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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 August 2021

 

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. मोपला शहीद एवं मोपला विद्रोह

2. अरुणाचल प्रदेश ‘उत्तराधिकार विधेयक ‘मसौदा

 

सामान्य अध्ययन-II

1. जन शिक्षण संस्थान

2. पहला ओस्लो समझौता और इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष

 

सामान्य अध्ययन-III

1. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. शैवाल की एक ‘जलपरी’ प्रजाति की खोज

2. मदुर चटाईयां

3. एनटीपीसी द्वारा देश की सबसे बड़ी तैरती हुई सौर परियोजना का आरंभ

4. गिरफ्तार करना हमेशा आवश्यक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

5. “आरक्षण का दो राज्यों में एक साथ लाभ नहीं उठाया जा सकता है”: सुप्रीम कोर्ट

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: अठारहवीं शताब्दी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

 मोपला शहीद एवं मोपला विद्रोह


संदर्भ:

हाल ही में, एक तीन सदस्यीय समिति द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार, वर्ष 1921 में हुए मालाबार विद्रोह के नेताओं ‘वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी’, अली मुसलियार और 387 अन्य ‘मोपला शहीदों’ को ‘भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के शब्दकोश’ से हटा दिया जाएगा।

संबंधित प्रकरण:

भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Historical Research- ICHR) के सहयोग से ‘केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय’ द्वारा ‘वर्ष 2019 में प्रकाशित ‘शहीदों की डिक्शनरी’ (Dictionary of Martyrs) प्रकाशित की गयी थी, जिसमे ‘मोपला नरसंहार’ के मुख्य वास्तुकार वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी और अली मुसलियार को शहीद का दर्जा दिया गया था।

हालांकि, ICHR द्वारा गठित एक समिति की रिपोर्ट में 387 मोपला विद्रोहियों (नेता अली मुसलियार और वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी सहित) के नाम शहीदों की सूची में से हटाने की मांग की गयी है।

current affairs

कारण:

समिति की रिपोर्ट में वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी को ‘कुख्यात मोपला दंगाई नेता’ तथा ‘कट्टर अपराधी’ बताया गया है।

  • रिपोर्ट के अनुसार- कुंजामहम्मद हाजी ने वर्ष 1921 में हुए मोपला विद्रोह के दौरान असंख्य निर्दोष हिंदू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या की और उनके शवों को एक कुएं में फेंक दिया, जिसे स्थानीय रूप से थोवूर किनार (Thoovoor Kinar) के नाम से जाना जाता है ।
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, लगभग सभी मोपला आन्दोलन सांप्रदायिक थे तथा वे हिन्दू समाज के विरुद्ध नफरत और असहिष्णुतापूर्ण थे।
  • अतः इनके नाम शहीदों की सूची से हटाए जाने चाहिए।

वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी कौन थे?

  • 1870 के दशक में जन्मे, वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी एक बहादुर स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 20 वीं शताब्दी के आरम्भ में केरल के मालाबार क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था तथा कुछ समय के लिए अपने स्वतंत्र शासन की स्थापना की थी।
  • उन्होंने स्थानीय जनता को अंग्रेजों के विरूद्ध एकत्र करने के लिए कला को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
  • उन्होंने अंग्रेजों तथा जमींदारों के अत्याचारों के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और खिलाफत आंदोलन का समर्थन करने का वादा किया।
  • लगभग छह महीने तक, हाजी ने एक समानांतर खिलाफत शासन चलाया। इस स्वतंत्र राज्य का मुख्यालय नीलाम्बुर (Nilambur) में था, तथा इसकी पृथक मुद्रा, पासपोर्ट तथा कराधान व्यवस्था

current affairs 

 

 

हाजी के शासन का अंत:

