानिस्तान, भूटान, चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान।

हिम तेंदुआ या ‘स्नो लेपर्ड’ को ‘पहाड़ों का भूत’ (Ghost of the Mountains) भी कहा जाता है, क्योंकि इनके संकोची स्वभाव और त्वचा के रंग के कारण बर्फीले वातावरण में इन्हें देख पाना बहुत ही मुश्किल होता है।

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संरक्षण स्थिति: वर्ष 2017 तक ‘हिम तेंदुओं’ को ‘लुप्तप्राय प्रजाति’ (Endangered) माना जाता था, लेकिन बाद में इनकी स्थिति को ‘संवेदनशील’ (Vulnerable) घोषित कर दिया गया।

संरक्षण के प्रयास- राष्ट्रीय स्तर:

रिपोर्टों के अनुसार, भारत में लगभग 450-500 हिम तेंदुएं पाए जाते हैं, जिन्हें देश के ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में देखा जा सकता है।

  1. भारत सरकार प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (Project Snow Leopard- PSL) के माध्यम से हिम तेंदुए और उसके निवास स्थान का संरक्षण कर रही है।
  2. भारत, वर्ष 2013 से ‘वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण’ (Global Snow Leopard and Ecosystem Protection- GSLEP) कार्यक्रम में भी भागीदार रहा है।
  3. हिम तेंदुआ संरक्षण के लिए, भारत ने तीन बड़े परिदृश्यों को चिन्हित किया है: लद्दाख एवं हिमाचल प्रदेश में हेमिस- स्पिति, (Hemis-Spiti),उत्तराखंड के गंगोत्री-नंदा देवी और सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश में विस्तृत खंगचेंदजोंगा- तवांग (Khangchendzonga – Tawang)।
  4. हिम तेंदुआ, पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बहाली कार्यक्रम (Recovery Programme) हेतु 22 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में सम्मिलित है।
  5. हिम तेंदुआ और उसके वास स्थान के संरक्षण हेतु समावेशी और भागीदारी के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2009 में प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (Project Snow Leopard- PSL) की शुरुआत की गयी थी।
  6. सुरक्षित हिमालय (SECURE Himalaya): वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF)-संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा उच्च तुंगता वाले क्षेत्रों में जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर स्थानीय समुदायों की निर्भरता को कम करने हेतु इस परियोजना को वित्त पोषित किया जा रहा है। यह परियोजना अब हिम तेंदुआ रेंज के चार राज्यों, अर्थात् जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम में कार्यरत है।
  7. हिम तेंदुओं की सुरक्षा के लिए “हिमालसंरक्षक” (HimalSanrakshak) नामक एक सामुदायिक स्वयंसेवी कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण प्रयास:

  • वर्ष 2013 में, ‘बिश्केक घोषणापत्र’ के अंतर्गत वर्ष 2020 तक हिम तेंदुए की व्यवहार्य आबादी सहित न्यूनतम 20 हिम तेंदुआ परिदृश्यों को संरक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, और इसके तहत ‘वैश्विक हिम तेंदुए और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण कार्यक्रम’ (Global Snow Leopard and Ecosystem Protection Program – GSLEP) का भी गठन किया गया था।
  • ‘वैश्विक हिम तेंदुए और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण कार्यक्रम’ (GSLEP) के तहत हिम तेंदुए के संरक्षण को केंद्र में रखते हुए उच्च-पर्वतीय क्षेत्रों के विकास संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाता है।

हिम तेंदुए के संरक्षण हेतु चुनौतियां:

पर्यावासों का लगातार नष्ट होना, अवैध शिकार और समुदायों के साथ संघर्ष में वृद्धि।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘स्नो लेपर्ड ट्रस्ट’ के बारे में जानते हैं? इसके उद्देश्य क्या हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IUCN के तहत हिम तेंदुए की संरक्षण स्थिति
  2. प्रोजेक्ट हिम तेंदुए के बारे में
  3. भारत में हिम तेंदुए- वितरण और संरक्षण केंद्र
  4. GSLEP के बारे में
  5. बिश्केक घोषणा के बारे में

