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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 August 2021

 

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. अफगानों के खिलाफ कई लड़ाईयां जीतने वाले सिख योद्धा हरि सिंह नलवा

 

सामान्य अध्ययन-II

1. हरियाणा के नए भूमि कानून संबंधी मुद्दे

2. भारत के नए ड्रोन नियम

3. ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट

4. क्वाड राष्ट्रों का मालाबार अभ्यास

 

सामान्य अध्ययन-III

1. लाइट डिटेक्शन और रेंजिंग सर्वे (LiDAR) तकनीक

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. किलाऊआ ज्वालामुखी

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

 अफगानों के खिलाफ कई लड़ाईयां जीतने वाले सिख योद्धा हरि सिंह नलवा

संदर्भ:

इतिहास में, साम्राज्यों के कब्रिस्तान के रूप में विख्यात ‘अफगानिस्तान’ पर कभी भी पूरी तरह से किसी का नियंत्रण नहीं हो सका। किंतु, एक महान सिख सेनापति ‘हरि सिंह नलवा’ (Hari Singh Nalwa) ने अफगानिस्तान में उपद्रवी ताकतों पर काबू पाकर, वहां के सबसे खूंखार सिख योद्धा की प्रतिष्ठा अर्जित की थी।

‘हरि सिंह नलवा’ कौन थे?

  1. ‘हरि सिंह नलवा’, महाराजा रणजीत सिंह की सेना में एक सेनापति थे।
  2. वह कश्मीर, हजारा और पेशावर के सूबेदार भी थे।
  3. इन्होने कई अफगान लड़ाकों को पराजित किया और अफगानिस्तान की सीमा से सटे विभिन्न क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था।
  4. इस प्रकार, इन्होने, अफ़गानों को खैबर दर्रे के रास्ते पंजाब में प्रवेश करने से रोका। खैबर दर्रा 1000 ईस्वी से लेकर 19वीं शताब्दी के आरंभ तक विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा भारत में प्रवेश करने का मुख्य मार्ग था।

इनकी विरासत:

  • अफ़ग़ानिस्तान को अविजित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, और हरि सिंह नलवा ने पहली बार अफ़ग़ानिस्तान सीमा और ख़ैबर दर्रे से सटे हुए विभिन्न क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर अफ़गानों को ‘उत्तर-पश्चिम सीमांत’ (North-West Frontier) प्रदेश को बरबाद करने से रोका था।
  • उन्होंने, अफ़ग़ानिस्तान की एक लड़ाकू जनजाति ‘हज़ारा’ के हजारों लड़ाकों को पराजित किया, जबकि ‘हरि सिंह नलवा’ की ताकत ‘‘हज़ारा’ लड़ाकों’ की तुलना में मात्र एक-तिहाई ही थी।

उनकी बहादुरी और पराक्रम के लिए, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में ‘नलवा’ के नाम पर एक डाक टिकट जारी किया गया था।

इनके द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध:

  1. कसुर की लड़ाई 1807 (अब पाकिस्तान में): हरि सिंह नलवा में अफगानी शासक कुतुब-उद-दीन खान को हराया।
  2. अट्टोक की लड़ाई (1813): हरी सिंह नलवा ने अन्य सेनानायकों के साथ मिलकर, अजीम खान और उनके भाई दोस्त मोहम्मद खान के खिलाफ जीत हासिल की, और यह दुर्रानी पठानों पर सिखों की पहली बड़ी जीत थी। खान भाइयों ने काबुल के शाह महमूद की ओर युद्ध में भाग लिया था।
  3. पेशावर की लड़ाई (1818): हरी सिंह नलवा ने 1837 में जमरूद के किले पर अपना कब्ज़ा कर लिया था, यह किला खैबर दर्रे के माध्यम से अफगानिस्तान के प्रवेश द्वार पर स्थित था।

अफगानों के खिलाफ इन विजयों का भारत के लिए महत्त्व:

