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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययनII

1. राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण

2. विश्व बैंक की ‘डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग समाप्त

3. सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन

4. AUKUS गठबंधन

 

सामान्य अध्ययनIII

1. ‘बैड बैंक’ की स्थापना और गैर-निष्पादित आस्तियों के समाधान हेतु गारंटी कार्यक्रम

2. वैक्सीन में खाद्य पौधों का प्रयोग

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चार धाम

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA)


(National Financial Reporting Authority)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ (National Financial Reporting Authority – NFRA) के अध्यक्ष ने स्वायत्तता के हित में ‘नियामक’ निकाय के लिए ‘स्‍वतंत्र रूप से एक कानून’  (Standalone Legislation) बनाए जाने की वकालत की है।

इसके साथ ही उन्होंने वित्तीय रिपोर्टिंग से संबंधित सभी आवश्यक दाण्डिक प्रावधानों को समेकित करने और इनको ‘राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ में निहित करने की भी मांग की।

आवश्यकता:

वर्तमान में, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA), पेशेवर कदाचार करने के लिए ‘लेखा परीक्षकों’ के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, लेकिन जब किसी कंपनी के वित्तीय रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी वाले अन्य पदाधिकारियों की बात आती है, तो दंडात्मक शक्तियां केंद्र सरकार के पास रहती हैं। ‘स्‍वतंत्र रूप से एक कानून’ होने से वित्तीय रिपोर्टिंग प्रणाली में सभी भागीदारों का एकीकृत विनियमन करना आसान होगा।

‘राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ के बारे में:

‘राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ का गठन भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 132 (1) के तहत 01 अक्तूबर, 2018 को किया गया था।

आवश्यकता:

इसका उद्देश्‍य स्‍वतंत्र विनियामकों को स्‍थापित करना और लेखापरीक्षा मानकों को लागू करना, लेखापरीक्षा की गुणवत्ता व लेखापरीक्षा फर्मों की स्‍वतंत्रता को सुदृढ़ बनाना है। अतएव, कंपनियों की वित्‍तीय स्‍थिति के प्रकटीकरण में निवेशक और सार्वजनिक तंत्र का विश्‍वास बढ़ाना है।

NFRA की संरचना:

कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण में एक अध्यक्ष तथा अधिकतम 15 सदस्य होंगे। अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जायेगी।

प्रकार्य और कर्त्तव्य:

  1. केंद्रीय सरकार द्वारा अऩुमोदन के लिए लेखाकर्म और लेखापरीक्षा नीतियां तथा कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले मानकों की अनुशंसा करना;
  2. लेखाकर्म मानकों और लेखापरीक्षा मानकों सहित अनुपालन वाले की निगरानी और लागू करना;
  3. ऐसे मानकों सहित अनुपालन सुनिश्चित करने वाले व्यवसायों की सेवा की गुणवत्ता का पर्यवेक्षण करना;
  4. उक्त प्रकार्यों और कर्त्तव्यों के लिए आवश्यक अथवा अनुषंगी ऐसे अऩ्य प्रकार्य और कर्त्तव्यों का निष्पादन करना।

शक्तियां:

  • NFRA यह सूचीबद्ध कंपनियों तथा गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों की जांच कर सकता है जिनकी जिनकी प्रदत्त पूंजी पांच सौ करोड़ रुपये से कम न हो अथवा वार्षिक कारोबार एक हजार करोड़ रुपये से कम न हो।
  • यह किसी नियत वर्ग के वाणिज्यिक संस्थान अथवा किसी व्यक्ति के संबंध में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) के सदस्यों द्वारा किए गए पेशेवर कदाचार की जांच कर सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण’ (NFRA) के खातों का ऑडिट भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किया जाएगा? CAG ऑडिट के बारे में अधिक जानने हेतु देखें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NFRA का गठन किस प्रावधान के तहत किया गया है?
  2. ICAI के बारे में।
  3. NFRA की संरचना।
  4. कंपनी अधिनियम 2013- प्रमुख प्रावधान।

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के प्रमुख कार्यों पर चर्चा करें और इसके महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 विश्व बैंक की ‘डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग समाप्त


संदर्भ:

हाल ही में, विश्व बैंक समूह द्वारा वर्ष 2018 और वर्ष 2020 की रिपोर्ट में डेटा अनियमितताओं संबंधी समीक्षा के बाद, ‘डूइंग बिजनेस’ (Doing Business) रैंकिंग को आगे जारी नहीं करने का फैसला किया गया है। ‘डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग के तहत विभिन्न देशों में कारोबारी माहौल के बारे में आंकड़े जारी किए जाते हैं।

संबंधित प्रकरण:

पिछली रिपोर्ट्स के आंकड़ों में बदलाव किए जाने सहित कई अनियमितताओ के सामने आने के बाद, अगस्त 2020 में, विश्व बैंक ‘डूइंग बिजनेस रिपोर्ट’ के प्रकाशन को रोक दिया था।

‘डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट में अनियमितताओं से चार देश- चीन; सऊदी अरब; संयुक्त अरब अमीरात; और अज़रबैजान – प्रभावित हुए थे।

  • डेटा अनियमितताओं की जांच में, वर्ष 2017 में, चीन की रैंकिंग को ऊपर उठाने के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष’ (IMF) की तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी ‘क्रिस्टालिना जॉर्जीवा’ (Kristalina Georgieva) सहित शीर्ष बैंक अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट में बदलाव करने हेतु “अनुचित दबाव” डालने का मामला सामने आया था।
  • इस प्रसंग ने विश्व बैंक के पूर्व कर्मचारियों और बोर्ड के अधिकारियों की नैतिकता पर प्रश्न उठ खड़ा हुआ था।

इस रिपोर्ट का महत्व:

विश्व बैंक द्वारा जारी यह वार्षिक रिपोर्ट, कई देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए विशेष मायने रखती है, क्योंकि यह रिपोर्ट, व्यवसाय शुरू करने और संचालित करने के आधार पर अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग जारी करके निवेशकों के निर्णयों को काफी प्रभावित करती थी। लेकिन, जहाँ यह रिपोर्ट निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय थी, वही कई देशों की सरकारों द्वारा इसकी कार्यप्रणाली के लिए इसकी भारी आलोचना की गई, और इनके नेताओं द्वारा यथार्थ में वास्तविकताओं को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया गया।

‘डूइंग बिजनेस’ प्रोजेक्ट के बारे में:

‘डूइंग बिजनेस’ प्रोजेक्ट के तहत, उप-राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर 190 अर्थव्यवस्थाओं और चयनित शहरों में व्यावसायिक नियमों और उनके प्रवर्तन संबंधी वस्तुनिष्ठ माप प्रदान की जाती है।

  • वर्ष 2003 में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट में, घरेलू लघु एवं मध्यम आकार की कंपनियों का अवलोकन किया जाता है और उनके जीवन-काल में इन पर लागू होने वाले नियमों-कानूनों को माप जाता है।
  • इसके तहत ‘डिस्टेंस टू फ्रंटियर’ (DTF) स्कोर के आधार पर विभिन्न देशों की रैंकिंग की जाती है, जिसमे वैश्विक स्तर पर बेहतरीन प्रणालियों के संबंध में, अर्थव्यवस्थाओं में अंतराल का पता चलता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट के बारे में।
  2. संकेतक
  3. 2018 और 2020 की रिपोर्ट का अवलोकन

मेंस लिंक:

विश्व बैंक की ‘डूइंग बिजनेस रिपोर्ट’ से जुड़ी चिंताओं पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन


संदर्भ:

‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (Collective Security Treaty Organization- CSTO) द्वारा ‘अफगानिस्तान’ में बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर, अगले महीने इसके पड़ोसी देश ‘ताजिकिस्तान’ में एक बड़ा सैन्य अभ्यास करने की योजना बनाई जा रही है।

इस कार्रवाई का औचित्य और निहितार्थ:

रूस के नेतृत्व वाले छह सदस्यीय ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (Collective Security Treaty Organization- CSTO) में से ताजिकिस्तान एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमा अफगानिस्तान से लगती है।

  • अफ़ग़ानिस्तान से संयुक्त राज्य अमेरिका के जल्दबाजी में पीछे हटने और तालिबान के देश पर कब्ज़ा करने के बाद, मॉस्को इस क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ रहा है।
  • संगठन के अनुसार, अफगानिस्तान के साथ लगी ताजिकिस्तान की सीमा पर ‘गड़बड़ी या उत्तेजना’ होने की स्थिति में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “सामूहिक रूप से तैयारी’ की जा रही हैं।

‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के बारे में:

यह छह देशों का एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है, इसका गठन वर्ष 2002 में हुआ था।

  • इसकी उत्पत्ति का स्रोत, ‘सामूहिक सुरक्षा संधि’, 1992 (ताशकंद संधि) में खोजा जा सकता है।
  • इसका मुख्यालय, रूस की राजधानी मास्को में स्थित है।
  • CSTO का उद्देश्य, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सामूहिक आधार पर सदस्य देशों की साइबर सुरक्षा और स्थिरता सहित शांति, अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

संरचना:

  • वर्तमान में, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूसी संघ और ताजिकिस्तान ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के सदस्य हैं।
  • ‘अफगानिस्तान’ और ‘सर्बिया’ को CSTO में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

संगठन की सदस्यता के लिए शर्ते:

  1. ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ की सदस्यता का अर्थ है, कि सदस्य देश, NATO जैसे अन्य सैन्य गठबंधनों में शामिल नहीं हो सकते हैं और ऐसे गठबंधनों के साथ अपने संबंधों को सीमित करना अनिवार्य होगा।
  2. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि CSTO की सदस्यता के तहत कुछ प्रमुख सुरक्षा आश्वासनों प्रदान किए जाते है – जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण, सदस्य देशों पर किसी बाह्य देश के सैन्य आक्रमण को रोकना है।
  3. CSTO में, किसी एक सदस्य देश के खिलाफ हमले को सभी सदस्यों के खिलाफ आक्रामकण के रूप में माना जाता है।
  4. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रावधान, अभी व्यवहार में लागू है अथवा नहीं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

वर्ष 2020 में भारत, ‘फाइव आईज’ नामक राष्ट्रों के एक समूह में सातवें सदस्य के रूप में शामिल हो गया। यह समूह किससे संबंधित है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के बारे में
  2. संरचना
  3. उद्देश्य

मेंस लिंक:

‘सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन’ (CSTO) के महत्व के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

AUKUS गठबंधन


संदर्भ:

ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका ने, हाल ही में, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते की घोषणा की है। इस समझौते को चीन का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

इसे ऑस्ट्रेलिया, ‘यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका’ (AUKUS) संधि और AUKUS गठबंधन कहा जा रहा है।

AUKUS संधि के बारे में:

  • AUKUS गठबंधन के तहत, तीनों सदस्य राष्ट्र, संयुक्त क्षमताओं और प्रौद्योगिकी साझाकरण के विकास में वृद्धि करने, सुरक्षा और रक्षा से संबंधित विज्ञान, प्रौद्योगिकी, औद्योगिक ठिकानों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के गहन एकीकरण को बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं।
  • AUKUS की पहली बड़ी पहल के तहत, ऑस्ट्रेलिया द्वारा अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम की मदद से परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का एक बेड़ा तैयार किया जाएगा, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना है।

चीन की प्रतिक्रिया:

चीन ने संधि की निंदा करते हुए इसे “बेहद गैर जिम्मेदाराना” बताया है।

चीन द्वारा निम्नलिखित चिंताएं व्यक्त की गयी है:

  • यह गठबंधन क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को क्षीण करेगा और क्षेत्र में हथियारों की दौड़ को तेज करेगा।
  • यह “शीत युद्ध की मानसिकता और वैचारिक पूर्वाग्रह” को फिर से सामने लाएगा।

 

इस गठबंधन के निर्माण के पक्ष में तर्क:

एक संयुक्त वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में, इस नई साझेदारी की घोषणा की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भले ही चीन का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया था, लेकिन तीनों नेताओं ने बार-बार ‘क्षेत्रीय सुरक्षा संबधी बढ़ती हुई चिंताओं का उल्लेख किया।

  • हाल के वर्षों में, बीजिंग पर दक्षिण चीन सागर जैसे विवादित क्षेत्रों में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया जाता रहा है।
  • पश्चिमी देश, प्रशांत महासागर के द्वीपों पर चीन द्वारा बुनियादी ढांचे में किए जा रहे निवेश के प्रति सावधान हैं, और इन देशों द्वारा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के खिलाफ चीन के व्यापार प्रतिबंधों की आलोचना भी की जाती रही है।

परमाणु ऊर्जा – चालित पनडुब्बी बेड़ा:

पारंपरिक रूप से संचालित बेड़े की तुलना में परमाणु ऊर्जा-चालित पनडुब्बियां काफी तेज होती है और इनका पता लगाना भी काफी कठिन होता है। ये पनडुब्बियां महीनों तक जल में भीतर रहने, मिसाइलों से लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम होती हैं।

  • विश्लेषकों के अनुसार, परमाणु ऊर्जा-चालित पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया में तैनात करना, इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव के लिए काफी अहम् साबित होगा।
  • अमेरिका, 50 साल में पहली बार अपनी पनडुब्बी तकनीक किसी अन्य देश के साथ साझा कर रहा है। इससे पहले केवल ब्रिटेन के साथ अमेरिका ने यह तकनीक साझा की थी।
  • अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत और रूस के बाद, ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों को संचालित करने वाला दुनिया का सातवां देश बन जाएगा।
  • ऑस्ट्रेलिया ने इस बात की फिर से पुष्टि की है, कि परमाणु हथियार हासिल करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

‘मनी लॉन्ड्रिंग’ संबंधी मामलों पर ‘एशिया / प्रशांत समूह’ (APG)  के बारे में जानने हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका’ (AUKUS) संधि के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. विशेषताएं

मेंस लिंक:

चीन की AUKUS गठबंधन के प्रति चिंताओं के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 बैड बैंक’ की स्थापना और गैर-निष्पादित आस्तियों के समाधान हेतु गारंटी कार्यक्रम


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा बैंकों से दबाव-ग्रस्त परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने और फिर उन्हें बाजार में बेचने के लिए दो नई संस्थाओं की स्थापना की गई है।

परिकल्पित तंत्र:

राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड’ (National Asset Reconstruction Company Ltd. – NARCL): इसे पहले ही ‘कंपनी अधिनियम’ में शामिल किया जा चुका है।

  • NARCL द्वारा आरबीआई के मौजूदा नियमों के तहत विभिन्न चरणों में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के ‘फंसे हुए क़र्ज़ की परिसंपत्तियों’ (दबाव-ग्रस्त परिसंपत्तियों) का अधिग्रहण किया जाएगा।
  • सरकार द्वारा स्थापित दूसरी संस्था ‘भारत ऋण समाधान कंपनी लिमिटेड’ (India Debt Resolution Company LtdIDRCL) है, यह बाजार में ‘तनावग्रस्त संपत्तियों’ को बेचने की कोशिश करेगी।
  • NARCL-IDRCL’ संरचना एक प्रकार की नई ‘बैड बैंक’ (Bad Bank) है। इस व्यवस्था को कार्यान्वित करने हेतु सरकार ने गारंटी के तौर पर 30,600 करोड़ रुपये के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

इस कार्यक्रम के बारे में:

  • यह ‘राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड’ (NARCL) द्वारा बैंकों को जारी प्रतिभूति रसीदों (Security Receipts – SR) के लिए पांच साल की गारंटी कार्यक्रम है।
  • इस तंत्र के तहत, NARCL लीड बैंक को प्रस्ताव देकर दबाव-ग्रस्त परिसंपत्ति का अधिग्रहण करेगी। प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद, ‘भारत ऋण समाधान कंपनी लिमिटेड’ (IDRCL) को प्रबंधन और मूल्यवर्धन के लिए नियुक्त किया जाएगा।
  • निजी क्षेत्र की परिसंपत्ति पुनर्संरचना कंपनियों (ARC) को भी NARCL से अधिक बोली लगाने की अनुमति दी जा सकती है।
  • इससे अलग, सार्वजनिक और निजी ऋणदाता भी, संयुक्त रूप से एक ‘भारतीय ऋण समाधान कंपनी’ (IDRC) स्थापित कर सकते हैं, यह इन परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने और अंतिम समाधान के लिए इनकी कीमतों को बढ़ाने का प्रयास करेगी।

कार्यविधि:

  • परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के आधार पर बैंकों को 15% नकद भुगतान किया जाएगा और शेष भुगतान, प्रतिभूति रसीदों के रूप में किया जाएगा।
  • NARCL और IDRC द्वारा परिसंपत्तियों का निपटारा करने के पश्चात् प्रतिभूति रसीदों के रूप रखी गयी 85% राशि बैंकों को सौंप दी जाएगी।
  • यदि ‘बैड बैंक’, खराब ऋण को बेचने में असमर्थ रहता है, या उसे घाटे में बेच देता है, तो सरकारी गारंटी का उपयोग किया जायेगा और, अंतर्निहित परिसंपत्तियों से प्राप्त राशि और उस परिसंपत्ति के लिए जारी प्रतिभूति रसीदों के अंकित मूल्य के बीच की कमी को कवर करने के लिए सरकार द्वारा प्रदान किए गए 30,600 करोड़ रुपये से भुगतान किया जाएगा।

महत्व:

वित्त मंत्री के अनुसार, देश में निजी क्षेत्र की 28 परिसंपत्ति पुनर्संरचना कंपनियां (ARC) हैं, किंतु बड़ी कीमतों की दबाव-ग्रस्त परिसंपत्तियों के अधिग्रहण हेतु सरकार द्वारा समर्थित रसीदों की आवश्यकता है। सरकार का यह नवीनतम कदम, गैर-निष्पादित आस्तियों (NPAs), जिनके लिए यह पूरा सेट-अप बनाया जा रहा है, की पूरी कीमत वसूलने और वापस बैंकों को दिलाने का प्रयास करता है; बैंकों द्वारा इस पूंजी का उपयोग विकास पूंजी के रूप में किया जाएगा और बैंकिंग प्रणाली मजबूत होगी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘जुड़वां बैलेंस शीट’ समस्या (Twin Balance Sheet Problem) के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. परिसंपत्ति पुनर्संरचना कंपनी (ARC) क्या होती है?
  2. ‘बैड बैंक’ क्या है?
  3. भारत में बैड बैंक कौन स्थापित कर सकता है?
  4. ‘स्ट्रेस्ड एसेट्स’ क्या हैं?
  5. ‘अनर्जक आस्तियां’ क्या हैं?

मेंस लिंक:

देश में ‘बैड बैंकों’ की स्थापना के लाभ और हानियों की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

वैक्सीन में खाद्य पौधों का प्रयोग


संदर्भ:

‘खाद्य वैक्सीन परियोजना’ (edible vaccine project) के तहत वैज्ञानिकों द्वारा ‘काहू’ / लेट्यूस (Lettuce) जैसे खाद्य पौधों को mRNA वैक्सीन निर्माण शालाओं में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

खाद्य वैक्सीन परियोजना:

‘यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन’ द्वारा 500,000 अमेरिकी डॉलर अनुदान प्राप्त इस परियोजना के तीन लक्ष्य हैं:

  • यह प्रदर्शित करना कि, mRNA वैक्सीन युक्त ‘डीएनए’ (DNA) को पौधों की कोशिकाओं के उस हिस्से में सफलतापूर्वक प्रविष्ट कराया जा सकता है जहां पर यह अपनी प्रतिकृतियाँ तैयार कर सकते हैं।
  • यह प्रदर्शित करना कि, पारंपरिक टीकों के मुकाबले पौधे भी पर्याप्त mRNA उत्पन्न कर सकते हैं। और,
  • सही खुराक का निर्धारण करना।

यदि यह नई परियोजना सफल हो जाती है, तो पादप आधारित mRNA वैक्सीन, जिसे खाया भी जा सकता है, टीकों की अनुपलब्धता की समस्या को दूर कर सकती है, और इसे कमरे के तापमान पर संग्रहीत भी किया जा सकेगा।

पौधों में वैक्सीन-निर्माण किस प्रकार संभव हो सकता है?

  • इस कार्य को करने की कुंजी, पौधों की कोशिकाओं में पाए जाने सूक्षम ‘क्लोरोप्लास्ट’ (Chloroplasts) होते हैं, ये सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं जिसका पौधे उपयोग कर सकते हैं।
  • ये आकार में सूक्ष्म और सौर ऊर्जा से चलने वाले कारखाने होते हैं, जो पौधे की वृद्धि के लिए आवशयक शर्करा और अन्य अणुओं का उत्पादन करते हैं।
  • ‘क्लोरोप्लास्ट’, कुछ वांछनीय अणुओं का निर्माण करने हेतु एक अप्रयुक्त स्रोत भी होते हैं।

इस तकनीक के बारे में:

‘मैसेंजर आरएनए’ (mRNA) तकनीक, शरीर में कोशिकाओं को संक्रामक रोगों को पहचानने और इनसे रक्षा करना सिखाती है। इस नई तकनीक के साथ आने वाली चुनौतियों में से एक यह है, कि पादप आधारित mRNA वैक्सीन को परिवहन और भंडारण के दौरान स्थिरता बनाए रखने के लिए इसे ठंडा रखा जाना आवश्यक होता है।

mRNA वैक्सीन’ क्या हैं?

mRNA वैक्सीन द्वारा रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरल प्रोटीन का स्वतः उत्पादन करने के लिए भ्रमित किया जाता है।

  • इसके लिए मैसेंजर RNA अथवा mRNA उपयोग किये जाता है। mRNA अणु, डीएनए (DNA) निर्देशों को कार्य करने हेतु सक्रिय करते हैं।
  • कोशिका के भीतर mRNA का उपयोग एक ‘नमूने’ (Template) के रूप में किया जाता है।

यह किस प्रकार कार्य करती है?

  1. ‘mRNA वैक्सीन’ का उत्पादन करने के लिए, वायरस द्वारा संक्रामक प्रोटीन के निर्माण में प्रयुक्त mRNA का वैज्ञानिक एक सिंथेटिक संस्करण तैयार करते हैं।
  2. इस सिंथेटिक mRNA को मानव शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है, शरीर की कोशिकाएं सिंथेटिक mRNA को वायरल प्रोटीन के निर्माण करने के लिए निर्देशों के रूप में पढ़ती हैं, और इसलिए वायरस के कुछ अणुओं को स्वतः निर्माण करती हैं।
  3. ये प्रोटीन एकाकी होते हैं, अतः ये वायरस निर्माण हेतु एकत्रित नहीं होते हैं।
  4. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तब इन वायरल प्रोटीनों का पता लगाती है और उनके लिए सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करना शुरू कर देती है।

mRNA वैक्सीन’ का महत्व

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के दो भाग होते हैं: जन्मजात (Innate), जन्म के साथ उत्पन्न रक्षा-प्रणाली और अधिग्रहित (Acquired), जिसे रोगजनकों के संपर्क में पर विकसित किया जाता है।

  • क्लासिकल वैक्सीन अणु आमतौर पर केवल अधिग्रहीत प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ कार्य करते हैं, तथा जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली किसी अन्य घटक द्वारा सक्रिय की जाती है, जिसे सहायक (Adjuvant) कहा जाता है।
  • दिलचस्प बात यह है कि टीकों में mRNA भी जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर सकता है, और यह बिना किसी सहायक की आवश्यकता के सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करते है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वैक्सीन क्या होती है?
  1. वैक्सीन किस प्रकार कार्य करती है?
  2. प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यविधि
  3. mRNA क्या है?
  4. mRNA के टीकों के संभावित अनुप्रयोग

मेंस लिंक:

mRNA टीकों के लाभों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चार धाम

चार धाम (Char Dham) का अर्थ है चार धार्मिक स्थल। उत्तराखंड में चार धाम, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों की यात्रा  के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक आम शब्द है।

सभी चार पवित्र मंदिर, उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय श्रेणी में स्थित हैं।

चार धाम, हिंदुओं द्वारा अपने पापों से छुटकारा पाने और मानव जीवन के अंतिम लक्ष्य – मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों के रूप में माने जाते हैं।


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