मेंस लिंक:

भारत में हिम तेंदुए की प्रजातियों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

नशीली दवाओं के सेवन पर नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष


संदर्भ:

हाल ही में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा ‘नशीली दवाओं के सेवन पर नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष’ (National Fund to Control Drug Abuse) का उपयोग, केवल पुलिसिंग गतिविधियों के लिए किए जाने की बजाय, नशामुक्ति कार्यक्रमों को चलाने हेतु किए जाने की सिफारिश की गयी है।

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‘नशीली दवाओं के सेवन पर नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष’ के बारे में:

‘नशीली दवाओं के सेवन पर नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष’ (National Fund to Control Drug Abuse) की स्थापना ‘स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम’, 1985 / नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (Narcotic Drugs And Psychotropic Substances Act – NDPS) , 1985 के प्रावधान के अनुसार की गयी थी।

  • इस कोष में सांकेतिक तौर पर 23 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गयी।
  • वित्तीयन / फंडिंग: NDPS एक्ट के तहत, जब्त की गई किसी भी संपत्ति की बिक्री की आय, किसी व्यक्ति और संस्था द्वारा किए गए अनुदान, और फंड में निवेशित राशि से होने वाली आय, नशीली दवाओं के सेवन पर नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष’ में जमा की जाती है।
  • कोष का उपयोग: अधिनियम में कहा गया है कि इस कोष का उपयोग नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी, नशेड़ियों के पुनर्वास और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए किया जाएगा।

‘वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट’ 2021

(World Drug Report)

  1. पिछले वर्ष, वैश्विक स्तर पर लगभग 275 मिलियन लोगों द्वारा नशीली दवाओं इस्तेमाल किया गया, और 36 मिलियन से अधिक लोग, नशीली दवाओं के उपयोग संबंधी विकारों से पीड़ित थे।
  2. अधिकांश देशों में महामारी के दौरान ‘भांग’ के उपयोग में वृद्धि देखी गई है।
  3. इसी अवधि में फार्मास्युटिकल दवाओं के गैर-चिकित्सा उपयोग में भी वृद्धि हुई है।
  4. नवीनतम वैश्विक अनुमानों के अनुसार, 15 से 64 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 5.5 प्रतिशत आबादी द्वारा पिछले वर्ष के दौरान, कम से कम एक बार नशीली दवाओं का उपयोग किया गया है।
  5. अनुमान है, कि वैश्विक स्तर पर 11 मिलियन से अधिक लोग दवाओं का इंजेक्शन लगाते हैं – इनमे से आधे लोग ‘हेपेटाइटिस सी’ से पीड़ित हैं।
  6. नशीली दवाओं के उपयोग के कारण होने वाली बिमारियों के लिये ‘ओपिओइड’ (Opioids) पदार्थ सर्वाधिक जिम्मेदार बने हुए है।

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नशीली दवाओं के सेवन के प्रमुख कारण:

  1. संग-साथ के लोगो द्वारा नशीली दवाओं का सेवन किया जाना
  2. आर्थिक तनाव में वृद्धि
  3. सांस्कृतिक मूल्यों में परिवर्तन
  4. अजमाना / प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल
  5. नसों पर प्रभाव डालने वाला सुख
  6. अप्रभावी पुलिसिंग

भारत में नशीली दवाओं के सेवन संबंधी के मामले:

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ‘भारत में अपराध 2020 रिपोर्ट’ के अनुसार, वर्ष 2019 में एनडीपीएस अधिनियम के तहत कुल 59,806 मामले दर्ज किए गए थे।
  • प्राप्त आंकड़ो के अनुसार, वर्ष 2019 में, देश में भांग तथा अफीम का उपयोग करने वालों की संख्या क्रमशः 3.1 करोड़ तथा 2.3 करोड़ थी।

