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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 September 2021

 

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-III

1. राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक

2. SCO पीसफुल मिशन 2021

3. भारतनेट परियोजना

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नासा का VIPER मिशन

2. विश्व राइनो दिवस – 22 सितंबर

3. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा ब्लैक कार्बन उत्सर्जन पर कार्रवाई करने का आग्रह

4. असम, मिजोरम सीमा विवाद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. सांकेतिक भाषा दिवस

2. विष्णुओनीक्स

3. समुद्र शक्ति

4. हाइबोडॉन्ट शार्क

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

 राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा खाद्य सुरक्षा के पांच मानकों पर राज्यों के प्रदर्शन को मापने के लिए ‘भारतीय खाद्य संरक्षा एवं सुरक्षा मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) का तीसरा ‘राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ (State Food Safety Index – SFSI) जारी किया गया।

सूचकांक के प्रमुख बिंदु:

वर्ष 2020-21 की रैंकिंग के आधार पर नौ प्रमुख राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को उनके प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।

  1. इस वर्ष बड़े राज्यों में गुजरात शीर्ष पायदान पर रहा और उसके बाद केरल एवं तमिलनाडु का स्‍थान रहा।
  2. छोटे राज्यों में गोवा शीर्ष पायदान पर रहा और उसके बाद मेघालय एवं मणिपुर का स्‍थान रहा।
  3. केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और नई दिल्ली शीर्ष स्थान हासिल किए।

‘सूचकांक’ के बारे में:

‘राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ (State Food Safety Index – SFSI), एक गतिशील मात्रात्मक और गुणात्मक बेंचमार्किंग मॉडल है, जो सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के मूल्यांकन हेतु एक ‘विशिष्ट रूपरेखा’ प्रदान करता है।

  • पहला राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक, वर्ष 2018-19 के लिए 7 जून 2019 को ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ के अवसर पर घोषित किया गया था।
  • यह सूचकांक, खाद्य सुरक्षा के पांच महत्त्वपूर्ण मापदंडों पर राज्यों के प्रदर्शन को मापने के लिये ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) द्वारा विकसित किया गया है।

ये पांच मापदंड निम्नलिखित हैं:

  1. मानव संसाधन और संस्थागत डेटा,
  2. अनुमति / अनुपालन,
  3. खाद्य परीक्षण- बुनियादी ढांचा एवं निगरानी,
  4. ​​प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण, तथा
  5. उपभोक्ता अधिकारिता।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘खाद्य सुरक्षा मित्र’ (FSM) योजना के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. FSSAI के बारे में।
  2. FSSAI का प्रशासनिक मंत्रालय।
  3. FSSAI के कार्य।
  4. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSS अधिनियम) का अवलोकन।

मेंस लिंक:

‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

SCO पीसफुल मिशन 2021


संदर्भ:

रूस द्वारा आयोजित ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (SCO) के सदस्य देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यास का छठा संस्करण, “पीसफुल मिशन 2021” (Peaceful Mission 2021) दक्षिण-पश्चिमी रूस के ओरेनबर्ग (Orenburg) में शुरू हुआ था।

भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के 200 कर्मियों के संयुक्त भारतीय सैन्य दल में इस सैन्य अभ्यास में भाग लिया।

SCO पीसफुल मिशन’ सैन्याभ्यास के बारे में:

आतंकवाद रोधी संयुक्त ‘पीसफुल मिशन’ सैन्याभ्यास एक एक बहुपक्षीय युद्धाभ्यास है। इसे द्विवार्षिक रूप से ‘शंघाई सहयोग संगठन’ के सदस्य देशों के मध्य ‘सैन्य कूटनीति’ के एक भाग के रूप में आयोजित किया जाता है।

