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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 15 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययनI

1. राजा महेंद्र प्रताप सिंह

 

सामान्य अध्ययनII

1. अवमानना कार्यवाही हेतु अटॉर्नी जनरल की सहमति

2. तमिलनाडु में NEET को समाप्त करने हेतु विधेयक

3. क्वाड क्या है?

 

सामान्य अध्ययनIII

1. हाइड्रोजन ईंधन

2. ग्रीन हाइड्रोजन

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

 राजा महेंद्र प्रताप सिंह


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी। यह विश्वविद्यालय अलीगढ़ संभाग के 395 महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान करेगा।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह कौन थे?

1 दिसंबर, 1886 को हाथरस में एक शाही परिवार में जन्मे, राजा महेंद्र प्रताप सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक थे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभावशाली ‘जाट समुदाय’ का प्रतिनिधित्व करते थे।

उसकी विरासत:

  • वर्ष 1914 में, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, महेंद्र प्रताप, भारत से बाहर चले गए और अफगानिस्तान के काबुल में जर्मनी के समर्थन से भारत की पहली अस्थायी सरकार का गठन किया और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ युद्ध छेड़ते हुए खुद को इसका राष्ट्रपति घोषित किया।
  • इसी दौरान, 1917 के आसपास ‘लेनिन’ और ‘लियोन ट्रॉट्स्की’ ने महेंद्र प्रताप का रूस के पेत्रोग्राद में स्वागत किया था।
  • अंग्रेजों ने उनके सिर पर इनाम की घोषणा की और, वह अपना आंदोलन जारी रखने के लिए जापान चले गए।
  • वर्ष 1911-12 में, वह मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज (MAO) कॉलेज के साथी छात्रों के साथ, तुर्क साम्राज्य की ओर से बाल्कन युद्ध में भाग लेने के लिए तुर्की रवाना हो गए।
  • वर्ष 1932 में, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए मनोनीत किया गया था।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान:

  • उन्होंने वृंदावन में ‘प्रेम महा विद्यालय’ नामक एक पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की, जहाँ एक ही छत के नीचे बढ़ईगीरी, मिट्टी के बर्तन और वस्त्रों संबंधी विभिन्न पाठ्यक्रमों को पढाया जाता था।
  • उन्होंने देश में ‘पहले तकनीकी स्कूल’ की स्थापना के लिए अपना निवास स्थान दान में दे दिया था।
  • उन्होंने ‘विश्व संघ’ (World Federation) नामक एक संगठन की स्थापना भी की।

राजनीतिक कैरियर:

  1. वर्ष 1957 में, राजा महेंद्र प्रताप ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मथुरा से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और पूर्व प्रधान मंत्री और तत्कालीन जनसंघ के उम्मीदवार (वर्तमान में भाजपा) के अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था।
  2. वर्ष 1913 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में गांधी द्वारा चलाए जा रहे अभियान में भाग लिया।
  3. उन्होंने अफगानिस्तान और भारत की स्थिति के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए दुनिया भर की यात्रा की।
  4. वर्ष 1925 में वे तिब्बत के एक मिशन पर गए और दलाई लामा से मिले।
  5. स्वतंत्र भारत में उन्होंने पंचायती राज के अपने आदर्श का निष्ठापूर्वक पालन किया।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद की अस्थायी सरकार की स्थापना की घोषणा की थी। इसके बारे में अधिक जानने हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में
  2. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान
  3. उनका राजनीतिक करियर।

मेंस लिंक:

राजा महेंद्र प्रताप सिंह की विरासत पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

 अवमानना ​​कार्यवाही हेतु अटॉर्नी जनरल की सहमति

संदर्भ:

भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) केके वेणुगोपाल द्वारा न्यायपालिका और विशेष रूप से सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए, एक ‘यू टयूब’ (YouTube) वीडियो के रचनाकार के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने हेतु एक वकील को अपनी सहमति प्रदान की है।

यह सहमति, न्यायालय अवमानना ​​अधिनियम, 1971 की धारा 15 और सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना ​​के लिए कार्यवाही को विनियमित करने संबंधी नियमावली, 1975 के नियम 3(c) के अंतर्गत प्रदान की गई है।

पृष्ठभूमि:

‘यू टयूब’ विडियो रचनाकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अन्य बातों के अलावा, रिश्वत, पक्षपात, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग के लगाए गए आरोप हैं।

‘अदालत की अवमानना’ से संबंधित कानून:

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) में सिविल अवमानना तथा आपराधिक अवमानना को परिभाषित किया गया है, तथा अवमानना के मामले में दोषियों को दण्डित करने हेतु अदालत की शक्तियाँ एवं प्रक्रिया निर्धारित की गयी है।

अदालत की अवमानना का अर्थ, अदालत की गरिमा, न्याय और इसके प्राधिकार का विरोध अथवा अवज्ञा करने वाले व्यवहार से किसी न्यायालय तथा इसके अधिकारियों की अवहेलना करना तथा उसके अधिकारों के प्रति अनादर प्रदर्शित करना है।

अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए अटार्नी जनरल की सहमति आवश्यक क्यों होती है?

किसी शिकायत को संज्ञान में लेने से पहले अटॉर्नी जनरल की सहमति की आवश्यकता का उद्देश्य अदालत का समय बचाना है।

  • अवमानना कार्यवाही शुरू करने हेतु अदालत पहला मंच होती है, यदि सार-हीन याचिकाएं दायर की जाती हैं, तो अदालतों का कीमती समय बर्बाद होता है।
  • अटार्नी जनरल सहमति का उद्देश्य सार-हीन याचिकाओं पर रोक लगाना है। ऐसा माना जाता है, कि अदालत के अधिकारी के रूप में, अटार्नी जनरल स्वतंत्र रूप शिकायतों की वैधता संबंधी जांच करेगा।

किन परिस्थितियों में अटार्नी जनरल की सहमति की आवश्यकता नहीं होती है?

  • जब कोई प्राइवेट सिटीजन, किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना कार्यवाही शुरू करना चाहता है, तो इसके लिए अटार्नी जनरल की सहमति अनिवार्य होती है।
  • हालाँकि, जब अदालत द्वारा स्वयं ही अवमानना ​​कार्यवाही शुरू की जाती है, तो अटार्नी जनरल की सहमति की आवश्यकता नहीं होती है।
  • ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भारतीय संविधान में अदालत को अवमानना कार्यवाही शुरू करने शक्ति प्रदान की गयी है, और अदालत अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अटार्नी जनरल की सहमति पर निर्भर नहीं है।

अटार्नी जनरल द्वारा सहमति देने से मना करने की स्थिति में:

  • यदि अटार्नी जनरल सहमति देने से इनकार करता है, तो मामला इसके साथ ही खत्म हो जाता है।
  • हालांकि, शिकायतकर्ता, इस मामले को अलग से अदालत के संज्ञान में ला सकता है और अदालत से इस मामले पर संज्ञान लेने का आग्रह कर सकता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 में क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय को न्यायालय की अवमानना ​​के लिए दोषी व्यक्तियों को दंडित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

सिविल / दीवानी अवमानना ​​का तात्पर्य किसी भी अदालत के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करना है। यह आपराधिक अवमानना ​​से किस प्रकार भिन्न है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवमानना के संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायलय की शक्तियां
  2. इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान।
  3. न्यायलय की अवमानना (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा किये गए परिवर्तन
  4. सिविल बनाम आपराधिक अवमानना
  5. अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार
  6. अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 10 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

भारत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामलों को किस प्रकार हल किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

तमिलनाडु में NEET को समाप्त करने हेतु विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, तमिलनाडु विधानसभा द्वारा ‘राष्ट्रीय प्रवेश सह पात्रता परीक्षा’ (National Entrance cum Eligibility Test – NEET) को समाप्त करने के लिए एक विधेयक पारित किया गया है।

NEET को समाप्त करने हेतु विधेयक की आवयश्कता:

विधानसभा ने इस विधेयक को सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए के राजन के नेतृत्व में एक ‘उच्च स्तरीय समिति’ की सिफारिश के आधार पर पारित किया है।

  • तमिलनाडु सरकार द्वारा पारित विधेयक में “सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने” के लिए कक्षा 12 के अंकों के आधार पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।
  • राज्य विधानसभा का कहना है, कि ‘राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा’ (NEET), चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश का एक उचित या न्यायसंगत तरीका नहीं है, क्योंकि यह ‘प्रवेश परीक्षा’ महंगी कोचिंग का खर्च उठा सकने वाले समाज के अमीर और कुलीन वर्गों के प्रति में पक्षपात-पूर्ण है।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET), जिसे पहले ‘आल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट’ (AIPMT) कहा जाता था, भारतीय मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस कार्यक्रमों में प्रवेश हेतु अहर्ता परीक्षा है। यह अहर्ता परीक्षा, ‘‘राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी’ / ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) द्वारा आयोजित की जाती है।

NEET के खिलाफ तर्क:

  • ‘राष्ट्रीय प्रवेश सह पात्रता परीक्षा’ MBBS और उच्च चिकित्सा पाठ्यक्रमों में ‘विविध सामाजिक प्रतिनिधित्व’ को कम करती है, और मुख्य रूप से समाज के संपन्न वर्ग के प्रति पक्षपात-पूर्ण है।
  • इस परीक्षा से सर्वाधिक प्रभावित होने वाला सामाजिक समूह ग्रामीण पृष्ठभूमि के सरकारी स्कूलों में ‘तमिल माध्यम’ से पढाई करने वाले छात्र है, और जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम है।
  • यदि NEET जारी रहता है, तो इससे राज्य की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है और राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों या सरकारी अस्पतालों के लिए पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो सकेंगे।

आगे की चुनौतियां:

चूंकि राज्य द्वारा पारित यह क़ानून, केंद्र द्वारा निर्मित कानून को चुनौती देता है, अतः यह क़ानून तब तक लागू नहीं हो सकता जब तक कि इसके लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाता है।

क्या राज्य के पास केंद्रीय कानूनों को लागू करने से मना करने की शक्ति होती है?

  1. आमतौर पर, जब कोई राज्य, समवर्ती सूची के किसी विषय पर बने केंद्रीय कानून में संशोधन करना चाहता है, तो उसे केंद्र से स्वीकृति लेने की आवश्यकता होती है।
  2. जब केंद्र तथा राज्य द्वारा एक ही विषय पर क़ानून बनाया जाता है, तो संसद द्वारा पारित कानून प्रभावी होता है।

संविधान में इस प्रकार के प्रावधान का कारण:

इस व्यवस्था की परिकल्पना का कारण है, कि;

  • संसद द्वारा बनाये गए अधिकांश कानून पूरे भारत में लागू होते हैं और राज्य द्वारा स्वैच्छिक तरीके से केंद्रीय कानूनों में संशोधन करने से देश के विभिन्न भागों में क़ानून लागू किये जाने में असंगतता हो सकती है।
  • व्यापार और वाणिज्य के संदर्भ में, इस प्रकार के मामले विशेष रूप से गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते है।

राज्यों के पास उपलब्ध अन्य विकल्प

इन कानूनों की वैधता को लेकर राज्य, केंद्र के खिलाफ उच्चत्तम न्यायालय में मामले को ले जा सकते हैं।

  • संविधान का अनुच्छेद 131 में सर्वोच्च न्यायालय को राज्यों और केंद्र के बीच होने वाले विवादों का निपटान करने संबंधी अनन्य अधिकार क्षेत्र प्रदान किया गया है।
  • संविधान का अनुच्छेद 254 (2) में राज्य सरकारों को समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र द्वारा बनाए गए कानूनों को निष्प्रभावी करने हेतु अधिनियम पारित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • अनुच्छेद 254 (2) के तहत राज्य द्वारा पारित कानून को लागू होने के लिए भारत के राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक होती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और विश्वविद्यालयों सहित ‘शिक्षा’ संबंधी विषय, 7वीं अनुसूची की सूची I की प्रविष्टि संख्या 63, 64, 65 और 66 के प्रावधानों के अधीन आते हैं। 7वीं अनुसूची के बारे में अधिक जानने हेतु पढ़िए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 131 और अनुच्छेद 254 (2) के बारे में
  2. भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची का अवलोकन
  3. राज्य के कानून द्वारा केंद्र के कानून का उल्लंघन करने पर क्या होता है?

मेंस लिंक:

केंद्र द्वारा हाल ही में पारित तीनों कृषि कानून, राज्यों के संबंधित विषयों पर कानून बनाने के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन हैं। चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘क्वाड’ क्या है?


संदर्भ:

24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा ‘क्वाड देशों’ (Quad Countries) की वैयक्तिक रूप से पहली बैठक की मेजबानी की जाएगी। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापानी प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा (Yoshihide Suga) भाग लेंगे।

बैठक में ‘क्वाड लीडर्स’ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कोविड-19 संकट, जलवायु परिवर्तन, साइबर स्पेस और सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

‘क्वाड ग्रुपिंग’ (Quad grouping) क्या है?

यह, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देशों का एक चतुष्पक्षीय सुरक्षा वार्ता संगठन है।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी हित साझा करते हैं।
  • इस समूह को अक्सर “एशियाई” या “मिनी” नाटो कहा जाता है, और इसे भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के सैन्य और आर्थिक दबदबे के जबाब के रूप में देखा जाता है।

क्वाड समूह की उत्पत्ति:

क्वाड समूह की उत्पत्ति के सूत्र, वर्ष 2004 में आयी सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए चारो देशों द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों में खोजे जा सकते हैं।

  • इसके बाद, इन चारो देशों के मध्य वर्ष 2007 में हुए आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पहली बार बैठक हुई।
  • इसका उद्देश्य, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, चारो देशों के मध्य समुद्री सहयोग बढ़ाना था।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्वाड समूह’ के प्रति चीन का दृष्टिकोण:

  1. यह एक सामान्य समझ है, कि क्वाड किसी भी देश के खिलाफ सैन्य रूप से मुकबला नहीं करेगा। फिर भी, चीन के रणनीतिक समुदाय द्वारा, इसे एक उभरता हुआ “एशियाई नाटो” ब्रांड बताया जाता है।
  2. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

क्वाड समूह’ के लिए औपचारिकता की आवश्यकता:

प्रयासों के नवीनीकरण के बावजूद, क्वाड (QUAD) समूह को किसी औपचारिक संरचना के न होने कारण आलोचना का सामना करना पड़ता है। इस समूह को संस्थागत (Institutionalisation) किये जाने, एक अपराजेय ‘चीन-विरोधी’ गुट में रूपांतरित होने के लिए एक औपचारिक समझौते की आवश्यकता है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान वैश्विक राजनीतिक स्थितियों में बहुत कुछ परिवर्तित हुआ है। क्वाड समूह के प्रत्येक सदस्य देश ने चीन की बढ़ती आक्रामकता का सामना किया है।

  1. चीन की ताकत और प्रभाव में वृद्धि हुई है और वह किसी भी प्रकार के मुठभेड़ के लिए उत्सुक है।
  2. ऑस्ट्रेलिया की घरेलू नीतियों को प्रभावित करने के प्रयासों के पश्चात, चीन द्वारा देश पर दंडात्मक कर (Punitive Tariffs) आरोपित लगा दिये गए है।
  3. चीन, भारत के साथ अक्सर सीमा विवादों में उलझता रहता है।
  4. चीन के सेनकाकू द्वीपों के संबंध में जापान के साथ क्षेत्रीय विवाद भड़का हुआ है, और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध में पूरी तरह से लगा हुआ है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘क्वाड प्लस’ के बारे में सुना है? हाल ही में, क्वाड सदस्यों ने तथाकथित क्वाड प्लस के माध्यम से साझेदारी का विस्तार करने की इच्छा का भी संकेत भी दिया गया है, जिसमें दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम शामिल होंगे। इसके बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड – संरचना।
  2. यह पहली बार कब प्रस्तावित किया गया था?
  3. हिंद महासागर क्षेत्र में देश और महत्वपूर्ण द्वीप।
  4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भौगोलिक अवलोकन।
  5. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्र और जलडमरूमध्य।

मेंस लिंक:

शांति और सुरक्षा बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र के समुद्रीय कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए क्वाड की औपचारिक बहाली और पुन: सक्रिय की आवश्यकता है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

हाइड्रोजन ईंधन


संदर्भ:

रेल मंत्रालय ने 7 सितंबर, 2021 से ‘भारतीय रेल वैकल्पिक ईंधन संगठन’ (Indian Railways Organization for Alternate Fuels – IROAF) को बंद करने का निर्णय लिया है।

  • यह निर्णय, IROAF द्वारा मौजूदा ‘डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट’ (DEMU) की ‘रेट्रोफिटिंग’ अर्थात पुराने पुर्जे हटा कर नए लगाने के लिए “हाइड्रोजन ईंधन सेल-आधारित प्रौद्योगिकी” (Hydrogen Fuel Cell-Based Technology) हेतु एक निविदा जारी करने के, लगभग एक महीने बाद लिया गया है।
  • अब, हाइड्रोजन ईंधन सेल से संबंधित सभी कार्य, टेंडर सहित, ‘उत्तर रेलवे’ को हस्तांतरित किए जाएंगे।

पृष्ठभूमि:

भारतीय रेलवे वर्ष 2030 तक ‘मिशन नेट जीरो कार्बन एमिशन रेलवे’  (Mission Net Zero Carbon Emission Railway) के तहत ‘हाइड्रोजन ईंधन आधारित तकनीक’ पर ट्रेनें परिचालन के लिए तैयार है।

हाइड्रोजन ईंधन’ क्या है?

हाइड्रोजन, आवर्त सारणी में सबसे हल्का और पहला तत्व है। चूंकि, हाइड्रोजन का भार, हवा के भार से कम होता है, इसलिए यह वायुमंडल में ऊपर की ओर उठ कर फ़ैल जाता है और यही कारण है, कि इसे अपने शुद्ध रूप ‘H2’ में मुश्किल से ही कभी पाया जाता है।

  • मानक ताप और दाब पर, हाइड्रोजन, एक गैर-विषाक्त, अधात्विक, गंधहीन, स्वादहीन, रंगहीन और अत्यधिक दहनशील द्विपरमाणुक गैस है।
  • हाइड्रोजन ईंधन (Hydrogen fuel), ऑक्सीजन के साथ दहन करने पर ‘शून्य-उत्सर्जन’ करने वाला ईंधन है। इसका उपयोग ईंधन सेलों अथवा आंतरिक दहन इंजनों में किया जा सकता है। अंतरिक्ष यान प्रणोदनों (spacecraft propulsion) के लिए ईंधन के रूप में भी हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है।

हाइड्रोजन की उत्पत्ति:

आमतौर पर, पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्राकृतिक जल-निकायों में आणविक हाइड्रोजन नहीं पाया जाता है।

पृथ्वी पर अधिकांशतः हाइड्रोजन, जल और ऑक्सीजन के साथ तथा जीवित या मृत अथवा या जीवाश्म जैवभार में, कार्बन के साथ युग्मित होती है। जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रूप में विखंडित करके हाइड्रोजन का निर्माण किया जा सकता है।

हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था का महत्व:

  1. हाइड्रोजन को, शून्य-उत्सर्जन इलेक्ट्रिक वाहनों में ईंधन सेलों की शक्ति, घरेलू उत्पादन में इसकी क्षमता और ईंधन सेलों की उच्च दक्षता क्षमताओं के कारण, एक वैकल्पिक ईंधन माना जाता है।
  2. वास्तव में, इलेक्ट्रिक मोटर के साथ फ्यूल सेल/ ईंधन सेल, गैस-चालित आंतरिक दहन इंजन की तुलना में दो से तीन गुना अधिक कुशल है।
  3. इलेक्ट्रिक मोटर के साथ मिलकर एक ईंधन सेल दो से तीन गुना अधिक कार्यक्षम होते है।
  4. हाइड्रोजन, आंतरिक दहन इंजनों के लिए ईंधन के रूप में भी काम कर सकता है।
  5. 2 पाउंड (1 किलोग्राम) हाइड्रोजन गैस की ऊर्जा, 1 गैलन (6.2 पाउंड/ 2.8 किलोग्राम) गैसोलीन की ऊर्जा के बराबर होती है।

हाइड्रोजन ईंधन की दिशा में सरकारी मिशन:

 

  • वर्ष 2020-21 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री द्वारा औपचारिक रूप से ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन’ (NHM) को शुरू करने की घोषणा की गयी थी, जिसका उद्देश्य देश को ‘हरित ऊर्जा संसाधनों से हाइड्रोजन का उत्पादन’ करने में सक्षम बनाना है।
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने यह भी खुलासा किया है, कि ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन’ के लिए मसौदा नियमों को इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा और उसके बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनुमोदन के लिए आगे भेजा जाएगा।

भारत के लिए चुनौतियां:

  1. हरित अथवा नीले हाइड्रोजन के निष्कर्षण की आर्थिक संधारणीयता, हाइड्रोजन का व्यावसायिक रूप से दोहन करने के लिए उद्योगों के सामने भारी चुनौतियों में से एक है।
  2. हाइड्रोजन के उपयोग तथा उत्पादन में प्रयुक्त होने वाली प्रौद्योगिकी, जैसेकि ‘कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS), अभी प्रारम्भिक चरण में हैं और काफी महंगी है, जिससे हाइड्रोजन की उत्पादन-लागत काफी अधिक हो जाती है।
  3. किसी संयंत्र के पूरा होने के बाद ईंधन सेलों (fuel cells) की रखरखाव लागत काफी महंगी हो सकती है, जैसाकि दक्षिण कोरिया में है।
  4. ईंधन के रूप में और उद्योगों में हाइड्रोजन के व्यावसायिक उपयोग हेतु, हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और मांग निर्माण के लिए ‘अनुसंधान और विकास’ में भारी निवेश की आवश्यकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

हाइड्रोजन को उद्योगों और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में प्रणोदक के रूप में प्रयोग करने हेतु सिलेंडर, ट्यूब और क्रायोजेनिक टैंक में ‘संपीड़ित गैस या क्रायोजेनिक तरल’ के रूप में संग्रहीत किया जाता है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हाइड्रोजन ईंधन के बारे में
  2. इसे स्वच्छ ईंधन क्यों कहा जाता है?
  3. विशेषताएं
  4. लाभ
  5. उत्पादन और भंडारण

मेंस लिंक:

ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के महत्व की चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘ग्रीन हाइड्रोजन’


संदर्भ:

केन्‍द्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के. सिंह ने अमेरिकी कंपनियों से आगामी महीनों में ‘हरित हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) और इलेक्ट्रोलाइजर्स (Electrolysers) के लिए बोलियों में भाग लेने का आग्रह किया है।

चुनौतियां:

देश में ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ के लिए मार्ग अभी साफ नहीं है और फिलहाल ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ का उत्पादन ‘ग्रे- हाइड्रोजन’ (Grey Hydrogen) की तुलना में थोड़ा महंगा है।

हरित हाइड्रोजन / ग्रीन हाइड्रोजन क्या होता है?

नवीकरणीय / अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके ‘विद्युत अपघटन’ (Electrolysis) द्वारा उत्पादित हाइड्रोजन को ‘हरित हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) के रूप में जाना जाता है। इसमें कार्बन का कोई अंश नहीं होता है।

ग्रीन हाइड्रोजन का महत्व:

भारत के लिए अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (Nationally Determined Contribution- INDC) लक्ष्यों को पूरा करने तथा क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, पहुंच और उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ ऊर्जा काफी महत्वपूर्ण है।

  • ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है, जो भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा के अंतराल को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  • परिवहन के संदर्भ में, शहरों के भीतर या राज्यों के मध्य लंबी दूरी की यात्रा या माल ढुलाई के लिए, रेलवे, बड़े जहाजों, बसों या ट्रकों आदि में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग किया जा सकता है।

 

ग्रीन हाइड्रोजन के अनुप्रयोग:

  1. अमोनिया और मेथनॉल जैसे हरित रसायनों का उपयोग सीधे ही उर्वरक, परिवहन, बिजली, रसायन, शिपिंग आदि, जैसी मौजूदा ज़रूरतों में किया जा सकता है।
  2. व्यापक स्तर पर अपनाए जाने के लिए CGD नेटवर्क में 10 प्रतिशत तक ग्रीन हाइड्रोजन मिश्रण को लागू जा सकता है।

लाभ:

  • ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा भंडारण के लिए खनिजों और दुर्लभ-पृथ्वी तत्व-आधारित बैटरी पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा।
  • जिस अक्षय ऊर्जा को ग्रिड द्वारा संग्रहीत या उपयोग नहीं किया जा सकता है, उसका हाइड्रोजन-उत्पादन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

हाइड्रोजन एक अदृश्य गैस है। लेकिन, फिर इसे हरा, गुलाबी आदि नाम किस प्रकार दिए जाते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ग्रीन हाइड्रोजन के बारे में
  2. इसका उत्पादन किस प्रकार किया जाता है?
  3. अनुप्रयोग
  4. लाभ
  5. हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन के बारे में

मेंस लिंक:

ग्रीन हाइड्रोजन के लाभों की विवेचना कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।


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