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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 August 2021

 

विषय सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. पुनर्निर्मित जलियांवाला बाग परिसर

 

सामान्य अध्ययन-II

1. सारहीन आधार पर सर्वत्र अबाध संचरण के अधिकार को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता: उच्चतम न्यायालय

2. बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) टीकाकरण

3. भारत द्वारा फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया का समर्थन

4. उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु रिएक्टर को दोबारा शुरू किए जाने की संभावना: आईएईए

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सीसा-युक्त पेट्रोल की समाप्ति: UNEP

2. वंदे भारत एक्सप्रेस

3. टॉय ट्रेन मुद्रीकरण योजना पर विवाद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अवनी व सुमित को टोक्यो पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक

2. पश्मीना शॉल की खोई हुई ख्याति को बहाल करने हेतु जम्मू-कश्मीर में नई पहल

3. चीन में नाबालिगों के ऑनलाइन गेम खेलने के लिए समय-सीमा में कटौती

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

पुनर्निर्मित जलियांवाला बाग परिसर


संदर्भ: 28 अगस्त, 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा जलियांवाला बाग स्मारक के पुनर्निर्मित परिसर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया गया।

पृष्ठभूमि:

13 अप्रैल, 1919 को हुए नरसंहार में मारे गए शहीदों को श्रद्धांजलि देने के रूप में, जलियांवाला बाग स्मारक का पहली बार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 13 अप्रैल, 1961 को उद्घाटन किया गया था।

  • केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 1951 को प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में ‘जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट’ की स्थापना की गयी थी।
  • इस ट्रस्ट में सदस्य के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष, पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के राज्यपाल, केंद्रीय संस्कृति मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।

current affairs

‘जलियांवाला बाग’ में क्या नवीकरण किया गया है?

  • 13 अप्रैल, 1919 की घटनाओं को दोहराने वाला 28 मिनट का ‘साउंड एंड लाइट शो’ हर शाम को दिखाया जाएगा। शहीदों के सम्मान में आगंतुकों के मौन बैठने के लिए एक ‘मुक्ति-स्थल’ (Salvation Ground) का निर्माण किया गया है।
  • शहीदों की कई नई मूर्तियां स्थापित की गई हैं।
  • परिसर में स्थित कम उपयोग की जा रही इमारतों का अनुकूलित तरीके से दोबारा इस्तेमाल करते हुए चार नई दीर्घाओं का निर्माण किया गया है। इन दीर्घाओं में पंजाब के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और गदर आंदोलन से संबंधित घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है।
  • पुनर्निर्मित परिसर में गुरु नानक देव, सिख योद्धा बंदा सिंह बहादुर और महाराजा रणजीत सिंह की एक मूर्ति भी स्थापित की गयी है।

स्मारक में पुनर्निर्माण संबंधी विवाद:

  • पिछले वर्षों के दौरान जलियांवाला बाग में कई बार मरम्मत और छोटे-छोटे सुधार कार्य किए गए हैं। लेकिन बाग की ओर जाने वाले संकरे रास्ते पर करीबन 100 वर्षों से कोई छेड़-छाड़ नहीं की गयी थी। हालंकि, बाग़ में कई अन्य चीजें बदल गईं, किंतु नानकशाही ईंटों से बना यह संकीर्ण प्रवेश द्वार, जिससे होकर ‘डायर’ के सैनिक में घुसे थे, उस दिन की भयावहता की याद दिलाता रहा। जुलाई 2020 में, पुराने मार्ग का हर निशान मिटाते हुए, इसे भित्ति चित्रों सहित एक गैलरी में परिवर्तित कर दिया गया।
  • वह प्रसिद्ध ‘शहीदी कुआँ’, जिसमे लोग गोलियों की बौछार से बचने के लिए कूद गए थे, उसे एक कांच की चादर से ढक दिया गया है- चूंकि, इस चादर की वजह से उस भयावह मंजर के गवाह ‘कुँए’ को देखा नहीं जा सकता, इसलिए, सरकार के इस निर्णय की आलोचना की जा रही है।

‘जलियांवाला बाग हत्याकांड’ के बारे में:

13 अप्रैल, 1919 को ‘बैसाखी’ थी, और इस दिन अमृतसर के स्थानीय निवासियों ने दो स्वतंत्रता सेनानियों सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को कैद करने तथा ‘रौलट एक्ट’ को लागू करने के खिलाफ चर्चा और विरोध करने के लिए एक सभा आयोजित करने का फैसला किया था। ‘रौलट एक्ट’ के तहत ब्रिटिश सरकार को बिना किसी सुनवाई के गिरफ्तार करने की शक्ति दी गई थी।

जलियांवाला बाग़ चारो और से दीवारों से घिरा था और इसमें आने-जाने के लिए कुछ छोटे-छोटे दरवाजे थे। अंग्रेजों के आदेश के खिलाफ, इस बाग़ में एकत्रित भीड़ में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे।

ब्रिगेडियर-जनरल रेजिनल्ड एडवर्ड हैरी डायर, एकत्रित भीड़ को सबक सिखाने के उद्देश्य से दबे पाँव बाग़ में पहुँच गया, और अपने साथ लाए 90 सैनिकों को, सभा के दौरान ही, भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। भीड़ में कई लोगों ने दीवार फांद कर जान बचाने का असफल प्रयास किया, और कई लोग जान बचाने के लिए बाग़ के अंदर बने एक कुएं में कूद गए।

परिणाम:

  • इस नरसंहार के बाद जनरल डायर को ‘अमृतसर का कसाई’ कहा गया और उसे कमांड से हटा कर वापस ब्रिटेन भेज दिया गया।
  • इस घटना के प्रतिरोध में रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी ने क्रमशः ब्रिटिश नाइटहुड और ‘कैसर-ए-हिंद’ की अपनी उपाधियों को त्याग दिया।
  • वर्ष 1922 में कुख्यात रोलेट एक्ट अंग्रेजों द्वारा निरस्त कर दिया गया।

current affairs 

 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इस घटना के दौरान भारत का वायसराय कौन था?
  2. घटना के परिणाम?
  3. रौलट एक्ट क्या है?

मेंस लिंक:

जलियांवाला बाग त्रासदी, ब्रिटिश भारतीय इतिहास पर एक शर्मनाक निशान है। टिप्पणी कीजिए।

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

सारहीन आधार पर सर्वत्र अबाध संचरण के अधिकार को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता: उच्चतम न्यायालय


संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र पुलिस द्वारा जारी एक ‘जिलाबदर करने संबंधी आदेश’ (externment order) पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है, कि किसी व्यक्ति को देश में कहीं भी रहने या स्वतंत्र रूप से भ्रमण करने के उसके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

इस विषय से संबंधित अन्य तथ्य:

  • ‘जिलाबदर आदेश’ (externment order) क्या होता है? ‘जिलाबदर आदेश’ के तहत, एक निश्चित क्षेत्र में किसी व्यक्ति को आवाजाही पर रोक लगायी जाती है।
  • इस प्रकार के आदेश जारी करने का आधार: शीर्ष अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा है, कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए, केवल असाधारण मामलों में ही इस प्रकार की कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण’ के अधिकार के बारे में:

  • ‘भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण’ (move freely throughout the territory of India) का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (d) के द्वारा प्रत्याभूत है। यह अधिकार, केवल भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है।
  • यह अधिकार पूर्णतयः बंधनमुक्त अथवा असीमित नहीं है, बल्कि “आम जनता के हितों या किसी अनुसूचित जनजाति के हितों की सुरक्षा के लिए” के लिए इस पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
  • संबंधित कार्यकारी प्राधिकारियों को, किसी व्यक्ति को ‘निर्वासित’ या ‘जिलाबदर’ करने की शक्ति प्रदान करने संबंधी प्रावधान, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (MP 1951), पंजाब राज्य सुरक्षा अधिनियम 1953, और असम लोक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम 1947, कर्नाटक पुलिस अधिनियम और अन्य कानूनों में पाए जा सकते हैं।
  • इस मामले में, एक व्यक्ति के जिले में प्रवेश पर रोक लगाने के लिए, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (MP 1951) के तहत कार्यकारी अधिकारियों को प्रदान की गई विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग किया गया था। हालाँकि, संबंधित मामले में इस शक्ति का उपयोग ‘कानून की उचित प्रक्रिया’ के अनुसार नहीं था।
  • हाल के दिनों में, देश भर में शक्तियों के दुरुपयोग संबंधी इस प्रकार के मामले बढ़ते जा रहे हैं। उदाहरण के लिए: प्रफुल्ल भाऊसाहेब यादव बनाम श्री के.के. पाठक मामले में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया, ये आदेश बिना किसी आधार के पारित किए गए थे, और चूंकि इस आदेश को बिना कोई दिमाग लगाए हुए जारी किया गया था, इसलिए यह अमान्य माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिलाबदर के आदेश को बरकरार रखने के उदाहरण:

  • ‘धन बहादुर घोरती बनाम असम राज्य’ मामले में- अदालत द्वारा ‘आदिवासी पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करने’ करने हेतु जिलाबदर के आदेश को बरकरार रखा था; ‘उत्तर प्रदेश राज्य बनाम कौशलिया’ मामले में, वेश्याओं को एक निर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर अपना व्यापार करने और विशेष क्षेत्रों में रहने या आवाजाही के लिए मुक्त-संचरण पर प्रतिबंध को वैध माना गया है; पी. अरुमुघम बनाम मद्रास राज्य मामले में, आदतन अपराधियों के निवास पर लगाए गए प्रतिबंध को न्यायालयों द्वारा उचित माना गया है।
  • जिलाबदर संबंधी विषयों पर मौजूदा विधियों के अनुसार, यदि जिलाबदर करने संबंधी आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होते हैं, तो आम तौर पर न्यायपालिका इस प्रकार के निर्णयों से संतुष्ट हो जाती है। हालाँकि, यह देखते हुए कि यह प्रावधान, किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है, अतः निष्पक्ष न्यायाधिकरण द्वारा स्वतंत्र जांच को अनिवार्य करते हुए इस प्रक्रिया को सही करने की सख्त आवश्यकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 19 क्या है?
  2. अनुच्छेद 19 के तहत प्रतिबंध के लिए आधार
  3. मौलिक अधिकार, नीति-निदेश तत्व और मूल कर्तव्यों के बीच अंतर
  4. जिलाबदर क़ानून क्या हैं?

मेंस लिंक

जिलाबदर क़ानून का दुरुपयोग और इसमें सुधार करने के तरीकों पर चर्चा कीजिए।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

 बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) टीकाकरण


संदर्भ: 18 जुलाई, 1921 को तपेदिक (टीबी) से निपटने हेतु ‘बैसिलस कैलमेट-ग्यूरिन (बीसीजी) वैक्सीन’ (Bacillus Calmette–Guérin (BCG) vaccine) के निर्माण को 100 साल पूरे हो गए।

‘बीसीजी वैक्सीन’ क्या है?

  1. ‘बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) टीका’ (Bacillus Calmette–Guérin (BCG) vaccine) मुख्य रूप से तपेदिक (टीबी) के खिलाफ इस्तेमाल किया जाने वाला टीका है।
  2. बीसीजी वैक्सीन को, ‘माइकोबैक्टीरियम बोविस’ (Mycobacterium bovis) – जो मवेशियों में टीबी / क्षय रोग का कारण होता है – के एक स्ट्रेन में परिवर्तन करके विकसित किया गया था। वर्ष 1921 में, पहली बार इस वैक्सीन का मनुष्यों पर प्रयोग किया गया था।
  3. वर्तमान में, ‘बीसीजी’ (BCG) टीबी की रोकथाम के लिए उपलब्ध एकमात्र लाइसेंस प्राप्त टीका है।
  4. यह उत्कृष्ट सुरक्षा रिकॉर्ड सहित विश्व में सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाने वाला टीका है और पीड़ित लोगों को हर साल इसकी लगभग 120 मिलियन खुराक दी जाती है।
  5. भारत में, बीसीजी को पहली बार वर्ष 1948 में सीमित पैमाने पर शुरू किया गया था और वर्ष 1962 में यह ‘राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम’ का एक हिस्सा बन गया।
  6. बीसीजी, बच्चों के लिए, टीबी / क्षय रोग के गंभीर रूपों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। किशोरों और वयस्कों के लिए यह सुरक्षात्मक रूप से 0-80% तक प्रभावी है।
  7. बीसीजी, नवजात शिशुओं को श्वसन और जीवाणु संक्रमण जैसे रोगों और कुष्ठ तथा बुरुली अल्सर जैसे अन्य माइकोबैक्टीरियल रोगों से भी बचाता है।
  8. मूत्राशय के कैंसर और घातक मेलेनोमा बीमारी में एक इम्यूनोथेरेपी एजेंट के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है।

बीसीजी वैक्सीन की प्रभावकारिता:

  • बीसीजी, कुछ भौगोलिक स्थानों पर अच्छा काम करता है, जबकि कुछ जगहों पर इतना प्रभावी नहीं होता है। आम तौर पर, भूमध्य रेखा से दूरी बढ़ने के साथ-साथ ‘बीसीजी वैक्सीन’ की प्रभावकारिता भी बढ़ती जाती है।
  • यूके, नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क में इसकी प्रभावकारिता काफी अधिक होती है; और भारत, केन्या और मलावी जैसे भूमध्य रेखा पर या उसके आस-पास स्थित देशों में, जहाँ क्षय रोग का भार अधिक है, इसकी प्रभावकारिता में कमी देखी जाती है। इन क्षेत्रों में पर्यावरणीय माइकोबैक्टीरिया भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये माइकोबैक्टीरिया, टीबी के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव में बाधा उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं।

तपेदिक (टीबी) क्या है?

तपेदिक (टीबी) या क्षय रोग,माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ (Mycobacterium tuberculosis) नामक जीवाणु के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है।

  • यह आमतौर पर फेफड़ों (फुफ्फुसीय टीबी- pulmonary TB) को प्रभावित करता है, किंतु यह इसके अलावा मानव-शरीर के अन्य अंगो को भी प्रभावित कर सकता है।
  • यह बीमारी, फुफ्फुसीय टीबी से पीड़ित व्यक्ति की खांसी या किसी अन्य माध्यम से वायु में बैक्टीरिया पहुँचने से फैलती है।
  • विश्व में, चेचक, कुष्ठ, प्लेग और हैजा जैसी अन्य ऐतिहासिक रूप से भयानक बीमारियों को, या तो काफी हद तक समाप्त या नियंत्रित किया जा चुका है, इसके विपरीत, टीबी, दुनिया में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की ‘ग्लोबल टीबी रिपोर्ट’ के अनुसार, वर्ष 2019 में लगभग 10 मिलियन लोग टीबी से ग्रसित हुए थे, जिनमे से4 मिलियन रोगियों की मौत हो गई। भारत में इन मामलों की संख्या कुल वैश्विक मामलो की 27% है।

आगे की राह:

भारत, वर्ष 2025 तक एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में ‘टीबी’ को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, हमें न केवल बेहतर निदान और दवाओं की आवश्यकता होगी, बल्कि अधिक प्रभावी टीकों की भी आवश्यकता होगी।

हमें कोविड-19 महामारी से सीखे गए सबक के आधार पर, वैक्सीन का निर्माण करने और विशेष रूप से वैक्सीन विकसित करने में प्राप्त सफलताओं को दोहराने और वैक्सीन इक्विटी सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होने की आवश्यकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बीसीजी क्या है?
  2. ‘बैक्टीरिया’ और ‘वायरस’ से होने वाले रोगों में अंतर।
  3. ‘टीबी’ क्या है?
  4. भारत के संदर्भ में ‘वैश्विक टीबी रिपोर्ट’ के प्रमुख बिंदु।

मेंस लिंक:

  1. बीसीजी टीका, तपेदिक का मुकाबला किस प्रकार करता है? चर्चा कीजिए।
  2. ‘क्षय रोग उन्मूलन’ में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 भारत द्वारा फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया का समर्थन


संदर्भ:

भारत ने, हाल ही में आयोजित ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ‘की बैठक में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने पर अपना समर्थन दिया है।

प्रमुख बिंदु:

  • भारत ने, ‘सुरक्षित, मान्यता प्राप्त और पारस्परिक रूप से सहमत सीमाओं के भीतर और शांति और सुरक्षा के साथ इजरायल के साथ रहने हेतु, संप्रभु, स्वतंत्र और स्वयं-समर्थ ‘फिलिस्तीन’ राष्ट्र की स्थापना’ के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
  • ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ‘की बैठक में ‘अफगानिस्तान’ का मुद्दा भी उठाया गया। बैठक में, तालिबान से नागरिकों की सुरक्षा तथा मानवीय पहुँच की सुरक्षा गारंटी संबंधी मांग करते हुए एक ‘मसौदा प्रस्ताव’ पारित किया जाना है। इस प्रस्ताव का उपयोग, काबुल में अभे तक फंसे हुए विदेशी नागरिकों को बाहर निकलने के एक समाधान के रूप में किया जाएगा।
  • भारत की ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ की अध्यक्षता इस महीने समाप्त होने वाली है। सदस्य देशों के नामों के अंग्रेजी वर्णानुक्रम के अनुसार, प्रत्येक सदस्य राष्ट्र एक माह की अवधि के लिए ‘सुरक्षा परिषद’ की अध्यक्षता करता है।

current affairs

इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच भूमि के एक टुकड़े को लेकर यहूदियों और अरबों के बीच 100 वर्षों से भी अधिक समय से संघर्ष जारी है।
  • साल 1882 से 1948 के बीच दुनिया भर के यहूदी फिलिस्तीन में एकत्र हुए थे। इतिहास में, इस घटना को अलियाह (Aliyahs) के नाम से जाना जाता है।
  • फिर वर्ष 1917 में, प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्क साम्राज्य का पतन हो गया और फिलिस्तीन पर ब्रिटेन ने नियंत्रण कर लिया।
  • इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक यहूदी और बहुसंख्यक अरब निवास करते थे।
  • इस क्षेत्र पर ब्रिटेन का कब्ज़ा होने के बाद, फिलीस्तीन में यहूदियों को बसाने के उद्देश्य से बालफोर घोषणा (Balfour Declaration) जारी की गई। जबकि, उस समय फिलिस्तीन में बहुसंख्यक आबादी अरबों की थी।
  • यहूदियों ने इस ‘बालफोर घोषणा’ का समर्थन किया जबकि फिलिस्तीनियों ने इसे मानने से अस्वीकार कर दिया। कुछ समय पहले यूरोप में हुए होलोकॉस्ट (Holocaust) में लगभग 6 मिलियन यहूदी मारे जा चुके थे, और इस कारण से एक पृथक यहूदी राज्य की मांग तेजी पर चल रही थी।
  • यहूदियों ने फिलिस्तीन को अपना प्राकृतिक घर बताते हुए इस पर अपना दावा किया, और दूसरी और अरबों ने भी अपनी जमीन को नहीं छोड़ा और अपना दावा कायम रखा।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने यहूदियों का समर्थन किया।
  • 1947 में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा फिलिस्तीन को एक पृथक यहूदी देश और अरब देश में विभाजित करने के पक्ष में मतदान किया गया, जिसमें यरूशलेम एक अंतरराष्ट्रीय शहर बना दिया गया।
  • विभाजन की इस योजना को यहूदी नेताओं ने स्वीकार कर लिया किंतु अरब पक्ष ने इसे खारिज कर दिया और कभी मान्यता नहीं दी।

इज़राइल का निर्माण और ‘तबाही’:

  • वर्ष 1948 में ब्रिटेन ने इस क्षेत्र से अपना नियंत्रण वापस ले लिया और यहूदियों ने इज़राइल के निर्माण की घोषणा कर दी। हालांकि, फिलीस्तीनियों ने इसका विरोध किया, किंतु यहूदी पीछे नहीं हटे और इसके परिणामस्वरूप दोनों के मध्य सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया।
  • इसी दौरान पड़ोसी अरब देशों ने भी इस क्षेत्र पर हमले किए, किंतु इजरायली सैनिकों ने इन्हें पराजित कर दिया। इस लड़ाई के बाद हजारों फिलिस्तीनियों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा। इस घटना के लिए ‘अल-नकबा’ (Al-Nakba), या “विनाश” कहा जाता है।
  • लड़ाई के समाप्त होने के बाद इस क्षेत्र के अधिकाँश भू-भाग को इज़राइल ने अपने नियंत्रण में ले लिया।
  • फिर, जॉर्डन का इज़राइल के साथ युद्ध हुआ जिसमे ‘वेस्ट बैंक’ कहे जाने वाले क्षेत्र पर जॉर्डन ने अपना कब्ज़ा कर लिया तथा गाजा पर मिस्र ने अपना अधिकार जमा लिया।
  • यरुशलम शहर, दो हिस्सों में विभाजित हो गया, इसके पूर्व भाग पर जॉर्डन का अधिकार है, जबकि पश्चिमी भाग पर इज़राइल का नियंत्रण है। अभी तक, किसी भी औपचारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए है और इस क्षेत्र में होने वाले तनाव के लिए प्रत्येक पक्ष एक-दूसरे को दोषी ठहराता रहता है, और इस क्षेत्र में लड़ाई होती रहती है।
  • वर्ष 1967 में, इजरायली सेना ने पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक, सीरिया की ‘गोलन हाइट्स’, गाजा और मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था।

वर्तमान परिदृश्य:

  • इज़राइल का अभी भी वेस्ट बैंक पर कब्जा है, हालांकि इसने गाजा पर अपना अधिकार छोड़ दिया है किंतु, संयुक्त राष्ट्र अभी भी भूमि के इस भाग को अधिकृत क्षेत्र का हिस्सा मानता है।
  • इज़राइल, पूरे यरुशलम को अपनी राजधानी होने का दावा करता है, जबकि फिलिस्तीनी, पूर्वी यरुशलम को भविष्य के फिलिस्तीनी राष्ट्र की राजधानी होने का दावा करते हैं।
  • अमेरिका, पूरे यरुशलम शहर पर इज़राइल के दावे को मान्यता देने वाले गिने-चुने देशों में से एक है।

‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ के बारे में:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council – UNSC) संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों में से एक है, और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के रखरखाव के लिए जिम्मेदार है।

  • इसकी शक्तियों में, शांति अभियानों का गठन करना, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध जारी करना, और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से सैन्य कार्रवाई का अनुमोदन करना शामिल है; यह संयुक्त राष्ट्र का एकमात्र निकाय है जिसके पास सदस्य देशों के लिए ‘बाध्यकारी संकल्प’ जारी करने की शक्ति है।
  • सदस्य: सुरक्षा परिषद में पंद्रह सदस्य होते हैं। रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका – सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य हैं। ये स्थायी सदस्य, नए सदस्य देशों को शामिल करने या महासचिव पद के उम्मीदवार सहित, सुरक्षा परिषद के किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं।
  • सुरक्षा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य भी होते हैं, जिन्हें क्षेत्रीय आधार पर दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता, सदस्य देशों द्वारा मासिक आधार पर की जाती है।

प्रस्तावित सुधार:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सुधारों में पांच प्रमुख मुद्दे शामिल हैं:

  1. सदस्यता की श्रेणियां,
  2. पांच स्थायी सदस्यों द्वारा धारित वीटो का प्रश्न,
  3. क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व,
  4. विस्तृत परिषद का आकार और इसकी कार्यप्रणाली और
  5. सुरक्षा परिषद-महासभा संबंध।

इसके अलावा, सुरक्षा परिषद में अधिक स्थायी सदस्यों को शामिल करने का भी प्रस्ताव है।

भारत की मांगें:

भारत लंबे समय से ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान करता रहा है। भारत इस बात पर जोर देता है, कि वह स्थायी सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र की उच्च तालिका में सही जगह पाने का हकदार है।

भारत को सुरक्षा परिषद में ‘स्थायी सीट’ क्यों दी जानी चाहिए?

  • भारत, संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशनों में सैनिकों का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे बड़ा निरंतर योगदानकर्ता है।
  • भारत, UNSC का 7 बार सदस्य रह चुका है, इसके अलावा वह G-77 और G-4 का सदस्य रह चुका है, अतः भारत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘स्थायी सदस्यता’ का तार्किक रूप से दावेदार है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दा क्या है?
  2. दोनों के बीच सीमाएं
  3. वेस्ट बैंक सेटलमेंट इश्यू
  4. इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र, इज़राइल और फिलिस्तीन का पक्ष
  5. इस मुद्दे से उत्पन्न चुनौतियाँ
  6. भारत का रुख

मेंस लिंक:

इसराइल-फिलिस्तीन मुद्दे का इस क्षेत्र पर प्रभाव और भारत के हितों पर इसका प्रभाव।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु रिएक्टर को दोबारा शुरू किए जाने की संभावना: आईएईए


संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी, ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) के अनुसार, कि उत्तर कोरिया द्वारा अपने ‘प्लूटोनियम-उत्पादक पुनर्संसाधन रिएक्टर’ (plutonium-producing reprocessing reactor) को संभवतः फिर से शुरू कर दिया गया है।

 

प्रमुख बिंदु:

  • ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ का यह अनुमान, उत्तर कोरिया के मुख्य परमाणु परिसर ‘योंगब्योन’ (Yongbyon) में 5-मेगावाट रिएक्टर पर दोबारा काम शुरू किए जाने पर आधारित है।
  • उत्तर कोरियाई नेता ने, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ आयोजित दूसरे शिखर सम्मेलन में, प्रतिबंधों को हटाने के बदले ‘योंगब्योन’ परिसर के एक भाग को नष्ट करने की प्रस्ताव दिया था, किंतु इसके बाद से दोनों देशों के मध्य वार्ता रुकी हुई है।
  • अपने परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के कारण उत्तर कोरिया पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू तहत है।
  • प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया के प्योंगयांग रिएक्टर में, पहले हटाए जा चुके रिएक्टर में प्रयुक्त ईंधन से प्लूटोनियम को अलग करने के लिए निकट स्थित रेडियोकेमिकल प्रयोगशाला का भी उपयोग किया जा रहा है, इससे ‘योंगब्योन’ रिएक्टर के पुनः चालू होने का संकेत मिलता है।
  • यह स्थिति, कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा की स्थिति और खराब न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए संबंधित हितधारकों के मध्य दोबारा वार्ता शुरू किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

 

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की स्थापना, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र संघ भीतर ‘वैश्विक शांति के लिए परमाणु संगठन’ के रूप की गयी थी। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वायत संगठन है।

  • इसका उद्देश्य विश्व में परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। यह परमाणु ऊर्जा के सैन्य उपयोग को किसी भी प्रकार रोकने में प्रयासरत रहती है।
  • IAEA, संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों को रिपोर्ट करती है।
  • इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।

प्रमुख कार्य:

  1. IAEA, अपने सदस्य देशों तथा विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
  2. इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना तथा परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।

बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स:

  • 22 सदस्य राज्यों (प्रत्येक द्वारा निर्धारित भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व) – सामान्य सम्मेलन द्वारा निर्वाचन (प्रत्येक वर्ष 11 सदस्य) – 2 वर्ष का कार्यकाल
  • कम से कम 10 सदस्य देश – निवर्तमान बोर्ड द्वारा नामित

IAEA की भूमिकाएँ:

  • IAEA गतिविधियों और बजट पर जनरल कॉन्फ्रेंस के लिए सिफारिशें करना
  • IAEA मानकों को प्रकाशित करना
  • IAEA की अधिकांश नीतियों का निर्माण करना
  • जनरल कॉन्फ्रेंस के अनुमोदन से महानिदेशक की नियुक्त करना

IAEA द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम:

  1. कैंसर थेरेपी हेतु कार्रवाई कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy- PACT)
  2. मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम
  3. जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना
  4. अभिनव परमाणु रिएक्टरों और ईंधन चक्र पर अंतर्राष्ट्रीय परियोजना, 2000

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. परमाणु विखंडन और संलयन प्रक्रिया
  2. कोरियाई प्रायद्वीप में महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताएं
  3. कोरियाई प्रायद्वीप में संघर्ष
  4. IAEA- उद्देश्य, जनादेश और शक्तियां
  5. UNSC- उद्देश्य, जनादेश और शक्तियां

मेंस लिंक

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम से इस क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा अवसंरचना के समक्ष उत्पन्न चुनौतियाँ। इस बारे में भारत की नीतियां और इस चुनौती से निपटने के उपाय।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 सीसा-युक्त पेट्रोल की समाप्ति: UNEP


संदर्भ:

हाल ही में, ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (UNEP) दवारा जारी सूचना के अनुसार, विश्व में ‘सीसा-युक्त’ पेट्रोल (leaded petrol) के उपयोग को समाप्त किया जा चुका है।

 

प्रमुख बिंदु:

  • इस महत्वपूर्ण लक्ष्य को हासिल करने के बाद, समय से पहले होने वाली 2 मिलियन से अधिक मौतों को रोका जा सकेगा और विश्व अर्थव्यवस्थाओं को सालाना 2.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की बचत होगी।
  • अल्जीरिया – ‘सीसा-युक्त’ पेट्रोल ईंधन का उपयोग करने वाला अंतिम देश था। पिछले महीने, इस देश में भी ‘सीसा-युक्त’ पेट्रोल की आपूर्ति समाप्त हो गई।
  • भारत द्वारा मार्च 2000 में ही ‘सीसा-युक्त’ पेट्रोल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

 

‘सीसा-युक्त’ पेट्रोल के हानिकारक प्रभाव:

  • सीसा के संपर्क में आने से बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम पड़ सकते हैं। उच्च स्तर पर सीसे के संपर्क में आने से, यह सीधे मानव मष्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को ‘कोमा’ और विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है, और यहां तक ​​कि उसकी मृत्यु भी हो सकती है। गंभीर सीसा विषाक्तता के संपर्क में आने बाद जीवित बाख जाने वाले जो बच्चे, मानसिक मंदता और ‘व्यवहार संबंधी विकारों’ का शिकार हो सकते है।
  • गर्भावस्था के दौरान, हड्डी में मौजूद सीसे का प्रवाह रक्त में होने पर, विकासशील भ्रूण के सीसे के संपर्क में आ जाता है।
  • ‘इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन’ (IHME) के अनुसार, वर्ष 2017 में, सीसा के संपर्क में आने से पूरे विश्व में 06 मौतें हुई और 24.4 मिलियन वर्ष, स्वस्थ जीवन (विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष – disability-adjusted life years (DALYs)) का नुकसान हुआ था।
  • सीसा, वयस्कों के लिए भी दीर्घकालिक नुकसान का कारण बनता है, इसके संपर्क में आने से उच्च रक्तचाप और गुर्दे की क्षति का खतरा बढ़ जाता है।

 

UNEP के बारे में:

  • ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (United Nations Environment Programme – UNEP), वैश्विक पर्यावरण एजेंडा निर्धारित करने वाला प्रमुख वैश्विक पर्यावरण प्राधिकरण है। यह संयुक्त राष्ट्र तंत्र के अंतर्गत ‘सतत विकास के पर्यावरणीय आयाम’ के सुसंगत कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है, और वैश्विक पर्यावरण हेतु एक आधिकारिक अभिवक्ता के रूप में कार्य करता है।
  • इसका उद्देश्य, भविष्य की पीढ़ियों से समझौता किए बिना राष्ट्रों और व्यक्तियों को उनके जीवन-गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रेरित, सूचित और सक्षम करके, पर्यावरण की देखभाल में नेतृत्व प्रदान करना और भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
  • इसका मुख्यालय ‘नैरोबी’, केन्या में है
  • ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (UNEP) के प्रमुख कार्य-क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन, आपदाएं और संघर्ष, पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन, पर्यावरण प्रशासन, रसायन और अपशिष्ट, संसाधन दक्षता, और पर्यावरण की समीक्षा आदि हैं।
  • UNEP को इसके सदस्यों के स्वैच्छिक योगदान द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।

‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’, हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों से निपटने हेतु विभिन्न राष्ट्रों और पर्यावरण समुदाय को एक साथ लाने के लिए कई महत्वपूर्ण बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों और अनुसंधान निकायों के सचिवालयों की मेजबानी करता है।

इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. जैविक विविधता पर अभिसमय
  2. वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय
  3. पारा पर मिनामाता अभिसमय
  4. बेसल, रॉटरडैम और स्टॉकहोम कन्वेंशन
  5. ओजोन परत के संरक्षण के लिए वियना अभिसमय और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
  6. प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय
  7. कार्पेथियन कन्वेंशन
  8. बमाको कन्वेंशन
  9. तेहरान अभिसमय

 

प्रीलिम्स लिंक

  1. सीसा-युक्त’ पेट्रोल क्या होता है?
  2. सीसा-युक्त’ पेट्रोल के हानिकारक प्रभाव
  3. यूएनईपी- उद्देश्य, शक्तियां और जनादेश

मेंस लिंक

पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (UNEP) के महत्व और इसकी भूमिका पर प्रकाश डालिए।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

वंदे भारत एक्सप्रेस

संदर्भ:

भारतीय रेलवे द्वारा मार्च 2024 तक 102 ‘वंदे भारत ट्रेनों’ के संचालन की योजना तैयार की जा रही है।

‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ के बारे में:

  • ‘ट्रेन 18’ – जिसे बाद में ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ (Vande Bharat Express) नाम दिया गया है- को भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया पहल’ के तहत इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई द्वारा निर्मित किया गया है।
  • इस ट्रेन को 15 फरवरी 2019 को लॉन्च किया गया था।
  • इसे 160 किमी प्रति घंटे की परिचालन दक्षता के साथ भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड ट्रेन के रूप में प्रदर्शित किया गया था।
  • अगस्त 2021 तक, भारतीय रेलवे द्वारा मात्र दो वंदे भारत ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है: एक दिल्ली से वाराणसी और दूसरी, दिल्ली से कटरा के लिए।
  • वंदे भारत ट्रेनें, स्व-चालित “इंजन रहित” ट्रेनों का समूह हैं।
  • इनके तेज गति से रफ़्तार पकड़ने और तीव्रता से धीमे होने की क्षमता के परिणामस्वरूप ‘ट्रेन यात्रा’ का समय कम हो जाता है।
  • इसकी कुछ यात्री अनुकूल विशेषताओं में, यूरोपीय शैली की सीटें, डिफ्यूज एलईडी लाइटिंग, जीपीएस आधारित इंफोटेनमेंट सिस्टम, मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट, धूल मुक्त वातावरण के लिए पूरी तरह से सील गैंगवे, स्लाइडिंग फुटस्टेप्स के साथ केंद्रीय रूप से नियंत्रित प्रवेश / निकास दरवाजे, दिव्यांग अनुकूल शौचालय और स्वचालित स्लाइडिंग केबिन दरवाजे आदि शामिल हैं।

current affairs

 

इंस्टा लिंक्स:

प्रीलिम्स और मेंस लिंक: वंदे भारत एक्सप्रेस से संबंधित प्रमुख तथ्य।

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 टॉय ट्रेन मुद्रीकरण योजना पर विवाद


संदर्भ:

केंद्र सरकार के ‘दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे’ (Darjeeling Himalayan Railways – DHR) का मुद्रीकरण करने संबंधी प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की जा रही है।

प्रमुख बिंदु:

भारत में पर्वतीय क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में चार रेलवे नेटवर्क पूरी तरह से कार्यात्मक हैं और इनका परिचालन किया जा रहा है- पश्चिम बंगाल में हिमालय की तलहटी में स्थित ‘दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे’ (DHR); तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ियों में स्थित नीलगिरी पर्वतीय रेलवे; हिमाचल प्रदेश की हिमालय की तलहटी में स्थित कालका शिमला रेलवे; और महाराष्ट्र में स्थित माथेरान रेलवे

current affairs

 

चित्र: दार्जिलिंग हिल रेलवे

‘दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे’:

  • ‘दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे’ (DHR) का निर्माण 1879 और 1881 के मध्य ब्रिटिश काल के दौरान कराया गया; ‘दार्जिलिंग टॉय ट्रेन’ को वर्ष 1999 में यूनेस्को का ‘विश्व धरोहर स्थल’ घोषित किया गया था।
  • DHR का मुद्रीकरण किए जाने की योजना के विरोध का मुख्य कारण यह है, कि निजी कंपनियों का ध्यान लाभ अर्जित करने पर होगा, और लोगों की स्थानीय आकांक्षाओं की अनदेखी की जाएगी।
  • सरकार द्वारा हितधारकों से परामर्श किए बिना एकतरफा तरीके से यह निर्णय लिए जाने पर भी चिंता जताई गई है।
  • आगे की राह: सरकार को इस विषय में संबंधित हितधारकों से परामर्श करना चाहिए और पारस्परिक रूप से लाभप्रद तरीके से, उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने हेतु दिशानिर्देश जारी करने चाहिए।

 

‘विश्व धरोहर स्थल’ क्या होते हैं?

‘विश्व धरोहर स्थल’ या ‘विश्व विरासत स्थल’ (World Heritage site), को अंतर्राष्ट्रीय महत्व तथा विशेष सुरक्षा की आवश्यकता वाले प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित क्षेत्रों या संरचनाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

  • इन स्थलों को ‘संयुक्त राष्ट्र’ (UN) तथा संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त होती है।
  • यूनेस्को, विश्व धरोहर के रूप में वर्गीकृत स्थलों को मानवता के लिए महत्वपूर्ण मानता हैं, क्योंकि इन स्थलों का सांस्कृतिक और भौतिक महत्व होता है।

प्रमुख तथ्य:

  1. विश्व धरोहर स्थलों की सूची, यूनेस्को की ‘विश्व विरासत समिति’ द्वारा प्रशासित ‘अंतर्राष्ट्रीय विश्व धरोहर कार्यक्रम’ द्वारा तैयार की जाती है। इस समिति में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्वाचित यूनेस्को के 21 सदस्य देश शामिल होते है।
  2. प्रत्येक विश्व धरोहर स्थल, जहाँ वह अवस्थित होता है, उस देश के वैधानिक क्षेत्र का भाग बना रहता है, और यूनेस्को, इसके संरक्षण को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में मानता है।
  3. विश्व विरासत स्थल के रूप में चयनित होने के लिए, किसी स्थल को पहले से ही भौगोलिक एवं ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट, सांस्कृतिक या भौतिक महत्व वाले स्थल के रूप में अद्वितीय, विशिष्ट स्थल चिह्न अथवा प्रतीक के रूप में वर्गीकृत होना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक

  1. ‘दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे’
  2. विश्व धरोहर स्थल क्या है?
  3. भारत में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची
  4. यूनेस्को के बारे में

मेंस लिंक

भारत द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों के संरक्षोपाय हेतु आवश्यक नीतियों पर चर्चा कीजिए।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अवनी व सुमित को टोक्यो पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक

  • पैरालिंपिक में पहली बार भाग ले रहे सुमित अंतिल ने ‘भाला फेंक’ प्रतियोगिता के F64 वर्ग में कई बार अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक हासिल किया, और अनुभवी खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया की F64 वर्ग में रजत पदक हासिल कर भारत के सबसे महान पैरा-एथलीट होने की तमगे को बरक़रार रखा।
  • इसी वर्ग में एक अन्य भाला फेंकने वाले खिलाड़ी ‘सुंदर सिंह गुर्जर’ ने कांस्य पदक जीता।
  • ‘अवनि लेखारा’, निशानेबाजी की 10 मीटर राइफल प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला बनीं।

 

पैरालाम्पिक खेलों के बारे में:

  • यह विकलांग एथलीटों के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता है। ओलंपिक खेलों की तुलना में, पैरालाम्पिक को शीतकालीन खेलों और ग्रीष्मकालीन खेलों में विभाजित किया जाता है, जो बारी-बारी से हर दो साल में आयोजित किए जाते हैं।
  • 20 वीं सदी के अंतिम वर्षों से, पैरालाम्पिक खेलों का आयोजन उसी शहर में किया जाता है, जहाँ सामान्य ओलम्पिक खेल आयोजित किए जाते है। ओलम्पिक खेलों की समाप्ति के तुरंत बाद ही पैरालाम्पिक खेलों का आयोजन किया जाता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय पैरालाम्पिक समिति की स्थापना वर्ष 1989 में की गई थी, इसका मुख्यालय जर्मनी में स्थित है और यह  पैरालंपिक खेलों को नियंत्रित करती है।
  • पैरालंपिक एथलीट छह अलग-अलग विकलांगता समूहों में प्रतिस्पर्धा करते हैं- एम्प्यूटी, सेरेब्रल पाल्सी, दृश्य हानि, रीढ़ की हड्डी में चोट, बौद्धिक विकलांगता, और “लेस ऑट्रेस” (ऐथलीट जिनकी विकलांगता बौनेपन सहित अन्य श्रेणियों में से किसी में फिट नहीं होती है)। प्रत्येक समूह के भीतर, एथलीटों को उनकी अक्षमताओं के प्रकार और सीमा के आधार पर आगे वर्गों में विभाजित किया जाता है। व्यक्तिगत तौर पर एथलीटों को, यदि उनकी शारीरिक स्थिति में परिवर्तन होता है, तो बाद की प्रतियोगिताओं में पुनर्वर्गीकृत किया जा सकता है।
  • पैरालाम्पिक खेलों का विकास, वर्ष 1948 में सर लुडविग गुट्टमैन द्वारा इंग्लैंड में रीढ़ की हड्डी की चोट से ग्रसित ‘द्वितीय विश्व युद्ध’ के ब्रिटिश पूर्व-सैनिको के लिए खेल प्रतियोगिता आयोजित करने के बाद हुआ था।

current affairs

 

पश्मीना शॉल की खोई हुई ख्याति को बहाल करने हेतु जम्मू-कश्मीर में नई पहल

  • शॉल बुनाई के जटिल उद्योग में शामिल हाथ की कारीगरी को बहाल करने के लिए जम्मू-कश्मीर में एक उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence CoE) स्थापित किया गया है।
  • पिछले वर्षों में, बुनाई की पुरानी तकनीक, नई मशीनों के आ जाने और मेहनताना कम होने की वजह से इस क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की कमी हुई है।
  • उत्कृष्टता केंद्र (CoE) द्वारा महिलाओं के लिए 10 इंच लंबे सूत के साथ 10 धागों की मजदूरी को ₹1 प्रति गाँठ से बढ़ाकर ₹2 करने का निर्णय लिया गया है।
  • कताई मशीनों के विपरीत, पारंपरिक कश्मीरी चरखे पर महीन बालों की तरह पश्मीना ऊन के लंबे धागे काते जा सकते हैं जिससे शॉल की कोमलता और गर्माहट में वृद्धि होती है।
  • एक अनुमान के मुताबिक, कश्मीर घाटी में शॉल बुनाई में महिलाओं की भागीदारी एक लाख से घटकर महज 10,000 रह गई है।
  • इस प्रवृत्ति की पृष्ठभूमि में, हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशालय, कश्मीर ने “पुरानी तकनीकों को बनाए रखने के लिए” भौगोलिक संकेत (जीआई)-प्रमाणित हस्तनिर्मित पश्मीना शॉल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा भी की है।
  • पहली बार मजदूरी का निर्धारण किए जाने से, कश्मीरी शॉल को प्रसिद्ध बनाने वाली हाथ-कताई और हाथ-बुनाई कारीगरी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।
  • इस कदम से रोजगार पैदा होने और पीढ़ियों से जटिल और काल्पनिक कश्मीरी शॉल को कायम रखने वाली ‘महिला बुनकरों’ की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की संभावना है।

चीन में नाबालिगों के ऑनलाइन गेम खेलने के लिए समय-सीमा में कटौती

  • चीनी नियामकों द्वारा गेमिंग की लत पर बढ़ती चिंता को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार, सप्ताहांत और छुट्टियों के अवसर पर 18 साल से कम उम्र के खिलाडियों के लिए ऑनलाइन गेम खेलने के लिए मात्र एक घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
  • ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर निर्धारित अवधि के बाद किसी भी रूप में गेमिंग सेवाएं प्रदान करने से रोक लगाई गयी है, और कंपनियों को वास्तविक नाम सत्यापन प्रणाली लागू करने का निर्देश किया गया है।

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