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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 22 October 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. ला नीना

 

सामान्य अध्ययन-II

1. कोवैक्सिन को अब तक WHO का आपातकालीन उपयोग अनुमोदन नहीं मिलने का कारण

2. FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान

3. भारतनेट परियोजना।

 

सामान्य अध्ययन-III

1. उड़ान योजना

2. भारत का जीवाश्म ईंधन उत्पादन, ‘पेरिस समझौते’ के लक्ष्यों से अधिक

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. जिओरिसा मॉस्मईन्सिस

2. सखारोव पुरस्कार

3. बोवाइन मैस्टाइटिस

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ।

ला–नीना (La Niña)


संदर्भ:

हाल ही में ‘राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन’ (National Oceanic and Atmospheric Administration – NOAA) द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार, प्रशांत महासागर में ‘ला नीना’ (La Niña) की स्थिति फिर से विकसित हो गयी है।

बीच में अल-नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) की तटस्थ स्थिति के साथ ‘ला नीना’ परिघटनाओं का लगातार विकसित होना कोई असामान्य बात नहीं है, और इस स्थिति को “डबल-डिप” (Double-Dip) के रूप में जाना जाता है।

पृष्ठभूमि:

‘अल नीनो’ (El Niño) और ला नीना (La Niña) परिघटनाएं ‘अल-नीनो दक्षिणी दोलन (El Niño Southern Oscillation- ENSO)’ चक्र का एक हिस्सा हैं।

  • वर्ष 2020 में, अगस्त महीने के दौरान ‘ला नीना’ की स्थिति विकसित हुई थी और फिर अप्रैल 2021 में ENSO-तटस्थ स्थिति (ENSO-neutral conditions) के वापस विकसित होने पर यह समाप्त हो गई।
  • दिसंबर 2021 से फरवरी 2022 तक रहने वाले आगामी सर्दियों के मौसम में ‘ला नीना’ परिघटना दोबारा होने की 87% संभावना है।

‘अल नीनो’ और ‘ला नीना’ क्या हैं?

‘अल नीनो’ (El Niño) और ला नीना ‘(La Niña)’, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में होने वाली दो प्राकृतिक जलवायु परिघटनाएं हैं, और ये संपूर्ण विश्व में मौसमी स्थितियों को प्रभावित करती हैं।

  • ‘अल नीनो’ परिघटना के दौरान, ‘मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर’ में सतहीय तापमान में वृद्धि हो जाती है, और ‘ला नीना’ की स्थिति में, पूर्वी प्रशांत महासागर का सतहीय तापमान सामान्य से कम हो जाता है।
  • संयुक्त रूप से इन दोनों परिघटनाओं को ‘ENSO’ या ‘अल-नीनो दक्षिणी दोलन’ (El Niño Southern Oscillation) कहा जाता है।

अल नीनोपरिघटना की उत्पत्ति संबंधी कारण:

  1. अल नीनो की स्थिति, जलवायु प्रतिरूप (Climate Pattern) में कोई विसंगति होने पर निर्मित होती है।
  2. पश्चिम की ओर बहने वाली व्यापारिक हवाएं भूमध्य रेखा के समीप आने पर क्षीण हो जाती हैं और परिणामस्वरूप वायुदाब में परिवर्तन के कारण, सतही जल पूर्व दिशा में उत्तरी दक्षिण अमेरिका के तट की ओर बहने लगता है।
  3. मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागरीय क्षेत्रों में छह महीने से अधिक समय तक तापमान अधिक रहता हैऔर इसके परिणामस्वरूप ‘अल नीनो’ की स्थिति पैदा हो जाती है।

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ला-नीना के कारण मौसम में होने वाले बदलाव:

  1. ला-नीना के कारण, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका और मध्य एशिया में औसत से कम वर्षा होगी।
  2. पूर्वी अफ्रीका को सामान्य स्थितियों से अधिक सूखे का सामना करना पड़ सकता है, इसके साथ ही इस क्षेत्र में रेगिस्तान टिड्डियों के हमलों के कारण खाद्य सुरक्षा की स्थिति भयावह हो सकती है।
  3. ला-नीना के आने से दक्षिणी अफ्रीका में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।
  4. इससे दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तीव्रता में कमी हो सकती है, जिससे इस क्षेत्र में मौसम व्यापक रूप से प्रभावित होगा।
  5. इसके आने से दक्षिण पूर्व एशिया, कुछ प्रशांत द्वीप समूहों और दक्षिण अमेरिका के उत्तरी क्षेत्र में औसत से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है।
  6. ला-नीना के आने से भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होगी, जिससे देश के विभिन्न भागों में बाढ़ की प्रवणता में वृद्धि होगी।

current affairs

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ (National Supercomputing Mission– NSM) के अंतर्गत निर्मित सुपरकंप्यूटर परम शिवाय के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अल-नीनो क्या है?
  2. ला-नीना क्या है?
  3. ENSO क्या है?
  4. ये परिघटनाएँ कब होती हैं?
  5. एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया पर ENSO का प्रभाव।

मेंस लिंक:

ला-नीना मौसमी परिघटना के भारत पर प्रभाव संबंधी चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

 कोवैक्सिन को अब तक WHO का आपातकालीन उपयोग अनुमोदन नहीं मिलने का कारण


संदर्भ:

भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड दवारा कोविड-19 वैक्सीन के लिए ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) की ‘पूर्व-अहर्ता’ (pre-qualification) या ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (Emergency Use Listing – EUL) अनुमोदन संबंधी कार्यवाही प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है, और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारत सरकार की जल्दबाजी, कथित देरी के बारे में केवल अटकल पैदा कर रही है।

संबंधित प्रकरण:

भारत के स्वदेश-निर्मित टीके को ‘आपातकालीन उपयोग अधिकार’ मिलने में देरी इसलिए है, क्योंकि WHO द्वारा ‘कोवैक्सिन’ पर कुछ और सवाल उठाए गए हैं और इनके स्पष्टीकरण के लिए सवालों को भारत बायोटेक के पास भेजा गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वैक्सीन का मूल्यांकन करने से पहले ‘हैदराबाद स्थित जैव- प्रौद्योगिकी कंपनी’ द्वारा दी जारी जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है।

WHO के अनुमोदन की आवश्यकता:

‘भारत बायोटेक’ द्वारा निर्मित ‘कोवैक्सिन’ टीके को ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ की ‘पूर्व-अहर्ता’  या ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (Emergency Use Listing – EUL) अनुमोदन मिलने के बाद, यह वैक्सीन लगवाने वाले व्यक्तियों को उन देशों की यात्रा करने की अनुमति मिल जाएगी, जहाँ केवल पूरी तरह से टीकाकरण करवा चुके लोगों को ही देश में प्रवेश दिया जा रहा है।

इसके अलावा, WHO के अनुमति हासिल होने के बाद ‘भारत बायोटेक’ अपने टीके को उन देशों को भी निर्यात कर सकती है, जहाँ केवल डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुमोदित टीकों का उपयोग किया जा रहा है।

 

WHO की ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (EUL) के बारे में:

विश्व स्वास्थ्य संगठन’ की ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (Emergency Use Listing- EUL), गैर- लाइसेंसशुदा टीकों, चिकित्सा-विधानों (Therapeutics) तथा ‘परखनली में किए गए निदानों’ (in vitro diagnostics) का आकलन करने और सूचीबद्ध करने के लिए एक जोखिम-आधारित प्रक्रिया है।

इसका प्रमुख उद्देश्य, किसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान प्रभावित लोगों के लिए इन उत्पादों को उपलब्ध कराने संबंधी प्रकिया को तेज करना होता है।

  • यह सूची, उपलब्ध गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता और प्रदर्शन आंकड़ों के आधार पर विशिष्ट उत्पादों का उपयोग करने संबंधी स्वीकार्यता निर्धारित करने में संयुक्त राष्ट्र की इच्छुक खरीद एजेंसियों और सदस्य देशों की सहायता करती है।

WHO सूची में शामिल होने के लिए निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है:

  1. जिस बीमारी के लिए किसी उत्पाद को ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ में शामिल करने हेतु आवेदन किया गया है, वह बीमारी, गंभीर, जीवन के लिए तत्काल संकट उत्पन्न करने वाली, प्रकोप, संक्रामक रोग या महामारी फैलाने में सक्षम होनी चाहिए। इसके अलावा, उत्पाद को ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ मूल्यांकन हेतु विचार करने हेतु उचित आधार होने चाहिए, जैसेकि बीमारी से निपटने, अथवा आबादी के किसी उपभाग (जैसेकि, बच्चे) के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त उत्पाद उपलब्ध नहीं है।
  2. मौजूदा उत्पाद (टीके और दवाईयां), बीमारी को खत्म करने या प्रकोप को रोकने में विफल रहे हैं।
  3. उत्पाद का निर्माण, दवाओं और टीकों के मामले में वर्तमान अच्छी विनिर्माण पद्धतियों (Good Manufacturing Practices- GMP) का अनुपालन करते हुए और ‘इन विट्रो डायग्नोस्टिक्स’ (IVD) के मामले में कार्यात्मक ‘गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली’ (QMS) के तहत किया गया होना चाहिए।
  4. आवेदक को उत्पाद के विकास (IVD के मामले में उत्पाद की पुष्टि और सत्यापन) को पूरा करने के लिए वचनबद्ध होना तथा लाइसेंस प्राप्त होने के बाद उत्पाद के लिए WHO से पूर्व-योग्यता (prequalification) हासिल करने हेतु आवेदन करना आवश्यक है।

current affairs

 

 

इंस्टा जिज्ञासु:

आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (Emergency Use Authorisation – EUA) क्या है? भारत में इसे कैसे विनियमित किया जाता है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यूरोपीय संघ- संरचना और उद्देश्य।
  2. WHO की आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) के बारे में।
  3. लाभ
  4. अहर्ता

मेंस लिंक:

WHO की आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान


संदर्भ:

पाकिस्तान, ‘वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ (Financial Action Task Force- FATF)  की ‘ग्रे लिस्ट’ (Grey List) में फिलहाल बना रहेगा। इस सूची से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को दोबारा यह दिखाना होगा कि भारत द्वारा मोस्ट वांटेड ‘हाफिज सईद’ और ‘मसूद अजहर’ जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों और इनके नेतृत्व वाले समूहों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

आगे की कार्रवाई:

पेरिस स्थित ‘वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ (FATF) द्वारा, पाकिस्तान के लिए अपनी कार्य योजना में, आतंकवाद के वित्तपोषण की जांच करने और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी समूहों और उनके सहयोगियों के नेताओं और कमांडरों के खिलाफ मुकदमा चलाने को शामिल करने और बाकायदा की जा रही कार्यवाही को दिखाने को कहा गया है।

पृष्ठभूमि:

वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) द्वारा जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल किया गया था। उस समय से ही पाकिस्तान, इस सूची से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है।

पाकिस्तान ने, वर्ष 2018 में 27 एक्शन पॉइंट लागू करने के लिए एक समयसीमा निर्धारित की गई थी, जिसमे से यह अभी तक 26 एक्शन पॉइंट को लागू कर चुका है।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के बारे में:

  • FATF का गठन 1989 में जी-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में हुआ था। यह एक अंतर-सरकारी निकाय है।
  • यह एक ‘नीति-निर्माणक निकाय’ है जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर विधायी एवं नियामक सुधार करने हेतु आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति उत्पन्न करने के लिए कार्य करता है।
  • इसका सचिवालय पेरिस में ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Economic Cooperation and Development- OECD) मुख्यालय में स्थित है।

भूमिका एवं कार्य:

  1. शुरुआत में FATF को मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने संबंधी उपायों की जांच करने तथा इनका विकास करने के लिए स्थापित किया गया था।
  2. अक्टूबर 2001 में, FATF द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने संबंधी प्रयासों को शामिल करने हेतु अपने अधिदेश का विस्तार किया गया।
  3. अप्रैल 2012 में, इसके द्वारा सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार हेतु वित्तपोषण पर रोक लगाने को अपने प्रयासों में सम्मिलित किया गया।

संरचना:

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ / फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) वर्त्तमान में 39 सदस्य सम्मिलित हैं। इसके सदस्य विश्व के अधिकांश वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें 2 क्षेत्रीय संगठन – गल्फ ऑफ कोऑपरेशन कौंसिल (GCC) तथा यूरोपियन कमीशन (EC)- भी सम्मिलित हैं।

इसमें पर्यवेक्षक और सहयोगी सदस्य भी शामिल होते हैं।

ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट:

ब्लैक लिस्ट (Black List): आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों का समर्थन करने वाले तथा इन गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी वैश्विक प्रावधानों के साथ सहयोग नहीं करने वाले देशों (Non-Cooperative Countries or Territories- NCCTs) को ‘ब्लैक लिस्ट’ में रखा जाता है।

FATF द्वारा नियमित रूप से ब्लैकलिस्ट में संशोधन किया जाता है, जिसमे नयी प्रविष्टियों को शामिल किया जाता है अथवा हटाया जाता है।

ग्रे लिस्ट (Grey List): जिन देशों को आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों के लिए सुरक्षित माना जाता है, उन्हें FATF द्वारा ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया जाता है।

‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल देशों को निम्नलिखित स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है:

  1. आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी से आर्थिक प्रतिबंध।
  2. आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी और अन्य देशों से ऋण प्राप्त करने में समस्या।
  1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी।
  2. अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप FATF की तरह कार्य करने वाली एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी संस्था ‘एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग’ (APG) के बारे में जानते हैं? इसके उद्देश्यों और कार्यों के बारे में जानकारी के लिए पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जी-7, जी-8 तथा जी- 20 में अंतर
  2. ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट
  3. क्या FATF के निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं?
  4. FATF का प्रमुख कौन है?
  5. इसका सचिवालय कहाँ है?

मेंस लिंक:

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) का अधिदेश तथा उद्देश्य क्या हैं? भारत – पाकिस्तान संबंधों के लिए FATF के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

भारतनेट परियोजना


संदर्भ:

हाल ही में ‘तमिलनाडु फाइबरनेट कॉर्प’ द्वारा ‘भारतनेट परियोजना’ (BharatNet project) के कार्यान्वयन हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस परियोजना का उद्देश्य, देश में सभी ग्राम पंचायतों को 1 जीबीपीएस बैंडविड्थ कनेक्टिविटी उपलब्ध करना है।

‘भारतनेट परियोजना’ के बारे में:

मूल रूप से इस परियोजना को, अक्तूबर 2011 में ‘नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क’ (National Optical Fiber Network- NOFN) के रूप में शुरू किया गया था और वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर ‘भारतनेट’ (BharatNet) कर दिया गया।

  1. इसका उद्देश्य, ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से 5 लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
  2. इस परियोजना का लक्ष्य, ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-बैंकिंग, इंटरनेट और अन्य सेवाओं के वितरण को सुगम बनाना है।
  3. यह ‘भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड’ (BBNL) द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख मिशन है।

परियोजना के तहत व्यापक परिकल्पनाएँ:

  • गैर-भेदभावपूर्ण आधार पर सुलभ उच्च मापनीय नेटवर्क अवसंरचना स्थापित करना।
  • सभी घरों के लिये 2 Mbps से 20 Mbps तथा सभी संस्थानों को उनकी मांग क्षमता के अनुसार सस्ती ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।
  • राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी में डिजिटल इंडिया के विज़न को साकार करना।

कार्यान्वयन:

  • यह परियोजना, ‘केंद्र-राज्य सहयोग परियोजना’ (Centre-State collaborative project) है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की स्थापना के लिए राज्यों को अपने अनुसार कार्य करने का अधिकार दिया गया है।
  • संपूर्ण परियोजना को, देश के ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से स्थापित किए गए, ‘यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड’ (Universal Service Obligation Fund- USOF) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘डार्क फाइबर’ के बारे में जानते हैं? इसके बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतनेट के बारे में
  2. उद्देश्य और कार्यान्वयन
  3. USOF के बारे में
  4. BBNL के बारे में

मेंस लिंक:

भारतनेट परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

‘उड़ान’ योजना


संदर्भ:

भारत सरकार ने उड़ान पहल के योगदान को मानते हुए 21 अक्टूबर को ‘उड़ान दिवस’ (UDAN Day) के रूप में मनाए जाने की घोषणा की है। 21 अक्टूबर को, ‘उड़ान योजना’ (UDAN scheme) के दस्तावेज पहली बार जारी किए गए थे।

उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के बारे में:

‘उड़ान’ (UDAN – Ude Desh Ka Aam Nagrik) योजना का उद्देश्य देश के दूरस्थ और क्षेत्रीय क्षेत्रों से संपर्क बढ़ाना और हवाई यात्रा को वहनीय बनाना है।

  • यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का एक प्रमुख घटक है और इसे जून 2016 में लॉन्च किया गया था।
  • इस योजना के तहत, UDAN की फ्लाइट्स में लगभग आधी सीटें रियायती किराए पर दी जाती हैं, और भाग लेने वाले कैरीएर्स को एक निश्चित राशि की ‘व्यवहार्यता अंतराल निधि’ (viability gap fundingVGF) प्रदान की जाती है, जोकि केंद्र और संबंधित राज्यों के मध्य साझा की जाती है।
  • इस योजना को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जाएगा।
  • यह योजना 10 साल तक जारी रहेगी और बाद में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

current affairs

उड़ान 4.0:

उड़ान के चौथे दौर (UDAN 4.0) को दिसंबर 2019 में पूर्वोत्तर क्षेत्रों, पहाड़ी राज्यों और द्वीपों पर विशेष ध्यान देने के साथ शुरू किया गया था।

  • भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) द्वारा पहले ही विकसित किए गए हवाई अड्डों को इस योजना के तहत व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF) के लिए उच्च प्राथमिकता दी गई है।
  • उड़ान 0 के तहत, हेलीकॉप्टर और सी-प्लेन के संचालन को भी शामिल किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘हवाई ईंधन’ (Aviation Turbine Fuel – ATF) ‘वस्तु एवं सेवा कर’ (जीएसटी) के दायरे में नहीं आता है? जीएसटी के दायरे में नहीं आने वाली वस्तुओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UDAN योजना कब शुरू की गई थी?
  2. योजना का कार्यान्वयन और वित्त पोषण
  3. राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का अवलोकन
  4. इस योजना के तहत, हवाई किरायों के लिए सब्सिडी देने के लिए व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF) कौन प्रदान करता है?
  5. योजना के तहत राज्य सरकारों की भूमिका

मेंस लिंक:

UDAN योजना के प्रदर्शन पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारत का जीवाश्म ईंधन उत्पादन, ‘पेरिस समझौते’ के लक्ष्यों से अधिक


संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नवीनतम ‘उत्पादन अंतराल रिपोर्ट’ / ‘प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट’ (Production Gap Report) से पता चला है, कि भारत सहित शीर्ष जीवाश्म ईंधन उत्पादक देशों में से 15 देश, वर्ष 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार नहीं हैं।

पेरिस समझौते के माध्यम से ‘ग्लोबल वार्मिंग’ को पूर्व-औद्योगिक स्तर से “2 डिग्री से नीचे” रखने का प्रयास किया जा रहा है।

‘प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट’ के प्रमुख बिंदु:

  • रिपोर्ट के अनुसार, सरकारों द्वारा तापमान बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये ज़रूरी मात्रा की तुलना में, संयुक्त रूप से, वर्ष 2030 में जीवाश्म ईंधनों का 110 प्रतिशत अधिक उत्पादन करने की योजना हैं। तापमान बढ़ोत्तरी को 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये ज़रूरी मात्रा के लक्ष्य से यह उत्पादन, 45 फ़ीसदी अधिक होने की सम्भावना है।
  • वर्ष 2040 तक, इस उत्पादन में क्रमशः 190% और 89% तक की अतिरिक्त बढोत्तरी हो सकती है।
  • रिपोर्ट के हिस्से के रूप में किए गए विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2020 के दौरान 15 देश विश्व के कुल जीवाश्म ईंधन उत्पादन के 75 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार थे।
  • ये देश ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, मैक्सिको, नॉर्वे, रूस, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), यूनाइटेड किंगडम (यूके) और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) हैं।

आवश्यकता:

पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, संपूर्ण विश्व के लिए, ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए “वैश्विक कोयला, तेल और गैस उत्पादन (और खपत) में तत्काल कटौती शुरू करना होगी।”

भारत की योजनाएँ बनाम लक्ष्य:

भारत, 15 देशों में जीवाश्म ईंधन का सातवां सबसे बड़ा उत्पादक है।

  • पेरिस समझौते के तहत, भारत ने वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था की “उत्सर्जन गहनता” में 33%-35% की कटौती करने का वादा किया था।
  • हालांकि, आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत, भारत सरकार द्वारा कोयले के उत्पादन में ‘आत्मनिर्भर’ का संकल्प लिया गया है और ‘कोयला निष्कर्षण’ के लिए 500 अरब रुपये के बुनियादी ढांचे के निवेश की योजना बनाई गयी है।

भारत के समक्ष चुनौतियां:

भारत में जीवाश्म ईंधन के उत्पादन को कम करने, या नवीकरणीय ऊर्जा में उचित परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए संघीय स्तर पर कोई नीति नहीं बनाई गई है।

जीवाश्म ईंधन के उपयोग को सीमित करने की आवश्यकता:

जीवाश्म ईंधन से होने वाले ‘वायु प्रदूषण’ की वैश्विक लागत काफी अधिक है, जोकि वर्तमान में 2.9 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष लगभग या 8 बिलियन डॉलर प्रति दिन है। यह लागत पूरे विश्व के ‘सकल घरेलू उत्पाद’ का 3.3 प्रतिशत के बराबर है।

जीवाश्म ईंधन के कारण होने वाले वायु प्रदूषण से, भारत को लगभग 150 बिलियन डॉलर लागत का वहन करना पड़ता है।

आगे आने वाली की कुल चुनौतियां:

  1. अब तक, मानवीय गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तरों (1950-1900) से लगभग 1 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ चुका है।
  2. वर्तमान में, देशों के उत्सर्जन लक्ष्य, ग्लोबल वार्मिंग को 5 डिग्री से कम तक सीमित करने के अनुरूप नहीं हैं।

भारत के लिए तात्कालिक आवश्यकता:

  1. जीवश्म ईंधन की देश में खोज पर कम जोर देना चाहिए।
  2. उत्पादक क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ानी चाहिए।
  3. सामरिक भंडार में वृद्धि की जानी चाहिए।
  4. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों का पुनर्गठन और पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए।
  5. सीमित सोच से बचना चाहिए।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. पेरिस समझौता क्या है?
  2. इस समझौते पर किन देशों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं?
  3. इसके लक्ष्य
  4. पेरिस समझौते के तहत घोषित वित्त पोषण तंत्र

मेंस लिंक:

पेरिस जलवायु समझौते के महत्व की विवेचना कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


जिओरिसा मॉस्मईन्सिस

हाल ही में, मेघालय की चूना पत्थर से निर्मित ‘मॉस्मई गुफा’ (Mawsmai Cave) में जिओरिसा मॉस्मईन्सिस (Georissa mawsmaiensis) नामक एक सूक्ष्म घोंघे की प्रजाति की खोज की गई है। इस प्रजाति को अंतिम बार 170 साल पहले देखा गया था।

  • इस नई प्रजाति के समान जीनस के एक अन्य सदस्य ‘जिओरिसा सरित्ता’ (Georissa saritta) को वर्ष 1851 में, चेरापूंजी के समीप मुस्माई (मावस्माई) घाटी में देखा गया था।
  • जिओरिसा जीनस (Georissa Genus) के सदस्यों का वितरण व्यापक रूप से अफ्रीका, एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में पाया जाता है। हालाँकि वे चूना पत्थर की गुफाओं या चूना पत्थर के विघटन से बनने वाले कार्स्ट परिदृश्यों से युक्त सूक्ष्म आवासों तक ही सीमित हैं।

‘मॉस्मई गुफा’ के बारे में:

  • यह मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स ज़िले में चेरापूंजी (सोहरा) से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर मॉस्मई के छोटे से गाँव में स्थित है।
  • खासी भाषा में ‘मॉस्मई’ शब्द का अर्थ ‘ओथ स्टोन’ अर्थात ‘शपथ लेने वाला पत्थर’ होता है। खासी लोग गुफा के लिये स्थानीय शब्द ‘क्रेम’ का इस्तेमाल करते हैं।
  • मॉस्मई गुफा समुद्र तल से 1,195 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और पूर्वी खासी पहाड़ियों से निकलने वाली किंशी नदी की धाराओं से, परोक्ष रूप से प्रभावित होती है।

current affairs

 

सखारोव पुरस्कार

कैद रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी (Alexei Navalny) को हाल ही में यूरोपीय संघ के शीर्ष मानवाधिकार पुरस्कार ‘सखारोव पुरस्कार’ (Sakharov Prize), से सम्मानित किया गया था।

  • ‘विचारों की स्वतंत्रता के लिए सखारोव पुरस्कार’ को आमतौर पर ‘सखारोव पुरस्कार’ के नाम से जाना जाता है। यह यूरोपीय संसद द्वारा दिया जाने वाला शीर्ष मानवाधिकार पुरस्कार है।
  • यह पुरस्कार, मानवाधिकारों की रक्षा और विचारों की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तियों या समूहों को दिया जाता है।
  • यूरोपीय संसद द्वारा इस पुरस्कार की स्थापना दिसंबर 1988 में, रूसी वैज्ञानिक और विद्रोही ‘आंद्रेई सखारोव’ के नाम पर की गई थी।

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बोवाइन मैस्टाइटिस

दुधारू पशुओं में थनैला रोग अर्थात ‘बोवाइन मैस्टाइटिस’ (Bovine Mastitis) एक सामान्य संक्रामक रोग है। इससे दूध की गुणवत्ता में गिरावट होती है जिसकी वजह से कृषि उत्पादकता पर असर पड़ता है और आय-सृजन गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

  • यह एक खतरनाक ‘स्तन ग्रंथि संक्रमण’ होता है, जोकि दुनिया भर में दुधारू मवेशियों में सबसे आम है।
  • मैस्टाइटिस का कारण वायरस, माइकोप्लाज्मा, फंगस और बैक्टीरिया आदि होते हैं।
  • थनैला बीमारी पशुओं में कई प्रकार के जीवाणु, विषाणु, फफूँद एवं यीस्ट तथा मोल्ड के संक्रमण से होता हैं। इसके अलावा चोट तथा मौसमी प्रतिकूलताओं के कारण भी थनैला हो जाता हैं।

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