HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
Quiz-summary
0 of 5 questions completed
Questions:
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
Information
Welcome to Insights IAS Static Quiz in HINDI. We have already outlined details of this New Initiative HERE.
You have already completed the quiz before. Hence you can not start it again.
Quiz is loading...
You must sign in or sign up to start the quiz.
You have to finish following quiz, to start this quiz:
Results
0 of 5 questions answered correctly
Your time:
Time has elapsed
You have reached 0 of 0 points, (0)
Categories
- Not categorized 0%
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
- Answered
- Review
-
Question 1 of 5
1. Question
कथकली नृत्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- चाकियारकुत्त्, कूडियाट्टम, कृष्णानाट्टम और रामानाट्टम कुछ अनुष्ठानिक निष्पादन कलाएं हैं, जिनका कथकली के प्रारूप और तकनीक पर सीधा प्रभाव है।
- कथकली नृत्य, संगीत और अभिनय का मिश्रण है और इसमें कहानियों का प्रदर्शन किया जाता है, जिन्हें भारतीय महाकाव्यों से लिया गया है।
- कथकली को बलराम भारतम और हस्तलक्षण दीपिका से मौलिक पहचान मिली है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
कथकली नृत्य
आज कथकली एक प्रचलित नृत्य रूप है । इसे तुलनात्मक रूप से हाल ही के समय में उद्भव हुआ माना जाता है । हालांकि यह एक कला है, जो प्राचीन काल में दक्षिणी प्रदेशों में प्रचलित बहुत से सामाजिक और धार्मिक रंगमंचीय कला रूपों से उत्पन्न हुई है । चाकियारकुत्त्, कूडियाट्टम, कृष्णानाट्टम और रामानाट्टम- केरल की कुछ अनुष्ठानिक निष्पादन कलाएं हैं, जिनका कथकली के प्रारूप और तकनीक पर सीधा प्रभाव है।
कथकली नृत्य, संगीत और अभिनय का मिश्रण है और इसमें अधिकतर भारतीय महाकाव्यों से ली गई कथाओं का नाटकीकरण किया जाता है । यह शैलीबद्ध कला रूप है, इसमें अभिनय के चार पहलू- अंगिका, अहार्य, वाचिका, सात्विका और नृत्त, नृत्य तथा नाट्य पहलुओं का उत्कृष्ट सम्मिश्रण है । नर्तक अपने भावों को विधिबद्ध हस्तमुद्राओं और चेहरे के भावों से अभिव्यक्त करता है और इसके पश्चात् (पद्म) पद्यात्मक भाग होता है, जिन्हें गाया जाता है । कथकली नृत्य शैली अपनी मूलपाठ-विषयक स्वीकृति बलराम भरतम् और हस्तलक्षणा दीपिका से प्राप्त करती है ।
Incorrect
उत्तर: d)
कथकली नृत्य
आज कथकली एक प्रचलित नृत्य रूप है । इसे तुलनात्मक रूप से हाल ही के समय में उद्भव हुआ माना जाता है । हालांकि यह एक कला है, जो प्राचीन काल में दक्षिणी प्रदेशों में प्रचलित बहुत से सामाजिक और धार्मिक रंगमंचीय कला रूपों से उत्पन्न हुई है । चाकियारकुत्त्, कूडियाट्टम, कृष्णानाट्टम और रामानाट्टम- केरल की कुछ अनुष्ठानिक निष्पादन कलाएं हैं, जिनका कथकली के प्रारूप और तकनीक पर सीधा प्रभाव है।
कथकली नृत्य, संगीत और अभिनय का मिश्रण है और इसमें अधिकतर भारतीय महाकाव्यों से ली गई कथाओं का नाटकीकरण किया जाता है । यह शैलीबद्ध कला रूप है, इसमें अभिनय के चार पहलू- अंगिका, अहार्य, वाचिका, सात्विका और नृत्त, नृत्य तथा नाट्य पहलुओं का उत्कृष्ट सम्मिश्रण है । नर्तक अपने भावों को विधिबद्ध हस्तमुद्राओं और चेहरे के भावों से अभिव्यक्त करता है और इसके पश्चात् (पद्म) पद्यात्मक भाग होता है, जिन्हें गाया जाता है । कथकली नृत्य शैली अपनी मूलपाठ-विषयक स्वीकृति बलराम भरतम् और हस्तलक्षणा दीपिका से प्राप्त करती है ।
-
Question 2 of 5
2. Question
थिएटर रूपों के निम्नलिखित युग्मों और उनके प्रदर्शन के क्षेत्र पर विचार कीजिए:
थिएटर रूप क्षेत्र
- भवई बिहार
- माच मेघालय
- नौटंकी उत्तर प्रदेश
- भाओना असम
उपरोक्त में से कौनसे युग्म सही सुमेलित हैं?
Correct
उत्तर: a)
भवई गुजरात का पारंपरिक नाट्य रूप है। इस रूप के केंद्र कच्छ और काठियावाड़ हैं। भवई में प्रयुक्त वाद्ययंत्र हैं: भुंगल, तबला, बांसुरी, पखावाज, रबाब, सारंगी, मंजीरा, आदि। भवई में भक्ति और रोमांटिक भावनाओं का दुर्लभ मिश्रण मिलता है।
माच मध्य प्रदेश का पारंपरिक नाट्य रूप है। माच शब्द का प्रयोग मंच के लिए और नाटक के लिए भी किया जाता है। इस थिएटर रूप में संवादों के बीच गीतों को प्रमुखता दी जाती है। इस रूप में संवाद के लिए शब्द बोल होते हैं और कथन में कविता को वनाग कहा जाता है। इस नाट्य रूप की धुनों को रंगत के नाम से जाना जाता है।
नौटंकी आमतौर पर उत्तर प्रदेश से जुड़ा हुआ है। इस पारंपरिक रंगमंच के सबसे लोकप्रिय केंद्र कानपुर, लखनऊ और हाथरस हैं। छंदों में प्रयुक्त होने वाले तत्व: दोहा, चौबोला, छप्पई, बेहर-ए-तबील हैं। एक समय था जब नौटंकी में केवल पुरुष ही अभिनय करते थे लेकिन आजकल, महिलाओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। इसमें कानपुर की गुलाब बाई भी शामिल हैं। उन्होंने इस पुराने रंगमंच को एक नया आयाम दिया।
भाओना असम की अंकिया नट की प्रस्तुति है। भाओना में असम, बंगाल उड़ीसा, मथुरा और वृंदावन की सांस्कृतिक झलक देखी जा सकती है। सूत्रधार, या कथाकार कहानी शुरू करते हैं, पहले संस्कृत में और फिर ब्रजबोली या असमिया में।
Incorrect
उत्तर: a)
भवई गुजरात का पारंपरिक नाट्य रूप है। इस रूप के केंद्र कच्छ और काठियावाड़ हैं। भवई में प्रयुक्त वाद्ययंत्र हैं: भुंगल, तबला, बांसुरी, पखावाज, रबाब, सारंगी, मंजीरा, आदि। भवई में भक्ति और रोमांटिक भावनाओं का दुर्लभ मिश्रण मिलता है।
माच मध्य प्रदेश का पारंपरिक नाट्य रूप है। माच शब्द का प्रयोग मंच के लिए और नाटक के लिए भी किया जाता है। इस थिएटर रूप में संवादों के बीच गीतों को प्रमुखता दी जाती है। इस रूप में संवाद के लिए शब्द बोल होते हैं और कथन में कविता को वनाग कहा जाता है। इस नाट्य रूप की धुनों को रंगत के नाम से जाना जाता है।
नौटंकी आमतौर पर उत्तर प्रदेश से जुड़ा हुआ है। इस पारंपरिक रंगमंच के सबसे लोकप्रिय केंद्र कानपुर, लखनऊ और हाथरस हैं। छंदों में प्रयुक्त होने वाले तत्व: दोहा, चौबोला, छप्पई, बेहर-ए-तबील हैं। एक समय था जब नौटंकी में केवल पुरुष ही अभिनय करते थे लेकिन आजकल, महिलाओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। इसमें कानपुर की गुलाब बाई भी शामिल हैं। उन्होंने इस पुराने रंगमंच को एक नया आयाम दिया।
भाओना असम की अंकिया नट की प्रस्तुति है। भाओना में असम, बंगाल उड़ीसा, मथुरा और वृंदावन की सांस्कृतिक झलक देखी जा सकती है। सूत्रधार, या कथाकार कहानी शुरू करते हैं, पहले संस्कृत में और फिर ब्रजबोली या असमिया में।
-
Question 3 of 5
3. Question
कठपुतली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- कठपुतली कला का सबसे पहला संदर्भ तमिल क्लासिक ‘शिलप्पादिकारम‘ में मिलता है।
- नाट्यशास्त्र, नाट्यशास्त्र पर उत्कृष्ट ग्रंथ भी कठपुतली की कला के बारे में विस्तृत रूप से संदर्भित करता है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
