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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 August 2021

 

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (ई-वीज़ा)

2. जांच एजेंसियों में जनशक्ति की कमी

3. ‘हवाना सिंड्रोम’ क्या है?

 

सामान्य अध्ययन-III

1. चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य

2. ‘सुजलम’ अभियान

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अराणमुला नौका दौड़

2. ‘बने इंटरनेट विस्मयकारी’ कार्यक्रम

3. ‘टोकनाइजेशन’

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (ई-वीज़ा)


संदर्भ:

तालिबान के पूरे अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण करने की दिशा में अग्रसर होने के साथ ही, हाल ही में भारत सरकार द्वारा अफगान नागरिकों को जारी किए गए सभी वीजा ‘अमान्य’ या रद्द करने के फैसला किया गया है, इसमें पिछले कुछ महीनों में जारी किए गए लगभग 2,000 वीजा भी शामिल है।

इसके बाद, सभी अफ़गान नागरिकों को भारत में प्रवेश करने हेतु केवल ऑनलाइन माध्यम से विशेष ई-वीज़ा (e-visas) के लिए आवेदन करना होगा।

आवश्यकता:

भारत सरकार के लिए चिंता का विषय यह था, कि वीजा हासिल करने के लिए अफगान नागरिकों द्वारा जमा किए जाने वाले पासपोर्ट काबुल स्थित भारतीय दूतावास और ‘भारतीय वीजा केंद्र’ में इकट्ठे किए जाते हैं, जोकि भारत विरोधी आतंकवादी समूहों के हाथों में जा सकते हैं। इसे देखते हुए, गृह मंत्रालय ने इन सभी वीजा को रद्द करने का फैसला किया है।

‘ई-वीजा’ क्या है?

  • ई-वीजा (e-visa) प्रणाली वर्ष 2014 में सरकार द्वारा शुरू की गई एक नई पद्धति है। वर्ष 2017-2018 में इस सुविधा को विस्तारित किया गया था।
  • इस प्रणाली की बुनियाद, वर्ष 2010 में जापान, सिंगापुर, फ़िनलैंड, लक्ज़मबर्ग और न्यूज़ीलैंड के लिए शुरू की गयी ‘टूरिस्ट वीज़ा ऑन अराइवल’ (TVOA) योजना में देखी जा सकती है।
  • सरकार ने TVOA योजना को ‘इलेक्ट्रॉनिक यात्रा प्राधिकरण’ (Electronic Travel Authorisation) के साथ विलय कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप ‘ई-वीजा’ प्रणाली विकसित हुई।

विदेशी नागरिकों के लिए ‘वीजा’ जारी करने हेतु ‘गृह मंत्रालय’ एक प्रमुख एजेंसी है।

पात्रता:

‘ई-वीजा’ जिसे इलेक्ट्रॉनिक वीजा भी कहा जाता है, पांच श्रेणियों में प्रदान किया जाता है – पर्यटन, व्यवसाय, सम्मेलन, चिकित्सा और चिकित्सा-परिचर्या।

अपवाद:

  • यह सुविधा पाकिस्तान के नागरिकों के लिए उपलब्ध नहीं है, और पाकिस्तानी नागरिकों को भारत आने के लिए इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से नियमित वीजा के लिए आवेदन करना होता है।
  • ‘ई-वीजा’ विदेशी राजनयिकों के लिए मान्य नहीं होता हैं। इनके लिए अलग से वीजा प्रदान किया जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

किन विदेशी देशों को भारत में प्रवेश हेतु वीज़ा मुक्त सुविधा प्रदान की जाती है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ई-वीजा क्या है?
  2. पात्रता
  3. लाभ

मेंस लिंक:

‘ई-वीजा’ योजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

 जांच एजेंसियों में जनशक्ति की कमी


(Lack of manpower in Probe Agencies)

संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा, वर्तमान और पूर्व, सभी सांसदों और विधायकों के खिलाफ वर्षों से लंबित सैकड़ों आपराधिक मामलों के बारे में एक याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत द्वारा ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (CBI) जैसी जांच एजेंसियों में लंबित रिक्तियों पर निम्नलिखित टिप्पणियां की गयीं।

  • न्यायपालिका की तरह जांच एजेंसियों को भी जनशक्ति और बुनियादी ढांचे की कमी का सामना करना पड़ता है।
  • इन पर काम का भार काफी ज्यादा है। उदाहरण के लिए, एक ट्रायल कोर्ट लगभग 1,000 मामलों को संभालता है।
  • इनमें से कुछ मामले, जिनकी सीबीआई और ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (Enforcement Directorate – ED) जैसी एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है, एक दशक से अधिक समय से लंबित हैं।

विधि-निर्माताओं के खिलाफ लंबित मामलों संबंधी आंकड़े:

  1. 51 सांसद और 71 विधायक, ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ 2002 (Prevention of Money Laundering Act (PMLA) 2002) के तहत अपराध में आरोपी हैं।
  2. देश भर में सीबीआई अदालतों में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित 121 मामलों में से 58 मामलों में आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
  3. इनके खिलाफ 45 मामलों में अभी तक आरोप भी तय नहीं हुए हैं, जबकि कथित तौर पर ये अपराध कई साल पहले किए गए थे।
  4. विधि-निर्माताओं के खिलाफ सीबीआई के कुल 37 मामले वर्षों से जांच के चरण में ही चल रहे है।

अक्सर होने वाली देरी के लिए कारण और चुनौतियाँ:

  1. उच्च न्यायालयों द्वारा हस्तक्षेप और मुकदमे की सुनवाई पर लगाई गई रोक।
  2. ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (ED) द्वारा अन्वेषित किए जाने वाले मामलों में अवरोध उत्पन्न होना, क्योंकि इनमे से कुछ मामले विदेशों के ‘टैक्स हैवन’ तक फैले हुए है, और इन देशों द्वारा जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया गया।
  3. विशेष रूप से सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए अपर्याप्त विशेष अदालतें।
  4. अभियोजन में अभियोक्ताओं और गवाहों की कमी।
  5. विलंबित जांच।

इस प्रकार के मामलों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश:

  • 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों के लंबे समय से लंबित मुकदमों को तेजी से ट्रैक करने के लिए देश भर में विशेष अदालतें स्थापित करने का आदेश दिया था।
  • फरवरी 2020 में, सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों के पूरे आपराधिक इतिहास को प्रकाशित करने का आदेश दिया था,
  • साथ ही, शीर्ष अदालत ने आदेश देते हर कहा था, कि लंबित मामलों के विवरण के साथ, राजनीतिक दलों के लिए, ‘इस प्रकार के उम्मीदवारों के चयन के कारणों को भी प्रकाशित करना होगा, तथा साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि उनके द्वारा गैर-आपराधिक पृष्ठभूमियों के उम्मीदवारों क्यों नहीं चुना गया था।

समय की मांग:

  1. उच्चतम न्यायालय को एक न्यायिक आदेश पारित करना चाहिए, जिसमें निचली अदालतों को लंबित मुकदमे की कार्यवाही को “अनिवार्य समयबद्ध तरीके से” संभवतः अगले छह महीनों के भीतर, पूरा करने का निर्देश दिया जाए।
  2. प्रत्येक ‘ट्रायल कोर्ट’ के समक्ष मामलों की संख्या को “तर्कसंगत” करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
  3. विधि-निर्माताओं से जुड़े आपराधिक मुकदमों पर प्रगति की निगरानी हेतु, शीघ्र ही विशेष अदालतों सहित एक तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
  4. हाल ही में अदालत ने यह भी निर्देश दिया था, कि किसी सांसद या विधायक के खिलाफ आपराधिक मामला संबंधित उच्च न्यायालय की सहमति के बाद ही वापस लिया जा सकता है।
  5. राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे खुद दागी लोगों को टिकट देने से मना कर दें।
  6. जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि उन लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जा सके जिनके खिलाफ जघन्य प्रकृति के मामले लंबित हैं।
  7. भारत के चुनाव आयोग (ECI) के लिए ‘राजनीतिक दलों के वित्तीय खातों की लेखा परीक्षा करने की शक्ति’ प्रदान की जानी चाहिए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

विभिन्न राज्य सरकारों द्वार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत निहित शक्ति का उपयोग करते हुए सांसद / विधायक के खिलाफ लंबित कई आपराधिक मामलों को वापस लिया गया है। इस धारा के क्या प्रावधान किए गए हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8
  2. उच्चत्तम न्यायालय दिशानिर्देश
  3. ECI – रचना और कार्य
  4. CEC- नियुक्ति
  5. उम्मीदवारों के चुनाव से संबंधित मामलों पर निर्वाचन आयोग की शक्तियां

मेंस लिंक:

राजनीति के अपराधीकरण से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए और इन चिंताओं को दूर करने के लिए उच्चत्तम न्यायालय ने क्या कदम उठाये हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

हवाना सिंड्रोमएवं इस रहस्यमयी बीमारी के बारे में नवीनतम रिपोर्ट


संदर्भ:

लगभग चार वर्ष पूर्व, हवाना सिंड्रोम (Havana syndrome) नामक एक रहस्यमय न्यूरोलॉजिकल बीमारी से, क्यूबा, ​​चीन और अन्य देशों में तैनात अमेरिकी राजनयिक और खुफिया अधिकारी, ग्रसित हो गए थे।

अब, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (NAS) की एक रिपोर्ट में, इस बीमारी का संभावित कारण ‘निर्देशित’ माइक्रोवेव विकिरण (directed microwave radiation) बताया गया है।

‘हवाना सिंड्रोम’ क्या है?

  • वर्ष 2016 के अंत में, हवाना में तैनात कई अमेरिकी राजनयिक और अन्य कर्मचारी, अपने होटल अथवा घरों में अजीबोगरीब ध्वनियां सुनाई देने और शरीर में अजीब सनसनी महसूस होने के बाद, बीमार हो गए थे।
  • इसके अलावा, मतली आने, गंभीर सिरदर्द, थकान, चक्कर आने, नींद की समस्या और श्रवण-ह्रास आदि लक्षण पाए गए। इस बीमारी को तब से “हवाना सिंड्रोम” के रूप में जाना जाता है।

‘हवाना सिंड्रोम’ के कारण

  • समिति द्वारा जांच किए गए मामलों की व्याख्या करने पर, ‘निर्देशित’ स्पंदित रेडियो आवृत्ति ऊर्जा (Directed pulsed Radio Frequency energy) को ‘हवाना सिंड्रोम’ का सर्वाधिक संभावित कारण पाया गया है।
  • इस बीमारी से संक्रमित होने पर, रोगी को पीड़ादायक सनसनाहट और भिनभिनाहट की आवाज महसूस होती थी, और ये एक विशेष दिशा से या कमरे में एक विशिष्ट स्थान से उत्पन्न होती थी।

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने हमारी आकाशगंगा में पहली बार ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ (fast radio bursts– FRB) के रूप में जानी जाने वाली ‘रेडियो तरंगों के अत्याधिक तीव्र स्पंदन’ (Intense pulses of radio waves)  के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. माइक्रोवेव हथियार क्या हैं?
  2. हवाना सिंड्रोम क्या है?
  3. इसके नामकरण के पीछे कारण?
  4. विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का अवलोकन

मैंस लिंक:

हाल ही में, समाचारों में चर्चित ‘हवाना सिंड्रोम’ क्या है? इसके खबरों में होने के कारणों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य


(Minimum selling price for sugar)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा 2021-22 के विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का ‘उचित और लाभकारी मूल्य’ (Fair & Remunerative Price- FRP) में वृद्धि करते हुए 290 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित कर दिया गया है। अब चीनी मिलों को गन्ना-उत्पादक किसानो को पहले दी जा रही कीमत से 5 रुपये प्रति क्विंटल अधिक चुकाना होगा।

इस निर्णय का महत्व:

सरकार के इस निर्णय से पांच करोड़ गन्ना किसानों और उनके आश्रितों के साथ-साथ चीनी मिलों और संबंधित उद्योगों में कार्यरत पांच लाख श्रमिकों को लाभ होगा।

चीनी मूल्य निर्धारण नीति:

चीनी के मूल्य बाजार के रुझानों के अधीन होते हैं और चीनी की मांग एवं आपूर्ति पर निर्भर होते हैं। तथापि, वर्ष 2018 से, किसानों के हित-संरक्षण के उद्देश्य से चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (Minimum Selling Price– MSP) की अवधारणा लागू की गई है, ताकि यह उद्योग कम से कम, चीनी की न्यूनतम उत्पादन लागत निकाल सके, जिससे वह किसानों को गन्ने के मूल्य की बकाया राशि का भुगतान करने में समर्थ हो सके।

  • सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चीनी मूल्य (नियंत्रण) आदेश, 2018 अधिसूचित किया गया है।
  • उक्त आदेश के प्रावधानों के तहत, सरकार न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) तय करती है।
  • चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) का निर्धारण गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (Fair & Remunerative Price FRP) तथा सर्वाधिक कार्य कुशल मिलों की न्यूनतम परिवर्तन लागत घटकों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

इसके अलावा, कृपया ध्यान दें कि ‘राज्य परामर्श कीमतों’ (State Advised Prices – SAP) की घोषणा प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों द्वारा की जाती है जोकि आम तौर पर ‘उचित और लाभकारी मूल्य’ (FRP) से अधिक होती हैं।

‘उचित और लाभकारी मूल्य’ (FRP):

उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) वह न्यूनतम कीमत है, जिस पर चीनी मिलों द्वारा किसानों से गन्ना खरीदा जाता है।

पृष्ठभूमि:

संघीय / केंद्र सरकार द्वारा ‘उचित और लाभकारी मूल्य’ (FRP) की घोषणा की जाती है। इसका निर्धारण कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices– CACP) की अनुशंसाओं के आधार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा किया जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को ‘वैधानिक न्यूनतम मूल्य’ (Statutory Minimum Price – SMP) के बराबर निर्धारित कर सकती है? इसे समझने हेतु पढ़ें।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘न्यूनतम विक्रय मूल्य’ क्या है?
  2. इसे किस प्रकार निर्धारित किया जाता है?
  3. न्यूनतम समर्थन मूल्य और न्यूनतम विक्रय मूल्य के बीच अंतर।
  4. FRP क्या है?

मेंस लिंक:

चीनी के लिए ‘न्यूनतम विक्रय मूल्य’ (MSP) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 सुजलम’ अभियान


संदर्भ:

हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह के अंतर्गत (25 अगस्त से) 100 दिवसीय ‘सुजलम’ अभियान (‘SUJALAM’ Campaign) की शुरुआत की गई है।

अभियान के बारे में:

इसका अभियान का उद्देश्य ग्राम स्तर पर अपशिष्ट जल प्रबंधन के माध्यम से अधिक से अधिक गांवों को ओडीएफ प्लस गांवों में परिवर्तित करना है।

इस अभियान को विशेष रूप से दस लाख अवशोषक / सोख-गड्ढों (Soak-pits) का निर्माण एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन / ग्रेवॉटर प्रबंधन गतिविधियों के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

इस अभियान के तहत गांवों में आयोजित की जाने वाली प्रमुख गतिविधियां:

  1. वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने हेतु सामुदायिक परामर्श, खुली बैठक और ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन।
  2. ओडीएफ की निरंतरता बनाए रखने और ग्रेवॉटर प्रबंधन करने के लिए सोख गड्ढों को आवश्यक संख्या में तैयार करने हेतु संकल्प पारित करना।
  3. निरंतरता बनाए रखने और सोख गड्ढों के निर्माण संबंधी गतिविधियों की शुरुआत करने के लिए 100 दिवसीय योजना तैयार करना।
  4. आवश्यक संख्या में सोख गड्ढों का निर्माण करना।
  5. आईसी (IEC) के माध्यम से जहां आवश्यक हो वहां पर शौचालय को पुर्ननिर्मित करना।
  6. गांव के सभी नए परिवारों को शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करना।

महत्व:

  • इस अभियान के माध्यम से न केवल गांवों में ग्रेवॉटर प्रबंधन के लिए वांछित बुनियादी संरचना अर्थात् सोख गड्ढों का निर्माण किया जाएगा बल्कि जल-निकायों के संवहनीय प्रबंधन में भी सहायता प्राप्त होगी।
  • इसके अलावा, इस अभियान से सामुदायिक भागीदारी के द्वारा ‘स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण’ के दूसरे चरण (Swacch Bharat Mission- Grameen phase II) की गतिविधियों में तेजी आयेगी और इससे ओडीएफ-प्लस गतिविधियों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।

आवश्यकता:

गांवों में या गांवों के बाहरी इलाकों में गंदे पानी का निष्कासन और जलाशयों का निस्तारण एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। इस अभियान से अपशिष्ट जल प्रबंधन में सहायता प्राप्त होगी और बदले में जलाशयों को पूर्वरूप में लाने में सहायता मिलेगी।

ODF टैग क्या होता है?

मार्च 2016 में जारी किये गए मूल ODF प्रोटोकॉल में कहा गया है कि, यदि, किसी भी दिन के किसी भी समय, कोई भी व्यक्ति खुले में शौच नहीं करता है तो उस शहर / वार्ड को ODF शहर/ वार्ड के रूप में अधिसूचित किया जायेगा।”

ODF+ तथा ODF++ क्या है?

स्वच्छ भारत मिशन- शहरी (Swachh Bharat Mission –Urban: SBM-U) के पहले चरण में ODF दर्जा  प्राप्त करने के बाद शहरों द्वारा किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने और उन्हें जारी रखने के लिए अगस्त 2018 में ODF + और ODF ++ की शुरुआत की गयी थी।

पात्रता: ODF प्रोटोकॉल के आधार पर को शहर को कम से कम एक बार ODF अधिसूचित हो चुके हैं, उन्हें SBM-ODF+  एवं ODF ++ घोषित किया जा सकता है।

ODF+ क्या है?

ODF + प्रोटोकॉल के अनुसार – ‘यदि किसी दिन किसी भी व्यक्ति को खुले में शौच और/या पेशाब करते हुए नहीं पाया जाता है और सभी सामुदायिक तथा सार्वजनिक शौचालय कार्यात्मक अवस्था में एवं सुव्यवस्थित हैं, तो उस शहर, वार्ड या कार्यक्षेत्र को ODF+ घोषित किया जा सकता है।’

ODF++ क्या है?

ODF ++ प्रोटोकॉल में यह शर्त जोड़ी गयी है कि “मल कीचड़/ सेप्टेज (Faecal sludge/Septage) और नालियों का सुरक्षित रूप से प्रबंधन और उपचार किया जाए, जिसमें किसी प्रकार के अनुपचारित कीचड़/सेप्टेज और नालियों का प्रवाह किसी जल निकाय अथवा खुले क्षेत्रों में नहीं होना चाहिए।“

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ODF+ तथा ODF++ मानदंड
  2. SBM चरण 1 बनाम चरण2
  3. SBM शहरी और ग्रामीण, का कार्यान्वयन
  4. निर्मल भारत अभियान बनाम SBM

मेंस लिंक:

‘स्वच्छ भारत मिशन अभियान, भागीदारी और परिवर्तनकारी विकास के लिए वैश्विक बेंचमार्क बन गया है।‘ प्रकाश डालिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अराणमुला नौका दौड़

(Aranmula Boat Race)

यह केरल में ओणम पर्व के दौरान आयोजित होने वाला सबसे प्राचीन नौका-दौड़ उत्सव है।

  • इस नौका दौड़ का आयोजन, पम्पा नदी के तट पर स्थित, भगवान कृष्ण और अर्जुन को समर्पित एक हिंदू मंदिर ‘अराणमुला’ के निकट होता है।
  • इस दौड़ में ‘पल्लियोडम’ (सांप के आकर की नौका) का उपयोग किया जाता है।
  • इस नौका दौड़ में केवल गांव के पुरुषों को ही भाग लेने की अनुमति होती है।

बने इंटरनेट विस्मयकारी’ कार्यक्रम

(‘Be Internet Awesome’ program)

हाल ही में, गूगल (Google) द्वारा भारत में बच्चों के लिए वैश्विक ‘बने इंटरनेट विस्मयकारी’ कार्यक्रम (‘Be Internet Awesome’ program) कार्यक्रम शुरू किया गया है।

इस कार्यक्रम के तहत, गूगल, आठ भारतीय भाषाओं में लोकप्रिय कॉमिक बुक पात्रों के माध्यम से इंटरनेट सुरक्षा सबक प्रदान करने के लिए भारतीय कॉमिक बुक प्रकाशक ‘अमर चित्र कथा’ के साथ साझेदारी कर रहा है।

 ‘टोकनाइजेशन’

‘टोकनाइजेशन’ (Tokenisation) का तात्पर्य, एक वास्तविक कार्ड के संवेदनशील विवरण को एक यूनिक कोड वाले टोकन में परिवर्तित करना है। यह एक कार्ड, टोकन अनुरोधकर्ता (अर्थात वह इकाई जो कार्ड को टोकन में परिवर्तित करने हेतु ग्राहक से अनुरोध स्वीकार करती है और इसे टोकन जारी करने के लिए संबंधित कार्ड नेटवर्क को अग्रेषित कर देती है) और डिवाइस का अनोखा संयोजन होता है।

टोकनकृत कार्ड लेनदेन को सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें लेनदेन संसाधन के दौरान वास्तविक कार्ड विवरण, व्यापारी के साथ साझा नहीं किया जाता है।

चर्चा का कारण:

रिज़र्व बैंक द्वारा ‘टोकनाइजेशन’ के लिए मूलतः मोबाइल और टैबलेट को ही अनुमति दी गयी थी, किंतु हाल ही में, इसका दायरा बढाकर लैपटॉप, डेस्कटॉप, कलाई घड़ी और बैंड जैसे पहनने योग्य उपकरणों के साथ-साथ ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ उपकरणों सहित कई उपभोक्ता उपकरणों को भी इसके दायरे में शामिल कर लिया गया है।


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