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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 October 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. निहंग कौन हैं?

2. अमृत 0

 

सामान्य अध्ययन-II

1. दिन-दहाड़े लिंचिंग और इसे रोकने हेतु कानून

2. ‘वन हेल्थ’ कंसोर्टियम

3. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पीएम गतिशक्ति – राष्ट्रीय मास्टर प्लान

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. संपत्ति पुनर्वितरण परिषद

2. अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार

3. यूफिल (UFill)

4. द्रास

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

निहंग कौन हैं?


संदर्भ:

पिछले साल, ‘निहंगों’ (Nihangs) के एक समूह ने पटियाला में तलवार से एक पुलिसकर्मी का हाथ काट दिया था। इस पुलिसकर्मी ने ‘निहंगों’ से कोविड लॉकडाउन के दौरान ‘मूवमेंट पास’ दिखाने को कहा था।

इस साल, ‘निहंगों’ ने एक पवित्र ग्रन्थ का कथित तौर पर अपमान करने पर नई दिल्ली में सिंघू सीमा के पास एक व्यक्ति की हत्या कर दी।

‘निहंग’ के बारे में:

निहंग, सिख योद्धाओं की एक ‘कोटि’ (Order) होती है। ये विशेष रूप से नीले वस्त्र, तलवार और भाले जैसे प्राचीन हथियार, और स्टील के निशानों से सजी हुई पगड़ी धारण करते है।

nihangs

 

निहंग’ शब्द का अर्थ:

व्युत्पत्ति के अनुसार फ़ारसी में ‘निहंग’ शब्द का अर्थ एक ग्राह या घड़ियाल (Alligator), तलवार और कलम होता है, लेकिन ‘निहंगों’ की विशेषताएं संस्कृत शब्द ‘निहशंक’ के समान अधिक प्रतीत होती हैं, जिसका अर्थ है, भय-रहित, निष्कलंक, ब्रह्मचारी या शुद्ध, निश्चिंत और सांसारिक लाभ और आराम के प्रति उदासीन।

उत्पत्ति:

‘निहंगों’ की उत्पत्ति का स्रोत ‘गुरु गोबिंद सिंह’ के छोटे पुत्र, ‘फतेह सिंह’ (1699-1705) से संबंधित पाया जाता है। ‘फतेह सिंह’ एक बार अपने पिता के सामने एक नीला चोला और दुमाला / कलंगी लगी हुई नीली पगड़ी पहने हुए पेश हुए थे।

अपने पुत्र का इतना प्रतापी स्वरूप देखकर गुरु ने कहा, कि यही खालसा के निश्चिंत और बेफिक्रे सैनिकों, ‘निहंगों’ की पोशाक रहेगी।

‘निहंग’ एवं अन्य सिखों और अन्य सिख योद्धाओं में भिन्नता:

‘निहंग’, खालसा आचार संहिता (Khalsa code of conduct) का सख्ती से पालन करते हैं। ये किसी सांसारिक स्वामी के प्रति निष्ठा नहीं रखते हैं। ‘निहंग’, अपने पुण्यस्थानों के ऊपर भगवा के बजाय, एक नीला ‘निशान साहिब’ (ध्वज) फहराते हैं।

सिख इतिहास में इनकी भूमिका:

  • पहले सिख शासन (1710-15) के पतन के बाद जब मुगल सूबेदार सिखों की हत्या कर रहे थे, और अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह दुर्रानी (1748-65) के हमले के दौरान, सिख पंथ की रक्षा करने में निहंगों की प्रमुख भूमिका थी।
  • निहंगों का अमृतसर में ‘अकाल बूंगा’ (जिसे अब अकाल तख्त के नाम से जाना जाता है) पर सिखों के धार्मिक मामलों पर नियंत्रण भी रहा। ये स्वयं को किसी भी सिक्ख मुखिया के अधीन नहीं मानते थे और, ये अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते थे।
  • वर्ष 1849 में सिख साम्राज्य के पतन के बाद पंजाब के ब्रिटिश अधिकारियों ने 1859 में स्वर्ण मंदिर के प्रशासन हेती एक प्रबंधक (सरबरा) नियुक्त किया गया था, इसके बाद से ‘निहंगों´का प्रभाव समाप्त हो गया।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप वर्ष 1761 में हुई पानीपत की तीसरी लड़ाई के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘खालसा आचार संहिता’ क्या है?
  2. अहमद शाह दुर्रानी को भारत पर आक्रमण करने में किसने मदद की?
  3. ‘शारदाई’, ‘सुखनिधान’ और ‘शहीदी देग’ में भिन्नता
  4. ‘गुरु गोबिंद सिंह’ कौन थे? सिख समुदाय में उनका योगदान?

