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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 25 September 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. आयुष्मान भारत PMJAY

 

सामान्य अध्ययन-III

1. संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन

2. राष्ट्रीय गोकुल मिशन

3. चांग’ई -5 प्रोब

4. सुंदरबन के लिए मानवीय गतिविधियों से खतरा

5. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY)


(Ayushman Bharat PM-JAY)

संदर्भ:

विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana: AB-PMJAY) को तीन साल पूरे हो गए हैं। यह योजना 23 सितंबर, 2018 को शुरू की गयी थी।

PM-JAY की प्रमुख विशेषताएं:

  1. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित, विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा / आश्वासन योजना है।
  2. यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है।
  3. कवरेज: 74 करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं।
  4. इस योजना में सेवा-स्थल पर लाभार्थी के लिए कैशलेस स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को उपलब्ध कराया जाता है।
  5. AB-PMJAY योजना को पूरे देश में लागू करने और इसके कार्यान्वयन हेतु ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ (National Health Authority NHA) नोडल एजेंसी है।
  6. यह योजना, कुछ केंद्रीय क्षेत्रक घटकों के साथ एक केंद्र प्रायोजित योजना है।

योजना के अंतर्गत पात्रता:

  1. इस योजना के तहत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है।
  2. इस योजना के तहत पहले से मौजूद विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है।
  3. इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं।
  4. यह एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं।
  5. इस योजना में लगभग 1,393 प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं।
  6. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है।

नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार:

  • प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) कार्यक्रम जिन राज्यों में लागू किया गया, वहां स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में, योजना से अलग रहने वाले राज्यों की तुलना में, स्वास्थ्य बीमा का अधिक विस्तार, शिशु और बाल मृत्यु दर में कमी, परिवार नियोजन सेवाओं के उपयोग में सुधार और एचआईवी / एड्स के बारे में अधिक जागरूकता आदि का अनुभव किया गया।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में स्वास्थ्य बीमा वाले परिवारों के अनुपात में 54% की वृद्धि हुई, जबकि योजना से अलग रहने वाले राज्यों में 10% की गिरावट दर्ज की गयी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ को लागू करने की जिम्मेदारी भी ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ को दी गई है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आयुष्मान भारत के घटक
  2. PM JAY- मुख्य विशेषताएं
  3. पात्रता
  4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के बारे में
  5. सेहत (SEHAT) योजना

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के महत्व और क्षमताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन


(UN Food Systems Summit)

संदर्भ:

इस वर्ष ‘संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन’ (UN Food Systems Summit) का आयोजन न्यूयॉर्क में हो रहा है। ‘शिखर सम्मेलन’ में, वर्ष 2030 तक ‘सतत विकास लक्ष्यों’ को प्राप्त करने के लिए ‘वैश्विक खाद्य प्रणाली’ के कायापालट हेतु एक मंच तैयार किए जाने की संभावना है।

शिखर सम्मेलन के संभावित उद्देश्य और परिणाम:

  1. संपूर्ण ‘सतत विकास एजेंडा’ के लिए खाद्य प्रणालियों की केंद्रीयता, और विशेष रूप से किसी वैश्विक महामारी के मद्देनजर खाद्य प्रणालियों में परिवर्तन किए जाने की तात्कालिक आवश्यकता के बारे में जागरूकता में वृद्धि पर विमर्श एवं कार्यवाही।
  2. वर्ष 2030 एजेंडा को हासिल करने के लिए सहयोग और कार्रवाई हेतु ‘खाद्य’ और ‘खाद्य प्रणालियों’ को एक अधिक व्यापक मुद्दा बनाने हेतु ठोस कार्रवाई की नींव के रूप में एक खाद्य प्रणाली ढांचे की एक सामान्य समझ और वर्णन के प्रति हितधारकों को शामिल करने पर बल।
  3. खाद्य प्रणाली प्रशासन और कार्रवाई हेतु समावेशिता और नवाचार की आवश्यकता पर विशेष जोर।
  4. खाद्य प्रणाली परिवर्तन में सहयोग करने वाले हितधारकों को बेहतर उपकरणों, माप और विश्लेषण को विकसित करके प्रेरित और सशक्त बनाया जाना चाहिए।
  5. देशों, शहरों, कंपनियों, नागरिक समाजों, नागरिकों और खाद्य उत्पादकों सहित सभी समुदायों द्वारा खाद्य प्रणालियों में परिवर्तन के लिए साहसिक कार्रवाई को उत्प्रेरित किया जाना चाहिए।

शिखर सम्मेलन प्रक्रिया से ‘2030 एजेंडा’ के दृष्टिकोण को साकार करने हेतु आवश्यक बदलावों को प्रेरित  करने में मदद करने के लिए पांच कार्य क्षेत्र सामने आए हैं। इसमे शामिल है:

  1. सभी लोगों के लिए पोषण।
  2. प्रकृति आधारित समाधानों को बढ़ावा।
  3. समान आजीविका, अच्छे काम और समुदायों के सशक्तिकरण को आगे बढ़ाना।
  4. संवेदनशीलता, अचानक आघात और तनाव के प्रति लचीलापन।
  5. कार्यान्वयन हेतु साधनों के लिए सहयोग।

पृष्ठभूमि:

16 अक्टूबर 2019 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा, एक ‘पूर्व-शिखर सम्मेलन’ सहित ‘संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन’ (UN Food Systems Summit) के आयोजन की घोषणा कई गयी थी। यह घोषणा, रोम स्थित संयुक्त राष्ट्र की तीन संस्थाओं – खाद्य और कृषि संगठन (FAO), ‘अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष’ (International Fund for Agricultural Development) तथा ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ के संयुक्त नेतृत्व में, जुलाई 2019 में, आयोजित एक उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच पर वार्ता के पश्चात् की गयी थी।

‘शिखर सम्मेलन’ के बारे में:

  • ‘खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन’ (Food Systems Summit) का आयोजन ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) को वर्ष 2030 तक हासिल करने के लिए ‘कार्रवाई-दशक’ (Decade of Action) के एक भाग के रूप में किया जाता है।
  • इस शिखर सम्मेलन में सभी 17 ‘सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने हेतु नई और साहसिक कार्रवाइयों की शुरुआत करेगा, जिनमे से प्रत्येक कार्रवाई कुछ हद तक, स्वस्थ, अधिक संवहनीय और न्यायसंगत खाद्य प्रणालियों पर निर्भर होगी।
  • पांच कार्रवाई तरीकों द्वारा निर्देशित, यह शिखर सम्मेलन विज्ञान, व्यापार, नीति, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जगत के प्रमुख अभिकर्ताओं के साथ-साथ किसानों को भी एक साथ लाएगा।

‘खाद्य प्रणाली’ का तात्पर्य:

‘खाद्य प्रणाली’ (Food Systems) शब्द का तात्पर्य, खाद्य पदार्थों के उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन और उपभोग करने में शामिल गतिविधियों के समूहन से होता है।

  • खाद्य प्रणालियाँ. मानव-जीवन के हर पहलू को स्पर्श करती हैं।
  • हमारी खाद्य प्रणालियों का दुरुस्त होना, हमारे शरीर के स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे पर्यावरण, अर्थव्यवस्थाओं और संस्कृतियों के स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
  • जब ये सुचारू रूप से कार्य करते हैं, तो खाद्य प्रणालियां हमें परिवारों, समुदायों और राष्ट्रों के रूप में एक साथ लाने में सक्षम होती हैं।

चिंताएं / चुनौतियां:

  • कोविड-19 महामारी के दौरान लाखों लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से खाद्य-संकट का सामना करना पड़ रहा है विश्व की कई खाद्य प्रणालियाँ, नाजुक, बिना जांच-पड़ताल वाली और ढहने की कगार पर पहुँच चुकी हैं।
  • जब हमारी खाद्य प्रणालियाँ विफल हो जाती हैं, तो यह हमारी शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ मानव अधिकार, शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन जाता है। खाद्य प्रणालियों के विफल होने पर, जैसा कि कई मामलों देखने को मिलता है कि, जो पहले से ही गरीब या हाशिए पर रहने वाले व्यक्ति सर्वाधिक असुरक्षित हो जाते है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘भूखमरी’ और ‘खाद्य असुरक्षा’ में अंतर जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शिखर सम्मेलन के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. ‘खाद्य प्रणालियाँ’ क्या होती हैं?
  4. ‘सतत विकास लक्ष्य’ (SDG) क्या हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन


संदर्भ:

हाल ही में ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ (Rashtriya Gokul Mission) के प्रदर्शन पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी।

 

‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ क्या है?

सरकार द्वारा, राष्ट्रीय पशु प्रजनन और डेयरी विकास कार्यक्रम (National Programme for Bovine Breeding and Dairy Development – NPBBD) के तहत दुधारू पशुओं की स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विकास हेतु वर्ष 2014 में ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ शुरू किया गया था।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य:

  1. दुधारू पशुओं की स्वदेशी नस्लों का विकास और संरक्षण।
  2. स्वदेशी पशुओं के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम। इससे पशुओं में अनुवांशिक सुधार और पशुओं की संख्या में वृद्धि संभव होगी।
  3. दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने की कोशिश।
  4. साहीवाल, राठी, देउनी, थारपारकर, रेड सिन्धी और अन्य कुलीन स्वदेशी नस्लों के जरिए बाकी नस्लों को उन्नत बनाना।
  5. प्राकृतिक सेवा के लिए उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले सांडों का वितरण।

 

योजना का कार्यान्वयन:

  1. राष्ट्रीय गोकुल मिशन राज्यों के पशुधन विकास बोर्ड जैसे संस्थानों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
  2. राज्य गौसेवा आयोग को ‘राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (State Implementing AgencySIA) के तहत ‘पशुधन विकास बोर्ड’ के प्रस्ताव को प्रायोजित करने और इन प्रायोजित प्रस्तावों की निगरानी का आदेश दिया गया है।
  3. स्वदेशी पशु विभाग में सर्वश्रेष्ठ जर्मप्लाज्म सहित महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली एजेंसियों, जैसे CCBF, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि या पशुपालन विश्वविद्यालय, कॉलेज, एनजीओ, सहकारी समितियां और गौशालाएं इसमें प्रतिभागी एजेंसियां हैं।

 

गोकुल ग्राम क्या हैं?

गोकुल ग्राम देशी पशु केंद्र और अधिनियम स्वदेशी नस्लों के विकास के लिए केंद्र के रूप में काम कर रहे है।

  • इस योजना के लिए फंड एकीकृत स्वदेशी पशु केंद्र, गोकुल ग्राम की स्थापना के लिए दिया जाता है।
  • गोकुल ग्राम मूल प्रजनन इलाकों और शहरी आवास के लिए मवेशियों के पास महानगरों में स्थापित किये जाते है।

गोकुल ग्राम की भूमिका एवं दायित्व:

  1. गायों के प्रजनन क्षेत्र में किसानों को उच्च आनुवंशिक प्रजनन स्टॉक की आपूर्ति के लिए एक भरोसेमंद स्रोत है। गोकुल ग्राम किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र में आधुनिक सुविधाएं देता है।
  2. 1000 जानवरों की क्षमता वाले इन गोकुल ग्रामों में दुग्ध उत्पादक और अनुत्पादक पशुओं का अनुपात 60:40 होता है।
  3. गोकुल ग्राम, पशुओं के पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए घर में चारा उत्पादित करने के लिए बनाये गए हैं।
  4. गोकुल ग्राम वास्तव में एक आर्थिक संस्थान की तर्ज पर विकसित किया गया है, जिसमें निम्नलिखित वस्तुओं की बिक्री के जरिए आर्थिक संसाधन पैदा किया जा रहे है: दूध जैविक खाद केंचुआ–खाद मूत्र डिस्टिलेट घरेलू खपत के लिए बायो गैस से बिजली का उत्पादन पशु उत्पादों की बिक्री आदि।
  5. महानगरीय गोकुल ग्राम में शहरी मवेशियों के आनुवंशिक उन्नयन पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

कई राज्यों में ‘आवारा पशुओं’ की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनके बारे में संक्षिप्त रूप से जानकारी के लिए पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गोकुल ग्राम क्या हैं?
  2. क्या वे महानगरों में स्थापित हो सकते हैं?
  3. गोकुल ग्राम द्वारा दुधारू और अनुत्पादक पशुओं का अनुपात
  4. ‘राष्ट्रीय पशु प्रजनन एवं डेयरी विकास कार्यक्रम’ (NPBBD) के राष्ट्रीय कार्यक्रम के बारे में
  1. राष्ट्रीय गोकुल मिशन कब शुरू किया गया था?

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय गोकुल मिशन पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

सुंदरबन के लिए मानवीय गतिविधियों से खतरा


संदर्भ:

नवीनतम निष्कर्षों के अनुसार, भारतीय सुंदरबन में आबादी वाले क्षेत्रों की सीमाओं से सटे क्षेत्रों में जैव-विविधता का निरंतर नुकसान देखा जा रहा है।

मुद्दे और चुनौतियां:

  1. तटीय विकास या अल्पकालिक लाभ के लिए अंधाधुंध विनाश किए जाने की वजह से मैंग्रोव के छोटे-छोटे टुकड़े धीरे-धीरे और चुपचाप ख़त्म होते जा रहे हैं।
  2. इन क्षेत्रों को कई दुर्लभ और संकटग्रस्त वनस्पतियों और जीवों के समृद्ध आवास के रूप में देखा जाता है।
  3. तटरेखीय मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र के निरंतर नष्ट होने की वजह से, दुर्लभ प्रजातियों के लिए खंडित और संवेदनशील मैंग्रोव आवास शेष बचे हैं, जिससे इनके संचरण और प्रसार में बाधा पहुँच रही है।
  4. जैव विविधता के इस अपरिवर्तनीय नुकसान की अक्सर उपेक्षा की जाती है, जिसकी ‘जमे हुए वृक्ष को काटो और नए को लगाओं’ (cut the established and plant the new) सिद्धांत से कभी भी भरपाई नहीं की जा सकती।

आवश्यकता:

सुंदरवन, झींगा पालन जलाशयों से प्रदूषित निस्सरण किए जाने से प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए, झींगा-पालन कृषि को लोकप्रिय बनाने के बजाय, यदि स्वदेशी मछली पकड़ने की गतिविधियों को अधिक प्रोत्साहित किया जाता है, तो संकटग्रस्त तटीय जैव विविधता को संरक्षित किया जा सकता है और साथ ही तटीय निवासियों को आजीविका के विकल्प भी प्रदान किए जा सकते हैं।

भारतीय सुंदरवन के बारे में:

  1. सुंदरवन के अंतर्गत बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर गंगा और ब्रह्मपुत्र के डेल्टा में सैकड़ों द्वीप और नदियों, सहायक नदियों का एक नेटवर्क शामिल है, तथा यह भारत और बांग्लादेश में विस्तृत हैं।
  2. डेल्टा के दक्षिण-पश्चिमी भाग पर स्थित, भारतीय सुंदरबन, देश के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र के 60 प्रतिशत से अधिक है।
  3. भारत में सुंदरवन 27 वां रामसर स्थल है तथा 4,23,000 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में विस्तृत देश में सबसे बड़ी संरक्षित आर्द्रभूमि है।
  4. भारतीय सुंदरवन, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है तथा रॉयल बंगाल टाइगर का वास-स्थल है।
  5. यह जंगली मुर्गी, विशाल छिपकली, चित्तीदार हिरण, जंगली सूअर, मगरमच्छ आदि जैसे कई अन्य वन्य पशुओं का भी प्राकृतिक निवास स्थान है। साइबेरियाई बतख खानाबदोश मौसम के दौरान यहां आते हैं। सुंदरबन विलुप्तप्राय प्रजातियों जैसे बटागुर बसका, किंग क्रैब और ऑलिव रिडल कछुए का निवास स्थान भी है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सुंदरवन कहाँ अवस्थित है?
  2. ‘मैंग्रोव’ क्या हैं?
  3. इस क्षेत्र पायी जानी वनस्पति एवं जीव प्रजातियाँ
  4. बंगाल की खडी क्षेत्र में हाल के चक्रवात

मेंस लिंक:

भारत में मैंग्रोव पर चक्रवात अम्फान के प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चांग’ई-5 प्रोब


Chang’e-5 Probe

संदर्भ:

हाल ही में, चीन द्वारा चांग’ई-5 प्रोब (Chang’e-5 Probe) से प्राप्त प्रारंभिक चरण के निष्कर्ष सार्वजानिक रूप से जारी किए गए। प्रोब द्वारा इस चरण में, ‘एकत्रित किए गए नमूनों के ‘विदेशज’ टुकड़ों और ‘लैंडिंग साईट’ के आस-पास की संरचनाओं में संबंध’ के बारे में जानकारी के लिए ‘भूवैज्ञानिक मानचित्रण’ का उपयोग किया गया था।

पृष्ठभूमि:

चीनी अंतरिक्ष यान ने,चंद्रमा की सतह से चट्टानों और मिट्टी के नमूने लेकर, दिसंबर 2020 में पृथ्वी की ओर वापस यात्रा शुरू की थी। इस अभियान की सफलता के बाद चीन, वर्ष 1970 के बाद से, चंद्रमा की सतह से नमूनों को पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लाने वाला पहला देश बन गया।

यान की लैंडिंग साईट:

चांग’ई-5 प्रोब की लैंडिंग साइट, चंद्रमा के पश्चिमी छोर पर अवस्थित, ओशियनस प्रोसेलरम (Oceanus Procellarum) या ‘ओशियन ऑफ स्टॉर्म’ (Ocean of Storms) के उत्तरी भाग मे लावा निर्मित विशाल मैदान में निर्धारित की गयी थी।

यह स्थान, चंद्रमा के सबसे नवीन भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में से एक है, और इसे लगभग दो अरब वर्ष पुराना होने का अनुमान लगया गया है। चांग’ई-5 प्रोब द्वारा इसकी सतह से, अरबों वर्षों के दौरान चंद्रमा की शैलों में हुए बिखंडन और इसके परिणामस्वरूप बने महीन कणों से निर्मित भुरभुरी मृदा के नमूने एकत्रित किए गए थे।

नवीनतम निष्कर्ष:

  1. चांग’ई-5 प्रोब द्वारा एकत्र की गई नब्बे प्रतिशत सामग्री, संभावित रूप से लैंडिंग साइट और उसके आस-पास के क्षेत्रों से ली गयी है, जोकि ‘सागरीय बेसाल्ट’ (Mare Basalts) की तरह प्रतीत हो रही है।
  2. ये ज्वालामुखीय चट्टानें, चंद्रमा पर हमें गहरे भूरे रंग के क्षेत्रों के रूप में दिखाई देती हैं। ये क्षेत्र संभवतः चंद्रमा की सतह पर प्राचीन काल में हुए लावा विस्फोट से निर्मित हुए हैं।
  3. फिर भी, चांग’ई-5 प्रोब द्वारा एकत्रित शेष दस प्रतिशत नमूनों में, स्पष्ट रूप से भिन्न और ‘विदेशज’ रासायनिक संरचनाएँ पायी गयी हैं, और इनमे संभवतः चंद्रमा की सतह के अन्य भागों की जानकारी के साथ-साथ, इसकी सतह को प्रभावित करने वाली ‘अंतरिक्ष चट्टानों के प्रकारों’ के संकेत भी संरक्षित हो सकते हैं।

शीघ्र ठंडा होने वाली कांच के समान की सामग्री के मनकों के संभावित स्रोत: शोधकर्ताओं ने इन चिकने मनकों का स्रोत, चांग’ई-5 प्रोब की लैंडिंग साईट से दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पूर्व में लगभग 230 और 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘रिमा मायरन’ (Rima Mairan) और ‘रीमा शार्प’ (Rima Sharp) नामक वर्तमान में मृत हो चुके ज्वालामुखी उद्गारों में खोजा है। इन चिकने मनकों से चंद्रमा पर अतीत में हुई ज्वालामुखी गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकती है।

अन्य विवरण:

  • चीनी अंतरिक्ष यान की इनर मंगोलिया में एक सफल लैंडिंग के पश्चात चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बाद, चंद्रमा के नमूनों को पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लाने वाला मात्र तीसरा देश बन जाएगा।
  • अंतरिक्ष यान द्वारा चंद्रमा की सतह से 2 किलोग्राम (4 पाउंड) भार के नमूने एकत्र करने की योजना थी, किंतु एकत्रित नमूनों की वास्तविक मात्रा को अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

इसे कब लॉन्च किया गया था?

  • चांग’ई-5 प्रोब, 24 नवंबर को प्रक्षेपित किया गया था और इसने 1 दिसंबर को चंद्रमा की सतह को सपर्श किया। इस मिशन को कुल 23 दिन में पूरा किए जाने की संभावना की गयी थी।
  • इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह से चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाना है। यह पिछले चार दशकों में, चंद्रमा से नमूने लाने के लिए किसी भी राष्ट्र द्वारा किया गया पहला प्रयास है।

चांग’ई-5 प्रोब के बारे में:

  • चांग’ई-5 प्रोब, चीन द्वारा प्रक्षेपित किया गया मानवरहित अंतरिक्ष यान है।
  • चांग’ई-5 प्रोब, चार हिस्सों से मिलकर बना है: एक ऑर्बिटर (Orbiter), एक रिटर्नर (Returner), एक आरोहक (Ascender) और एक लैंडर (Lander)।

चांग’ई-5 प्रोब मिशन द्वारा, चीन के अंतरिक्ष इतिहास में निम्नलिखित ‘चार घटनाएं’ पहली बार होंगी:

  1. चंद्रमा की सतह से उड़ान भरने वाला यह पहला प्रोब होगा।
  2. चंद्रमा की सतह से, स्वचालित रूप से नमूने एकत्र करने वाला पहला प्रोब।
  3. चंदमा की सतह पर पहली बार मानवरहित प्रोब का भ्रमण और चन्द्र कक्षा में डॉकिंग।
  4. चंद्र-सतह से नमूनों सहित पलायन वेग (Escape Velocity) से पृथ्वी पर लौटने का पहला अवसर।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

चंद्रमा के लिए भेजे जाने वाले विभिन्न मिशनों के बारे में जानकारी हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मिशन के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. मिशन का महत्व
  4. अन्य देशों द्वारा इस तरह के पिछले अभियान

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

 नागा शांति प्रक्रिया


(Naga peace process)

संदर्भ:

तमिलनाडु के राज्यपाल ‘आर एन रवि’ ने ‘नागा शांति प्रक्रिया’ (Naga peace process) को पटरी से उतरने से रोकने के लिए ‘वार्ताकार’ के पद से इस्तीफा दे दिया है।

पृष्ठभूमि:

‘आर.एन. रवि’, नागालैंड के राज्यपाल हैं और लगभग दो वर्षों से ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’ [NSCN (I-M)] के चरमपंथी ‘इसाक-मुइवा’ गुट के साथ वार्ता कर रहे हैं, जोकि असफल रही हैं।

पृष्ठभूमि:

यह वार्ता प्रक्रिया, वर्ष 1997 में, ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-आईएम’ (NSCN-IM) द्वारा केंद्र सरकार के साथ एक युद्धविराम समझौता किए जाने के बाद से जारी है। वर्ष 2001 में, नागालैंड के अन्य समूहों ने बातचीत का विकल्प चुनना शुरू कर दिया। हालांकि, 3 अगस्त, 2015 को एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से इस वार्ता प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

नागा राजनीतिक मुद्दों का संक्षिप्त इतिहास:

स्वतंत्रता पूर्व:

  1. अंग्रेजों ने वर्ष 1826 में असम पर कब्जा कर लिया और वर्ष 1881 में नागा हिल्स भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गयीं। नागा विद्रोह का पहला संकेत वर्ष 1918 में ‘नागा क्लब’ के गठन में देखा जाता है। इसके सदस्यों ने वर्ष 1929 में साइमन कमीशन को नागा पहाडियों से निकल जाने को कहा था।
  2. वर्ष 1946 में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National Council- NNC) का गठन हुआ, जिसने 14 अगस्त 1947 को नागालैंड को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया।
  3. ‘नागा नेशनल काउंसिल’ ने “संप्रभु नागा राज्य” स्थापित करने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में एक “जनमत संग्रह” कराया, जिसमें “99 प्रतिशत” ने एक “स्वतंत्र” नागालैंड के पक्ष में मतदान किया।

स्वतंत्रता पश्चात:

22 मार्च, 1952 को एक भूमिगत नागा फ़ेडरल गवर्नमेंट (NFG) और नागा फ़ेडरल आर्मी (NFA) का गठन किया गया। भारत सरकार ने विद्रोह कुचलने के लिए सेना भेजी तथा वर्ष 1958 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम बनाया गया।

इस संबंध में समझौता:

  • वर्ष 1997 में, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-आईएम (NSCN-IM) द्वारा केंद्र सरकार के साथ एक युद्धविराम समझौता किया गया था और उस समय से दोनों के बीच वार्ता जारी है।
  • इसके अलावा, वर्ष 2017 से सात अलग-अलग नागा राष्ट्रीय राजनीतिक समूहों (Naga national political groups- NNPGs) के एक समूह की भी केंद्र के साथ वार्ता चल रही है।
  • वर्ष 2015 में केंद्र सरकार और NSCN (IM) के बीच एक ‘फ्रेमवर्क समझौता’ पर हस्ताक्षर किये गए, तथा वर्ष 2017 में केंद्र ने NNPG के साथ एक “सहमत स्थिति” (agreed position) पर हस्ताक्षर किए।
  • हालांकि, NSCN (IM) द्वारा अलग नागा ध्वज और संविधान की मांग किए जाने की वजह से, काफी लंबे समय से लंबित नागा राजनीतिक मुद्दों पर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने में देरी हो रही है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

नागा समूहों की प्रमुख मांग ‘ग्रेटर नागालैंड’ बनाए जाने की रही है। राज्य के किन हिस्सों को ग्रेटर नागालैंड’ में शामिल किया जाता हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रेटर नागालैंड’ के तहत शामिल राज्यों के हिस्से
  2. नागा क्लब और ‘नागा नेशनल काउंसिल’ (NNC)
  3. नागा जनमत संग्रह कब आयोजित किया गया था?
  4. AFSPA का अवलोकन।
  5. अनुच्छेद 371 का अवलोकन

मेंस लिंक:

नागा शांति समझौते से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA)


(Unlawful Activities Prevention Act)

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय द्वारा, पूरे भारत में ‘विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम’ (Unlawful Activities (Prevention) Act) के वर्तमान में किए जा रहे उपयोग पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताया गया है।

संबंधित प्रकरण:

  • जम्मू और कश्मीर राज्य का उल्लेख करते हुए, हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने टिप्पणी करते हुए कहा है, कि पूरे देश में ‘विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम’ (UAPA) के तहत राज्य में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
  • मानवाधिकार उच्चायुक्त ने “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का प्रयोग करने” के लिए हिरासत में लिए गए पत्रकारों के मामलों के बारे में भी चिंता व्यक्त की।

हालाँकि, मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ‘आतंकवाद का मुकाबला करने’ और राज्य (J & K) में विकास को बढ़ावा देने संबंधी सरकार के प्रयासों को मान्यता दी है, लेकिन साथ में यह भी आगाह किया है, कि इस तरह के प्रतिबंधात्मक उपायों के परिणामस्वरूप मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है जिससे तनाव और असंतोष में वृद्धि हो सकती है।

विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के बारे में:

1967 में पारित, विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (Unlawful Activities (Prevention) Act-UAPA) का उद्देश्य भारत में गैरकानूनी गतिविधि समूहों की प्रभावी रोकथाम करना है।

  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, जिसके द्वारा केंद्र सरकार किसी गतिविधि को गैरकानूनी घोषित कर सकती है।
  • इसके अंतर्गत अधिकतम दंड के रूप में मृत्युदंड तथा आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

UAPA के तहत, भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों को आरोपित किया जा सकता है।

  • यह अधिनियम भारतीय और विदेशी अपराधियों पर समान रूप से लागू होता है, भले ही अपराध भारत के बाहर विदेशी भूमि पर किया गया हो।
  • UAPA के तहत, जांच एजेंसी के लिए, गिरफ्तारी के बाद चार्जशीट दाखिल करने के लिए अधिकतम 180 दिनों का समय दिया जाता है, हालांकि, अदालत को सूचित करने के बाद इस अवधि को और आगे बढ़ाया जा सकता है।

वर्ष 2019 में किए गए संशोधनों के अनुसार:

  • यह अधिनियम राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक को, एजेंसी द्वारा मामले की जांच के दौरान, आतंकवाद से होने वाली आय से निर्मित संपत्ति पाए जाने पर उसे ज़ब्त करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • यह अधिनियम राज्य में डीएसपी अथवा एसीपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के अतिरिक्त, आतंकवाद संबंधी मामलों की जांच करने हेतु ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी’ के इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार प्रदान करता है।
  • अधिनियम में किसी व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में अभिहित करने का प्रावधान भी शामिल है।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा परिभाषित UAPA की रूपरेखा:

जून 2021 में, विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act- UAPA), 1967 की एक अन्य रूप से “अस्पष्ट” धारा 15 की रूपरेखा को परिभाषित करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा, अधिनियम की धारा 18, 15, 17 को लागू करने पर कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत निर्धारित किए गए थे।

UAPA की धारा 15, 17 और 18:

  1. अधिनियम की धारा 15, ‘आतंकवादी कृत्यों’ से संबंधित अपराधों को आरोपित करती है।
  2. धारा 17 के तहत आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाने पर दण्डित करने का प्रावधान किया गया है।
  3. धारा 18, के अंतर्गत ‘आतंकवादी कृत्य करने हेतु साजिश आदि रचने’ या आतंकवादी कृत्य करने हेतु तैयारी करने वाले किसी भी कार्य’ संबंधी अपराधों के लिए आरोपित किया जाता है।

अदालत द्वारा की गई प्रमुख टिप्पणियां:

  1. “आतंकवादी अधिनियम” (Terrorist Act) को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
  2. अदालत ने ‘हितेंद्र विष्णु ठाकुर मामले’ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि, ‘आतंकवादी गतिविधियां’ वे होती है, जिनसे निपटना, सामान्य दंड कानूनों के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता से बाहर होता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप, ‘अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ के बारे में जानते हैं? यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई में मुख्य अंतरराष्ट्रीय उपकरण है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप की परिभाषा
  2. अधिनियम के तहत केंद्र की शक्तियां
  3. क्या ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा लागू है?
  4. 2004 और 2019 में संशोधन द्वारा किए गए बदलाव।
  5. क्या विदेशी नागरिकों को अधिनियम के तहत आरोपित किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

क्या आप सहमत हैं कि विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन अधिनियम मौलिक अधिकारों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वतंत्रता का बलिदान करना न्यायसंगत है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।


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