HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
1857 के विद्रोह के दौरान विद्रोही अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल क्यों रहे, इसके कारण नीचे दिए गए हैं। निम्नलिखित में से कौनसे सही हैं?
- विद्रोहियों का कोई राजनीतिक दृष्टिकोण या भविष्य की कोई निश्चित दृष्टि नहीं थी।
- कुछ को छोड़कर उनके नेतृत्वकर्ताओं द्वारा प्रभावी समर्थन न किया जाना।
- लगभग आधे भारतीय सैनिकों ने अपने ही देशवासियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
सही उत्तर कूट चुनिए:
Correct
उत्तर: d)
हालाँकि विद्रोहियों को लोगों की सहानुभूति प्राप्त हुई, फिर भी पूरा देश का समर्थन प्राप्त नहीं था। व्यापारियों, बुद्धिजीवियों और भारतीय शासक न केवल अलग-थलग थे, बल्कि सक्रिय रूप से अंग्रेजों का समर्थन किया। अंग्रेजों की सफलता के लिए समर्थन करने के लिए उनके द्वारा कलकत्ता और बॉम्बे में बैठकें आयोजित की गईं। व्यपगत के सिद्धान्त के बावजूद, भारतीय शासकों ने, जो अंग्रेजों के साथ अपने भविष्य के सुरक्षित होने की उम्मीद करते थे, उदारतापूर्वक उनका समर्थन किया। वास्तव में, अगर सिपाहियों को उनका समर्थन मिला होता तो वे इससे बेहतर लड़ाई लड़ सकते थे। लगभग आधे भारतीय सैनिकों ने न केवल विद्रोह किया बल्कि अपने ही देशवासियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
झांसी की रानी, कुंवर सिंह और मौलवी अहमदुल्ला जैसे कुछ अपवादों के अलावा, विद्रोहियों को उनके नेतृत्वकर्ताओं द्वारा प्रभावी समर्थन प्रदान नहीं किया गया। उनमें से अधिकांश विद्रोह के महत्व को महसूस करने में विफल रहे।
बहादुर शाह और जीनत महल को सिपाहियों पर कोई भरोसा नहीं था और सुरक्षा के लिए अंग्रेजों से बातचीत की। अधिकांश तालुकदारों ने केवल अपने हितों की रक्षा करने की कोशिश की। उनमें से कुछ, मान सिंह की तरह, कई बार अपना पक्ष बदलते रहे। विदेशी शासन के लिए आम तौर पर नफरत करने के अलावा, विद्रोहियों के पास कोई राजनीतिक दृष्टिकोण या भविष्य की निश्चित दृष्टि नहीं थी। वे सभी मुख्य रूप से अपने खोए हुए विशेषाधिकारों को वापस पाने के लिए लड़ रहे थे। अप्रत्याशित रूप से, वे एक नई राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत करने में असमर्थ साबित हुए।
Incorrect
उत्तर: d)
हालाँकि विद्रोहियों को लोगों की सहानुभूति प्राप्त हुई, फिर भी पूरा देश का समर्थन प्राप्त नहीं था। व्यापारियों, बुद्धिजीवियों और भारतीय शासक न केवल अलग-थलग थे, बल्कि सक्रिय रूप से अंग्रेजों का समर्थन किया। अंग्रेजों की सफलता के लिए समर्थन करने के लिए उनके द्वारा कलकत्ता और बॉम्बे में बैठकें आयोजित की गईं। व्यपगत के सिद्धान्त के बावजूद, भारतीय शासकों ने, जो अंग्रेजों के साथ अपने भविष्य के सुरक्षित होने की उम्मीद करते थे, उदारतापूर्वक उनका समर्थन किया। वास्तव में, अगर सिपाहियों को उनका समर्थन मिला होता तो वे इससे बेहतर लड़ाई लड़ सकते थे। लगभग आधे भारतीय सैनिकों ने न केवल विद्रोह किया बल्कि अपने ही देशवासियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
झांसी की रानी, कुंवर सिंह और मौलवी अहमदुल्ला जैसे कुछ अपवादों के अलावा, विद्रोहियों को उनके नेतृत्वकर्ताओं द्वारा प्रभावी समर्थन प्रदान नहीं किया गया। उनमें से अधिकांश विद्रोह के महत्व को महसूस करने में विफल रहे।
बहादुर शाह और जीनत महल को सिपाहियों पर कोई भरोसा नहीं था और सुरक्षा के लिए अंग्रेजों से बातचीत की। अधिकांश तालुकदारों ने केवल अपने हितों की रक्षा करने की कोशिश की। उनमें से कुछ, मान सिंह की तरह, कई बार अपना पक्ष बदलते रहे। विदेशी शासन के लिए आम तौर पर नफरत करने के अलावा, विद्रोहियों के पास कोई राजनीतिक दृष्टिकोण या भविष्य की निश्चित दृष्टि नहीं थी। वे सभी मुख्य रूप से अपने खोए हुए विशेषाधिकारों को वापस पाने के लिए लड़ रहे थे। अप्रत्याशित रूप से, वे एक नई राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत करने में असमर्थ साबित हुए।
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Question 2 of 5
2. Question
सामान्य सेवा प्रवर्तन अधिनियम, 1857 के विद्रोह के मुख्य कारणों में से एक था। यह अधिनियम संबंधित था:
Correct
उत्तर: c)
1856 में चार्ल्स कैनिंग द्वारा 1856 का सामान्य सेवा प्रवर्तन अधिनियम प्रस्तुत किया गया था। इसमें प्रावधान किया गया था कि यदि आवश्यक हो तो प्रत्यके भारतीय सैनिक की विदेश में तैनाती करना। यह 1857 के विद्रोह का एक मुख्य कारण था, क्योंकि उन दिनों ब्राह्मणों के लिए समुद्र पार करने करना निषेध था।
Incorrect
उत्तर: c)
1856 में चार्ल्स कैनिंग द्वारा 1856 का सामान्य सेवा प्रवर्तन अधिनियम प्रस्तुत किया गया था। इसमें प्रावधान किया गया था कि यदि आवश्यक हो तो प्रत्यके भारतीय सैनिक की विदेश में तैनाती करना। यह 1857 के विद्रोह का एक मुख्य कारण था, क्योंकि उन दिनों ब्राह्मणों के लिए समुद्र पार करने करना निषेध था।
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Question 3 of 5
3. Question
भारत सरकार अधिनियम 1858 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के नियम को समाप्त कर दिया।
- इसने भारत में पहले से प्रचलित सरकार के सम्पूर्ण ढांचे को बदल दिया।
- इस अधिनियम के अनुसार, भारत सरकार को इंग्लैंड के द्वारा निगरानी और नियंत्रण रखना था।
- इसने भारत के राज्य सचिव नामक एक नये पद का सृजन किया, जो भारतीय प्रशासन पर पूर्ण अधिकार और नियंत्रण करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: c)
इस महत्वपूर्ण अधिनियम को 1857 के विद्रोह के मद्देनजर लागू किया गया था। इस अधिनियम को भारत में बेहतर सरकार के अधिनियम के रूप में जाना जाता है, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया, और ब्रिटिश क्राउन में सरकार, क्षेत्र और राजस्व की शक्तियों को स्थानांतरित कर दिया।
अधिनियम की विशेषताएं
इस अधिनियम के फलस्वरुप भारत की सरकार, क्षेत्र और राजस्व ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश ताज को हस्तांतरित हुआ, अर्थात कंपनी का शासन भारत मेँ ब्रिटिश ताज के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया।
भारत मेँ ब्रिटिश ताज की शक्तियों का प्रयोग सेक्रेटरी ऑफ स्टेट द्वारा होने लगा। इस प्रकार कंट्रोल और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का स्थान इस नए पद ने ले लिया।
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट केबिनेट ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था, जिसकी सहायतार्थ 15 सदस्योँ वाली काउंसिल ऑफ इंडिया थी।
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट को भारतीय प्रशासन पर सर्वाधिकार और नियंत्रण की शक्तियाँ प्राप्त थीं। गवर्नर जनरल उसका एजेंट होता था तथा वह ब्रिटिश संसद के प्रति जवाबदेह था।
हालाँकि, 1858 का अधिनियम प्रशासनिक मशीनरी के सुधार तक ही सीमित था, जिसके द्वारा भारत सरकार को इंग्लैंड द्वारा निगरानी और नियंत्रण किया जाना था। इसने भारत में प्रचलित सरकार की प्रणाली में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया।
Incorrect
उत्तर: c)
इस महत्वपूर्ण अधिनियम को 1857 के विद्रोह के मद्देनजर लागू किया गया था। इस अधिनियम को भारत में बेहतर सरकार के अधिनियम के रूप में जाना जाता है, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया, और ब्रिटिश क्राउन में सरकार, क्षेत्र और राजस्व की शक्तियों को स्थानांतरित कर दिया।
अधिनियम की विशेषताएं
इस अधिनियम के फलस्वरुप भारत की सरकार, क्षेत्र और राजस्व ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश ताज को हस्तांतरित हुआ, अर्थात कंपनी का शासन भारत मेँ ब्रिटिश ताज के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया।
भारत मेँ ब्रिटिश ताज की शक्तियों का प्रयोग सेक्रेटरी ऑफ स्टेट द्वारा होने लगा। इस प्रकार कंट्रोल और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का स्थान इस नए पद ने ले लिया।
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट केबिनेट ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था, जिसकी सहायतार्थ 15 सदस्योँ वाली काउंसिल ऑफ इंडिया थी।
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट को भारतीय प्रशासन पर सर्वाधिकार और नियंत्रण की शक्तियाँ प्राप्त थीं। गवर्नर जनरल उसका एजेंट होता था तथा वह ब्रिटिश संसद के प्रति जवाबदेह था।
हालाँकि, 1858 का अधिनियम प्रशासनिक मशीनरी के सुधार तक ही सीमित था, जिसके द्वारा भारत सरकार को इंग्लैंड द्वारा निगरानी और नियंत्रण किया जाना था। इसने भारत में प्रचलित सरकार की प्रणाली में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया।
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Question 4 of 5
4. Question
तात्या टोपे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- वे 1857 के भारतीय विद्रोह में सेनापति थे।
- वे कानपुर में ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय सैनिकों की लड़ाई में हार गया था
- उसने ग्वालियर पर कब्जा करने के लिए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ सहयोग किया।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
तात्या टोपे
इन्हें रामचंद्र पांडुरंग टोपे के रूप में भी जाना जाता है, वह सबसे उल्लेखनीय भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे और 1857 के विद्रोह में एक सेनापति थे।
- 1814 में नासिक, महाराष्ट्र में जन्मे तात्या टोपे पांडुरंग राव टोपे और उनकी पत्नी रुखमाबाई के इकलौते पुत्र थे।
- तात्या टोपे पेशवा के दत्तक पुत्र नाना साहिब के घनिष्ठ मित्र थे
- मई 1857 में, तात्या टोपे ने कानपुर में ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय सैनिकों से लड़ाई जीती थी
- उसने जनरल विन्धम को ग्वालियर शहर से पीछे हटने के लिए मजबूर किया।
- उन्होंने ग्वालियर पर कब्जा करने के लिए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ सहयोग किया।
Incorrect
उत्तर: c)
तात्या टोपे
इन्हें रामचंद्र पांडुरंग टोपे के रूप में भी जाना जाता है, वह सबसे उल्लेखनीय भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे और 1857 के विद्रोह में एक सेनापति थे।
- 1814 में नासिक, महाराष्ट्र में जन्मे तात्या टोपे पांडुरंग राव टोपे और उनकी पत्नी रुखमाबाई के इकलौते पुत्र थे।
- तात्या टोपे पेशवा के दत्तक पुत्र नाना साहिब के घनिष्ठ मित्र थे
- मई 1857 में, तात्या टोपे ने कानपुर में ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय सैनिकों से लड़ाई जीती थी
- उसने जनरल विन्धम को ग्वालियर शहर से पीछे हटने के लिए मजबूर किया।
- उन्होंने ग्वालियर पर कब्जा करने के लिए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ सहयोग किया।
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Question 5 of 5
5. Question
अंग्रेजों ने व्यपगत के सिद्धांत (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) के आधार पर निम्नलिखित में से किन राज्यों को हड़प लिया गया था?
- झाँसी
- नागपुर
- सतारा
- अवध
- संबलपुर
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी (1848 से 1856 तक) के अधीन अंतिम बार हड़प नीति को अपनाया गया था। उसने व्यपगत के सिद्धांत (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) को अपनाया। इस सिद्धांत के अनुसार यदि किसी भारतीय शासक की अपने पुरुष उत्तराधिकारी के बिना मृत्यु हो जाती है, तो उसका राज्य “व्यपगत” का लिया जायेगा, अर्थात् वह कंपनी क्षेत्र का हिस्सा बन जाएगा। इस सिद्धांत को लागू करने के बाद एक के बाद एक राज्य को हड़प लिया गया जैसे: सतारा (1848), संबलपुर (1850), उदयपुर (1852), नागपुर (1853) और झांसी (1854)। अंत में, 1856 में, कंपनी ने अवध पर भी अधिकार कर लिया। इस बार अंग्रेजों ने तर्क दिया की वे नवाब के “कुशासन” से लोगों को मुक्त करने के लिए ‘कर्तव्य से बंधे’ हुए है इसलिए वे अवध पर कब्ज़ा करने पर मजबूर हैं। अपने प्रिय नवाब को जिस तरह से गद्दी से हटाया गया, उसे देखकर लोगों में गुस्सा भड़क उठा और अवध के लोग भी 1857 के महान विद्रोह में शामिल हो गए।
Incorrect
उत्तर: d)
गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी (1848 से 1856 तक) के अधीन अंतिम बार हड़प नीति को अपनाया गया था। उसने व्यपगत के सिद्धांत (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) को अपनाया। इस सिद्धांत के अनुसार यदि किसी भारतीय शासक की अपने पुरुष उत्तराधिकारी के बिना मृत्यु हो जाती है, तो उसका राज्य “व्यपगत” का लिया जायेगा, अर्थात् वह कंपनी क्षेत्र का हिस्सा बन जाएगा। इस सिद्धांत को लागू करने के बाद एक के बाद एक राज्य को हड़प लिया गया जैसे: सतारा (1848), संबलपुर (1850), उदयपुर (1852), नागपुर (1853) और झांसी (1854)। अंत में, 1856 में, कंपनी ने अवध पर भी अधिकार कर लिया। इस बार अंग्रेजों ने तर्क दिया की वे नवाब के “कुशासन” से लोगों को मुक्त करने के लिए ‘कर्तव्य से बंधे’ हुए है इसलिए वे अवध पर कब्ज़ा करने पर मजबूर हैं। अपने प्रिय नवाब को जिस तरह से गद्दी से हटाया गया, उसे देखकर लोगों में गुस्सा भड़क उठा और अवध के लोग भी 1857 के महान विद्रोह में शामिल हो गए।
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