Print Friendly, PDF & Email

[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021

2. आयुष रोगनिरोधी दवाएं

3. श्रीलंका में ‘खाद्य आपातकाल’

4. पूर्वी आर्थिक मंच 2021

 

सामान्य अध्ययन-III

1. इंस्पिरेशन 4: स्पेसएक्स का सभी सिविलियन यात्रियों सहित पहला अंतरिक्ष अभियान

2. कार्बी समझौता

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. राष्ट्रीय किसान डेटाबेस

2. मांडा भैंस

3. ग्रीस में जलवायु संकट से निपटने हेतु एक मंत्रालय का गठन

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021


(Assam Cattle Preservation Act, 2021)

संदर्भ:

हाल ही में, असम में विभिन्न दबाव समूहों द्वारा राज्य सरकार द्वारा पारित ‘असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021 (Assam Cattle Preservation Act, 2021) के खिलाफ एक रैली आयोजित की गयी। इन प्रदर्शनकारियों का कहना है, कि यह कानून धर्म के नाम पर राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर हमला है।

जबकि सरकार द्वारा अधिनियम का उद्देश्य, मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित करना बताया गया है।

अधिनियम के प्रमुख बिंदु:

  1. इस क़ानून के तहत, गाय, बछड़ा और बछिया का वध वर्जित किया गया है।
  2. असम राज्य से अथवा राज्य से होकर मवेशियों का परिवहन प्रतिबंधित किया गया है।
  3. मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और अन्य गैर-बीफ खाने वाले समुदायों के निवास वाले क्षेत्रों में बीफ (गौमांस) या बीफ उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित की गयी है।
  4. किसी भी मंदिर, सत्र (Satra) या अन्य हिंदू धार्मिक संस्थानों के 5 किमी के दायरे में बीफ या बीफ उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित होगी।

current affairs

 

असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2021 का उल्लंघन करने पर सजा:

अधिनियम के तहत, नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए, न्यूनतम तीन साल से आठ साल तक का कारावास या 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के बीच जुर्माना, या कारावास और जुर्माना दोनों की सजा हो सकती है। अगर कोई दोषी व्यक्ति, उसी प्रकार का समान या संबंधित अपराध करने का दूसरी बार दोषी पाया जाता है, तो सजा दोगुनी हो जाएगी।

इस कानून की आवश्यकता:

  • राज्य में, पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध मवेशियों की तस्करी में वृद्धि हुई है।
  • केंद्र सरकार के अनुसार, सीमा सुरक्षा बलों द्वारा वर्ष 2016 और 2020 के बीच भारत-बांग्लादेश सीमा पर 476,035 मवेशियों के सिर जब्त किए गए है।

कानून से संबंधित विवादास्पद प्रावधान/आलोचनाएं:

  1. यह कानून किसी भी प्रावधान पर ध्यान दिए बिना, गोहत्या को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है।
  2. इसके तहत, किसी भी मंदिर से 5 किमी के दायरे में बीफ और बीफ उत्पादों की बिक्री पर रोक लगायी गयी है। यह प्रतिबंध, 5 किमी के दायरे में रहने वाले निवासियों पर ‘बीफ’ का उपभोग करने पर पूर्ण प्रतिबंध जैसा प्रतीत होता है।
  3. कानून में यह निर्दिष्ट किया गया है, कि इस संबंध में निरीक्षण करने, तलाशी और हिरासत में लेने का अधिकार किसे होगा, और यह शक्ति, पशु चिकित्सा अधिकारी, पुलिस अधिकारी (उप निरीक्षक या ऊपर के पद पर तैनात अधिकारी), और राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी व्यक्ति को प्रदान की गई है। इस शक्ति का राजनीतिक या सांप्रदायिक दुरुपयोग भी हो सकता है।
  4. कानून में उल्लंघन करने पर दी जाने सजा और जुर्माना काफी कठोर है। भारतीय दंड संहिता, 1860 में इस प्रकार की सजा बहुत गंभीर अपराधी को दी जाती है।

पृष्ठभूमि:

असम बांग्लादेश के साथ 263 किमी की सीमा साझा करता है, जिसमें से 143.9 किमी सीमा स्थलीय  और 119.1 किमी नदीय सीमा है।

आगे की चुनौतियां:

  1. असम में, भारत-बांग्लादेश सीमा पर आवाजाही के कई निकास बिंदु हैं, जिनके माध्यम से अवैध पशु तस्करी की सुविधा मिलती रहती है।
  2. पशुओं की अवैध तस्करी, बांग्लादेश की सीमा से लगे पश्चिम बंगाल और मेघालय राज्यों से भी होती है।
  3. कुछ साल पहले, ‘सीमा सुरक्षा बल’ (बीएसएफ) ने सीमा पर 65 मवेशी गलियारों की पहचान की थी और सरकार के लिए ‘पशु तस्करी’ को रोकने के लिए कुछ उपायों का सुझाव दिया था।
  4. असम में स्थानीय पुलिस अधिकारी अक्सर दावा करते हैं, कि कानून उन्हें किसी को मवेशियों को दूसरे राज्य में ले जाने से रोकने की अनुमति नहीं देता है। यदि मवेशियों का परिवहन करने वालों को रोका जाता है, तो तस्कर लोग इन्हें अपने निजी मवेशी बता देते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

गोहत्या का निषेध भी संविधान के अनुच्छेद 48 में निहित राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों में से एक है। गांधीवादी विचारों से प्रेरित ‘राज्य के नीति निदेशक तत्वों’ को जानिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘असम मवेशी संरक्षण अधिनियम’ के बारे में
  2. प्रमुख प्रावधान
  3. प्रयोज्यता

मेंस लिंक:

‘असम मवेशी संरक्षण अधिनियम’ से संबंधित चिंताओं और मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

 आयुष रोगनिरोधी दवाएं


(Ayush prophylactic medicines)

संदर्भ:

केन्द्रीय आयुष मंत्रालय ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत चल रहे आयुष सप्ताह में अपनी विभिन्न गतिविधियों की श्रृंखला के क्रम में रोग से सुरक्षा देने वाली ‘आयुष रोग प्रतिरोधक दवाओं’ (Ayush prophylactic medicines) के वितरण का अभियान शुरू किया है।

  • कोरोना महामारी की रोकथाम करने वाली आयुष दवाओं की किट में ‘संशामणि वटी’ जिसे गुडुची या ‘गिलोय घन वटी’ भी कहा जाता है तथा ‘अश्वगंधा घन वटी’ शामिल है।
  • रोगनिरोधक आयुर्वेदिक दवाओं की इस किट तथा दिशानिर्देशों को ‘सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक मेडिसिन’ (CCRAS) ने तैयार किया है।

लक्ष्य:

  • इसके तहत अगले एक साल में देश भर में 75 लाख लोगों के बीच रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं और कोरोना महामारी को काबू करने के उपायों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए लिखित दिशानिर्देशों का वितरण किया जाएगा।
  • आयुष मंत्रालय का यह अभियान 60 वर्ष व उससे अधिक उम्र के लोगों तथा अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों पर विशेष रूप से फोकस करेगा।

लाभ और महत्व:

आयुष रोगनिरोधी दवाओं के वितरण से नागरिकों को नोवल कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

रोगनिरोधी दवाएं’ (Prophylactic Medicines) क्या होती हैं?

‘रोगनिरोधी’ (Prophylactic) का अर्थ होता है, एक निवारक उपाय।

  • ‘प्रोफाइलेक्टिक’ (Prophylactic) शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया, जिसका अर्थ होता है, ‘एन एडवांस गार्ड’ अर्थात ‘अग्रिम सुरक्षा’, जोकि किसी बीमारी अथवा अवांछित नतीजों से बचाव के लिए एक उपयुक्त ‘शब्द’ है।
  • रोगनिरोधी (प्रोफाइलेक्टिक), किसी बीमारी को होने से रोकने के लिए डिज़ाइन और उपयोग की जाने वाली दवाएं या उपचार होती है। उदाहरण के लिए, ‘आमवाती बुखार’ (rheumatic fever) के बाद होने बाली ‘सिडेनहैम कोरिया’ (Sydenham’s chorea) नामक बीमारी को रोकने के लिए रोगनिरोधी एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

