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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 10 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2021

 

सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क

2. वस्‍त्र उद्योग के लिए ‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई)’ योजना

3. पुर्तगाली गणराज्य में काम करने हेतु भारतीय नागरिकों की भर्ती

4. 13वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. क्यूकर्टाक अवन्नारलेक

2. प्रधान मंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान

3. भारत का पहला ‘डुगोंग संरक्षण रिजर्व’

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

 स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2021


संदर्भ:

स्वच्छ भारत मिशन चरण- 2 के तहत 9 सितंबर, 2021 को ‘स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण’, 2021 (Swachh Survekshan Grameen, 2021) को लॉन्च किया गया है।

  • ‘स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण’ का उद्देश्य देश में ‘ओडीएफ (ODF)’ के साथ मध्यस्थ के तौर पर जुड़कर परिणामों की गति बढ़ाने का समर्थन करना है।
  • सर्वेक्षण 2021 के संचालन के लिए एक विशेषज्ञ एजेंसी को काम पर रखा गया है।
  • सर्वेक्षण के हिस्से के रूप में, गांवों, जिलों और राज्यों को प्रमुख मापदंडों का उपयोग करके रैंकिंग किया जाएगा।

कवरेज:

  • स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण के हिस्से के रूप में, देश भर के 698 जिलों के 17,475 गांवों को कवर किया जाएगा।
  • सर्वेक्षण के लिए इन गांवों के 87,250 सार्वजनिक स्थानों जैसे स्कूलों, आंगनबाड़ियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों, हाट/बाजारों/धार्मिक स्थलों का दौरा किया जाएगा।
  • स्वच्छ भारत मिशन (SBM) से संबंधित मुद्दों पर प्रतिक्रिया के लिए लगभग 1,74,750 परिवारों का मत लिया जाएगा।
  • साथ ही, नागरिकों को इस उद्देश्य के लिए विकसित एक एप्लिकेशन का उपयोग करके स्वच्छता संबंधी मुद्दों पर ऑनलाइन फीडबैक देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

“स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण” (SSG) की शुरुआत जल शक्ति मंत्रालय के तहत ‘पेयजल एवं स्वच्छता विभाग’ (DDWS) द्वारा की गयी है, इससे पहले यह सर्वेक्षण वर्ष 2018 और 2019 में किए जा चुके हैं।

  • ‘स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण’ सिर्फ एक रैंकिंग एक्सरसाइज नहीं है बल्कि जन-आंदोलन तैयार करने का एक एक माध्यम रहा है।
  • इसके तहत, प्रमुख गुणवत्ता और मात्रात्मक मापदंडों पर उनके प्रदर्शन के आधार पर जिलों की रैंकिंग करने हेतु, मार्गदर्शन करने के लिए एक विस्तृत प्रोटोकॉल विकसित किया गया है।

‘स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण’ 2021 के विभिन्न आधारों का मान नीचे दिया गया है:

  • सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता का प्रत्यक्ष निरीक्षण- 30 प्रतिशत
  • नागरिकों की प्रतिक्रिया, जिसमें आम नागरिकों, ग्राम स्तर पर प्रमुख प्रभावकों और मोबाइल ऐप का उपयोग करने वाले नागरिकों से ऑनलाइन प्रतिक्रिया शामिल होगी – 35 प्रतिशत
  • स्वच्छता संबंधी मानकों पर सेवा स्तर की प्रगति -35 प्रतिशत

current affairs

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘स्वच्छ भारत मिशन’ का क्रियान्वयन दो अलग-अलग मंत्रालयों द्वारा किया जा रहा है? ये मंत्रालय कौन से हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है?
  2. पहला सर्वेक्षण कब किया गया था?
  3. नवीनतम सर्वेक्षण में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले
  4. स्वच्छ भारत अभियान के बारे में
  5. भारतीय गुणवत्ता परिषद् के बारे में

मेंस लिंक:

‘स्वच्छ भारत मिशन’ पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF)


(National Institute Ranking Framework)

संदर्भ:

हाल ही में, शिक्षा मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क’ (National Institute Ranking Framework – NIRF) द्वारा तैयार की गई ‘इंडिया रैंकिंग’ 2021 जारी की है।

भारत में ‘उच्च शैक्षणिक संस्थानों’ (Higher Educational Institutions – HEI) की इंडिया रैंकिंग का यह लगातार छठा संस्करण है।

current affairs

 

‘इंडिया रैंकिंग’ 2021 के प्रमुख बिंदु:

  1. आईआईटी-मद्रास, आईआईएससी-बैंगलोर और आईआईटी-बॉम्बे देश के शीर्ष तीन उच्च शिक्षा संस्थानों के रूप में उभरे हैं।
  2. सर्वश्रेष्ठ कॉलेज श्रेणी में मिरांडा हाउस इस साल फिर से रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर है।
  3. भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (IISc Bengaluru) ने पहली बार इंडिया रैंकिंग 2021 में शुरू की गई विश्वविद्यालय के साथ-साथ अनुसंधान संस्थान श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया है।

राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क’ (NIRF) क्या है?

यह सरकार द्वारा, देश में ‘उच्च शैक्षणिक संस्थानों’ (HEI) को रैंक प्रदान करने का पहला प्रयास है।

  • इसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा नवंबर 2015 में शुरू किया गया था।
  • इस फ्रेमवर्क का उपयोग विभिन्न श्रेणियों तथा ज्ञान-क्षेत्रों में उच्च शैक्षणिक संस्थानों को रैंकिंग प्रदान करने में किया जाता है।
  • शुरुआती वर्षों के दौरान NIRF में भागीदारी स्वैच्छिक रखी गयी थी, फिर वर्ष 2018 में इसे सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य कर दिया गया।
  • इस वर्ष, ‘राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क’ में लगभग 6,000 संस्थानों ने भाग लिया है, – जोकि वर्ष 2016 में भाग लेने वाले संस्थानों की संख्या से लगभग दोगुना है।

संस्थानों की रैंकिंग हेतु निम्नलिखित मापदंडों का उपयोग किया जाता है:

  1. शिक्षण, अध्ययन एवं संसाधन (Teaching, Learning and Resources)
  2. अनुसंधान एवं व्यावसायिक क्रियाएं (Research and Professional Practices)
  3. स्नातक परिणाम (Graduation Outcomes)
  4. पहुँच एवं समावेशिता (Outreach and Inclusivity)
  5. धारणा (Peer Perception)

‘राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क’ सर्वश्रेष्ठ संस्थानों को 11 श्रेणियों में सूचीबद्ध करता है –

  1. समग्र राष्ट्रीय रैंकिंग,
  2. विश्वविद्यालय,
  3. इंजीनियरिंग,
  4. कॉलेज,
  5. चिकित्सा,
  6. प्रबंधन,
  7. फार्मेसी,
  8. कानून,
  9. वास्तुकला,
  10. दंत चिकित्सा और
  11. अनुसंधान।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क’ (NIRF) का विचार ‘वैश्विक रैंकिंग’ से प्रेरित हैं? केंद्र सरकार और सरकार द्वारा संचालित ‘उच्च शैक्षणिक संस्थान’ (HEI), ‘क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग’ और ‘टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग’ में अपनी स्थिति को लेकर काफी चिंतित थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘राष्ट्रीय संस्थानिक रैंकिंग फ्रेमवर्क’ (NIRF) क्या है?
  2. रैंकिंग के लिए प्रयुक्त मापदंड
  3. विभिन्न श्रेणियों में शीर्ष संस्थान
  4. इस वर्ष तथा पिछले वर्ष की रैंकिंग में विभिन्न संस्थानों का प्रदर्शन।
  5. इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस योजना क्या है?
  6. क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग की शीर्ष 200 सूची में भारतीय संस्थान।

मेंस लिंक:

इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

वस्‍त्र उद्योग के लिए ‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई)’ योजना


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा वस्त्र उद्योग के लिए 10,683 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ ‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना (Production Linked Incentive Scheme – PLI Scheme) को मंजूरी दी गई है।

यह PLI योजना केंद्रीय बजट 2021-22 में 13 क्षेत्रों के लिए पहले घोषित की गई 1.97 लाख करोड़ के कुल बजटीय परिव्यय वाली ‘पीएलआई योजनाओं’ का हिस्सा है।

उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI)’ योजना क्या है?

जैसा कि नाम से पता चलता है, ‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI)’ किसी विशिष्ट क्षेत्र में बढ़े हुए उत्पादन को पुरस्कृत करने का एक तरीका है, और यह आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रभावी होता है।

  • वस्त्रों के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन का उद्देश्य मानव-निर्मित रेशों (Man Made Fiber – MMFs) और तकनीकी वस्त्रों (Technical Textiles) की मूल्य श्रृंखला का विस्तार करना है।
  • इस योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक कपड़ा व्यापार में एक प्रमुख स्थिति हासिल करने में मदद करना है।

नई पीएलआई योजना किन क्षेत्रों को बढ़ावा देगी?

वस्त्र उद्योग के लिए ‘पीएलआई योजना’ का उद्देश्य उच्च मूल्य के मानव निर्मित फाइबर (MMF) वस्त्रों, परिधानों और तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

अहर्ता प्रक्रिया:

  1. कोई भी व्यक्ति (जिसमें फर्म/कंपनी शामिल है), जो निर्धारित खंडों (एमएमएफ फैब्रिक्स, गारमेंट) के उत्‍पादों और तकनीकी वस्‍त्र के उत्पादों के उत्पादन के लिए संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और निर्माण कार्यों (भूमि और प्रशासनिक भवन की लागत को छोड़कर) में न्यूनतम 300 करोड़ रुपये निवेश करने को तैयार है, वह इस योजना के पहले भाग में भागीदारी के लिए आवेदन करने का पात्र होगा।
  2. दूसरे भाग में, कोई भी व्यक्ति (जिसमें फर्म/कंपनी शामिल है), जो न्यूनतम 100 करोड़ रुपये निवेश करने का इच्छुक है, वह योजना के इस भाग में भागीदारी के लिए आवेदन करने का पात्र होगा।

PLI योजना के प्रमुख प्रावधान:

  • PLI योजना के तहत, केंद्र सरकार द्वारा वृद्धिशील उत्पादन पर प्रोत्साहन देकर पात्र निर्माताओं को सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • संयंत्र, मशीनरी, उपकरण और सिविल कार्यों में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाली कंपनियों को अपने टर्नओवर का 15 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। इस टर्नओवर को निवेश करने तीसरे वर्ष में 600 करोड़ रुपये होना चाहिए।
  • 100 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये के बीच निवेश करने वाली कंपनियां भी शुल्क वापसी और प्रोत्साहन (उनके कारोबार के 15 प्रतिशत से कम) प्राप्त करने की पात्र होंगी।
  • इस योजना से सरकार को “19,000 करोड़ रुपए से अधिक का नया निवेश और 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का संचयी कारोबार” प्राप्त करने की उम्मीद है।

लाभ:

पीएलआई योजना, घरेलू विनिर्माण को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगी, और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना के अनुरूप वैश्विक बाजारों में एक बड़ा प्रभाव डालने के लिए वस्त्र उद्योग को तैयार करेगी। यह योजना इस क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित करने में भी मदद करेगी

योजना का महत्व:

वस्त्रों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का दो-तिहाई, मानव निर्मित और तकनीकी वस्त्रों का है। भारत को मानव निर्मित फाइबर (MMF) से बने वस्त्रों और वस्त्र उद्योग के पारिस्थितिकी तंत्र में भी योगदान करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से इस योजना को मंजूरी दी गई है।

current affairs

 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

पुर्तगाली गणराज्य में काम करने हेतु भारतीय नागरिकों की भर्ती


(Recruitment of Indian citizens to work in the Portuguese Republic)

संदर्भ:

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और पुर्तगाल के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दे दी है।

मौजूदा समझौते से भारत और पुर्तगाल के बीच साझेदारी और सहयोग की एक संस्थागत प्रणाली तैयार होगी, जिसके तहत भारतीय कामगारों को पुर्तगाल भेजा जायेगा और उन्हें वहां काम पर रखा जायेगा।

कार्यान्वयन रणनीतिः

समझौते के तहत एक संयुक्त समिति का गठन किया जायेगा, जो क्रियान्वयन की देख-रेख करेगी।

प्रभावः

  • पुर्तगाल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने से यूरोपियन संघ के एक सदस्य देश में भारतीय प्रवासी कामगारों के लिए एक नया ठिकाना बन जायेगा, खासतौर से उन भारतीय कामगारों के लिये, जिन्हें कोविड-19 महामारी के कारण भारत लौटना पड़ा है।
  • इस समझौते से कुशल भारतीय कामगारों और पेशेवर लोगों को नये अवसर मिलेंगे।
  • समझौता हो जाने से पुर्तगाल और भारत के बीच भारतीय कामगारों की भर्ती की औपचारिक व्यवस्था तैयार हो जायेगी।

लाभः

  • पुर्तगाल में भारतीय कामगारों के रोजगार अवसरों में बढ़ोतरी होगी।
  • समझौते में दोनों देशों की सरकारों के बीच एक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव शामिल है, जिसके तहत कामगारों का आसान आवागमन सुनिश्चित हो जायेगा तथा दोनों देश इस गतिविधि को पूरा समर्थन देंगे।

भारत-पुर्तगाल संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

पुर्तगाल के साथ भारत के घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।

  • 1947 में भारत की आजादी के बाद और 1949 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद, दोनों देशों में सौहार्दपूर्ण ढंग से संबंधों की शुरुआत हुई।
  • हालांकि, भारत के पश्चिमी तट पर गोवा, दमन दीव और दादरा और नगर हवेली में अपने परिक्षेत्रों को भारत के लिए सौंपने से, पुर्तगाल के इंकार की वजह से 1950 के बाद द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट आई।
  • 1955 तक, दोनों देशों ने परस्पर राजनयिक संबंध समाप्त कर लिए थे, जिसके बाद 1961 में भारतीय सैन्य बलों ने ‘ऑपरेशन विजय’ के माध्यम से गोवा को पुर्तगाल के अधिकार से मुक्त कराया और भारत में पुर्तगाली शासन के 450 वर्षों से अधिक का अंत हो गया।
  • 1974 में, भारत और पुर्तगाल ने गोवा, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली और संबंधित मामलों पर भारत की संप्रभुता को मान्यता देते हुए एक संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • 31 दिसंबर, 1974 को नई दिल्ली में इस संधि पर हस्ताक्षर के साथ, दोनों देशों के मध्य राजनयिक संबंध फिर से स्थापित हो गए और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का युग शुरू हुआ।

1974 के बाद संबंध:

पुर्तगाल और भारत, बहुपक्षीय मंचों पर एक दूसरे की दावेदारी का समर्थन, और सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं।

  • पुर्तगाल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करता है।
  • अक्टूबर 2005 में, पुर्तगाल ने भारत में आतंकी आरोपों का सामना कर रहे अबू सलेम और मोनिका बेदी को भारत प्रत्यर्पित किया।
  • 9 अक्टूबर 2015 को, पुर्तगाल भारत में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाला पहला यूरोपीय और पश्चिमी देश बना, और यह ‘पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन’ के सदस्यों के अलावा, इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला चौथा देश था।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप पुर्तगाली आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़ने वाले मराक्करों (Marakkars) के बारे में जानते हैं?

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

13वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन


संदर्भ:

13वां ‘ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन’ (BRICS Summit) वर्ष 2021 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रहा है।

  • भारत, तीसरी बार ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन’ की अध्यक्षता कर रहा है, इससे पहले भारत ने वर्ष 2012 और वर्ष 2016 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।
  • इस वर्ष, भारत उस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जब ब्रिक्स का 15वां स्थापना वर्ष मनाया जा रहा है।

शिखर सम्मेलन की विषयवस्तु: ब्रिक्स@15: ब्रिक्स देशों के मध्य निरंतरता, एकजुटता और सहमति के लिये सहयोग (BRICS@15: Intra-BRICS cooperation for continuity, consolidation and consensus) है।

भारत की अध्यक्षता में प्राथमिकता वाले क्षेत्र:

अपनी अध्यक्षता में भारत ने चार प्राथमिक क्षेत्रों का खाका तैयार किया है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल है:

  1. बहस्तरीय प्रणाली,
  2. आंतक विरोध,
  3. सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये डिजिटल और प्रौद्योगिकीय उपायों को अपनाना, तथा
  4. लोगों के बीच मेल-मिलाप बढ़ाना है।

इन क्षेत्रों के अलावा, उपस्थित राजाध्यक्ष कोविड-19 महामारी के दुष्प्रभाव तथा मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

पृष्ठभूमि:

यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जिसमे इस समूह के दो सदस्य, भारत और चीन, पिछले दिनों  छह महीने से अधिक समय तक पूर्वी लद्दाख में एक कड़वे सीमा गतिरोध में उलझे रहे थे।

  • ‘ब्रिक्स’ एक प्रभावशाली ब्लॉक के रूप में जाना जाता है, और यह 3.6 अरब से अधिक लोगों या दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
  • ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी 6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, और इसे ध्यान में रखते हुए, इस तरह के शिखर सम्मेलन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं।

ब्रिक्स (BRICS) के बारे में:

ब्रिक्स, पांच प्रमुख उभरते देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (BRICS)- का एक समूह है।

  • यह समूह, कुल मिलाकर विश्व की लगभग 42 प्रतिशत जनसंख्या, 23 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद, 30 प्रतिशत क्षेत्रफल और 18 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।
  • ब्रिक (BRIC) शब्द, संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा 21 वीं सदी में सबसे बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को व्यक्त करने के लिए, वर्ष 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री ‘जिम ओ’नील’ द्वारा गढ़ा गया था।
  • वर्ष 2006 में, BRIC देशों द्वारा वार्ता आरंभ की गयी, जिसके तहत वार्षिक बैठकों में वर्ष 2009 तक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख भाग लेते थे।
  • वर्ष 2011 में, अफ्रीकी महाद्वीप से दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के साथ ही, ब्रिक्स (BRICS) अपने वर्तमान स्वरूप में स्थापित हो गया।

 

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने PARIS21 समूह के बारे में सुना है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ब्रिक्स के बारे में
  2. शिखर सम्मेलन
  3. अध्यक्षता
  4. ब्रिक्स से जुड़े संगठन और समूह

मेंस लिंक:

भारत के लिए ब्रिक्स के महत्व और प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


क्यूकर्टाक अवन्नारलेक

(Qeqertaq Avannarleq)

  • यह एक छोटा और निर्जन द्वीप है, जो अभी तक अज्ञात थाम और इसे हाल ही में ‘ग्रीनलैंड’ के तट के निकट खोजा गया है।
  • 60×30 मीटर क्षेत्रफल और समुद्र तल से तीन मीटर ऊंचाई वाला यह द्वीप, अब पृथ्वी पर स्थलीय क्षेत्र का सबसे उत्तर में स्थित भू-भाग बन गया है।
  • इससे पहले, ऊदाक़ (Oodaaq) नामक स्थान को पृथ्वी के सबसे उत्तरी इलाके के रूप में चिह्नित किया गया था।

यह खोज, आर्कटिक देशों, अमेरिका, रूस, कनाडा, डेनमार्क और नॉर्वे के बीच उत्तरी ध्रुव और आसपास के समुद्री क्षेत्र, मछली पकड़ने के अधिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघलने से खुलने वाले शिपिंग मार्गों पर नियंत्रण के लिए संभावित संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई है।

 

प्रधान मंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान

डिजिटल गांवों में 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता के लिए ‘प्रधान मंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान’ (Pradhan Mantri Gramin Digital Saksharata Abhiyan – PMGDISHA) अभियान शुरू किया गया है।

  • पीएमजी दिशा अभियान भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख डिजिटल साक्षरता योजना है, जिसे ‘पीएमजी दिशा योजना’ के अंतर्गत शुरू किया गया है।
  • इस अभियान के अंतर्गत सितंबर 2021 में कुछ दिनों के लिए ग्रामीण नागरिकों विशेषकर महिलाओं और वंचित समुदायों के लिए तीन दिवसीय प्रमाणन अभियान चलाया जाएगा।

 

भारत का पहला ‘डुगोंग संरक्षण रिजर्व’

भारत का पहला ‘डुगोंग संरक्षण रिजर्व’ (Dugong conservation reserve) तमिलनाडु में स्थापित किया जाएगा।

  • यह रिजर्व तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर ‘पाक खाड़ी’ में 500 किमी के क्षेत्र में विस्तृत होगा।
  • डुगोंग (Dugong) एक समुद्री जानवर है जिसे विश्व संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा वैश्विक स्तर पर ‘विलुप्त होने की संभावना’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • यह ‘अंडमान और निकोबार द्वीप समूह’ का राज्य पशु है। यह लुप्तप्राय समुद्री प्रजाति, समुद्री घास और क्षेत्र में पाई जाने वाली अन्य जलीय वनस्पतियों पर जीवित रहती है।
  • यह एकमात्र शाकाहारी समुद्री स्तनपायी जीव है और ‘डुगोंगिडे’ (Dugongidae) परिवार की एकमात्र मौजूदा प्रजाति है।

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