Print Friendly, PDF & Email

[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 3 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा मीडिया में सांप्रदायिक सामग्री पर चेतावनी

 

सामान्य अध्ययन-II

1. लोकसभा उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति हेतु लंबी प्रतीक्षा

 

सामान्य अध्ययन-III

1. अगस्त माह में 45% निर्यात वृद्धि

2. पुलिकट झील में प्रवासी पक्षियों का आगमन

3. ‘एप्पल’ कंपनी पर भारत में ‘एंटीट्रस्ट’ केस दर्ज

4. भारत की ‘कोरोनावायरस जीनोम अनुक्रमण प्रणाली’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारतीय जीवविज्ञानी के लिए ‘बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार’

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: सामाजिक सशक्तीकरण, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्मनिरपेक्षता।

 भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा मीडिया में सांप्रदायिक सामग्री पर चेतावनी


संदर्भ:

हाल ही में, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा देश में मीडिया के कुछ वर्गों के ‘सांप्रदायिकीकरण’ (communalization) से संबंधित एक मामले पर फैसला सुनाते समय कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की गयी हैं।

संबंधित प्रकरण:

  • उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर एक याचिका ने अदालत का इस ओर ध्यान आकर्षित किया है, कि किस प्रकार मीडिया के कुछ वर्गों ने ‘तब्लीगी जमात’ को कोविड -19 के प्रसार से जोड़ा था।
  • देश में, हाल के दिनों में सांप्रदायिक रिपोर्टिंग के ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। जैसेकि, यूपीएससी जिहाद, हादिया मामला, तीन तलाक का मामला आदि मामलों को सांप्रदायिक रंग देकर प्रसारित किया गया था।
  • अदालत ने सोशल मीडिया और OTT प्लेटफार्मों को इनकी कार्यवाहियों के लिए पर्याप्त जवाबदेही की कमी के बारे में भी खेद व्यक्त किया।
  • सरकार द्वारा अदालत को इस संबंध में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों, जैसेकि, ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021’ (Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021) और ‘केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021’ (Cable Television Networks (Amendment) Rules of 2021) के बारे में अवगत कराया गया।

 

‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021’:

  1. इन नियमों के तहत, देश भर में ‘ओवर द टॉप’ (OTT) और डिजिटल पोर्टलों द्वारा एक ‘शिकायत निवारण प्रणाली’ गठित करना अनिवार्य किया गया है। उपयोगकर्ताओं के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग किए जाने के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराने हेतु यह आवश्यक है।
  2. महत्वपूर्ण सोशल मीडिया कंपनियों के लिए ‘एक मुख्य अनुपालन अधिकारी’ (Chief Compliance Officer) की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा, इसके साथ ही ये कंपनियां एक नोडल संपर्क अधिकारी भी नियुक्त करेंगी, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी संपर्क कर सकेंगी।
  3. शिकायत अधिकारी (Grievance Officer): सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एक शिकायत अधिकारी को भी नियुक्त करेंगे, जो 24 घंटे के भीतर कोई भी संबंधित शिकायत दर्ज करेगा और 15 दिनों में इसका निपटारा करेगा।
  4. सामग्री को हटाना (Removal of content): यदि किसी उपयोगकर्ता, विशेष रूप से महिलाओं की गरिमा के खिलाफ शिकायतें- व्यक्तियों के निजी अंगों या नग्नता या यौन कृत्य का प्रदर्शन अथवा किसी व्यक्ति का प्रतिरूपण आदि के बारे में- दर्ज कराई जाती हैं, तो ऐसी सामग्री को, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शिकायत दर्ज करने के 24 घंटे के भीतर हटाना होगा।
  5. मासिक रिपोर्ट: इनके लिए, हर महीने प्राप्त होने वाली शिकायतों की संख्या और इनके निवारण की स्थिति के बारे में मासिक रिपोर्ट भी प्रकाशित करनी होगी।
  6. समाचार प्रकाशकों के लिए विनियमन के तीन स्तर होंगे – स्व-विनियमन, किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की अध्यक्षता में एक स्व-नियामक निकाय, और ‘प्रथा सहिंता एवं शिकायत समिति’ सहित सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा निगरानी। ​​

केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 के बारे में:

यह संशोधित नियम शिकायतों के निपटारे हेतु त्रिस्तरीय तंत्र का प्रावधान करते हैं।

  1. प्रसारकों द्वारा स्व-नियमन (self-regulation by broadcasters),
  2. प्रसारकों के स्व-नियमन निकायों द्वारा स्व-नियमन (self-regulation by the self-regulating bodies of the broadcasters) और
  3. केंद्र सरकार के स्तर पर एक अंतर-विभागीय समिति द्वारा निगरानी (oversight by an Inter-Departmental Committee at the level of the Union government)।

शिकायत निवारण प्रक्रिया:

  1. नियमों के अनुसार, चैनलों पर प्रसारित किसी भी कार्यक्रम से परेशानी होने पर दर्शक उस संबंध में प्रसारक से लिखित शिकायत कर सकता है। ऐसी शिकायत प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर प्रसारक को उसका निपटारा करना होगा और शिकायतकर्ता को अपना निर्णय बताना होगा।
  2. यदि शिकायतकर्ता, प्रसारक के जबाव से संतुष्ट नहीं होता है, तो शिकायत को टीवी चैनलों द्वारा स्थापित स्व-विनियमन निकाय के पास भेजा जा सकता है। ये स्व-नियामक निकाय अपील प्राप्ति के 60 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करेंगे।
  3. यदि शिकायतकर्ता स्व-नियामक निकाय के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, वह इस तरह के निर्णय के 15 दिनों के भीतर, निगरानी तंत्र के तहत विचार करने के लिए केंद्र सरकार से अपील कर सकता है।
  4. इस प्रकार की अपीलों पर निगरानी तंत्र के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति द्वारा कार्रवाई की जाएगी।

समिति की संरचना:

इस समिति की अध्यक्षता सूचना और प्रसारण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव द्वारा की जाएगी और इसमें विभिन्न मंत्रालयों के सदस्य शामिल होंगे।

प्रीलिम्स लिंक

  1. साम्प्रदायिकता क्या है?
  2. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के बारे में।
  3. केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम 2021 के बारे में।

मेंस लिंक

मीडिया के सांप्रदायिकीकरण’ से निपटने के लिए किए गए उपायों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

लोकसभा उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति हेतु लंबी प्रतीक्षा


संदर्भ:

लोकसभा में उपाध्यक्ष (Deputy-speaker) का पद पिछले कई महीनों से रिक्त है।

संबंधित प्रकरण:

  • हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को लोकसभा उपाध्यक्ष के पद पर निर्वाचन नहीं कराने के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। विदित हो कि, लोकसभा उपाध्यक्ष का पद पिछले 830 दिनों से रिक्त है।
  • लोकसभा उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) का पद रिक्त रखना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लंघन है।
  • लोकसभा उपाध्यक्ष को सदन के अध्यक्ष के समान विधायी शक्तियां प्राप्त होती हैं, और मृत्यु, बीमारी या किसी अन्य कारण से अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, लोकसभा उपाध्यक्ष प्रशासनिक शक्तियों को ग्रहण करता है।
  • डिप्टी स्पीकर के निर्वाचन, सदन का उत्तरदायित्व होता है।
  • हाल के दिनों में, संसदीय परंपरा के अनुसार, लोकसभा उपाध्यक्ष के पद पर सामान्यतः सदन में प्रमुख विपक्षी दल के किसी सदस्य को चुना जाता है।
  • डिप्टी स्पीकर के चुनाव में देरी के लिए, विपक्ष की अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुनने की ताकत की कमी और वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा उपाध्यक्ष पद हेतु पर उपयुक्त उम्मीदवार को नामित करने के प्रति उदासीन रवैये को जिम्मेदार ठहराया गया है।
  • वर्तमान में, जब सदन में कार्रवाही के लिए अध्यक्ष उपस्थित नहीं होता है, तो ‘लोकसभा अध्यक्ष पैनल’ में शामिल एक सदस्य सदन की अध्यक्षता करता है।
  • संविधान में, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करने हेतु 10 सदस्यों का एक पैनल गठित करने प्रावधान किया गया है।