हाजी का शासन लंबे समय तक नहीं चला। जनवरी 1922 में, अंग्रेजो ने हाजी के विश्वासपात्र मित्र उन्नायन मुसालियार (Unyan Musaliyar) के माध्यम से संधि करने के बहाने से गिरफ्तार कर लिया तथा एक ब्रिटिश न्यायाधीश के समक्ष पेश किया। ब्रिटिश न्यायाधीश ने हाजी को उसके साथियों सहित मृत्युदंड की सजा सुनाई।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप अल्लूरी सीतारामाराजू के बारे में जानते हैं, जिन्होंने 1922-24 के दौरान ‘विशाखापट्टणम एजेंसी क्षेत्र’ में अंग्रेजों के खिलाफ रंपा विद्रोह का नेतृत्व किया था?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी कौन थे?
  2. 1921 का मालाबार विद्रोह क्या था?
  3. विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
  4. हाजी ने किस प्रकार स्वतंत्र राज्य स्थापित किया?
  5. खिलाफत आंदोलन क्या है?
  6. खिलाफत आंदोलन के परिणाम
  7. असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन के बीच संबंध।

मेंस लिंक:

वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी कौन थे? वर्ष 1921 में उन्होंने मालाबार क्षेत्र में किस प्रकार अंग्रेजों का सामना किया? यह विद्रोह विवादास्पद क्यों है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

अरुणाचल प्रदेश उत्तराधिकार विधेयक मसौदा


(Arunachal Pradesh Draft Inheritance Bill)

संदर्भ:

हाल ही में, विशेषज्ञों द्वारा अरुणाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग (APSCW) से जनता की भावनाओं और राज्य के हित को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित ‘अरुणाचल प्रदेश विवाह एवं उत्तराधिकार विधेयक’ (Arunachal Pradesh marriage and inheritance bill) से कुछ प्रावधानों को हटाने के लिए गया है।

विधेयक के मसौदे का संक्षिप्त विवरण:

  1. विवाह हेतु आवश्यक शर्तें एवं विवाह का पंजीकरण: प्रस्तावित विधेयक, अरुणाचल प्रदेश की किसी भी स्थानिक अनुसूचित जनजाति से संबंधित सभी व्यक्तियों पर लागू होगा। इसके प्रावधानों के अनुसार, दो पक्षों के मध्य ‘विवाह’ स्थानीय प्रथागत संस्कारों और दोनों में से किसी एक पक्ष के रीति-रिवाजों के अनुसार किया जा सकता है।
  2. दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन, अमान्य एवं शून्यकरणीय विवाह (Restitution of conjugal rights, void and voidable marriage): विधेयक में दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन का भी प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार- यदि दोनों दोनों पक्षों में से कोई भी, बिना किसी उचित कारण के, दूसरे पक्ष के समाज से अलग कर दिया जाता है, तो पीड़ित पक्ष अपने दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन हेतु जिला न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।
  3. विवाह-विच्छेद के आधार (तलाक): अधिनियम लागू होने के बाद , किए जाने वाले विवाह को विभिन्न आधारों पर भंग किया जा सकता है।
  4. स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण: पत्नी, जो खुद का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, वह अपने भरण-पोषण के लिए अदालत में याचिका दायर कर सकती है, और अदालत द्वारा उसके पति को अपनी पत्नी के लिए एक मुश्त स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी किया जाएगा।
  5. बहुविवाह पर विधेयक की स्थिति: प्रत्येक व्यक्ति, जो विवाहित होते हुए भी इस अधिनियम के तहत अपना विवाह करवाता है, को भारतीय दंड संहिता की धारा 494 या धारा 495 के तहत, जैसा भी मामला हो, अपराध माना जाएगा, और इस प्रकार किया गया विवाह अमान्य होगा।

विधेयक का महत्व:

  • विधेयक का मुख्य जोर, विवाह की कानूनी स्थिति, विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया, पत्नी के लिए संपत्ति में अधिकार, विधवा के अधिकार और ‘बहुविवाह को अपराध मानने’ पर है।
  • यह विधेयक ‘बहुविवाह के अपराधीकरण’ और ‘कानूनी रूप से विवाहित पत्नी और विधवा के संपत्ति के अधिकार’ के संबंध में महत्वपूर्ण प्रावधान करता है।

विवादास्पद प्रावधान:

  • ‘अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजाति’ के बाहर के किसी पुरुष से शादी करने वाली ‘अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजाति’ (APST) की महिला को, परिवार के मुखिया से विरासत में मिली किसी भी अचल संपत्ति का जीवनपर्यन्त लाभ प्राप्त होगा।
  • APST महिला की मृत्यु हो जाने की स्थिति में, उसके पति और उसके उत्तराधिकारियों को उस अचल संपत्ति का अपनी इच्छानुसार उपयोग करने या ‘अरुणाचल प्रदेश की किसी भी स्थानिक जनजाति के सदस्यों’ को उस संपत्ति से बेदखल करने का पूरा अधिकार होगा।

इन प्रावधानों के कारण, मसौदा विधेयक को “आदिवासी विरोधी”, “अरुणाचल विरोधी”, प्रथागत कानूनों का उल्लंघन करने वाला और बाहरी लोगों को विवाह के माध्यम से आदिवासी भूमि पर कब्जा करने के लिए निमंत्रण देने वाला बताया जा रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 ‘दांपत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन’ से संबंधित है। इन अधिकारों के बारे में चर्चा कीजिए।

 

प्रस्तावित लिंक:

  1. विधेयक के बारे में
  2. विधेयक के प्रमुख प्रावधान

मेंस लिंक:

विधेयक से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

जन शिक्षण संस्थान


संदर्भ:

जन शिक्षण संस्थान (Jan Shikshan Sansthan – JSS) द्वारा केरल के नीलांबुर जंगल के भीतर कुछ दूर-दराज की आदिवासी बस्तियों में हाई-स्पीड इंटरनेट की शुरुआत की गयी है।

‘लंबी दूरी की वाई-फाई तकनीक’ (long-distance Wi-Fi) की बदौलत कुछ आदिवासी बस्तियों को हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हुई है।

जन शिक्षण संस्थान (JSS) के बारे में:

  • यह ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास हेतु की गयी एक पहल है।
  • ‘जन शिक्षण संस्थान’ योजना को पहले ‘श्रमिक विद्यापीठ’ के नाम से जाना जाता था।
  • इस योजना को, मार्च 1967 से, देश भर में गैर सरकारी संगठनों के नेटवर्क के माध्यम से लागू किया जा रहा है।

उद्देश्य:

  • निरक्षर /नव साक्षर और आठवीं कक्षा तक प्राथमिक स्तर की शिक्षा पाने वाले और आठवीं कक्षा से आगे पढाई छोड़ देने वाले व्यक्तियों के व्यावसायिक कौशल और तकनीकी ज्ञान में सुधार करना।
  • प्रशिक्षण/अभिविन्यास कार्यक्रमों के माध्यम से कौशल विकास के विभाग/एजेंसियों में कार्यरत मास्टर प्रशिक्षकों का एक समूह तैयार करना।
  • सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रणालियों के ज्ञान और समझ के दायरे का विस्तार करना और पर्यावरण के बारे में जागरूकता पैदा करना।
  • राष्ट्रीय मूल्यों को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ तालमेल बिठाना।
  • ऋण और सहायता संघो की सदस्यता के माध्यम से लक्षित समूहों के लिए ऋण सहित स्वरोजगार को बढ़ावा देना और वित्तीय सहायता की सुविधा प्रदान करना।

‘लंबी दूरी की वाई-फाई’ क्या है? यह किस प्रकार कार्य करती है?

  • यह 5GHz फ़्रीक्वेंसी पर कार्य करती है।
  • पांच टावरों की मदद से 100 mbps की गति से इंटरनेट उपलब्ध कराया जाता है।
  • इसके लिए, सर्वर इस तरह से स्थापित किए जाते हैं कि कम से कम 250 उपयोगकर्ता एक साथ इंटरनेट का उपयोग कर सकें।
  • लंबी दूरी की वाई-फाई तकनीक के माध्यम से, संचरण में बगैर किसी बाधा के 100 किमी तक भी हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान किया जा सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

पहला श्रमिक विद्यापीठ मुंबई में स्थापित किया गया था। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लंबी दूरी की वाईफाई के बारे में
  2. LiFi क्या है?
  3. वाईफाई कैसे काम करता है?
  4. जन शिक्षण संस्थान (JSS) के बारे में।

मेंस लिंक:

जन शिक्षण संस्थान (JSS) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

पहला ओस्लो समझौता और इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष


(Oslo I Accord and Israel- Palestine Conflict)

संदर्भ:

20 अगस्त, 2021 को पहले ओस्लो समझौते (Oslo I Accord) लागू होने के 28 वर्ष पूरे हो गए हैं। इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष को समाप्त करने हेतु एक स्थायी शांति प्रक्रिया शुरू करने के लिए, कई दौर की गहन गुप्त वार्ताओं के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया था और इस पर हस्ताक्षर किए गए थे।

‘पहला ओस्लो समझौता’ क्या था?

ओस्लो समझौते (Oslo Accords),  1990 के दशक में इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच हुए समझौतों की एक श्रृंखला है।

  1. 1993 में हुए पहले ओस्लो समझौते (Oslo I Accord) को औपचारिक रूप से ‘सिद्धांतों की घोषणा’ (Declaration of Principles – DOP) के रूप में जाना जाता है।
  2. यह समझौता तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के सौजन्य से कराई जाने वाली कई गुप्त वार्ताओं का परिणाम था, और इसके बाद में, वर्ष 1995 में ‘दूसरे ओस्लो समझौते’ (Oslo II Accord) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  3. कई लोगों द्वारा ‘ओस्लो समझौतों’ को ‘इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष’ को वास्तव में हल करने का सबसे गंभीर प्रयास बताया जाता है।
  4. हालांकि, वास्तव में इन समझौतों ने इजरायल और ‘फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन’ (Palestine Liberation Organization – PLO) के मध्य एक अंतरिम समझौते के रूप में काम किया था, जिसके तहत, फिलिस्तीनी राज्य के स्थान पर, दोनों पक्षों को वेस्ट बैंक और गाजा में एक साथ कार्य करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान की गयी थी।
  5. इन समझौतों के बाद, ‘पीएलओ’ का फिलीस्तीनी प्राधिकरण में परिवर्तन हो गया, जिसे अब फिलीस्तीनियों के वैध शासी निकाय के रूप में देखा जाता है।
  6. पहले ओस्लो समझौते के प्रावधानों के अनुसार, इज़राइल द्वारा ‘फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन’ (PLO) की फिलिस्तीनी लोगों के प्रतिनिधि के रूप में नई भूमिका को मान्यता दी जाएगी, साथ ही साथ इसमें फिलिस्तीन द्वारा ‘इजरायल के अस्तित्व के अधिकार’ को मान्यता देना अनिवार्य किया गया था।
  7. 1967 में हुए छह दिवसीय युद्ध के दौरान इज़राइल द्वारा इस क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करने के बाद से, पहले ओस्लो समझौते की वजह से वेस्ट बैंक और गाजा में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए है।

 

‘दूसरे ओस्लो समझौते’ के बारे में:

  • दूसरा ओस्लो समझौता’ (Oslo II), पहले ओस्लो समझौते का विस्तार था, और इसे आधिकारिक तौर पर वेस्ट बैंक और गाजा पर ‘इजरायल-फिलिस्तीनी अंतरिम समझौता’ कहा जाता है। इस समझौते में, वेस्ट बैंक के छह शहरों और लगभग 450 अन्य शहरों से इजरायली सैनिकों की पूर्ण वापसी का प्रावधान किया गया था। इसके अतिरिक्त, दूसरे ओस्लो समझौते में ‘फिलिस्तीनी विधान परिषद’ के चुनावों के लिए एक समय सारिणी भी निर्धारित की गयी थी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

1967 में हुए छह-दिवसीय युद्ध में, इज़राइल ने मिस्र से सिनाई प्रायद्वीप और गाजा पट्टी, जॉर्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम और सीरिया से गोलान हाइट्स पर कब्जा कर लिया था। मानचित्र पर इन स्थानों का पता लगाएँ और युद्ध के बारे में और जानें।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यरूशलेम के बारे में
  2. छह दिन का युद्ध
  3. इजरायल फिलिस्तीन संघर्ष
  4. गाजा पट्टी
  5. अल-अक्सा मस्जिद कहाँ है?
  6. ओस्लो समझौते के बारे में

मेंस लिंक:

इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA)


(Unlawful Activities Prevention Act)

संदर्भ:

दो दशकों से अधिक समय से जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अलगाववादी समूह ‘हुर्रियत कांफ्रेंस’ के दोनों धड़ों पर कड़े ‘विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम’  (Unlawful Activities Prevention Act – UAPA) के तहत प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

केंद्र सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के अनुसार, हाल ही में यह प्रस्ताव रखा गया था।

प्रतिबंध लगाने की शक्ति:

‘हुर्रियत कांफ्रेंस’ के धड़ों को ‘विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम’ की धारा 3(1) के तहत प्रतिबंधित किया जा सकता है। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कि, “यदि केंद्र सरकार की राय में कोई भी संगठन गैरकानूनी है अथवा बन गया है, तो वह आधिकारिक राजपत्र में जारी अधिसूचना के माध्यम से उस संगठन को गैरकानूनी घोषित कर सकती है।”

विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) के बारे में:

1967 में पारित, विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (Unlawful Activities (Prevention) Act-UAPA) का उद्देश्य भारत में गैरकानूनी गतिविधि समूहों की प्रभावी रोकथाम करना है।

  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, जिसके द्वारा केंद्र सरकार किसी गतिविधि को गैरकानूनी घोषित कर सकती है।
  • इसके अंतर्गत अधिकतम दंड के रूप में मृत्युदंड तथा आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है।

अधिनियम के अंतर्गत प्रमुख बिंदु:

UAPA के तहत, भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों को आरोपित किया जा सकता है।

  • यह अधिनियम भारतीय और विदेशी अपराधियों पर समान रूप से लागू होता है, भले ही अपराध भारत के बाहर विदेशी भूमि पर किया गया हो।
  • UAPA के तहत, जांच एजेंसी के लिए, गिरफ्तारी के बाद चार्जशीट दाखिल करने के लिए अधिकतम 180 दिनों का समय दिया जाता है, हालांकि, अदालत को सूचित करने के बाद इस अवधि को और आगे बढ़ाया जा सकता है।

वर्ष 2019 में किए गए संशोधनों के अनुसार:

  • यह अधिनियम राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक को, एजेंसी द्वारा मामले की जांच के दौरान, आतंकवाद से होने वाली आय से निर्मित संपत्ति पाए जाने पर उसे ज़ब्त करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • यह अधिनियम राज्य में डीएसपी अथवा एसीपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के अतिरिक्त, आतंकवाद संबंधी मामलों की जांच करने हेतु ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी’ के इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार प्रदान करता है।
  • अधिनियम में किसी व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में अभिहित करने का प्रावधान भी शामिल है।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा परिभाषित UAPA की रूपरेखा:

जून 2021 में, विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act- UAPA), 1967 की एक अन्य रूप से “अस्पष्ट” धारा 15 की रूपरेखा को परिभाषित करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा, अधिनियम की धारा 18, 15, 17 को लागू करने पर कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत निर्धारित किए गए थे।

UAPA की धारा 15, 17 और 18:

  1. अधिनियम की धारा 15, ‘आतंकवादी कृत्यों’ से संबंधित अपराधों को आरोपित करती है।
  2. धारा 17 के तहत आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाने पर दण्डित करने का प्रावधान किया गया है।
  3. धारा 18, के अंतर्गत ‘आतंकवादी कृत्य करने हेतु साजिश आदि रचने’ या आतंकवादी कृत्य करने हेतु तैयारी करने वाले किसी भी कार्य’ संबंधी अपराधों के लिए आरोपित किया जाता है।

अदालत द्वारा की गई प्रमुख टिप्पणियां:

  1. “आतंकवादी अधिनियम” (Terrorist Act) को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
  2. अदालत ने ‘हितेंद्र विष्णु ठाकुर मामले’ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि, ‘आतंकवादी गतिविधियां’ वे होती है, जिनसे निपटना, सामान्य दंड कानूनों के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता से बाहर होता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप, ‘अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ के बारे में जानते हैं? यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई में मुख्य अंतरराष्ट्रीय उपकरण है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप की परिभाषा
  2. अधिनियम के तहत केंद्र की शक्तियां
  3. क्या ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा लागू है?
  4. 2004 और 2019 में संशोधन द्वारा किए गए बदलाव।
  5. क्या विदेशी नागरिकों को अधिनियम के तहत आरोपित किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

क्या आप सहमत हैं कि विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन अधिनियम मौलिक अधिकारों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वतंत्रता का बलिदान करना न्यायसंगत है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


शैवाल की एक ‘जलपरी’ प्रजाति की खोज

(A ‘mermaid’ species of algae discovered)

  • लगभग चार दशकों के बाद, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर शैवाल की एक नई प्रजाति की खोज की गई है।
  • शोधकर्ताओं ने इस प्रजाति का नाम ‘एसिटाबुलरिया जलकन्याका’ (Acetabularia jalakanyakae) रखा है।
  • इस प्रजाति के पादप में नाभिक सहित एक विशाल कोशिका होती है, जोकि इसकी मुख्य विशेषता है।
  • यह भारत में खोजी जाने वाली ‘जीनस एसिटाबुलरिया’ की पहली प्रजाति है।
  • ‘एसिटाबुलरिया’ वर्ग की एक अन्य विशेषता उनकी पुनर्योजी क्षमता (Regenerative Potential) होती है।

current affairs

मदुर चटाईयां

(Madur mats)

  • पश्चिम बंगाल की दो महिलाओं को ‘मदुर फर्श मैट’ बनाने में उनके उत्कृष्ट कौशल को सम्मानित करते हुए ‘राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार’ दिया गया है। जमीन पर विछाई जाने वाली येमदुर चटाईयां’ विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में ही बनाई जाती हैं।
  • मदुर चटाईयां’ बंगाली जीवन शैली का एक आंतरिक हिस्सा हैं और ये प्राकृतिक रेशों से बनाई जाती है।
  • इनके लिए ‘मदुरकथी’ (Madurkathi) के रूप में भी जाना जाता है, इन चटाईयों को अप्रैल 2018 में भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग से सम्मानित किया गया था।
  • मदुरकथी एक प्रकंद आधारित पौधा (साइपरस टेगेटम या साइपरस पैंगोरेई) है जो पूरब और पश्चिम मेदिनीपुर के जलोढ़ इलाकों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • 1744 में, नवाब अलीबर्दी खान ने इस संबंध में जमींदार जागीरदारों के लिए एक आज्ञा-पत्र जारी किया गया था जिसके तहत हर कलेक्ट्रेट में उपयोग के लिए मदुर चटाईयों’ की आपूर्ति करना अनिवार्य था।

 

एनटीपीसी द्वारा देश की सबसे बड़ी तैरती हुई सौर परियोजना का आरंभ

  • हाल ही में, नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अपने सिम्हाद्री थर्मल स्टेशन के जलाशय पर 25 मेगावाट की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर फोटो वोल्टाइक (पीवी) परियोजना की शुरूआत की है।
  • यह भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में अधिसूचित फ्लेक्सिबिलाइजेशन योजना (Flexibilisation Scheme) के तहत स्थापित की जाने वाली पहली सौर परियोजना भी है।
  • यह 2018 में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित फ्लेक्सिबिलाइजेशन योजना के तहत स्थापित होने वाली पहली सौर परियोजना भी है।
  • एक बार चालू होने के बाद, इस परियोजना की पूरी समयावधि के दौरान हर वर्ष न्यूनतम 46,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम होने और प्रति वर्ष 1,3640 लाख लीटर पानी की बचत होने की भी उम्मीद है।

‘फ्लोटिंग पावर प्लांट’ के लाभ:

  • विश्व बैंक के अनुसार, तैरते हुए सौर संयंत्र / ‘फ्लोटिंग पावर प्लांट’ (floating solar plants), विशेष रूप से उच्च जनसंख्या घनत्व वाले देशों में, जहाँ उपलब्ध भूमि के उपयोग हेतु प्रतिस्पर्धा रहती है, ‘सौर उत्पादन क्षमता’ में वृद्धि हेतु नए अवसरों का प्रतिनिधित्व करते हैं । भारत में ऐसी स्थितियां आम तौर पर पायी जाती है।
  • इस तरह के संयंत्र, स्थल-आधारित पद्धतियों की तुलना में अधिक लाभप्रद होते है और पानी के शीतलन प्रभाव और धूल की उपस्थिति कम होने के कारण बेहतर ऊर्जा-उत्पादन में सक्षम होते हैं ।
  • अन्य लाभ: चूंकि सौर पैनल, जलाशय की सतह को ढक लेते हैं और सूर्य की किरणों को अवशोषित करते हैं और साथ ही “हवा के बाष्पीकरणीय प्रभाव” को सीमित करते हैं, और वाष्पीकरण होने की वजह से पानी की बचत भी होती है।

 

गिरफ्तार करना हमेशा आवश्यक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

  • हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि कानून में गिरफ्तारी के प्रावधान का मतलब यह नहीं है कि सरकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कुचलने के लिए अंधाधुंध तरीके से इस शक्ति का उपयोग कर सकती है। हर मामले में गिरफ्तार किया जाना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदान की गई व्यक्तिगत स्वतंत्रता का दमन करता है।
  • अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, कि दंड प्रक्रिया संहिता के धारा 170 (आरोप पत्र दाखिल करते समय आरोपी को पेश करना) जैसे कुछ प्रावधानों को गिरफ्तारी के अधिकार के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

हिरासत में रखकर जांच करना कब आवश्यक होता है?

  1. जब संबंधित अपराध, एक जघन्य अपराध हो।
  2. जब गवाहों या आरोपी को प्रभावित करने की संभावना हो।

आवश्यकता:

  1. गिरफ्तार करने की शक्ति और इसका प्रयोग करने के औचित्य के बीच अंतर स्पष्ट किया जाना चाहिए।
  2. यदि गिरफ्तारी को नियमित बना दिया जाता है, तो यह व्यक्ति की प्रतिष्ठा और आत्म-सम्मान के लिए अपूरणीय क्षति हो सकती है।
  3. यदि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है तो जांच अधिकारी के लिए उसे गिरफ्तार करने की कोई बाध्यता नहीं होनी चाहिए।

 

“आरक्षण का दो राज्यों में एक साथ लाभ नहीं उठाया जा सकता है”: सुप्रीम कोर्ट

हाल ही शीर्ष अदालत ने एक फैसला सुनाते हुए कहा है, कि पुनर्गठन के बाद बने राज्यों में कोई व्यक्ति एक साथ आरक्षण के लाभ का दावा नहीं कर सकता है। क्योंकि इससे संविधान के अनुच्छेद 341(1) और 342(1) के उद्देश्य महत्वहीन हो जाएंगे।

अदालत की टिप्पणी:

  • कोई व्यक्ति पुनर्गठन के बाद बने राज्यों में से किसी एक राज्य में लाभ का दावा कर सकता है।
  • हालाँकि दूसरे राज्य में, खुले चयन में भाग लेते समय आरक्षित वर्ग के सदस्यों को प्रवासी माना जाएगा और वे आरक्षण के किसी भी लाभ का दावा किए बिना सामान्य श्रेणी में भाग ले सकते हैं।

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