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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 2 September 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-II

1. NEET में भाग लेने वाले गैर-निवासी भारतीयों को एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण नहीं

2. खाद्य कीमतों को नियंत्रित करने हेतु श्रीलंका में आर्थिक आपातकाल घोषित

3. 20 सालों में अमेरिका की अफगानिस्तान में उपलब्धियां

 

सामान्य अध्ययन-III

1. डंपिंग बंद नहीं होने तक असम की आर्द्रभूमियों पर संकट जारी: कार्यकर्ता

2. इरावदी डॉल्फिन

3. शिकारी पक्षी प्रजातियाँ / रैप्टर प्रजातियाँ

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. लद्दाख का राजकीय पशु और पक्षी

2. बहु-पक्षीय युद्धाभ्यास जैपेड 2021

3. नौसेना विमानन के लिए उच्च सम्मान

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

 NEET में भाग लेने वाले गैर-निवासी भारतीयों को एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण नहीं


संदर्भ:

हाल ही में, स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है, कि ‘राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा’ (National Eligibility cum Entrance TestNEET) में भाग लेने वाले अभ्यर्थी मात्र किसी एक आरक्षण श्रेणी का विकल्प चुन सकते हैं।

संबंधित विवरण:

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ समुदायों के ‘अनिवासी भारतीय’ (NRI) छात्रों को आगामी एनईईटी परीक्षाओं में आरक्षण लाभ प्रदान नहीं किए जाएंगे।

  • आकांक्षी एनआरआई छात्रों के अनुसार, राष्ट्रीयता के रूप में भारतीयचुनने के बाद, उन्हें केंद्रीय, राज्य और डीम्ड संस्थानों में ‘एनआरआई कोटे’ के तहत सीटों से भी वंचित कर दिया जाता है।
  • वर्गीकरण की यह पद्धति, उनके पास ‘भारतीय नागरिकता’ होने के बाद भी ‘अनिवासी भारतीयों’ के खिलाफ भेदभाव करती है।

‘अनिवासी भारतीय’ किसे माना जाता है?

 

 

NEET परीक्षा के बारे में:

‘राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा’ (National Eligibility cum Entrance Test – NEET), भारतीय मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में MBBS और BDS प्रोग्राम में अध्ययन करने के लिए एक अहर्ता परीक्षा है। यह परीक्षा ‘राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी’ / ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) द्वारा आयोजित की जाती है।

 

इंस्टा-जिज्ञासु:

भारत की आरक्षण नीति के बारे में अधिक जानने हेतु पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक

  1. ‘अनिवासी भारतीय’ (NRI) कौन होते है?
  2. अनिवासी भारतीयों को प्रदान किए जाने वाले लाभ, यदि कोई हो?
  3. NRI, PIO और OCI के बीच अंतर
  4. भारत में आरक्षण नीति
  5. NEET परीक्षा

मेंस लिंक

क्या ‘अनिवासी भारतीय’ छात्रों को समुदाय आधारित आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

खाद्य कीमतों को नियंत्रित करने हेतु श्रीलंका में आर्थिक आपातकाल घोषित


संदर्भ:

हाल ही में, श्रीलंका में देश की आधिकारिक मुद्रा की कीमत में भारी गिरावट और इसकी वजह से खाद्य कीमतों में तीव्र वृद्धि होने के बाद उत्पन्न ‘मुद्रास्फीति’ को नियंत्रित करने के लिए ‘श्रीलंका के राष्ट्रपति’ द्वारा देश में ‘आर्थिक आपातकाल’ (Economic Emergency) की घोषणा की गयी है।

इस अभूतपूर्व निर्णय की वजह:

  • नवंबर 2019 के बाद से श्रीलंकाई रुपये की कीमत में लगभग 20% की गिरावट आई है।
  • महामारी के कारण उच्च वैश्विक बाजार मूल्य की वजह से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है।
  • व्यापारियों द्वारा की गयी जमाखोरी ने भी, श्रीलंका को वित्तीय संकट से निपटने हेतु इस आपातकालीन रास्ता चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • पर्यटन, जोकि श्रीलंका के मुख्य व्यवसायों में से एक है, महामारी के कारण आरोपित यात्रा प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हुआ है।
  • श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में पिछले साल रिकॉर्ड 3.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी थी।

आर्थिक आपातकाल घोषणा के परिणाम:

आर्थिक आपातकाल की घोषणा श्रीलंका सरकार को, व्यापारियों द्वारा आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी पर प्रतिबंध लगाने और आवश्यक वस्तुओं की सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर बिक्री का सुनिश्चितीकरण करने सक्षम करेगी और यह घोषणा सरकार के लिए, व्यापारियों द्वारा राज्य को देय आयात शुल्क वसूलने में भी मदद करेगी।

मुद्रास्फीति और महामारी:

मुद्रास्फीति (Inflation), एक निश्चित अवधि के दौरान ‘कीमतों’ में होने वाली वृद्धि दर होती है। कई देशों में, महामारी की चपेट में आने के बाद से मुद्रास्फीति लगातार बढ़ रही है; और इसका मुख्य कारण महामारी के कारण ‘आपूर्ति और मांग’ में उत्पन्न व्यवधान है।

 

मुद्रास्फीति में हालिया वृद्धि के कुछ कारण:

  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि। इसकी वजह से कई उद्योगों में उत्पादन-लागत बढ़ती जा रही है।
  • श्रम बाजार में अस्थिरता भी ‘व्यापार के सामान्य प्रचालन’ में बाधा उत्पन्न कर रही है।
  • इसके अलावा, विशेष रूप से लॉकडाउन लगने के डर से आम जनता के बीच आवश्यक वस्तुओं की मांग में वृद्धि हुई है। इससे आम लोगों में जमाखोरी का चलन बढ़ गया है।
  • बाजार में जमाखोरी का खतरा अभी भी व्याप्त है।
  • वैश्विक कीमतों में वृद्धि की वजह से, अधिक कीमत मिलने की संभावना के कारण उत्पादों को अधिक वैश्विक बाजारों की ओर मोड़ा जा रहा है; जिससे घरेलू बाजार में उत्पादों की कमी पैदा हो रही है।
  • अनियमित वर्षा प्रतिरूप के कारण भी कुछ देशों में मुद्रास्फीति की और वृद्धि हुई है।

आगे की राह:

  • उचित उपायों, (जैसेकि – जमाखोरी पर नियंत्रण) को लागू करते हुए ‘आवश्यक वस्तुओं’ की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • कीमतों में भारी वृद्धि को रोकने के लिए आवश्यक वस्तुओं के मूल्य निर्धारण तंत्र की निगरानी की जाए।
  • आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को कम करने के लिए सरकारी स्टॉक की बिक्री के माध्यम से बाजार में हस्तक्षेप किया जाए।
  • पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में क्या जाए। इससे ‘उत्पाद’ पर वर्तमान में लगाए जा रहे करों की बहुलता में कमी होगी।
  • वैक्सीन कवरेज में सुधार किया जाए, ताकि आने वाले समय में, बाजार में न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित किया जा सके।

 

इंस्टा-जिज्ञासु:

महामारी के बाद महंगाई’ में किस प्रकार वृद्धि हो सकती है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘मुद्रास्फीति’ क्या है?
  2. मुद्रास्फीति के कारण और प्रभाव
  3. भारत में मुद्रास्फीति में हालिया वृद्धि के पीछे कारण
  4. मौद्रिक कीमत में वृद्धि और मूल्यह्रास के प्रभाव

मेंस लिंक:

वर्तमान परिस्थितियों में, भारत में मुद्रास्फीति को कम करने के संभावित तरीकों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

 20 सालों में अमेरिका की अफगानिस्तान में उपलब्धियां


संदर्भ:

आतंकवाद के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लगभग दो दशकों के बाद, हाल ही में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी हो गयी है।

पिछले 20 वर्षों में अफगानिस्तान में अमेरिका की उपलब्धियों का विश्लेषण:

  • राष्ट्रपति बिडेन के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका इस बात का दावा कर रहा है, कि उसने अफगानिस्तान से संचालित ‘अल-कायदा आतंकवादी नेटवर्क’ को महत्वपूर्ण ढंग से विफल कर दिया है और इसके नेता ओसामा बिन लादेन को भी मार गिराया है; जिससे 9/11 के आतंकी हमलों का इंसाफ भी पूरा हो गया है।
  • राष्ट्रपति बिडेन के अनुसार, वर्ष 2001 में अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान पर आक्रमण करने का यही मुख्य लक्ष्य था, न कि राष्ट्र-निर्माण का। इस तरह से राष्ट्रपति बिडेन ने अफगानिस्तान से सैनिकों की को सही ठहराने का प्रयास किया है।
  • हालांकि, इस तरह के विचार का कई लोग इस आधार पर विरोध कर रहे हैं कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध जीतने के प्रमुख पहलू के रूप में ‘तालिबान को सत्ता से हटाने’ का लक्ष्य रखा था। और इसी वजह से, अमेरिका ने ‘अल-कायदा नेटवर्क को खत्म करने’ और ‘ओसामा बिन लादेन’ को मारने के बाद भी अपने संसाधनों का अफगानिस्तान में निवेश जारी रखा था।
  • महत्वपूर्ण बात यह है, कि अमरीका ने अफगानिस्तान में जिस आतंकवाद के खिलाफ युद्ध करने का प्रण लिया था, वह सफल नहीं हो सका है, क्योंकि अफगानिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में, अभी भी अल-कायदा और ‘इस्लामिक स्टेट’ के आतंकवादी नेटवर्क काफी सक्रिय हैं।
  • हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन्यो बलों द्वारा चलाए जा रहे ‘निकासी प्रयासों’ पर ‘इस्लामिक स्टेट’ (आईएस) आतंकवादियों का हमला, इसका एक स्पष्ट प्रमाण है।
  • तालिबान (हक्कानी गुट) के भीतर बढ़ती गुटबाजी से गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जो इस क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकती है। जिसकी वजह से, पिछले 20 वर्षों में वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में $2 ट्रिलियन से अधिक व्यय और 2,300 से अधिक सैनिकों को खोने के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा हासिल की गयी मामूली उपलब्धियां भी नष्ट हो सकती है।

 

इंस्टा-जिज्ञासु:

अफगानिस्तान पर संयुक्त राज्य अमेरिका की नीतियों के विकास के बारे में जानने हेतु पढ़ें।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अफगानिस्तान से संबंधित भौगोलिक जानकारी (सीमावर्ती देश, प्रमुख नदी और पर्वत प्रणाली आदि)
  2. अफगानिस्तान में भारत द्वारा शुरू की गई प्रमुख परियोजनाएं

मेंस लिंक:

आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में तालिबान की सत्ता में वापसी से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

डंपिंग बंद नहीं होने तक असम की आर्द्रभूमियों पर संकट जारी: कार्यकर्ता


संदर्भ:

मानवजनित प्रभावों की वजह से असम के ‘दीपोर बील’ (Deepor Beel) का अवक्रमण जारी।

प्रमुख बिंदु:

  • ‘दीपोर बील’ की वर्तमान दुर्दशा – कचरा डंप करने, सड़कों और रेलवे का निर्माण, गोदामों का निर्माण, पर्यटन गतिविधियाँ जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण हुई हैं।
  • इस अवक्रमण के कारण, रेल हादसों में कई हाथियों की मौत हो चुकी है, कूड़ा फेंकने के कारण पानी की गुणवत्ता दूषित हो चुकी है, जिस कारण आर्द्रभूमि में आवागमन करने वाले हाथियों की संख्या में कमी, मछुआरों की आजीविका के लिए मछलियों की संख्या में कमी आदि जैसे नकारात्मक प्रभाव देखे जा रहे हैं।

‘दीपोर बील’ के बारे में:

  • ‘दीपोर बील’ (Deepor Beel) असम की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है और एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र होने के अलावा, राज्य का एकमात्र ‘रामसर स्थल’ है।
  • यह ब्रह्मपुत्र नदी मुख्य धारा के दक्षिण में, और ब्रह्मपुत्र की एक पुरानी धारा में स्थित मीठे पानी की स्थायी झील है।
  • पक्षियों की कई प्रवासी प्रजातियों के लिए यह स्थल एक महत्वपूर्ण गंतव्य है

रामसर अभिसमय’ क्या है?

‘रामसर अभिसमय’ (Ramsar Convention) आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्रोत्साहित करने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है।

  • इस अभिसमय पर 2 फरवरी 1971 को कैस्पियन सागर के तट पर स्थति ईरान के शहर रामसर में हस्ताक्षर किए गए थे, इसलिए इसे ‘रामसर अभिसमय’ (Ramsar Convention) कहा जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के लगभग 90% सदस्य देश इस ‘अभिसमय’ का हिस्सा हैं।
  • आधिकारिक तौर पर इसे, ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्र्भूमियों, विशेषकर जल-पक्षी वास-स्थल पर अभिसमय’ (Convention on Wetlands of International Importance especially as Waterfowl Habitat) कहा जाता है।

 

इंस्टा-जिज्ञासु:

भारत के सभी आर्द्रभूमि स्थलों के बारे में जानिए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘रामसर अभिसमय’ के बारे में
  2. मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड के बारे में
  3. भारत में रामसर अभिसमय’ के अंतर्गत आर्द्र्भूमियां
  4. दीपोर बील के बारे में
  5. ब्रह्मपुत्र नदी
  6. देश में आर्द्रभूमि संबंधी क़ानून और संबंधित संस्थान

मेंस लिंक

आर्द्रभूमि के निम्नीकरण के कारणों की व्याख्या करें और इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 इरावदी डॉल्फिन


संदर्भ:

हाल ही में, भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील, ओडिशा तट पर अवस्थित ‘चिल्का झील’ (Chilika Lake) में इरावदी डॉल्फ़िन मृत पाई गई हैं। यह पिछले 8 महीने में, चिल्का झील में डॉल्फिन की 8वीं मौत है।

इरावदी डॉल्फ़िन के बारे में:

  • ‘इरावदी डॉल्फ़िन’ अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड सूची के अनुसार लुप्तप्राय’ या संकटग्रस्त (Endangered)  हैं, भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत सूचीबद्ध है।
  • इरावदी डॉल्फिन (Irrawaddy Dolphins), दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के तटीय क्षेत्रों, तथा तीन नदियों: इरावदी (म्यांमार), महाकम नदी (इंडोनेशियाई बोर्नियो) और मेकांग नदी (चीन) में पाई जाती हैं
  • ‘इरावदी डॉल्फ़िन’ की संकेंद्रित लैगून आबादी, ओडिशा की चिल्का झील और दक्षिणी थाईलैंड की सोंगखला झील में पाई जाती है।

‘चिल्का झील’ के बारे में:

  • चिल्का, एशिया की सबसे बड़ी और विश्व की दूसरी सबसे बड़ी लैगून है।
  • यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवासी पक्षियों के लिए सबसे बड़ा शीतकालीन मैदान है और कई संकटग्रस्त पौधों और जीव प्रजातियों का वास स्थल है।
  • वर्ष 1981 में, चिल्का झील को रामसर अभिसमय के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्व की पहली भारतीय आर्द्रभूमि के रूप में नामित किया गया था।
  • चिल्का का प्रमुख आकर्षण इरावदी डॉल्फ़िन हैं जिन्हें अक्सर सतपाड़ा द्वीप के नकदीक देखा जाता है।
  • इस लैगून क्षेत्र के लगभग 16 वर्ग किमी में एक नलबन द्वीप (सरकंडो का जंगल) है, जिसे वर्ष 1987 में एक ‘पक्षी अभयारण्य’ (Nalbana Bird Sanctuary) घोषित किया गया था।
  • कालिजई मंदिर – चिलिका झील में एक द्वीप पर स्थित है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इरावदी डॉल्फ़िन के आवास और IUCN स्थिति के बारे में।
  2. डॉल्फ़िनों का वैश्विक वितरण
  3. चिल्का झील
  4. CITES के बारे में

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

शिकारी पक्षी प्रजातियाँ / रैप्टर प्रजातियाँ


(Raptor Species)

संदर्भ:

दुनिया भर में शिकारी पक्षियों की 160 प्रजातियां लुप्तप्राय स्थित का सामना कर रही हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • एक नए अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में शिकारी पक्षियों / रैप्टर (Raptor) की 557 प्रजातियों में से लगभग 30 प्रतिशत प्रजातियां कुछ हद तक विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपीन ईगल (Philippine eagle), हुड वाले गिद्ध (hooded vulture) और एनोबोनस्कोप-उल्लू (Annobonscops-owl), विलुप्त होने के संकट का सामना करने वाली 166 प्रजातियों में शामिल हैं।
  • यह अध्ययन ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ’ (IUCN) और पक्षियों और वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु एक वैश्विक पहल करने वाले गैर-लाभकारी संगठन ‘बर्डलाइफ इंटरनेशनल’ द्वारा नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की पत्रिका में प्रकाशित किया गया था।

शिकारी पक्षियों के लिए संकट:

  • शिकारी पक्षियों के अस्तित्व के लिए संकट, ‘वास स्थान के नष्ट होने, प्रदूषण, विषाक्त पदार्थों, मानव-वन्यजीव संघर्षों, हवाई संरचनाओं से टकराव, बिजली लाइनों और जलवायु परिवर्तन आदि का परिणाम हैं।
  • अपने प्रजनन स्थलों से शीतकालीन क्षेत्रों की ओर लंबी उड़ाने भरने और वापस आने के दौरान शिकारी प्रवासी पक्षियों को इन खतरों का सामना करना पड़ता है।
  • व्यापक स्तर पर वनों की कटाई होने के कारण, पिछले कुछ दशकों में विश्व में चील की सबसे बड़ी प्रजाति ‘फिलीपीन ईगल’ की आबादी में तेजी से कमी आई है।
  • भारत जैसे एशियाई देशों में, डाइक्लोफेनाक- नॉन-स्टेरायडल सूजन-रोधी दवा के उपयोग किए जाने की वजह से गिद्धों की आबादी में 95 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

रैप्टर समझौता-ज्ञापन:

(Raptor MOU)

  • ‘वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय’ (Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals-CMS) के तहत प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु स्थापित ‘CMS एमओयू ऑन कंजर्वेशन ऑफ माइग्रेटरी बर्ड्स ऑफ प्रे इन अफ्रीका एंड यूरेशिया’ नामक समझौते को ‘रैप्टर समझौता-ज्ञापन (Raptor MOU)’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसका उद्देश्य अफ्रीका और यूरेशिया क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों के शिकार पर प्रतिबंध और उनके संरक्षण को बढ़ावा देना है।
  • ‘रैप्टर समझौता-ज्ञापन, वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों (CMS) संरक्षण पर अभिसमय के तहत संचालित कई उपकरणों में से एक है।
  • भारत ने मार्च 2016 में रैप्टर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे
  • ‘रैप्टर समझौता ज्ञापन’ भारत के मौजूदा वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुरूप भी है।

 

प्रीलिम्स और मेन्स लिंक:

  1. रैप्टर प्रजातियों के बारे में
  2. रैप्टर प्रजातियों के लिए खतरा
  3. रैप्टर प्रजातियों के संरक्षण हेतु अंतर्राष्ट्रीय प्रयास
  4. ‘रैप्टर समझौता ज्ञापन’ के बारे में

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


लद्दाख का राजकीय पशु और पक्षी

  • हाल ही में, संघ-शासित प्रदेश ‘लद्दाख’ द्वारा दो लुप्तप्राय प्रजातियों, ‘हिम तेंदुआ’ (Snow Leopard) और ‘काली गर्दन वाले सारस’ (Black-Necked Crane) को क्रमशः राजकीय पशु और राजकीय पक्षी के रूप में घोषित किया गया है।
  • ‘काली गर्दन वाले सारस’ केवल लद्दाख के ‘चांगथांग क्षेत्र’ (Changthang region) में पाए जाते हैं। ‘आईयूसीएन’ वर्गीकरण के अनुसार, इस पक्षी को ‘संकट-निकट’ (Near-Threatened) के रूप में वर्गीकृत किया गया है; जबकि ‘हिम तेंदुआ’ ‘आईयूसीएन’ की रेडलिस्ट में ‘असुरक्षित’ (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध है।
  • भारत में, हिम तेंदुए की आबादी, पश्चिमी हिमालय में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और ‘लद्दाख’ हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वी हिमालय में ‘सिक्किम’ और अरुणाचल प्रदेश में पायी जाती है।

 

बहु-पक्षीय युद्धाभ्यास जैपेड 2021

(MULTI-LATERAL EXERCISE ZAPAD 2021)

  • भारतीय सेना का 200 सैनिकों का एक दल रूस के निझनी में आयोजित होने वाला एक बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास जैपेड 2021 में भाग लेगा।
  • जैपेड 2021 रूसी सशस्त्र बलों के थिएटर स्तर के युद्धाभ्यास में से एक है और यह मुख्य रूप से आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन पर केंद्रित होगा।
  • इस युद्धाभ्यास में यूरेशियन और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक देश भाग लेंगे।
  • पाकिस्तान और चीन, पर्यवेक्षक देश के रूप में इस युद्धाभ्यास में भाग ले रहे हैं।

 

नौसेना विमानन के लिए उच्च सम्मान

(High honor for Naval Aviation)

  • ‘राष्ट्रपति का ध्वज’ (President’s Colours), राष्ट्र की अद्वितीय सेवा के लिये किसी भी सैन्य इकाई को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान होता है।
  • भारतीय सशस्त्र बलों में भारतीय नौसेना को सबसे पहले यह सम्मान मिला था, जब भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 27 मई, 1951 को उसे ध्वज प्रदान किया था।
  • राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द द्वारा गोवा में आईएनएस हंस पर आयोजित एक रस्मी परेड में नौसेना विमानन को ‘राष्ट्रपति का ध्वज’ प्रदान किया जाएगा।

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