लोकसभा उपाध्यक्ष के बारे में:

संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों के निर्वाचन का प्रावधान किया गया है।

  • लोकसभा उपाध्यक्ष का संवैधानिक पद वास्तविक प्राधिकरण की अपेक्षा संसदीय लोकतंत्र का प्रतीकात्मक पद होता है।
  • किसी व्यक्ति के उपाध्यक्ष के रूप में चुने जाने पर निष्पक्ष रहना होता है, हालांकि उसे अपनी मूल राजनीतिक पार्टी से इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं होती है

भूमिका एवं कार्य:

लोकसभा अध्यक्ष के, बीमारी के कारण अवकाश अथवा मृत्यु हो जाने पर या किसी कारण से अनुपस्थित होने पर, उपाध्यक्ष, पीठासीन अध्यक्ष के रूप में कार्यों का निर्वहन करता है।

निर्वाचन:

  • प्रायः, आम चुनावों के बाद लोकसभा की पहली बैठक में लोकसभा के सदस्यों के मध्य से उपसभापति का चुनाव किया जाता है।
  • संसद में बनी हुई परस्पर सहमति के अनुसार, उपाध्यक्ष का पद विपक्षी दल के किसी नेता को दिया जाता है।

कार्यकाल एवं पदत्याग:

लोकसभा अध्यक्ष की भांति, उपाध्यक्ष भी सदन के जीवनपर्यंत पद धारित करता है। हालंकि, वह निम्नलिखित तीन स्थितियों द्वारा अपना पद त्याग सकता है:

  1. उसके सदन के सदस्य न रहने पर;
  2. अध्यक्ष को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित त्यागपत्र द्वारा;
  3. लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा पद से हटाये जाने पर। किंतु, इस प्रस्ताव को पारित करने से पूर्व उसे 14 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होता है।

 

इंस्टा-जिज्ञासु:

लोकसभा अध्यक्ष के निर्वाचन, भूमिका एवं कार्यों पर चर्चा कीजिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपाध्यक्ष के पद से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
  2. भूमिका और कार्य
  3. नियुक्ति और निर्वाचन
  4. क्या निर्वाचित होने के बाद उन्हें अपनी पार्टी से इस्तीफा देने की आवश्यकता है?
  5. कार्यकाल और पदत्याग

मेंस लिंक:

लोकसभा के उपाध्यक्ष का संवैधानिक कार्यालय कुछ वास्तविक प्राधिकरणों की तुलना में संसदीय लोकतंत्र का अधिक प्रतीकात्मक है। चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 अगस्त माह में 45% निर्यात वृद्धि


संदर्भ:

अगस्त माह में भारत का व्यापारिक निर्यात 33.14 बिलियन डॉलर के करीब पहुँच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 45.17% अधिक और अगस्त 2019 के पूर्व-महामारी स्तर से 27.5% अधिक है।

विवरण:

  • निर्यात में वृद्धि के बावजूद, सोने के आयात में तेज वृद्धि होने के कारण ‘व्यापार घाटा’ चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
  • इस दौरान व्यापारिक वस्तुओं के आयात में वृद्धि हुई है, और यह साल दर साल के आधार पर 47% की दर से बढ़कर 47 बिलियन डॉलर तक हो चुका है, जोकि अगस्त 2019 की तुलना में 18% अधिक है। यही, निर्यात में वृद्धि के बावजूद व्यापार घाटे में वृद्धि होने का प्रमुख कारण था।
  • सोने में आयात में भारी वृद्धि देखी गई। अगस्त 2021 में सोने का आयात पांच महीने के उच्च स्तर 7 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया और जुलाई 2021 के सापेक्ष व्यापारिक ‘व्यापार घाटे’ में 88% की वृद्धि के लिए जिम्मेदार था।
  • सरकार ने इस वर्ष $400 बिलियन की व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात का लक्ष्य रखा है, और अब तक 163 बिलियन डॉलर का निर्यात किया जा चुका है।
  • हालांकि वैश्विक व्यापार में सुधार हो रहा है जिससे भारतीय निर्यातकों को मदद मिल रही है, हालांकि, सरकार को बढ़ती हुई माल ढुलाई दरों, बड़े कंटेनरों की कमी और विभिन्न निर्यात योजनाओं के तहत लाभ जारी करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • इस अवधि के दौरान कपड़ा और परिधान क्षेत्र जैसे श्रम प्रधान क्षेत्र में निर्यात में वृद्धि, उम्मीद से कम (14%) रही है।