नाटयशास्त्र दूसरी सदी ईसा पूर्व से द्वितीय सदी इसवीं तक के दौरान कभी कभार नाटयशास्त्र पर प्रभावशाली ढंग से लिखे गए लेख पुतली कला का वर्णन नहीं मिलता है लेकिन मानव नाटय के निर्माता-सह निर्देशक को ‘सूत्रधार’ के रूप में प्रभावित किया गया है जिसका अर्थ धागों से है । इस शब्द ने नाटय शब्दावली में शायद अपना स्थान ‘नाटयशास्त्र’ के लिऐ जाने से बहुत पहले पाया है, लेकिन यह शब्द पुतलीकला नाटय (रंगमंच) से अवश्य आया होगा । इस प्रकार पतुलीकला नाटय में 500 ईसा पूर्व भी बहुत पहले वर्षों से आयी होगी ।
Incorrect
उत्तर: a)
नाटयशास्त्र दूसरी सदी ईसा पूर्व से द्वितीय सदी इसवीं तक के दौरान कभी कभार नाटयशास्त्र पर प्रभावशाली ढंग से लिखे गए लेख पुतली कला का वर्णन नहीं मिलता है लेकिन मानव नाटय के निर्माता-सह निर्देशक को ‘सूत्रधार’ के रूप में प्रभावित किया गया है जिसका अर्थ धागों से है । इस शब्द ने नाटय शब्दावली में शायद अपना स्थान ‘नाटयशास्त्र’ के लिऐ जाने से बहुत पहले पाया है, लेकिन यह शब्द पुतलीकला नाटय (रंगमंच) से अवश्य आया होगा । इस प्रकार पतुलीकला नाटय में 500 ईसा पूर्व भी बहुत पहले वर्षों से आयी होगी ।
-
Question 4 of 5
4. Question
बौद्ध और जैन साहित्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- बौद्ध विहित साहित्य पाली भाषा में लिखा गया था।
- बौद्ध और जैन दोनों धर्मों ने किसी भी रूप में संस्कृत का उपयोग करने से परहेज किया है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
वैदिक काल के बाद पाली और प्राकृत भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली भाषाएँ थीं।
भगवान बुद्ध (500 ईसा पूर्व) ने अपने उपदेश देने के लिए पाली का इस्तेमाल किया। बौद्ध विहित साहित्य पाली में रचित है जिसमें त्रितिपिटक (तीन गुना टोकरी) शामिल है।
बौद्ध साहित्य भी संस्कृत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसमें अश्वघोष (78 ई.) का महान महाकाव्य बुद्धचरित शामिल है।
Incorrect
उत्तर: b)
वैदिक काल के बाद पाली और प्राकृत भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली भाषाएँ थीं।
भगवान बुद्ध (500 ईसा पूर्व) ने अपने उपदेश देने के लिए पाली का इस्तेमाल किया। बौद्ध विहित साहित्य पाली में रचित है जिसमें त्रितिपिटक (तीन गुना टोकरी) शामिल है।
बौद्ध साहित्य भी संस्कृत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसमें अश्वघोष (78 ई.) का महान महाकाव्य बुद्धचरित शामिल है।
-
Question 5 of 5
5. Question
भारत में दार्शनिक चिंतन के इतिहास के संदर्भ में सांख्य विचारधारा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- सांख्य दर्शन ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास करता है और पुनर्जन्म के सिद्धांत को स्वीकार करता है।
- सांख्य का मानना है कि यह आत्म-ज्ञान के द्वारा मुक्ति प्राप्त कि जाता सकती है न कि किसी बाहरी प्रभाव या कारक के द्वारा।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
- सांख्य विचारधारा ईश्वर के अस्तित्व को नकारती है। हालाँकि, पुनर्जन्म के सिद्धांत को स्वीकार करता है।
- आत्म-ज्ञान से मुक्ति प्राप्त होती है।
Incorrect
उत्तर: b)
- सांख्य विचारधारा ईश्वर के अस्तित्व को नकारती है। हालाँकि, पुनर्जन्म के सिद्धांत को स्वीकार करता है।
- आत्म-ज्ञान से मुक्ति प्राप्त होती है।
Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos









