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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 August 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. वाहन कबाड़ नीति

2. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)

3. ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. संदलित आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) सोयाबीन के आयात की अनुमति

2. आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. प्रधान मंत्री श्रम पुरस्कार

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

वाहन कबाड़ नीति


(Vehicle Scrappage Policy)

संदर्भ:

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘राष्ट्रीय ऑटोमोबाइल कबाड़ नीति’ (National Automobile Scrappage Policy) का अनावरण किया गया है।

‘वाहन कबाड़ नीति’ के बारे में:

(Vehicle Scrappage Policy)

  1. इस नीति के अनुसार, पुराने वाहनों का फिर से पंजीकरण किए जाने से पहले इनके लिए एक फिटनेस टेस्ट पास करना होगा, और 15 साल से अधिक पुराने सरकारी वाहनों तथा 20 साल से अधिक पुराने निजी वाहनों को तोड़ दिया जाएगा।
  2. हतोत्साहन उपाय के रूप में, 15 वर्ष या इससे पुराने वाहनों का फिर से पंजीकरण करने पर, इनके शुरुआती पंजीकरण से ज्यादा शुल्क लिया जाएगा
  3. नीति के तहत, पुराने वाहनों के मालिकों द्वारा पुराने और अनफिट वाहनों को हटाने के लिए प्रोत्साहन देने हेतु, निजी वाहनों पर 25% तक और व्यावसायिक वाहनों पर 15% तक रोड-टैक्स में छूट देने के लिए राज्य सरकारों से कहा जा सकता है।

महत्व:

  • वाहन स्क्रैपिंग नीति / वाहन कबाड़ नीति का उद्देश्य, पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित तरीके से अनुपयुक्त और प्रदूषणकारक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने हेतु एक पारितंत्र का निर्माण करना है।
  • यह पहल, एक चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी और आर्थिक विकास प्रक्रिया को अधिक संवहनीय और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी।
  • यह नीति, लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश भी लाएगी और 35,000 रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

नई नीति के साथ समस्याएं:

  1. ट्रक जैसे वाहनों के लिए सीमित प्रोत्साहन और खराब कीमत देने वाली अर्थनीति।
  2. पता लगाने योग्य अन्य वर्गों के वाहनों की कम संख्या।
  3. 15 साल पुरानी एक शुरुआती श्रेणी की छोटी कार को स्क्रैप करने से लगभग 70,000 रुपए का फायदा होगा, जबकि इसे बेचने पर लगभग 95,000 रुपए मिल सकते हैं। इस कारण स्क्रैपिंग करना अनाकर्षक बन जाता है।

समय की मांग:

इन सब कारणों को देखते हुए, स्क्रैपिंग नीति को पूरी तरह से लागू करने के लिए, हमें ‘जिन वाहनों का जीवन समाप्त हो चुका है, अर्थात ‘एंड ऑफ़ लाइफ व्हीकल्स’ (ELV) को सड़क से हटाने के संदर्भ में एक व्यापक योजना तैयार करनी चाहिए। माल-भाडा ट्रांसपोर्टर्स को एक पर्याप्त एवं उत्साही वित्तीय सहायता दिए जाने की आवश्यकता है। हालांकि,  यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जब तक पुराने वाहनों के बेड़े सड़क से नहीं हटाए जाएंगे, तब तक  बीएस-VI (BS-VI) वाहन लागू करने का लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पाएगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘जहाज पुनर्चक्रण’ से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय’ के बारे में जानते हैं? इसे ‘हांगकांग कन्वेंशन’ के रूप में भी जाना जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इस नीति की मुख्य विशेषताएं
  2. प्रयोज्यता
  3. नीति के तहत दिया जाने वाला प्रोत्साहन

मेंस लिंक:

‘वाहन कबाड़ नीति’ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)


संदर्भ:

केंद्र सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना, ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana:  AB-PMJAY) के तहत, अप्रैल 2020 से जुलाई 2021 तक लगभग 20.32 लाख कोविड-19 परीक्षण और 7.08 लाख उपचारों के लिए मंजूरी दी गयी थी।

इन परीक्षणों और उपचारों पर ₹2,794 करोड़ का व्यय हुआ था।

PM-JAY की प्रमुख विशेषताएं:

  1. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा / आश्वासन योजना है।
  2. यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है।
  3. कवरेज: 10.74 करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं।
  4. इस योजना में सेवा-स्थल पर लाभार्थी के लिए कैशलेस स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को उपलब्ध कराया जाता है।
  5. AB-PMJAY योजना को पूरे देश में लागू करने और इसके कार्यान्वयन हेतु ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ (National Health Authority NHA) नोडल एजेंसी है।
  6. यह योजना, कुछ केंद्रीय क्षेत्रक घटकों के साथ एक केंद्र प्रायोजित योजना है।

योजना के अंतर्गत पात्रता:

  1. इस योजना के तहत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है।
  2. इस योजना के तहत पहले से मौजूद विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है।
  3. इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं।
  4. यह एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं।
  5. इस योजना में लगभग 1,393 प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं।
  6. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है।

नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार:

  • प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) कार्यक्रम जिन राज्यों में लागू किया गया, वहां स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में, योजना से अलग रहने वाले राज्यों की तुलना में, स्वास्थ्य बीमा का अधिक विस्तार, शिशु और बाल मृत्यु दर में कमी, परिवार नियोजन सेवाओं के उपयोग में सुधार और एचआईवी / एड्स के बारे में अधिक जागरूकता आदि का अनुभव किया गया।
  • PM-JAY लागू करने वाले राज्यों में स्वास्थ्य बीमा वाले परिवारों के अनुपात में 54% की वृद्धि हुई, जबकि योजना से अलग रहने वाले राज्यों में 10% की गिरावट दर्ज की गयी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ को लागू करने की जिम्मेदारी भी ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण’ को दी गई है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आयुष्मान भारत के घटक
  2. PM JAY- मुख्य विशेषताएं
  3. पात्रता
  4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के बारे में
  5. सेहत (SEHAT) योजना

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के महत्व और क्षमताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री द्वारा ‘उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग’ (DPIIT) की ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स’ (Open Network for Digital Commerce – ONDC) पहल की समीक्षा हेतु एक बैठक की अध्यक्षता की गई थी।

ONDC क्या है?

  • डिजिटल कॉमर्स के लिए ‘ओपन नेटवर्क’ जिसे ONDC नाम दिया गया है, विश्व स्तर पर अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका उद्देश्य डिजिटल कॉमर्स को ‘एक प्लेटफॉर्म-केंद्रित मॉडल’ से एक ‘ओपन-नेटवर्क’ में परिवर्तित करना है।
  • जिस तरह से डिजिटल भुगतान डोमेन के लिए UPI होता है, उसी प्रकार भारत में ई-कॉमर्स के लिए ONDC है।
  • ONDC, खरीदारों और विक्रेताओं को डिजिटल रूप से दिखाई देने और खुले नेटवर्क के माध्यम से लेनदेन करने में सक्षम बनाएगा, चाहे वे किसी भी प्लेटफॉर्म/एप्लिकेशन का उपयोग करते हों।
  • ओएनडीसी, ई-कॉमर्स में ‘एकाधिकारों’ को समाप्त करके और एक ‘सिंगल नेटवर्क’ का निर्माण करते हुए व्यापारियों और उपभोक्ताओं को नवाचार और व्यापकता को बढ़ावा देने हेतु सक्षम बनाएगा।

अभिप्राय और उद्देष्य:

ONDC का उद्देश्य किसी विशिष्ट प्लेटफॉर्म के स्वतंत्र, ओपन नेटवर्क प्रोटोकॉल और खुले विनिर्देशों का उपयोग करते हुए ओपन सोर्स पद्धति पर विकसित ‘ओपन नेटवर्क’ को बढ़ावा देना है।

ओएनडीसी के माध्यम से, पूरी मूल्य-श्रृंखला को डिजिटाइज़ करने, संचालनों का मानकीकरण करने, आपूर्तिकर्ताओं के समेकन को बढ़ावा देने, प्रचालन-तन्त्र (logistics) में दक्षता प्राप्त करने और उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा प्रदान किए जाने संभावना है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भीम ऐप में ‘प्रमाणीकरण’ के तीन स्तर होते हैं। इन स्तरों के बारे में बताइये।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UPI क्या है?
  2. ONDC क्या है?
  3. ONDC की प्रमुख विशेषताएं।

मेंस लिंक:

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

संदलित आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) सोयाबीन के आयात की अनुमति


संदर्भ:

केंद्र सरकार ने संदलित (crushed) आनुवंशिक रूप से संशोधित / जीन संवर्द्धित (genetically modified) सोयाबीन के आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। यह संदलित सोयाबीन, पोल्ट्री पक्षियों के आहार का एक प्रमुख घटक होती है।

इस निर्णय की आवश्यकता:

पिछले डेढ़ साल में, कई विपत्तियों की वजह से पोल्ट्री उद्योग को भारी क्षति पहुँची है।

  • जनवरी 2020 में एक झूठी अफवाह फ़ैली, कि चिकन मांस खाने से कोविड-19 फैल सकता है, जिसकी वजह से इसकी मांग में काफी कमी हो गई थी।
  • एक साल बाद, ‘एवियन फ्लू’ बीमारी की वजह से पोल्ट्री उद्योग को काफी नुकसान हुआ, और इसके बाद पोल्ट्री-आहार की कीमतों में भारी वृद्धि हुई।
  • इसके अलावा, पिछले तीन-चार वर्षों में, सोया खाद्य औसतन ₹34 से 36/किलोग्राम की कीमत पर मिल रहा था। इस महीने, इसकी कीमत बढ़कर ₹96 / किलोग्राम तक हो गयी है (सोया खाद्य, आहार में मुख्य प्रोटीन घटक होता है)।

चिंताएं / आलोचनाएं:

  1. यह देखते हुए, कि भारत की नियामक प्रणाली द्वारा अभी तक ‘जीएम खाद्य पदार्थों’ (GM foods) को मंजूरी नहीं दी गयी है, पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा ‘जीन संवर्धित’ पौधे से उत्पन्न किसी खाद्य सामग्री को मानव की आहार-श्रंखला में शामिल करने की अनुमति देने पर चिंता व्यक्त की गयी है।
  2. इसके अलावा, ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’ के तहत वर्ष 1989 के जारी किए गए नियम ‘जीन संवर्धित जीवों’ के साथ-साथ उनके उत्पादों और पदार्थों पर भी लागू होते हैं।

जीन संवर्द्धित (Genetically Modified-GM) फसलें क्या हैं?

जीएम फसल, उन फसलों को कहा जाता है जिनके जीन को वैज्ञानिक तरीके से रूपांतरित किया जाता है।

  • जेनेटिक इजीनियरिंग के ज़रिये किसी भी जीव या पौधे के जीन को अन्य पौधों में डालकर एक नई फसल प्रजाति विकसित की जाती है।
  • जीन संवर्द्धित फसल में, प्राकृतिक रूप से परागण की बजाय कृत्रिम रूप से प्रविष्ट कराए हुए जीन होते हैं।

भारत में जीएम फसलों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया:

भारत में, जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (Genetic Engineering Appraisal Committee -GEAC) ‘जीन संवर्द्धित फसलों’ की वाणिज्यिक खेती की अनुमति देने के लिए शीर्ष निकाय है।

  • GEAC क्षेत्र परीक्षण प्रयोगों सहित पर्यावरण में आनुवंशिक रूप से संवर्द्धित किये गए जीवों और उत्पादों को जारी करने संबंधी प्रस्तावों की मंज़ूरी के लिये भी उत्तरदायी है।
  • अप्रमाणित GM संस्करण का उपयोग करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1989 के अंतर्गत 5 साल की जेल तथा 1 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
  • भारत में आयातित फसलों को विनियमित करने के लिए ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) अधिकृत निकाय है।

भारत में जीएम सोयाबीन और सोयाबीन बीज की स्थिति:

भारत में जीएम सोयाबीन और कैनोला तेल के आयात की अनुमति दी गयी है। जीएम सोयाबीन के बीज के आयात को भारत में अब तक मंजूरी नहीं मिली है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘पोल्ट्री वेंचर कैपिटल फंड’ (PVCF) के बारे में जानते हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट (AR6)


संदर्भ:

हाल ही में, जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change – IPCC) द्वारा ‘क्लाइमेट चेंज 2021: द फिजिकल साइंस’ शीर्षक से अपनी ‘छठी आकलन रिपोर्ट’ (Sixth Assessment Report – AR6) जारी की गयी है।

इस रिपोर्ट को तैयार करने में कई भारतीय वैज्ञानिकों ने भाग लिया है।

‘छठी आकलन रिपोर्ट’ (AR6) क्या है?

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल (IPCC) की छठी आकलन रिपोर्ट (AR6), जलवायु परिवर्तन से संबंधित वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक-आर्थिक जानकारी का आकलन करने के उद्देश्य से तैयार की जाने वाली रिपोर्टों की एक श्रृंखला में छठी रिपोर्ट है।

  • यह रिपोर्ट अतीत, वर्तमान और भविष्य की जलवायु का अवलोकन करते हुए जलवायु परिवर्तन की भौतिकी का आंकलन करती है।
  • इस रिपोर्ट में, मानव-जनित उत्सर्जन की वजह से हमारे ग्रह में होने वाले परिवर्तन और हमारे सामूहिक भविष्य के लिए इसके निहितार्थों के बारे में बताया गया है।

छठी आकलन रिपोर्ट (AR6) के प्रमुख बिंदु:

  • मौसम और जलवायु संबंधी घटनाएं – जलवायु परिवर्तन के कारण, अत्यधिक गर्मी, भारी वर्षा, आग लगने की स्थिति और सूखा, जैसी मौसम और जलवायु संबंधी घटनाएं अधिक गंभीर और नियमित होती जा रही हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, हम पहले से ही 1.5 डिग्री सेल्सियस तक वैश्विक उष्मन के करीब पहुंच चुके हैं, और हर दिन होने रहे उत्सर्जन से, जलवायु परिवर्तन के सर्वाधिक खतरनाक प्रभावों को टालने की संभावनाएं धुंधली होती जा रही हैं।
  • सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन परिदृश्यों में, कार्बन डाइऑक्साइड, ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण रहा है और रहेगा।
  • रिपोर्ट में कहा गया है, कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन – वर्ष 2030 तक आधा और वर्ष 2050 तक शून्य हो जाए – तो ग्लोबल वार्मिंग को रोका जा सकता है।
  • साथ ही, आईपीसीसी की रिपोर्ट भारत की इस दृष्टिकोण की पुष्टि करती है, कि आज विश्व जिस जलवायु संकट का सामना कर रहा है, उसका स्रोत ऐतिहासिक रूप से वृद्धिमान उत्सर्जन है।

प्रमुख चिताएं:

रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि मानव-जनित कार्रवाहियों के कारण हमारी जलवायु तेजी से बदल रही है और पहले से ही हमारे ग्रह में व्यापक परिवर्तन कर चुकी है –

  • आर्कटिक में सागरीय हिम 150 से अधिक वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर है;
  • पिछले 3,000 वर्षों की अवधि में किसी भी समय-काल की तुलना में, समुद्र का स्तर तेजी से बढ़ रहा है; तथा
  • पिछले 2,000 वर्षों की अवधि की तुलना में, वर्तमान में ‘ग्लेशियर’ अभूतपूर्व दर से घटते जा रहे हैं।

आवश्यकता:

  • इस समय सबसे बड़ी जरूरत यह है, कि सभी देश – विशेष रूप से प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं – 2020 के इस महत्वपूर्ण दशक के दौरान अपनी भूमिका निभाएं ताकि वैश्विक तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य हासिल करने हेतु, विश्व को सही मार्ग पर रखा जा सके।
  • इसी वजह से, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वर्ष 2030 तक अपने उत्सर्जन में वर्ष 2005 के स्तर से 50-52 प्रतिशत तक कटौती करने संबंधी प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी है और जलवायु संकट से निपटने के लिए पूरी संघीय सरकार को तैयार कर रहा है।
  • ग्लासगो में होने वाले 26वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) की तैयारी के बीच, यह रिपोर्ट हमें इस बात की याद दिलाती है, कि हमें विज्ञान-आधारित कार्रवाईयों के लिए कदम उठाना चाहिए।
  • वर्तमान में, विश्व के नेताओं, निजी क्षेत्र और व्यक्तियों को, तत्काल रूप से, एक साथ कार्य करने की आवश्यकता है, तथा इस दशक और उसके बाद, हमारे ग्रह और हमारे भविष्य की सुरक्षा के लिए जो कुछ भी जरूरी है वह करने की जरूरत है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि IPCC की स्थापना संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा की गई थी? इसके कार्य क्या हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

प्रधान मंत्री श्रम पुरस्कार

हाल ही में, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 के लिए प्रधान मंत्री श्रम पुरस्कारों (PMSA) की घोषणा की गयी है।

इस साल प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए गए हैं। ये श्रेणियां हैं:

  1. श्रम भूषण पुरस्कार, जिसमें 1,00,000/- रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है,
  2. श्रम वीर / श्रम वीरांगना पुरस्कार, जिसमें 60,000/- रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है, और
  3. श्रम श्री / श्रम देवी पुरस्कार, जिसमें प्रत्येक को 40,000/- रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।

पुरस्कारों के बारे में:

  • प्रधान मंत्री श्रम पुरस्कारों का उद्देश्य, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के संगठनों में काम करने वालों द्वारा किए गए उत्कृष्ट योगदानों का सम्मान करना है।
  • यह पुरस्कार, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 में परिभाषित एवं केंद्र एवं राज्य सरकारों के विभागीय उपक्रमों, केन्द्र और राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र में नियुक्त और कार्यरत न्यूनतम 500 कामगारों को को प्रदान किए जाएंगे।

पात्रता:

  • ये पुरस्कार श्रमिकों को उनके विशिष्ट प्रदर्शन, नवाचार क्षमताओं, उत्पादकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और असाधारण साहस व बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करने के लिए दिए जाते हैं।
  • ये उन कामगारों को भी दिए जाते हैं जिन्होंने प्रत्युत्पन्न मति और असाधारण साहस दिखाया हो और अपने कर्तव्य के पालन में कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपना जीवन समर्पित कर दिया हो।
  • रूटीन सेवा कार्यों में लगे कामगार, इn पुरस्कारों के लिए पात्र नहीं होंगे।

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