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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-III

1. चंद्रयान -2 से प्राप्त जानकारी

2. रेलवे का निजीकरण

3. उड़ान योजना

4. जीवाश्म ईंधन निष्कर्षण का ग्लोबल वार्मिंग पर प्रभाव

5. क्रिप्टोक्यूरेंसी और संबंधित मुद्दे

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. थामिराबरानी सभ्यता

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चंद्रयान -2 से प्राप्त जानकारी


संदर्भ:

ऑर्बिटर और चंद्रयान -2 मिशन के साथ भेजे गए अन्य उपकरणों द्वारा पिछले दो वर्षों में, काफी नई जानकारी एकत्रित की गयी हैं, जिससे चंद्रमा और उसके पर्यावरण के बारे में हमारे ज्ञान में वृद्धि हुई है।

current affairs

 

चंद्रयान-2 के साथ हुई दुर्घटना:

  • ‘चंद्रयान-2’ (Chandrayaan-2), भारत का चंद्रमा पर भेजे गया दूसरा मिशन था, जोकि चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट-लैंडिंग’ करने में विफल रहा।
  • यान पर लगे लैंडर और ‘रोवर’ अंतिम क्षणों में खराब हो गए और सतह पर उतरने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त को कर नष्ट हो गए।

इस मिशन की वर्तमान में प्रासंगिकता:

  • विफलता के बावजूद, मिशन के साथ भेजे गए ‘ऑर्बिटर’ और अन्य उपकरण सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और चंद्रमा पर सतहीय जानकारी एकत्रित कर रहे हैं।
  • हाल ही में, ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) ने ‘चंद्रयान-2’ के वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा अब तक एकत्र की गई जानकारी को सार्वजनिक रूप से जारी किया था, इसमें से कुछ जानकारी का विश्लेषण और आकलन किया जाना अभी बाकी है।

अब तक एकत्रित की गयी जानकारी:

  • चंद्रमा की सतह पर जल अणुओं की उपस्थिति: मिशन ने चंद्रमा पर H2O अणुओं की उपस्थिति के बारे में अब तक की सबसे सटीक जानकारी दी है।
  • सूक्ष्म तत्वों की उपस्थिति: सुदूर संवेदन उपकरणों ने चंद्रमा की सतह पर पहली बार ‘क्रोमियम, मैंगनीज और सोडियम’ का पता लगाया गया है। इस खोज से चंद्रमा पर मैग्मा के उद्भव एवं विकास को समझने और ग्रहों में भिन्नता के साथ-साथ निहारिका संबंधी स्थितियों के बारे में गहन जानकारी हासिल करने के मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
  • सौर-लपटों / सोलर फ्लेयर्स (Solar Flares) के बारे में जानकारी: सक्रिय क्षेत्र के बाहर बड़ी संख्या में सूक्ष्म-लपटों (Microflares) को पहली बार देखा गया है, और इसरो के अनुसार, इस जानकारी का “सौर- कोरोना को गर्म करने के पीछे के तंत्र को समझने पर बहुत प्रभाव पड़ेगा”। यह समस्या कई दशकों से अब तक अनसुलझी बनी हुई है।
  • रेगोलिथ (Regolith) के नीचे पाए जाने वाले ‘गोलाश्म’ / कंकड़-पत्थर (Boulders), क्रेटर और स्थायी रूप अँधेरे में रहने वाले क्षेत्रों, तथा चंद्रमा की उपरी सतह पर 3-4 मीटर की गहरायी वाले भुरभरे निक्षेपों का अन्वेषण किया जा रहा है। इससे वैज्ञानिकों को भविष्य में मानव मिशन सहित यानों की लैंडिंग और ड्रिलिंग साइटों को निर्धारित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

चंद्रयान -2 मिशन:

चंद्रयान -2 मिशन (Chandrayaan-2 mission), करीब दस वर्ष के वैज्ञानिक अनुसंधान और अभियान्त्रिकी विकास के कामयाब दौर के बाद भेजा गया भारत का दूसरा चंद्र अभियान था।

वर्ष 2019 में चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के अब तक के अछूते भाग में ‘हार्ड लैंडिंग’ करने के बाद इसका इसरो के साथ संपर्क टूट गया था, किंतु अपने ऑर्बिटर के रूप में चंद्रयान -2 चंद्रमा के ऊपर चक्कर काटते हुए अभी तक सक्रिय है।