अधिसूचित H1 ड्रग्स क्या हैं? इनके लिए किस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘रोगनिरोधी दवाओं’ के बारे में
  2. सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक मेडिसिन’ (CCRAS) के बारे में
  3. आयुष मंत्रालय के बारे में

मेंस लिंक:

‘रोगनिरोधी दवाओं’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

श्रीलंका में ‘खाद्य आपातकाल’


(Food Emergency in Sri Lanka)

संदर्भ:

हाल ही में, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) द्वारा आवश्यक खाद्य पदार्थों के वितरण से संबंधित ‘आपातकालीन नियमों’ की घोषणा की गयी है।

नियमों के अनुसार:

‘आपातकालीन नियमों’ के तहत, बाजार की अनियमितताओं और जमाखोरी को रोकने के लिए अधिकारियों को सरकार द्वारा गारंटीकृत कीमतों पर धान, चावल और चीनी सहित आवश्यक खाद्य पदार्थों के स्टॉक को खरीदकर, आम जनता को “रियायती दर” पर आवश्यक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की शक्ति प्रदान की गयी है।

संबंधित प्रकरण:

जमाखोरी के खिलाफ सरकार द्वारा उठाए जा रहे सख्त कदमों से श्रीलंका में ‘खाद्यान्नों का अभाव’ (Food Shortage) होने की आशंका है।

  • इन अटकलों को हवा देने वाले विभिन्न कारक हैं, जैसे कि आवश्यक वस्तुओं – पेट्रोलियम, चीनी, डेयरी उत्पाद, गेहूं, चिकित्सा आपूर्ति – के आयात पर देश की निर्भरता, तेजी से घट रहा विदेशी मुद्रा भंडार – जोकि नवंबर 2019 में $ 7.5 बिलियन से घटकर जुलाई 2021 में $ 2.8 बिलियन रह गया है, और आगामी वर्षों में विदेशी ऋण को चुकाने की चुनौती आदि।
  • वर्ष 2020 की शुरुआत से महामारी के घातक आघात से विदेशी मुद्रा आय के सभी प्रमुख स्रोतों – निर्यात, श्रमिक प्रेषण और पर्यटन – के लिए आर्थिक तनाव में और वृद्धि हुई है।
  • सरकार द्वारा रासायनिक उर्वरकों के आयात पर प्रतिबंध लगाने, और “केवल जैविक” उर्वरकों का उपयोग दृष्टिकोण अपनाने संबंधी ‘राजपक्षे प्रशासन’ द्वारा अप्रैल में लिए गए निर्णय से ‘खाद्य-सामग्री’ में कमी होने की संभावना का डर भी उपजा है।

वर्तमान स्थिति:

  • कई लोग, विशेष रूप से दैनिक वेतन भोगी, और कम आय वाले परिवार, खाद्यान्न खरीदने में असमर्थ होने के बारे में शिकायत कर रहे हैं, और कई मामलों में दूध, चीनी और चावल जैसी आवश्यक वस्तुएं, कोविड संक्रमण मामलों में वृद्धि होने के बाद 20 अगस्त को घोषित किए गए लॉकडाउन के दौरान आम लोगों की पहुँच से बाहर हो गयी हैं।
  • महामारी के दौरान चावल, दाल, ब्रेड, चीनी, सब्जियां, मछली सहित आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कई गुना बढ़ी हैं, और हाल के हफ्तों में इनमे और तेजी से वृद्धि हुई है।

सरकार के नवीनतम निर्णय की आलोचना:

  • आपातकालीन विनियमों की आलोचना, मुख्यतः सरकार के कानूनी विकल्पों और उनके राजनीतिक प्रभावों को लेकर की जा रही है।
  • इस बात की भी चिंता है, कि आम जनता के विरोध को दबाने और अन्य लोकतांत्रिक कार्रवाईयों को रोकने के लिए आपातकालीन नियमों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आगे की चुनौतियां:

  1. श्रीलंका में, ‘सभी उपभोक्ताओं तक आवश्यक सामग्री पहुँचने’ को सुनिश्चित करने के लिए कोई ‘सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ या ‘राशन कार्ड’ व्यवस्था मौजूद नहीं है।
  2. मौजूदा विनियम, मूलभूत आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं, और इसके बजाय ‘काला बाजार’ तैयार करने का अतिरिक्त जोखिम पैदा करते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप विश्व के सबसे बड़े मानवीय संगठन ‘संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम’ (UN World Food Programme) के बारे में जानते हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 पूर्वी आर्थिक मंच 2021


(‘Eastern Economic Forum’ 2021)

संदर्भ:

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने, हाल ही में, रूस के व्लादिवोस्तोक में आयोजित छठे पूर्वी आर्थिक मंच (Eastern Economic Forum – EEF) के पूर्ण सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया।

उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रधानमंत्री वर्ष 2019 में 5वें आयोजित ‘पूर्वी आर्थिक मंच’ (EEF) के मुख्य अतिथि थे।

पूर्वी आर्थिक मंच’ (EEF) के बारे में:

ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) की स्थापना रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक निर्णय द्वारा वर्ष 2015 में की गई थी।

  • यह मंच, ‘रूस के सुदूर पूर्व’ (Russia’s Far East) क्षेत्र के आर्थिक विकास में सहयोग और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का विस्तार करता है।
  • इस फोरम की बैठक प्रत्येक वर्ष रूस के शहर व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) में आयोजित की जाती है।
  • यह फोरम, विश्व अर्थव्यवस्था, क्षेत्रीय एकीकरण, और नए औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ रूस और अन्य देशों के सामने वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
  • बीते वर्षों में, यह फोरम, रूस और एशिया प्रशांत के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को विकसित करने की रणनीति पर चर्चा करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा है।

प्रतिभागी:

फोरम के कार्यक्रमों में, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख भागीदार देशों और आसियान, जोकि दक्षिण पूर्व एशिया में गतिशील रूप से विकासशील देशों का एक प्रमुख समेकित संगठन है, के साथ कई व्यापारिक वार्ताएं शामिल होंगी।

current affairs

 

‘सुदूर पूर्व’ (Far East) के बारे में:

यह रूस का सबसे पूर्वी भाग है।

  • रूस का सुदूर पूर्वी क्षेत्र’ दो महासागरों – प्रशांत और आर्कटिक – जुड़ा है और पांच देशों (चीन, जापान, मंगोलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK)) के साथ सीमा साझा करता है।
  • ‘सुदूर पूर्वी फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट’ (Far Eastern Federal District), रूस के एक तिहाई से अधिक क्षेत्र को कवर करता है।
  • सुदूर पूर्वी क्षेत्र, हीरे, टिन की खानों (stannary), बोरेक्स सामग्री, स्वर्ण, टंगस्टन, जैसे प्राकृतिक संसाधनों और मछली एवं समुद्री भोजन से समृद्ध है।
  • देश में उपलब्ध सभी कोयला भण्डारों और हाइड्रो-इंजीनियरिंग संसाधनों के लगभग 1/3 यहाँ पाए जाते हैं।
  • इस क्षेत्र के वन, रूस के कुल वन क्षेत्र का लगभग 30% हैं।

ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) में भारत की दिलचस्पी:

सौहार्द और ऐतिहासिक संबंधों से परे, भारत, रूसी हथियार उद्योग का एक प्रमुख ग्राहक भी है।

  • मार्च में, भारत ने प्रसिद्ध ‘कलाश्निकोव असॉल्ट राइफलों’ (Kalashnikov assault rifles) के भारत में निर्माण के लिए रूस के साथ एक संयुक्त उद्यम शुरू किया है।
  • वर्ष 2018 में, रूस ने भारत को S-400 उन्नत वायु रक्षा प्रणाली बेची थी।
  • भारत, दोनों देशों के बीच व्यापार के स्तर का विस्तार करने में रुचि रखता है।
  • भारत की विशेष रुचि, रूस के सुदूर पूर्व तट पर ‘हाइड्रोकार्बन भंडार’ का अन्वेषण करना है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

रूस में कितने ‘समय-मंडल’ (Time Zones) हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आर्कटिक के बारे में
  2. एशिया प्रशांत के बारे में
  3. हाइड्रोकार्बन क्या हैं?
  4. ‘पूर्वी आर्थिक मंच’ (EEF) के बारे में
  5. ‘रूस के सुदूर पूर्व’ के बारे में

मेंस लिंक:

भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार और इसके महत्व पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

इंस्पिरेशन 4: स्पेसएक्स का सभी सिविलियन यात्रियों सहित पहला अंतरिक्ष अभियान


(Inspiration4: SpaceX’s first all-civilian space mission)

संदर्भ:

प्रसिद्ध उद्यमी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) द्वारा हाल ही में की गयी घोषणा के अनुसार, गैर-सरकारी और सभी सिविलियन यात्रियों सहित पहली स्पेसफ्लाइट, ‘इंस्पिरेशन 4’ (Inspiration4), 15 सितंबर को लॉन्च की जाएगी।

  • स्पेसएक्स के इस ‘क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान’ (Crew Dragon spacecraft) को अमेरिका के फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा।
  • यह अंतरिक्ष यान, चार प्राइवेट नागरिकों के एक ग्रुप को तीन दिनों की यात्रा पर अंतरिक्ष में ले जाएगा।

इस उड़ान में अंतरिक्ष यात्री कौन होंगे:

  • अंतरिक्ष यान की सभी चार सीटों को फिनटेक कंपनी ‘शिफ्ट4 पेमेंट्स’ (Shift4 Payments) के संस्थापक अमेरिकी अरबपति जेरेड इसाकमैन ने खरीदा है।
  • यह बच्चों के लिए अत्यंत खतरनाक बीमारियों, विशेष रूप से ल्यूकेमिया और अन्य कैंसर पर केंद्रित, टेनेसी स्थित बाल चिकित्सा उपचार और अनुसंधान सुविधा ‘सेंट जूड चिल्ड्रेन रिसर्च हॉस्पिटल’ के लिए धनराशि जुटाने के प्रयास का एक हिस्सा है।

current affairs

 

‘इंस्पिरेशन 4’ क्या है?

इस मिशन में ‘इंस्पिरेशन 4’ (Inspiration4) तीन दिनों तक पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और इसके बाद ‘अटलांटिक महासागर’ उतर जाएगा।

  • इंस्पिरेशन4, पृथ्वी से 408 किमी की ऊंचाई पर स्थित ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (International Space Station- ISS) और 547 किमी की ऊंचाई पर स्थित ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ की तुलना में, 575 किमी की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करेगा।
  • यह, वर्ष 2009 में, ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ की मरम्मत के लिए भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा सबसे अधिक दूरी तक यात्रा करने के बाद, किसी ‘क्रू सहित यान’ द्वारा सर्वाधिक दूरी तक यात्रा करने वाला मिशन होगा।
  • इस मिशन में प्रयुक्त होने वाले ‘क्रू ड्रैगन मॉड्यूल’ में विशेष रूप से सुधार किया गया है।

इस अंतरिक्ष यात्रा का महत्व:

  • रिपोर्टों के अनुसार, इस अंतरिक्ष यात्रा में बड़ी मात्रा में ‘स्वास्थ्य संबंधी डेटा’ एकत्र किया जाएगा, जिससे भविष्य में भेजे जाने वाले ‘चालक दल सहित’ अंतरिक्ष मिशनों की योजना तैयार करने में सहायता मिलेगी।
  • इसके अलावा, अंतरिक्ष यात्रा के दौरान यात्रियों के व्यवहार और संज्ञानात्मक परिवर्तनों का आकलन भी किया जाएगा।

अरबपति ‘जेफ बेजोस’ और ‘रिचर्ड ब्रैनसन’ द्वारा हाल ही में अंतरिक्ष यात्रा के बाद, ‘इंस्पिरेशन 4’ को गैर-पेशेवर व्यक्तियों के लिए अंतरिक्ष यात्रा का अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास के एक भाग के रूप में देखा जा रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप स्पेसएक्स के ‘स्टारशिप’ के बारे में जानते हैं? यह महत्वपूर्ण क्यों है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आर्टेमिस स्पेस मिशन के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. स्टारशिप के बारे में
  4. महत्वपूर्ण इंटरप्लेनेटरी स्पेस मिशन
  5. ‘इंस्पिरेशन 4’ के बारे में

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

कार्बी समझौता


(Karbi Agreemen)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार और असम राज्य सरकार और असम के पांच विद्रोही समूहों के बीच ‘कार्बी-आंगलोंग क्षेत्र’ (Karbi Anglong) में वर्षों से जारी हिंसा को समाप्त करने के लिए, एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले विद्रोही समूह:

  1. कार्बी लोंगरी एनसी हिल्स लिबरेशन फ्रंट (KLNLF),
  2. पीपुल्स डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लोंगरी (PDCK),
  3. कुकी लिबरेशन फ्रंट (KLF),
  4. यूनाइटेड पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (UPLA) और
  5. कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर (KPLT)

समझौते के प्रमुख बिंदु:

  • शांति समझौते के अंतर्गत, 1,000 से अधिक सशस्त्र कैडर हिंसा छोड़ कर मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं।
  • समझौते में इनके पुनर्वास का प्रावधान किया गया है।
  • कार्बी क्षेत्रों के विकास हेतु विशिष्ट परियोजनाओं को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार, अगले पांच वर्षों में असम सरकार के ₹1,000 करोड़ का विशेष विकास पैकेज उपलब्ध कराएगी।
  • असम सरकार ‘कार्बी-आंगलोंग स्वायत्त परिषद’ (Karbi Anglong Autonomous Council- KAAC) क्षेत्र के बाहर रहने वाले ‘कार्बी’ समुदाय के लोगों पर केंद्रित विकास हेतु एक ‘कार्बी कल्याण परिषद’ की स्थापना करेगी।
  • ‘कार्बी-आंगलोंग स्वायत्त परिषद’ (KAAC) के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि को बढाया जाएगा।

समग्र रूप से, वर्तमान समझौते में ‘कार्बी-आंगलोंग स्वायत्त परिषद’ को अधिक विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां देने का प्रस्ताव किया गया है।

यह ‘समझौता ज्ञापन’ निम्नलिखित कार्यों को सुनिश्चित करेगा:

  • कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) को अधिकतम स्वायत्तता प्रदान की जाएगी।
  • कार्बी लोगों की पहचान, भाषा और संस्कृति का संरक्षण।
  • असम की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता को प्रभावित किए बिना ‘परिषद क्षेत्र’ का केंद्रित विकास।

current affairs

‘कार्बी’ समुदाय के बारे में:

  • कार्बी (Karbis), असम का एक प्रमुख जातीय समुदाय है और कई गुटों में बटा हुआ है। यह समुदाय, 1980 के दशक के उत्तरार्ध से जातीय हिंसा, हत्याओं, अपहरण, वसूली आदि से ग्रस्त है।
  • मूल रूप से, यह समुदाय कार्बी आंगलोंग और दीमा हसाओ (पूर्ववर्ती उत्तरी कछार) पहाड़ी जिलों में पाए जाने वाले, पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी समूहों में से एक है।

इनकी मांगे:

  • कार्बी संगठनों की मुख्य मांग, एक पृथक राज्य के गठन किए जाने की थी।
  • 1990 के दशक के अंत में, कार्बी नेशनल वालंटियर्स (KNV) और कार्बी पीपुल्स फोर्स (KPF) द्वारा संयुक्त रूप से ‘यूनाइटेड पीपुल्स डेमोक्रेटिक सॉलिडेरिटी’ (UPDS) का गठन किया गया था।
  • नवंबर 2011 में, संगठन ने अपने हथियार डालने और केंद्र और असम सरकार के साथ, ‘कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद’ (KAAC) को अधिक स्वायत्तता और विशेष पैकेज दिए जाने की शर्तों सहित एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया।

‘कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद’, भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षित एक ‘स्वायत्त जिला परिषद’ है।

बोडो शांति समझौता

(Bodo peace accord)

असम राज्य सरकार द्वारा ऐतिहासिक ‘बोडो शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर करने के एक साल बाद, पांच अलग-अलग कार्बी समूहों के पूर्व उग्रवादियों ने अपने हथियार डाल दिए, जिससे बोडोलैंड में लंबे समय से जारी हिंसा का अंत हो गया।

  • ‘बोडोलैंड क्षेत्र’ भी एक स्वायत्त प्रादेशिक क्षेत्र है जिसे एक निर्वाचित निकाय – ‘बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद’ द्वारा प्रशासित किया जाता है।
  • इस समझौते पर पहले वर्ष 2003 में हस्ताक्षर किए गए थे और फिर वर्ष 2020 में इस समझौते में विस्तार किया गया था।

कार्बी आंगलोंग समझौते का महत्व:

असम में कार्बी विद्रोह का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसे 1980 के दशक के उत्तरार्ध से हत्याओं, जातीय हिंसा, अपहरण, वसूली आदि के लिए जाना जाता है। इसे देखते हुए ‘कार्बी आंगलोंग समझौता’ (Karbi Anglong Agreement) काफी महत्वपूर्ण है।

  • समझौता होने से, इस हिंसा को समाप्त करने और राज्य में शांति स्थापित करने की उम्मीद है।
  • फरवरी 2021 में लगभग 1000 कार्बी उग्रवादियों ने असम सरकार के सामने आत्मसमर्पण किया था।
  • उन कार्बी उग्रवादियों में से लगभग 150 राष्ट्रपति भवन के नॉर्थ ब्लॉक पहुंचे, जहां कार्बी आंगलोंग समझौते पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे और उनमें से लगभग 15 कार्बी पूर्व-उग्रवादी बैठक में मौजूद रहे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय संविधान की 5 वीं और 6 वीं अनुसूची में अंतर
  2. 5 वीं अनुसूची के तहत राज्यपाल की शक्तियां
  3. 5वीं के तहत क्षेत्रों को शामिल या बहिष्कृत करने की शक्ति
  4. अनुसूचित क्षेत्र क्या हैं?
  5. वन अधिकार अधिनियम- प्रमुख प्रावधान
  6. जनजातीय सलाहकार परिषदें- संरचना और कार्य
  7. कार्बी समुदाय के बारे में
  8. बोडोलैंड के बारे में
  9. बोडो शांति समझौते के बारे में

मेंस लिंक:

भारतीय संविधान की 5 वीं और 6 वीं अनुसूची में अंतर स्पष्ट कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


राष्ट्रीय किसान डेटाबेस

  • केंद्र सरकार द्वारा देश में 5 करोड़ किसानों के रिकॉर्ड के साथ एक राष्ट्रीय किसान डेटाबेस तैयार किया गया है, और इसमें ‘राज्य भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस’ से जोड़कर दिसंबर तक 8 करोड़ किसानों को शामिल किए जाने  की उम्मीद है।
  • यह डेटाबेस, पीएम-किसान, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और बीमा योजना पीएम फसल बीमा योजना जैसी मौजूदा राष्ट्रीय योजनाओं के आंकड़ों को लेकर तैयार किया गया है।

मांडा भैंस

‘नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज’ (NBAGR) ने मांडा भैंस (Manda buffalo) को भारत में पाई जाने वाली भैंसों की 19वीं अनूठी नस्ल के रूप में मान्यता दी है।

  • यह नस्ल, पूर्वी घाटों और ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र के पठार में पायी जाती है।
  • मांडा नस्ल की भैंसे, परजीवी संक्रमण के प्रति प्रतिरोधी, बीमारियों के प्रति-कम संवेदनशील होती हैं और मामूली संसाधनों पर जीवित रह सकती हैं।

current affairs

current affairs

 ग्रीस में जलवायु संकट से निपटने हेतु एक मंत्रालय का गठन

ग्रीस सरकार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के लिए एक नया मंत्रालय गठित किया है।

  • यह निर्णय, अभी हाल ही व्यापक स्तर पर फ़ैली वनाग्नि के मद्देनजर किया गया है, इस भीषण वनाग्नि से ‘इविया द्वीप’ और दक्षिणी ग्रीस में 1,000 वर्ग किलोमीटर (385 वर्ग मील) से अधिक जंगल जल कर नष्ट हो गए थे।
  • यह मंत्रालय अग्निशामक, आपदा राहत और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान के अनुकूल नीतियों पर गौर करेगा।

current affairs


  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos