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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 August 2021

 

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. श्री नारायण गुरु

2. विभिन्न विद्रोहों में हुए शहीदों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘उभरते सितारे’ फंड

2. राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन

3. स्मॉग टॉवर क्या है?

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. पंजशीर घाटी

2. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क

3. चकमा और हाजोंग

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

 श्री नारायण गुरु


संदर्भ: श्री नारायण गुरु की 167 वीं जयंती।

इनके बारे में:

श्री नारायण गुरु, तत्कालीन समाज में प्रचलित दमनकारी जाति व्यवस्था में सुधार करने वाले एक उत्प्रेरक, प्रमुख नेतृत्वकर्ता, महान संत एवं समाजसुधारक थे।

  • इनका जन्म केरल के तिरुवनंतपुरम के निकट चेम्पाझांथी नामक गाँव में हुआ था।
  • उन्हें तत्कालीन केरल के सामाजिक ताने-बाने को बदलने तथा केरलवासियों की मान्यताओं को बदलने का श्रेय दिया जाता है।
  • उनका जन्म एक एझावा परिवार हुआ था, उस समय इस समुदाय के लोगों को अवर्ण माना जाता था तथा जातिवाद से ग्रसित केरल के समाज में इन्हें सामाजिक अन्याय का अत्याधिक सामना करना पड़ा।
  • उनके दर्शन ने हमेशा सामाजिक समानता, सभी के लिए शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान की वकालत की।

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महत्वपूर्ण सामाजिक योगदान:

  1. उन्होंने ‘एक जाति, एक धर्म, सभी के लिए एक भगवान” (ओरु जाठी, ओरु मथम, ओरु दैवम, मनुश्यानु) का प्रसिद्ध नारा दिया।
  2. वर्ष 1888 में, श्री नारायण गुरु ने केरल के अरुविप्पुरम गांव में भगवान शिव के पहले मंदिर की स्थापना की, जहां पहली बार किसी गैर-ब्राह्मण द्वारा देव-प्रतिमा स्थापित की गई।
  3. उनके इस कदम ने उच्च जाति के ब्राह्मण समुदायों के खिलाफ जाति-विरोधी क्रांति को जन्म दिया।
  4. उन्होंने एक मंदिर में कलावनकोड (Kalavancode) की प्रतिष्ठापना की, जिसमे उन्होंने मूर्तियों के स्थान पर दर्पण को रखा। इससे उन्होंने संदेश दिया कि परमात्मा प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निवास करता है।
  5. वर्ष 1903 में, उन्होंने संस्थापक और अध्यक्ष के रूप में ‘श्री नारायण धर्म परिपालन योगम’ (SNDP) की स्थापना की।
  6. उन्होंने निचली जाति के लोगों के मंदिरों में प्रवेश-निषेध के विरोध स्वरूप राज्य भर में 40 से अधिक मंदिरों की स्थापना की थी।

राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान:

  • वे सार्वभौमिक मंदिर प्रवेश और अछूतों के सामाजिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आंदोलन के अग्रणी नेता थे।
  • उन्होंने त्रावणकोर में निचली जातियों को मंदिरों में प्रवेश की अनुमति देने के लिए चलाए जा रहे वायकॉम आंदोलन को गति प्रदान की।
  • उन्होंने अपनी कविताओं में भारतीयता के सार को समाहित किया, जिसके माध्यम से विश्व की स्पष्ट विविधता में अंतर्निहित एकता पर प्रकाश डाला।

श्री नारायण गुरु का दर्शन:

  1. श्री नारायण गुरु, आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत सिद्धांत ‘अद्वैत वेदांत’ के सबसे बड़े समर्थकों और पुनर्मूल्यांकनकर्ताओं (re-evaluators) में से एक थे।
  2. वर्ष 1913 में, उन्होंने केरल के अलुवा नामक स्थान पर ‘अद्वैत आश्रम’ की स्थापना की।
  3. यह आश्रम ‘ओम सहोदर्यं सर्वत्र’ (भगवान की दृष्टि में सभी पुरुष समान हैं), के महान सिद्धांत को समर्पित था।

साहित्यिक रचनाएँ:

उन्होंने विभिन्न भाषाओं में कई पुस्तकों की रचना की। उनमें से कुछ रचनाएं, अद्वैत दीपिका, आश्रम, थेवरप्पाथिंकंगल, ब्रह्मविद्या पंचकम आदि हैं।