 

इंस्टा-जिज्ञासु:

भारत की निर्यात वृद्धि के बारे में जानने हेतु पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘व्यापारिक वस्तुओं’ के निर्यात के बारे में
  2. हाल ही में, निर्यात में वृद्धि हेतु किए गए उपाय
  3. निर्यात और आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएं
  4. ‘व्यापार घाटा’ क्या होता है?

मेंस लिंक:

भारत वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी क्यों नहीं बढ़ा पा रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 पुलिकट झील में प्रवासी पक्षियों का आगमन


संदर्भ:

भारत में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित ‘पुलिकट झील’ (Pulicat Lake) पर प्रतिवर्ष आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में वृद्धि होना शुरू हो गयी है।

संबंधित विवरण:

  • इस सकारात्मक गतिविधि का प्रमुख कारण, आसपास के क्षेत्रों में स्थित जलाशयों के भंडारण स्तर में होने वाली वृद्धि है।
  • पुलिकट झील, ओडिशा में स्थित ‘चिल्का झील’ के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
  • ग्रे फ्लेमिंगो और पेलिकन जैसे प्रसिद्ध प्रवासी पक्षी, हर साल पुलिकट झील पर आते हैं।
  • इस झील के भौगोलिक क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी मानसूनी हवाओं, दोनों, से वर्षा होती है।
  • इस झील के समीप ‘नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य’ (Nelapattu Bird Sanctuary), एक प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य स्थित है।
  • इस झील में, ब्लैक हेडेड आइबिस, एशियन ओपनबिल, ब्लैक-क्राउन नाइट हेरॉन और लिटिल कॉर्मोरेंट (little cormorant) पक्षी पाए जाते हैं।
  • अभयारण्य में हर वर्ष आने वाले अन्य प्रवासी पक्षियों में उत्तरी पिंटेल, कॉमन टील, लिटिल ग्रीबे, यूरेशियन कूट, भारतीय स्पॉट-बिल्ड बतख, ग्रे हेरॉन, ओरिएंटल डार्टर, ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट, गार्गनी और गडवाल आदि शामिल हैं।
  • पुलिकट झील क्षेत्र के पास ‘बैरिंगटनिया’ और ‘बबूल नीलोटिका’ जैसी वनस्पति प्रजातियों की उपस्थिति ‘स्पॉट-बिल्ड पेलिकन’ के लिए एक आदर्श प्रजनन स्थल उपलब्ध कराती है।

‘पुलिकट झील’ और ‘नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य’ के बारे में:

नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य:

  • यह अभ्यारण्य, सैकड़ों पेलिकन और अन्य पक्षियों के लिए सबसे बड़े आवासों में से एक माना जाता है।
  • नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य, आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु सीमा पर अवस्थित पुलिकट झील से लगभग 20 किमी उत्तर में स्थित है, और लगभग 459 हेक्टेयर में फैला हुआ है।

पुलिकट झील:

यह, चिल्का झील के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील या लैगून है।

  • आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित इस झील का 96% से अधिक आंध्र प्रदेश के अंतर्गत आता है।
  • पुलिकट झील पक्षी अभयारण्य, इसी झील में अवस्थित है।
  • श्रीहरिकोटा का बैरियर द्वीप, पुलिकट झील को बंगाल की खाड़ी से अलग करता है।
  • इस लैगून में, दक्षिणी किनारे से ‘अरणी नदी’ और उत्तर-पश्चिम किनारे से ‘कलंगी नदी’ सहित कुछ अन्य छोटी नदियों का पानी प्रवाहित होता है।
  • बकिंघम नहर, एक नौगम्य चैनल, पुलिकट झील के पश्चिमी किनारे पर ‘लैगून’ का एक भाग है।
  • पुलिकट और नेलापट्टू में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर साल ‘फ्लेमिंगो फेस्टिवल’ आयोजित किया जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

प्रवासी पक्षी किसी स्थान विशेष पर जाने के लिए अपना मार्ग किस प्रकार खोजते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पुलिकट झील के बारे में
  2. इस क्षेत्र में आने वाले प्रसिद्ध प्रवासी पक्षी
  3. इस झील के संरक्षण के लिए उठाए गए कदम या उपाय

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

‘एप्पल’ कंपनी पर भारत में ‘एंटीट्रस्ट’ केस दर्ज


संदर्भ:

भारतीय अर्थव्यवस्था में अपनी बाजार स्थिति का कथित रूप से दुरुपयोग करने के आरोप में ‘एप्पल इंक’ के खिलाफ एक एंटीट्रस्ट’ केस (Antitrust Case) दर्ज किया गया है।

संबंधित प्रकरण:

  • तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘एप्पल’ द्वारा ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं, जिनके तहत डेवलपर्स को, इसके स्वामित्व वाली ‘इन-एप्प खरीदारी प्रणाली’ (in-app purchase system) का प्रयोग करना अनिवार्य है।
  • एप्पल पर, इसी तरह के आरोप ‘यूरोपीय संघ’ द्वारा भी लगाए गए थे, और पिछले वर्ष ‘यूरोपीय संघ’ में नियामकों द्वारा ‘भुगतान किए जाने वाली (Paid) डिजिटल सामग्री के वितरण पर ‘एप्पल’ द्वारा 30% ‘इन-ऐप’ शुल्क वसूल करने और अन्य प्रतिबंधों के संबंध में जांच शुरू की गयी थी।
  • इस तरह की नीतियां, घरेलू कंपनियों के लिए व्यवसाय करने की लागत बढ़ाकर उन्हें नुकसान पहुंचाती हैं।
  • ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) इस मामले की समीक्षा करेगा, और इसके बाद आयोग, अपनी जांच शाखा को मामले की व्यापक जांच करने का आदेश दे सकता है, या मामले में कोई महत्वपूर्ण तथ्य नहीं मिलने पर इसे पूरी तरह से खारिज भी कर सकता है। नोट: ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ द्वारा समीक्षा किए गए मामलों की फाइलिंग और विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं।
  • हाल ही में, दक्षिण कोरिया की संसद में एक विधेयक पारित किया गया है, जिसमें ‘अल्फाबेट इंक’ के गूगल और एप्पल जैसे ‘प्रमुख ऐप स्टोर ऑपरेटरों’ द्वारा सॉफ़्टवेयर डेवलपर्स को ‘अपना भुगतान सिस्टम का उपयोग करने’ के लिए मजबूर करने पर रोक लगायी गयी है।
  • कंपनियों द्वारा उनकी वर्तमान नीति के लिए दिया गया स्पष्टीकरण: कंपनियों का कहना है, कि इनके द्वारा लगाए गए शुल्क के बदले, उनके ऐप स्टोर द्वारा उपयोगकर्ता कंपनियों को सुरक्षा और विपणन लाभ प्रदान किए जाते हैं।
  • ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा, इसी तरह के एक मामले में ‘गूगल’ (Google) से संबंधित ‘भुगतान प्रणाली’ के विषय पर जांच की जा रही है।

‘एप्पल’ पर लगाए गए अन्य महत्वपूर्ण आरोप:

  1. एप्पल’ द्वारा डेवलपर्स पर 1-5% की कम दरों पर सेवाएं प्रदान करने वाली ‘घरेलू भुगतान प्रणालियों’ का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाए गए है।
  2. इसके अलावा, डेवलपर्स पर ग्राहकों को ‘वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों’ के बारे में सूचित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

हालांकि, हाल के दिनों में इस तरह के प्रतिबंधों में ढील दी गई है। किंतु यह परिवर्तन, ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा मामले की समीक्षा पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा।

‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ के बारे में:

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय है।

  • इसकी स्थापना प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 (Competition Act, 2002) के तहत अधिनियम के प्रशासन, कार्यान्वयन और प्रवर्तन के लिए की गई थी और मार्च 2009 में इसका विधिवत गठन किया गया था।
  • इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।

आयोग के उद्देश्य:

  • प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली प्रक्रियाओं पर रोक लगाना।
  • बाजारों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उसे बनाए रखना।
  • उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना।
  • व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।

प्रतिस्पर्धा आयोग के कार्य:

  1. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का कार्य, प्रतिस्पर्द्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले अभ्यासों को समाप्त करना, प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना और उसे जारी रखना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना तथा भारतीय बाज़ारों में व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।
  2. आयोग, किसी क़ानून के तहत स्थापित किसी सांविधिक प्राधिकरण से प्राप्त संदर्भ पर प्रतिस्पर्द्धा संबंधी विषयों पर परामर्श प्रदान करता है, तथा प्रतिस्पर्द्धा की भावना को संपोषित करता है।
  3. इसके अतिरिक्त, आयोग द्वारा सार्वजनिक जागरूकता पैदा करने संबंधी कार्य एवं प्रतिस्पर्द्धा के विषयों पर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।

प्रतिस्पर्धा अधिनियम:

(The Competition Act)

राघवन समिति की सिफारिशों पर ‘एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार पद्धति अधिनियम’, 1969  (Monopolies and Restrictive Trade Practices Act, 1969) अर्थात MRTP एक्ट को निरस्त कर, इसके स्थान पर ‘प्रतिस्पर्धा अधिनियम’, 2002 लागू किया गया था।

प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का संशोधित स्वरूप ‘प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम’, 2007, प्रतिस्पर्धा-रोधी करारों, उद्यमों द्वारा प्रभावी स्थिति के दुरूपयोग का निषेध करता है तथा संयोजनों (अधिग्रहण, नियंत्रण तथा M&A की प्राप्ति) को विनियमित करता है; इन संयोजनों के कारण भारत में प्रतिस्पर्धा पर अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है अथवा उसके पड़ने की संभावना हो सकती है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘एंटी-ट्रस्ट केस’ क्या है?
  2. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) – भूमिकाएं, जिम्मेदारियां और कार्य
  3. एंटी-ट्रस्ट संबंधित महत्वपूर्ण मामले
  4. प्रतिस्पर्धा आयोग अधिनियम

मेंस लिंक:

भारतीय डिजिटल बाजार में एक निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना, प्रत्येक हितधारक के सर्वोत्तम हित में है। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

भारत की ‘कोरोनावायरस जीनोम अनुक्रमण प्रणाली’


(India’s coronavirus genome sequencing system)

संदर्भ:

भारत में नोवेल कोरोनावायरस के अनुक्रमण और विश्लेषण किए जाने में तेजी से कमी हुई है।

  • भारत में अनुक्रमित और विश्लेषण किए गए कोरोनावायरस नमूनों की संख्या में गिरावट आई है।
  • भारत में, दिसंबर 2020 में जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाओं के एक संघ, जीनोमिक्स (INSACOG) पर ‘भारतीय SARS-CoV-2 कंसोर्टियम’ का गठन किया गया था।
  • INSACOG की घोषणा करते हुए, केंद्र सरकार ने सभी सकारात्मक नमूनों में से 5 प्रतिशत का विश्लेषण करने का लक्ष्य रखा था। इस पद्धति को ‘यादृच्छिक निगरानी’ (Randomised Surveillance) के रूप में जाना जाता है।

‘जीनोम अनुक्रमण’ का उद्देश्य:

  • ‘जीनोम अनुक्रमण’ का मुख्य उद्देश्य ‘निगरानी’ करना है। यह वायरस के प्रचलित वेरिएंट, उभरते वेरिएंट (जैसे डेल्टा) और दोबारा संक्रमण पैदा करने वाले वेरिएंट की सही तस्वीर हासिल करने में मदद करता है।
  • वर्तमान में, वायरस के चार ‘वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न’ (VoCs) विश्व के अलग-अलग भागों में देखे जा चुके हैं – अल्फा वेरिएंट (ब्रिटेन में सबसे पहले देखा गया), बीटा वेरिएंट (ब्राजील), गामा वेरिएंट (दक्षिण अफ्रीका) और डेल्टा वेरिएंट (भारत)।
  • ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ द्वारा ‘अनुक्रमण के आंकड़ों’ को GISAID जैसे ओपन-एक्सेस प्लेटफॉर्म पर संग्रहीत किए जाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दुनिया के एक हिस्से में किए गए अनुक्रम को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय द्वारा देखा और समझा जा सके।

जीन अनुक्रमण (Gene Sequencing) क्या है?

जीनोम (Genome) एक डीएनए (DNA) अथवा कोशिका में जीन का अनुक्रम होता है। अधिकांश DNA नाभिक में होते हैं और एक जटिल संरचना में परस्पर गुथित होते है, जिसे गुणसूत्र (Chromosome) कहा जाता है।

  • प्रत्येक मानव कोशिका में गुणसूत्रों का एक युग्म होता है, जिनमें से प्रत्येक गुणसूत्र में तीन बिलियन आधार-युग्म होते है, अथवा प्रत्येक चार अणुओं में एक अणु विशिष्ट तरीके से युग्मित होता है।
  • आधार युग्मों के अनुक्रम और इन अनुक्रमों की अलग-अलग लंबाई ‘जीन’ (Genes) का निर्माण करती है।

जीनोम अनुक्रमण का अर्थ है, ‘व्यक्ति में आधार युग्म के सटीक क्रम को समझना’। जीनोमिक अनुक्रमण एक ऐसी तकनीक है जो हमें DNA या RNA के भीतर पाए जाने वाले आनुवंशिक विवरण को पढ़ने और व्याख्या करने की अनुमति प्रदान करती है।

जीनोम अनुक्रमण की आवश्यकता:

  • भारत के आनुवंशिक पूल की विविधता का मानचित्रण, व्यक्‍ति आधारित दवाओं की आधारशिला रखेगा और इसे वैश्विक मानचित्र पर पेश करेगा।
  • हमारे देश में जनसंख्या की विविधता और मधुमेह, मानसिक स्वास्थ्य आदि सहित जटिल विकारों के रोग भार को ध्यान में रखते हुए, एक बार हमारे पास ‘आनुवंशिक आधार’ उपलब्ध होने के बाद, बीमारी की शुरुआत से पहले ही इस पर कार्रवाई करना संभव हो सकता है।

इंडियन SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के बारे में:

‘इंडियन SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (Indian SARS-CoV-2 Consortium on Genomics – INSACOG) को संयुक्त रूप से केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ (ICMR) के सहयोग से शुरू किया गया है।

  • ‘यह, SARS-CoV-2 में जीनोमिक विविधताओं की निगरानी के लिए 28 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का एक समूह है।
  • यह पूरे देश में SARS-CoV-2 वायरस की संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण करता है, जिससे वायरस के प्रसार और विकास को समझने में सहायता मिलती है।
  • INSACOG का उद्देश्य रोग की गतिशीलता और गंभीरता को समझने के लिए नैदानिक ​​नमूनों की अनुक्रमण पर ध्यान केंद्रित करना है।

GISAID क्या है?

‘एवियन इन्फ्लूएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल’ (Global initiative on sharing avian influenza data – GISAID) प्लेटफ़ॉर्म की स्थापना वर्ष 2008 में विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) के 61वे सम्मलेन के दौरान की गयी थी।

  • यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विभिन्न देशों हेतु जीनोम संबंधी डेटा साझा करने के लिये एक सार्वजनिक मंच है।
  • GISAID इन्फ्लूएंजा वायरस तथा COVID-19 के लिए जिम्मेदार नोवेल कोरोनावायरस के जीनोमिक डेटा प्राथमिक स्रोत है।
  • एकत्रित डेटा में इन्फ्लुएंज़ा वायरस अनुक्रम, उनसे संबंधित नैदानिक और महामारी संबंधी डेटा, भौगोलिक और साथ ही प्रजाति-विशेष डेटा भी शामिल है।

भारत में जन स्वास्थ्य हेतु जीनोमिक्स (IndiGen) कार्यक्रम

इंडीजीन कार्यक्रम (IndiGen Program) की शुरुआत CSIR द्वारा अप्रैल 2019 में की गयी थी।

  • इसका लक्ष्य भारत में विविध जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों व्यक्तियों का संपूर्ण जीन अनुक्रमण (Genome Sequencing) करना है।
  • इसका उद्देश्य आनुवंशिक महामारी विज्ञान को सक्षम बनाना और जनसंख्या जीनोम डेटा का उपयोग करके सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोगों को विकसित करना है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जीन’ (Genes) क्या होते हैं?
  2. जीनोम अनुक्रमण क्या है?
  3. इंडीजीन कार्यक्रम के बारे में
  4. INSACOG) के बारे में
  5. जीन अनुक्रमण के अनुप्रयोग

मेंस लिंक:

जीनोम अनुक्रमण से आप क्या समझते हैं? इस संबंध में भारत द्वारा किये गए विभिन्न प्रयासों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारतीय जीवविज्ञानी के लिए ‘बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार’

भारतीय जीवविज्ञानी शैलेंद्र सिंह को तीन ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ कछुआ संरक्षण प्रजातियों को विलुप्त होने के कगार से वापस लाने के लिए ‘बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार’ (Behler Turtle Conservation Award) से सम्मानित किया गया है।

  • यह तीन ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ कछुआ प्रजातियाँ- लाल रंग के कवच वाला कछुआ ‘बाटागुर कचुगा’ (Red-crowned Roofed Turtle – Batagur kachuga), उत्तरी नदी टेरापिन कछुआ (बटागुर बस्का – Batagur baska) और ब्लैक सॉफ़्टशेल कछुआ (निल्सोनिया नाइग्रिकन्स – Nilssonia nigricans) हैं।
  • ‘बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार’ कछुआ संरक्षण में शामिल कई वैश्विक निकायों जैसे ‘कछुआ जीवन रक्षा गठबंधन’/ टर्टल सर्वाइवल एलायंस, IUCN/SSC कच्छप / टॉर्टस (Tortoise)और मीठे पानी के कछुआ विशेषज्ञ समूह, कछुआ संरक्षण, और ‘कछुआ संरक्षण कोष’ द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • भारत में मीठे पानी के कछुओं / टर्टल (Turtle) और कच्छपों (टॉर्टस) की 29 प्रजातियां पायी जाती हैं।

टर्टल और टॉर्टस के बीच अंतर: टॉर्टस की पीठ का कवच में अधिक गोल और गुंबददीय आकार का होता है, जबकि ‘टर्टल’ का कवच पतला और अधिक चमकीला होता है। टॉर्टस अपना अधिकांश समय जमीन पर बिताते हैं और टर्टल’ पानी में जीवन बिताने के लिए अधिक अनुकूलित होते हैं।

टर्टल सर्वाइवल एलायंस (TSA) के बारे में:

मीठे पानी के कछुओं / टर्टल (Turtle) और टॉर्टस के ‘सतत कैप्टिव प्रबंधन’ (sustainable captive management) के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के सहयोग के लिए टर्टल सर्वाइवल एलायंस (टीएसए) का गठन वर्ष 2001 में किया गया था। शुरुआत में TSA को IUCN की ‘टर्टल और टॉर्टस विशेषज्ञ समूह की एक ‘टास्क फोर्स’ नामित किया गया था।


  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos