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MISSION – 2022: YEARLONG TIMETABLE
सामान्य अध्ययन– I
विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।
1. राजा राम मोहन राय को “आधुनिक भारत का जनक” माना जाता है। हमारे देश को आधुनिकता के पथ पर स्थापित करने के लिए भारत को प्रगतिशील एवं तर्कसंगत बनाने में उनके योगदानों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
प्रश्न का स्तर: सरल
सन्दर्भ: अध्याय-9 – आधुनिक भारत का एक संक्षिप्त इतिहास: राजीव अहीर (स्पेक्ट्रम प्रकाशक)।
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
राजाराम मोहन राय के व्यक्तित्व का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए।
विषय वस्तु:
पश्चिमी शिक्षा ने भारतीय समाज पर उनके दृष्टिकोण को कैसे प्रभावित किया? समझाइए।
राजाराम मोहन राय द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख कीजिए।
उपरोक्त सुधारों को प्राप्त करने के लिए उनके द्वारा किए गए विभिन्न उपायों के बारे में लिखिए।
निष्कर्ष:
उन्हें आधुनिक भारत का पिता क्यों कहा जाता है, समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।
2. सुधार आंदोलनों का दायरा केवल धर्म तक ही सीमित नहीं था बल्कि इसमें समग्र रूप से समाज भी शामिल था। इसने एक समृद्ध आधुनिक भारत का दर्शन दिया एवं बाद में यह विजन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो गया। विस्तार से समझाइए। (250 शब्द)
प्रश्न का स्तर: मध्यम
सन्दर्भ: अध्याय-6 – भारत का स्वतंत्रता संघर्ष: बिपिन चंद्र।
निर्देशक शब्द:
समझाइए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
यह समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए कि सुधार आंदोलन एक समग्र सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था, जिसका उद्देश्य हमारे समाज एवं धर्म को पुनर्जीवित करना था।
विषय वस्तु:
इसकी प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
इन सुधारों को प्राप्त करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख कीजिए।
धार्मिक पहलुओं में प्रमुख सुधार के लिए अपनाए गए विभिन्न उपायों का उल्लेख कीजिए।
निष्कर्ष:
निष्कर्ष निकालिए कि राष्ट्रीय आंदोलन ने इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया एवं स्वतंत्र भारत के विजन में इसे शामिल किया गया।
सामान्य अध्ययन– II
विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।
3. भारत में अधिकरण स्थापित करने का उद्देश्य त्वरित एवं लागत प्रभावी न्याय के दोहरे उद्देश्य की पूर्ति करना था। भारत में अधिकरणों के प्रदर्शन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
प्रश्न का स्तर: कठिन
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
अधिकरण एवं उनके उद्देश्यों के बारे में संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
अधिकरणों से जुड़े संविधान के प्रासंगिक अनुच्छेदों का उल्लेख कीजिए।
भारत में न्यायाधिकरणों का संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुत कीजिए।
लंबित मामलों, न्यायनिर्णयन, अपीलों, नियुक्तियों आदि के संबंध में न्यायाधिकरणों के प्रदर्शन पर चर्चा कीजिए।
न्यायाधिकरणों से संबंधित न्यायालय के नवीनतम निर्णयों का उल्लेख कीजिए।
राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग एवं न्यायाधिकरणों में जनशक्ति के मुद्दे का उल्लेख कीजिए।
निष्कर्ष:
न्यायाधिकरणों के माध्यम से न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
4. स्वच्छता में सुधार के साथ सुरक्षित जल एवं स्वच्छता का प्रावधान पहल (WASH) पोषण संबंधी चुनौतियों को दूर करने एवं स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। समझाइए। (250 शब्द)
प्रश्न का स्तर: मध्यम
सन्दर्भ: Indian Express
निर्देशक शब्द:
समझाइए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
कुपोषण एवं स्वच्छता के बीच संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
भारत में कुपोषण की स्थिति, इसके कारणों एवं इसके प्रभावों के बारे में संक्षेप में बताइए।
कुपोषण एवं स्वच्छता के मध्य संबंधों पर प्रकाश डालिए।
भोजन के सेवन के अतिरिक्त, दूषित पेयजल, खराब स्वच्छता और अस्वच्छ रहने की स्थिति जैसे कारक बच्चे के विकास में कैसे भूमिका निभाते हैं? प्रकाश डालिए।
अपने उत्तर की पुष्टि के लिए WHO और NFHS-5 रिपोर्ट से डाटा प्रस्तुत कीजिए।
इस मुद्दे के समाधान के लिए इस दिशा में सरकार द्वारा की गई कुछ पहलों का उल्लेख कीजिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन– III
विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
5. ई-रूपी (e-RUPI) में वित्तीय समावेशन प्राप्त करने तथा भारत में डिजिटल विभाजन को पाटने की क्षमता है। ई-रूपी के लाभों के बारे में लिखिए एवं विश्लेषण कीजिए कि क्या यह भारत में डिजिटल मुद्रा को अपनाने की दिशा में पहला कदम है। (250 शब्द)
प्रश्न का स्तर: मध्यम
सन्दर्भ: Live Mint
निर्देशक शब्द:
विश्लेषण कीजिए– ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
ई-रूपी (e-RUPI) का वर्णन करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
इसकी कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालिए।
ई-रूपी के अनुप्रयोग एवं संभावित क्षेत्रों के बारे में लिखिए।
इससे होने वाले संभावित लाभों के बारे में लिखिए।
एक डिजिटल मुद्रा के रूप में ई-रूपी के बारे में लिखिए।
ई-रूपी, डिजिटल मुद्राओं से अलग कैसे है? समझाइए।
समझाइए कि ई-रूपी की शुरुआत डिजिटलीकरण की दिशा में एक सही कदम है।
निष्कर्ष:
संक्षेप में समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए कि ई-रूपी भारत के वित्तीय बुनियादी ढांचे के डिजिटलीकरण के लिए समाचार को प्रोत्साहित कर रहा है एवं भविष्य में डिजिटल मुद्राओं की और स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
सामान्य अध्ययन– IV
विषय: भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।
6. हमारे जीवन की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि हमारे जीवन में संघर्ष हैं या नहीं बल्कि इस पर निर्भर करती है कि हम उनका उत्तर कैसे देते हैं। संघर्ष समाधान में भावनात्मक बुद्धिमत्ता की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए। (150 शब्द)
प्रश्न का स्तर: मध्यम
सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन।
निर्देशक शब्द:
टिप्पणी कीजिए– ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
ऊपर दिए गए कथन के आलोक में संघर्ष समाधान को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।
विषय वस्तु:
दैनिक आधार पर होने वाले संघर्षों एवं तर्कों तथा उनकी प्रकृति के बारे में उल्लेख कीजिए।
संघर्ष- समाधान प्रक्रिया में भावनात्मक बुद्धिमत्ता का क्या महत्त्व है? उल्लेख कीजिए।
उदाहरणों के साथ पुष्टि कीजिए।
निष्कर्ष:
भावनात्मक बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए एक सहानुभूतिपूर्ण एवं उत्पादक तरीके से संघर्ष समाधान के महत्व के बारे में लिखिए।
विषय: सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य- सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना।
7. सत्यनिष्ठा एक आधारभूत नैतिक गुण एवं वह आधारशिला है जिस पर अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द)
प्रश्न का स्तर: सरल
सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण: डी.के. बालाजी
निर्देशक शब्द:
स्पष्ट कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
सत्यनिष्ठा क्या है? परिभाषित कीजिए। प्रासंगिक उद्धरण प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
सत्यनिष्ठा, नैतिक मूल्यों को बढ़ावा कैसे देती है? उल्लेख कीजिए।
अपने उत्तर का समर्थन करने के लिए उदाहरणों का प्रयोग कीजिए।
सत्यनिष्ठा को मूलभूत मूल्य के रूप में रखते हुए, हम नैतिक विकास के लिए और अधिक गुणों को कैसे शामिल कर सकते हैं? समझाइए।
निष्कर्ष:
निष्कर्ष निकालिए कि सत्यनिष्ठा व्यक्तियों की आत्म-जागरूकता को और बढ़ाती है एवं एक न्यायपूर्ण समाज के लिए सहायता करती है।
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