  • वैज्ञानिकों द्वारा, सूर्य का अध्ययन करने के लिए, चंद्रयान-2 पर लगे हुए ‘सोलर एक्स-रे मॉनिटर’ (Solar X-ray Monitor – XSM) का इस्तेमाल किया गया है।
  • चंद्रयान-2 का मुख्य उद्देश्य, चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंड करने और सतह पर रोबोटिक रोवर को संचालित करने की क्षमता का प्रदर्शन करना था।
  • इस मिशन में, एक ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल थे और चंद्रमा का अध्ययन करने के लिए सभी वैज्ञानिक उपकरणों से लैस था।

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि चंद्रयान-2 से पहले भी कई मिशन, जैसे कि ‘चंद्रयान -1’, नासा का क्लेमेंटाइन मिशन और ‘लूनर प्रॉस्पेक्टर’, चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी के बारे में जानकारी दे चुके हैं? इन अभियानों के बारे में अधिक जानने हेतु पढ़िए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चंद्रयान-2 के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. यान पर लगे हुए उपकरण
  4. चंद्रयान-1

मेंस लिंक:

चंद्रयान-2 मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

रेलवे का निजीकरण


(Privatisation of Railways)

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र द्वारा घोषित ‘रेलवे के निजीकरण’ (Privatisation of Railways) के खिलाफ ‘उत्तर पश्चिम रेलवे’ (NWR) के कर्मचारी संघ द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

निजीकरण के उद्देश्य:

  1. कम रखरखाव सहित आधुनिक तकनीक से युक्त रेल इंजन और डिब्बों को शुरू करना,
  2. कम पारगमन समय,
  3. ज्यादा रोजगार सृजन,
  4. यात्रियों को ज्यादा सुरक्षा,
  5. यात्रियों को विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करना।
  6. यात्री परिवहन क्षेत्र में मांग आपूर्ति की कमी को कम करना।

रेलवे निजीकरण से लाभ:

  • बेहतर अवसंरचना – रेलवे निजीकरण से बेहतर बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
  • उच्च किराये तथा सेवा-गुणवत्ता में संतुलन – इस कदम से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इससे सेवाओं की गुणवत्ता में समग्र रूप से सुधार होगा।
  • दुर्घटनाओं में कमी- निजी स्वामित्व से रखरखाव बेहतर होगा। निजीकरण के समर्थकों का मानना है कि इससे दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी, जिसके परिणामस्वरूप दीर्घावधि में सुरक्षित यात्रा और उच्च मौद्रिक बचत होती है।

हानियाँ:

लाभप्रद क्षेत्रों तक सीमित विस्तार – भारतीय रेलवे के सरकारी होने का एक फायदा यह है कि यह लाभ की परवाह किये बगैर राष्ट्रव्यापी संपर्क प्रदान करता है। निजीकरण में संभव नहीं होगा क्योंकि इसमें कम चलने वाले रुट्स को समाप्त कर दिया जाएगा, इस प्रकार कनेक्टिविटी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वस्तुतः, इससे देश के कुछ हिस्से और दुर्गम हो जायेंगे तथा निजीकरण इन क्षेत्रों को विकास की प्रक्रिया से बाहर कर देगा।

किराया- निजी उद्यम प्रत्यक्षतः लाभ आधारित होते है। अतः यह मान लेना स्वाभाविक है कि भारतीय रेलवे में लाभ अर्जित करने का सबसे आसान तरीका किराए में वृद्धि होगी। इस प्रकार रेल सेवा, निम्न आय वर्ग की पहुंच से बाहर हो जायेगी। इस प्रकार, यह भारतीय रेल के बगैर भेदभाव के सभी आय-वर्ग के लोगों को सेवा प्रदान करने के मूल उद्देश्य की पराजय होगी।

जवाबदेही– निजी कंपनियां व्यवहार में अप्रत्याशित होती हैं तथा अपने प्रशासन तरीकों को विस्तार से साझा नहीं करती हैं। ऐसे परिदृश्य में एक विशेष इकाई को जवाबदेह बनाना मुश्किल होगा।

इस संबंध में रेल मंत्रालय के हालिया निर्णय:

  1. जुलाई, 2020 को रेल मंत्रालय ने घोषणा की कि 109 जोड़ी मार्गों पर 151 ट्रेनों का संचालन निजी क्षेत्रों द्वारा किया जाएगा। यह, इन मार्गों पर भारतीय रेलवे द्वारा संचालित 2,800 एक्सप्रेस और मेल सेवाओं का मात्र 5% हैं।
  2. वर्ष 2023 में, निजी ट्रेनों का संभवतः अन्य 12 क्लस्टर में परिचालन शुरू किया जाएगा।
  3. निजी कंपनियों को अपनी पसंद के ‘स्रोत’ से इंजन और ट्रेन खरीदने की छूट दी जाएगी।
  4. रेलवे ने मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर परिचालन के लिए आधुनिक ट्रेनों को लाने वाले ‘वेंडर क्षमताओं’ की जांच हेतु योग्यता प्रस्तावों के लिए अनुरोध आमंत्रित किए है।