इतिहासकारों का मानना है, कि यदि महाराजा रणजीत सिंह और उनके सेनापति हरि सिंह नलवा ने पेशावर और ‘उत्तर पश्चिम सीमांत’, जोकि अब पाकिस्तान का हिस्सा है, को नहीं जीता होता, तो यह क्षेत्र अफगानिस्तान का हिस्सा हो सकता था और पंजाब और दिल्ली पर अफगानों के आक्रमण कभी नहीं रुक पाते।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि हरि सिंह को ‘नलवा’ की उपाधि, उनके द्वारा अल्पावस्था में एक खूंखार बाघ को मर डालने के बाद, महाराजा रणजीत सिंह द्वारा दी गयी थी। महाराजा रणजीत सिंह के बारे अधिक जानने हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हरि सिंह नलवा के बारे में
  2. उनकी विरासत
  3. उनके द्वारा लड़े गए महत्वपूर्ण युद्ध
  4. उनके द्वारा शासित प्रदेशों का अवलोकन।

मेंस लिंक:

हरि सिंह नलवा की विरासत पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

 हरियाणा के नए भूमि कानून संबंधी मुद्दे


संदर्भ:

हाल ही में, ‘भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार (हरियाणा संशोधन) विधेयक’ 2021 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement (Haryana Amendment), Bill, 2021) हरियाणा विधानसभा द्वारा पारित कर दिया गया है।

  • इस विधेयक का उद्देश्य, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाकर विकास परियोजनाओं में तेजी लाना है।
  • हालांकि, विधेयक को कथित रूप से “किसान विरोधी” होने और ‘सहचर पूँजीवाद’ या ‘क्रोनी कैपिटलिज़्म’ (Crony Capitalism) को बढ़ावा देने वाला बताते हुए इसकी आलोचना की जा रही है।

नए विधेयक के विवादास्पद प्रावधान:

इस विधेयक के माध्यम से ‘सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ (Public-Private Partnership – PPP) परियोजनाओं को ‘छूट’ की श्रेणी में लाया गया है, जिसके लिए ‘सामाजिक प्रभाव आकलन’ (Social Impact Assessment – SIA) / भू-स्वामियों की सहमति की आवश्यकता नहीं होगी।

  1. विधेयक का यह प्रावधान, ‘केंद्रीय भूमि अधिग्रहण अधिनियम’ 2013 (Central Land Acquisition Act of 2013) के विरुद्ध है, जिसके तहत ‘सामाजिक प्रभाव आकलन’ (SIA) / भूस्वामियों की सहमति हासिल करना अनिवार्य है।

विधेयक में अधिग्रहीत इमारत के रहने वालों को खाली करने के लिए 48 घंटे की पूर्व सूचना देने की  आवश्यकता को खत्म करने का प्रयास किया गया है। कलेक्टर द्वारा निर्णय की घोषणा के तुरंत बाद इमारत के रहने वालों को को भवन खाली करना होगा।

  1. यह प्रावधान अत्यंत क्रूर और मनमाना है। विधेयक में राज्य-प्रशासन को आधी रात में भी बगैर किसी सूचना या उपाय के ‘प्रभावित व्यक्ति के सामान को बाहर फेंकने’ की शक्तियां प्रदान की गई हैं।
  2. इस संशोधन में, बेदखल किए जाने व्यक्तियों को मौद्रिक मुआवजे सहित भूमि के भूखंड दिए जाने संबंधी प्रावधान को भी हटा दिया गया है।

यदि कलेक्टर की राय में, अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि से जुड़े सभी व्यक्तियों द्वारा अपनी स्वतंत्र इच्छा से नियमों और शर्तों से सहमति दे दी गई है, तो वह उचित मुआवजे का निर्धारण कर सकता है और आगे की जांच किए बिना अपना निर्णय सुना सकता है

  1. ऐसी स्थिति में, काश्तकार और निर्धन व्यक्ति, जिनके पास भूमि के स्वामित्व अधिकार नहीं हो सकते हैं, उनका सब कुछ खो जाने की संभावना है।
  2. इसके अलावा, भूमि पर महिला उत्तराधिकारियों का हिस्सा, अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज नहीं किया जाता है।
  3. और भूमि का उपयोग करने का अधिकार रखने वाले व्यक्ति, जैसे कि खेवट (Khewat) के सह-साझेदारों में से शामिल व्यक्ति, और बंधक रखी गयी जमीन के उपयोंग करने के अधिकार आदि को आधिकारिक रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज नहीं किया जाता है।

छूट प्राप्त परियोजनाओं में शामिल हैं:

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा या भारत की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाएं;
  2. विद्युतीकरण सहित ग्रामीण आधारभूत संरचना;
  3. किफायती आवास, गरीबों के लिए आवास और भूमि अधिग्रहण या प्राकृतिक आपदा के कारण विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए;
  4. राज्य सरकार या उसके उपक्रमों द्वारा स्थापित औद्योगिक गलियारे, जिनमें निर्दिष्ट रेलवे लाइनों या सड़कों के दोनों ओर 2 किमी तक की भूमि का अधिग्रहण किया जा सकता है;
  5. स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, पीपीपी परियोजनाएं, जिनमें भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास है, और शहरी मेट्रो और रैपिड रेल परियोजनाएं।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के बारे में:

‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम’, 2013 (Land Acquisition Act, 2013) को ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम’, 1894 (1894 अधिनियम) की स्थान पर पुरःस्थापित किया गया था, और इसमें ‘सार्वजनिक और निजी’ दोनों क्षेत्रों की परियोजनाओं हेतु सरकार द्वारा भूमि-अधिग्रहण किए जाने से बेदखल होने वाले व्यक्तियों को उच्च मुआवजा देने का प्रावधान किया गया था।

भूमि अधिग्रहण: निजी परियोजना के लिए भूमि-अधिग्रहण करने हेतु 80% प्रभावित परिवारों का सहमत होना अनिवार्य होगा। ‘सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ (PPP) परियोजना के लिए, 70 प्रतिशत प्रभावित परिवारों की सहमति आवश्यक होगी। इसके बाद ही जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है।

सामाजिक प्रभाव आंकलन: ‘सामाजिक प्रभाव आकलन’ (Social Impact Assessment – SIA) के तहत परियोजना के लिए भूमि-अधिग्रहण से जिन कारीगरों, मजदूरों, बटाईदारों, काश्तकारों आदि की (स्थाई) आजीविका प्रभावित होगी, उनकी सहमति प्राप्त करने की भी आवश्यकता होती है।

मुआवजा: प्रभवित व्यक्तियों के लिए मुआवजा बाजार दरों के अनुपात में दिया जाएगा, जोकि ग्रामीण क्षेत्र में बाजार दर का 4 गुना तथा शहरी क्षेत्र में 2 गुना होगा। प्रभावित कारीगरों, छोटे व्यापारियों, मछुआरों आदि को एकमुश्त भुगतान किया जाएगा, भले ही उनके पास कोई जमीन न हो।

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु: कोई अन्य तरीका नही बचने पर, केवल अंतिम उपाय के रूप में ही उर्वर, सिंचित, बहुफसली कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा सकता है। ऐसी किसी उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किए जाने पर, सरकार को समान क्षेत्रफल की बंजर भूमि को कृषि प्रयोजन के लिए विकसित करना होगा।

निजी संस्थाएं: यदि सरकार निजी कंपनी के लिए भूमि का अधिग्रहण करती है तो उक्त निजी कंपनी प्रभावित लोगों के राहत और पुनर्वास के लिए जिम्मेदार होगी। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के भूमि-मालिकों के लिए अतिरिक्त पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा।

सुरक्षा उपाय: राज्य सरकारों के लिए ‘विवाद निपटान तंत्र’ स्थापित करना होगा। इस निकाय के अध्यक्ष के रूप में जिला न्यायाधीश या 7 साल का अनुभव रखने वाले वकील को नियुक्त किया जाना चाहिए।

जवाबदेहीः सरकार की ओर से होने वाले किसी भी अपराध के लिए विभागाध्यक्ष को जिम्मेदार बनाया जाएगा। यदि परियोजना 5 वर्षों में शुरू नहीं होती है, तो भूमि को मूल मालिक या भूमि बैंक को वापस करना होगा। विवादों के शीघ्र निपटारे हेतु भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘सामाजिक प्रभाव आकलन’ (SIA) और ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन’ (EIA) के बीच अंतर जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन’ के बारे में
  2. हरियाणा के नए भूमि कानून के बारे में
  3. यह क़ानून, ‘केंद्रीय भूमि अधिग्रहण अधिनियम’ 2013 से किस प्रकार भिन्न है?
  4. ‘केंद्रीय भूमि अधिग्रहण अधिनियम’ 2013 का अवलोकन

मेंस लिंक:

हरियाणा के नए भूमि कानून से जुड़ी चिंताओं की चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

भारत के नए ड्रोन नियम


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा ‘ड्रोन नियमावली, 2021’ (Drone Rules 2021) को अधिसूचित किया गया है, जिसके तहत ‘मानव रहित विमान प्रणालियों’ के लिए नियमों को पहले की तुलना में कहीं अधिक उदार किया गया है।

मुख्य परिवर्तन:

  1. डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म को बिजनेस फ्रेंडली ‘सिंगल-विंडो ऑनलाइन सिस्टम’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
  2. हरित क्षेत्रों में 400 फीट तक और हवाई अड्डे की परिधि से 8 से 12 किमी के बीच के क्षेत्र में 200 फीट तक ड्रोन उड़ाने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
  3. माइक्रो ड्रोन (गैर-व्यापारिक इस्तेमाल के लिये), नैनो ड्रोन और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिये पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।
  4. भारत में पंजीकृत विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा ड्रोन संचालन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
  5. ड्रोन और ड्रोन के पुर्जों के आयात को ‘विदेश व्यापार महानिदेशालय’ (DGFT) द्वारा नियमित किया जायेगा।
  6. पंजीकरण या लाइसेंस लेने के पहले सिक्योरिटी क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं होगी।
  7. अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिये उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र, विशिष्ट पहचान संख्या, पूर्वानुमति और रिमोट पायलट लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।
  8. ड्रोन नियम, 2021 के तहत ड्रोन कवरेज को 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है, और इसमें ड्रोन टैक्सी को भी शामिल किया गया है।
  9. उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी ‘भारतीय गुणवत्ता परिषद’ निभायेगी और उसके द्वारा अधिकृत संस्थायें यह प्रमाणपत्र जारी करेंगी।
  10. निर्माता, स्व-प्रमाणन के जरिये अपने ड्रोनों की विशिष्ट पहचान संख्या को डिजिटल स्काई प्लेटफार्म पर दे सकते हैं।
  11. ड्रोन नियम, 2021 के तहत अधिकतम जुर्माना घटाकर एक लाख रुपए कर दिया गया। बहरहाल, अन्य कानूनों की अवहेलना होने पर यह जुर्माना नहीं लगेगा।
  12. कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
  13. व्यापार अनुकूल नियम बनाने के लिये ड्रोन संवर्धन परिषद् की स्थापना की जाएगी।

नयी नियमावली का महत्व:

  1. यह नियमावली, वर्ष 2019 में घोषित ‘दुश्मन ड्रोन-रोधी ढांचे’ (anti-rogue drone framework) के माध्यम से दुश्मन ड्रोन से सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ड्रोन उपयोग की अनुमति देने संबंधी सरकार के इरादों को अभिव्यक्त करती है।
  2. यह नियमावली, विश्वास और स्व-प्रमाणन के आधार पर तैयार की गयी है।
  3. नए ड्रोन नियम, इस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्ट-अप और हमारे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण तरीके से सहायता प्रदान करेंगे और इससे नवाचार और व्यापार के लिए नई संभावनाएं भी खुलेंगी।
  4. ये, भारत को ड्रोन हब बनाने हेतु नवाचार, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग में भारत की शक्ति का लाभ उठाने में सहायक साबित होंगे।

कड़े नियमों और विनियमन की आवश्यकता:

  • हाल ही में, जम्मू में वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में विस्फोट किया गया था। इसके लिए विस्फोटकों को गिराने में पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था।
  • पिछले दो वर्षों में, भारतीय क्षेत्र में हथियारों, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए पाकिस्तान स्थित संगठनों द्वारा नियमित रूप से ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में पाकिस्तान से लगी सीमा पर 167 ड्रोन देखे गए और वर्ष 2020 में 77 ड्रोन देखे गए।
  • हालिया वर्षों के दौरा ‘ड्रोन प्रौद्योगिकी’ के तेजी से प्रसार और वैश्विक बाजार इसका तीव्र विकास होने से, विश्व के सबसे सुरक्षित शहरों में भी ड्रोन हमले की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  • वर्तमान में ड्रोन, विशेष रूप से, उन संघर्ष क्षेत्रों में जहां ‘गैर-राज्य अभिकर्ता’ (Non State Actors – NSA) सक्रिय हैं और प्रौद्योगिकी तक आसान पहुंच रखते हैं, सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि विश्व के कुछ देशों के पास खुद के सशस्त्र बल नहीं हैं? इन देशों के बारे में जानने हेतु पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नए ड्रोन नियमों का अवलोकन
  2. नए संशोधित नियम बनाम पुराने ड्रोन नियम
  3. नए ड्रोन नियमों के तहत दी गयी छूट
  4. लाइसेंस की आवश्यकता

मेंस लिंक:

नए ड्रोन नियमों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP)


संदर्भ:

हाल ही में, मालदीव सरकार द्वारा ‘ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट’ (Greater Malé Connectivity Project GMCP) के निर्माण हेतु आधिकारिक तौर पर मुंबई स्थित कंपनी ‘अफ्कांस’ (AFCONS) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

पृष्ठभूमि:

सितंबर 2019 में भारत के विदेश मंत्री की माले यात्रा के दौरान इस परियोजना पर विचार शुरू किया गया था।

परियोजना के बारे में:

  • ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) मालदीव में भारत द्वारा शुरू की गयी अब तक की सबसे बड़ी अवसंरचना परियोजना है।
  • इसके तहत, मालदीव की राजधानी माले को तीन पड़ोसी द्वीपों विलिंगिली, गुलहिफाहु और थिलाफुशी से जोड़ने वाले 74 किलोमीटर लंबे पुल और कॉजवे लिंक का निर्माण किया जाएगा।
  • ‘ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट’ के बेहतर कार्यान्वयन हेतु भारत सरकार द्वारा मालदीव के लिए 100 मिलियन डॉलर अनुदान के तौर पर तथा 400 मिलियन डॉलर ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (Line of Credit- LoC) के वित्तीय पैकेज सहायता की घोषणा की गयी है।

current affairs

 

परियोजना के तहत इन द्वीपों को चुने जाने का कारण:

गुलहिफाहु द्वीप (island of Gulhifalhu) पर, वर्तमान में भारतीय क्रेडिट लाइन के अंतर्गत एक बंदरगाह का निर्माण किया जा रहा है। वर्ष 2016 से, माले से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस द्वीप को राजधानी शहर से निकटता के कारण, मालदीव सरकार द्वारा विनिर्माण, भंडारण और वितरण सुविधाओं के लिए एक रणनीतिक स्थान के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

थिलाफुशी द्वीप (Island of Thilafushi): राजधानी से 7 किमी की दूरी पर स्थित थिलाफुशी के कृत्रिम द्वीप को 1990 के दशक की शुरुआत में निर्मित किया गया था। इस द्वीप को राजधानी शहर ‘माले’ में उत्पन्न कचरे को ठिकाने लगाने हेतु ‘लैंडफिल’ के रूप में अभिहित किया गया था।

परियोजना का महत्व:

ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) न केवल मालदीव में भारत की सबसे बड़ी परियोजना है, बल्कि समग्र रूप से मालदीव की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना है।

  • यह परियोजना इसलिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह देश में अंतर-द्वीप संपर्क की सुविधा प्रदान करती है।
  • साथ ही, GMCP इस बात का ठोस प्रमाण भी है, कि मालदीव में किसी भी आपात स्थिति के समय में पहला रिस्पॉन्डर होने के अलावा, भारत, मालदीव के विकास में एक मजबूत भागीदार भी है।

इस परियोजना की आवश्यकता:

दूर-दराज के द्वीपों तक आवागमन करने हेतु स्थानीय निवासियों के लिए परिवहन एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए स्थानीय लोगों को नावों या समुद्री जहाजों का सहारा लेना पड़ता है। मानसून के दौरान समुद्र में प्रचंड स्थित होने पर परिवहन और भी मुश्किल हो जाता है। ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनाया जाने वाला पुल माले को तीन पड़ोसी द्वीपों से जोड़ेगा और परिवहन को आसान बनाएगा।

लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) क्या है?

लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) विकासशील देशों को रियायती ब्याज दरों पर दिया जाने वाला एक ‘सॉफ्ट लोन’  होता है, जिसे ऋणकर्ता सरकार को चुकाना होता है। लाइन ऑफ क्रेडिट ‘अनुदान’ नहीं होता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप मालदीव में चीन द्वारा निर्मित ‘सिनामाले ब्रिज’ के बारे में जानते हैं?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

क्वाड राष्ट्रों का मालाबार युद्धाभ्यास


संदर्भ:

चतुर्पक्षीय सुरक्षा वार्ता समूह अर्थात ‘क्वाड’ (Quad) के चार सदस्य राष्ट्रों – भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया – की नौसेनाएं मालाबार युद्धाभ्यास के 25 वें संस्करण में भाग ले रही हैं। यह नौसेना युद्धाभ्यास, प्रशांत महासागर में स्थित ‘गुआम’ के तट पर 26 अगस्त से शुरू हो रहा है।

मालाबार युद्धाभ्यास का अवलोकन:

समुद्री नौसैन्य युद्धाभ्यास की मालाबार श्रृंखला वर्ष 1992 में भारत भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के मध्य युद्धाभ्यास के रूप में शुरू हुई थी। वर्ष 2015 में इस युद्धाभ्यास में जापान को सामिलित किया गया और इसके पश्चात यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया।

क्वाड समूह’ (Quad Group) क्या है?

यह एक चतुष्पक्षीय संगठन है जिसमे जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सम्मिलित हैं।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी साझा हित रखते हैं।
  • इस विचार को पहली बार वर्ष 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे द्वारा प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के समूह में सम्मिलित नहीं होने के कारण यह विचार आगे नहीं बढ़ सका है।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

‘क्वाड समूह’ के प्रति चीन की आशंकाएं:

  1. बीजिंग, काफी समय से भारत-प्रशांत क्षेत्र में इन लोकतांत्रिक देशों के गठबंधन का विरोध करता रहा है।
  2. चीन, इसे एशियाई-नाटो (Asian-NATO) चतुष्पक्षीय गठबंधन के रूप में देखता है, जिसका उद्देश्य चीन के उत्थान को रोकना है।
  3. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘रूस-भारत-चीन समूह’, RIC ग्रुपिंग के बारे में सुना है? इसके उद्देश्य क्या हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड (Quad)- संरचना और सदस्य
  2. मालाबार युद्धाभ्यास – संरचना और प्रतिभागी
  3. एशिया प्रशांत क्षेत्र तथा भारत-प्रशांत क्षेत्र: भौगोलिक भूगोल
  4. दक्षिण चीन सागर में महत्वपूर्ण द्वीप
  5. हिंद महासागर क्षेत्र में द्वीप तथा विभिन्न चैनल

मेंस लिंक:

ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने के लिए मालाबार युद्धाभ्यास का विस्तार करना, भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

 लाइट डिटेक्शन और रेंजिंग सर्वे (LiDAR) तकनीक


(Light Detection and Ranging Survey (LiDAR) technique)

संदर्भ:

‘स्टेचू ऑफ़ यूनिटी’ एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (SOUADA) के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र का मानचित्रण करने की दिशा में, गुजरात सरकार द्वारा पहले महत्वपूर्ण कदम के तौर पर, ड्रोन-आधारित एरियल ‘लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग’ (Light Detection and Ranging – LiDAR) तकनीक और ‘फोटोग्रामेट्री तकनीक’ (Photogrammetry Technology) का उपयोग किया जा रहा है।

यह तकनीक, लेजर परिशुद्धता के साथ इमारतों, प्राकृतिक संरचनाओं, और अन्य विशेषताओं का ऊपर से सटीक मानचित्रण करेगी।

 

लाइडर (LiDAR) क्या है?

LiDAR एक लाइट डिटेक्शन ऐंड रेंजिंग तकनीक है। इस सुदूर संवेदन तकनीक में दूरी के मापन हेतु लक्ष्य पर लेज़र प्रकाश डाला जाता है तथा परावर्तित प्रकाश का विश्लेषण किया जाता है।

इस तकनीक के जरिए दुर्गम पहाड़ी इलाकों की सड़क निर्माण में सर्वेक्षण का काम किया जाता है। इसमें स्पंदित प्रकाश को – हवाई माध्यम से एकत्र किये गए अन्य डेटा के साथ मिलाकर पृथ्वी की सटीक त्रिविमीय सूचना तथा इसकी सतह की विशेषताओं के बारे में जानकारी एकत्रित की जाती है।

सर्वेक्षण के पश्चात डिजिटल चित्रों के जरिए दुर्गम इलाकों की सड़क संरचना का एकदम सही अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे जमीन की बनावट, सतह की ऊंचाई, पेड़-पौधों के फैलाव और क्षेत्रफल का सही अनुमान लगाकर मदद ली जा सकती है।

यह किस प्रकार कार्य करती है?

LiDAR तकनीक का एक साधारण सिद्धांत है – पृथ्वी की सतह पर स्थित किसी वस्तु पर लेजर प्रकाश डालना तथा परावर्तित प्रकाश के LiDAR स्रोत पर लौटने के समय की गणना करना। प्रकाश की गति (लगभग 186,000 मील प्रति सेकंड) की तेजी के कारण LiDAR तकनीक के माध्यम से दूरी को सटीकता से मापने की प्रक्रिया काफी तीव्र होती है।

  • LiDAR उपकरण में मुख्य रूप से एक लेजर, एक स्कैनर और एक विशेष जीपीएस रिसीवर होता है।
  • सामान्यतः विस्तृत क्षेत्रों का LiDAR डेटा प्राप्त करने के लिए हवाई जहाज तथा हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया जाता है।

lidar

 

इंस्टा जिज्ञासु:

LiDAR में Radar में क्या अंतर हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. GPS क्या है?
  2. भारत सहित विभिन्न देशों के स्थान आधारित नेविगेशन सेवाएं।
  3. यह किस प्रकार कार्य करता है?
  4. LiDAR के अनुप्रयोग।
  5. लेजर क्या है?

मेंस लिंक:

LiDAR प्रौद्योगिकी के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


किलाऊआ ज्वालामुखी

(Kilauea Volcano)

‘किलाऊआ’ हवाई द्वीप स्थित में एक सक्रिय ‘ढाल ज्वालामुखी’ / ‘शील्ड ज्वालामुखी’ (Shield Volcano) है।

  • ऐतिहासिक रूप से, यह हवाई द्वीप का निर्माण करने वाले पांच ज्वालामुखियों में सर्वाधिक सक्रिय ज्वालामुखी है।
  • हाल ही वैज्ञानिकों ने, ‘किलाऊआ ज्वालामुखी’ से पुनः लावा उत्सर्जित होने की चेतावनी दी है।
  • वर्ष 1952 से लेकर अब तक किलाऊआ ज्वालामुखी’ में 34 बार प्रस्फोटन हो चुका है।

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