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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 8 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. ‘अल नीनो-दक्षिणी दोलन’ पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

 

सामान्य अध्ययन-II

1. तमिलनाडु में ‘बैठने का अधिकार’ क़ानून

2. अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘अकाउंट एग्रीगेटर’

2. संकटग्रस्त प्रजातियों की IUCN लाल सूची

 

प्रारम्भिक परीक्षा के लिए तथ्य

1. जीएसटी न्यायाधिकरण

2. चंडीगढ़ के लिए पहला परागकण कैलेंडर

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ।

‘अल नीनो-दक्षिणी दोलन’ पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव


(Impact of climate change on El Niño-Southern Oscillation)

संदर्भ:

अनुसंधान क्षेत्र में उभरती हुई एक संस्था के अनुसार, ‘जलवायु परिवर्तन’ के कारण ‘अल-नीनो’ (El Niño) और ‘ला–नीना’ (La Niña) जैसी मौसमी परिघटनाओं की तीव्रता और बारंबारता में तेजी आ सकती है।

हाल ही में, दक्षिण कोरिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटरों में से एक, ‘एलेफ’ (Aleph) सुपर कंप्यूटर का उपयोग करते हुए इस विषय पर एक अध्ययन किया गया था।

नवीनतम अध्ययन के निष्कर्ष:

  1. वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि, भविष्य में अनुरूपित ‘अल-नीनो दक्षिणी दोलन’ (El Niño Southern Oscillation- ENSO) समुद्र सतहीय तापमान परिवर्तनशीलता में दुर्बलता का कारण बन सकती है।
  2. जल-वाष्प के वाष्पीकृत होने की वजह से, भविष्य में होने वाली ‘अल नीनो’ परिघटनाओं के दौरान ऊष्मा का वायुमंडल में तेजी से विसरण हो जाएगा।
  3. भविष्य में पूर्वी और पश्चिमी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य तापांतर में कमी होगी, जिसके परिणामस्वरूप ‘अल-नीनो दक्षिणी दोलन’ (ENSO) चक्र के दौरान ‘तापमान चरमसीमा’ के विकास में बाधा उत्पन्न होगी।
  4. साथ ही, अनुमानित भविष्य में ‘उष्णकटिबंधीय अस्थिरता तरंगे’ (Tropical Instability Waves) भी दुर्बल हो सकती है, जोकि ‘ला नीना’ परिघटना को भंग करने का कारण बन सकता है।

 

‘अल नीनो’ और ‘ला नीना’ क्या हैं?

‘अल नीनो’ (El Niño) और ला नीना ‘(La Niña)’, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में होने वाली दो प्राकृतिक जलवायु परिघटनाएं हैं, और ये संपूर्ण विश्व में मौसमी स्थितियों को प्रभावित करती हैं।

  • ‘अल नीनो’ परिघटना के दौरान, ‘मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर’ में सतहीय तापमान में वृद्धि हो जाती है, और ‘ला नीना’ की स्थिति में, पूर्वी प्रशांत महासागर का सतहीय तापमान सामान्य से कम हो जाता है।
  • संयुक्त रूप से इन दोनों परिघटनाओं को ‘ENSO’ या ‘अल-नीनो दक्षिणी दोलन’ (El Niño Southern Oscillation) कहा जाता है।

 

 

अल नीनोपरिघटना की उत्पत्ति संबंधी कारण:

अल नीनो की स्थिति, जलवायु प्रतिरूप (Climate Pattern) में कोई विसंगति होने पर निर्मित होती है।

  • पश्चिम की ओर बहने वाली व्यापारिक हवाएं भूमध्य रेखा के समीप आने पर क्षीण हो जाती हैं और परिणामस्वरूप वायुदाब में परिवर्तन के कारण, सतही जल पूर्व दिशा में उत्तरी दक्षिण अमेरिका के तट की ओर बहने लगता है।
  • मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागरीय क्षेत्रों में छह महीने से अधिक समय तक तापमान अधिक रहता हैऔर इसके परिणामस्वरूप ‘अल नीनो’ की स्थिति पैदा हो जाती है।

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ (National Supercomputing Mission– NSM) के अंतर्गत निर्मित सुपरकंप्यूटर ‘परम शिवाय’ के बारे में जानते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अल-नीनो क्या है?
  2. ला-नीना क्या है?
  3. ENSO क्या है?
  4. ये परिघटनाएँ कब होती हैं?
  5. एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया पर ENSO का प्रभाव।

मेंस लिंक:

ला-नीना मौसमी परिघटना के भारत पर प्रभाव संबंधी चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

तमिलनाडु में ‘बैठने का अधिकार’ क़ानून


संदर्भ:

हाल ही में, तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में एक विधेयक पेश किया है, जिसमें सभी प्रतिष्ठानों के लिए कर्मचारियों को ‘बैठने की सुविधा देना’ अनिवार्य कर दिया गया है। इसे आम भाषा में “बैठने का अधिकार” (Right to Sit) कहा जा रहा है।

बैठने का अधिकार’:

  • इस विधेयक का उद्देश्य, सभी बड़े और छोटे प्रतिष्ठानों, विशेषकर कपड़ा और आभूषणों के शोरूम में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को लाभ पहुंचाना है।
  • विधेयक में, प्रतिष्ठानों के प्रत्येक परिसर में सभी कर्मचारियों के बैठने की उचित व्यवस्था करने का प्रावधान किया गया है, ताकि कर्मचारियों को अपने काम के दौरान अवसर मिलने पर बैठने की सुविधा मिल सके।
  • इस विधेयक के माध्यम से, ‘तमिलनाडु दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम’ 1947 (Tamil Nadu Shops and Establishments Act, 1947) में एक उपबंध जोडकर संशोधन किया जाएगा।

आवश्यकता:

  • राज्य में दुकानों और प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी के दौरान खड़े रहने के लिए विवश किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप इनके लिए विभिन्न स्वास्थ्य संबधी समस्याएं होने लगती हैं।
  • अधिकांश दुकानों और अन्य खुदरा दुकानों के मालिकों द्वारा महिलाओं को बैठने से मना किया जाता है, जबकि दुकान के कर्मचारियों में महिलाएं काफी संख्या में होती हैं। यहां तक ​​कि, कर्मचारियों को दीवार के सहारे खड़े होने पर भी सजा दी जाती है।
  • कर्मचारियों को लगातार खड़े रहने की वजह से ‘नसों में सूजन’ और जोड़ों में दर्द की समस्या होने लगती है।

‘बैठने का अधिकार’, कर्मचारियों को पूरे कार्य-समय में ‘पैर की उंगलियों’ पर खड़े रहने की स्थिति से सुरक्षा प्रदान करेगा।

केरल राज्य से प्रेरित क़ानून:

कुछ साल पहले, केरल में कपड़ा शोरूम के कर्मचारियों ने ‘बैठने के अधिकार’ की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद वहां की सरकार ने वर्ष 2018 में ‘केरल दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम’ में संशोधन किया और कर्मचारियों के लिए बैठने की व्यवस्था प्रदान की।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘बैठने के अधिकार’ के बारे में।
  2. किन राज्यों में यह ‘अधिकार’ लागू है?
  3. यह ‘वैधानिक अधिकार’ है या संवैधानिक अधिकार?

 

मेंस लिंक:

‘बैठने के अधिकार’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD)


(International Fund for Agricultural Development)

संदर्भ:

श्रीलंका में कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए, द्वीपीय सरकार और ‘अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष’ (International Fund for Agricultural Development – IFAD) एक साथ कार्य कर रहे हैं।

श्रीलंका सरकार और IFAD के मध्य, निर्धनता, खाद्य-असुरक्षा और लैंगिक असमानता से निपटने हेतु ‘लघुधारक कृषि व्यवसाय और तन्यकता परियोजना’ अर्थात ‘स्मालहोल्डर एग्री बिज़नेस एंड रिज़िलीअन्स प्रोजेक्ट’ (SARP) पर कार्य करने हेतु साझेदारी की जा रही है।

खाद्य असुरक्षा से निपटने में SARP की भूमिका:

खाद्य असुरक्षा एक प्रकार से निर्धनता के साथ ही उत्पन्न होती है। जो किसान अपनी भूमि या फसलों का प्रबंधन नहीं कर सकते, वे पर्याप्त भोजन की आपूर्ति नहीं कर सकते। इसे ध्यान में रखते हुए, SARP द्वारा निर्धनता-उन्मूलन के लिए किए जाने वाले कई प्रयास, अंततः खाद्य उत्पादन स्तर में सुधार करने में सहायक होंगे।

अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के बारे में:

  1. यह वर्ष 1977 में गठित, संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है। यह विकासशील देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में काम कर रही है तथा संबद्ध परियोजनाओं के लिये कम ब्याज के साथ अनुदान और ऋण प्रदान करने का कार्य करती है।
  2. आईएफएडी, ग्रामीण आबादी के साथ कार्य करता है, और उन्हें अपनी खाद्य सुरक्षा में वृद्धि करने, पोषण-स्तर में सुधार करने और आय बढ़ाने में सक्षम बनाता है।
  3. यह लोगों को उनके कारोबार का विस्तार करने में भी मदद करता है।
  4. यह संगठन, वर्ष 1974 में आयोजित ‘विश्व खाद्य सम्मेलन’ (World Food Conference) का परिणाम है।
  5. इसका मुख्यालय रोम में है।
  6. इसमें 177 देश सदस्य के रूप में शामिल हैं।
  7. अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष’ द्वारा प्रतिवर्ष ‘ग्रामीण विकास रिपोर्ट’ जारी की जाती है।

IFAD के उद्देश्य:

  1. गरीब लोगों की उत्पादक क्षमता में वृद्धि करना।
  2. बाज़ार की भागीदारी के माध्यम से उनके लाभ में वृद्धि करना।
  3. उनकी आर्थिक गतिविधियों की पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु अनुकूलता को मज़बूती प्रदान करना।

इंस्टा जिज्ञासु:

अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और ‘संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन’ (FAO) की भूमिकाओं और कार्यों में क्या भिन्नताएं हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IFAD के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. रिपोर्ट

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) की भूमिकाओं और कार्यों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

‘अकाउंट एग्रीगेटर’


संदर्भ:

एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक सहित भारत के आठ सबसे बड़े बैंकों में ‘अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम’ (Account Aggregator System) की शुरुआत की गयी है।

पूरी तरह से कार्यात्मक होने पर, इस प्रणाली से ऋण और धन प्रबंधन काफी तीव्र और सस्ता हो सकता है।

‘अकाउंट एग्रीगेटर’ क्या होते हैं?

  • अकाउंट एग्रीगेटर (Account Aggregator – AA), किसी अनुबंध के तहत, अपने ग्राहक से संबंधित वित्तीय जानकारी हासिल करने या एकत्र करने की सेवा प्रदान करने के व्यवसाय में लगी ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी’ (Non-Banking Financial Company – NBFC) होती है।
  • यह, इस प्रकार की जानकारी को समेकित और व्यवस्थित करने तथा बैंक द्वारा निर्दिष्ट किसी ग्राहक या किसी अन्य ‘वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता’ को यह जानकारी उपलब्ध कराने का कार्य भी करते है।

current affairs

 

अकाउंट एग्रीगेटर (AA) की कार्य-पद्धति:

  • ‘अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम’, एक त्रि-स्तरीय संरचना होती है: अकाउंट एग्रीगेटर, वित्तीय जानकारी प्रदाता (Financial Information Provider – FIP) और वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता (Financial Information User – FIU)।
  • वित्तीय जानकारी प्रदाता (FIP), ग्राहकों का विवरण संभाल कर रखने के किए उत्तरदायी होता है, और यह कार्य किसी बैंक, एनबीएफसी, म्यूचुअल फंड, बीमा संग्राहक या पेंशन फंड संग्राहक द्वारा किया जाता है।
  • वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता (FIU), उपभोक्ता को विभिन्न सेवाएं प्रदान करने हेतु ‘वित्तीय जानकारी प्रदाता’ से डेटा प्राप्त करता है। वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता, आमतौर पर ऋण प्रदाता बैंक होते हैं, जो किसी ऋणकर्ता को ऋण प्रदान करने से पहले उसका विवरण जानने के लिए ‘अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली’ का उपयोग करते है, और यह निर्धारित करते हैं कि, उसे ऋण दिया जा सकता है अथवा नहीं।

इस प्रणाली में बैंक, वित्तीय जानकारी प्रदाता (FIP) और वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता (FIU) के रूप में दोहरी भूमिका निभाते हैं।

लाभ:

  • यह नई प्रणाली बैंकों, कर अधिकारियों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय फर्मों को अपने संभावित ग्राहकों के बारे में बेहतर समझ प्राप्त करने, सूचित निर्णय लेने और आसान लेनदेन सुनिश्चित करने हेतु, ग्राहकों – जिन्होंने अपनी सहमति प्रदान की है- के डेटा को एकत्रित करना संभव बनाती है।
  • यह प्रणाली, ग्राहकों को अपने वित्तीय डेटा को आसानी से एक्सेस करने और साझा करने में भी सक्षम बनाएगी। इसके तहत, ग्राहकों को सहमति पद्धति के आधार पर, एक ही पोर्टल पर कई सेवा प्रदाताओं द्वारा से विभिन्न वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाया जा सकता है।
  • यह सिस्टम, व्यक्तियों को लंबी बैंक कतारों में प्रतीक्षा करने, इंटरनेट बैंकिंग पोर्टलों का उपयोग करने, अपने पासवर्ड साझा करने, या अपने वित्तीय दस्तावेजों तक पहुंचने और साझा करने के लिए भौतिक मौजूदगी की आवश्यकता को कम करता है।
  • अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम, बैंकों को लेन-देन की लागत कम करने में सहायता करेगा, जिससे बैंक अपने ग्राहकों को कम आकार के ऋण और अधिक अनुरूप उत्पादों और सेवाओं की पेशकश करने में सक्षम होंगे।

अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क:

अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क (AA framework) का निर्माण, ‘वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद’ (FSDC) की एक पहल के माध्यम से आरबीआई और ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’, ‘बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण’, और ‘पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण’ (PFRDA) सहित अन्य नियामकों द्वारा एक ‘अंतर-नियामक निर्णय’ के माध्यम से किया गया था।

‘अकाउंट एग्रीगेटर’ के लिए लाइसेंस, आरबीआई द्वारा जारी किया जाता है, और वित्तीय क्षेत्र में कई ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ तैयार किए जाएंगे।

Is it necessary that every NBFC should be registered with RBI? Reference: https://m.rbi.org.in//Scripts/FAQView.aspx?Id=92.

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या प्रत्येक ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी’ ( NBFC) को RBI के साथ पंजीकृत होना आवश्यक होता है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पेमेंट एग्रीगेटर’ बनाम ‘पेमेंट गेटवे’- कार्य
  2. NBFC की पूंजी आवश्यकताएं
  3. NBFC बनाम SFBs

मेंस लिंक:

‘भुगतान एग्रीगेटर’ कौन होते हैं? इन संस्थाओं के नियमन की आवश्यकता क्यों है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

संकटग्रस्त प्रजाति की आईयूसीएन रेड लिस्ट


संदर्भ:

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature – IUCN) द्वारा, हाल ही में, संकटग्रस्त प्रजातियों की अपनी नवीनतम रेड लिस्ट (Red List of Threatened Species) जारी की गई है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • विश्व में लगभग 902 प्रजातियां आधिकारिक तौर पर विलुप्त हो चुकी हैं।
  • IUCN द्वारा कुल 138,374 प्रजातियों का आकलन किया गया था, जिसमे से 30 प्रतिशत प्रजातियां (38,543) विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं।
  • वन्य क्षेत्रों में लगभग 80 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं, 8,404 प्रजातियां गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered) हैं, 14,647 प्रजातियां लुप्तप्राय (Endangered) हैं, 15,492 प्रजातियां असुरक्षित (Vulnerable) हैं और 8,127 प्रजातियां खतरे के निकट (Near Threatened) हैं।
  • लगभग 71,148 प्रजातियां, संकटमुक्त (Least Concern) हैं, जबकि 19,404 प्रजातियों के बारे पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

रिपोर्ट में उल्लिखित महत्वपूर्ण प्रजातियां:

  1. अटलांटिक ब्लूफिन टूना (Atlantic bluefin tuna), वैज्ञानिक नाम: थुन्नस थाइनस (Thunnus thynnus), ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी से ‘संकटमुक्त’ (Least Concern) श्रेणी में पहुँच गयी है, जबकि दक्षिणी ब्लूफिन टूना (Southern bluefin tuna), वैज्ञानिक नाम: थुन्नस मैककोयि (Thunnus maccoyii) पहले ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ श्रेणी में सूचीबद्ध थी, जोकि अब ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) श्रेणी में शामिल की गयी है।
  2. दुनिया की सबसे बड़ी जीवित छिपकली, कोमोडो ड्रैगन (Komodo dragon), वैज्ञानिक नाम: वरनस कोमोडोएन्सिस (Varanus komodoensis), को ‘असुरक्षित’ (Vulnerable) श्रेणी से लुप्तप्राय श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह प्रजाति इंडोनेशिया के लिए स्थानिक है और केवल विश्व विरासत-सूचीबद्ध कोमोडो नेशनल पार्क और निकटवर्ती स्थानों में पायी जाती है।

संकटग्रस्त प्रजातियों की IUCN रेड लिस्ट क्या है?

  1. अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की ‘रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटड स्पीसीज’ की स्थापना 1964 में की गई थी।
  2. यह दुनिया की जैविक प्रजातियों के संरक्षण की स्थिति का सबसे बड़ा सूचना स्रोत है, जिसमें पशु, कवक और पौधों की प्रजातियों की दुनिया भर से विलुप्त होने की स्थिति की जानकारी शामिल होती है।

प्रजातियों को किस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) हजारों प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम का आकलन करने के लिए मात्रात्मक मानदंडों के एक सेट का उपयोग करता है।

current affairs

IUCN लाल सूची श्रेणियाँ:

  • IUCN रेड लिस्ट श्रेणियां, आंकलित प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम को परिभाषित करती हैं। रेड लिस्ट में गैर-आंकलित (Not Evaluated – NE) से लेकर विलुप्त (Extinct) श्रेणी तक नौ श्रेणियां शामिल हैं।
  • गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered), लुप्तप्राय (Endangered) और असुरक्षित (Vulnerable) प्रजातियों के लिए विलुप्त होने का खतरा माना जाता है।

current affairs

लाल सूची (रेड लिस्ट) की उपयोगिता:

  • आईयूसीएन रेड लिस्ट, विश्व की जैव विविधता के स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी रखती है। यह जैव विविधता संरक्षण और नीति परिवर्तन हेतु कार्रवाई करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है। यह प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें हमें बचाना अति आवश्यक है।
  • यह सीमा, जनसंख्या आकार, आवास और पारिस्थितिकी, उपयोग या व्यापार, खतरे और संरक्षण कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान करती है जो आवश्यक संरक्षण निर्णयों के बारे में जरूरी सूचना देने में मदद करती है।
  • यह समय के साथ प्रजातियों के संरक्षण की स्थिति को मापने के लिए विश्व स्तर पर स्वीकृत मानक प्रदान करती है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


जीएसटी न्यायाधिकरण

(GST Appellate Tribunal)

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है, कि सरकार के पास ‘वस्तु एवं सेवा कर’ (Goods and Services TaxGST) अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

‘जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण’ के बारे में:

  • जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT), प्रथम अपीलीय प्राधिकरण द्वारा पारित किसी भी असंतोषजनक आदेश के खिलाफ जीएसटी के तहत दूसरा अपीलीय मंच है।
  • राष्ट्रीय अपीलीय न्यायाधिकरण, केंद्र और राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए भी पहला सामूहिक मंच है।
  • इसको न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त होते हैं, और किसी मामले की सुनवाई के लिए दीवानी अदालत के समान शक्तियां प्राप्त होती हैं।
  • जीएसटी अधिनियम की धारा 109 के तहत, ‘ट्रिब्यूनल’ के गठन को अनिवार्य किया गया है।

GSTAT की संरचना:

  1. राष्ट्रीय पीठ (National Bench): राष्ट्रीय अपीलीय न्यायाधिकरण, की राष्ट्रीय पीठ नई दिल्ली में स्थित है, इसमें 2 तकनीकी सदस्यों (केंद्र और राज्य से एक) सहित एक राष्ट्रीय अध्यक्ष (प्रमुख) होता है।
  2. क्षेत्रीय न्यायपीठ (Regional Benches): जीएसटी परिषद की सिफारिशों पर सरकार आवश्यकतानुसार क्षेत्रीय न्यायपीठों का गठन (अधिसूचना द्वारा) कर सकती है। अब तक, भारत में 3 क्षेत्रीय पीठें (मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद) में स्थापित की गयी हैं।
  3. राज्य पीठ और एरिया बेंच।

current affairs

 

चंडीगढ़ के लिए पहला परागकण कैलेंडर

चंडीगढ़ शहर के लिए पहला परागकण कैलेंडर (Pollen Calendar) विकसित किया गया है।

  • परागकण कैलेंडर, किसी खास भौगोलिक क्षेत्र में पराग कणों के कारण एलर्जी के मामलों को चित्रात्मक आंकड़ों के जरिए प्रदर्शित करता है।
  • यह कैलेंडर ‘स्थान-विशिष्ट’ होता है, और क्षेत्र में पाई जाने वाली वनस्पतियों के संकेंद्र्ण से संबंधित होता है।
  • वे एक ही चित्र में किसी विशिष्ट मौसम में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए, पूरे वर्ष के दौरान मौजूद विभिन्न वायुजनित पराग कणों के बारे में सुलभ दृश्य विवरण उपलब्ध कराते हैं।

महत्व:

  • परागकणों को इंसानों में एलर्जिक राइनाइटिस, अस्थमा और एटॉपिक डर्मेटाइटिस (एलर्जी के कारण खुजली से संबंधित समस्या) के लिए जिम्मेदार महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।
  • यह कैलेंडर संभावित एलर्जी के कारकों की पहचान करने और चिकित्सकों के साथ-साथ एलर्जी से पीड़ित लोगों को उनके कारणों के बारे में स्पष्ट समझ प्रदान करेगा।

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