उनके दर्शन की प्रासंगिकता:

जहां कई देशों और समुदायों के सामाजिक ताने-बाने में घृणा, हिंसा, कट्टरता, संप्रदायवाद और अन्य विभाजनकारी प्रवृत्तियों का क्षरण हो रहा है, ऐसे में श्री नारायण गुरु के ‘सार्वभौमिक एकता’ दर्शन की समकालीन वैश्विक संदर्भ में विशेष प्रासंगिकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्री नारायण गुरु किस राज्य के थे?
  2. अरविप्पुरम आंदोलन किससे संबंधित है?
  3. कलादी में अद्वैत आश्रम की स्थापना किसने की?
  4. वायकोम सत्याग्रह किसने शुरू किया था? उद्देश्य क्या थे?
  5. श्री नारायण गुरु से मिलने वाले महत्वपूर्ण नेता।
  6. आत्मोपदेश सतकाम की रचना किसने की?

 

मेंस लिंक:

भारत में हुए सामाजिक सुधारों में श्री नारायण गुरु की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

 विभिन्न विद्रोहों में हुए शहीदों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा


संदर्भ:

भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (the Indian Council of Historic Research – ICHR)) द्वारा ‘शहीदों के नामों का कोश: भारत का स्वतंत्रता संग्राम (1857-1947)’  (Dictionary of Martyrs: India’s Freedom Struggle 1857-1947)’ के पांचवें खंड में प्रविष्टियों की समीक्षा हेतु एक तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की गई थी।

इस समिति द्वारा की गई अनुशंसाओं के अनुसार, केरल के कम्युनिस्ट आंदोलन में हुए शहीदों सहित ‘पुन्नपरा वायलार विद्रोह’ (Punnapara-Vayalar revolt), कय्यूर विद्रोह, कारिवेलूर और कावुम्बई विद्रोह में जान गंवाने वाले शहीद, भारत के स्वतंत्रता संग्राम इतिहास में स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में शामिल रहेंगे।

पृष्ठभूमि:

इससे पहले, इस समिति द्वारा मालाबार के विद्रोही नेताओं वरियामकुनाथ कुन्हमेद हाजी, अली मुसलियार और 387 अन्य ‘मोपला शहीदों’ को स्वतंत्रता सेनानियों की सूची से हटाने की सिफारिश की गयी थी।

‘पुन्नपारा-वायलार’ विद्रोह के बारे में:

यह, ब्रिटिश भारत में, त्रावणकोर रियासत के प्रधानमंत्री  सी. पी. रामास्वामी अय्यर तथा रियासत के खिलाफ एक संगठित श्रमिक वर्ग का विद्रोह था।

विद्रोह के उद्देश्य, त्रावणकोर के शोषक दीवान को पद से हटाना और श्रमिक वर्ग को अन्यायपूर्ण कराधान और शासन के शोषण से मुक्त करना था।

इस विद्रोह का महत्व:

  • यह अपनी तरह का एक अनोखा आंदोलन था, जिसमे मजदूर वर्ग सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया।
  • इस आंदोलन में सभी वर्गों के लोगों ने एक अत्याचारी के खिलाफ विद्रोह में भाग लिया, और वर्ग और धर्म के भेद को मिटाते हुए लोगों को एक होने के लिए प्रेरित किया।
  • इस विद्रोह के फलस्वरूप, क्षेत्र में लोकतंत्र की स्थापना हुई और राज्य की राजनीति को एक निर्णायक मोड़ दिया गया।

विद्रोह के निहितार्थ:

  • इतिहासकारों का मानना हैं कि, यह तत्कालीन त्रावणकोर से स्वतंत्र त्रावणकोरकी स्थापना हेतु एक विशिष्ट संघर्ष था।
  • इस आंदोलन के एक नेता टी के वर्गीज वैद्यन ने अधिकारिक रूप से कहा था, कि यह आंदोलन ‘कम्युनिस्ट इंडिया’ की स्थापना के उद्देश्य हेतु एक बड़ी क्रांति के लिए पूर्वाभ्यास था।

 

कय्यूर विद्रोह:

  • वर्ष 1940 में, कम्युनिस्टों के नेतृत्व में वहां के किसान, ‘कल्लियाट के नांबियार’ और ‘करक्कट एडम के नयनार’ नामक दो स्थानीय सामंतवाद एवं उपनिवेशवाद समर्थक जमींदारों के खिलाफ उठ खड़े हुए।
  • कय्यूर को केरल में कृषि क्रांति का उद्गम स्थल माना जाता है।

करीवेलूर विद्रोह:

यह विद्रोह 20 दिसंबर 1946 को हुआ था। यह भयानक भुखमरी के समय गाँव से धान की जबरदस्ती उगाही कराने वाले जमींदारों के खिलाफ किसानों का विद्रोह था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप पथरूघाट: 1894 का विस्मृत किसान विद्रोह के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपर्युक्त विद्रोह किससे संबंधित है?
  2. इसमें किन लोगों ने भाग लिया?
  3. विद्रोह की मुख्य मांग क्या थी?
  4. ICHR के बारे में।

मेंस लिंक:

पुन्नपारा-वायलार विद्रोह के महत्व और संबधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 ‘उभरते सितारे’ फंड


(Ubharte Sitaare Fund)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा निर्यात-उन्मुख ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम’ (MSMEs) के लिए 250 करोड़ रुपये का वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund – AIF) लॉन्च किया है।

फंड का उद्देश्य:

ऐसे भारतीय उद्यमों को चिह्नित करना, जो अपनी प्रौद्योगिकी, उत्पादों या कार्यविधियों और निर्यात क्षमता के स्तर पर संभावित रूप से लाभ प्रदान करने में सक्षम हैं किंतु वर्तमान में अपनी क्षमताओं से कम प्रदर्शन कर पा रहे हैं या पूरी तरह से कार्य करने के लिए अपनी अंतर्निहित क्षमताओं का दोहन करने में असमर्थ हैं।

इस कोष का मुख्य उद्देश्य ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम’ को प्रोत्साहित करना है, क्योंकि यह रोजगार-सृजन, नवाचारों को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के संदर्भ में अर्थव्यवस्था के लिए अति महत्वपूर्ण हैं।

यह किस प्रकार का कोष है:

‘उभरते सितारे’ फंड एक प्रकार का ‘वैकल्पिक निवेश कोष’ (Alternative Investment Fund – AIF) है।

इस योजना के प्रमुख बिंदु:

  • इन कोष को ‘एक्जिम बैंक’ और सिडबी (लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया) द्वारा स्थापित किया गया है।
  • यह फंड, वित्तीय और सलाहकार सेवाओं दोनों के लिए ‘संरचित सहयोग’ (Structured Support) का मिश्रण है।
  • इसमें 250 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन (Greenshoe Option) भी होगा।
  • इस फंड में, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस, कृषि और सॉफ्टवेयर आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों की संभावित कंपनियों को शामिल किया गया है।

इस कार्यक्रम का महत्व:

  1. इस कार्यक्रम के तहत, उन भारतीय कंपनियों की पहचान की जाएगी, जो वैश्विक मांगों को पूरा करते हुए घरेलू क्षेत्र में भविष्य की चैंपियन बनने की क्षमता रखती है।
  2. चूंकि, ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम’ (MSMEs), देश के कुल विनिर्माण उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत, निर्यात का 40 प्रतिशत और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं, अतः MSME को अपने उद्यमों का विस्तार करने में सक्षम बनाने से समग्र अर्थव्यवस्था की गति तीव्र होगी।
  3. इससे उत्तर प्रदेश में एक जिला एक उत्पाद’ जैसे क्षेत्र विशेष के विकास कार्यक्रमों को भी बढ़ावा मिलेगा।

‘वैकल्पिक निवेश कोष’ क्या होता है?

‘वैकल्पिक निवेश कोष’ (Alternative Investment Fund – AIF) में उन ‘संयोजित निवेश कोषों’ को शामिल किया जाता है, जिनका उपयोग उद्यम पूंजी, निजी इक्विटी, हेज फंड, प्रबंधित वायदा कारोबार आदि में निवेश करने के लिए किया जाता है।

  • सरल शब्दों में, ‘वैकल्पिक निवेश कोष’ (AIF), निवेश के पारंपरिक तरीकों जैसे स्टॉक, ऋण प्रतिभूतियों आदि से भिन्न प्रकार का निवेश होता है।
  • ‘वैकल्पिक निवेश कोष’ में फंड प्रबंधन गतिविधियों को विनियमित करने के लिए ‘सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियम, 1996, (SEBI (Mutual Funds) Regulations, 1996) सेबी (सामूहिक निवेश योजना) विनियम, 1999 (SEBI (Collective Investment Schemes) Regulations, 1999) या बोर्ड के किसी अन्य विनियम के तहत शामिल धन को शामिल नहीं किया जाता है।
  • बहरहाल, ‘वैकल्पिक निवेश कोषों’ के लिए ‘SEBI’ में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।

‘ग्रीनशू विकल्प’ क्या होता है?

‘ग्रीन-शू ऑप्शन’ (Greenshoe Option) एक अति-आवंटन विकल्प होता है। ‘शुरुआती सार्वजनिक प्रस्ताव / पेशकश’ (Initial Public Offering) या ‘आईपीओ’ के संदर्भ में, यह एक लिखित समझौते में शामिल एक प्रावधान होता है, जिसके तहत, प्रतिभूति की मांग अपेक्षा से अधिक होने की स्थिति में समझौते में निर्धारित व्यक्ति को, निवेशकों के लिए, जारीकर्ता द्वारा शुरू में तय की गयी योजना से अधिक शेयर बेचने का अधिकार देता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

‘रिवर्स ग्रीनशू विकल्प’ क्या होता है? यह ‘ग्रीनशू विकल्प’ से किस प्रकार भिन्न है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘उभरते सितारे’ फंड के बारे में।
  2. इसके उद्देश्य।
  3. प्रबंधन।
  4. लाभ।
  5. ‘ग्रीनशू विकल्प’ क्या है?

मेंस लिंक:

‘उभरते सितारे’ फंड की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP)


(National Monetisation pipeline)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा आगामी चार साल की अवधि में बेची जाने वाली सरकार की अवसंरचना परिसंपत्तियों को सूचीबद्ध करने के प्रयास में ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ (National Monetisation pipeline – NMP) का आरंभ किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

चार-वर्षीय ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ (NMP) के अंतर्गत निजी क्षेत्र को शामिल करके ‘सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदा (ब्राउनफील्ड) परिसंपत्तियों’ में निहित निवेश के मूल्य को हासिल किया जाएगा, इसके लिए ‘निजी क्षेत्र’ को परियोजनाओं में केवल अधिकारों का अंतरण किया जाएगा, और उनके लिए ‘स्वामित्व’ नहीं दिया जाएगा।

कार्यक्रम के घटक: सड़क, रेलवे और बिजली क्षेत्र की परिसंपत्तियों में ‘कुल अनुमानित मूल्य’ की 66 प्रतिशत से अधिक परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण किया जाएगा। इन क्षेत्रों में सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, रेलवे, वेयरहाउसिंग, गैस और उत्पाद पाइपलाइन, बिजली उत्पादन, खनन, दूरसंचार, स्टेडियम, हॉस्पिटैलिटी और आवास शामिल हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य:

  1. इस कार्यक्रम का रणनीतिक उद्देश्य संस्थागत और दीर्घकालिक पूंजी का उपयोग करके सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदा (ब्राउनफील्ड) परिसंपत्तियों में निहित निवेश के मूल्य को हासिल करना है, जिसे आगे सार्वजनिक निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  2. इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘मुद्रीकरण के माध्यम से अवसंरचना निर्माण’ को संभव बनाना है, जिसमें क्षमता के लिहाज से अपने-अपने क्षेत्रों के उत्कृष्ट सार्वजनिक और निजी क्षेत्र सहयोग करें, जिससे सामाजिक आर्थिक विकास को संभव बनाया जा सके और देश के नागरिकों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

कार्यक्रम ढांचा:

  • वर्तमान में, केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों और अवसंरचना से जुड़े केन्द्रीय उपक्रमों (central public sector enterprises – CPSE) की परिसंपत्तियों को शामिल किया गया है।
  • विनिवेश के माध्यम से मुद्रीकरण और गैर-प्रमुख संपत्तियों के मुद्रीकरण को एनएमपी में शामिल नहीं किया गया है।

प्रमुख परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए तीन मुख्य शर्तें हैं।

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अनुमानित क्षमता:

अवसंरचना का निर्माण मुद्रीकरण से अनिवार्य रूप से जुड़ा हुआ है, इसे ध्यान में रखते हुए ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ (NMP) के लिए समय तय किया गया है जिससे ‘राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन’ (NIP) के अंतर्गत शेष अवधि साथ-साथ समाप्त हो जाए।

चार साल की अवधि यानी वित्त वर्ष 2022-25 के दौरान ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ के अंतर्गत कुल संपत्ति का अनुमानित मूल्य 6.0 लाख करोड़ रुपये है।

वित्त वर्ष 2022-25 के लिए क्षेत्र-वार मुद्रीकरण पाइपलाइन (करोड़ रुपये में):

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योजना का महत्व:

परिसंपत्ति मुद्रीकरण को सिर्फ एक वित्तपोषण से जुड़ी प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे निजी क्षेत्र की संसाधन क्षमता और उभरती वैश्विक एवं आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप खुद को गतिशील रूप से अनुकूलित करने की उनकी क्षमता को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे के संचालन, उन्नयन और रख-रखाव में समग्र बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • इस तरह के नए मॉडल न केवल वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों को बल्कि आम लोगों को भी इस परिसंपत्ति वर्ग में भाग लेने में सक्षम बनाएंगे जिससे निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
  • इसलिए, ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ दस्तावेज भारत के बुनियादी ढांचे को वास्तव में विश्व स्तरीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ के समक्ष चुनौतियां:

  1. विभिन्न परिसंपत्तियों में पहचान योग्य राजस्व स्रोतों का अभाव
  2. गैस और पेट्रोलियम पाइपलाइन नेटवर्क में क्षमता उपयोग का स्तर
  3. विवाद समाधान तंत्र
  4. विद्युत क्षेत्र की आस्तियों में विनियमित प्रशुल्क
  5. ‘फोर लेन’ से कम वाले राष्ट्रीय राजमार्गों में निवेशकों की कम दिलचस्पी
  6. स्वतंत्र क्षेत्रीय नियामकों का अभाव

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘प्रतिपूरक वित्त पोषण सुविधा’ (Compensatory Financing Facility – CFF) के बारे में सुना है? इसके उद्देश्य क्या हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ (NMP)के बारे में
  2. मुख्य विशेषताएं
  3. प्रयोज्यता
  4. लाभ

मेंस लिंक:

‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

स्मॉग टॉवर क्या हैं?


संदर्भ:

दिल्ली में चीन की तर्ज पर स्मॉग टावर (Smog towers) लगाए जा रहे हैं। चीन द्वारा अपनी राजधानी बीजिंग और अन्य शहरों में इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार प्रदूषण पर स्मॉग टावरों के प्रभाव का अध्ययन करेगी और राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह की और संरचनाओं को स्थापित कर सकती है।

‘स्मॉग टॉवर’ क्या होते है?

‘स्मॉग टावर’, बड़े पैमाने पर वायु-शोधक’ / एयर प्यूरीफायर (Air Purifiers) के रूप में कार्य करने हेतु डिज़ाइन की गई संरचनाएं हैं।

  • इनके निचले हिस्से में ‘हवा को खीचने’ के लिए ‘एयर फिल्टर’ और ‘पंखो’ की कई परते लगायी गयी हैं।
  • प्रदूषित हवा के स्मॉग टॉवर में प्रवेश करने के बाद, वातावरण में पुन: छोड़ने से पहले वायु को कई परतों से गुजार कर शुद्ध किया जाता है।

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आवश्यकता:

एक स्विस समूह द्वारा मार्च में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली लगातार तीसरे बार, वर्ष 2020 में दुनिया का सबसे प्रदूषित राजधानी शहर था। रिपोर्ट में अतिसूक्ष्म पार्टिकुलेट के स्तर के संदर्भ में मापी गई वायु गुणवत्ता के आधार पर शहरों की रैंकिंग की गयी थी। पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) मानव अंगों में प्रवेश करने और स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाने में सक्षम होते है।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के उच्च स्तर होने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में केंद्र और दिल्ली सरकार से वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्मॉग टावर लगाने के लिए एक रोड मैप तैयार करने को कहा था।

उच्च प्रदूषण स्तर का कारण?

  • शहर के अंदर तथा इसके आस-पास होने वाला निर्माण कार्य, औद्योगिक तथा वाहन प्रदूषण।
  • सर्दियों की शरुआत में, दिल्ली के उत्तरी-पश्चिमी राज्यों में कृषि-अपशिष्टों को जलाये जाने से धुएं से प्रदूषण की मात्रा में काफी वृद्धि हो जाती है
  • इसके अतिरिक्त, प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों, जैसे शांत हवाओं, कम तापमान और कम धूप वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती है।

 

प्रदूषण नियंत्रण हेतु किए जाने वाले उपाय:

  • पंजाब और हरियाणा में किसानों को कृषि-अपशिष्टों को जलाने के स्थान पर यांत्रिक विकल्पों का उपयोग करने के लिए तैयार किया गया है।
  • दिल्ली में थर्मल पावर स्टेशनों को बंद किया गया है।
  • उद्योगों के लिए पाइप द्वारा प्राकृतिक गैस के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।
  • प्रदूषण स्तर के बढ़ने पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan- GRAP) के तहत नियंत्रण के उपाय किये जाते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर स्थापित ‘एंटी स्मॉग गन’ के बारे में जानते हैं? ये किस प्रकार कार्य करती हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के बारे में
  2. राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक कौन जारी करता है?
  3. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की संरचना और कार्य
  4. प्राकृतिक गैस क्या है?
  5. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का अवलोकन

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


पंजशीर घाटी

  • ‘पंजशीर घाटी’ (Panjshir Valley) उत्तर-मध्य अफगानिस्तान में हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला के निकट अवस्थित एक घाटी है।
  • पंजशीर नदी इस घाटी से होकर बहती है।
  • इस घाटी में, अफ़ग़ानिस्तान में ‘ताजिक समुदाय’ की सर्वाधिक आबादी निवास करती है।
  • पंजशीर घाटी अपने ‘पन्ना’ (Emeralds) रत्न के लिए भी विख्यात है। इस रत्न का उपयोग अतीत में सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ ‘प्रतिरोध आंदोलनों’ को वित्तपोषित करने के लिए किया जाता था।
  • पंजशीर का शाब्दिक अर्थ “पांच शेर” है।

इस घाटी का नाम एक किंवदंती से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि 10वीं शताब्दी में, पांच भाईयों ने, बाढ़ के पानी को लोगों के घरों को नुकसान पहुंचने से रोकने के लिए, गजनी के सुल्तान महमूद के लिए एक बांध बनाया था। इसी के बाद, उन 5 भाइयों के नाम पर इस घाटी को ‘पंजशीर घाटी’ (5 सिंहों की घाटी) कहा जाता है।

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जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क

  • जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (Jim Corbett National Park) उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान में रामगंगा नदी द्वारा निर्मित ‘पतली दून’ घाटी (Patli Dun valley) शामिल है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना, लुप्तप्राय बंगाल टाइगर को संरक्षित करने के लिए, वर्ष 1936 में ‘हैली नेशनल पार्क’ के रूप में की गई थी।
  • इसका नाम ‘जिम कॉर्बेट’ के नाम पर रखा गया है जिन्होंने इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • यह भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है। यह 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर पहल के तहत आने वाला पहला क्षेत्र था।

चकमा और हाजोंग

  • चकमा और हाजोंग (Chakmas and Hajongs) मूल रूप से तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में चटगांव पहाडी क्षेत्र के निवासी थे। 1960 के दशक में कैपटाई बांध (Kaptai dam) परियोजना के कारण इनकी बस्तियां जलमग्न हो गयीं थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी मातृभूमि छोड़ दी।
  • ‘चकमा’ (Chakmas) बौद्ध धर्म को मानते हैं, और ‘हाजोंग’ (Hajongs) मूलतः हिंदू हैं, और इन्होने कथित तौर पर धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होने के बाद असम के तत्कालीन लुशाई हिल्स जिले (अब मिजोरम) के रास्ते से भारत में प्रवेश किया था। केंद्र सरकार द्वारा इनमें से अधिकांश प्रवासियों को ‘नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी’ (NEFA), जो अब अरुणाचल प्रदेश है, में बसा दिया था।
  • इनकी आबादी वर्ष 1964-69 में लगभग 5,000 थी जो अब बढ़कर एक लाख हो गई है। वर्तमान में, इनके पास नागरिकता और भूमि अधिकार नहीं हैं, लेकिन उन्हें राज्य सरकार द्वारा बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

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