मेंस लिंक:

निहंग कौन हैं? ये अन्य सिखों और अन्य सिख योद्धाओं से किस प्रकार भिन्न हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

अमृत 2.0


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा वर्ष 2025-26 तक ‘नवीकरण और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन’ (अमृत 2.0) को जारी रखने की मंजूरी दे दी गयी है।

यह निर्णय ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक कदम है, और इसका उद्देश्य ‘पानी की सर्कुलर इकोनॉमी’ के जरिए शहरों को ‘जल सुरक्षित’ एवं ‘आत्मनिर्भर’ बनाना है।

पृष्ठभूमि:

नवीकरण और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation – AMRUT), देश का पहला केंद्रित राष्ट्रीय जल मिशन है जिसे जून 2015 में 500 शहरों में नागरिकों को ‘नल कनेक्शन’ और ‘सीवर कनेक्शन ‘प्रदान करके जीवन में सुगमता लाने के लिए शुरू किया गया था।

इस मिशन के तहत, अब तक 1.1 करोड़ घरेलू नल कनेक्शन और 85 लाख सीवर/सेप्टेज कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

current affairs

‘अमृत 2.0’ के बारे में:

  1. अमृत 0 (AMRUT 2.0), के अंतर्गत, सभी 4,378 वैधानिक शहरों में घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करके पानी की आपूर्ति के सार्वभौमिक कवरेज का लक्ष्य रखा गया है।
  2. इसका एक अन्य उद्देश्य, 500 अमृत शहरों में घरेलू सीवरेज/सेप्टेज प्रबंधन की 100 प्रतिशत कवरेज प्रदान करना है।
  3. मिशन का लक्ष्य 2.68 करोड़ नल कनेक्शन और 2.64 करोड़ सीवर/सेप्टेज कनेक्शन प्रदान करना है।
  4. सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को अपनाएं (3R का उपयोग करके अपशिष्ट से संपदा तैयार करना)
  5. सतही और भूजल निकायों के संरक्षण और नवीकरण को बढ़ावा देना।
  6. आंकड़ों पर आधारित ‘जल प्रबंधन’ प्रशासन
  7. नवीनतम वैश्विक प्रौद्योगिकियों और कौशल का लाभ उठाने हेतु प्रौद्योगिकी उप-मिशन।
  8. शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने हेतु ‘पेय जल सर्वेक्षण’ का आयोजन।

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की सफलता में महिलाओं के योगदान के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वच्छ भारत अभियान 0 और अमृत 2.0 के लक्ष्य और समय-सीमा
  2. इसके कार्यान्वयन में शामिल मंत्रालय
  3. राज्य सरकार का योगदान और उनकी जिम्मेदारियां
  4. योजना की निगरानी हेतु मापदंड

मेंस लिंक:

मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख कारण क्या हैं? मानव-पशु संघर्ष को रोकने संबंधी उपाय सुझाइए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

दिन-दहाड़े लिंचिंग और इसे रोकने हेतु कानून


संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली-हरियाणा सीमा पर जारी किसानों के विरोध स्थल ‘सिंघू बॉर्डर’ पर एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी गयी। इस हेट-क्राइम की क्रूरता और नृशंसता का रिकार्डेड विडियो देखने के बाद, क़ानून को पूरी ताकत से कदम उठाने और दोषियों को शीघ्र और सुनिश्चित सजा देने की मांग की जा रही है।

संबंधित प्रकरण:

पंजाब में तरनतारन जिले के एक गाँव के दलित समुदाय के एक मजदूर ‘लखबीर सिंह’ पर एक पवित्र धर्म ग्रंथ की बेअदबी और अपवित्र करने का आरोप लगाते हुए ‘निहंगों’ ने कथित तौर उसे प्रताड़ित किया और मार डाला। मजदूर की हत्या के बाद उसके अंग-भंग शरीर को हत्यारों ने एक पुलिस बैरिकेड से बांध कर लटका दिया।

आवश्यकता:

इन ठगों और बदमाशों को छुपने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। इन हत्यारों ने जज, जूरी, जल्लाद की भूमिका खुद ही निभाते हुए इस वीभत्स घटना को अंजाम दिया है, राज्य को इन अपराधियों की तत्काल पहचान कर शीघ्र कारवाई करनी चाहिए।

‘लिंचिंग’ (Lynching) का तात्पर्य:

धर्म, जाति, जाति, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, खान-पान, यौन-अभिरुचि, राजनीतिक संबद्धता, जातीयता अथवा किसी अन्य संबंधित आधार पर भीड़ द्वारा नियोजित अथवा तात्कालिक हिंसा या हिंसा भड़काने वाले कृत्यों आदि को मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) कहा जाता है।

इसमें अनियंत्रित भीड़ द्वारा किसी दोषी को उसके किये अपराध के लिये या कभी-कभी मात्र अफवाहों के आधार पर ही बिना अपराध किये भी तत्काल सज़ा दी जाए अथवा उसे पीट-पीट कर मार डाला जाता है।

इस प्रकार के मामलों से किस प्रकार निपटा जाता है?

  • मौजूदा ‘भारतीय दंड-विधान संहिता’ (IPC) के तहत, इस प्रकार घटनाओं के लिए “कोई अलग” परिभाषा नहीं है। लिंचिंग की घटनाओं से ‘आईपीसी’ की धारा 300 और 302 के तहत निपटा जाता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अनुसार, जो कोई भी किसी व्यक्ति की हत्या करता है, तो उसे मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा। ‘हत्या करना’ एक गैर-जमानती, संज्ञेय और गैर-शमनीय अपराध है।

इस संबंध में उच्चत्तम न्यायालय के दिशानिर्देश:

  1. लिंचिंग एक ‘पृथक अपराध’ होगा तथा ट्रायल कोर्ट अभियुक्तों को दोषी ठहराए जाने पर अधिकतम सजा का प्रावधान कर मॉब लिंचिंग करने वाली भीड़ के लिए कड़ा उदहारण स्थापित करें।
  2. राज्य सरकारें, प्रत्येक ज़िले में मॉब लिंचिंग और हिंसा को रोकने के उपायों के लिये एक सीनियर पुलिस अधिकारी को प्राधिकृत करें। राज्य सरकारें उन ज़िलों, तहसीलों, गाँवों को चिन्हित करें जहाँ हाल ही में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ हुई हैं।
  3. नोडल अधिकारी मॉब लिंचिंग से संबंधित ज़िला स्तर पर समन्वय के मुद्दों को राज्य के DGP के समक्ष प्रस्तुत करेगें।
  4. केंद्र तथा राज्य सरकारों को रेडियो, टेलीविज़न और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह प्रसारित कराना होगा कि किसी भी प्रकार की मॉब लिंचिंग एवं हिंसा की घटना में शामिल होने पर विधि के अनुसार कठोर दंड दिया जा सकता है।
  5. केंद्र और राज्य सरकारें, भीड़-भाड़ और हिंसा के गंभीर परिणामों के बारे में रेडियो, टेलीविजन और अन्य मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित करेंगी।
  6. राज्य पुलिस द्वारा किए गए उपायों के बावजूद, मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएँ होने पर संबंधित पुलिस स्टेशन तुरंत एफआईआर दर्ज करेगा।
  7. राज्य सरकारें मॉब लिंचिंग से प्रभावित व्यक्तियों के लिये क्षतिपूर्ति योजना प्रारंभ करेगी।
  8. यदि कोई पुलिस अधिकारी या जिला प्रशासन का कोई अधिकारी अपने कर्तव्य को पूरा करने में विफल रहता है, तो यह जानबूझकर की गई लापरवाही माना जाएगा।

समय की मांग:

  • प्रत्येक बार ऑनर किलिंग, घृणा-अपराधों, डायन-हत्या अथवा मॉब लिंचिंग की घटनाओं के होने पर इन अपराधों से निपटने के लिए विशेष कानून की मांग उठायी जाती हैं।
  • लेकिन, तथ्य यह है कि यह अपराध हत्याओं के अलावा और कुछ नहीं हैं तथा IPC और सीआरपीसी (CrPC) के तहत मौजूदा प्रावधान ऐसे अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं।
  • पूनावाला मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों के साथ, हम मॉब लिंचिंग से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम हैं। इन अपराधों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों और प्रवर्तन एजेंसियों को अधिक जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।

इस सन्दर्भ में विभिन्न राज्यों द्वारा किये गए प्रयास:

  • मणिपुर सरकार द्वारा वर्ष 2018 में इस संदर्भ में कुछ तार्किक और प्रासंगिक उपबंधो को सम्मिलित करते हुए एक विधेयक पारित किया गया।
  • राजस्थान सरकार द्वारा अगस्त 2019 में लिंचिंग के खिलाफ एक विधेयक पारित किया गया।
  • पश्चिम बंगाल सरकार ने भी मॉब लिंचिंग के विरूद्ध कठोर प्रावधानों सहित एक विधेयक पेश किया।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘हेट स्पीच’ पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘रणनीति’ और ‘कार्य योजना’ जैसा कोई उपाय किया गया है? इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मॉब लिंचिंग के विरुद्ध किन राज्यों कानून पारित किये हैं?
  2. ’पूनावाला मामला’ क्या है?
  3. आईपीसी के तहत मॉब लिंचिंग के खिलाफ कौन से प्रावधान उपलब्ध हैं?

मेंस लिंक:

मॉब लिंचिंग भारत में एक अक्सर होने वाली घटना बन गई है जो धार्मिक और जातिगत अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए नफरत व हिंसा को बढ़ा रही है। इसके कारक- कारणों को समझाएं तथा  इससे निपटने के तरीके सुझाइए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

एक स्‍वास्‍थ्‍य (वन हेल्थ)’ सहायता संघ


संदर्भ:

हाल ही में, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन ‘जैव प्रौद्योगिकी विभाग’ (Department of Biotechnology – DBT) द्वारा ‘एक स्‍वास्‍थ्‍य (वन हेल्थ)’ सहायता संघ / ‘वन हेल्थ’ कंसोर्टियम (One Health’ consortium) की शुरुआत की गई है। यह DBT की पहली ‘वन हेल्थ’ परियोजना है।

परियोजना के बारे में:

  • इस कार्यक्रम में देश के पूर्वोत्‍तर भाग सहित भारत में एक नस्‍ल के दूसरी नस्‍ल को संक्रामित करने वाले जीवाणु संबंधी, वायरल और परजीवी से होने वाले महत्वपूर्ण संक्रमणों की निगरानी करने की परिकल्पना की गई है।
  • इस परियोजना में, मौजूदा नैदानिक ​​परीक्षणों का उपयोग और उभरती बीमारियों के प्रसार को समझने के लिए अतिरिक्त पद्धतियों के विकास पर भी विचार किया गया है।

संयोजन:

‘वन हेल्थ कंसोर्टियम’ में डीबीटी-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी, हैदराबाद के नेतृत्व में 27 संगठन शामिल हैं।

एक स्वास्थ्य’ परिकल्पना की आवश्यकता और महत्व:

कोविड-19 ने संक्रामक रोगों के नियंत्रण में ‘एक स्‍वास्‍थ्‍य (वन हेल्‍थ)’ सिद्धांतों, खासतौर से पूरे विश्व में पशुजन्‍य रोगों की रोकथाम और उन्‍हें नियंत्रित करने के प्रयास की प्रासंगिकता दिखा दी।

भविष्य की महामारियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए मानव, जानवरों और वन्यजीवों के स्वास्थ्य को समझने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

‘वन हेल्थ’ अवधारणा क्या है?

  • वन हेल्थ इनिशिएटिव टास्क फोर्स द्वारा दी गई परिभाषा के अनुसार, ‘वन हेल्थ’, मनुष्यों, जानवरों और हमारे पर्यावरण के लिए सर्वोत्कृष्ट स्वास्थ्य हासिल करने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर काम कर रही कई व्यवस्थाओं का सहयोगी प्रयास है।
  • ‘वन हेल्थ मॉडल’, रोग नियंत्रण करने हेतु बहुविषयक दृष्टिकोण को सरल बनाता है ताकि उभरते और मौजूदा जूनोटिक खतरों को नियंत्रित किया जा सके।

‘जूनोटिक रोग’ (Zoonotic Diseases) क्या होते हैं?

