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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 October 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण

2. लंबित आरटीआई याचिकाएं

3. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

4. भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह

5. क्वाड राष्ट्रों का मालाबार युद्धाभ्यास

 

सामान्य अध्ययन-III

1. इनपुट टैक्स क्रेडिट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस

2. केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA)


(National Financial Reporting Authority)

संदर्भ:

कुछ समय पहले ‘राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ (National Financial Reporting Authority – NFRA) द्वारा की गयी सिफारिशों पर चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की शीर्ष संस्था ‘इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (The Institute of Chartered Accountants of India – ICAI) ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि, इस ‘प्रहरी’ (watchdog) को ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम कंपनियों’ पर निगरानी का अधिकार नहीं है।

पृष्ठभूमि:

आईसीएआई ने यह टिप्पणी, ‘राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम कंपनियों (MSMCs) के लिए वैधानिक ऑडिट और ऑडिटिंग मानकों पर एक परामर्श पत्र प्रस्तुत किए जाने के दो सप्ताह के बाद की है।

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ के बारे में:

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ का गठन भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 132 (1) के तहत 01 अक्तूबर, 2018 को किया गया था।

आवश्यकता:

इसका उद्देश्‍य स्‍वतंत्र विनियामकों को स्‍थापित करना और लेखापरीक्षा मानकों को लागू करना, लेखापरीक्षा की गुणवत्ता व लेखापरीक्षा फर्मों की स्‍वतंत्रता को सुदृढ़ बनाना है। अतएव, कंपनियों की वित्‍तीय स्‍थिति के खुलासे में निवेशक और सार्वजनिक तंत्र का विश्‍वास बढ़ाना है।

NFRA की संरचना:

कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण में एक अध्यक्ष तथा अधिकतम 15 सदस्य होंगे। अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जायेगी।

प्रकार्य और कर्त्तव्य:

  1. केंद्रीय सरकार द्वारा अऩुमोदन के लिए लेखाकर्म और लेखापरीक्षा नीतियां तथा कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले मानकों की अनुशंसा करना;
  2. लेखाकर्म मानकों और लेखापरीक्षा मानकों सहित अनुपालन वाले की निगरानी और लागू करना;
  3. ऐसे मानकों सहित अनुपालन सुनिश्चित करने वाले व्यवसायों की सेवा की गुणवत्ता का पर्यवेक्षण करना;
  4. उक्त प्रकार्यों और कर्त्तव्यों के लिए आवश्यक अथवा अनुषंगी ऐसे अऩ्य प्रकार्य और कर्त्तव्यों का निष्पादन करना।

शक्तियां:

  • NFRA यह सूचीबद्ध कंपनियों तथा गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों की जांच कर सकता है जिनकी जिनकी प्रदत्त पूंजी पांच सौ करोड़ रुपये से कम न हो अथवा वार्षिक कारोबार एक हजार करोड़ रुपये से कम न हो।
  • यह किसी नियत वर्ग के वाणिज्यिक संस्थान अथवा किसी व्यक्ति के संबंध में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) के सदस्यों द्वारा किए गए पेशेवर कदाचार की जांच कर सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने जीएसटी के तहत ‘कंपोजिशन स्कीम’ के बारे में सुना है? इसके उद्देश्य एवं इसके लिए क्या अहर्ता हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NFRA का गठन किस प्रावधान के तहत किया गया है?
  2. ICAI के बारे में।
  3. NFRA की संरचना।
  4. कंपनी अधिनियम 2013- प्रमुख प्रावधान।

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के प्रमुख कार्यों पर चर्चा करें और इसके महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

लंबित आरटीआई याचिकाएं


संदर्भ:

हाल ही में, भारत में ‘सूचना आयोगों का प्रदर्शन, 2021’ (Performance of Information Commissions in India, 2021) रिपोर्ट जारी की गई है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. ‘केंद्रीय सूचना आयोग’ (Central Information Commission – CIC) में तीन रिक्तियां शेष हैं और 10 आयुक्तों की उनकी पूरी कार्य-क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं सौंपा गया है।
  2. आयोगों में कर्मियों की कमी और अकुशल संचालन, दोनों के कारण, मामलों के निपटान में विलम्ब हुआ है।
  3. कर्मियों की वर्तमान संख्या के आधार पर, देश में बारह राज्य सूचना आयोगों और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को अपने समक्ष दायर अपीलों के निपटान में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा।

आरटीआई अधिनियम, 2005 के बारे में:

‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ (आरटीआई अधिनियम), 2005 नागरिकों के ‘सूचना के अधिकार’ संबंधी नियमों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है।

  • सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 द्वारा पूर्ववर्ती ‘सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम’ (Freedom of Information Act), 2002 को प्रतिस्थापित किया गया है।
  • यह अधिनियम, भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ को सशक्त करने हेतु अधिनियमित किया गया था। चूंकि, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत ‘वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के अधिकार में ‘सूचना का अधिकार’ निहित है, अतः यह एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है।

प्रमुख प्रावधान:

  1. आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के तहत प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा सूचना के स्वतः प्रकाशन का प्रावधान किया गया है।
  2. धारा 8 (1) में आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना प्रदान करने संबंधी छूट का उल्लेख किया गया है।
  3. धारा 8 (2) के अंतर्गत सार्वजनिक हित में महत्वपूर्ण होने पर ‘सरकारी गोपनीयता अधिनियम’ (Official Secrets Act), 1923 के तहत छूट प्राप्त जानकारी के प्रकाशन हेतु प्रावधान किया गया है।

सूचना आयुक्त एवं लोक सूचना अधिकारी:

  • अधिनियम में केंद्रीय और राज्य स्तर पर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
  • सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वरा अपने कुछ अधिकारियों को ‘लोक सूचना अधिकारी’ (Public Information Officer- PIO) के रूप में नियुक्त किया जाता है। ये अधिकारी, आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी मागने वाले व्यक्ति को जानकारी देने के लिए उत्तरदायी होते हैं।

समय सीमा:

सामान्य तौर पर, लोक प्राधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर किसी आवेदक को सूचना प्रदान करना अनिवार्य होता है।

  • यदि माँगी जाने वाली सूचना, किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित होती है, तो उसे 48 घंटों के भीतर प्रदान किया जायेगा।
  • यदि आवेदन को सहायक लोक सूचना अधिकारी के माध्यम से भेजा जाता है अथवा गलत लोक प्राधिकारी को भेजा जाता है, तो सूचना प्रदान करने हेतु निर्धारित तीस दिनों या 48 घंटों की अवधि में, जैसा भी मामला हो, पांच दिन का अतिरिक्त समय जोड़ा जाएगा ।

सूचना के अधिकार अधिनियम’ के अनुप्रयोग:

निजी निकाय (Private bodies):

  • निजी निकाय, प्रत्यक्षतः ‘सूचना के अधिकार अधिनियम’ के दायरे में नहीं आते हैं।
  • सरबजीत रॉय बनाम दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के एक फैसले में, केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा अभिपुष्टि की गयी कि, निजीकृत लोकोपयोगी कंपनियां (Privatised Public Utility Companies) आरटीआई के दायरे में आती हैं।

राजनीतिक दल:

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के अनुसार, राजनीतिक दल ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ (Public Authorities) हैं तथा आरटीआई अधिनियम के तहत नागरिकों के प्रति जवाबदेह हैं।

  • किंतु, अगस्त 2013 में सरकार द्वारा ‘सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसमे राजनीतिक दलों को अधिनियम के दायरे से बाहर करने का प्रावधान किया गया है।
  • वर्तमान में कोई भी राजनीतिक दल आरटीआई कानून के अंतर्गत नहीं है, हालांकि और सभी राजनीतिक दलों को आरटीआई अधिनियम के तहत लाने के लिए एक मामला दायर किया गया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश:

13 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश पद को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में लाने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा गया।

आरटीआई संशोधन अधिनियम, 2019 (RTI Amendment Act of 2019):

  1. संशोधन अधिनियम के अंतर्गत, केंद्र और राज्य स्तर पर सूचना आयुक्तों के वेतन और सेवा शर्तों को निर्धारित करने की शक्ति केंद्र सरकार के लिए प्रदान की गयी है।
  2. केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल: इनकी नियुक्ति “केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित ऐसी अवधि के लिए की जाएगी”।
  3. ‘मूल अधिनियम’ में राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त के वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तों को “निर्वाचन आयुक्त के समान” और राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन और अन्य सेवा शर्तों को “राज्य सरकार के मुख्य सचिव के समान’ निर्धारित किया गया है। संशोधन अधिनियम में, राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सूचना आयुक्तों के वेतन और अन्य सेवा शर्तों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

इन संशोधनों की आलोचना:

  • आरटीआई अधिनियम में किए जाने वाले संशोधनों को केंद्रीय सूचना आयुक्त की “स्वतंत्रता के लिए खतरा” के रूप में देखा जाता है।
  • सीआईसी, आईसी और राज्य सीआईसी के दर्जे को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कम करने से, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को निर्देश जारी करने संबंधी इनकी क्षमता पर नकरात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • संशोधन में केंद्र और राज्य सूचना आयोगों के सूचना आयुक्तों के कार्यकाल, वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तों को तय करने हेतु नियम बनाने के लिए केंद्र को शक्ति दी गयी है। इससे, सूचना आयोगों की संस्था, मूल रूप से कमजोर होगी, क्योंकि इससे आयुक्तों की स्वतंत्र तरीके से कार्य करने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
  • सरकार द्वारा आरटीआई संशोधन विधेयक पर सार्वजनिक रूप से कोई परामर्श नहीं किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि भारत में ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ और ब्रिटेन में ‘यूनाइटेड किंगडम फ्रीडम ऑफ़ इनफार्मेशन एक्ट’ एक ही साल – 2005 में लागू हुए थे?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण की परिभाषा
  2. अधिनियम के तहत अपवाद
  3. मुख्य सूचना आयुक्त के बारे में
  4. राज्य सूचना आयुक्त
  5. सार्वजनिक सूचना अधिकारी
  6. नवीनतम संशोधन

मेंस लिंक:

आरटीआई अधिनियम, 2005 के महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी


संदर्भ:

हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency – IEA) ने विश्व के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता ‘भारत’ को आइईए का पूर्णकालिक सदस्य बनने के लिए आमंत्रित किया है।

निहितार्थ:

यदि प्रस्ताव को भारत सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो नई दिल्ली के लिए अपने सामरिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) को बढाकर 90 दिनों की आपूर्ति के बराबर तक करना होगा। भारत का वर्तमान सामरिक तेल भंडार अपनी आवश्यकता के 9.5 दिनों की आपूर्ति के बराबर है।

पृष्ठभूमि:

भारत, मार्च 2017 में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का सहयोगी सदस्य बना था।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), एक अंतर-सरकारी स्वायत्त संगठन है। इसकी स्थापना आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (Organisation of Economic Cooperation and Development- OECD) फ्रेमवर्क के अनुसार वर्ष 1974 में की गई थी।

  • इसके कार्यों का फोकस मुख्यतः चार मुख्य क्षेत्रों पर होता है: ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास, पर्यावरण जागरूकता और वैश्विक सहभागिता।
  • इसका मुख्यालय (सचिवालय) पेरिस, फ्रांस में है।

भूमिकाएँ और कार्य:

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की स्थापना वर्ष 1973-1974 के तेल संकट के दौरान सदस्य देशों के लिए तेल आपूर्ति व्यवधानों का सामना करने में मदद करने के लिए की गयी थी। IEA द्वारा यह भूमिका वर्तमान में भी निभाई जा रही है।
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अधिदेश में समय के साथ विस्तार किया गया है। इसके कार्यों में वैश्विक रूप से प्रमुख ऊर्जा रुझानों पर निगाह रखना और उनका विश्लेषण करना, मजबूत ऊर्जा नीतियों को बढ़ावा देना और बहुराष्ट्रीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना शामिल किया गया है।

IEA की संरचना एवं सदस्यता हेतु पात्रता:

वर्तमान में ‘अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ में 30 सदस्य देश तथा में आठ सहयोगी देश शामिल हैं। इसकी सदस्यता होने के लिए किसी देश को आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) का सदस्य होना अनिवार्य है। हालांकि OECD के सभी सदस्य आईईए के सदस्य नहीं हैं।

किसी देश को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का सदस्यता के लिए निम्नलिखित शर्ते पूरा करना आवश्यक है:

  1. देश की सरकार के पास पिछले वर्ष के 90 दिनों में किए गए निवल आयात के बराबर कच्चे तेल और / अथवा उत्पाद भण्डार मौजूद होना चाहिए। भले ही यह भण्डार सरकार के प्रत्यक्ष स्वामित्व में न हो किंतु वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान को दूर करने के इसका उपयोग किया जा सकता हो।
  2. देश में राष्ट्रीय तेल खपत को 10% तक कम करने के लिए एक ‘मांग नियंत्रण कार्यक्रम’ लागू होना चाहिए।
  3. राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया उपाय (CERM) लागू करने के लिए क़ानून और संस्था होनी चाहिए।
  4. मांग किये जाने पर देश की सीमा में कार्यरत सभी तेल कंपनियों द्वारा जानकारी दिए जाने को सुनिश्चित करने हेतु क़ानून और उपाय होने चाहिए।
  5. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सामूहिक कार्रवाई में अपने योगदान को सुनिश्चित करने के लिए देश में क़ानून अथवा उपाय होने चाहिए।

आइईए द्वारा प्रकाशित की जाने वाली रिपोर्ट्स:

  1. वैश्विक ऊर्जा और CO2 स्थिति रिपोर्ट
  2. विश्व ऊर्जा आउटलुक
  3. विश्व ऊर्जा सांख्यिकी
  4. विश्व ऊर्जा संतुलन
  5. ऊर्जा प्रौद्योगिकी परिप्रेक्ष्य

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IEA द्वारा जारी की जाने वाली विभिन्न रिपोर्ट्स
  2. ओईसीडी और ओपेक की संरचना? सदस्यता हेतु पात्रता?
  3. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के शीर्ष उत्पादक और आयातक?
  4. IEA के सहयोगी सदस्य
  5. भारत, IEA में किस प्रकार का सदस्य है?

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के उद्देश्यों और कार्यों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय:  महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

भ्रष्‍टाचार-रोधी कार्यसमूह


संदर्भ:

G20 के ‘भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह’ (Anti-corruption Working Group – ACWG) में भ्रष्टाचार की रोकथाम और मुकाबला करने हेतु ‘उच्च स्तरीय सिद्धांतों के एक मसौदे’ पर आम सहमति हो चुकी है। हाल ही में, ‘भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह’ ने अपने अधिदेश में ‘खेलों’ को पहली बार एक विशिष्टता के रूप में शामिल किया गया था।

‘भ्रष्‍टाचार-रोधी कार्यसमूह’ के बारे में:

भ्रष्‍टाचार-रोधी कार्यसमूह (ACWG)  का गठन वर्ष 2010 में टोरंटो शिखर सम्मेलन के दौरान G20 समूह के नेताओं द्वारा किया गया था।

  • यह, G20 भ्रष्‍टाचार-रोधी कार्य योजनाओं को अपडेट करने और कार्यान्वित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • यह कार्यसमूह G20 नेताओं के प्रति उत्तरदायी है।
  • ACWG, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल सहित प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के कार्यो के साथ समन्वय एवं सहयोग करता है।

G20 समूह के बारे में:

G20, विश्व की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है।

  • इस समूह इस समूह का विश्व की 85 प्रतिशत जीडीपी पर नियंत्रण है, तथा यह विश्व की दो-तिहाई जनसख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
  • G20 शिखर सम्मेलन को औपचारिक रूप से ‘वित्तीय बाजार तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था शिखर सम्मेलन’ के रूप में जाना जाता है।

G20 की उत्पत्ति:

वर्ष 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद, यह स्वीकार किया गया था कि उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली पर चर्चा के लिए भागीदारी को आवश्यकता है।

वर्ष 1999 में, G7 के वित्त मंत्रियों द्वारा G20 वित्त मंत्रियों तथा केंद्रीय बैंक गवर्नरों की एक बैठक के लिए सहमत व्यक्त की गयी।

G20 के पूर्ण सदस्य:

अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ।

‘G20 +’ क्या है?

G20 विकासशील राष्ट्र, जिन्हें G21 / G23 / G20 + भी कहा जाता है, 20 अगस्त, 2003 को स्थापित किया गया विकासशील देशों का एक समूह है। यह G20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से भिन्न है।

  • G20 + की उत्पत्ति, सितंबर 2003 में मैक्सिको के कैनकुन शहर में आयोजित विश्व व्यापार संगठन के पांचवे मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में हुई थी।
  • इसकी स्थापना का आधार 6 जून 2003 को भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित ब्रासीलिया घोषणा है।
  • ‘G20 +’ विश्व की 60% आबादी, 26% कृषि निर्यात और 70% किसानों का प्रतिनिधित्व करता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. G20 बनाम G20 + बनाम G7 बनाम G8
  2. G20 के उद्देश्य तथा इसके उप-समूह
  3. सदस्य देशों के भौगोलिक स्थिति का अवलोकन
  4. ब्रासीलिया घोषणा, 2003 का अवलोकन
  5. वर्ष 2020 में G20 शिखर सम्मलेन की मेजबानी कौन कर रहा है?
  6. भ्रष्टाचार निरोधी कार्यसमूह की स्थापना कब की गई थी?

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि हाल ही में जी 20 शिखर सम्मेलन मात्र वार्ता हेतु मंच बन कर रह गए हैं? आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

क्वाड राष्ट्रों का मालाबार युद्धाभ्यास


संदर्भ:

हाल ही में अमेरिका ने कहा है, कि युद्धाभ्यास में भाग लेने वाली अधिक समान विचारधारा वाली नौसेनाओं के संदर्भ में, बहु-राष्ट्रीय मालाबार युद्धाभ्यास का दायरा भविष्य में विस्तारित किया जा सकता है। और इसमें विस्तार की संभावना पर क्वाड समूह के सदस्यों द्वारा चर्चा की जा सकती है।

पृष्ठभूमि:

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के मध्य इस साल के मालाबार नौसैनिक अभ्यास का दूसरा चरण को बंगाल की खाड़ी में शुरू किया जा रहा है। इसमें, अगस्त माह में आयोजित युद्धाभ्यास के पहले चरण के दौरान विकसित तालमेल और अन्तरसंक्रियता को और आगे बढाया जाएगा।

मालाबार युद्धाभ्यास के बारे में:

मालाबार युद्धाभ्यास का आरंभ भारत और अमेरिका के मध्य वर्ष 1992 में एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुआ था। वर्ष 2015 में इस अभ्यास में जापान को सामिलित किया गया और इसके पश्चात यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया।

‘क्वाड ग्रुपिंग’ (Quad grouping) क्या है?

यह, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देशों का एक चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता संगठन है।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी हित साझा करते हैं।
  • इस विचार को पहली बार वर्ष 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे द्वारा प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के समूह में सम्मिलित नहीं होने के कारण यह विचार आगे नहीं बढ़ सका है।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्वाड समूह’ के प्रति चीन की आशंकाएं:

  1. बीजिंग, काफी समय से भारत-प्रशांत क्षेत्र में इन लोकतांत्रिक देशों के गठबंधन का विरोध करता रहा है।
  2. चीन, इसे एशियाई-नाटो (Asian-NATO) चतुष्पक्षीय गठबंधन के रूप में देखता है, जिसका उद्देश्य चीन के उत्थान को रोकना है।
  3. इसके अतिरिक्त, चीन के साथ भारत के तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए, मालाबार ड्रिल में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने की भारत की मंशा को केवल बीजिंग के खिलाफ एक कदम के रूप में माना जा सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘रूस-भारत-चीन’ ग्रुपिंग (RIC Grouping) के बारे में सुना है? इसके क्या उद्देश्य हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड (Quad)- संरचना और सदस्य
  2. मालाबार युद्धाभ्यास – संरचना और प्रतिभागी
  3. एशिया प्रशांत क्षेत्र तथा भारत-प्रशांत क्षेत्र: भौगोलिक भूगोल
  4. दक्षिण चीन सागर में महत्वपूर्ण द्वीप
  5. हिंद महासागर क्षेत्र में द्वीप तथा विभिन्न चैनल

मेंस लिंक:

मालाबार नौसेना अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करना भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC)


संदर्भ:

जीएसटी नेटवर्क द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, ‘वस्तु और सेवा कर’ (Goods and Service Tax) के तहत पंजीकृत 66,000 व्यवसायों के 14,000 करोड़ रुपये के ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (Input Tax Credit – ITC) को फिलहाल रोक दिया गया है।

पृष्ठभूमि:

केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2019 में, ‘जीएसटी नियमों’ में एक नया नियम 86A शामिल किया गया था, जिसके तहत कर-अधिकारियों को यदि यह यकीन हो जाता है कि करदाता द्वारा ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) का धोखाधड़ी से लाभ उठाया गया है, तो ये अधिकारी, करदाता के इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेज़र में मौजूद ‘आईटीसी’ को ब्लॉक करने कर सकते हैं।

इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) क्या होता है?

  • यह किसी कारोबार द्वारा माल की ‘खरीद’ पर भुगतान किया जाने वाला ‘कर’ होता है, और माल की बिक्री करने पर ‘कर-देयता’ (Tax Liability) को कम करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
  • सरल शब्दों में, इनपुट क्रेडिट का मतलब आउटपुट पर टैक्स देते समय इनपुट पर चुकाए गए टैक्स को घटाकर शेष राशि का भुगतान करना है।

अपवाद: ‘कंपोजिशन स्कीम’ के तहत कोई व्यवसाय इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं उठा सकता है। ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) का उपयोग व्यक्तिगत उपयोग के लिए अथवा छूट वाले सामानों के लिए  नहीं किया जा सकता है।

इसके दुरुपयोग पर चिंता:

  1. केवल टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए नकली चालान बनाकर बेईमान व्यवसायों द्वारा प्रावधान के दुरुपयोग की संभावना हो सकती है।
  2. कुल जीएसटी देयता का 80% तक ITC द्वारा निपटान किया जा रहा है और केवल 20% नकद के रूप में जमा किया जा रहा है।
  3. वर्तमान व्यवस्था के तहत, इनपुट आपूर्तिकर्ताओं द्वारा पहले ही भुगतान किए गए करों और ITC दावों के उसी समय मिलान करने का कोई प्रावधान नहीं उपलब्ध नहीं है।
  4. वर्तमान में ITC दावे और आपूर्तिकर्ताओं द्वारा भुगतान किए गए करों के साथ मिलान करने के समय में काफी अंतर रहता है। इसलिए फर्जी चालान के आधार पर आईटीसी का दावा किए जाने की संभावना अधिक रहती है।

current affairs

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जीएसटी क्या है?
  2. कंपोजिशन स्कीम क्या है?
  3. इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या है?

मेंस लिंक:

‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

 स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस

  • हर साल 11 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस’ (International Day of the Girl Child) के रूप में मनाया जाता है।
  • यह अवसर किशोर लड़कियों के महत्व को दर्शाता है और उनके लिए अवसर उपलब्ध करके उनकी शक्ति और क्षमता की चिह्नित करने का प्रयास करता है।
  • 19 दिसंबर, 2011 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक प्रस्ताव पारित कर 11 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस घोषित किया गया था।

‘अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस’ – 2021 की विषयवस्तु: ‘डिजिटल पीढ़ी, हमारी पीढ़ी’ (DIGITAL GENERATION. OUR GENERATION)।

बीजिंग घोषणा:

  • सबसे पहले, ‘बीजिंग घोषणापत्र’ (Beijing Declaration) में बालिकाओं के अधिकारों को चिह्नित किया गया था और इसके लिए बात उठाई गयी थी।
  • वर्ष 1995 में बीजिंग में आयोजित ‘महिलाओं पर वैश्विक सम्मेलन’ में, भागीदार देशों ने सर्वसम्मति से ‘बीजिंग घोषणा’ और कार्रवाई मंच को अपनाया था। इसके लिए न केवल महिलाओं बल्कि लड़कियों के अधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए अब तक की सबसे प्रगतिशील रूपरेखा मानी जाती है।

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केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण

यह भारत में चिड़ियाघरों के लिए वैधानिक नियामक संस्था है। इसकी स्थापना 1992 में हुई थी।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority- CZA) का मुख्य उद्देश्य, ‘राष्ट्रीय चिड़ियाघर नीति’, 1998 के अनुसार देश की समृद्ध जैव विविधता, विशेष रूप से जीवों के संरक्षण में राष्ट्रीय प्रयास में सहयोग करना है।

प्रमुख कार्य:

  • केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, भारतीय चिड़ियाघरों में जानवरों के रखरखाव और स्वास्थ्य देखभाल के लिए न्यूनतम मानदंडों को लागू करता है।
  • देश के प्रत्येक चिड़ियाघर को अपने संचालन के लिए ‘केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण’ (CZA) से मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है।
  • इसके लिए चिड़ियाघरों की मान्यता रद्द करने शक्ति भी प्राप्त है।

चर्चा का कारण:

हाल ही में, भारतीय चिड़ियाघरों के लिए ‘विजन प्लान (2021-2031)’ जारी किया गया है। विजन प्लान का उद्देश्य भारतीय चिड़ियाघरों को अपग्रेड करना और सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) को मजबूत करना है।

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