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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 September 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. स्वच्छ सर्वेक्षण 2021

 

सामान्य अध्ययन-II

1. गुजरात विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष

2. ‘सरकार से सहायता प्राप्त करने का अधिकार’ और मौलिक अधिकार

3. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन

4. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी

5. अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सरकारी उधारी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ताइवान जलडमरूमध्य

2. आकाश प्राइम मिसाइल

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2021


संदर्भ:

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा ‘स्वच्छ भारत मिशन- शहरी’ ((SBM-U) द्वारा कराया जाने वाले विश्व के सबसे बड़े शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण, स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) के सातवें संस्करण का शुभारंभ किया गया है।

सातवें संस्करण के प्रमुख बिंदु:

  1. ‘पहले जनता’ के मुख्य ‘दर्शन’ (Philosophy) के साथ तैयार किए गए स्वच्छ सर्वेक्षण, 2022 में शहरों में अग्रणी स्वच्छता कर्मचारियों के समग्र कल्याण और स्वास्थ्य पर केंद्रित पहलों को शामिल किया गया है।
  2. आजादी@75 की विषयवस्तु से जुड़े इस सर्वेक्षण में वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं की बात को भी प्राथमिकता दी जाएगी और शहरी भारत की स्वच्छता को बनाए रखने की दिशा में उनकी भागीदारी को मजबूत बनाया जाएगा।
  3. स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में वैज्ञानिक संकेतकों को शामिल किया गया है, जो शहरी भारत के स्वच्छता के सफर में इन अग्रणी सैनिकों के लिए काम की स्थितियों और आजीविका के अवसरों में सुधार के लिए शहरों को प्रेरित करते हैं।
  4. यह सर्वेक्षण, शहरी भारत के स्मारकों और विरासत स्थलों को साफ करने के लिए नागरिकों को जिम्मेदारी लेने और पहल करने के लिए प्रेरित करके भारत की प्राचीन विरासत और संस्कृति की रक्षा करने के लिए तैयार है।
  5. इस वर्ष का सर्वेक्षण 15 हजार से कम और 15-25 हजार के बीच की जनसंख्या वाली दो श्रेणियों की शुरुआत के द्वारा छोटे शहरों को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
  6. सर्वेक्षण के दायरे को बढ़ाने के लिए, पहली बार जिला रैकिंग शुरू कर दी गई है।
  7. सर्वेक्षण का विस्तार करते हुए अब इसमें नमूने के लिए 100 प्रतिशत वार्डों को शामिल कर लिया गया है, पिछले वर्षों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत था।

स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है?

  • स्वच्छ सर्वेक्षण का आरंभ प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा जनवरी 2016 में किया गया था।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान के प्रदर्शन की निगरानी करना है।
  • इसका लक्ष्य भारत का सर्वाधिक स्वच्छ शहर बनने की दिशा में शहरों के मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न करना है।

स्वच्छ सर्वेक्षण किसके द्वारा किया जाता है?

  • भारतीय गुणवत्ता परिषद् (Quality Council of India- QCI) को सर्वेक्षण में भाग लेने वाले शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने का दायित्व दिया गया है।
  • यह एक स्वायत्त प्रमाणन संस्था है जिसे भारत सरकार द्वारा वर्ष 1997 में प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता आश्वासन प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया था।

swachh_survekshan

 

इंस्टा जिज्ञासु:

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शहरों के लिए ‘कचरा मुक्त स्टार रेटिंग’ प्रदान की जाती है। इसके बारे में अधिक जानने हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है?
  2. पहला सर्वेक्षण कब किया गया था?
  3. नवीनतम सर्वेक्षण में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले
  4. स्वच्छ भारत अभियान के बारे में
  5. भारतीय गुणवत्ता परिषद् के बारे में

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

गुजरात विधानसभा में पहली महिला अध्यक्ष


संदर्भ:

हाल ही में, वयोवृद्ध विधायक निमाबेन आचार्य को सर्वसम्मति से गुजरात विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष चुना गया है।

सदन के अध्यक्ष एव उपाध्यक्ष पद हेतु निर्वाचन प्रक्रिया

संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा और अनुच्छेद 178 में राज्य विधानसभाओं के संदर्भ में किए गए प्रावधानों के अनुसार, “सदन, यथाशीघ्र अपने दो सदस्यों को अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनेंगे।

  • लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में, अध्यक्ष (Speaker) का चुनाव करने हेतु राष्ट्रपति / राज्यपाल द्वारा एक तिथि निर्धारित की जाती है, इसके पश्चात निर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष का चुनाव करने हेतु तारीख तय करता है।
  • संबंधित सदनों के सांसद / विधायक, इन पदों पर सदन के सदस्यों में से किसी एक का निर्वाचन करने हेतु मतदान करते हैं।

सदन के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष की भूमिकाएं और कार्य:

  • अध्यक्ष, “सदन का प्रमुख प्रवक्ता होता है, और सदन का सामूहिक रूप से प्रतिनिधित्व करता है। वह शेष विश्व के लिए सदन का एकमात्र प्रतिनिधि होता है”।
  • अध्यक्ष, सदन की कार्यवाही और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों की अध्यक्षता करता है।
  • अध्यक्ष, किसी विधेयक के, ‘धन विधेयक’ होने अथवा न होने संबंधी और इसके ‘धन विधेयक’ होने पर दूसरे सदन के अधिकार-क्षेत्र से बाहर होने संबंधी निर्णय करता है।
  • आमतौर पर, अध्यक्ष को सत्ताधारी दल से चुना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान, लोकसभा उपाध्यक्ष के मामले में यह स्थिति भिन्न रही है।
  • संविधान में ‘लोकसभा अध्यक्ष’ की स्वतंत्रता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु, इसका वेतन ‘भारत की संचित निधि’ पर भारित किया गया है, और इस पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती है।
  • किसी विधेयक पर बहस या सामान्य चर्चा के दौरान संसद सदस्यों द्वारा केवल ‘अध्यक्ष’ को ही संबोधित किया जाता है।

चुनाव कराने हेतु समय-सीमा निर्दिष्ट करने वाले राज्य:

संविधान में ‘सदन के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष’ हेतु चुनावों के लिए कोई प्रक्रिया या समय सीमा निर्धारित नहीं की गयी है। इन पदों पर चुनाव आयोजित करने संबंधी निर्णय लेने का दायित्व विधायिकाओं पर छोड़ दिया गया है।

उदाहरण के लिए, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में ‘अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष’ पदों के निर्वाचन हेतु एक समय-सीमा निर्दिष्ट की गयी है।

हरियाणा:

  1. हरियाणा में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव, आम चुनाव संपन्न के पश्चात शीघ्रातिशीघ्र किया जाता है। और फिर, इसके सात दिनों के भीतर उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाता है।
  2. निर्धारित नियमों के अनुसार, इन पदों में से कोई पद रिक्त होने पर, विधायिका के अगले सत्र में पहले सात दिनों के भीतर इसके लिए चुनाव किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश:

  1. विधानसभा की अवधि के दौरान यदि किसी कारणवश ‘अध्यक्ष’ का पद रिक्त हो जाता है, तो इस पद के हेतु, पद-रिक्त होने की तिथि से 15 दिन के भीतर चुनाव करने हेतु समय सीमा निर्धारित की गई है।
  2. ‘उपाध्यक्ष’ पद के मामले में, पहली बार चुनाव की तारीख ‘अध्यक्ष’ द्वारा तय की जाती है, और इसके बाद में हुई की रिक्तियों को भरने हेतु चुनाव के लिए 30 दिन का समय दिया जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

लोकसभा अध्यक्ष की भूमिकाओं और कार्यों के बारे में अधिक जानने हेतु देखें

‘प्रोटेम स्पीकर’ कौन होता है? इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव।
  2. कार्य
  3. शक्तियां
  4. पद-त्याग
  5. पद-मुक्ति के लिए आधार
  6. लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित समितियां

मेंस लिंक:

लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका एवं कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

 ‘सरकार से सहायता प्राप्त करने का अधिकार’ और मौलिक अधिकार


संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, किसी संस्थान को सरकारी सहायता दिया जाना नीतिगत मामला है, और ‘सरकार से सहायता प्राप्त करने का अधिकार’ मौलिक अधिकार नहीं है।

संबंधित प्रकरण:

उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘इलाहाबाद उच्च न्यायालय’ के वर्ष 2018  में दिए गए एक फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के दौरान दिया है। ‘इलाहाबाद उच्च न्यायालय’ ने अपने फैसले में ‘इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम’, 1921 के अंतर्गत बनाए गए एक विनियमन को असंवैधानिक बताया था। शीर्ष अदालत ने, हाईकोर्ट के इस फैसले को रद्द कर दिया है।

न्यायालय द्वारा की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  1. सहायता अनुदान के साथ कुछ शर्तें भी होती हैं, अनुदान प्राप्त करने वाला संस्थान जिनका पालन करने के लिए बाध्य होता है। यदि कोई संस्थान इन शर्तों को स्वीकार नहीं करना चाहता है, तो वह अनुदान को अस्वीकार कर सकता है लेकिन यह नहीं कह सकता कि अनुदान उसकी शर्तों पर दिया जाना चाहिए।
  2. सहायता प्रदान करने का निर्णय, नीतिगत निर्णय होता है। इस प्रकार के निर्णय करते समय, सरकार न केवल संस्थानों के हित, बल्कि इसका उपयोग किए जाने की क्षमता के बारे में विचार करती है।
  3. जहां तक ‘​​सहायता प्राप्त संस्थानों’ का संबंध है, अल्पसंख्यक और गैर-अल्पसंख्यक के बीच कोई अंतर नहीं हो सकता है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 30, अनुदान के संबंध में यथोचित एवं तर्कसंगत होने का प्रतिबंध लगाता है।

अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में संवैधानिक प्रावधान:

अनुच्छेद 30(1) भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को मान्यता देता है, लेकिन इसमें नस्ल, जातीयता पर आधारित अल्पसंख्यकों को मान्यता नहीं दी गयी है।

  • इसमें, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन के अधिकार को मान्यता दी गयी है, वास्तव में, अनुच्छेद 30(1), विशिष्ट संस्कृति के संरक्षण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को मान्यता देता है।
  • बहुसंख्यक समुदाय द्वारा भी शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन किया जा सकता है लेकिन इनके लिए अनुच्छेद 30(1)(a) के तहत विशेष अधिकार प्राप्त नहीं होंगे।

धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थानों को प्राप्त विशेष अधिकार:

  1. अनुच्छेद 30(1)(a), के तहत, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों (MEI) को ‘शिक्षा का अधिकार’ मौलिक अधिकार के रूप में प्राप्त है। यदि किसी कारणवश, किसी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान की परिसंपत्तियों का राज्य द्वारा अधिग्रहण किया जाता है, तो संस्था को अन्यत्र स्थापित करने के लिए उचित मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए।
  2. अनुच्छेद 15(5) के तहत, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों (MEI) में आरक्षण संबंधी प्रावधान लागू नहीं होते हैं।
  3. ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ के तहत, ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों’ को समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित 25% नामांकन के तहत 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रवेश देने की आवश्यकता नहीं होती है।
  4. ‘सेंट स्टीफंस’ बनाम ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ मामले, 1992 में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों’ में अल्पसंख्यकों के लिए 50% सीटें आरक्षित हो सकती हैं।
  5. वर्ष 2002 के ‘टीएमए पई और अन्य बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य’ मामले में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों’ में निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता आधारित एक अलग प्रवेश प्रक्रिया हो सकती है। ये संस्थान अपनी ‘शुल्क संरचना’ भी अलग से निर्धारित कर सकते हैं लेकिन इसमें कैपिटेशन शुल्क शामिल नहीं होना चाहिए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि धर्म या भाषा के आधार पर सभी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और संचालित करने का अधिकार होता है।  इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों’ के लिए उपलब्ध अधिकार
  2. अल्पसंख्यक बनाम अन्य संस्थाओं के अधिकार
  3. क्या राज्य द्वारा इनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया जा सकता है?
  4. NEET क्या है?

मेंस लिंक:

भारत में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आयुष्मान भारत राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन


संदर्भ:

हाल ही में प्रधान मंत्री द्वारा ‘आयुष्मान भारत राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ (Ayushman Bharat Digital Mission) की शुरुआत की गयी थी। इस मिशन में सभी व्यक्तियों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य आईडी (Digital Health ID) प्रदान की जाएगी, जिसमे व्यक्ति के पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड दर्ज रहेगा।

ध्यान दें:

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा पिछले साल 15 अगस्त को की गई थी। वर्तमान में, कार्यक्रम छह केंद्र शासित प्रदेशों (चंडीगढ़, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप) में प्रायोगिक चरण में लागू किया जा रहा है।

मिशन की प्रमुख विशेषताऐं:

  1. ‘आयुष्मान भारत राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ एक डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक यूनिक स्‍वास्‍थ्‍य पहचान पत्र दिया जायेगा जिसमे व्यक्ति के सभी डॉक्टरों के साथ-साथ नैदानिक परीक्षण और निर्धारित दवाओं का अंकीकृत स्वास्थ्य रिकॉर्ड (Digitised Health Records) सम्मिलित होगा।
  2. यह नई योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत शुरू की जायेगी।
  3. इस योजना के छह प्रमुख घटक हैं – स्‍वास्‍थ्‍य पहचान पत्र (HealthID), डिजीडॉक्टर (DigiDoctor), स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, ई-फार्मेसी और टेलीमेडिसिन।
  4. देश में इस मिशन के डिजाइन, निर्माण, तथा कार्यान्वयन का दायित्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) को सौंपा गया है।
  5. मिशन के मुख्य घटकों, हेल्थ आईडी, डिजीडॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री को भारत सरकार के स्वामित्व में रखा जाएगा तथा इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी भारत सरकार की होगी।
  6. निजी साझेदारों को बाजार के लिए अपने उत्पादों का निर्माण करने व समन्वय करने के लिए समान अवसर दिया जाएगा। हालांकि, मुख्य गतिविधियों तथा सत्यापन प्रक्रिया का अधिकार केवल सरकार के पास रहेगा।
  7. राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत, प्रत्येक भारतीय को एक हेल्थ आईडी कार्ड दिया जाएगा जो हेल्थ अकाउंट के रूप में कार्य करेगा जिसमें व्यक्ति की पिछली चिकित्सा स्थितियों, उपचार और निदान के बारे में भी जानकारी सम्मिलित होंगी।
  8. परामर्श हेतु अस्पताल जाने पर, नागरिक अपने डॉक्टरों और स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के लिए इस डेटा के अवलोकन की अनुमति दे सकेंगे।

मिशन की आवश्यकता:

इस मिशन का उद्देश्य नागरिकों के लिए सही डॉक्टरों को खोजने, मुलाकात के समय, परामर्श शुल्क का भुगतान करने, चिकत्सीय नुख्सों के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना है। इसके साथ ही यह लोगों के लिए सर्वोत्तम संभव स्वास्थ्य सुविधायें प्राप्त करने के लिए एक सुविज्ञ निर्णय लेने में सक्षम बनायेगा।

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को राष्ट्रव्यापी पर ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ द्वारा ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (PM-JAY) की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर शुरू किया जा रहा है। PM-JAY के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन का अवलोकन
  2. मिशन के घटक
  3. प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहचान पत्र
  4. स्वास्थ्य पहचान पत्र कौन जारी कर सकता है?
  5. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 की प्रमुख बिंदु।

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी


संदर्भ:

यूरोपीय संघ और अमेरिका द्वारा ईरान से ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) के निरीक्षकों को एक परमाणु स्थल तक पहुंचने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है। इस पर तेहरान का तर्क है, कि  संयुक्त राष्ट्र प्रहरी ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ के साथ हुए हाल के समझौते में इस ‘परमाणु स्थल’ को एजेंसी की निगरानी से छूट दी गई थी।

पृष्ठभूमि:

फरवरी में, ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ और तेहरान के मध्य एक तीन महीने के निगरानी समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे। 24 मई को इस समझौते के लिए एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।

निहितार्थ / चिंताएं:

  • इस घोषणा के बाद, वर्ष 2015 के ईरान परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए छह प्रमुख शक्तियों और ईरान के बीच जारी वार्ता और जटिल हो सकती है।
  • तीन साल पहले, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अमेरिका को समझौते से अलग करने और प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के बाद से ईरान ने विश्व शक्तियों के साथ 2015 के समझौते की शर्तों को धीरे-धीरे तोड़ना शुरू कर दिया था।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की स्थापना, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र संघ भीतर ‘वैश्विक शांति के लिए परमाणु’ (Atoms for Peace) के रूप की गयी थी।

  • यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वायत संगठन है।
  • IAEA, संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों को रिपोर्ट करती है।
  • इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।

प्रमुख कार्य:

  1. IAEA, अपने सदस्य देशों तथा विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
  2. इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना तथा परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।

IAEA द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम:

  1. कैंसर थेरेपी हेतु कार्रवाई कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy- PACT)
  2. मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम
  3. जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना
  4. नवोन्मेषी परमाणु रिएक्टरों और ईंधन चक्र पर अंतर्राष्ट्रीय परियोजना, 2000

वर्ष 2015 का परमाणु समझौता:

वर्ष 2015 में ईरान के द्वारा, विश्व के छह देशों (P5+1 समूह)– अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के साथ, अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक दीर्घकालिक समझौते पर सहमति व्यक्त की गई थी।

  1. इस समझौते को ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (Joint Comprehensive Plan of Action- JCPOA) का नाम दिया गया और आम बोलचाल में इसे ‘ईरान परमाणु समझौता कहा जाता है।
  2. समझौते के तहत, ईरान, अपने ऊपर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने और वैश्विक व्यापार तक पहुंच प्रदान किए जाने के बदले में अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करने पर सहमत हुआ था।
  3. इस समझौते के तहत, ईरान के लिए अनुसंधान कार्यों हेतु अल्प में यूरेनियम के भंडारण हेतु अनुमति दी गई किंतु रिएक्टर ईंधन और परमाणु हथियार बनाने में प्रयुक्त होने वाले, यूरेनियम के संवर्धन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
  4. ईरान को भारी पानी चालित रिएक्टर को फिर से डिजाइन करने के लिए कहा गया, क्योंकि, इसमें प्रयुक्त होने वाले ईधन के अपशिष्ट में बम निर्माण के लिए उपयुक्त ‘प्लूटोनियम’ का उत्सर्जन हो सकता है। इसके अलावा, ईरान से ‘अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण’ की अनुमति देने के लिए भी कहा गया था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपको ‘समझौता 123’ और ‘हाइड एक्ट’ के बारे में याद है? यहां पढ़ें (संक्षेप में)

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  2. IAEA के सदस्य
  3. IAEA के कार्यक्रम।
  4. बोर्ड ऑफ गवर्नर- संरचना, मतदान और कार्य
  5. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

ईरान परमाणु समझौते को फिर से लागू करने संबंधी आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)


(International Criminal Court)

संदर्भ:

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (International Criminal Court – ICC) के नए अभियोजक ने अदालत से अफगानिस्तान में तालिबान और इस्लामिक स्टेट के समर्थकों द्वारा वर्ष 2003 से किए गए मानवता के खिलाफ कथित अपराधों की जांच फिर से शुरू करने का आग्रह किया है।

‘आईसीसी’ ने नीदरलैंड में स्थित अफगानिस्तान के दूतावास के माध्यम से तालिबान को फिर से जांच शुरू करने संबंधी अपने इरादे के बारे सूचित कर दिया है।

पृष्ठभूमि:

अशरफ गनी की तत्कालीन अफगान सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (ICC) के वकीलों के सहयोग से सबूत इकट्ठा करने के लिए समय दिए जाने के अनुरोध के बाद अप्रैल 2020 में ‘आईसीसी’ की पिछली जांच को स्थगित कर दिया गया था।

आईसीसी (ICC) के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court -ICC) हेग, नीदरलैंड में स्थित है। यह नरसंहार, युद्ध अपराधों तथा मानवता के खिलाफ अपराधों के अभियोजन के लिए अंतिम न्यायालय है।

  • ICC पहला स्थायी, संधि आधारित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है, जिसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय समुदायों से संबधित गंभीर अपराधों को करने वाले अपराधियों पर मुकदमा चलाने तथा उन्हें सजा देने के लिए की गयी है।
  • ICC की स्थापना ‘रोम क़ानून’ (Rome Statute) के अंतर्गत की गयी, जो 1 जुलाई 2002 से प्रभावी हुई।

फंडिंग (Funding): न्यायालय का खर्च मुख्य रूप से सदस्य देशों द्वारा उठाया जाता है, परन्तु इसे सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, निजी व्यक्तियों, निगमों तथा अन्य संस्थाओं से स्वैच्छिक योगदान भी प्राप्त होता है।

संरचना और मतदान शक्ति:

  1. अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के प्रबंधन, विधायी निकाय तथा सदस्य सभा में प्रत्येक सदस्य राज्य का एक प्रतिनिधि शामिल होता है।
  2. प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है तथा सर्वसम्मति से निर्णय लेने के लिए “हर संभव प्रयास” किया जाता है। किसी विषय पर सर्वसम्मति नहीं होने पर वोटिंग द्वारा निर्णय किया जाता है।
  3. ICC में एक अध्यक्ष तथा दो उपाध्यक्ष होते है, इनका चुनाव सदस्यों द्वारा तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।

 

आईसीसी की आलोचनाएँ:

  1. यह संदिग्ध अपराधियों को गिरफ्तार करने में सक्षम नहीं है इसके लिए ICC को सदस्य राज्यों पर निर्भर होना पड़ता है।
  2. ICC के आलोचकों का तर्क है कि आईसीसी अभियोजक तथा न्यायाधीशों के अधिकार पर अपर्याप्त नियंत्रण और संतुलन हैं एवं अभियोगों के राजनीतिकरण होने के विरुद्ध अपर्याप्त प्रावधान है।
  3. ICC पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाया जाता है और पश्चिमी साम्राज्यवाद का एक उपकरण होने के नाते, समृद्ध तथा शक्तिशाली देशों द्वारा किए गए अपराधों की अनदेखी करता है तथा छोटे और कमजोर देशों के नेताओं को दंडित करता है।
  4. ICC कई मामलों को राज्य सहयोग के बिना सफलतापूर्वक नहीं हल कर सकता है, इससे कई समस्याएं उत्पन्न होती है।

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इंस्टा जिज्ञासु:

हाल ही में, अफ्रीकी देश ‘सूडान’ ने ‘दारफुर संघर्ष’ (Darfur conflict) के लिए, अन्य अधिकारियों सहित लंबे समय तक तानाशाह रहे ‘ओमार अल-बशीर’ को ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ (International Criminal Court – ICC) के लिए सौंपने का फैसला किया है। दारफुर संघर्ष क्या है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ICJ और ICC के मध्य अंतर
  2. इन संगठनों की भौगोलिक स्थिति
  3. यूएस और तालिबान के मध्य दोहा समझौता
  4. रोम क़ानून क्या है?
  5. अफगानिस्तान की अवस्थिति
  6. अमेरिकी तालिबान शांति समझौता

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सरकारी बजट।

सरकारी उधारी


(Government Borrowing)

संदर्भ:

महामारी प्रभावित अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने हेतु ‘राजस्व अंतर’ को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 5.03 लाख करोड़ रुपये उधार लिए जाएंगे।

सरकार द्वारा पहली छमाही के दौरान ‘बांड’ जारी कर 7.02 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं।

पृष्ठभूमि:

  • सरकार, ‘दिनांकित प्रतिभूतियों’ और ‘ट्रेजरी बिलों’ के माध्यम से अपने वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से धन जुटाती है।
  • बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था, जोकि वित्त वर्ष 2021 के लिए अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद के 9.5 प्रतिशत से कम है।

सरकारी उधारी क्या है?

यह उधारी, सरकार द्वारा लिया गया एक ऋण होती है, जो बजट दस्तावेज में पूंजीगत प्राप्तियों के अंतर्गत आती है।

सामान्यतः सरकार, सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिल को जारी करके बाजार से ऋण लेती है।

बढ़ी हुई सरकारी उधारी सरकार के वित्त को कैसे प्रभावित करती है?

सरकार के राजकोषीय घाटे के भारी बोझ, उसके पिछले कर्ज पर देय ब्याज के कारण होता है।

  • यदि सरकार अनुमानित राशि से अधिक ऋण लेती है, तो इसकी ब्याज लागत भी अधिक होगी, जो अंततः राजकोषीय घाटे को प्रभावित करती है और सरकार के वित्त को हानि पहुंचाती है।
  • बड़े उधारी कार्यक्रम के कारण सार्वजनिक ऋण में वृद्धि होती है और विशेष रूप से ऐसे समय में जब जीडीपी की वृद्धि दर नियंत्रित हो तो यह एक उच्च ऋण–जीडीपी अनुपात को दर्शाती है।

ऑफ-बजट ऋण’ क्या होता है?

‘बजटेतर ऋण / ऑफ-बजट ऋण’ (Off-budget borrowing), केंद्र सरकार के निर्देश पर किसी अन्य सार्वजनिक संस्थान द्वारा लिए गए ऋण होते हैं। इस प्रकार के ऋण सीधे केंद्र सरकार द्वारा नहीं लिए जाते हैं।

  • इस प्रकार के ऋणों का उपयोग सरकार की व्यय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।
  • चूंकि, इन ऋणों की देयता जिम्मेवारी औपचारिक रूप से केंद्र पर नहीं होती है, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय राजकोषीय घाटे में शामिल नहीं किया जाता है।
  • इससे देश के राजकोषीय घाटे को एक स्वीकार्य सीमा के भीतर सीमित रखने में सहायता मिलती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

सार्वजनिक ऋण किसी देश की सरकार द्वारा उधार ली गई कुल राशि होती है। क्या आप जानते हैं कि सार्वजनिक ऋण के स्रोत क्या हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सरकारी प्रतिभूतियां’ क्या हैं?
  2. ‘टी-बिल’ क्या हैं?
  3. अर्थोपाय अग्रिम’ (Ways and Means Advances- WMA) क्या है?
  4. FRBM अधिनियम क्या है?

मेंस लिंक:

बढ़ी हुई सरकारी उधारी, सरकारी वित्त को किस प्रकार प्रभावित करती है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ताइवान जलडमरूमध्य

ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) एक 110 मील चौड़ा समुद्रीय चैनल है, जो ताइवान द्वीप को चीन की मुख्य भूमि से अलग करता है।

  • इसे फॉर्मोसा जलडमरूमध्य या ताई-हाई (ताई सागर) के नाम से भी जाना जाता है।
  • ताइवान जलडमरूमध्य, दक्षिण चीन सागर का हिस्सा है, और इसका उत्तरी भाग पूर्वी चीन सागर से जुड़ा हुआ है।
  • जलडमरूमध्य, चीन के दक्षिण पूर्वी भाग के साथ सीमा बनाता है और चीन के फ़ुज़ियान प्रांत के पूर्वी भाग से लगा हुआ है।

taiwan

आकाश प्राइम मिसाइल

हाल ही में, आकाश मिसाइल के एक नए संस्करण-‘आकाश प्राइम’ का DRDO द्वारा सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया है।

  • मौजूदा आकाश प्रणाली की तुलना में आकाश प्राइम बेहतर सटीकता के लिए एक स्वदेशी सक्रिय रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency) खोजकर्ता उपकरण से लैस है।
  • मिसाइल में किए गए अन्य सुधार भी उच्च ऊंचाई पर कम तापमान वाले वातावरण में अधिक विश्वसनीय प्रदर्शन सुनिश्चित करते हैं।

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