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मादक पदार्थों की तस्करी की समस्या से निपटने हेतु भारत सरकार की नीतियाँ और पहलें:

  1. विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, देश के 272 जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान या ड्रग्स-मुक्त भारत अभियान को 15 अगस्त 2020 को हरी झंडी दिखाई गई।
  2. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018-2025 की अवधि के लिए ‘नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने हेतु राष्ट्रीय कार्ययोजना’ (National Action Plan for Drug Demand Reduction- NAPDDR) का कार्यान्वयन शुरू किया गया है।
  3. सरकार द्वारा नवंबर, 2016 में नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) का गठन किया गया है।
  4. सरकार द्वारा नारकोटिक ड्रग्स संबंधी अवैध व्यापार, व्यसनी / नशेड़ियों के पुनर्वास, और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जनता को शिक्षित करने आदि में होने वाले व्यय को पूरा करने हेतु “नशीली दवाओं के दुरुपयोग नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष” (National Fund for Control of Drug Abuse) नामक एक कोष का गठन किया गया है ।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

7 दिसंबर, 1987 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 26 जून के लिए नशीली दवाओं के सेवन और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में चुना गया था। इसे क्यों चुना गया? इसके उद्देश्य क्या थे?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNODC के बारे में
  2. “नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता” की योजना का अवलोकन
  3. नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की संरचना
  4. नशीली दवाओं के दुरुपयोग के नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष
  5. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बारे में
  6. नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस और इस वर्ष की थीम

मेंस लिंक:

भारत, मादक पदार्थों की तस्करी की चपेट में है। इसके कारणों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। नशीली दवाओं की समस्या से निपटने में सरकार की भूमिका पर भी टिप्पणी करिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

असम में घोषित विदेशियों के लिए डिटेंशन सेंटर


संदर्भ:

असम सरकार ने घोषित विदेशियों के लिए एक ‘स्टैंडअलोन डिटेंशन सेंटर’ को पूरा करने के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 45 दिनों की समय सीमा को पूरा कर लिया है।

संबंधित प्रकरण:

अदालत ने 11 अगस्त को राज्य सरकार के लिए पश्चिमी असम के गोलपारा जिले के ‘मटिया’ में डिटेंशन सेंटर, जिसे अब ट्रांजिट कैंप कहा जाता है, का निर्माण पूरा करने और 45 दिनों के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा, मौजूदा हिरासत केंद्रों (Detention Centre) में कैद 177 व्यक्तियों को अलग-अलग केंद्रीय जेलों में स्थानांतरित करने को भी कहा गया था।

‘घोषित विदेशी’ कौन है?

‘घोषित विदेशी’ (Declared Foreigners-DF), वे व्यक्ति होते हैं, जो राज्य पुलिस की सीमा शाखा द्वारा अवैध अप्रवासी के रूप में चिह्नित किए जाने पर अपनी नागरिकता का प्रमाण देने में विफल रहते है, और उन्हें किसी एक ‘विदेशी अधिकरण’ (Foreigners’ Tribunal- FT) द्वारा ‘विदेशी’ घोषित कर दिया जाता है।

  • ‘गैर-नागरिक’ ठहराए गए लोगों को हिरासत केंद्रों में भेज दिया जाता है।
  • असम पुलिस की सीमा शाखा द्वारा ऐसे लोगों को विदेशी होने के संदेह में नोटिस जारी करने के पश्चात इन पर मुकदमा चलाया जाता है।

‘विदेशी अधिकरण’ क्या होते है?