  • पीसफुल मिशन 2021 सैन्याभ्यास, शहरी वातावरण में अभियानगत और सामरिक स्तर पर संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियानों पर आधारित है, जिसमें SCO के सभी सदस्य देशों की सेनाएं और वायु सेनाएं भाग ले रही है।
  • इस अभ्यास का उद्देश्य एससीओ सदस्यों के बीच घनिष्ठ संबंधों को बढ़ावा देना और बहुराष्ट्रीय सैन्य टुकड़ियों की कमान संभालने के लिए सैन्य कर्मियों की क्षमताओं को बढ़ाना है।
  • इस सैन्याभ्यास में SCO देशों के सशस्त्र बलों के बीच सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा किया जाएगा।

‘शंघाई सहयोग संगठन’ के बारे में:

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।

  • SCO के गठन की घोषणा, 15 जून 2001 को शंघाई (चीन) में कजाकिस्तान गणराज्य, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, किर्गिज गणराज्य, रूसी संघ, ताजिकिस्तान गणराज्य और उजबेकिस्तान गणराज्य द्वारा की गयी थी।
  • इसकी स्थापना ‘शंघाई-5’ नामक संगठन के स्थान पर की गई थी।
  • जून 2002 में सेंटपीटर्सबर्ग में हुई SCO देशों के प्रमुखों की बैठक के दौरान शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए तथा यह 14 अप्रैल 2003 से प्रभावी हुआ।
  • SCO की आधिकारिक भाषाएं रूसी और चीनी हैं।

शंघाई सहयोग संगठन के प्रमुख लक्ष्य:

  • सदस्य राज्यों के मध्य परस्पर विश्वास और सद्भाव को मज़बूत करना।
  • राजनैतिक, व्यापार, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान व प्रौद्योगिकी तथा संस्कृति में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना।
  • संबंधित क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने और सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करना।
  • एक लोकतांत्रिक, निष्पक्ष एवं तर्कसंगत नव-अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक प्रणाली की स्थापना करना।

SCO के सदस्य:

SCO में आठ सदस्य देश शामिल हैं – भारत गणराज्य, कजाकिस्तान गणराज्य, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना, किर्गिज़ गणराज्य, इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान, रूसी संघ, ताजिकिस्तान गणराज्य और उज़्बेकिस्तान गणराज्य।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप SCO RATS के बारे में जानते हैं? इसकी भूमिकाओं और कार्यों को समझने के लिए इसे पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शंघाई फाइव क्या है?
  2. SCO चार्टर पर कब हस्ताक्षर किए गए और यह कब लागू हुआ?
  3. SCO संस्थापक सदस्य।
  4. भारत SCO में कब शामिल हुआ?
  5. SCO के पर्यवेक्षक और संवाद सहयोगी।
  6. SCO के तहत स्थायी निकाय।
  7. SCO की आधिकारिक भाषाएं।

मेंस लिंक:

शंघाई सहयोग संगठन के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

भारतनेट परियोजना


(BharatNet project)

संदर्भ:

हाल ही में, मेघालय मंत्रिमंडल द्वारा राज्य में ‘भारतनेट परियोजना’ (BharatNet project) के कार्यान्वयन हेतु एक त्रिपक्षीय समझौते में संशोधन को मंजूरी प्रदान कर दी गयी है।

इस समझौते पर, पहली बार वर्ष 2013 में ‘दूरसंचार विभाग’ (DoT), मेघालय सरकार के आईटी विभाग और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। BBNL, ‘भारतनेट परियोजना’ के कार्यान्वयन हेतु उत्तरदायी निकाय है।

पृष्ठभूमि:

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा देश के 16 राज्‍यों में ‘सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ (Public-Private Partnership – PPP) के माध्‍यम से भारतनेट की संशोधित कार्यान्‍वयन रणनीति को मंजूरी प्रदान की गई थी।

संशोधित कार्यान्‍वयन रणनीति के प्रमुख बिंदु:

  1. सरकार द्वारा परियोजना के लिए ‘व्यवहार्यता अंतर निधि’ (Viability Gap Funding) के रूप में 19,041 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।
  2. भारतनेट का अब चयनित 16 राज्यों में ग्राम पंचायतों (Gram Panchayats) से अलग सभी बसे हुए वाले गांवों तक विस्तार किया जाएगा।
  3. संशोधित रणनीति में रियायत के साथ भारतनेट का निर्माण, उन्नयन, संचालन, रख-रखाव और उपयोग भी शामिल है, जिसका चयन प्रतिस्पर्धी अंतर्राष्ट्रीय बोली प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा।

महत्व:

  1. पीपीपी मॉडल के तहत संचालन, रख-रखाव, उपयोग और राजस्व सृजन के लिए निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ उठाया जाएगा और इसके परिणामस्वरूप भारतनेट की सेवा तेजी से प्राप्त होने की उम्मीद है।
  2. सभी बसे हुए गांवों तक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण, उच्च गति वाले ब्रॉडबैंड के साथ भारतनेट की पहुंच का विस्तार, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्रदान की जाने वाली ई-सेवाओं की बेहतर पहुंच को सक्षम करेगी।
  3. यह ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, कौशल विकास, ई-कॉमर्स और ब्रॉडबैंड के अन्य अनुप्रयोगों को भी सक्षम करेगी।

‘भारतनेट परियोजना’ के बारे में:

मूल रूप से इस परियोजना को, अक्तूबर 2011 में ‘नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क’ (National Optical Fiber Network- NOFN) के रूप में शुरू किया गया था और वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर ‘भारतनेट’ (BharatNet) कर दिया गया।

  • इसका उद्देश्य, ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से 5 लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
  • इस परियोजना का लक्ष्य, ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-बैंकिंग, इंटरनेट और अन्य सेवाओं के वितरण को सुगम बनाना है।
  • यह ‘भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड’ (BBNL) द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख मिशन है।

परियोजना के तहत व्यापक परिकल्पनाएँ:

  • गैर-भेदभावपूर्ण आधार पर सुलभ उच्च मापनीय नेटवर्क अवसंरचना स्थापित करना।
  • सभी घरों के लिये 2 Mbps से 20 Mbps तथा सभी संस्थानों को उनकी मांग क्षमता के अनुसार सस्ती ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।
  • राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी में डिजिटल इंडिया के विज़न को साकार करना।

कार्यान्वयन:

  • यह परियोजना, ‘केंद्र-राज्य सहयोग परियोजना’ (Centre-State collaborative project) है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की स्थापना के लिए राज्यों को अपने अनुसार कार्य करने का अधिकार दिया गया है।
  • संपूर्ण परियोजना को, देश के ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से स्थापित किए गए, ‘यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड’ (Universal Service Obligation Fund- USOF) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘डार्क फाइबर’ के बारे में जानते हैं? इसके बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतनेट के बारे में
  2. उद्देश्य और कार्यान्वयन
  3. USOF के बारे में
  4. BBNL के बारे में

मेंस लिंक:

भारतनेट परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय:  सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा का वाईपर मिशन


(NASA’s VIPER Mission)

संदर्भ:

हाल ही में, नासा द्वारा ‘वोलाटाइल्स इंवेस्टिगेटिंग पोलर एक्सप्लोरेशन रोवर ‘(Volatiles Investigating Polar Exploration Rover– VIPER) के लिए ‘लैंडिंग साइट’ का चुनाव कर लिया गया है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के समीप अवस्थित ‘नोबियल क्रेटर’ (Nobile Crater) के पश्चिमी किनारे पर एक जगह को इस लैंडिंग साइट के लिए चुना गया है। इस क्रेटर का नामकरण एक इतालवी ध्रुवीय खोजकर्ता ‘अम्बर्टो नोबियल’ (Umberto Nobile) के नाम पर किया गया था।

पृष्ठभूमि:

नासा ने वर्ष 2023 में, ‘वोलाटाइल्स इंवेस्टिगेटिंग पोलर एक्सप्लोरेशन रोवर ‘(Volatiles Investigating Polar Exploration Rover– VIPER) / वाईपर मिशन लांच करने की घोषणा की थी।

नासा द्वारा इस मिशन को शुरू करने का उद्देश्य यह पता करना है, कि क्या चंद्रमा पर स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए वहां मानव जीवन संभव हो सकता है?

current affairs

मिशन के बारे में:

