HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश के प्रयासों का भारतीयों के समर्थन किए जाने संबंधी प्रश्न पर विभिन्न नेताओं के विचारों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- गांधी ने मित्र-राष्ट्रों को बिना शर्त समर्थन देने की वकालत की।
- जवाहरलाल नेहरू ने वकालत की कि यह सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का आदर्श समय है।
- सुभाष चंद्र बोस की राय थी कि यह स्थिति का लाभ उठाने और ब्रिटेन से आजादी छीनने का सही समय था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
- युद्ध के दौरान ब्रिटिश के प्रयासों का भारतीयों के समर्थन किए जाने संबंधी प्रश्न पर विभिन्न नेताओं की अलग-अलग राय थी।
- गांधी, जिन्हें इस युद्ध में ब्रिटेन के प्रति सहानुभूति थी, क्योंकि वे फासीवादी विचारधारा के विरोधी थे। इन्होनें मित्र-राष्ट्रों को बिना शर्त समर्थन देने की वकालत की। वे युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को अवरोधित करने के पक्ष में नहीं थे।
- सुभाष बोस और अन्य समाजवादियों, जैसे कि आचार्य नरेंद्र देव और जयप्रकाश नारायण की युद्ध में दोनों पक्षों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं थी। उन्होंने सोचा कि यह एक सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का आदर्श समय है। इस प्रकार स्थिति का लाभ उठाया जाना चाहिए और ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त कर लेनी चाहिए।
- जवाहरलाल नेहरू गांधी या समाजवादियों की राय को मानने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने तब तक किसी भी भारतीय की भागीदारी की वकालत नहीं की जब तक कि भारत स्वयं स्वतंत्र नहीं हो जाता है। हालाँकि, उसी समय, तत्काल सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने से ब्रिटेन की समस्याओं का कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ।
Incorrect
उत्तर: a)
- युद्ध के दौरान ब्रिटिश के प्रयासों का भारतीयों के समर्थन किए जाने संबंधी प्रश्न पर विभिन्न नेताओं की अलग-अलग राय थी।
- गांधी, जिन्हें इस युद्ध में ब्रिटेन के प्रति सहानुभूति थी, क्योंकि वे फासीवादी विचारधारा के विरोधी थे। इन्होनें मित्र-राष्ट्रों को बिना शर्त समर्थन देने की वकालत की। वे युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को अवरोधित करने के पक्ष में नहीं थे।
- सुभाष बोस और अन्य समाजवादियों, जैसे कि आचार्य नरेंद्र देव और जयप्रकाश नारायण की युद्ध में दोनों पक्षों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं थी। उन्होंने सोचा कि यह एक सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का आदर्श समय है। इस प्रकार स्थिति का लाभ उठाया जाना चाहिए और ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त कर लेनी चाहिए।
- जवाहरलाल नेहरू गांधी या समाजवादियों की राय को मानने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने तब तक किसी भी भारतीय की भागीदारी की वकालत नहीं की जब तक कि भारत स्वयं स्वतंत्र नहीं हो जाता है। हालाँकि, उसी समय, तत्काल सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने से ब्रिटेन की समस्याओं का कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ।
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Question 2 of 5
2. Question
‘अगस्त प्रस्ताव 1940′ के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- वायसराय की कार्यकारी परिषद का विस्तार करना जिसमें अधिकांश भारतीय शामिल होंगे।
- संविधान का निर्माण पूरी तरह से भारतीयों द्वारा किया जायेगा।
- अल्पसंख्यकों की सहमति से अपनाया जाने वाला भावी संविधान।
- इसने भारत के उद्देश्य के रूप में प्रभुत्व की स्थिति निर्धारित की।
- पहली बार इसने भारतीयों के संविधान बनाने के अधिकार को मान्यता दी।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
लिनलिथगो ने अगस्त प्रस्ताव (अगस्त 1940) की घोषणा की जिसने प्रस्तावित किया:
- भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस;
- वायसराय की कार्यकारिणी परिषद का विस्तार करना जिसमें अधिकांश भारतीय होंगे। (प्रमुख राजनीतिक दलों से);
- युद्ध के पश्चात् संविधान सभा का गठन किया जायेगा, जिसमें मुख्यतया भारतीय अपने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक धारणाओं के अनुरूप संविधान के निर्माण की रूपरेखा सुनिश्चित करेंगे। संविधान ऐसा होगा कि रक्षा, अल्पसंख्यकों के हित, राज्यों से संधियां तथा अखिल भारतीय सेवायें इत्यादि मुद्दों पर भारतीयों के अधिकार का पूर्ण ध्यान रखा जायेगा। तथा
- अल्पसंख्यकों को आश्वस्त किया गया कि सरकार ऐसी किसी संस्था को शासन नहीं सोपेगी, जिसके विरुद्ध सशक्त मत हो।
पहली बार, भारतीयों के संविधान बनाने के निहित अधिकार को मान्यता दी गई और संविधान सभा संबंधी कांग्रेस की मांग को स्वीकार कर लिया गया। डोमिनियन स्टेटस को स्पष्ट रूप से प्रस्तावित किया गया था।
Incorrect
उत्तर: d)
लिनलिथगो ने अगस्त प्रस्ताव (अगस्त 1940) की घोषणा की जिसने प्रस्तावित किया:
- भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस;
- वायसराय की कार्यकारिणी परिषद का विस्तार करना जिसमें अधिकांश भारतीय होंगे। (प्रमुख राजनीतिक दलों से);
- युद्ध के पश्चात् संविधान सभा का गठन किया जायेगा, जिसमें मुख्यतया भारतीय अपने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक धारणाओं के अनुरूप संविधान के निर्माण की रूपरेखा सुनिश्चित करेंगे। संविधान ऐसा होगा कि रक्षा, अल्पसंख्यकों के हित, राज्यों से संधियां तथा अखिल भारतीय सेवायें इत्यादि मुद्दों पर भारतीयों के अधिकार का पूर्ण ध्यान रखा जायेगा। तथा
- अल्पसंख्यकों को आश्वस्त किया गया कि सरकार ऐसी किसी संस्था को शासन नहीं सोपेगी, जिसके विरुद्ध सशक्त मत हो।
पहली बार, भारतीयों के संविधान बनाने के निहित अधिकार को मान्यता दी गई और संविधान सभा संबंधी कांग्रेस की मांग को स्वीकार कर लिया गया। डोमिनियन स्टेटस को स्पष्ट रूप से प्रस्तावित किया गया था।
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Question 3 of 5
3. Question
गांधीजी ने निम्नलिखित किस असंतोष के कारण “व्यक्तिगत सत्याग्रह” शुरू करने का फैसला किया
Correct
उत्तर: c)
भारतीयों के सहयोग प्राप्त करने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, ब्रिटिश सरकार ने अगस्त 1940 की घोषणा की, जिसे ‘अगस्त ऑफर’ के रूप में जाना जाता था।
गांधीजी इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू करने का फैसला किया।
व्यक्तिगत सत्याग्रह की प्रकृति सीमित, प्रतीकात्मक और अहिंसक थी और गांधीजी द्वारा सत्याग्रहियों को चयन करना था।
Incorrect
उत्तर: c)
भारतीयों के सहयोग प्राप्त करने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, ब्रिटिश सरकार ने अगस्त 1940 की घोषणा की, जिसे ‘अगस्त ऑफर’ के रूप में जाना जाता था।
गांधीजी इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू करने का फैसला किया।
व्यक्तिगत सत्याग्रह की प्रकृति सीमित, प्रतीकात्मक और अहिंसक थी और गांधीजी द्वारा सत्याग्रहियों को चयन करना था।
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Question 4 of 5
4. Question
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ‘सर स्टेफोर्ड क्रिप्स’ मिशन की परिकल्पना की गई थी
Correct
उत्तर: d)
मिशन के मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार थे।
- डोमिनियन स्टेटस के दर्जे के साथ एक भारतीय संघ की स्थापना की जाएगी; यह संघ राष्ट्रमंडल के साथ अपने संबंधों के निर्धारण में स्वतंत्र होगा तथा संयुक्त राष्ट्र संघ एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय निकायों और संस्थाओं में अपनी भूमिका को खुद ही निर्धारित करेगा।
- युद्ध की समाप्ति के पश्चात् नए संविधान के निर्माण हेतु संविधान निर्मात्री परिषद का गठन किया जाएगा। इसके कुछ सदस्य प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा निर्वाचित किये जाएंगे तथा कुछ रियासतों के राजाओं द्वारा मनोनीत किये जाएंगे।
- ब्रिटिश सरकार, संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा बनाए गए नए संविधान को निम्नलिखित शर्तों के अधीन स्वीकार करेगी- (i) संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा निर्मित संविधान जिन प्रांतों को स्वीकार नहीं होगा, वे भारतीय संघ से पृथक होने के अधिकारी होंगे। पृथक होने वाले प्रांतों को अपना पृथक संविधान बनाने का अधिकार होगा। देशी रियासतों को भी इसी प्रकार का अधिकार होगा और (ii) नवगठित संविधान निर्मात्री परिषद तथा ब्रिटिश सरकार सत्ता के हस्तांतरण तथा प्रजातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के मुद्दे को आपसी समझौते द्वारा हल करेंगे।
- उक्त व्यवस्था होने तक भारत के सुरक्षा संबंधी दायित्वों का निर्वहन ब्रिटेन करेगा तथा वायसराय की समस्त शक्तियाँ पूर्ववत् बनी रहेंगी।
Incorrect
उत्तर: d)
मिशन के मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार थे।
- डोमिनियन स्टेटस के दर्जे के साथ एक भारतीय संघ की स्थापना की जाएगी; यह संघ राष्ट्रमंडल के साथ अपने संबंधों के निर्धारण में स्वतंत्र होगा तथा संयुक्त राष्ट्र संघ एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय निकायों और संस्थाओं में अपनी भूमिका को खुद ही निर्धारित करेगा।
- युद्ध की समाप्ति के पश्चात् नए संविधान के निर्माण हेतु संविधान निर्मात्री परिषद का गठन किया जाएगा। इसके कुछ सदस्य प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा निर्वाचित किये जाएंगे तथा कुछ रियासतों के राजाओं द्वारा मनोनीत किये जाएंगे।
- ब्रिटिश सरकार, संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा बनाए गए नए संविधान को निम्नलिखित शर्तों के अधीन स्वीकार करेगी- (i) संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा निर्मित संविधान जिन प्रांतों को स्वीकार नहीं होगा, वे भारतीय संघ से पृथक होने के अधिकारी होंगे। पृथक होने वाले प्रांतों को अपना पृथक संविधान बनाने का अधिकार होगा। देशी रियासतों को भी इसी प्रकार का अधिकार होगा और (ii) नवगठित संविधान निर्मात्री परिषद तथा ब्रिटिश सरकार सत्ता के हस्तांतरण तथा प्रजातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के मुद्दे को आपसी समझौते द्वारा हल करेंगे।
- उक्त व्यवस्था होने तक भारत के सुरक्षा संबंधी दायित्वों का निर्वहन ब्रिटेन करेगा तथा वायसराय की समस्त शक्तियाँ पूर्ववत् बनी रहेंगी।
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Question 5 of 5
5. Question
क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- डोमिनियन स्टेटसवाले भारतीय संघ की स्थापना।
- युद्ध की समाप्ति के बाद, प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा चुने गए सभी सदस्यों के द्वारा एक संविधान सभा का गठन।
- भारत की रक्षा ब्रिटिश शासन के तहत ही रहेगी।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
मार्च 1942 में, स्टैफोर्ड क्रिप्स की अध्यक्षता में एक मिशन को युद्ध के लिए भारतीय समर्थन प्राप्त करने के लिए संवैधानिक प्रस्तावों के साथ भारत भेजा गया था।
मिशन के मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार थे।
- डोमिनियन स्टेटस के दर्जे के साथ एक भारतीय संघ की स्थापना की जाएगी; यह संघ राष्ट्रमंडल के साथ अपने संबंधों के निर्धारण में स्वतंत्र होगा तथा संयुक्त राष्ट्र संघ एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय निकायों और संस्थाओं में अपनी भूमिका को खुद ही निर्धारित करेगा।
- युद्ध की समाप्ति के पश्चात् नए संविधान के निर्माण हेतु संविधान निर्मात्री परिषद का गठन किया जाएगा। इसके कुछ सदस्य प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा निर्वाचित किये जाएंगे तथा कुछ रियासतों के राजाओं द्वारा मनोनीत किये जाएंगे।
- ब्रिटिश सरकार, संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा बनाए गए नए संविधान को निम्नलिखित शर्तों के अधीन स्वीकार करेगी- (i) संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा निर्मित संविधान जिन प्रांतों को स्वीकार नहीं होगा, वे भारतीय संघ से पृथक होने के अधिकारी होंगे। पृथक होने वाले प्रांतों को अपना पृथक संविधान बनाने का अधिकार होगा। देशी रियासतों को भी इसी प्रकार का अधिकार होगा और (ii) नवगठित संविधान निर्मात्री परिषद तथा ब्रिटिश सरकार सत्ता के हस्तांतरण तथा प्रजातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के मुद्दे को आपसी समझौते द्वारा हल करेंगे।
- उक्त व्यवस्था होने तक भारत के सुरक्षा संबंधी दायित्वों का निर्वहन ब्रिटेन करेगा तथा वायसराय की समस्त शक्तियाँ पूर्ववत् बनी रहेंगी।
Incorrect
उत्तर: c)
मार्च 1942 में, स्टैफोर्ड क्रिप्स की अध्यक्षता में एक मिशन को युद्ध के लिए भारतीय समर्थन प्राप्त करने के लिए संवैधानिक प्रस्तावों के साथ भारत भेजा गया था।
मिशन के मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार थे।
- डोमिनियन स्टेटस के दर्जे के साथ एक भारतीय संघ की स्थापना की जाएगी; यह संघ राष्ट्रमंडल के साथ अपने संबंधों के निर्धारण में स्वतंत्र होगा तथा संयुक्त राष्ट्र संघ एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय निकायों और संस्थाओं में अपनी भूमिका को खुद ही निर्धारित करेगा।
- युद्ध की समाप्ति के पश्चात् नए संविधान के निर्माण हेतु संविधान निर्मात्री परिषद का गठन किया जाएगा। इसके कुछ सदस्य प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा निर्वाचित किये जाएंगे तथा कुछ रियासतों के राजाओं द्वारा मनोनीत किये जाएंगे।
- ब्रिटिश सरकार, संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा बनाए गए नए संविधान को निम्नलिखित शर्तों के अधीन स्वीकार करेगी- (i) संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा निर्मित संविधान जिन प्रांतों को स्वीकार नहीं होगा, वे भारतीय संघ से पृथक होने के अधिकारी होंगे। पृथक होने वाले प्रांतों को अपना पृथक संविधान बनाने का अधिकार होगा। देशी रियासतों को भी इसी प्रकार का अधिकार होगा और (ii) नवगठित संविधान निर्मात्री परिषद तथा ब्रिटिश सरकार सत्ता के हस्तांतरण तथा प्रजातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के मुद्दे को आपसी समझौते द्वारा हल करेंगे।
- उक्त व्यवस्था होने तक भारत के सुरक्षा संबंधी दायित्वों का निर्वहन ब्रिटेन करेगा तथा वायसराय की समस्त शक्तियाँ पूर्ववत् बनी रहेंगी।
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