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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 October 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. मॉसक्यूरिक्स: मलेरिया के लिए WHO द्वारा समर्थित पहला टीका

2. इंटरपोल

3. संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक

4. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. रसायन विज्ञान में 2021 का नोबेल पुरस्कार

2. भारत में कोयला संकट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारत का नवीनतम और छत्तीसगढ़ में चौथा बाघ अभयारण्य

2. कैप्टिव और नॉन-कैप्टिव माइन्स में अंतर

3. परोपकारी व्यक्तियों को पुरस्कृत करने की योजना

4. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

मॉसक्यूरिक्स: मलेरिया के लिए WHO द्वारा समर्थित पहला टीका


संदर्भ:

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा RTS,S/ASO1 (RTS.S) नामक टीके को मलेरिया के उपचार हेतु अनुमोदित किया गया है। इस टीके का व्यवसायिक नाम ‘मॉसक्यूरिक्स’ (Mosquirix) है।

यह अब तक का एकमात्र और पहला ऐसा टीका है, जिसके छोटे अफ्रीकी बच्चों पर किए गए परीक्षणों में मलेरिया और जानलेवा गंभीर मलेरिया को कम करने की क्षमता देखी गयी है।

‘मॉसक्यूरिक्स’ के बारे में:

  • ‘मॉसक्यूरिक्स’ (Mosquirix) वैक्सीन, विश्व स्तर पर सबसे घातक मलेरिया परजीवी ‘पी. फाल्सीपेरम’ (Plasmodium falciparum) के खिलाफ काफी प्रभावी है। इस घातक मलेरिया परजीवी का अफ्रीका में सबसे अधिक प्रकोप है।
  • यह वैक्सीन, अफ्रीका के तीन देशों – घाना, केन्या और मलावी- के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालयों द्वारा ‘अपने बाल टीकाकरण कार्यक्रमों के माध्यम से दिया जाने वाला मलेरिया का पहला टीका भी है।

‘मलेरिया’ के बारे में:

मलेरिया (Malaria) एक परजीवी-जनित जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छरों के काटने से लोगों में फैलती है।

संपूर्ण विश्व में मलेरिया का भार:

मलेरिया का प्रकोप स्थानिक रूप से अफ्रीका में सबसे अधिक है। मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में आधे से अधिक मौतें, अफ्रीकी देश नाइजीरिया, कांगो, तंजानिया, मोजाम्बिक, नाइजर और बुर्किना फासो में संयुक्त रूप से होती है।

  • WHO के आंकड़ों के अनुसार, अब भी, यह बीमारी हर साल चार लाख से अधिक लोगों की जान लेती है।
  • मलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित समूह, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे हैं; वर्ष 2019 में, मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 67% (274,000) थी।
  • वर्ष 2019 में, भारत में मलेरिया के अनुमानित 6 मिलियन मामले थे, जबकि वर्ष 2020 में इनकी संख्या लगभग 20 मिलियन थी।

मलेरिया उन्मूलन कर चुके देश:

जिन देशों में कम से कम लगातार 3 वर्षों तक मलेरिया के स्थानिक स्तर पर कोई मामले सामने नहीं आता है, वे देश मलेरिया उन्मूलन संबंधी WHO प्रमाणीकरण के लिए आवेदन करने हेतु पात्र होते हैं।

पिछले दो दशकों में, 11 देशों को WHO के महानिदेशक द्वारा मलेरिया-मुक्त के रूप में प्रमाणित किया गया है:

संयुक्त अरब अमीरात (2007), मोरक्को (2010), तुर्कमेनिस्तान (2010), आर्मेनिया (2011), श्रीलंका (2016), किर्गिस्तान (2016), पराग्वे (2018), उज्बेकिस्तान (2018), अल्जीरिया (2019), अर्जेंटीना (2019), और अल सल्वाडोर (2021)।

आगे की चुनौतियां:

हालिया टीका, मलेरिया के खिलाफ वैश्विक आबादी के प्रभावी प्रतिरक्षण की दिशा में केवल पहला कदम माना जा रहा है। यह टीका मात्र 30 प्रतिशत मामलों में, मलेरिया की गंभीर स्थिति को रोकने में सक्षम है। मलेरिया की रोकथाम के लिए अधिक प्रभावी टीकों की खोज अभी भी जारी है।

मलेरिया का टीका अभी तक विकसित नहीं होने के कारण:

  1. मलेरिया उत्पन्न करने वाले परजीवी के जीवन-चक्र की जटिलता। इस परजीवी के जीवन का एक हिस्सा परपोषी मानव में ही गुजरता है।
  2. ये परजीवी, प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा पहचाने जाने से बचने के लिए मानव कोशिकाओं के अंदर छिपने में भी सक्षम होते हैं, जिससे कई चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।
  3. मलेरिया का टीका विकसित करने में धन और रुचि की कमी।
  4. वैक्सीन निर्माताओं के लिए मलेरिया का टीका विकसित करने में कम लाभ और बहुत कम प्रोत्साहन।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि WHO में पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में चीन पहला देश है जिसे 3 दशकों से अधिक समय में ‘मलेरिया मुक्त प्रमाणन’ से सम्मानित किया गया है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वायरस और बैक्टीरिया के कारण होने वाले विभिन्न रोगों में अंतर और उदाहरण।
  2. मलेरिया- कारण और उपचार।
  3. मलेरिया के प्रकार।
  4. डब्ल्यूएचओ प्रमाणन प्रक्रिया के बारे में।
  5. डब्ल्यूएचओ विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2020 का अवलोकन।

मेंस लिंक:

मलेरिया नियंत्रण के लिए भारत द्वारा किए जाने वाले प्रयासों की चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

इंटरपोल


संदर्भ:

हाल ही में, इंटरपोल (Interpol) द्वारा साइबर अपराधियों से अपने कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा करने में मदद करने हेतु लोगों को प्रमुख साइबर-खतरों से अवगत कराने के लिए एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया गया है।

तीन सप्ताह का अभियान, 4 से 22 अक्टूबर तक, मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से चलाया जाएगा।

अभियान का उद्देश्य:

मौजूदा समय में, साइबर खतरे (cyber threats) तेजी से परिष्कृत होते जा रहे हैं और इसके साथ ही दूरस्थ माध्यम से कार्य के स्तर में वृद्धि हो रही है तथा डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। इंटरपोल द्वारा शुरू किए गए इस अभियान में ‘रैंसमवेयर’, ऑनलाइन घोटाले और फ़िशिंग और व्यावसायिक ईमेलों में धोखाधड़ी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

‘इंटरपोल’ क्या है?

‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन’ (International Criminal Police OrganisationInterpol) अथवा ‘इंटरपोल’, 194 सदस्यीय अंतरसरकारी संगठन है।

  • इसका मुख्यालय फ्राँस के ‘लियोन’ (Lyon) शहर में है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1923 में ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस आयोग’ के रूप में की गई थी, और वर्ष 1956 से इसे ‘इंटरपोल’ कहा जाने लगा।
  • भारत वर्ष 1949 में इस संगठन में शामिल हुआ था और इसके सबसे पुराने सदस्यों में से एक है।

इंटरपोल के घोषित वैश्विक पुलिसिंग लक्ष्य:

आतंकवाद का मुकाबला करना, दुनिया भर में सीमाओं की अखंडता को बढ़ावा देना, कमजोर समुदायों की सुरक्षा करना, लोगों और व्यवसायों के लिए एक सुरक्षित साइबर स्पेस प्रदान करना, अवैध बाजारों पर अंकुश लगाना, पर्यावरण सुरक्षा का समर्थन करना और वैश्विक समेकता को बढ़ावा देना।

 

‘इंटरपोल महासभा’ क्या है?

  • ‘इंटरपोल महासभा’ (Interpol General Assembly), इंटरपोल का सर्वोच्च शासी निकाय है, और इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
  • यह कार्रवाईयों और नीतियों पर मतदान करने करने हेतु प्रतिवर्ष बैठक करती है। यह बैठक सत्र लगभग चार दिनों तक जारी रहता है।
  • ‘इंटरपोल महासभा’ में सभी सदस्य देशों के एक या अधिक प्रतिनिधि अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं; ये प्रतिनिधि आम तौर पर, अपने देशों के कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुख होते हैं।
  • ‘महासभा’ अपने शासी निकाय अर्थात ‘इंटरपोल कार्यकारी समिति’ के सदस्यों का चुनाव भी करती है। यह ‘कार्यकारी समिति’, “महासभा’ के सत्रों के बीच इंटरपोल के लिए मार्गदर्शन और दिशा प्रदान करती है”।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि इंटरपोल (जो एक गैर-संयुक्त राष्ट्र निकाय है) की तरह, संयुक्त राष्ट्र पुलिस (UNPOL) नाम की एक संस्था भी है। इसी भांति एक अन्य संस्था ‘यूरोपोल’ (Europol) भी है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ कौन होते है?
  2. ‘इंटरपोल’ क्या है?
  3. इंटरपोल द्वारा जारी किये जाने वाले विभिन्न नोटिस
  4. इंटरपोल के अपराध कार्यक्रमों का अवलोकन

मेंस लिंक:

इंटरपोल के महत्व पर चर्चा कीजिए और इसमें किए जाने योग्य सुधारों का सुझाव दीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक


(UN peacekeepers)

संदर्भ:

दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में कार्यरत भारतीय सेना के कुल 836 सैनिकों को दुनिया के सबसे नवोदित देश में स्थायी शांति सुनिश्चित करने हेतु उनकी सेवाओं के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र पदक’ से सम्मानित किया गया है।

पृष्ठभूमि:

दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (the United Nations Mission in South Sudan – UNMISS) में सेवारत 73 देशों के नागरिक, पुलिस और सैन्य कर्मी, दक्षिण सूडान में नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता के वितरण के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करने, पुनर्जीवित शांति समझौते के कार्यान्वयन में सहयोग करने तथा मानवाधिकारों की निगरानी और जांच के लिए जिम्मेदार हैं।

‘शांति अभियान’ क्या है?

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान (UN Peacekeeping), ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ पीस ऑपरेशन’ तथा ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ ऑपरेशनल सपोर्ट’ का एक संयुक्त प्रयास है।

  • प्रत्येक ‘शांति सुरक्षा अभियान’ को ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ द्वारा मंजूरी प्रदान की जाती है।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का वित्तपोषण, संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों की सामूहिक जिम्मेदारी होती है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, प्रत्येक सदस्य राष्ट्र शांति अभियानों के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होता है।

संयोजन:

  • संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों (जिन्हें अक्सर उनके हल्के नीले रंग की टोपी या हेलमेट के कारण ‘ब्लू बेरेट्स’ या ‘ब्लू हेलमेट’ (Blue Helmets) कहा जाता है) में सैनिक, पुलिस अधिकारी और नागरिक कर्मी शामिल हो सकते हैं।
  • सदस्य देशों द्वारा स्वैच्छिक आधार पर शांति सैनिको का योगदान दिया जाता है।
  • शांति अभियानों के सिविलयन कर्मचारी, अंतर्राष्ट्रीय सिविल सेवक होते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सचिवालय द्वारा भर्ती और तैनात किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान तीन बुनियादी सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होते है:

  1. पक्षकारों की सहमति
  2. निष्पक्षता
  3. अधिदेश की सुरक्षा और आत्मरक्षा के अलावा बल प्रयोग नहीं किया जाएगा।

वैश्विक साझेदारी:

  • संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन, एक अद्वितीय वैश्विक साझेदारी होते है।
  • इन मिशनों में, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के प्रयास में संयुक्त राष्ट्र महासभा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, सचिवालय, सेना और पुलिस कर्मियो का योगदान करने वाले देश और सरकारें एक साथ मिलकर कार्य करते हैं।
  • इन मिशनों की शक्ति का स्रोत, संयुक्त राष्ट्र चार्टर की वैधता और मिशनों में योगदान देने वाले देशों में निहित होता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि दक्षिण सूडान में 18,300 कर्मियों से लैस शांति मिशन में, भारत दूसरा सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता है, और भारत में इस मिशन में अपने लगभग 2,400 सैनिक भेजे हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शांति अभियानों का वित्त पोषण किसके द्वारा किया जाता है?
  2. UNSC की भूमिका
  3. शांतिरक्षकों की संरचना?
  4. शांति सैनिकों को ब्लू हेल्मेट क्यों कहा जाता है?
  5. संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के मार्गदर्शक सिद्धांत
  6. वर्तमान में जारी शांति अभियान

मेंस लिंक:

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान और उसके महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आयुष्मान भारत PM-JAY


(Ayushman Bharat PM-JAY)

संदर्भ:

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana: AB-PMJAY) को को लागू करने के लिए शीर्ष संस्था ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ (NHA) द्वारा योजना के तहत स्वास्थ्य लाभ पैकेज मास्टर में बदलाव किए गए हैं।

स्वास्थ्य लाभ पैकेज (HBP 2.2) के संशोधित संस्करण में:

  • PM-JAY के तहत कुछ स्वास्थ्य पैकेजों की दरों को 20 प्रतिशत से लेकर 400 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है।
  • लगभग 400 प्रक्रियाओं की दरों को संशोधित किया गया है और ब्लैक फंगस से संबंधित एक नया अतिरिक्त चिकित्सा प्रबंधन पैकेज भी जोड़ा गया है।

PM-JAY की प्रमुख विशेषताएं:

  1. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित, विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा / आश्वासन योजना है।
  2. यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है।
  3. कवरेज: 10.74 करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं।
  4. इस योजना में सेवा-स्थल पर लाभार्थी के लिए कैशलेस स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को उपलब्ध कराया जाता है।
  5. AB-PMJAY योजना को पूरे देश में लागू करने और इसके कार्यान्वयन हेतु ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ (National Health Authority NHA) नोडल एजेंसी है।
  6. यह योजना, कुछ केंद्रीय क्षेत्रक घटकों के साथ एक केंद्र प्रायोजित योजना है।

योजना के अंतर्गत पात्रता:

  1. इस योजना के तहत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है।
  2. इस योजना के तहत पहले से मौजूद विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है।
  3. इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं।
  4. यह एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं।
  5. इस योजना में लगभग 1,393 प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं।
  6. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है।

नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार:

  • प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) कार्यक्रम जिन राज्यों में लागू किया गया, वहां स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में, योजना से अलग रहने वाले राज्यों की तुलना में, स्वास्थ्य बीमा का अधिक विस्तार, शिशु और बाल मृत्यु दर में कमी, परिवार नियोजन सेवाओं के उपयोग में सुधार और एचआईवी / एड्स के बारे में अधिक जागरूकता आदि का अनुभव किया गया।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में स्वास्थ्य बीमा वाले परिवारों के अनुपात में 54% की वृद्धि हुई, जबकि योजना से अलग रहने वाले राज्यों में 10% की गिरावट दर्ज की गयी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ को लागू करने की जिम्मेदारी भी ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ को दी गई है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आयुष्मान भारत के घटक
  2. PM JAY- मुख्य विशेषताएं
  3. पात्रता
  4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के बारे में
  5. सेहत (SEHAT) योजना

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के महत्व और क्षमताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

रसायन विज्ञान में 2021 का नोबेल पुरस्कार


संदर्भ:

वर्ष 2021 का रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार ‘बेंजामिन लिस्ट’ (Benjamin List) और ‘डेविड डब्ल्यू.सी. मैकमिलन’ (David W.C. MacMillan) को ‘असममित ऑर्गेनोकैटलिसिस (Asymmetric Organocatalysis) का विकास करने के लिए’ प्रदान किया गया है।

उत्प्रेरक और उत्प्रेरण क्या होते है?

  • उत्प्रेरक (catalyst) वे पदार्थ होते है, जो किसी अभिक्रिया में भाग लिए बगैर या रासायनिक अभिक्रिया के दौरान, अपने स्वरूप में कोई परिवर्तन किए बगैर ही, अभिक्रिया की दर में वृद्धि कर देते हैं।
  • उत्प्रेरण (Catalysis), किसी रासायनिक अभिक्रिया में ‘उत्प्रेरक’ को मिलाकर अभिक्रिया की दर में वृद्धि करने की प्रक्रिया होती है।

धातुएं और एंजाइम, प्रमुख प्रकार के उत्प्रेरक होते हैं।

2021 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं का योगदान- असममित ऑर्गेनोकैटलिसिस:

वर्ष 2000 में, डॉ. लिस्ट और डॉ. मैकमिलन ने, अलग-अलग स्वतंत्र रूप से,  एक तीसरे प्रकार का उत्प्रेरण विकसित किया, जिसे ‘असममित ऑर्गेनोकैटलिसिस’ (Asymmetric Organocatalysis) कहा जाता है।