यह ‘विदेशी (अधिकरण) आदेश’ [Foreigners (Tribunals) Order], 1964 के तहत स्थापित अर्ध-न्यायिक निकाय होते हैं।

  • ये अधिकरण, देश में अवैध रूप से रहने वाले व्यक्ति के बारे यह निर्धारित करते हैं, कि वह ‘”विदेशी” है अथवा नहीं।
  • संरचना: ‘विदेशी अधिकरण’ के सदस्यों में, असम न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी, न्यायिक अनुभव रखने वाले सिविल सेवक, (जो सचिव या अतिरिक्त सचिव के पद से नीचे सेवानिवृत्त नहीं हुआ हो) तथा न्यूनतम सात वर्ष के वकालत अनुभव वाले 35 वर्ष से कम आयु के अधिवक्ता को शामिल किया जाता है।

विदेशी अधिकरणों को स्थापित करने की शक्ति:

  • गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा विदेशी (अधिकरण) आदेश, 1964 में संशोधन किए जाने के पश्चात सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ज़िला मजिस्ट्रेटों को ट्रिब्यूनल स्थापित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • इसके पूर्व, ट्रिब्यूनल स्थापित करने की शक्तियाँ केवल केंद्र के पास निहित थीं।

 ‘विदेशी अधिकरणों’ में अपील करने का अधिकार

  • संशोधित आदेश [विदेशी (अधिकरण) संशोधन आदेश 2019] में सभी व्यक्तियों को अधिकरणों में अपील करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • इसके पूर्व, केवल राज्य प्रशासन ही किसी संदिग्ध के खिलाफ इन अधिकरणों में मामला दायर कर सकता था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

असम के अलावा और अन्य किन राज्यों में डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं? जानकारी के लिए पढ़िए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवैध प्रवासी (अधिकरण द्वारा निर्धारण) अधिनियम बनाम विदेशी (अधिकरण) आदेश 1964
  2. इस आदेश के अंतर्गत प्रमाण का दायित्व
  3. अधिकरण द्वारा हल किये जाने वाले विषय
  4. अधिकरण की संरचना।
  5. अधिकरण तथा न्यायालय में अंतर
  6. असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक स्थिति।
  7. शरणार्थी बनाम अवैध प्रवासी।
  8. विदेशियों के लिए उपलब्ध मौलिक अधिकार तथा अन्य संवैधानिक प्रावधान
  9. मानवाधिकार बनाम मौलिक अधिकार

मेंस लिंक:

देश में अवैध गैर-प्रवासियों से निपटने के लिए कानूनों की संक्षिप्त चर्चा कीजिए। विदेशी (अधिकरण) आदेश, 1964 में संशोधन क्यों किया गया?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

मॉरीशस का FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने का भारत के लिए महत्व


संदर्भ:

हाल ही में, ‘वित्तीय कार्रवाई कार्यबल’ (Financial Action Task Force- FATF)  ने मॉरीशस को अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ (Grey List) से बाहर कर दिया है।

current affairs

मॉरीशस को FATF की ‘बढ़ी हुई निगरानी प्रक्रिया’ से बाहर किए जाने का कारण:

मॉरीशस ने अपनी ‘एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग’ और ‘आतंकी वित्तपोषण प्रक्रिया’ की प्रभावशीलता को मजबूत किया है, और मॉरीशस द्वारा फरवरी 2020 में FATF द्वारा चिह्नित की गई रणनीतिक कमियों के संबंध में अपनी कार्य योजना में प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए संबंधित तकनीकी कमियों को दूर किया गया है।

current affairs

मॉरीशस को इस सूची में क्यों शामिल किया गया था?

कई वर्षों से, मॉरीशस में सीमित नियामक निरीक्षण के कारण ‘विदेशी संस्थागत निवेश’ (FPI) के लिए मनी लॉन्ड्रिंग मार्ग होने की आशंकाएं रही हैं।

भारत के लिए निहितार्थ:

  • इस कदम से, भारतीय गैर-बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवा कंपनियों को, मॉरीशस में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा स्थापित किए गए फंडों और अन्य संवाहकों (Vehicles) से ‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’ प्राप्त करने में सुगमता होगी। यह निर्णय, परोक्ष रूप से द्वीप राष्ट्र से भारत में उच्च निवेश होने का कारण बन सकता है।
  • यह भी उम्मीद की जाती है कि, अब कस्टोडियन बैंकों द्वारा FPI और FDI के रूप में आने वाले मॉरीशस आधारित संवाहकों के ‘लाभप्रद स्वामित्व’ (Beneficial Ownership) पर जांच भी कम होगी।

current affairs

पृष्ठभूमि:

मॉरीशस, ‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’ (FDI) के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक रहता है किंतु हाल ही में सिंगापुर, केमैन आइलैंड आदि जैसे अन्य ‘अधिकार-क्षेत्रों’ से पिछड़ रहा था। इसके लिए आंशिक रूप से ‘भारत के साथ कर संधि में संशोधन’ और ‘वित्तीय कार्रवाई कार्यबल’ (FATF)  द्वारा ‘ग्रे लिस्ट’ रखे जाने को जिम्मेदार माना जाता है। मॉरीशस को फरवरी 2020 में ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा गया था। ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल होने के बाद, मॉरीशस से एफडीआई प्रवाह 2019-20 में 57,785 करोड़ रुपये से घटकर 2020-21 में 41,661 करोड़ रुपये हो गया था।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि भारत द्वारा विवादित ‘चागोस द्वीप समूह’ पर मॉरीशस के दावे का समर्थन किया जाता है। ‘चागोस द्वीप समूह’ पर ‘डिएगो गार्सिया’ सैन्य अड्डा स्थित है, जोकि हिंद महासागर में ब्रिटेन और अमेरिका का प्रमुख सैन्य अड्डा है। इस विवाद के बारे में जानिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


एम्बरग्रीस

परफ्यूम बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एम्बरग्रीस (Ambergris), एक ठोस और मोम जैसा पदार्थ होता है जो स्पर्म व्हेल की आँतों में उत्पन्न होता है।

  • स्पर्म व्हेल के पेट में, भोजन के अपचनीय हिस्से उसकी आंतों में पहुचकर आपस में गुंथ जाते हैं, और धीरे-धीरे एक ठोस पदार्थ में परिवर्तित हो जाते हैं।
  • स्पर्म व्हेल द्वारा उल्टी किए जाने पर यह ठोस और मोम जैसा पदार्थ बाहर निकलकर समुद्र की सतह से एक फुट नीचे तैरता रहता है। और कभी-कभी तट के समीप आकर इकठ्ठा हो जाता है।
  • इसके उच्च मूल्य के कारण इसे तैरता हुआ सोना कहा जाता है।

current affairs

 

गोरिया

गोरिया (Goria) असम का प्रजातीय स्थानिक मुस्लिम समुदाय है।

current affairs

एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल

एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (Extra Neutral Alchohol- ENA), चीनी उद्योग का उपोत्पाद है।

  • यह गन्ना प्रसंस्करण के अपशिष्ट शीरे से बनता है।
  • एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल, मादक पेय बनाने हेतु प्राथमिक कच्चा माल है।

विशेषताएं:

  • यह खाद्य-श्रेणी का एक रंगहीन अल्कोहल होता है जिसमें कोई अशुद्धि नहीं होती है।
  • यह गंधहीन और स्वादहीन होता है तथा आमतौर पर इसमें अल्कोहल की मात्रा 95 प्रतिशत से अधिक होती है।

अन्य अनुप्रयोग:

  • इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों जैसे- इत्र, हेयर स्प्रे आदि के निर्माण में एक आवश्यक घटक के रूप में किया जाता है।
  • छपाई उद्योग के लिए कुछ रोगन, पेंट और स्याही के उत्पादन तथा साथ-ही-साथ एंटीसेप्टिक्स, ड्रग्स, सिरप, मेडिकेटेड स्प्रे आदि जैसे फार्मास्यूटिकल उत्पादों में उपयोग किया जाता है।

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