Print Friendly, PDF & Email

[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. निपाह वायरस

2. चीन-ताइवान संबंध

3. लॉजिस्टिक्स समझौते और उनके लाभ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. अरुणाचल प्रदेश से पलायन रोकने हेतु विधायकों का फोरम

2. नागा शांति प्रक्रिया

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हूती विद्रोही

2. चर्चित स्थल: गिनी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

 निपाह वायरस


(Nipah Virus)

संदर्भ:

केरल के कोझीकोड जिले में तीन साल से अधिक समय के बाद, ‘जंतु-जन्य’ / ‘जूनोटिक’ (Zoonotic) ‘निपाह वायरस’ (Nipah Virus) के संक्रमण का एक मामला सामने आया है।

वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?

राज्य सरकार द्वारा 188 व्यक्तियों की एक संपर्क सूची तैयार की गई है, जिनमें से अधिकांशतः स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। संक्रमण के लक्षण वाले व्यक्तियों को तत्काल अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

तत्काल आवश्यकता:

ऐसे समय में जब केरल में कोविड -19 संक्रमण मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है और पूरे देश में किसी अन्य राज्य की तुलना में संक्रमण के सर्वाधिक मामले सामने आ रहे है, राज्य में इस खतरनाक निपाह वायरस की वापसी एक बड़ी चिंता का विषय है।

  • केंद्र और राज्य सरकार के लिए, यह आपसी विश्वास और समन्वय के साथ रोकथाम के उपाय करने का समय है।
  • केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से, संपर्क में आये हुए व्यक्तियों का पता लगाना, संगरोध (Quarantine), पृथक्करण (Isolation), प्रयोगशाला परीक्षण के लिए नमूनों का संग्रहण एवं परिवहन तथा ‘राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र’ (National Centre for Disease Control) द्वारा महामारी विज्ञान के दृष्टिकोण से आसपास के क्षेत्रों का विस्तृत अध्ययन करने जैसे कदम तत्काल उठाए जाने की आवश्यकता है।

‘निपाह’ वायरस के बारे में:

  • यह एक जूनोटिक वायरस है (यह जानवरों से इंसानों में फैलता है)।
  • पहली बार यह वायरस वर्ष 1998 और 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में फैला था।
  • सबसे पहले यह रोग, घरेलू सूअरों में दिखाई दिया था और इसके बाद कुत्तों, बिल्लियों, बकरियों, घोड़ों और भेड़ों सहित घरेलू जानवरों की कई प्रजातियों में भी पाया गया।

प्रसार:

  • निपाह वायरस, जानवरों से इंसानों में फैलता है और यह दूषित भोजन के माध्यम से या सीधे ‘एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति’ में भी फैल सकता है।
  • फ्रूट बैट्स (Fruit bats), जिसे फल चमगादड़ या ‘फ्लाईंग फॉक्स’ भी कहा जाता है, को निपाह वायरस का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है।

लक्षण:

इस संक्रमित व्यक्ति में, तीव्र मस्तिष्क शोथ / ‘एन्सेफलाइटिस’ (Encephalitis) और श्वसन संबंधी बीमारियों के लक्षण दिखाई देते हैं।

निवारण:

वर्तमान में, निपाह वायरस की रोकथाम के लिए, मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए, कोई टीका नहीं उपलब्धहै। निपाह वायरस से संक्रमित मनुष्यों को ‘गहन चिकित्सीय देखभाल’ में रखा जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘त्रिपक्षीय प्लस गठबंधन’ (Tripartite Plus alliance) के बारे में सुना है? इसके उद्देश्य और उपलब्धियां क्या हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. निपाह वायरस के बारे में
  2. प्रसार
  3. लक्षण
  4. रोकथाम

मेंस लिंक:

‘एक स्वास्थ्य’ (one health) उपागम पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

 चीन-ताइवान संबंध


(China- Taiwan relations)

संदर्भ:

ताइवान, जिस पर चीन अपना दावा करता है, पिछले एक साल से अधिक समय से, अपने स्व-शासित द्वीप की निकट और अक्सर ताइवान-नियंत्रित ‘प्रैटस द्वीप समूह’ (Pratas Islands) के समीप अपने वायु रक्षा क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिमी भाग में चीनी वायुसेना द्वारा बार-बार की जाने वाली कार्रवाइयों की शिकायत करता रहा है।

  • हाल ही में, परमाणु-सक्षम बमवर्षकों सहित 19 चीनी विमानों ने ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में उड़ान भरी थी।
  • जवाब में, चीनी विमानों को चेतावनी देने के लिए ताइवान द्वारा अपने लड़ाकू विमान भेजे गए। हालांकि, चीनी विमानों की निगरानी के लिए मिसाइल सिस्टम भी तैनात किए गए है।

इन कार्रवाईयों के पीछे मुख्य कारण:

  • ताइवान द्वारा ऐसा कुछ करने पर, जिससे चीन नाराज होता है, अथवा ‘लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान द्वीप के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन, विशेष रूप से ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ द्वारा समर्थन दिखाए जाने पर चीन, नाराजगी व्यक्त करने के लिए, अक्सर इस प्रकार की कार्रवाइयां करता रहता है। विदित हो कि, अमेरिका, ताइवान के लिए हथियारों की आपूर्ति करने वाला प्रमुख देश है।
  • चीन अपनी इन कार्रवाइयों को देश की संप्रभुता की रक्षा करने और ‘ताइपे’ और वाशिंगटन के बीच “मिलीभगत” से निपटने के लिए आवश्यक बताता है।

प्रमुख मुद्दे:

  • ताइवान के नागरिकों द्वारा, चीन की मुख्य भूमि के साथ राजनीतिक एकीकरण करने संबंधी ‘बीजिंग’ की मांग को जोरदार तरीके से खारिज कर दिया है, इसके बाद से चीन ने ताइवान पर राजनयिक, आर्थिक और सैन्य दबाव बढाता जा रहा है।
  • चीन ने काफी लंबे समय से ताइवान को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भाग लेने से अवरुद्ध किया हुआ है और वर्ष 2016 में ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन के चुनाव के बाद से, इस तरह का दबाव और अधिक बढ़ा दिया है।

चीन- ताइवान संबंध: पृष्ठभूमि

चीन, अपनी ‘वन चाइना’ (One China) नीति के जरिए ताइवान पर अपना दावा करता है। सन् 1949 में चीन में दो दशक तक चले गृहयुद्ध के अंत में जब ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के संस्थापक माओत्से तुंग ने पूरे चीन पर अपना अधिकार जमा लिया तो विरोधी राष्ट्रवादी पार्टी के नेता और समर्थक ताइवान द्वीप पर भाग गए। इसके बाद से ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ ने ताइवान को बीजिंग के अधीन लाने, जरूरत पड़ने पर बल-प्रयोग करने का भी प्रण लिया हुआ है।

  • चीन, ताइवान का शीर्ष व्यापार भागीदार है। वर्ष 2018 के दौरान दोनों देशों के मध्य 226 बिलियन डॉलर के कुल व्यापार हुआ था।
  • हालांकि, ताइवान एक स्वशासित देश है और वास्तविक रूप से स्वतंत्र है, लेकिन इसने कभी भी औपचारिक रूप से चीन से स्वतंत्रता की घोषणा नहीं की है।
  • एक देश, दो प्रणाली” (one country, two systems) सूत्र के तहत, ताइवान, अपने मामलों को खुद संचालित करता है; हांगकांग में इसी प्रकार की समान व्यवस्था का उपयोग किया जाता है।

वर्तमान में, चीन, ताइवान पर अपना दावा करता है, और इसे एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने वाले देशों के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने की बात करता है।

भारत-ताइवान संबंध

  • यद्यपि भारत-ताइवान के मध्य औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, फिर भी ताइवान और भारत विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर सहयोग कर रहे हैं।
  • भारत ने वर्ष 2010 से चीन की ‘वन चाइना’ नीति का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।

south_china_sea_2

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि चीन की आपत्तियों के कारण ताइवान आज तक WHO का सदस्य नहीं बन सका है? इस विषय के बारे में और जानने हेतु पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ताइवान की अवस्थिति और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।
  2. वन चाइना नीति के तहत चीन द्वारा प्रशासित क्षेत्र।
  3. क्या ताइवान का WHO और संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व किया गया है?
  4. दक्षिण चीन सागर में स्थित देश।
  5. कुइंग राजवंश (Qing dynasty)।

मेंस लिंक:

भारत- ताइवान द्विपक्षीय संबंधों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

 लॉजिस्टिक्स समझौते और उनके लाभ


(Logistics agreements and their benefits)

संदर्भ:

भारत सरकार द्वारा शीघ्र ही रूस के साथ एक द्विपक्षीय लॉजिस्टिक्स समझौते, पारस्परिक लॉजिस्टिक्स विनियम समझौता (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement – RELOS) को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके अलावा भारत और ब्रिटेन के मध्य एक ‘लॉजिस्टिक्स समझौता’ पर वार्ता अपने अंतिम चरण में है।

लॉजिस्टिक्स समझौते’ क्या होते हैं?

लॉजिस्टिक्स समझौते (Logistics Agreements), संबंधित देशों के मध्य, ईंधन के आदान-प्रदान हेतु सैन्य सुविधाओं का उपयोग करने के लिए परस्पर समझौतों पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्थाएं होती हैं।

  • इन समझौतों के माध्यम से, लॉजिस्टिक अर्थात सामरिक क्रियान्वयन या रसद संबंधी सहायता में आसानी होती है और भारत को अपनी सीमा से दूर सैन्य-कार्रवाइयों के दौरान, परिचालन संबंधी सामग्री तेजी से पहुंचाई और वापस लाई जा सकती है।
  • भारत द्वारा वर्ष 2016 में अमेरिका के साथ ‘लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (LEMOA) के साथ शुरुआत करते हुए सभी क्वाड देशों, फ्रांस, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के साथ कई लॉजिस्टिक्स समझौतों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

लॉजिस्टिक्स समझौतों के लाभ:

इन प्रशासनिक व्यवस्थाओं का सर्वाधिक लाभ नौसेना के लिए मिला है। कई देशों के साथ हस्ताक्षरित ‘लॉजिस्टिक्स समझौतों’ की वजह से, परिचालन संबंधी सामग्री लाने और लेजाने की क्षमता में सुधार और, भारतीय सीमा से दूर गहरे समुद्रों में नौसेना की अंतर-संचालन क्षमता में वृद्धि हुई है।

LEMOA क्या है?

यह अमेरिका द्वारा कई सैन्य-सहयोगी संबंध रखने वाले देशों के साथ किए गए ‘लॉजिस्टिक्स सहयोग समझौता’ (Logistics Support Agreement – LSA) का भारत के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया संस्करण है।

  • ‘लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (Logistics Exchange Memorandum of Agreement – LEMOA) भारत और अमेरिका के मध्य हस्ताक्षरित ‘तीन बुनियादी समझौतों’ में से एक है।
  • LEMOA के तहत दोनों देशों को ईंधन भरने और आवश्यक सामग्री की पुनःपूर्ति के उद्देश्य से दोनों ओर निर्दिष्ट सैन्य सुविधाओं का उपयोग करने अनुमति दी गयी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत और अमेरिका के मध्य हस्ताक्षरित ‘तीन बुनियादी समझौते’ कौन से हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बुनियादी समझौते क्या होते हैं?
  2. LEMOA क्या है?
  3. लॉजिस्टिक्स समझौते क्या हैं।

मेंस लिंक:

द्विपक्षीय लॉजिस्टिक्स समझौतों के लाभों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

अरुणाचल प्रदेश से पलायन रोकने हेतु विधायकों का फोरम


संदर्भ:

तिब्बत-चीन की सीमा से लगे निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले अरुणाचल प्रदेश के विधायकों द्वारा ग्रामीणों के पलायन को रोकने और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ‘सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ (Border Area Development Programme – BADP) को संशोधित करने हेतु एक फोरम का गठन किया गया है।

इस प्रकार से कदम की आवश्यकता:

इन क्षेत्रों के निवासी, अपनी आजीविका कमाने के लिए अरुणाचल प्रदेश के भीतर ही अन्य स्थानों या प्रदेश के बाहर शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। इस वजह से, वर्तमान में कई गांव लगभग वीरान हो गए हैं।

  • इसके अलावा, सीमा क्षेत्र के निवासियों को ‘रक्षा की एक पंक्ति’ के रूप में तैयार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एक दशकों पुरानी योजना ‘‘सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ (BADP)’ भी अच्छी तरह से कारगर नहीं हुई है।
  • साथ ही, अस्पष्ट दिशा-निर्देशों के कारण BADP को ठीक तरीके से लागू भी नहीं किया गया था।

सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) के बारे में:

सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990) के दौरान पश्चिमी क्षेत्र के सीमावर्ती राज्यों में ‘सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ की शुरुआत की गई थी और अन्य क्षेत्रों में इसका विस्तार किया गया था।

  • इस कार्यक्रम में, अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 119 सीमावर्ती जिलों के 456 ब्लॉक शामिल हैं।
  • BADP योजनाओं के अंतर्गत, सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थाई जीवन को समर्थ करने हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, पेयजल की आपूर्ति, सामुदायिक केंद्रों, संपर्क-सुविधाओं, जल निकासी आदि का निर्माण किया जाता है।

उद्देश्य:

‘सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप स्थित दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष विकासात्मक जरूरतों और सुख-सुविधाओं को उपलब्ध कराना है, और साथ ही, केंद्रीय / राज्य / BADP / स्थानीय योजनाओं के अभिसरण और भागीदारी दृष्टिकोण के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों को संपूर्ण आवश्यक बुनियादी ढांचे से परिपूर्ण करना है। ।

वित्त पोषण:

सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) के तहत राज्यों को केंद्रीय सहायता के रूप में 100% ‘गैर-व्यपगत’ विशेष धनराशि प्रदान की जाती है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. विशेषताएं
  4. वित्त पोषण

मेंस लिंक:

सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

 नागा शांति प्रक्रिया


(Naga peace process)

संदर्भ:

हाल ही में, संसद सदस्यों, विचारकों और कार्यकर्ताओं ने ‘नागा शांति प्रक्रिया’ को पटरी से उतरने से रोकने हेतु वार्ताकार के रूप में ‘आर.एन. रवि’ को हटाने के लिए सरकार से कहा है।

‘आर.एन. रवि’, नागालैंड के राज्यपाल हैं और लगभग दो वर्षों से ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’ [NSCN (I-M)] के चरमपंथी ‘इसाक-मुइवा’ गुट के साथ असफल वार्ता कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि:

यह वार्ता प्रक्रिया, वर्ष 1997 में, ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-आईएम’ (NSCN-IM) द्वारा केंद्र सरकार के साथ एक युद्धविराम समझौता किए जाने के बाद से जारी है। वर्ष 2001 में, नागालैंड के अन्य समूहों ने बातचीत का विकल्प चुनना शुरू कर दिया। हालांकि, 3 अगस्त, 2015 को एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से इस वार्ता प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

नागा राजनीतिक मुद्दों का संक्षिप्त इतिहास:

स्वतंत्रता पूर्व:

  1. अंग्रेजों ने वर्ष 1826 में असम पर कब्जा कर लिया और वर्ष 1881 में नागा हिल्स भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गयीं। नागा विद्रोह का पहला संकेत वर्ष 1918 में ‘नागा क्लब’ के गठन में देखा जाता है। इसके सदस्यों ने वर्ष 1929 में साइमन कमीशन को नागा पहाडियों से निकल जाने को कहा था।
  2. वर्ष 1946 में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National Council- NNC) का गठन हुआ, जिसने 14 अगस्त 1947 को नागालैंड को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया।
  3. ‘नागा नेशनल काउंसिल’ ने “संप्रभु नागा राज्य” स्थापित करने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में एक “जनमत संग्रह” कराया, जिसमें “99 प्रतिशत” ने एक “स्वतंत्र” नागालैंड के पक्ष में मतदान किया।

स्वतंत्रता पश्चात:

22 मार्च, 1952 को एक भूमिगत नागा फ़ेडरल गवर्नमेंट (NFG) और नागा फ़ेडरल आर्मी (NFA) का गठन किया गया। भारत सरकार ने विद्रोह कुचलने के लिए सेना भेजी तथा वर्ष 1958 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम बनाया गया।

इस संबंध में समझौता:

  • वर्ष 1997 में, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-आईएम (NSCN-IM) द्वारा केंद्र सरकार के साथ एक युद्धविराम समझौता किया गया था और उस समय से दोनों के बीच वार्ता जारी है।
  • इसके अलावा, वर्ष 2017 से सात अलग-अलग नागा राष्ट्रीय राजनीतिक समूहों (Naga national political groups- NNPGs) के एक समूह की भी केंद्र के साथ वार्ता चल रही है।
  • वर्ष 2015 में केंद्र सरकार और NSCN (IM) के बीच एक ‘फ्रेमवर्क समझौता’ पर हस्ताक्षर किये गए, तथा वर्ष 2017 में केंद्र ने NNPG के साथ एक “सहमत स्थिति” (agreed position) पर हस्ताक्षर किए।
  • हालांकि, NSCN (IM) द्वारा अलग नागा ध्वज और संविधान की मांग किए जाने की वजह से, काफी लंबे समय से लंबित नागा राजनीतिक मुद्दों पर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने में देरी हो रही है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

नागा समूहों की प्रमुख मांग ‘ग्रेटर नागालैंड’ बनाए जाने की रही है। राज्य के किन हिस्सों को ग्रेटर नागालैंड’ में शामिल किया जाता हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रेटर नागालैंड’ के तहत शामिल राज्यों के हिस्से
  2. नागा क्लब और ‘नागा नेशनल काउंसिल’ (NNC)
  3. नागा जनमत संग्रह कब आयोजित किया गया था?
  4. AFSPA का अवलोकन।
  5. अनुच्छेद 371 का अवलोकन

मेंस लिंक:

नागा शांति समझौते से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हूती विद्रोही

हूती (Houthi), ‘जैदी शिया संप्रदाय’ (Zaidi Shia sect) से संबंधित एक सशस्त्र विद्रोही समूह हैं जो यमन की सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। परंपरागत रूप से, हूती समुदाय के लोग ‘यमन’ के उत्तर-पश्चिम में स्थित ‘सादा प्रांत’ (Saada Province) में केंद्रित रहे हैं।

चर्चित स्थल: गिनी

  • गिनी (Guinea), पश्चिम अफ्रीका का एक देश है। इसकी सीमा पश्चिम में अटलांटिक महासागर से लगती है।
  • यह दक्षिण-पूर्व में स्थित ‘माउंट निम्बा स्ट्रिक्ट नेचर रिजर्व’ के लिए विख्यात है।
  • संप्रभु देश ‘गिनी’ का एक ऐसा गणतंत्र है, जिसका राष्ट्रपति सीधे लोगों द्वारा चुना जाता है।
  • गिनी, एक मुख्य रूप से इस्लामी देश है, और इसकी 85 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है।

चर्चा का कारण:

गिनी, लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता से घिरा हुआ है। हाल ही में, विशेष बलों में नियुक्त एक वरिष्ठ कमांडर की बर्खास्तगी के बाद से देश में फिर से अशांति फ़ैल गयी है। वरिष्ठ कमांडर को हटाए जाने से सेना के कुछ उच्च प्रशिक्षित सदस्यों ने विद्रोह करने और राष्ट्रपति आवास पर कब्जा करने की कोशिश की गयी है।

current affairs


  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos