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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 8 October 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. बौद्ध परिपथ

 

सामान्य अध्ययन-II

1. प्रधानमंत्री जन-औषधि योजना

2. पीएम मित्र योजना

3. ‘मध्य एशियाई उड़ानमार्ग’ विस्तार वाले देशों की बैठक

4. CAATSA कानून

5. टैक्स इंस्पेक्टर विदाउट बॉर्डर्स (TIWB) कार्यक्रम

 

सामान्य अध्ययन-III

1. प्रकृति और लोगों हेतु उच्च आकांक्षा गठबंधन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. गुडुची (गिलोय)

2. औद्योगिक पार्क रेटिंग प्रणाली (आईपीआरएस) रिपोर्ट

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

 बौद्ध परिपथ


संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा ‘बौद्ध परिपथ’ (Buddhist Circuit) के विकास हेतु महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं को शुरू करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा, खासकर देश में कोविड की स्थिति में नाटकीय सुधार आने और टीकाकरण लक्ष्यों को हासिल करने के बाद, पर्यटन उद्योग हितधारकों के साथ मिलकर, जोरदार तरीके से पर्यटन को बढ़ावा देना शुरू कर दिया गया है।

‘बौद्ध परिपथ’ के बारे में:

केंद्र सरकार द्वारा ‘बौद्ध परिपथ’ / ‘बौद्ध सर्किट’ परियोजना की घोषणा वर्ष 2016 में की गयी थी। तब से लेकर अब तक विभिन्न योजनाओं के तहत, इस परियोजना के लिए 343 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

‘बौद्ध परिपथ’, बुद्ध के जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण स्थानों को आपस में जोड़ने वाला एक मार्ग है। यह मार्ग बुद्ध के जन्मस्थान नेपाल में लुंबिनी, भारत में बिहार के बोधगया- जहाँ उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, उत्तर प्रदेश में सारनाथ- जहाँ उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया था, और कुशीनगर- जहाँ उन्हें महा-परिनिर्वाण की प्राप्ति हुई थी, से होकर गुजरता है।

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बौद्ध परिपथ’ का विकास:

  • पर्यटन मंत्रालय की एक मुख्य योजना ‘स्वदेश दर्शन योजना’ (Swadesh Darshan Scheme) के तहत, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
  • योजना के तहत, देश के बिहार और उत्तर प्रदेश राज्यों में, बोधगया, नालंदा, राजगीर, वायशाली, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु के स्थलों को और विकसित करने की योजना है।
  • वर्तमान में, देश भर में आने वाले कुल पर्यटकों में से लगभग छह प्रतिशत विदेशी पर्यटक इन स्थलों पर आते हैं और इनमे सारनाथ और बोधगया सबसे प्रमुख स्थल हैं।

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परिपथ का विस्तार:

शुरुआत में, बौद्ध परिपथ की परिकल्पना केवल उत्तर प्रदेश और बिहार में स्थित सात प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए की गई थी, बाद में इसे भारत का ‘पहला अंतरराष्ट्रीय पर्यटन परिपथ’ बनाने के लिए 21 अन्य राज्यों में विस्तारित किया गया।

  • योजना के तहत, इन 21 राज्यों में स्तूपों और विहारों की पहचान की गई है, जिनके चारों ओर छोटे अंतर्राज्यीय बौद्ध क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।
  • परिपथ में शामिल किए जाने वाले नए राज्य- मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल, गोवा, गुजरात और जम्मू और कश्मीर हैं।
  • वर्तमान में, बौद्ध सर्किट में चार अंतरराष्ट्रीय और दो घरेलू हवाई अड्डे कार्यरत हैं, जबकि दो अन्य हवाई अड्डों पर कार्य जारी है।
  • उड़ान’ योजना के तहत हेलीकॉप्टर सेवाओं को विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय संपर्क में सुधार करने की भी योजना है।

स्वदेश दर्शन योजना:

इस योजना को पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में देश में ‘विषय आधारित पर्यटन परिपथ’ विकसित करने के लिए शुरू किया गया था।

  • यह परियोजना घटकों के लिए 100% केंद्र द्वारा वित्त पोषित योजना है।
  • इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और कॉर्पोरेट क्षेत्र की ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) पहल के तहत ‘स्वैच्छिक वित्त पोषण’ का लाभ उठाने का भी प्रावधान है।

इस योजना के तहत विकास के लिए 13 विषयक परिपथो (Thematic Circuits) को चिह्नित किया गया है है। य़े हैं:

  1. बौद्ध सर्किट,
  2. उत्तर-पूर्व भारत सर्किट,
  3. तटीय सर्किट,
  4. हिमालय सर्किट,
  5. कृष्णा सर्किट,
  6. डेजर्ट सर्किट,
  7. इको सर्किट,
  8. वन्यजीव सर्किट,
  9. जनजातीय सर्किट,
  10. ग्रामीण सर्किट,
  11. आध्यात्मिक सर्किट,
  12. रामायण सर्किट और
  13. विरासत सर्किट।

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन’ के बारे में जानते हैं? आगामी सम्मेलन कहाँ आयोजित किया जाएगा?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बौद्ध धर्म- उत्पत्ति और प्रसार
  2. बौद्ध धर्म के तहत विभिन्न संप्रदाय
  3. विभिन्न मुद्राएं
  4. हीनयान और महायान संप्रदायों में अंतर
  5. बोधिसत्व कौन हैं?
  6. बुद्ध के जीवन से जुड़े विभिन्न स्थान
  7. विभिन्न बौद्ध परिषदें

मेंस लिंक:

वर्तमान में बुद्ध और उनके विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना (PMBJP)


संदर्भ:

‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना’ (PM Bhartiya Janaushadhi Pariyojana PMBJP) ने वित्तीय वर्ष- 2021-22 में 8,300 केंद्र खोलने का लक्ष्य केवल 6 महीनों में हासिल कर लिया है।

पृष्ठभूमि:

आम आदमी विशेषकर गरीबों को सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से, सरकार ने मार्च 2024 तक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों की संख्या को 10,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। 05 अक्टूबर, 2021 तक इन दुकानों की संख्या बढ़कर 8355 हो गई है। ये केंद्र देश के कोने-कोने में लोगों को सस्ती दवा की आसान पहुंच सुनिश्चित करेंगे।

योजना का प्रदर्शन:

  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत देश के सभी जिलों को कवर किया गया है।
  • सभी केंद्रों पर दवाओं का रियल टाइम वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी आईटी तकनीक से लैस लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन शुरू की गई है।
  • PMBJP के उत्पाद समूह में वर्तमान में 1,451 दवाएं और 240 सर्जिकल उपकरण शामिल हैं।

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PMBJP के बारे में:

यह रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग द्वारा चलाया गया एक अभियान है।

  • इस अभियान के तहत विशेष केंद्रों के माध्यम से आम लोगों को सस्ती कीमत पर गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराई जाती है।
  • इन विशेष केंद्रों को प्रधान मंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र के रूप में जाना जाता है।
  • इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2008 में की गयी थी, तथा वर्ष 2015 में इस योजना को फिर से नए रूप में किया शुरू गया।
  • इस योजना का कार्यान्वयन ‘फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ़ इंडिया’ (PMBI) के द्वारा किया जाता है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  1. गुणवत्ता युक्त दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना।
  2. दवाओं पर होने वाले व्यय को कम करने हेतु गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं का कवरेज बढ़ाना, जिससे प्रति व्यक्ति उपचार की लागत को फिर से परिभाषित किया जा सके।
  3. शिक्षा और प्रचार के माध्यम से जेनेरिक दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना, ताकि गुणवत्ता को केवल उच्च कीमत से न आँका जाए।
  4. एक सार्वजनिक कार्यक्रम, जिसमें सरकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, निजी क्षेत्र, गैर सरकारी संगठन, सोसायटी, सहकारी निकाय और अन्य संस्थान शामिल हैं।
  5. सभी चिकित्सीय श्रेणियों में, जहां भी आवश्यक हो, कम उपचार लागत और आसान उपलब्धता के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार करके जेनेरिक दवाओं की मांग पैदा करना।

विश्व स्वास्थ्य संगठन – उचित विनिर्माण पद्धतियां (WHO-GMP):

‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना’ के तहत, उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दवाएं ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन – उचित विनिर्माण पद्धतियां’ (World Health Organization – Good Manufacturing Practices: WHO-GMP) प्रमाणित आपूर्तिकर्ताओं से खरीदी जाती हैं।

  • ‘उचित विनिर्माण पद्धतियां’ (GMP), गुणवत्ता आश्वासन के संबंध में यह सुनिश्चित करता है कि औषधीय उत्पादों को, उत्पाद विनिर्देशों के अनुसार आवश्यक, उनके इच्छित उपयोग के लिए उपयुक्त गुणवत्ता मानकों के लिए लगातार उत्पादित और नियंत्रित किया गया है।
  • GMP के कानूनी घटक में दवाओं के वितरण, अनुबंध निर्माण और परीक्षण, और उत्पाद दोषों और शिकायतों के जवाबों के प्रति उत्तरदायित्व भी शामिल है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि जीएमपी पर WHO का पहला मसौदा वर्ष 1968 में पारित किया गया था? वर्ष 1969 में, विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा वैश्विक बाजार में चल रहे फार्मास्युटिकल उत्पादों की गुणवत्ता पर WHO प्रमाणन योजना के पहले संस्करण की सिफारिश करने के बाद WHO-GMP को स्वीकार किया गया था।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इस योजना का आरंभ कब किया गया था?
  2. इसका नाम परिवर्तन कब किया गया?
  3. यह योजना किस मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी?
  4. BPPI के बारे में- स्थापना और कार्य
  5. जेनेरिक दवाएं क्या है?

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना (PMBJP) की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

पीएम मित्र योजना


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार ने 2021-22 के केंद्रीय बजट में की गई घोषणा के अनुरूप सात ‘पीएम मित्र’ (PM MITRA) टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना को स्वीकृति दे दी है। इसके लिए 5 साल की अवधि में कुल 4,445 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी गयी है।

पीएम-मित्र” योजना के बारे में:

इस योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक वस्त्र मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की परिकल्पना को साकार करना है।

‘पीएम मित्र’ योजना माननीय प्रधानमंत्री की 5F परिकल्पना से प्रेरित है। ‘5Fफॉर्मूला में- फार्म टू फाइबर; फाइबर टू फैक्ट्री; फैक्ट्री टू फैशन; फैशन टू फॉरेन शामिल हैं।

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लक्ष्य:

इस योजना का उद्देश्य एक विश्व स्तरीय औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार करना है, जो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को आकर्षित करेगा और इस क्षेत्र में FDI और स्थानीय निवेश को बढ़ावा देगा।

साइटों का चयन:

व्यापक एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) पार्कों को विभिन्न इच्छुक राज्यों में स्थित ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड स्थलों पर स्थापित किया जाएगा।

कार्यान्वयन:

  • पीएम मित्र पार्क को एक ‘विशेष उद्देश्य संवाहक’ (Special Purpose Vehicle- SPV) के जरिए विकसित किया जाएगा, जिसका स्वामित्व सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मोड में राज्य सरकार और भारत सरकार के पास होगा।
  • प्रत्येक ‘मित्र पार्क’ में एक ऊष्मायन केंद्र (incubation centre), सामान्य प्रसंस्करण गृह और एक सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र, डिजाइन केंद्र और परीक्षण केंद्र जैसी अन्य कपड़ा संबंधी सुविधाएं होंगी।
  • मास्टर डेवलपर न केवल औद्योगिक पार्क का विकास करेगा बल्कि, छूट की अवधि के दौरान इसका रखरखाव भी करेगा।

 

वित्त पोषण:

इस योजना के तहत, समान बुनियादी ढांचे (परियोजना लागत का 30 फीसदी) के विकास के लिए सभी ग्रीनफील्ड पीएम मित्र को अधिकतम ‘विकास पूंजी सहायता’ 500 करोड़ रूपए और ब्राउनफील्ड पीएम मित्र को अधिकतम 200 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।

‘ग्रीनफील्ड’ (Greenfield) का तात्पर्य एक पूरी तरह से नई परियोजना से होता है, जिसे एकदम शुरुआत से निष्पादित किया जाता है, जबकि ब्राउनफील्ड (Brownfield) परियोजनाएं, वे परियोजनाएं होती है जिन पहले से ही दूसरों के द्वारा काम किया जा चुका होता है।

प्रोत्साहन हासिल करने हेतु पात्रता:

  • भारत सरकार निर्माण इकाइयों को स्थापित करने को लेकर प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक पीएम मित्र पार्क के लिए 300 करोड़ रुपये की निधि भी प्रदान करेगी।
  • कम से कम 100 लोगों को रोजगार देने वाले “एंकर प्लांट” स्थापित करने वाले निवेशक तीन साल तक हर साल 10 करोड़ रुपये तक की प्रोत्साहन राशि हासिल करने के पात्र होंगे।

‘पीएम-मित्र योजना’ के लाभ:

  • इस योजना का उद्देश्य प्रति पार्क लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करना है।
  • यह योजना एक स्थान पर कताई, बुनाई, प्रसंस्करण/रंगाई और छपाई से लेकर परिधान निर्माण तक एक एकीकृत वस्त्र मूल्य श्रृंखला बनाने का अवसर प्रदान करेगी जो व्यवसाय को आसान बनाएगी और उद्योग की रसद लागत को कम करेगी।

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘तकनीकी वस्त्रों’ (Technical Textiles) के बारे में जानते हैं? इनका क्या महत्व है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पीएम-मित्र योजना’ की मुख्य विशेषताएं
  2. पात्रता
  3. वित्त पोषण
  4. कार्यान्वयन
  5. प्रोत्साहन

मेंस लिंक:

‘पीएम-मित्र योजना’ की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं, एजेंसियां ​​और मंच, उनकी संरचना, अधिदेश।

‘मध्य एशियाई उड़ानमार्ग’ विस्तार वाले देशों की बैठक


संदर्भ:

हाल ही में, ‘मध्य एशियाई उड़ानमार्ग’ (Central Asian Flyway – CAF) रेंज के देशों की आभासी प्रारूप में दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई थी।

‘प्रवासन’ एवं इसका महत्व:

प्रवासन (Migration), पक्षियों को मौसम की प्रतिकूलताओं और ठंडे क्षेत्रों में भोजन की अनुपलब्धता से उबरने में मदद करने के लिए एक ‘अनुकूलन तंत्र’ होता है।

  • पक्षियों के प्रवासन का पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले महत्व को अच्छी तरह से साबित हो चुका है।
  • प्रवासी पक्षियों को बचाने का अर्थ, आर्द्रभूमियों, स्थलीय आवासों और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना तथा आर्द्रभूमियों पर निर्भर समुदायों को लाभ पहुंचाना है।

प्रवासी पक्षियों के सामने आने वाली चुनौतियाँ:

  1. पिछले दशक के दौरान विश्व स्तर पर इनके आवासों का लगातार नष्ट होना।
  2. जल निकायों, आर्द्रभूमियों, प्राकृतिक घास के मैदानों और जंगलों के अंतर्गत क्षेत्रफल में कमी।
  3. बढ़ती हुई मौसम परिवर्तनशीलता और जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप प्रवासी पक्षियों के लिए आवश्यक ‘जैव विविधता’ का नुकसान हुआ है।

आगे की राह:

प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए देशों और राष्ट्रीय सीमाओं के बीच विस्तारित पूरे ‘मध्य एशियाई फ्लाईवे’ (Central Asian Flyway – CAF) पर सहयोग और समन्वय की आवश्यकता है।

उड़ान-मार्ग / फ्लाईवे क्या है?

उड़ान-मार्ग (Flyway), वह भौगोलिक क्षेत्र होता है, जिसके भीतर कोई प्रवासी पक्षी या प्रवासी प्रजातियों का समूह, प्रजनन, पंखो का झाड़ना (Moulting), ठहरना और गैर-प्रजनन जैसी गतिविधियों का अपना वार्षिक चक्र पूरा करते हैं।

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‘मध्य एशियाई फ्लाईवे’ के बारे में:

मध्य एशियाई फ्लाईवे (CAF) के अंतर्गत, आर्कटिक और हिंद महासागरों के मध्य यूरेशिया के एक बड़ा क्षेत्र आता है।

  • मध्य एशियाई फ्लाईवे के अंतर्गत भारत सहित 30 अन्य देश आते हैं।
  • ‘मध्य एशियाई फ्लाईवे’ में जलपक्षियों के कई महत्वपूर्ण प्रवास मार्ग भी आते हैं, जिनमें से अधिकांश प्रवास मार्ग, साइबेरिया में फैले हुए सबसे उत्तरी प्रजनन मैदान से लेकर, पश्चिम एशिया, भारत, मालदीव और ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र में फैले हुए दक्षिणी शीतकालीन गैर-प्रजनन गतिविधियों वाले मैदानों तक विस्तारित हैं।

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उड़न-मार्गों की रक्षा करने की आवश्यकता:

  • विश्व की 11,000 पक्षी प्रजातियों में प्रति पांच में से लगभग एक पक्षी प्रजाति सालाना प्रवास करती है, जिनमे से कुछ प्रजातियाँ बहुत लंबी दूरी तय करती हैं। प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु देशों और राष्ट्रीय सीमाओं के बीच पूरे फ्लाईवे के साथ सहयोग और समन्वय की आवश्यकता है।
  • फ्लाईवे की सुरक्षा का अर्थ है, शिकारियों से पक्षियों की रक्षा करना तथा आर्द्रभूमियों का कायाकल्प करना आदि। आर्द्रभूमियों का बचाव करना, स्थलीय आवास पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के बड़े उद्देश्य को पूरा करने में मदद करता है।

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि भारत पहले ही ‘मध्य एशियाई फ्लाईवे’ के साथ ही प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू कर चुका है

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मध्य एशियाई फ्लाईवे के बारे में।
  2. भारत में प्रवासी पक्षी।
  3. प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन के बारे में।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

टैक्स इंस्पेक्टर विदाउट बॉर्डर्स (TIWB) कार्यक्रम


संदर्भ:

हाल ही में, भारत के साथ साझेदारी में ‘सेशेल्स’ का ‘टैक्स इंस्पेक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (TIWB) कार्यक्रम शुरू किया गया है।

यह छठा TIWB कार्यक्रम है, जिसके लिए भारत ने अपने ‘कर-विशेषज्ञ’ प्रदान करके सहयोग दिया है।

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TIWB कार्यक्रम के लाभ:

इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत, यूएनडीपी और TIWB सचिवालय के सहयोग से ‘सेशेल्स’ के लेखा परीक्षकों को तकनीकी जानकारी तथा आवश्यक कौशल हस्तांतरित करेगा तथा सर्वोत्तम लेखा तौर-तरीके साझा करेगा। इसके अलावा, इस कार्यक्रम का उद्देश्य ‘सेशेल्स’ को कर प्रशासन को मजबूत करने में सहायता प्रदान करना भी है।

TIWB कार्यक्रम के बारे में:

यह कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (the United Nations Development Programme- UNDP) और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (Organisation for Economic Cooperation and Development – OECD) की एक संयुक्त पहल है।

  • TIWB पहल का उद्देश्य, एक लक्षित, सद्य अनुक्रिया (रियल-टाइम) ‘करने के साथ सीखें’ (learning by doing) पद्धति के माध्यम से विकासशील देशों में कर-प्रशासन सहित लेखा-परीक्षा / ऑडिट संबंधी आवश्यक जानकारी और कौशल को साझा करके इन देशों के कर-प्रशासनों को मज़बूत करना है।
  • TIWB का ध्यान, साधारण ऑडिट और विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय कर मामलों से संबंधित ऑडिट संबधित कौशल क्षमता का निर्माण करने तथा विकासशील देशों के कर-प्रशासनों में सामान्य ऑडिट कौशल क्षमता का विकास करने हेतु विशेषज्ञों को भेजकर सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप OECD द्वारा विकसित ‘बेटर लाइफ इंडेक्स’ के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. TIWB कार्यक्रम के बारे में
  2. कार्यान्वयन
  3. किसके द्वारा विकसित किया गया है?
  4. महत्व

मेंस लिंक:

‘सीमा-विहीन कर निरीक्षक कार्यक्रम’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

CAATSA कानून


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी विदेश उप सचिव वेंडी शेरमेन में अपनी भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली को इस तरह का पहला संकेत दिया है, कि इस साल के अंत तक 5.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे के तहत नई दिल्ली द्वारा रूस निर्मित पांच एस-400 ट्रायम्फ एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी लेने पर वाशिंगटन भारत सरकार पर प्रतिबंध लगाने पर पुनर्विचार कर सकता है।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2016 में भारत के द्वारा रूस के साथ इस सौदे की घोषणा किए जाने के बाद से वाशिंगटन में बेचैनी बनी हुई है। रूस अभी भी नई दिल्ली का सबसे बड़ा रक्षा भागीदार बना हुआ है।

S-400 सौदे पर अमेरिका के CAATSA कानून के तहत भारत पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अमेरिका इसी तरह की खरीद पर पहले भी चीन और तुर्की पर प्रतिबंध लगा चुका है।

S-400 वायु रक्षा प्रणाली एवं भारत के लिए इसकी आवश्यकता:

S-400 ट्रायम्फ (Triumf) रूस द्वारा डिज़ाइन की गयी एक मोबाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (surface-to-air missile system- SAM) है।

  • यह विश्व में सबसे खतरनाक, आधुनिक एवं परिचालन हेतु तैनात की जाने वाली लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली SAM (MLR SAM) है, जिसे अमेरिका द्वारा विकसित, ‘टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस’ (Terminal High Altitude Area Defence – THAAD) से काफी उन्नत माना जाता है।

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CAATSA क्या है?

  • CAATSA अर्थात ‘अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम’ (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act- CAATSA) का प्रमुख उद्देश्य दंडात्मक उपायों के माध्यम से ईरान, उत्तर कोरिया और रूस को प्रत्युत्तर देना है।
  • इसे वर्ष 2017 में अधिनियमित किया गया था।
  • इसके तहत, रूस के रक्षा और ख़ुफ़िया क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लेनदेन करने वाले देशों के खिलाफ लगाए जाने वाले प्रतिबंधो को शामिल किया गया है।

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लगाये जाने वाले प्रतिबंध:

  1. अभिहित व्यक्ति (sanctioned person) के लिए ऋणों पर प्रतिबंध।
  2. अभिहित व्यक्तियों को निर्यात करने हेतु ‘निर्यात-आयात बैंक’ सहायता का निषेध।
  3. संयुक्त राज्य सरकार द्वारा अभिहित व्यक्ति से वस्तुओं या सेवाओं की खरीद पर प्रतिबंध।
  4. अभिहित व्यक्ति के नजदीकी लोगों को वीजा से मनाही।

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘बुनियादी समझौतों’ (Foundational Agreements) के बारे में जानते हैं? तीन समझौतों को ‘बुनियादी समझौता’ कहा जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CAATSA किससे संबंधित है?
  2. CAATSA के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियां।
  3. लगाये जाने वाले प्रतिबंधों के प्रकार।
  4. भारत और रूस के बीच महत्वपूर्ण रक्षा सौदे।
  5. ईरान परमाणु समझौते का अवलोकन।

मेंस लिंक:

CAATSA की विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

 प्रकृति और लोगों हेतु उच्च आकांक्षा गठबंधन


(High Ambition Coalition (HAC) for Nature and People)

संदर्भ:

फ्रांसीसी और भारतीय सरकारों के बीच आयोजित एक समारोह में, भारत आधिकारिक तौर पर ‘प्रकृति और लोगों हेतु उच्च आकांक्षा गठबंधन’ (High Ambition Coalition (HAC) for Nature and People) में शामिल हो गया।

प्रमुख बिंदु:

  • भारत, ‘उच्च आकांक्षागठबंधन’ (HAC) में शामिल होने वाली प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के ‘ब्रिक्स ब्लॉक’ में से पहला देश है।
  • भारत के द्वारा ‘उच्च आकांक्षा गठबंधन’ में शामिल होने की घोषणा, चीन द्वारा आयोजित की जाने वाली एक उच्च स्तरीय जैव विविधता बैठक से ठीक पहले की गई है।

‘उच्च आकांक्षा गठबंधन’ (HAC) क्या है?

‘प्रकृति और लोगों हेतु उच्च आकांक्षा गठबंधन’ की शुरुआत, जनवरी 2021 में पेरिस में आयोजित “वन प्लैनेट समिट” में की गयी थी।

  • इसकी अध्यक्षता ‘कोस्टा रिका’ और ‘फ्रांस’ द्वारा संयुक्त रूप से की जाती है और ‘यूनाइटेड किंगडम’ महासागरीय सह-अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है।
  • ‘उच्च आकांक्षा गठबंधन’ (HAC) 70 से अधिक देशों का एक समूह है और 30×30 की रक्षा के लिए वैश्विक लक्ष्य को अपनाने के लिये प्रोत्साहित कर रहा है।
  • HAC, वर्ष 2030 तक विश्व की कम से कम 30 प्रतिशत भूमि और महासागरों की रक्षा करने के केंद्रीय लक्ष्य के साथ प्रकृति और लोगों के लिए एक वैश्विक समझौता करने का हिमायती है।
  • 30×30 लक्ष्य, एक वैश्विक लक्ष्य है जिसका उद्देश्य प्रजातियों के तेजी से नष्ट होने को रोकना और हमारी आर्थिक सुरक्षा के स्रोत, महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करना है।
  • ‘उच्च आकांक्षा गठबंधन’ सदस्यों में वर्तमान में वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के देश शामिल है; यूरोपीय, लैटिन अमेरिकी, अफ्रीका और एशिया के देश इसके सदस्य हैं।

30×30 लक्ष्य रखे जाने का कारण:

जैव विविधता संकट और जलवायु संकट दोनों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधानों में लगातार बढ़ोत्तरी जारी है, और इन संकटों से बचने के लिए कम से कम आधे ग्रह को इसकी प्राकृतिक अवस्था में रखा जाना आवश्यक है।

  • इसे देखते हुए, विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं, कि ग्रह को बचाने के लिए वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय और आवश्यक अंतरिम लक्ष्य, वर्ष 2030 तक न्यूनतम 30% सुरक्षा हासिल करना रखा जाना चाहिए।
  • उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़े, वैश्विक स्तर और क्षेत्रीय स्तर, दोनों पर, जैव विविधता संरक्षण के लिए 30×30 लक्ष्य को सही ठहराने की पुष्टि करते हैं।

‘उच्च आकांक्षा गठबंधन’ का महत्व:

वर्तमान में, दुनिया की लगभग 15% भूमि और 7% महासागर संरक्षित हैं।

  • 2030 तक न्यूनतम न्यूनतम 30% सुरक्षा हासिल करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, हमें वर्तमान संरक्षित भूमि को दोगुना करना होगा और वर्तमान में संरक्षित महासागर क्षेत्र को चौगुना से अधिक करना होगा।
  • इस गठबंधन का उद्देश्य 2030 तक दुनिया की न्यूनतम 30% भूमि और महासागर की रक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते को प्रोत्साहित करना है।

स्रोत: पीआईबी।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


गुडुची (गिलोय)

आयुष मंत्रालय ने हाल ही में कुछ वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों में गुडुची (Tinospora cordifolia), जिसे गिलोय के नाम से भी जाना जाता है, के उपयोग को लेकर परामर्श जारी किया है।

  • इसके अनुसार, गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) उपयोग करने के लिहाज से सुरक्षित है लेकिन कुछ समान दिखने वाले पौधे जैसे ‘टिनोस्पोरा क्रिस्पा’ हानिकारक हो सकते हैं।
  • डुची एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है, जिसे गिलोय के नाम से जाना जाता है और आयुष प्रणालियों में लंबे समय से चिकित्सा के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है।
  • यह पूरे भारत में पाई जाने वाली नाजुक और मांसल तने की एक बड़ी, चमकदार, बारहमासी, पर्णपाती, लता युक्त झाड़ है।
  • यह देशी और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला पौधा है।
  • इस झाड़ में पाए जाने वाले रासायनिक घटक, एल्कलॉइड, डाइटरपेनॉइड लैक्टोन, ग्लाइकोसाइड, स्टेरॉयड, सेस्क्यूटरपेनॉइड, फेनोलिक्स, एलिफैटिक यौगिक और पॉलीसेकेराइड जैसे विभिन्न वर्गों से संबंधित हैं।
  • वैज्ञानिक अनुसंधानों द्वारा बताए गए इसके संभावित औषधीय गुणों में, मधुमेह रोधी, ज्वरनाशक, ऐंठन रोधी, सूजन-रोधी, गठिया-रोधी, एंटीऑक्सिडेंट, एलर्जी-रोधी, तनाव-रोधी, कुष्ठ रोग-रोधी, मलेरिया-रोधी, यकृत-संरक्षी, प्रतिरक्षी-विनियामक और रोग-रोधी शामिल हैं।

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औद्योगिक पार्क रेटिंग प्रणाली (आईपीआरएस) रिपोर्ट

हाल ही में, ‘उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग’ (DPIIT) द्वारा ‘औद्योगिक पार्क रेटिंग प्रणाली (Industrial Park Ratings System – IPRS) रिपोर्ट’ जारी की गयी है।

  • देश भर में औद्योगिकीकरण को सक्षम करने के लिए औद्योगिक बुनियादी ढांचे की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने तथा नीतिगत विकास में सहयोग करने के उद्देश्य से IPRS प्रक्रिया प्रायोगिक तौर ओअर वर्ष 2018 में शुरू की गयी थी।
  • यह रिपोर्ट भारत औद्योगिक भूमि बैंक का एक विस्तार है, जिसमें निवेशकों को निवेश के लिए उनके पसंदीदा स्थान की पहचान करने में सहायता करने के लिए एक जीआईएस-सक्षम डाटाबेस में 4,400 से अधिक औद्योगिक पार्क शामिल है।
  • यह रेटिंग प्रमुख वर्तमान मानकों तथा अवसंरचना सुविधाओं आदि के आधार पर निर्धारित की जाती है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें:

  • औद्योगिक पार्क रेटिंग प्रणाली रिपोर्ट में 41 औद्योगिक पार्कों को ‘‘अग्रणी (लीडर्स)‘‘ के रूप में आंका गया है।
  • 90 औद्योगिक पार्कों को चैलेंजर वर्ग के तहत आंका गया है जबकि 185 की रेटिंग ‘आकांक्षियों’ के रूप में की गई है।

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