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन के बारे में आप क्या जानते हैं? क्या यह वर्तमान में भी चालू है? इस बारे में अधिक जानने हेतु पढ़िए

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रेलवे और साधारण बजट कब मिलाए गए?
  2. भारत की पहली निजी ट्रेन
  3. बिबेक देबरॉय समिति किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

रेलवे के निजीकरण तथा उसमें संबंधित चुनौतियों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

‘उड़ान’ योजना


(UDAN scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा अगले 100 दिनों के लिए अपने एजेंडे की घोषणा की गयी है। इसके अंतर्गत:

  1. UDAN योजना के तहत 50 नए मार्गों का शुभारंभ किया जाएगा।
  2. विमानन टरबाइन ईंधन (Aviation Turbine Fuel – ATF) पर लगाए गए मूल्य वर्धित कर (VAT) को युक्तिसंगत बनाया जाएगा।

उड़ान’ योजना के बारे में:

इस योजना का उद्देश्य देश के दूरस्थ और क्षेत्रीय क्षेत्रों से संपर्क बढ़ाना और हवाई यात्रा को वहनीय बनाना है।

  • यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का एक प्रमुख घटक है और इसे जून 2016 में लॉन्च किया गया था।
  • इस योजना के तहत, UDAN की फ्लाइट्स में लगभग आधी सीटें रियायती किराए पर दी जाती हैं, और भाग लेने वाले कैरीएर्स को एक निश्चित राशि की ‘व्यवहार्यता अंतराल निधि’ (viability gap fundingVGF) प्रदान की जाती है, जोकि केंद्र और संबंधित राज्यों के मध्य साझा की जाती है।
  • इस योजना को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जाएगा।
  • यह योजना 10 साल तक जारी रहेगी और बाद में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

current affairs

उड़ान 4.0:

उड़ान के चौथे दौर (UDAN 4.0) को दिसंबर 2019 में पूर्वोत्तर क्षेत्रों, पहाड़ी राज्यों और द्वीपों पर विशेष ध्यान देने के साथ शुरू किया गया था।

  • भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) द्वारा पहले ही विकसित किए गए हवाई अड्डों को इस योजना के तहत व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF) के लिए उच्च प्राथमिकता दी गई है।
  • उड़ान 0 के तहत, हेलीकॉप्टर और सी-प्लेन के संचालन को भी शामिल किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘विमानन टरबाइन ईंधन’ (ATF) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में नहीं आताहै? जीएसटी के दायरे में नहीं आने वाली वस्तुओं के बारे में अधिक जानकारी हेतु पढ़िए

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UDAN योजना कब शुरू की गई थी?
  2. योजना का कार्यान्वयन और वित्त पोषण
  3. राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का अवलोकन
  4. इस योजना के तहत, हवाई किरायों के लिए सब्सिडी देने के लिए व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF) कौन प्रदान करता है?
  5. योजना के तहत राज्य सरकारों की भूमिका

मेंस लिंक:

UDAN योजना के प्रदर्शन पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

जीवाश्म ईंधन निष्कर्षण का ग्लोबल वार्मिंग पर प्रभाव


(Impact of fossil fuel extraction on global warming)

संदर्भ:

एक नए अध्ययन (‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित) के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग को, वर्ष 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में निर्धारित लक्ष्य अर्थात 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के लिए वैश्विक ‘जीवाश्म ईंधन निष्कर्षण’ (fossil fuel extraction) को काफी कम किए जाने की जरूरत है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:

  1. वर्ष 2015 के पेरिस जलवायु समझौते द्वारा निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने हेतु वैश्विक तेल और गैस उत्पादन में वर्ष 2050 तक प्रति वर्ष तीन प्रतिशत की गिरावट आनी चाहिए।
  2. वर्तमान में, योजनाबद्ध और चालू, दोनों प्रकार की जीवाश्म ईंधन निष्कर्षण परियोजनाएं, निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अनुकूल नहीं हैं।
  3. विश्व के अधिकाँश क्षेत्र पहले ही अपने जीवाश्म ईंधन उत्पादन के चरम स्तर पर पहुंच चुके हैं और यदि निर्धारित लक्ष्य को हासिल करना है, तो आगे ‘जीवाश्म ईंधन उत्पादन’ में किसी भी वृद्धि की भरपाई हेतु, किसी अन्यत्र स्थान पर इसमें कमी करनी होगी।
  4. वर्ष 2050 तक, 58 प्रतिशत तेल, 59 प्रतिशत जीवाश्म मीथेन गैस और 89 प्रतिशत कोयले के भंडार गैर- निष्कर्षित (Unextracted) होने चाहिए। इसका मतलब यह है कि अगर ‘ग्लोबल वार्मिंग लक्ष्यों’ को ध्यान में रखा जाता है तो, जीवाश्म ईंधन भंडारों की इन प्रतिशत मात्राओं को निष्कर्षित नहीं करने की जरूरत है।

‘जीवाश्म ईंधन’ के उपयोग को सीमित करने की आवश्यकता:

जीवाश्म ईंधन जनित वायु प्रदूषण की उच्च वैश्विक लागत: यह लगभग 2.9 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष या 8 बिलियन डॉलर प्रति दिन है, जोकि विश्व के सकल घरेलू उत्पाद के 3.3 प्रतिशत के बराबर है।

जीवाश्म ईंधन के कारण होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने हेतु भारत को लगभग $150 बिलियन का व्यय करने पड़ते हैं।

आगे की चुनौतियां:

  1. अब तक, मानवीय गतिविधियों के कारण ‘वैश्विक तापमान’ पूर्व-औद्योगिक स्तर (1950-1900) से लगभग 1 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ चुका है।
  2. वर्तमान में, देशों द्वारा निर्धारित उत्सर्जन लक्ष्य, ग्लोबल वार्मिंग को 5 डिग्री से कम तक सीमित करने संबंधी लक्ष्य के अनुरूप नहीं हैं।

पेरिस जलवायु समझौते द्वारा निर्धारित लक्ष्य

वर्ष 2015 में 195 देशों द्वारा हस्ताक्षरित ‘पेरिस जलवायु समझौते’ (Paris Climate Agreement) के अंतर्गत, आने वाले दशकों में जलवायु परिवर्तन को सीमित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • इस समझौते का उद्देश्य, कार्बन उत्सर्जन में कटौती के जरिये “वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री से नीचे रखने और पूर्व-औद्योगिक स्तर से 5 डिग्री तक तापमान वृद्धि को सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए ग्लोबल वार्मिंग की प्रक्रिया को धीमा करना है।

भारत के लिए आवश्यकता:

  1. जीवश्म ईंधन की देश में खोज पर कम जोर देना चाहिए।
  2. उत्पादक क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ानी चाहिए।
  3. सामरिक भंडार में वृद्धि की जानी चाहिए।
  4. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों का पुनर्गठन और पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए।
  5. सीमित सोच से बचना चाहिए।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. पेरिस समझौता क्या है?
  2. इस समझौते पर किन देशों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं?
  3. इसके लक्ष्य
  4. पेरिस समझौते के तहत घोषित वित्त पोषण तंत्र

मेंस लिंक:

पेरिस जलवायु समझौते के महत्व की विवेचना कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

क्रिप्टोकरेंसी और संबंधित मुद्दे


संदर्भ:

हाल ही में, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है, कि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के बारे में केंद्रीय बैंक की “गंभीर और प्रमुख” चिंताएं अभी बनी हुई हैं और इस बारे में केंद्र सरकार को सूचित कर दिया गया है।

पृष्ठभूमि:

बिटकॉइन जैसी निजी क्रिप्टोकरेंसी, जोकि अभी तक गैर-विनियमित हैं, एक जटिल प्रक्रिया के माध्यम से माइन (Mine) की जाती हैं और इनकी कीमतें अत्यधिक अस्थिर होती हैं। भारत में एक ‘परिसंपत्ति’ के रूप में प्रसार के बावजूद क्रिप्टोकरेंसी पर आरबीआई द्वारा नजर रखी जा रही है।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी की वर्तमान स्थिति:

  • क्रिप्टोकरेंसी संबंधी मामलों पर गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा, भारत में राज्य द्वारा जारी किसी भी आभासी मुद्राओं को छोड़कर, सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की गयी है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी बाजार में क्रिप्टोकरेंसी कारोबार पर चिंता जताई है और इसे केंद्र को अवगत कराया है।
  • मार्च 2020 में पुनः, सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को, आरबीआई द्वारा वर्ष 2018 के सर्कुलर को अलग करते हुए, क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित सेवाओं को बहाल करने की अनुमति दी थी। आरबीआई ने क्रिप्टोकरेंसी संबंधित सेवाओं को (“अनुरूपता” के आधार पर) प्रतिबंधित कर दिया था।

‘क्रिप्टोकरेंसी’ क्या हैं?

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrencies) एक प्रक्रार की डिजिटल करेंसी होती है, जो क्रिप्टोग्राफी के नियमों के आधार पर संचालित और बनाई जाती है। क्रिप्टोग्राफी का अर्थ को कोडिंग की भाषा को सुलझाने की कला है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम होता है, जिसमे ‘किसी वित्तीय संस्था के बगैर एक पार्टी द्वारा दूसरी पार्टी को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है ।

उदाहरण: बिटकॉइन, एथेरियम (Ethereum)आदि।

आरबीआई द्वारा क्रिप्टोकरेंसी का विरोध करने संबंधी कारण:

  1. संप्रभु प्रत्याभूत (Sovereign guarantee): क्रिप्टोकरेंसी उपभोक्ताओं के लिए जोखिम उत्पन्न करती है। इनके पास कोई सॉवरेन गारंटी / संप्रभु प्रत्याभूत नहीं होता है और इसलिए ये वैध मुद्रा नहीं होती हैं।
  2. बाजार में उतार-चढ़ाव (Market volatility): इनकी प्रत्याशित प्रकृति भी इन्हें अत्यधिक अस्थिर बनाती है। उदाहरण के लिए, बिटकॉइन का मूल्य दिसंबर 2017 में 20,000 अमेरिकी डॉलर से गिरकर नवंबर 2018 में 3,800 अमेरिकी डॉलर हो गया।
  3. सुरक्षा जोखिम: यदि किसी प्रकार से उपयोगकर्ता की अपनी निजी कुंजी खो जाती है (पारंपरिक डिजिटल बैंकिंग खातों के विपरीत, इसे पासवर्ड रीसेट नहीं किया जा सकता है) तो उपयोगकर्ता अपनी क्रिप्टोकरेंसी तक पहुंच खो देता है।
  4. मैलवेयर संबंधी धमकी: कुछ मामलों में, इन निजी कुंजियों को तकनीकी सेवा प्रदाताओं (क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज या वॉलेट) द्वारा संग्रहीत किया जाता है, जो मैलवेयर या हैकिंग के प्रति संवेदनशील होते हैं।
  5. मनी लॉन्ड्रिंग।

एस सी गर्ग समिति की सिफारिशें (2019)

  1. किसी भी रूप में क्रिप्टोकरेंसी का खनन, स्वामित्व, लेन-देन या सौदा करने को प्रतिबंधित किया जाए।
  2. समिति के द्वारा, डिजिटल मुद्रा में विनिमय या व्यापार करने पर एक से 10 साल तक के कारावास का दंड की सिफारिश की गयी थी।
  3. समिति ने, सरकारी खजाने को हुए नुकसान या क्रिप्टोकरेंसी उपयोगकर्ता द्वारा अर्जित किए गए लाभ, जो भी अधिक हो, के तीन गुना तक मौद्रिक दंड का प्रस्ताव किया गया था।
  4. हालांकि, समिति ने सरकार से ‘भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा क्रिप्टोकरेंसी जारी करने की संभवना’ पर अपना दिमाग खुला रखने की सलाह भी दी गयी थी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘IOTA उलझन’ (IOTA Tangle) के बारे में सुना है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी
  2. विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी
  3. ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

मेंस लिंक:

क्रिप्टोकरेंसी क्या हैं? इसके विनियमन की आवश्यकता कर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


थामिराबरानी सभ्यता

(Thamirabarani civilization)

ताम्रपर्णी / थामिराबरानी / पोरुनई (Thamirabarani/ Porunai) तमिलनाडु में बहने वाली एक बारहमासी नदी है, जो पश्चिमी घाट (पोथिगई पहाड़ियों के अगस्त्यरकुडम शिखर) से निकलती है और तिरुनेलवेली और थूथुकुडी जिलों से गुजरने के बाद मन्नार की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती है।

नदियों का सभ्यताओं के साथ एक अनूठा जुड़ाव रहा है। तिरुनेलवेली के दक्षिणी जिले में थामिराबरानी सभ्यता भी कोई अपवाद नहीं है।

चर्चा का कारण:

  • अमेरिका स्थित एक प्रयोगशाला में कार्बन-डेटिंग के नतीजों ने तमिलनाडु में इस प्राचीन सभ्यता से खोजे गए अवशेषों को कम से कम 3,200 वर्ष पुराना बताया है।
  • यह संभवतः सबसे पुरानी सभ्यता है, और 2,600 साल पुरानी माने जाने वाले ‘वैगई सभ्यता’ से भी पुरानी है।

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