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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 4 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-III

1. खाद्य तेल की कीमतें

2. वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC)

3. नासा का परसिवरेंस रोवर

4. कोरोनावायरस का म्यू वेरिएंट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘डूरंड रेखा’

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

खाद्य तेल की कीमतें


(Edible Oil Prices)

संदर्भ:

‘अंतरराष्ट्रीय जिंस वायदा कीमतों’ में गिरावट की प्रवृत्ति और घरेलू तिलहन फसल की आवक को देखते हुए, ‘खाद्य तेल’ की कीमतें दिसंबर तक कम होने की संभावना है।

खाद्य तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि:

पिछले साल, छह खाद्य तेलों- मूंगफली, सरसों, वनस्पति, सोया, सूरजमुखी और ताड़ / पाम तेल की खुदरा कीमतों में 48 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई थी। इसके निम्नलखित कारण थे:

  • वैश्विक कीमतों में उछाल, और सोयाबीन का कम घरेलू उत्पादन। सोयाबीन, भारत की सबसे बड़ी तिलहन फसल है।
  • चीन द्वारा खाद्य तेल की अत्यधिक खरीद।
  • कई प्रमुख तेल उत्पादकों द्वारा आक्रामक रूप से जैव ईंधन नीतियों का अनुसरण किया जा रहा है, और इसके लिए खाद्य तेल फसलों का उपयोग ‘जैव ईंधन’ उत्पादन हेतु किया जा रहा है।
  • भारत में खाद्य तेलों के खुदरा मूल्य में सरकारी करों और शुल्कों का भी एक बड़ा हिस्सा रहता है।

खाद्य तेल के आयात पर भारत की निर्भरता:

  • भारत, विश्व का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक देश है।
  • भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, जिससे देश में खाद्य तेल की खुदरा कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
  • देश में, मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल, ब्राजील और अर्जेंटीना से सोया तेल और रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है।

खाद्य तेलों के बारे में तथ्य:

  • खाद्य तेल के प्राथमिक स्रोत, सोयाबीन, सफ़ेद सरसों (रेपसीड) और सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी, कुसुम और नाइजर होते हैं।
  • खाद्य तेल के द्वितीयक स्रोत, ‘ताड़ का तेल’, नारियल, चावल की भूसी, कपास के बीज और वृक्ष-उत्पादित तिलहन (Tree Borne Oilseeds) होते हैं।

भारत में तिलहन उत्पादन में प्रमुख चुनौतियाँ:

  • तिलहन का उत्पादन, मुख्य रूप से ‘वर्षा आधारित’ क्षेत्रों (लगभग 70% क्षेत्र) में किया जाता है,
  • बीजों की काफी अधिक कीमत (मूंगफली और सोयाबीन),
  • सीमित संसाधनों के साथ छोटी जोतें,
  • कम बीज प्रतिस्थापन दर और कम उत्पादकता।

हाल ही में, सरकार द्वारा घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और देश को ‘खाना पकाने के तेल’ में आत्मनिर्भर बनाने हेतु ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन’-ताड़ तेल’ (National Mission on Edible Oil-Oil Palm – NMEO-OP) की घोषणा की गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘खाद्य तेल’ के बारे में
  2. खाद्य तेल के प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत
  3. प्रमुख खाद्य तेल आयातक देश
  4. ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ताड़ तेल’ (NMEO-OP) और इसके प्रावधानों के बारे में

मेंस लिंक:

भारत को खाद्य तेलों का आयात क्यों करना पड़ता है? सरकार के खजाने पर खाद्य तेलों के आयात का कितना बोझ है? खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हम क्या कर सकते हैं? विस्तार से चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC)


संदर्भ:

हाल ही में, ‘वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद’ (Financial Stability and Development Council – FSDC) की 24वीं बैठक आयोजित की गयी।

इस बैठक में वित्तीय स्थिरता, वित्तीय क्षेत्र के विकास, अंतर-नियामक समन्वय, वित्तीय साक्षरता, वित्तीय समावेशन, और बड़े वित्तीय समूहों के कामकाज सहित अर्थव्यवस्था के वृहत विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण, जैसे ‘वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद’ (FSDC) के विभिन्न अधिदेशों पर विचार-विमर्श किया गया।

नोट: ‘वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद’ (FSDC) के कार्यक्षेत्रों का संक्षिप्त अवलोकन करें।

बैठक में निम्नलखित मुद्दों पर भी चर्चा की गई:

  • दबावग्रस्त आस्तियों का प्रबंधन,
  • वित्तीय स्थिरता विश्लेषण हेतु संस्थागत तंत्र को मजबूत करना,
  • वित्तीय संस्थानों और IBC से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए रूपरेखा,
  • सरकारी अधिकारियों के मध्य आंकड़ों व जानकारी को साझा करने हेतु एक तंत्र,
  • भारतीय रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण और
  • पेंशन क्षेत्र से संबंधित मुद्दे।

FSDC के बारे में:

‘वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद’ (Financial Stability and Development Council – FSDC)  की स्थापना केंद्र सरकार द्वारा, दिसंबर 2010 में, एक शीर्ष स्तरीय मंच के रूप में की गई थी।

‘केंद्रीय वित्त मंत्री’ ‘वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद’ के अध्यक्ष होते हैं, और इसके सदस्यों के रूप में निम्नलिखित व्यक्ति शामिल होते हैं:

  • वित्तीय क्षेत्र नियामकों (RBI, SEBI, PFRDA, IRDA और FMC) के प्रमुख
  • वित्त सचिव और/या आर्थिक कार्य विभाग के सचिव,
  • सचिव, वित्तीय सेवा विभाग, और
  • मुख्य आर्थिक सलाहकार।

आवश्यकता पड़ने पर, FSDC, विशेषज्ञों को भी अपनी बैठक में आमंत्रित कर सकती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. FSDC के बारे में
  2. FSDC की संरचना
  3. FSDC के कार्य

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

 नासा का परसिवरेंस रोवर


(NASA’s Perseverance rover)

संदर्भ:

हाल ही में, नासा के परसिवरेंस रोवर (Perseverance rover) ने पृथ्वी पर भेजने के लिए पहला ‘रॉक नमूना’ सफलतापूर्वक एकत्र कर लिया है। नासा द्वारा इसे ‘परफेक्ट कोर सैंपल’ बताया गया है।

  • नासा (NASA), इन नमूनों को पृथ्वी पर वापस लाने के लिए अन्य अंतरिक्ष यान लॉन्च करने की योजना बना रहा है।
  • परसिवरेंस रोवर, जुलाई 2020 में लॉन्च किया गया था, और यह, फरवरी 2021 में मंगल ग्रह की सतह पर शैलों (रॉक) में जीवन-चिह्न तलाश करने के उद्देश्य से, ग्रह पर स्थित एक प्राचीन झील – ‘जेज़ेरो क्रेटर’ (Jezero Crater) पर उतरा था।

मिशन का महत्व:

  • परसिवरेंस रोवर में MOXIE अथवा मार्स ऑक्सीजन ISRU एक्सपेरिमेंट नामक एक विशेष उपकरण लगा है, जो मंगल ग्रह पर कार्बन-डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके पहली बार आणविक ऑक्सीजन का निर्माण करेगा। (ISRU- In Situ Resource Utilization, अर्थात स्व-स्थानिक संशाधनो का उपयोग)
  • इस मिशन पर एक, ‘इंजेन्युटी’ (Ingenuity) नामक एक हेलीकॉप्टर भी भेजा गया है, यह मंगल ग्रह पर उड़ान भरने वाला पहला हेलीकॉप्टर होगा।
  • यह मिशन, पृथ्वी पर परिष्कृत प्रयोगशालाओं में विश्लेषण करने हेतु, मंगल ग्रह से चट्टान के नमूनों को लाने का पहला नियोजित प्रयास है। इसका उद्देश्य मंगल ग्रह पर प्राचीन सूक्ष्मजीवीय जीवन के खगोलीय साक्ष्यों की खोज तथा वर्तमान या अतीत में जीवन-संकेतों की खोज करना है।

मिशन के कुछ प्रमुख उद्देश्य:

  1. प्राचीन सूक्ष्मजीवीय जीवन के खगोलीय साक्ष्यों की खोज करना।
  2. वापसी में पृथ्वी पर लाने के लिए चट्टानों तथा रेगोलिथ (Reglolith) के नमूने एकत्र करना है।
  3. मंगल ग्रह पर एक प्रयोगात्मक हेलीकाप्टर उतारना।
  4. मंगल ग्रह की जलवायु और भूविज्ञान का अध्ययन करना।
  5. भविष्य के मंगल मिशनों के लिए प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करना।

मंगल ग्रह के बारे में हालिया रुचि का कारण:

  1. मंगल ग्रह, पृथ्वी के काफी नजदीक (लगभग 200 मिलियन किमी दूर) पर स्थित है।
  2. यह एक ऐसा ग्रह है, जिस पर मनुष्य, भ्रमण करने या अधिक समय तक रहने की इच्छा कर सकता है।
  3. मंगल ग्रह पर अतीत में बहता हुए पानी और वातावरण होने के साक्ष्य मिले हैं; और संभवतः इस ग्रह पर कभी जीवन के लिए उपयुक्त स्थितियां भी मौजूद थी।
  4. यह ग्रह, व्यावसायिक यात्रा के लिए भी उपयुक्त हो सकता है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप मंगल ग्रह के वायुमंडल की संरचना के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगल मिशन
  2. पर्सविरन्स रोवर – उद्देश्य
  3. पर्सविरन्स रोवर पर उपकरण
  4. UAE के ‘होप’ मिशन तथा चीन के तियानवेन -1 अंतरिक्ष यान के बारे में
  5. पाथफाइंडर मिशन

मेंस लिंक:

‘परसिवरेंस रोवर’ मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

कोरोनावायरस का म्यू वेरिएंट


(Mu variant of coronavirus)

संदर्भ:

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने SARS-CoV-2  के एक अन्य वेरिएंट – B.1.621 – को  वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ (Variant of Interest – VoI) के रूप में वर्गीकृत किया है, और इसे ‘म्यू वेरिएंट’ (Mu variant) का नाम दिया गया है।

  • इसे पहले कोविड- 19 के चार वेरिएंटस – ईटा (Eta), आयोटा (Iota) ‘कप्पा’ (Kappa) और लैम्डा (Lambda) को ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ (Variant of Interest – VoI) के रूप में नामित किया जा चुका है।
  • कोरोनावायरस का ‘म्यू वेरिएंट’, पहली बार जनवरी 2021 में कोलंबिया में पाया गया था, और अब तक लगभग 39 देशों में इसके मामले मिल चुके हैं।
  • दक्षिण अमेरिका और यूरोप के देशों में ‘म्यू वेरिएंट’ के कुछ बड़े प्रकोपों ​​​​की सूचना मिली है।

‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ (VoI) क्या होता है?

  • ‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ का तात्पर्य, किसी वायरस में होने वाले उन आनुवंशिक उत्परिवर्तनों से होता है, जो ‘संचारण क्षमता और बीमारी की गंभीरता को प्रभावित करने, या प्रतिरक्षा से बचाव करने के लिए जाने जाते है, या इसके लिए भविष्यवाणी की जाती है।
  • किसी वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ के रूप में नामित करना इस तथ्य की स्वीकृति भी होती है, कि यह वैरिएंट कई देशों और जनसंख्या समूहों में महत्वपूर्ण सामुदायिक प्रसारण का कारण बन चुका है।

वायरस का रूपांतरण या उत्परिवर्तन किस प्रकार और क्यों होता है?

  1. वायरस के प्रकारों में एक या एक से अधिक ऐसे उत्परिवर्तन (Mutations) होते हैं, जो इस नए रूपांतरित प्रकार को, अन्य मौजूदा वायरस वेरिएंटस से अलग करते हैं।
  2. दरअसल, वायरस का लक्ष्य एक ऐसे चरण तक पहुंचना होता है जहां वह मनुष्यों के साथ रह सके, क्योंकि उसे जीवित रहने के लिए एक पोषक (Host) की जरूरत होती है।
  3. वायरल RNA में होने वाली त्रुटियों को उत्परिवर्तन कहा जाता है, और इस प्रकार उत्परिवर्तित वायरस को ‘वेरिएंट’ कहा जाता है। और, एक या इससे अधिक उत्परिवर्तनों के परिणामस्वरूप निर्मित होने वाले ‘वेरिएंट’ परस्पर एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं।

उत्परिवर्तिन’ क्या होता है?

  • उत्परिवर्तन अथवा ‘म्युटेशन’ (Mutation) का तात्पर्य, जीनोम अनुक्रमण में होने वाला परिवर्तन होता है।
  • SARS-CoV-2 के मामले में, जोकि एक राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) वायरस है, उत्परिवर्तन का अर्थ, उसके अणु-क्रम संयोजन व्यवस्था में बदलाव होता है।
  • आरएनए वायरस में उत्परिवर्तन, प्रायः वायरस द्वारा स्व-प्रतिलिपियाँ (copies of itself) बनाते समय गलती करने के कारण होता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोरोनावायरस के वेरिएंट
  2. वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (VOI) क्या है?
  3. वैरिएंट ऑफ कंसर्न (वीओसी) क्या है?
  4. ‘उत्परिवर्तन’ क्या होता है?

मेंस लिंक:

कोविड- 19 वायरस के उत्परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘डूरंड रेखा’

डूरंड रेखा (Durand Line), अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2,670 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा रेखा है।

  • 12 नवंबर, 1893 को ब्रिटिश सिविल सेवक सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और तत्कालीन अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान के मध्य ‘डूरंड रेखा’ का सीमांकन करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • यह रेखा, सीमा के दोनों ओर पश्तून कबायली इलाकों को विभाजित करती हुई गुजरती है।
  • डूरंड रेखा का विस्तार, अफगानिस्तान की चीन के साथ सीमा से लेकर ईरान के साथ अफगानिस्तान की सीमा तक है।
  • पाकिस्तान को 1947 में स्वतंत्रता मिलने के साथ ही ‘डूरंड रेखा’ विरासत में मिली थी।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


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