HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
निम्नलिखित में से किस आंदोलन को “वन्दे मातरम आंदोलन” के नाम से भी जाना जाता है?
Correct
उत्तर: d)
‘वन्देमातरम आंदोलन’ को स्वदेशी आंदोलन के रूप में भी जाना जाता है। यह बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन था। वायसराय लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल प्रांत को दो में विभाजित कर दिया था। विभाजन के लागू होने पर बंगाल के लोगों ने 16 अक्टूबर को शोक दिवस के रूप में मनाया गया। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित गीत वंदेमातरम विभाजन विरोधी आंदोलन की बैठकों के लिए प्रार्थना गीत बन गया।
Incorrect
उत्तर: d)
‘वन्देमातरम आंदोलन’ को स्वदेशी आंदोलन के रूप में भी जाना जाता है। यह बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन था। वायसराय लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल प्रांत को दो में विभाजित कर दिया था। विभाजन के लागू होने पर बंगाल के लोगों ने 16 अक्टूबर को शोक दिवस के रूप में मनाया गया। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित गीत वंदेमातरम विभाजन विरोधी आंदोलन की बैठकों के लिए प्रार्थना गीत बन गया।
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Question 2 of 5
2. Question
बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक, राष्ट्रवादी विचारकों का एक समूह उभरा था, जिन्होंने राजनीतिक कार्यों के लिए अधिक उग्रवादी दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की थी। इस विचारधारा के मूल सिद्धांत थे:
- प्रत्यक्ष राजनीतिक कार्रवाई की आवश्यकता
- व्यक्तिगत बलिदान की आवश्यकता और एक सच्चे राष्ट्रवादी को इसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए
- राष्ट्रीय आंदोलन का लक्ष्य स्वराज
सही उत्तर कूट कीजिए:
Correct
उत्तर: c)
बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक, राष्ट्रवादी विचारकों का एक समूह उभरा था, जिन्होंने राजनीतिक कार्यों के लिए अधिक उग्रवादी दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की थी। इनमें बंगाल में राज नारायण बोस, अश्विनी कुमार दत्त, अरबिंद घोष और बिपिन चंद्र पाल; महाराष्ट्र में विष्णु शास्त्री चिपलूनकर और बाल गंगाधर तिलक; और पंजाब में लाला लाजपत राय शामिल थे। तिलक इस विचारधारा के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि के रूप में उभरे।
इस विचारधारा के मूल सिद्धांत:
विदेशी शासन के प्रति घृणा; चूंकि इससे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती थी, इसलिए भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए स्वयं ही कार्य करना चाहिए;
स्वराज राष्ट्रीय आंदोलन का लक्ष्य होगा;
प्रत्यक्ष राजनीतिक कार्रवाई की आवश्यकता;
सत्ता को चुनौती देने के लिए जनता की क्षमता में विश्वास;
व्यक्तिगत बलिदान की आवश्यकता और एक सच्चे राष्ट्रवादी को इसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
Incorrect
उत्तर: c)
बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक, राष्ट्रवादी विचारकों का एक समूह उभरा था, जिन्होंने राजनीतिक कार्यों के लिए अधिक उग्रवादी दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की थी। इनमें बंगाल में राज नारायण बोस, अश्विनी कुमार दत्त, अरबिंद घोष और बिपिन चंद्र पाल; महाराष्ट्र में विष्णु शास्त्री चिपलूनकर और बाल गंगाधर तिलक; और पंजाब में लाला लाजपत राय शामिल थे। तिलक इस विचारधारा के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि के रूप में उभरे।
इस विचारधारा के मूल सिद्धांत:
विदेशी शासन के प्रति घृणा; चूंकि इससे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती थी, इसलिए भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए स्वयं ही कार्य करना चाहिए;
स्वराज राष्ट्रीय आंदोलन का लक्ष्य होगा;
प्रत्यक्ष राजनीतिक कार्रवाई की आवश्यकता;
सत्ता को चुनौती देने के लिए जनता की क्षमता में विश्वास;
व्यक्तिगत बलिदान की आवश्यकता और एक सच्चे राष्ट्रवादी को इसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
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Question 3 of 5
3. Question
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संबंध में, “स्वदेशी” शब्द “बहिष्कार” से अलग कैसे था?
1.जहाँ स्वदेशी ने भारतीय समाज के निचले तबके को आकर्षित किया, वहीं बहिष्कार ने उच्च वर्ग को आकर्षित किया।
- बहिष्कार के विपरीत स्वदेशी मूलत: एक आर्थिक आंदोलन था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
लोगों ने ‘बहिष्कार‘ और ‘स्वदेशी‘ दोनों कार्यक्रमों को एक ही आंदोलन के हिस्से के रूप में अपनाया था। ये दो शब्द एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों का उपयोग आर्थिक और राजनीतिक उपकरणों के रूप में किया गया था। बहिष्कार का उल्लेख ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के लिए किया गया था, ताकि बंगाल में व्याप्त अत्यधिक अन्याय के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा सके। बहिष्कार एक नकारात्मक कार्यक्रम था और स्वदेशी एक सकारात्मक कार्यक्रम था। स्वदेशी का अर्थ था, विदेशी उत्पादों के मुकाबले देशी उत्पादों का उपयोग और प्रोत्साहन को बढ़ावा देना। इस प्रकार, बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलनों ने भारतीय समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से बंगाल में एक राष्ट्रीय मुद्दे पर एकजुट किया।
Incorrect
उत्तर: d)
लोगों ने ‘बहिष्कार‘ और ‘स्वदेशी‘ दोनों कार्यक्रमों को एक ही आंदोलन के हिस्से के रूप में अपनाया था। ये दो शब्द एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों का उपयोग आर्थिक और राजनीतिक उपकरणों के रूप में किया गया था। बहिष्कार का उल्लेख ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के लिए किया गया था, ताकि बंगाल में व्याप्त अत्यधिक अन्याय के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा सके। बहिष्कार एक नकारात्मक कार्यक्रम था और स्वदेशी एक सकारात्मक कार्यक्रम था। स्वदेशी का अर्थ था, विदेशी उत्पादों के मुकाबले देशी उत्पादों का उपयोग और प्रोत्साहन को बढ़ावा देना। इस प्रकार, बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलनों ने भारतीय समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से बंगाल में एक राष्ट्रीय मुद्दे पर एकजुट किया।
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Question 4 of 5
4. Question
बंगाल के विभाजन विरोधी और स्वदेशी आंदोलन के दौरान, तिलक, बिपिन चंद्र पाल और अरबिंद घोष जैसे कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया थी
- वे चाहते थे कि आंदोलन बंगाल क्षेत्र तक ही सीमित रहे
- वे विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से आगे बढ़कर एक पूर्ण राजनीतिक जन संघर्ष करना चाहते थे
सही उत्तर कूट चुनिए:
Correct
उत्तर: b)
तिलक, लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल और अरबिंद घोष के नेतृत्व में राष्ट्रवादी चाहते थे कि आंदोलन को बंगाल से बाहर देश के अन्य हिस्सों में विस्तारित जाया जाए और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से आगे बढ़कर स्वराज की प्राप्ति के लिए एक पूर्ण राजनीतिक जन संघर्ष करना चाहते थे। लेकिन उस समय कांग्रेस पर हावी नरमपंथी इसके लिए तैयार नहीं थे।
Incorrect
उत्तर: b)
तिलक, लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल और अरबिंद घोष के नेतृत्व में राष्ट्रवादी चाहते थे कि आंदोलन को बंगाल से बाहर देश के अन्य हिस्सों में विस्तारित जाया जाए और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से आगे बढ़कर स्वराज की प्राप्ति के लिए एक पूर्ण राजनीतिक जन संघर्ष करना चाहते थे। लेकिन उस समय कांग्रेस पर हावी नरमपंथी इसके लिए तैयार नहीं थे।
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Question 5 of 5
5. Question
बंगाल में स्वदेशी आंदोलन के दौरान उग्रवादियों की प्रतिक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- चरमपंथियों ने स्वदेशी और बहिष्कार के अलावा निष्क्रिय प्रतिरोध का आह्वान किया जिसमें सरकारी स्कूलों और कॉलेजों, सरकारी सेवा, अदालतों और विधान परिषदों का बहिष्कार शामिल था।
- स्वाधीनता का लक्ष्य आत्म-बलिदान से प्राप्त करना था।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
चरमपंथियों ने स्वदेशी और बहिष्कार के अलावा निष्क्रिय प्रतिरोध का आह्वान किया जिसमें सरकारी स्कूलों और कॉलेजों, सरकारी सेवाओं, अदालतों, विधान परिषदों, नगर पालिकाओं, सरकारी उपाधियों आदि का बहिष्कार शामिल होगा।
चरमपंथियों ने भारत की स्वतंत्रता के विचार को भारत की राजनीति में केंद्रीय स्थान दिया। स्वतंत्रता का लक्ष्य आत्म-बलिदान के माध्यम से प्राप्त करना था।
Incorrect
उत्तर: c)
चरमपंथियों ने स्वदेशी और बहिष्कार के अलावा निष्क्रिय प्रतिरोध का आह्वान किया जिसमें सरकारी स्कूलों और कॉलेजों, सरकारी सेवाओं, अदालतों, विधान परिषदों, नगर पालिकाओं, सरकारी उपाधियों आदि का बहिष्कार शामिल होगा।
चरमपंथियों ने भारत की स्वतंत्रता के विचार को भारत की राजनीति में केंद्रीय स्थान दिया। स्वतंत्रता का लक्ष्य आत्म-बलिदान के माध्यम से प्राप्त करना था।
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