स्वाभाविक रूप से पाए जाने वाले रसायनों से निर्मित नए उत्प्रेरक अधिक उपयुक्त और सस्ते हैं, तथा रासायनिक अभिक्रिया का एक ‘विशिष्ट’ अंतिम परिणाम सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा, अभिक्रिया के अंतर्गत वांछित प्रकार के यौगिक प्राप्त करने के लिए इन उत्प्रेरकों को शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता भी नहीं होती है।

कार्य-विधि:

  • ऑर्गेनोकैटलिसिस’ (Organocatalysts) के माध्यम से, सब्सट्रेट अणुओं की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील अल्पजीवी मध्यवर्ती अणुओं को निर्मित करने के लिए, अभिकर्मक अणुओं को परस्पर युग्मित कर दिया जाता है।
  • काइरल (Chiral) योगिक होने के नाते उत्प्रेरक, सब्सट्रेट के लिए अपने कुछ गुणों को स्थानांतरित कर देता है, जिससे मध्यवर्ती अणुओं के किस भाग द्वारा दोबारा आगे अभिक्रिया की जाएगी, इस पर नियंत्रण किया जा सकता है।

current affairs

 

ऑर्गेनोकैटलिसिस के अनुप्रयोग:

ऑर्गेनोकैटलिसिस’ (Organocatalysts) के फार्मास्युटिकल अनुसंधान और अन्य उद्योगों में कई अनुप्रयोग हो सकते है।

इसके द्वारा व्यग्रता और अवसाद के इलाज में इस्तेमाल होने वाले पैरॉक्सिटाइन और श्वसन संक्रमण की दवा ‘ओसेल्टामिविर’ सहित अन्य मौजूदा फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन को सुव्यवस्थित करने में काफी मदद मिली है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘कैटेलिसिस’ क्षेत्र में विभिन्न कार्यों के लिए रसायन विज्ञान में सात नोबेल पुरस्कार प्रदान किए जा चुके है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारत में कोयला संकट


संदर्भ:

वर्तमान में, भारत कोयले की भारी कमी का सामना कर रहा है।

current affairs

 

पृष्ठभूमि:

भारत, विश्व में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा आयातक, उपभोक्ता और उत्पादक देश है, और इसके पास कोयले का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा भंडार है। भारत, मुख्य रूप से इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से कोयले का आयात करता है।

कोयला-संकट की वर्तमान स्थिति:

  • कोयला-संकट की वर्तमान स्थिति “टच एंड गो” अर्थात ‘उपभोग करो और ख़तम’ जैसी है, और यह अगले छह महीने में काफी “असहज” हो सकती है।
  • भारत के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार, केवल कुछ दिनों के ईंधन की आपूर्ति कर सकता है।
  • 1 अक्टूबर को विद्युत् मंत्रालय द्वार दी गयी जानकारी के अनुसार, देश के 135 ताप विद्युत संयंत्रों में औसतन केवल 4 दिनों की आपूर्ति के लिए कोयला स्टॉक बचा है।

यह स्थिति काफी चिंताजनक है, क्योंकि भारत के कुल विद्युत् स्रोतों में कोयला-चालित संयंत्रों का योगदान लगभग 70%  हैं।

इस कमी के कारण:

कोयला खनन क्षेत्रों में, सितंबर माह के दौरान हुई भारी बारिश ने कोयला उत्पादन और वितरण को प्रभावित किया है और विद्युत् संयंत्र मानसून से पहले अपना कोयला-भंडार बनाने में विफल रहे थे।

इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले की उच्च कीमतों के कारण आयात में तेज गिरावट हुई है।

कमी का प्रभाव:

  • अगर उद्योगों को बिजली की कमी का सामना करना पड़ता है, तो इससे भारत की आर्थिक बहाली में देरी हो सकती है।
  • कुछ व्यवसायों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है।
  • भारत की आबादी और अविकसित ऊर्जा बुनियादी ढांचे को देखते हुए बिजली संकट काफी लंबा और कठिन हो सकता है।

आगे की कार्रवाई:

  • ‘कोल इंडिया’ और ‘एनटीपीसी लिमिटेड’ द्वारा कोयला खानों से उत्पादन बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है।
  • सरकार द्वारा ‘आपूर्ति’ में वृद्धि करने हेतु और अधिक खदानों को चालू करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • अधिक वित्तीय लागत होने के बावजूद, भारत को अपने आयात को बढ़ाने की आवश्यकता होगी।

कोयला क्षेत्र में हालिया सुधार:

  • कोयले के वाणिज्यिक खनन की अनुमति दी गयी है, निजी क्षेत्र को 50 ब्लॉकों में खनन करने का प्रस्ताव दिया गया है।
  • बिजली संयंत्रों को “धोए गए” कोयले का उपयोग करने के लिए आवश्यक विनियमन को हटाकर इस क्षेत्र में प्रवेश मानदंडों को उदार बनाया जाएगा।
  • निजी कंपनियों को ‘निश्चित लागत’ के स्थान पर ‘राजस्व बंटवारे’ के आधार पर कोयला ब्लॉकों की पेशकश की जाएगी।
  • राजस्व हिस्सेदारी में छूट के माध्यम से ‘कोयला गैसीकरण/द्रवीकरण’ को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • कोल इंडिया की कोयला खदानों से ‘कोल बेड मीथेन’ (CBM) निष्कर्षण अधिकार नीलाम किए जाएंगे।

आगे की चुनौतियां:

  1. कोयला, भारत में सबसे महत्वपूर्ण और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जीवाश्म ईंधन है। यह देश की ऊर्जा जरूरतों के 55% की आपूर्ति करता है। देश की औद्योगिक विरासत, स्वदेशी कोयले पर टिकी हुई है।
  2. पिछले चार दशकों में भारत में वाणिज्यिक प्राथमिक ऊर्जा खपत में लगभग 700% की वृद्धि हुई है।
  3. भारत में वर्तमान प्रति व्यक्ति वाणिज्यिक प्राथमिक ऊर्जा खपत लगभग 350 किग्रा/वर्ष है जो विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।
  4. बढ़ती आबादी, वृद्धिशील अर्थव्यवस्था और जीवन की बेहतर गुणवत्ता की तलाश से प्रेरित, भारत में ऊर्जा के उपयोग में वृद्धि होने की उम्मीद है।
  5. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की सीमित भंडार क्षमता, जलविद्युत परियोजना पर पर्यावरण संरक्षण प्रतिबंध और परमाणु ऊर्जा की भू-राजनीतिक धारणा को ध्यान में रखते हुए, कोयला, भारत के ऊर्जा परिदृश्य के केंद्र पर बना रहेगा।

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘राष्ट्रीय कोयला सूचकांक’ के बारे में सुना है? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCI के बारे में।
  2. प्रमुख विशेषताएं।
  3. कोयले के प्रकार।
  4. कोयला गैसीकरण क्या है?
  5. यह किस प्रकार किया जाता है?
  6. इसके उपोत्पाद (Byproducts)
  7. गैसीकरण के लाभ?
  8. भूमिगत कोयला गैसीकरण क्या है?
  9. कोयला द्रवीकरण क्या है?
  10. द्रवीकरण के लाभ

मेंस लिंक:

कोयला गैसीकरण एवं द्रवीकरण पर एक टिप्पणी लिखिए, तथा इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारत का नवीनतम और छत्तीसगढ़ में चौथा बाघ अभयारण्य

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने छत्तीसगढ़ सरकार के ‘गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान’ और ‘तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य’ के संयुक्त क्षेत्रों को ‘टाइगर रिजर्व’ घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

  • यह नया ‘टाइगर रिजर्व’ मध्य प्रदेश और झारखंड की सीमा से लगे राज्य के उत्तरी भाग में स्थित है।
  • उदांती-सीतानदी, अचानकमार और इंद्रावती टाइगर रिजर्व, के बाद छत्तीसगढ़ में यह चौथा टाइगर रिजर्व होगा।
  • कृपया ध्यान दें कि ‘गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान’ देश में एशियाई चीतों का अंतिम ज्ञात निवास स्थान है।

‘टाइगर रिजर्व’ किस प्रकार घोषित किया जाता है?

  • सबसे पहले, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V(1) के तहत NTCA द्वारा ‘टाइगर रिजर्व’ के लिए अनुमोदन प्रदान किया जाता है।
  • राज्य सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (NTCA) की सिफारिश पर, किसी क्षेत्र को ‘बाघ अभयारण्य’ के रूप में अधिसूचित किया जाएगा।

 

कैप्टिव और नॉन-कैप्टिव माइन्स में अंतर

कैप्टिव खदानें (Captive Mines): कैप्टिव खदानें को निजी कोयला खान (captive coal mine) भी कहा जाता है, इन खदानों का स्वामित्व कंपनियों के पास होता है। इन खानों से उत्पादित कोयला या खनिज खानों की मालिक कंपनी के अनन्य उपयोग के लिए होता है। अर्थात, इन खदानों से उत्पादित कोयला या खनिज को कंपनी बाहर नहीं बेच सकती है। पहले, कुछ बिजली उत्पादन कंपनियों के पास कैप्टिव खदानें हुआ करती थीं।

गैर कैप्टिव खदानें (Non- Captive Mines): इन खदानों से उत्पादित खनिजों और कोयले का उपयोग अपने उपभोग के साथ-साथ बाजार में बेचने के लिए भी किया जा सकता है।

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत केंद्र सरकार के लिए किसी भी खदान को विशेष ‘अंतिम उपयोग’ के लिए आरक्षित करने का अधिकार दिया गया था। ये कैप्टिव खदानें थीं। अब, खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2021 के द्वारा इन प्रावधान को हटा दिया गया है। अब कैप्टिव खदानें भी अपना स्टॉक बेच सकेंगी।

चर्चा का कारण:

केवल अपने निजी उपयोग के लिए कोयले का उत्पादन करने वाली खदानों को “कैप्टिव माइंस” के रूप में जाना जाता है। इन खदानों के लिए, अब अपने वार्षिक उत्पादन का 50% खुले बाजार में बेचने की अनुमति होगी। कोयला मंत्रालय ने इस संबंध में खनिज रियायत नियम, 1960 में संशोधन किया है।

 

परोपकारी व्यक्तियों को पुरस्कृत करने की योजना

केंद्र सरकार द्वारा ‘परोपकारी व्यक्तियों’ (Good Samaritan) को पुरस्कृत करने के लिए एक योजना शुरू की है। यह योजना 15 अक्टूबर से लागू की जाएगी।

इस योजना के अंतर्गत:

  • कोई भी शख़्स जिसने किसी मोटर वाहन से हुई जानलेवा दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को तत्काल सहायता प्रदान करके और दुर्घटना के बाद बहुमूल्य समय के भीतर चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई हो, वह ₹5,000 का नकद पुरस्कार प्राप्त करने का पात्र होगा।
  • प्रत्येक ‘परोपकारी व्यक्ति’ के लिए प्रशस्ति प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
  • मुसीबत में मदद करने वाले व्यक्ति को एक वर्ष में अधिकतम 5 बार सम्मानित किया जा सकता है।
  • मंत्रालय के अनुसार, हर वर्ष प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की राज्य स्तरीय निगरानी समिति राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के लिए तीन सबसे योग्य प्रस्तावों को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को आगे विचार के लिए नामित करेगी।
  • इस उद्देश्य के लिए केंद्रीयसड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक मूल्यांकन समिति होगी और वह समिति राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा करेगी तथा वर्ष के सर्वश्रेष्ठ दस मुसीबत में मदद करने वाले व्यक्तियों का चयन किया जायेगा।
  • उन्हें दिल्ली में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान एक प्रमाण पत्र तथा ट्रॉफी से सम्मानित किया जाएगा और साथ ही 1,00,000/- रुपये पुरस्कार स्वरुप प्रदान किये जायेंगे।

 

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क

  • जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (Jim Corbett National Park) उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान में रामगंगा नदी द्वारा निर्मित ‘पतली दून’ घाटी (Patli Dun valley) शामिल है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना, लुप्तप्राय बंगाल टाइगर को संरक्षित करने के लिए, वर्ष 1936 में ‘हैली नेशनल पार्क’ के रूप में की गई थी।
  • इसका नाम ‘जिम कॉर्बेट’ के नाम पर रखा गया है जिन्होंने इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • यह भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है। यह 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर पहल के तहत आने वाला पहला क्षेत्र था।

चर्चा का कारण:

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम बदलकर रामगंगा नेशनल पार्क करने का प्रस्ताव रखा है।


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