‘ज़ूनोसिस’ (Zoonosis) शब्द का प्रयोग, सर्वप्रथम वर्ष 1880 में रूडोल्फ विर्को (Rudolf Virchow) द्वारा मनुष्यों और जानवरों में फैलने वाली प्रकृति में एकसमान बीमारियों को सामूहिक रूप से व्यक्त करने के लिए किया गया था।

  • वर्ष 1959 में WHO द्वारा दी गई परिभाषा के अनुसार, ‘ज़ूनोसिस’, कशेरुकी जानवरों और मनुष्य के बीच स्वाभाविक रूप से संचरित होने वाले रोग और संक्रमण होते हैं।
  • इन रोगों के रोगाणु, कोई बैक्टीरिया, वायरल या परजीवी अथवा कोई अन्य अपरंपरागत कारक के रूप में हो सकते हैं।

संबंधित चिंताएं:

सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या होने के साथ-साथ, कई प्रमुख जूनोटिक रोगों से, पशु-आधारित खाद्य पदार्थो के पर्याप्त उप्तादन पर भी असर पड़ता है, जिससे पशु-उत्पादों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधा उत्पन्न होती हैं।

भारत का वन हेल्थ फ्रेमवर्क एवं योजनाएं:

भारत की ‘वन हेल्थ’ विज़न की रूपरेखा (Blueprint), ‘एक विश्व-एक स्वास्थ्य’ (One World-One Health) के अति महत्वपूर्ण लक्ष्य में योगदान करने हेतु, ‘त्रिपक्षीय प्लस गठबंधन’ (tripartite-plus alliance) के मध्य हुए एक समझौते से तैयार की गई है।

  • इस गठबंधन में, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (OIE), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), तथा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा समर्थित एक वैश्विक पहल संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और विश्व बैंक शामिल हैं।
  • भारत द्वारा दीर्घकालिक उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए 1980 के दशक के रूप में जूनोज़िस (Zoonoses) पर एक राष्ट्रीय स्थायी समिति की स्थापना की गई थी।
  • इसी वर्ष, नागपुर में एक ‘वन हेल्थ केंद्र’ स्थापित करने के लिये धनराशि स्वीकृत की गई है।
  • पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा, वर्ष 2015 से पशु-रोगों की व्यापकता को समाप्त करने के लिए कई योजनाएं शुरू की जा रही हैं; जिनके लिए केंद्र तथा राज्य के मध्य 60:40, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 100% वित्त पोषण किया जा रहा है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय जैव विविधता एवं मानव कल्याण मिशन के तहत ‘वन हेल्थ’ घटक।
  2. ज़ूनोटिक रोग बनाम वेक्टर-जनित रोग।
  3. ‘वन हेल्थ’ से संबंधित आम मुद्दे।

मेंस लिंक:

‘वन हेल्थ मॉडल’, महामारी विज्ञान, निदान और ज़ूनोटिक रोगों पर नियंत्रण हेतु अनुसंधान के लिए एक विश्व स्तर पर स्वीकृत मॉडल है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद


(UN Human Rights Council)

संदर्भ:

भारत, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UN Human Rights CouncilUNHRC) में छठवें कार्यकाल के लिए भारी बहुमत के साथ फिर से निर्वाचित हुआ है।

इसके अलावा, ट्रम्प प्रशासन द्वारा UNHRC से बाहर निकलने के तीन साल से कुछ अधिक समय बाद अमेरिका भी इसमें फिर से शामिल हो गया है। ट्रम्प प्रशासन ने ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ पर इज़राइल के खिलाफ पूर्वाग्रह का आरोप लगाया था और ‘मानवाधिकार परिषद’ में सुधार की कमी बताया था।

पृष्ठभूमि:

एक समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए ‘मानवाधिकार परिषद’ के उम्मीदवारों को भौगोलिक समूहों में चुना जाता है।

UNHRC के बारे में:

‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) का पुनर्गठन वर्ष 2006 में इसकी पूर्ववर्ती संस्था, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UN Commission on Human Rights) के प्रति ‘विश्वसनीयता के अभाव’ को दूर करने में सहायता करने हेतु किया गया था।

इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

संरचना:

  • वर्तमान में, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) में 47 सदस्य हैं, तथा समस्त विश्व के भौगोलिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु सीटों का आवंटन प्रतिवर्ष निर्वाचन के आधार पर किया जाता है।
  • प्रत्येक सदस्य तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए निर्वाचित होता है।
  • किसी देश को एक सीट पर लगातार अधिकतम दो कार्यकाल की अनुमति होती है।

UNHRC के कार्य:

  • परिषद द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों की ‘सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा’ (Universal Periodic Review- UPR) के माध्यम से मानव अधिकार संबंधी विषयों पर गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करता है।
  • यह विशेष देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों हेतु विशेषज्ञ जांच की देखरेख करता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष चुनौतियाँ तथा इसमें सुधारों की आवश्यकता:

  • ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य-देशों जैसे सऊदी अरब, चीन और रूस के मानवाधिकार रिकॉर्ड इसके उद्देश्य और मिशन के अनुरूप नहीं हैं, जिसके कारण आलोचकों द्वारा परिषद की प्रासंगिकता पर सवाल उठाये जाते है।
  • UNHRC में कई पश्चिमी देशों द्वारा निरंतर भागीदारी के बावजूद भी ये मानव अधिकारों संबंधी समझ पर गलतफहमी बनाये रखते हैं।
  • UNHRC की कार्यवाहियों के संदर्भ में गैर-अनुपालन (Non-compliance) एक गंभीर मुद्दा रहा है।
  • अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्ट्रों की गैर-भागीदारी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘संयुक्त राष्ट्र न्यासी परिषद’ (United Nations Trusteeship Council) के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNHRC के बारे में
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. ‘सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा’ (UPR) क्या है?
  5. UNHRC का मुख्यालय
  6. हाल ही में UNHRC की सदस्यता त्यागने वाले देश

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

पीएम गतिशक्ति – राष्ट्रीय मास्टर प्लान


संदर्भ:

हाल ही में देश में ‘बुनियादी ढांचे के विकास’ हेतु ‘पीएम गतिशक्ति-राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ (PM GatiShakti — National Master Plan) का शुभारंभ किया गया है।

इस ‘मास्टर प्लान’ का उद्देश्य ‘मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी’ को बढ़ावा देना और लॉजिस्टिक लागत को कम करना है।

‘पीएम गतिशक्ति’ के बारे में:

‘पीएम गतिशक्ति’ (PM GatiShakti), एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके तहत बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन हेतु रेलवे और सड़क मार्ग मंत्रालय सहित 16 मंत्रालयों को एक साथ लाया जाएगा।

इसका उद्देश्य, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं हेतु समग्र योजना और इनका निष्पादन सुनिश्चित करना है।

प्रद्दत सेवाएँ:

  1. इस पोर्टल पर 200 से अधिक परतों में भू-स्थानिक आंकड़े उपलब्ध होंगे, जिसमे सड़कों, राजमार्गों, रेलवे और टोल प्लाजा जैसे मौजूदा बुनियादी ढांचे के साथ-साथ जंगलों, नदियों और जिले की सीमाओं के बारे में भौगोलिक जानकारी शामिल होगी, जिससे योजना बनाने और मंजूरी प्राप्त करने में सहायता मिल सकेगी।
  2. ‘पीएम गतिशक्ति’ पोर्टल पर विभिन्न सरकारी विभागों के लिए वास्तविक समय में और एक केंद्रीकृत स्थान पर, विभिन्न परियोजनाओं, विशेष रूप से बहु-क्षेत्रीय और बहु-क्षेत्रीय प्रभाव वाली परियोजनाओं की प्रगति को ट्रैक करने की सुविधा होगी।

महत्व:

पीएम गतिशक्ति का उद्देश्य, सभी विभाग के लिए ‘एक केंद्रीकृत पोर्टल के जरिए एक-दूसरे की परियोजनाओं पर गहरी नजर रखने और परियोजनाओं के व्यापक नियोजन और निष्पादन के क्रम में महत्वपूर्ण डेटा का आदान – प्रदान करते हुए प्रत्येक विभाग को एक-दूसरे की गतिविधियों से अवगत रहने को सुनिश्चित करना है।

  • इसके माध्यम से विभिन्न विभाग विविध क्षेत्रों से संबंधित पारस्परिक व्यवहार के जरिए अपनी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने में सक्षम होंगे।
  • मल्टी- मॉडल कनेक्टिविटी, परिवहन के एक साधन से दूसरे साधन में लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए एकीकृत और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह कदम बुनियादी ढांचे को अंतिम मील तक कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करेगा और यात्रा में लोगों को लगने वाले समय को भी कम करेगा।

आवश्यकता:

भारत में अवसंरचना या बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के निर्माण में पिछले कई दशकों से अनगिनत समस्‍याएं आड़े आती रही थीं। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का घोर अभाव देखा जाता था।

  • उदाहरण के लिए, एक बार कोई सड़क बन जाने के बाद अन्य एजेंसियां भूमिगत केबल, गैस पाइपलाइन, इत्‍यादि बिछाने जैसी गतिविधियों के लिए निर्मित सड़क को फिर से खोद देती थीं। इससे देश की सड़क अवसंरचना और आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
  • इसके अलावा, भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का लगभग 13-14% है जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह जीडीपी का लगभग 7-8% रहती है। लॉजिस्टिक्स की उच्च लागत, अर्थव्यवस्था के भीतर ‘लागत संरचनाओं’ को प्रभावित करती है, और निर्यातकों के लिए खरीदारों को माल भेजने के लिए इसे और अधिक महंगा बनाती है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीएमगतिशक्ति परियोजना के बारे में
  2. प्रमुख विशेषताएं
  3. प्रमुख घटक

मेंस लिंक:

पीएम गतिशक्ति परियोजना के महत्व के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


संपत्ति पुनर्वितरण परिषद

हाल ही में, जापान के नए प्रधान मंत्री ‘फुमियो किशिदा’ ने ‘संपत्ति पुनर्वितरण परिषद’ (Wealth redistribution council) का अनावरण किया है।

उद्देश्य: यह ‘परिषद’, धन-संपदा संबंधी असमानताओं से निपटने और परिवारों में धन का पुनर्वितरण करने की रणनीति बनाने हेतु जिम्मेदार होगी।

संरचना: ‘संपत्ति पुनर्वितरण परिषद’ में निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि और सरकार के मंत्रीगण शामिल होंगे। निजी क्षेत्र की सदस्यों में कम से कम सात महिलाएं शामिल होंगी।

 

अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार   

वर्ष 2021 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार, अमेरिका स्थित तीन अर्थशास्त्रियों को प्रदान किया गया है। ये तीन अर्थशास्त्री हैं- कनाडाई मूल के डेविड कार्ड (David Card), इजरायल-अमेरिकी जोशुआ डी एंग्रिस्ट (Joshua Angrist) और डच-अमेरिकी गुइडो डब्ल्यू इम्बेन्स (Guido Imbens)। पुरस्कार का 50 फीसदी डेविड कार्ड को दिया गया है और दूसरा आधा हिस्सा संयुक्त रूप से एंग्रिस्ट और इम्बेन्स को दिया गया।

  • इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार श्रम बाजार और “प्राकृतिक प्रयोगों” में अंतर्दृष्टि के लिए प्रदान किया गया है।
  • डेविड कार्ड को “श्रम अर्थशास्त्र में उनके अनुभवजन्य योगदान के लिए” सम्मानित किया गया है। इनका काम न्यूनतम मजदूरी, आप्रवास और शिक्षा के श्रम बाजार प्रभावों पर केंद्रित है।
  • जोशुआ एंग्रिस्ट और स्टैनफोर्ड के प्रोफेसर गुइदो इम्बेन्स को “कारण संबंधों के विश्लेषण में उनके पद्धतिगत योगदान के लिए” सम्मानित किया गया है।

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यूफिल (UFill)

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) – पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम ने “UFill” – एक डिजिटल ग्राहक अनुभव शुरू करने की घोषणा की है।

  • UFill प्रस्ताव को भारत भर के 65 शहरों में लॉन्च किया गया है, और जल्द ही इसे पूरे देश में लॉन्च किया जाएगा।
  • यह प्रौद्योगिकी, ग्राहक के लिए ईंधन भरने पर नियंत्रण के साथ-साथ स्पर्श रहित पूर्व भुगतान सुविधा प्रदान करती है।

द्रास

द्रास (Drass) को “लद्दाख के प्रवेश द्वार” के रूप में जाना जाता है, और यह अपने उच्च तुंगता वाले ट्रेकिंग मार्गों और पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध है।

  • यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘सैन्य बिंदु’ भी है, जहां भारतीय सेना के जवानों को एलओसी की रक्षा के लिए पूरे साल ऊंचाई और ठंडे तापमान का सामना करना पड़ता है।
  • यह दुनिया के सबसे ठंडे स्थानों में से एक है जहां तापमान -40 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो सकता है।
  • जोजीला दर्रे और कारगिल शहर के बीच स्थित, ‘द्रास’ में औसत तापमान सर्दियों में -20 डिग्री सेल्सियस से कम होता है और इसे अक्सर भारत में “सबसे ठंडा निवास स्थान” कहा जाता है।

चर्चा का कारण:

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कारगिल के द्रास इलाके में भारतीय सेना के जवानों के साथ दशहरा मनाया।


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