  • VIPER एक मोबाइल रोबोट है।
  • यह किसी अन्य खगोलीय पिंड पर, उसके संसाधनों का मानचित्रण करने हेतु भेजा जाने वाला पहला मिशन है।
  • नासा की वाणिज्यिक लूनर पेलोड सर्विसेज (Commercial Lunar Payload Services – CLPS) 100 दिनों के इस मिशन के लिए प्रक्षेपण वाहन और लैंडर उपलब्ध कराएगी।

मिशन के उद्देश्य:

  1. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का अन्वेषण करना।
  2. चंद्रमा पर उपलब्ध संसाधनों का मानचित्र बनाने में सहायता करना।
  3. पानी की सांद्रता के साथ-साथ चंद्रमा की सतह पर अन्य संभावित संसाधनों का आंकलन करना।

मिशन का महत्व:

VIPER के निष्कर्षों से “आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत भविष्य में लैंडिंग साइटों के लिए, उन जगहों का निर्धारण करने में मदद मिलेगी, जहाँ पर अंतरिक्ष यात्रिओं के लिए, उनके प्रवास के दौरान पानी और अन्य जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों का उपयोग किया जा सके।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप वर्ष 2028 तक चंद्रमा की सतह पर एक मानव की स्थायी मौजूदगी दर्ज करने हेतु नासा द्वारा शुरू किए जाने वाले आर्टेमिस कार्यक्रम के बारे में जानते है?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

विश्व गैंडा दिवस – 22 सितंबर


संदर्भ:

असम सरकार ने 22 सितंबर को ‘विश्व गैंडा दिवस’ / विश्व राइनो दिवस (World Rhino Day), एक विशेष समारोह में ‘एक सींग वाले गैंडे’ / एक-श्रंगी (Greater One-Horned) गैंडे’ के लगभग 2,500 सींगों के भंडार को जलाकर मनाया।

  • इस कार्यक्रम को ‘गैंडा’ / राइनो संरक्षण की दिशा में एक मील के पत्थर के रूप में प्रचारित किया गया है और इसका उद्देश्य गैंडे के सींगों के बारे में प्रचलित मिथकों को दूर करना बताया गया है।
  • इस कार्यक्रम से शिकारियों और तस्करों के लिए एक जोरदार और स्पष्ट संदेश दिया गया है, कि ऐसी वस्तुओं का कोई मूल्य नहीं है।

क्या सरकार को ऐसा करने की इजाजत है?

भारत, ‘लुप्तप्राय वन्यजीव तथा वनस्पति प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय’ (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora- CITES) पर एक हस्ताक्षरकर्ता देश है। अतः, गैंडे के सींगों को बेचना देश में वैसे भी गैरकानूनी है।

साथ ही, सींगों को नष्ट करने का मामला, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 39(3)(c) के अनुपालन में की गयी एक एक प्रक्रिया है।

एक सींग वाले गैंडे / ‘एक-श्रंगी गैंडे’ के बारे में:

भारत में केवल, एक-श्रंगी गैंडे’  (Greater One-Horned Rhino) ही पाए जाते हैं।

  • इसे ‘भारतीय गैंडे’ के रूप में भी जाना जाता है और यह आकार में गैंडे की सभी प्रजातियों में सबसे बड़ा होता है।
  • इसकी पहचान, एक काले सींग और त्वचा की सिलवटों सहित धूसर-भूरे रंग की खाल से होती है।
  • ये मुख्यतः शाकाहारी जीव होते हैं और अपने आहार के लिए लगभग पूरी तरह से घास, पत्तियों, झाड़ियों और पेड़ों की शाखाओं, फलों और जलीय पौधों पर निर्भर होते हैं।

संरक्षण स्थिति:

  1. IUCN रेड लिस्ट: असुरक्षित (Vulnerable)
  2. ‘लुप्तप्राय वन्यजीव तथा वनस्पति प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय’ (CITES): परिशिष्ट I (विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी और CITES द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे गैर- व्यावसायिक उद्देश्यों को छोड़कर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए प्रतिबंधित की गयी प्रजाति)
  3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची- I

भारत द्वारा किए जा रहे अन्य संरक्षण प्रयास:

  1. पांच राइनो रेंज देशों (भारत, भूटान, नेपाल, इंडोनेशिया और मलेशिया) द्वारा गैंडा प्रजातियों की सुरक्षा और संरक्षण हेतु ‘ एशियाई गैंडों पर नई दिल्ली घोषणा-2019’ (New Delhi Declaration on Asian Rhinos- 2019) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  2. पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने देश में सभी गैंडों के डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की गई है।
  3. राष्ट्रीय राइनो संरक्षण रणनीति: इसे 2019 में एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए लॉन्च किया गया था।

इंडियन राइनो विज़न (IRV) 2020 के बारे में:

IRV की शुरुआत वर्ष 2005 में की गयी थी।

  • इंडियन राइनो विज़न (Indian Rhino Vision) 2020, वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (World Wildlife Fund- WWF) इंडिया, इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन और कई अन्य संगठनों के साथ साझेदारी में वन विभाग, असम सरकार के नेतृत्व में शुरू की गई एक पहल है।
  • आईआरवी-2020 का लक्ष्य असम के नए क्षेत्रों में गैडों की आबादी बढ़ाकर, इनकी कुल संख्या 3,000 तक करना है।
  • वर्तमान में, असम के चार संरक्षित क्षेत्रों- पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य’, राजीव गांधी ओरांग नेशनल पार्क, काजीरंगा नेशनल पार्क और मानस नेशनल पार्क – में गैंडों की आबादी पायी जाती है।

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

इंडियन राइनो विजन 2020 (IRV 2020) के तत्वावधान में दो वयस्क एक सींग वाले गैंडों को हाल ही में पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य से मानस राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया गया था।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गैंडों की विभिन्न प्रजातियां
  2. भारत में एक सींग वाला गैंडा
  3. आवास
  4. संरक्षण की स्थिति
  5. संरक्षण के प्रयास
  6. आईआरवी 2020 के बारे में

मेंस लिंक:

‘इंडियन राइनो विज़न’ 2020 पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा ब्लैक कार्बन उत्सर्जन पर कार्रवाई करने का आग्रह


संदर्भ:

आर्कटिक में ग्रीष्मकालीन बर्फ के अपनी 12वीं सबसे कम सीमा तक पहुंचने के साथ ही, ‘स्वच्छ आर्कटिक गठबंधन’ (Clean Arctic Alliance) द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन’ (International Maritime OrganizationIMO) की नवम्बर में आयोजित होने वाली 77 वीं ‘समुद्री पर्यावरण संरक्षण समिति’ (Marine Environment Protection Committee MEPC) अर्थात MEPC 77 की बैठक से पहले, नौ-परिवहन / शिपिंग से होने वाले ‘ब्लैक कार्बन’ उत्सर्जन में तत्काल कटौती किए जाने की मांग की गयी है।

‘समुद्री पर्यावरण संरक्षण समिति’ (MEPC) के बारे में:

समुद्री पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के हितों की रक्षा और सुरक्षा के लिए, एक ‘अग्रसक्रिय रुख’ (Proactive Stance) अपनाए जाने को सुनिश्चित करने हेतु ‘अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन’ (IMO) द्वारा  ‘समुद्री पर्यावरण संरक्षण समिति’ (Marine Environment Protection Committee MEPC) की स्थापना की गयी है।

  • इस समिति का उद्देश्य, समुद्री क्षेत्रों में जहाजों के निरंतर और भारी यातायात के कारण होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान प्रदान करना है।
  • समुद्री पर्यावरण संरक्षण समिति’ अपनी बैठकों में MARPOL संबंधी मौजूदा शर्तों और दिशानिर्देशों में आवश्यक संशोधन किए जाने का प्रस्ताव भी करती है।
  • इस पर्यावरण संरक्षण संगठन द्वारा ‘विशेष रूप से संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों (Particularly Sensitive Sea Areas – PSSA) तथा अन्य विशेष समुद्री क्षेत्रों का निर्धारण और प्रवर्तन करने पर भी ध्यान दिया जाता है।

‘ब्लैक कार्बन’ क्या है?

यह जीवाश्म ईंधन, जैव ईंधन और बायोमास के अधूरे दहन के माध्यम से उत्पन्न होता है, और मानवजनित और प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली कालिख, दोनों से फैलता होता है।

  • ऐतिहासिक कार्बन उत्सर्जन के विपरीत, यह स्थानीय स्रोतों से उत्पन्न होता है, और इसका स्थानीय क्षेत्रों पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।
  • डीजल इंजन, खाना पकाने वाले चूल्हे (cooking stoves), लकड़ी जलाने और वनाग्नि से होने वाला उत्सर्जन ‘ब्लैक कार्बन’ का प्रमुख स्रोत होता है।
  • ब्लैक कार्बन, एक अल्पकालिक प्रदूषक है, तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के बाद पृथ्वी को गर्म करने में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

समान नाम होने के बावजूद, कार्बन ब्लैक (carbon black) को ब्लैक कार्बन (black carbon) समझते हुए भ्रमित नहीं होना चाहिए। ‘कार्बन ब्लैक’ क्या है? (परीक्षा के दृष्टिकोण से बहुत संक्षेप में पढ़ें।)

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ब्लैक कार्बन
  2. स्रोत
  3. प्रभाव
  4. ब्राउन कार्बन क्या है?

मेंस लिंक:

ब्लैक कार्बन के बर्फ पर जमाव से जुड़े मुद्दों की चर्चा कीजिए।

स्रोत: आईएमओ।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

असममिजोरम सीमा विवाद


संदर्भ:

‘असम और मिजोरम’ के मुख्यमंत्रियों द्वारा सीमा पर तनाव कम करने की बात करते हुए एक संयुक्त व्यक्तव्य जारी किया गया है।

हालिया घटनाक्रम:

26 जुलाई को ‘असम और मिजोरम’ राज्यों के पुलिस बलों के मध्य हुई गोलीबारी में असम के छह पुलिसकर्मी और एक नागरिक की मौत हो गई और 60 अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे।

असम सरकार के अनुसार, यह गोलीबारी एकतरफा और अकारण की गयी, जबकि मिजोरम सरकार का कहना है, कि उन्होंने असम पुलिस की आक्रामकता का जवाब दिया था।

विवाद की उत्पत्ति:

दोनों राज्यों के मध्य 164.6 किलोमीटर की एक अस्थिर सीमा हैं, और इनके मध्य चला आ रहा संघर्ष दशकों पुराना है।

सीमा विवाद ब्रिटिश काल के दौरान, 1875 और 1993 में जारी की गई दो अधिसूचनाओं से उपजा है:

  1. मिजोरम का दावा है कि ‘बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट, 1873 के अंतर्गत, 1875 में जारी अधिसूचना के आधार पर यह जमीन उसकी है।
  2. असम, इस जमीन को अपनी बताता है और इसके लिए यह, लुशाई पहाड़ियों का सीमांकन करने वाली राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1933 में जारी अधिसूचना का हवाला देता है। इसके द्वारा लुशाई पहाड़ियों और मणिपुर के बीच एक सीमा का निर्धारण किया गया।

इस प्रकार की घटनाओं का प्रभाव:

26 जुलाई की घटना के बाद से, असम में स्थानीय लोगों ने मिजोरम को जोड़ने वाले एकमात्र रेलवे ट्रैक को उखाड़ दिया और राष्ट्रीय राजमार्ग -306 को अवरुद्ध कर दिया गया। जिसकी वजह से मिजोरम से आने-जाने वाले नागरिकों और वस्तुओं का परिवहन प्रभावित हो रहा है।

आवश्यकता:

  • दोनों राज्यों के मध्य सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क किया जाना चाहिए।
  • केंद्र सरकार की सीधी निगरानी में ‘सीआरपीएफ’ बलों द्वारा इस क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढाई जानी चाहिए।
  • हालातों को बिगड़ने से रोकने हेतु, संवेदनशील संदेशों को पोस्ट करने से बचा जाना चाहिए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि गृह मंत्रालय के अनुसार, असम और मिजोरम के अलावा, सात जगहों पर इस प्रकार के संघर्ष चल रहे हैं? एक संक्षिप्त अवलोकन

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मिजोरम-असम सीमा विवाद के बारे में
  2. पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक स्थिति और सीमाएं
  3. अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ से लगे पूर्वोत्तर राज्य
  4. राष्ट्रीय राजमार्ग -306
  5. 1873 का बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट

मेंस लिंक:

असम-मिजोरम सीमा विवाद को समाप्त करने के उपाय सुझाइए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


सांकेतिक भाषा दिवस

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (दिव्यांगजन) के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय ‘भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र’ (ISLRTC), द्वारा  23 सितंबर, 2021 को ‘संकेत भाषा दिवस’ (Sign Language Day) मनाया गया।

  • अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2021 का विषय: “हम मानव अधिकारों के लिए संकेत करते हैं” (We Sign For Human Rights) है।
  • यह दिवस, पहली बार 2018 में ‘अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह’ के एक भाग के रूप में मनाया गया था।
  • 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाने के लिए चुना गया है क्योंकि इस दिन वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ द डेफ (World Federation of the Deaf) का गठन किया गया था।
  • ‘विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर अभिसमय’ (Convention on the Rights of Persons with Disabilities CRPD) के द्वारा, ‘सांकेतिक भाषाओं’ के उपयोग को मान्यता दी गई है और इसके उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है। अर्थात, अभिसमय के तहत, सांकेतिक भाषा, बोली जाने वाली भाषा के समान दर्जा प्रदान किया गया है और सदस्य देश, सांकेतिक भाषा सीखने की सुविधा प्रदान करने और बधिर समुदाय की भाषाई पहचान को बढ़ावा देने के लिए बाध्य है।

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विष्णुओनीक्स

(Vishnu onyx)

ट्युबिंगन और ज़ारागोज़ा विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने एक अब तक अज्ञात प्रजाति के जीवाश्म की खोज की है, जिसका नाम उन्होंने ‘विष्णुओनीक्स नेपच्यूनी’ (Vishnuonyx Neptuni) अर्थात ‘नेप्च्यून का विष्णु’ रखा है।

  • 5 मिलियन से 14 मिलियन वर्ष पहले, विष्णुओनिक्स, ‘ऊदबिलाव’ (Otters) जीनस के सदस्य थे और दक्षिणी एशिया की प्रमुख नदियों में पाए जाते थे।
  • अब विलुप्त हो चुके इन ऊदबिलावों के जीवाश्म सबसे पहले हिमालय की तलहटी में पाए जाने वाले अवसादों में खोजे गए थे। हाल ही खोजे गए इस नए जीवाश्म से इस बात का संकेत मिलता है कि यह प्रजाति जर्मनी तक यात्रा करती थी।
  • यह यूरोप में विष्णुओनीक्स जीनस के किसी सदस्य की पहली खोज है।

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समुद्र शक्ति

  • ‘समुद्र शक्ति’ (Samudra Shakti) भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास है इस युद्धाभ्यास की कल्पना वर्ष 2018 में की गई थी।
  • इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री संचालन में आपसी समझ और अंतर-संचालन को बढ़ाना और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।

 

हाइबोडॉन्ट शार्क

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के पश्चिमी क्षेत्र जयपुर के अधिकारियों की टीम ने एक दुर्लभ खोज की है।

  • टीम ने पहली बार जैसलमेर से जुरासिक युग के ‘हाइबोडॉन्ट शार्क’ (Hybodont Shark) की नई प्रजातियों के दांतों की जानकारी हासिल की है।
  • हाईबोडॉन्ट, शार्क का एक विलुप्त समूह, ट्राइसिक और प्रारंभिक जुरासिक युग के दौरान समुद्र और नदी के दोनों वातावरणों में पाए जाने वाली मछलियों का एक प्रमुख समूह था।
  • 65 मिलियन वर्ष पहले क्रेटेशियस युग के अंत तक हाइबोडॉन्ट विलुप्त हो गईं थी।

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